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	<title>Arihant Kumar Jain जैन समाज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Arihant Kumar Jain जैन समाज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>विश्व पर्यावरण दिवस पर उदयपुर में वृक्षारोपण: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में ताराचंद मीणा कलेक्टर उदयपुर एवम् आमंत्रित अतिथियों द्वारा किया गया </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jun 2023 08:34:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस पर णमोकार सेवा संस्थान के तत्वाधान में सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर द्वारा प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य शताब्दी महोत्सव उपलक्ष्य में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम सरस डेयरी गमेर बाग से बलीचा मंदिर तक किया गया। पर्यावरण का संरक्षण कर आप अपने जीवन का संरक्षण कर सकते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विश्व पर्यावरण दिवस पर णमोकार सेवा संस्थान के तत्वाधान में सकल दिगंबर जैन समाज उदयपुर द्वारा प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य शताब्दी महोत्सव उपलक्ष्य में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम सरस डेयरी गमेर बाग से बलीचा मंदिर तक किया गया। पर्यावरण का संरक्षण कर आप अपने जीवन का संरक्षण कर सकते हैं <span style="color: #ff0000;">आचार्य श्री वर्धमान सागर जी</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उदयपुर। </strong>पर्यावरण दिवस पर वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा को संबोधित कर बताया कि प्राकृतिक जीवन जीने के लिए वृक्षों के संरक्षण का दिन है ।विश्व पर्यावरण दिवस में पृथ्वी जल ,अग्नि ,वायु ,और वनस्पति के संरक्षण का सामूहिक दिवस पर्यावरण दिवस है। वृक्षों के बिना आप सांस नहीं ले सकते पानी के बिना जीवन व्यर्थ है। जैन धर्म ही नहीं सभी धर्मों में पर्यावरण के संरक्षण का उपदेश दिया गया है</p>
<p>ब्रह्मचारी गजू भैय्या, राजेश पंचोलिया अनुसार पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री ने आगे बताया पृथ्वी ,जल, अग्नि ,वायु और वनस्पति सभी में जैन धर्म अनुसार ऐकेंद्रीय जीव होते हैं। इनकी रक्षा से आप पुण्य का कार्य कर सकते हैं। पर्यावरण के संरक्षण के अभाव में जीवन कठिन हो जाएगा जीवन को सुरक्षित करने के लिए पर्यावरण का संरक्षण जरूरी है ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने एक सूत्र बताया कि मनुष्य को लज्जावान होना चाहिए जब आप लज्जावान रहेंगे तो हर कार्य समझदारी और विवेक से करेंगे तब प्रकृति का संरक्षण अपने आप होगा। आचार्य श्री ने बताया कि आप पर्यावरण की रक्षा करते हैं, इनका संतुलन बनाकर रखते हैं तो हम स्वस्थ रहेंगे और हमें हॉस्पिटल जाने की जरूरत भी नहीं होगी प्रकृति का संरक्षण कर आप अपने जीवन को संरक्षित कर सकते हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45540" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0015.jpg" alt="" width="720" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0015.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0015-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0015-461x1024.jpg 461w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0015-691x1536.jpg 691w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></p>
<p>मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने पर्यावरण दिवस पर बताया कि आपको वृक्ष की भाषा समझने की जरूरत है ।वृक्ष से प्राप्त होने वाली वायु ,प्राणवायु और अमृतवाणी है, यही जिनवाणी है। आपने पर्यावरण दिवस को णमोकार मंत्र णमोकार दिवस बताते हुए अनेक उदाहरण दिए। वनस्पति वृक्ष से भूखे रोटी, कपड़े ,पानी ,घर आपके जीवन यापन की अनेक सामग्री वृक्ष के माध्यम से मिलती है। वृक्ष ही संसार को जीवित रखता है।आचार्य श्री शांति सागर जी भी प्रवचन में वृक्ष का महत्व बता कर संरक्षण का उपदेश देते थे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45541" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0014.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0014.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0014-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0014-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0014-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230605-WA0014-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>संघस्थ शिष्या आर्यिका श्री महायश मति जी ने अपने प्रवचन में बताया कि कर्म का फल सुख और दुख के रूप में हमें प्राप्त होता है वनस्पति एकेंद्रीय जीव है वृक्ष कटने से धरती एवम् प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है ।माताजी ने वृक्ष का महत्व बताते हुए बताया कि हमें वृक्ष का महत्व लाभ और उपयोगिता को समझना होगा वृक्ष से प्राण वायु, शुद्ध हवा ,पानी का संरक्षण होता है।वृक्ष जीवन का आधार , धरती का श्रंगार है इससे मूल्यवान औषधि ,शीतल छांव ,फल एवम् अन्य उपयोगी सामग्री प्राप्त होती हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं चित्र का अनावरण किया गया। वृक्षारोपण पोस्टर का विमोचन आचार्य श्री के सानिध्य में रघुवीर सिंह मीणा पूर्व सांसद, ताराचंद मीणा कलेक्टर उदयपुर, पारस सिंघवी उप महापौर नगर निगम ,शांतिलाल वेलावत अध्यक्ष सकल दिगंबरजैन समाज ,मुकेश जैन संस्थापक णमोकार सेवा संस्थान एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा किया गया।</p>
<p>इस अवसर पर ताराचंद मीणा कलेक्टर ने अपने उद्बोधन में विश्व पर्यावरण कार्यक्रम जनहित का लोकोपयोगी कार्यक्रम है ऐसे कार्यक्रम जागरूकता का संदेश देते हैं। पर्यावरण का संरक्षण सभी का सामूहिक दायित्व है इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे</p>
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		<title>प्राचीन ‘प्राकृत भाषा’ पर आधारित :  रिसर्च डॉक्युमेंट्री फिल्म संस्कार भारती के सिने टॉकीज कार्यक्रम में दिखाई गई </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Feb 2023 10:25:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Arihant Kumar Jain जैन समाज]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई। संस्कार भारती कोकण प्रान्त ‘सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि’ के तत्वावधान में प्रति माह के अंतिम शनिवार को आयोजित किए जा रहे सिने जगत से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आठवां सप्ताह था, जिसमें डॉ. अरिहन्त कुमार जैन द्वारा निर्देशित ‘प्राकृत भाषा &#8211; एक प्राचीन समृद्ध परम्परा’ नामक एक रिसर्च डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुंबई।</strong> संस्कार भारती कोकण प्रान्त ‘सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि’ के तत्वावधान में प्रति माह के अंतिम शनिवार को आयोजित किए जा रहे सिने जगत से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आठवां सप्ताह था, जिसमें डॉ. अरिहन्त कुमार जैन द्वारा निर्देशित ‘प्राकृत भाषा &#8211; एक प्राचीन समृद्ध परम्परा’ नामक एक रिसर्च डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग की गयी। यह कार्यक्रम 25 फरवरी 2023 को शाम 6 बजे कला क्षेत्र स्टूडियो, आराम नगर पार्ट 2., कॉटेज नंबर 210. वर्सोवा, (अंधेरी वेस्ट) में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम का प्रारम्भ संस्कार भारती के वरिष्ठ सदस्य हरि कुलकर्णी, अरुण शेखर एवं डॉ. अरिहन्त जैन ने भारतीय परंपरानुसार दीप प्रज्वलन से किया। तत्पश्चात कल्याणी कुमारी ने सभी का स्वागत करते हुए सभी का परिचय दिया एवं कार्यक्रम की संक्षिप्त जानकारी दी। अरुण शेखर ने डॉ. अरिहन्त जी का परिचय देते हुए, संस्कार भारती के कार्यक्षेत्र पर प्रकाश डाला और वर्तमान समाज के उत्थान में भारतीय सिनेमा की क्या उपयोगिता हो सकती है, उस पर अपने विचार रखे। इसके साथ ही संस्कार भारती कोकण प्रान्त सिने टॉकीज 2022 के कालीना महाविद्यालय में हुए त्रिदिवसीय कार्यक्रम की झलकियां भी दिखाई गईं। इसके पश्चात् रिसर्च डॉक्युमेंट्री फिल्म &#8220;प्राकृत भाषा- एक प्राचीन समृद्ध परंपरा&#8221; को प्रदर्शित किया गया, जो कि कर्नाटक स्थित श्रवणबेलगोला के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्त्व एवं प्राकृत भाषा पर आधारित है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38877" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM.jpeg" alt="" width="1600" height="901" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-300x168.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-1024x577.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-768x432.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-1536x865.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-990x557.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-1320x743.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-470x264.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-640x360.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-215x120.jpeg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/WhatsApp-Image-2023-02-27-at-3.52.01-PM-414x232.jpeg 414w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p><strong>यशोगाथा श्रवणबेलगोला की</strong></p>
<p>श्रवणबेलगोला वह स्थान है, जहां 1000 वर्षों से भी अधिक समय से भगवान गोम्मटेश्वर बाहुबली की 57 फीट ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थित है। यह जैन श्रमण परंपरा एवं संस्कृति का अप्रतिम तीर्थ है, जिसकी यशोगाथा यहां पाए गए शताधिक प्राचीन प्राकृत शिलालेखों में अंकित है। श्रवणबेलगोला के जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चरुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी की प्रेरणा से वहां स्थित &#8216;राष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन और अनुसंधान संस्थान&#8217; के द्वारा प्राचीन शिलालेखों, हस्तलिखित पाण्डुलिपियों आदि का संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य चल रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े जाने-माने विशेषज्ञों ने फिल्म के विषय, स्क्रिप्ट, फिल्मांकन, निर्देशन और प्रस्तुति को एक स्वर में सराहा एवं डॉ. अरिहन्त को इस हेतु बधाई दी। यह फिल्म हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में भी प्रदर्शित हो चुकी है।</p>
<p><strong>दिया प्रश्नों का समाधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रश्नोत्तरी चर्चा सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें फिल्म के विषय से संबन्धित प्रश्न पूछे गए, जिनका डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक डॉ. अरिहन्त जी ने सारगर्भित समाधान किया । उन्होंने बताया कि प्राकृत भाषा सर्वप्राचीन भाषा है, जो कि अनेक शताब्दियों तक जनभाषा रही है और अनेक भारतीय भाषाओं की जननी है। यह भाषा जिस भी प्रांत में गयी, उस जगह के अनुरूप ढल गई और इसके भी कई प्रकार हो गए। उन्होंने बताया कि कलिंग नरेश सम्राट खारवेल एवं सम्राट अशोक के समय इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त था और यही कारण है कि अशोक के जितने भी शिलालेख हैं, वे प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में हैं। साथ ही उन्होंने उड़ीसा स्थित खारवेल के सर्वप्राचीन हाथीगुंफा प्राकृत शिलालेख का प्रमाण देते हुए बताया कि उसमें यह लिखा है कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर इस देश का नाम ‘भारतवर्ष’ पड़ा। इसके साथ ही प्राकृत के विपुल साहित्य पर भी चर्चा की और बताया कि ऐसा कोई भी विषय अछूता नहीं है, जिसका सृजन प्राकृत साहित्य में न हुआ हो। कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था कि वे प्राकृत भाषा एवं साहित्य से प्रथम बार परिचित हो सके।</p>
<p><strong>एक परिचय</strong></p>
<p>डॉ. अरिहन्त, क.जे. सोमैया इंस्टीट्यूट ऑफ धर्मा स्टडीस, सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वैश्विक स्तर पर प्राकृत भाषा की समृद्ध परंपरा को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से अङ्ग्रेज़ी में प्रकाशित ‘Prakrit Times International Newsletter’ के आप संपादक हैं । आपके इस अभिनव कार्य के लिए नेशनल मीडिया फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा हाल ही में आपको ‘नेशनल गौरव अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।</p>
<p><strong>शोध की संभावनाएं</strong></p>
<p>समापन सत्र में श्रीहरि कुलकर्णी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ.अरिहन्त के माध्यम से आज हम सभी प्राकृत भाषा एवं साहित्य के माहात्म्य से करीब से परिचित हो पाये हैं, जिसके विपुल साहित्य पर शोध की अपार संभावनाएं हैं। इस कार्यक्रम में फिल्म, साहित्य, लेखन, अभिनय और रंगभूमि के क्षेत्र से जुड़े कई नामी गिरामी हस्तियां उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन कल्याणी कुमारी ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अरुण शेखर, जगदीश निषाद, ज्योति, कल्याणी कुमारी का महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा।</p>
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