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	<title>Ambah श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Ambah श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अहिंसा और सत्य के संदेशों के साथ गूंजा मंच, विद्वानों ने दिए प्रेरक विचार : महावीर जयंती पर जैन बगीची में सजी सांस्कृतिक संध्या </title>
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		<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:56:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर जैन समाज अंबाह, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एवं जैन मिलन अंबाह के तत्वावधान में बीती रात जैन बगीची में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक रंग और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर जैन समाज अंबाह, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एवं जैन मिलन अंबाह के तत्वावधान में बीती रात जैन बगीची में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक रंग और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह</strong>। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर जैन समाज अंबाह, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप एवं जैन मिलन अंबाह के तत्वावधान में बीती रात जैन बगीची में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक रंग और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में समाजजन, महिलाएं, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात मंच पर भगवान महावीर के जीवन, त्याग, तप और उनके सिद्धांतों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का क्रम प्रारंभ हुआ। राजुल जैन, साक्षी जैन, शैंकी जैन, सिमरन जैन एवं राखी जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने अभिनय, नृत्य और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से भगवान महावीर के जीवन-दर्शन को जीवंत कर दिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान आकर्षक मंच सज्जा, प्रभावी प्रकाश व्यवस्था और सुसज्जित ध्वनि प्रणाली भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर मयूर बैंड, इटावा के कलाकारों ने भी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सांस्कृतिक कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए भजन और नृत्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहे। “मेरे महावीर झूले पालना”, “बजे कुंडलपुर में बधाई”, “वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है”, “महावीर तुम्हारा क्या कहना”, “वीर प्रभु तुम हो महान”, “जय-जय वर्धमान प्रभु”, “अहिंसा के दाता महावीर”, “महावीर आए द्वार हमारे”, “प्रभु वर्धमान का जयकारा”, “शांति के दूत महावीर” तथा “वर्धमान वंदना” जैसे भजनों पर प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम—को प्रभावी रूप से समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ समाजसेवी नरेश जैन ‘गुरु’ एवं शिक्षक वीरेंद्र जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी संस्कृति और संस्कारों के बल पर विश्व को शांति और सहअस्तित्व का संदेश दे रहा है। जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और हिंसा का वातावरण बना हुआ है, ऐसे समय में भगवान महावीर की शिक्षाएं मानवता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वहीं समाजसेवी महेश चंद जैन (एमपीईबी) ने कहा कि आज विश्व अनेक संकटों से गुजर रहा है, जिनमें पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक असमानता और नैतिक पतन प्रमुख हैं। ऐसे समय में हमारे तीर्थंकरों की शिक्षाएं न केवल मार्गदर्शक हैं, बल्कि समाधान का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों में निहित है। आधुनिकता जहां शरीर है, वहीं आध्यात्मिकता उसकी आत्मा है। यदि जीवन में त्याग, संयम और सदाचार का समावेश नहीं होता, तो बड़े से बड़ा विचार भी निष्प्रभावी हो जाता है। यही जीवन-दृष्टि भगवान महावीर ने सदियों पहले मानव समाज को प्रदान की थी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आयोजन संयोजक संतोष जैन ने अपने संबोधन में कहा कि जैन धर्म का मूल उद्देश्य विश्व में सुख, शांति और आनंद की स्थापना करना है। आज मानवता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे महावीर और महाविनाश के बीच चयन करना है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन-दर्शन युगों-युगों से मानवता का मार्गदर्शन करता आया है और आगे भी करता रहेगा। यदि हम उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार लें, तो पर्यावरण संकट, ग्लोबल वार्मिंग और सामाजिक तनाव जैसी समस्याओं का समाधान सहज रूप से संभव हो सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि भगवान महावीर का जन्म केवल एक व्यक्ति का जन्म नहीं, बल्कि समस्त सद्गुणों, नैतिक मूल्यों और मानवता के मंगल का प्रतीक है। उन्होंने समाज को जातिवाद, भेदभाव और कुरीतियों से मुक्त करने का संदेश दिया तथा वैभव से वैराग्य की ओर अग्रसर होकर त्याग और तपस्या का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने हजारों वर्ष पहले थे और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष एवं संयोजक संतोष जैन ने सभी उपस्थित जनों, सहयोगकर्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। लगभग चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में लकी ड्रा के माध्यम से आकर्षक पुरस्कार वितरित किए गए तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाली बालिकाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में समाज के अनेक सदस्यों का विशेष योगदान रहा, जिनकी सराहना की गई।</p>
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		<title>श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में रातभर गूंजे णमोकार महामंत्र : भगवान महावीर की वंदना से पूरा परिसर गूंज उठा </title>
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		<pubDate>Wed, 01 Jan 2025 14:50:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंबाह। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष अमित जैन टकसारी और उनकी कार्यकारिणी द्वारा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में नव वर्ष की रात्रि णमोकार महामंत्र पाठ का जाप किया गया। शाम 7 बजे पूजा-अर्चना के बाद णमोकार मंत्र का जाप शुरू किया गया। इस दौरान भगवान महावीर की वंदना से पूरा परिसर गूंज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अंबाह।</strong> दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष अमित जैन टकसारी और उनकी कार्यकारिणी द्वारा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में नव वर्ष की रात्रि णमोकार महामंत्र पाठ का जाप किया गया। शाम 7 बजे पूजा-अर्चना के बाद णमोकार मंत्र का जाप शुरू किया गया। इस दौरान भगवान महावीर की वंदना से पूरा परिसर गूंज उठा। यह पाठ देर रात्रि नव वर्ष के आगमन तक किया गया, जिससे पूरे मंदिर का परिसर वातावरण धर्ममय हो गया।</p>
<p>दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष अमित जैन टकसारी ने बताया कि णमोकार महामंत्र को जैन धर्म का परम पवित्र और अनादि मूल मंत्र माना जाता है। इसमें किसी व्यक्ति का नहीं, किंतु संपूर्ण रूप से विकसित और विकासमान विशुद्ध आत्मस्वरूप का दर्शन, स्मरण, चिंतन, ध्यान एवं अनुभव किया जाता है। इसलिए यह अनादि और अक्षय स्वरूपी मंत्र है। कुलदीप जैन ने कहा कि यह लोकोत्तर मंत्र है। यह मंत्र णमोकार मंत्र बहुत आत्म-सहायक है। आत्म विशुद्धि और मुक्ति के लिए नियमित रूप से णमोकार मंत्र का जाप करना चाहिए।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है</strong></p>
<p>संतोष जैन ने बताया कि लौकिक मंत्र आदि सिर्फ लौकिक लाभ पहुंचाते हैं, किंतु लोकोत्तर मंत्र लौकिक और लोकोत्तर दोनों कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए णमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है। णमोकार-स्मरण से अनेक लोगों के रोग, दरिद्रता, भय, विपत्तियां दूर होने की अनुभव सिद्ध घटनाएं सुनी जाती हैं। मन चाहे काम आसानी से बन जाने के अनुभव भी सुने हैं। अतः यह निश्चित रूप में माना जा सकता है कि णमोकार मंत्र हमें जीवन की समस्याओं, कठिनाईंयों, चिंताओं, बाधाओं से पार पहुंचाने में सबसे बड़ा आत्म-सहायक है। इसलिए इस मंत्र का नियमित जाप करना बताया गया है।</p>
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		<title>भगवान शांतिनाथ की पूजा अर्चना कर संसार में: सुख शांति समृद्धि की कामना की </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jan 2025 14:48:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व शांति सुख-समृद्धि की कामना के लिए बुधवार को विधि-विधान से भगवान शांतिनाथ के विधान का आयोजन हुआ। पढ़िए अंबाह की यह खबर&#8230; अंबाह। जैन अतिशय क्षेत्र श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सिहोनिया में विश्व शांति सुख समृद्धि की कामना के लिए बुधवार को विधि-विधान से भगवान शांतिनाथ के विधान का आयोजन हुआ। इस दौरान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व शांति सुख-समृद्धि की कामना के लिए बुधवार को विधि-विधान से भगवान शांतिनाथ के विधान का आयोजन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> जैन अतिशय क्षेत्र श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर सिहोनिया में विश्व शांति सुख समृद्धि की कामना के लिए बुधवार को विधि-विधान से भगवान शांतिनाथ के विधान का आयोजन हुआ। इस दौरान श्रीजी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। इस दौरान मंदिर कमेटी के प्रमुख आशीष जैन ‘सोनू‘ ने विधान का महत्व बताया।</p>
<p><strong>श्रीजी का अभिषेक एवं विधान </strong></p>
<p>इससे पहले सुबह छह बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। साढ़े छह बजे श्रीजी का अभिषेक एवं भगवान शांतिनाथ का विधान संपन्न कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के जयकारे लगाये। जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।</p>
<p><strong>शांति धारा विसर्जन </strong></p>
<p>आशीष जैन सोनू ने कहा कि सभी धार्मिक और अनुष्ठान में भगवान शांतिनाथ की पूजा अर्चना की जाती है, क्योंकि 16 तीर्थकर भगवान में शांतिनाथ का शासन काल सबसे ज्यादा समय का रहा। भगवान के अभिषेक के बाद शांति धारा कराई जाती है। पूजा स्थापना के बाद विधान होता है, जिसमें भगवान शांतिनाथ का स्मरण किया जाता है। पूजा का विसर्जन किया जाता है, तब शांति धारा विसर्जन किया जाता है। धार्मिक आयोजन में शांति विधान की अपनी अलग महिमा है। इसके माध्यम से श्रद्धालु अपने पापों का नाश कर पुण्य का संचय कर सकते है</p>
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		<title>स्वर्गीय नेमीचंद जैन की पुण्यतिथि पर कुपोषण वार्ड में वितरित किये गए फल एवं खाद्य सामग्री : विभिन्न सेवा कार्यों का आयोजन भी किया गया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/fruits_and_food_items_were_distributed_in_the_malnutrition_ward_on_the_death_anniversary_of_late_nemichand_jain/</link>
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		<pubDate>Wed, 01 Jan 2025 14:36:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर पालिका के पूर्व एल्डरमैन एवं भाजपा के मीडिया प्रभारी अजय जैन द्वारा अपने पिता स्वर्गीय नेमीचंद जैन की पुण्यतिथि पर सरकारी अस्पताल के कुपोषण वार्ड में जाकर जरूरतमंद मरीजों एवं बच्चों को फल एवं खाद्य सामग्री के पैकेट्स वितरित किए गए। पढ़िए एक रिपोर्ट&#8230; अंबाह। नगर पालिका के पूर्व एल्डरमैन एवं भाजपा के मीडिया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर पालिका के पूर्व एल्डरमैन एवं भाजपा के मीडिया प्रभारी अजय जैन द्वारा अपने पिता स्वर्गीय नेमीचंद जैन की पुण्यतिथि पर सरकारी अस्पताल के कुपोषण वार्ड में जाकर जरूरतमंद मरीजों एवं बच्चों को फल एवं खाद्य सामग्री के पैकेट्स वितरित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए एक रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> नगर पालिका के पूर्व एल्डरमैन एवं भाजपा के मीडिया प्रभारी अजय जैन द्वारा अपने पिता स्वर्गीय नेमीचंद जैन की पुण्यतिथि पर सरकारी अस्पताल के कुपोषण वार्ड में जाकर जरूरतमंद मरीजों एवं बच्चों को फल एवं खाद्य सामग्री वितरित की गई। इस अवसर पर विभिन्न सेवा कार्यों का आयोजन भी किया गया।</p>
<p>पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में स्वर्गीय नेमीचंद जैन का पुण्य स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। फल वितरण के इस कार्यक्रम में डॉक्टर सुधीर आचार्य, अजय जैन पत्रकार, सोनू गोयल, महेंद्र सखवार, मनीष अग्रवाल, आशीष शर्मा, कीर्ति राजावत, भोला शर्मा, दीपक जमहोरिया सहित अनेक लोग मौजूद थे।</p>
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		<title> निर्वाण लाडू चढ़ाने वाले भक्तों का लगा तांता : भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव धूमधाम से मनाया गया </title>
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		<pubDate>Sun, 03 Nov 2024 05:19:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर का निर्वाण लाडू बड़े भक्ति भाव से चढ़ाया गया। सुबह से ही अंबाह के सभी जैन मंदिरों में भक्तों का ताता लगा रहा, जो दर्शन के लिए और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर का निर्वाण लाडू बड़े भक्ति भाव से चढ़ाया गया। सुबह से ही अंबाह के सभी जैन मंदिरों में भक्तों का ताता लगा रहा, जो दर्शन के लिए और निर्वाण लाडू चढ़ाने आए थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर का निर्वाण लाडू बड़े भक्ति भाव से चढ़ाया गया। सुबह से ही अंबाह के सभी जैन मंदिरों में भक्तों का ताता लगा रहा, जो दर्शन के लिए और निर्वाण लाडू चढ़ाने आए थे।</p>
<p>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का निर्वाण कार्तिक अमावस्या को हुआ था। इस पावन महोत्सव के अवसर पर श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, चुंगी नाका पर जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साह और भक्ति के साथ अभिषेक, शांति धारा, महावीर भगवान की पूजा, और गौतम गणधर की पूजा की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69222" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-03-at-9.57.41-AM.jpeg" alt="" width="864" height="1152" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-03-at-9.57.41-AM.jpeg 864w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-03-at-9.57.41-AM-225x300.jpeg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/WhatsApp-Image-2024-11-03-at-9.57.41-AM-768x1024.jpeg 768w" sizes="(max-width: 864px) 100vw, 864px" />महावीराष्टक और निर्वाण कांड के पाठ के बाद निर्वाण लाडू चढ़ाने के साथ ही विश्व कल्याण की प्रार्थना की गई। इसके बाद, श्रावक-श्राविकाओं ने सभी वेदियों और मानस्तंभों पर जाकर भगवान के दर्शन किए। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी के प्रमुख गणधर इंद्रभूति गौतम गणधर को भी मध्यान्ह काल में केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, जिससे दिव्य ध्वनि का घोष हुआ। शाम को, श्री महावीर भगवान की मंगलमय महाआरती के साथ दीपावली का त्यौहार दीप प्रज्वलित कर मनाया गया।</p>
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		<title>31 फुट ऊंची प्रतिमा की गई स्थापित :  भगवान शांतिनाथ का 1008 कलशों से महामस्तकाभिषेक </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Sep 2024 08:51:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[क्षेत्र के प्रसिद्ध अतिशय जैन तीर्थ क्षेत्र सिहोनियां जी में स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में जैन संत परमपूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य पूज्य मुनिश्री शिवानन्द जी महाराज और मुनि श्री प्रश्मानन्द जी महाराज के सानिध्य में जैन धर्म के 16वें तीर्थकर भगवान शांतिनाथ की 31 फुट ऊंची प्रतिमा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>क्षेत्र के प्रसिद्ध अतिशय जैन तीर्थ क्षेत्र सिहोनियां जी में स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में जैन संत परमपूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य पूज्य मुनिश्री शिवानन्द जी महाराज और मुनि श्री प्रश्मानन्द जी महाराज के सानिध्य में जैन धर्म के 16वें तीर्थकर भगवान शांतिनाथ की 31 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई। जयपुर से आई इस प्रतिमा को विधिविधान से शोभा यात्रा और पूजा-अर्चना के बाद क्रेन के माध्यम से मंदिर परिसर में विराजमान किया गया।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> क्षेत्र के प्रसिद्ध अतिशय जैन तीर्थ क्षेत्र सिहोनियां जी में स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में जैन संत परमपूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य पूज्य मुनिश्री शिवानन्द जी महाराज और मुनि श्री प्रश्मानन्द जी महाराज के सानिध्य में जैन धर्म के 16वें तीर्थकर भगवान शांतिनाथ की 31 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई। जयपुर से आई इस प्रतिमा को विधिविधान से शोभा यात्रा और पूजा-अर्चना के बाद क्रेन के माध्यम से मंदिर परिसर में विराजमान किया गया। इस भव्य आयोजन में देशभर के जैन धर्मावलंबी शामिल हुए।</p>
<p>यह प्राचीन जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र के रूप में देश-विदेश में अपनी विशेष पहचान बना चुका है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अंबाह, जिनेश कुमार जैन और महेंद्र जैन ने 125 टन वजनी इस प्रतिमा की विधिविधान से पूजा-अर्चना कर बैंड-बाजों की मधुर ध्वनि के बीच स्थापित कराई। इस दौरान विधानाचार्य ने पूजा-अर्चना और स्थापना की प्रक्रिया पूर्ण कराई। भगवान शांतिनाथ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा और भजनों की धुनों पर धर्मावलंबी झूम उठे। इस अनुष्ठान में महामस्तिकाभिषेक और श्री शांतिनाथ महामंडल विधान महोत्सव भी संपन्न हुआ। यहां 1000 वर्ष पुरानी भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ और भगवान अरहनाथ की मनोहारी खड्गासन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से अभिषेक किया गया। केसरिया वस्त्र धारण किए हुए श्रद्धालु तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का अभिषेक करने के लिए उतावले हो रहे थे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-67086" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-23-at-2.18.59-PM.jpeg" alt="" width="864" height="1152" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-23-at-2.18.59-PM.jpeg 864w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-23-at-2.18.59-PM-225x300.jpeg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/WhatsApp-Image-2024-09-23-at-2.18.59-PM-768x1024.jpeg 768w" sizes="(max-width: 864px) 100vw, 864px" />जैन तीर्थ हमारी संस्कृति का प्रतीक</strong></p>
<p>आयोजन में युगल मुनिराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे का तिलक होते हैं। प्राचीन तीर्थ हमारी धरोहर हैं, जिनकी कीमत केवल श्रद्धालुओं द्वारा की गई अनंत श्रद्धाभक्ति से पहचानी जा सकती है।</p>
<p><strong>इंद्रों का कलशों से अभिषेक</strong></p>
<p>महोत्सव में मंत्रोच्चारण के साथ इंद्रों ने कलशों में शुद्ध जल भरकर भगवान जिनेंद्र का जयकारों के साथ अभिषेक किया। महामंडल विधान में इंद्र-इंद्राणियों ने पीले वस्त्र धारण कर सिर पर मुकुट और गले में माला पहनकर भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में दिल्ली, मुरार, अजमेर, अंबाह, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, घाटीगांव, डबरा, इटावा, गोरमी आदि जगहों के श्रद्धालुओं ने युगल जैन मुनि को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।</p>
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		<title>भाद्रपद का महीना जैन धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र : क्षमा मांगना और क्षमा करना वीरों का कार्य है-.सौरभ जैन </title>
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		<pubDate>Sat, 21 Sep 2024 15:24:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आजकल आप अखबार और सोशल मीडिया पर ‘पर्यूषण पर्व’, ‘क्षमावाणी पर्व’, ‘दशलक्षण पर्व’ और ‘सम्वत्सरी’ के बारे में पढ़-देख रहे होंगे। लोग सालभर की गलतियों और भूल के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांग रहे हैं तो कुछ लोग व्रत-तप-संयम में लीन होकर आत्मसाधना में जुटे हैं। सौरभ जैन ने बताया कि क्षमा मांगना और क्षमा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> आजकल आप अखबार और सोशल मीडिया पर ‘पर्यूषण पर्व’, ‘क्षमावाणी पर्व’, ‘दशलक्षण पर्व’ और ‘सम्वत्सरी’ के बारे में पढ़-देख रहे होंगे। लोग सालभर की गलतियों और भूल के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांग रहे हैं तो कुछ लोग व्रत-तप-संयम में लीन होकर आत्मसाधना में जुटे हैं। सौरभ जैन ने बताया कि क्षमा मांगना और क्षमा करना वीरों का कार्य है। इसके लिए बड़ा हृदय चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> आजकल आप अखबार और सोशल मीडिया पर ‘पर्यूषण पर्व’, ‘क्षमावाणी पर्व’, ‘दशलक्षण पर्व’ और ‘सम्वत्सरी’ के बारे में पढ़-देख रहे होंगे। लोग सालभर की गलतियों और भूल के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांग रहे हैं तो कुछ लोग व्रत-तप-संयम में लीन होकर आत्मसाधना में जुटे हैं। सौरभ जैन ने बताया कि क्षमा मांगना और क्षमा करना वीरों का कार्य है। इसके लिए बड़ा हृदय चाहिए।</p>
<p><strong>क्या है, जैन समाज के इन महत्वपूर्ण पर्वों का मतलब-</strong></p>
<p>भादों (भाद्रपद) का महीना जैन धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र है। जैन समुदाय के दोनों संप्रदाय- दिगंबर और श्वेतांबर, के लिए यह पूरा महीना आत्मशुद्धि और सार्वभौम क्षमा को समर्पित है। भादों के महीने का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है- पर्यूषण, जो श्वेतांबर जैनों के लिए 8 और दिगम्बर जैनों के लिए 10 दिनों का होता है। पर्यूषण का मतलब है- ख़ुद के पास आना। पर्यूषण पर्व तप-त्याग-संयम और क्षमा का पर्व है। ज़्यादातर लोग उपवास के जरिए तप-साधना करते हैं।</p>
<p>श्वेतांबर जैन समुदाय के लिए पर्युषण पर्व 8 दिनों का होता है, जिसका अंत संवत्सरी पर होता है। संवत्सरी के अगले दिन दिगम्बर जैनों के दस दिन के पर्यूषण शुरू होते हैं। इन दस दिनों में धर्म के दस लक्षणों की आराधना के कारण दिगम्बर लोग इसे ‘दशलक्षण पर्व’ के नाम से भी जानते हैं। धर्म के दस लक्षण हैं- क्षमा, मार्दव (मान का अभाव), आर्जव (छल-कपट से दूर रहना), शौच(पवित्रता), सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन (सहजता और परिग्रह से दूर रहना) और ब्रह्मचर्य (सदाचार)। दिगम्बर जैन समुदाय के 10 दिन चलने वाले पर्यूषण का समापन ‘अनंत चतुर्दशी’ और फिर ‘क्षमावाणी’ के साथ होता है। &#8216;संवत्सरी और ‘क्षमावाणी’ क्षमा के दिन हैं। मेरी समझ में दुनिया के किसी भी धर्म-समुदाय में क्षमा को समर्पित इस तरह का कोई त्योहार नहीं है। इस तरह यह एक अनूठा पर्व है। घर-परिवार से लेकर समाज तक, सब एक-दूसरे से माफ़ी मांगते हैं और दूसरों को सहर्ष माफ़ करते भी हैं। ‘सबसे क्षमा-सबको क्षमा’ इस पर्व का मूलमंत्र है। जैनों के लिए क्षमा का विस्तार मनुष्य तक ही नहीं प्राणीमात्र तक है।</p>
<p>क्षमावाणी पर्व में मन, वचन, और काया से हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी जाती है।</p>
<p>क्षमावाणी पर्व में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए सभी जीवों से क्षमा मांगी जाती है।</p>
<p>क्षमावाणी पर्व में गले मिलकर, एक-दूसरे के पैर छूकर, और घर-घर जाकर क्षमा मांगी जाती है।</p>
<p>क्षमावाणी पर्व में बड़े बुज़ुर्गों के चरण स्पर्श किए जाते हैं।</p>
<p>क्षमावाणी पर्व में क्षमा मांगना और क्षमा करना वीरों का काम माना जाता है।</p>
<p>क्षमा में सत्य का बल होता है और प्रेम, आस्था, ममता, और समता का रस होता है।</p>
<p>क्षमावाणी पर्व में राग-द्वेष, अहंकार से भरे इस संसार में अपने-अपने हितों और अहंकारों की गठरी को दूर करने का मौका मिलता है।</p>
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		<title>भगवान की महाआरती के साथ हुआ प्रवचन कार्यक्रम : पर्युषण पर्व के चौथे दिवस जैन मंदिरों में की गई शौच धर्म की आराधना </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Sep 2024 07:13:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पर्युषण पर्व के तहत चौथे दिवस जैन मंदिरों में शौच धर्म की आराधना की गई। इस दौरान लोगों ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित विशेष प्रवचन में हिस्सा लिया। इससे पहले मंदिर में विशेष पूजा अर्चना भी हुई। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230; अंबाह। पर्युषण पर्व के तहत चौथे दिवस जैन मंदिरों में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पर्युषण पर्व के तहत चौथे दिवस जैन मंदिरों में शौच धर्म की आराधना की गई। इस दौरान लोगों ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित विशेष प्रवचन में हिस्सा लिया। इससे पहले मंदिर में विशेष पूजा अर्चना भी हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>अंबाह।</strong> पर्युषण पर्व के तहत चौथे दिवस जैन मंदिरों में शौच धर्म की आराधना की गई। इस दौरान लोगों ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित विशेष प्रवचन में हिस्सा लिया। इससे पहले मंदिर में विशेष पूजा अर्चना भी हुई। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन एडवोकेट ने बताया कि हमारे मन में, हमारे वचन में, हमारी काया में आज इतनी अपवित्रता आ गई है कि उसे पवित्र करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आत्मा में निर्मल होने की शक्ति है पर जब उसे गंदा करने का प्रयत्न चल रहा है तो वह निर्मल कैसे हो सकेगी ? उत्तम शौच धर्म हमें उसी शुचिता की ओर ध्यान दिलाता है।</p>
<p>लोभ का अभाव ही पवित्रता है, शुचिता है।लोभ कषाई को पाप का बाप माना है, क्योंकि प्रत्येक दुराचार- अनाचार की तह में लोभ निहित होता है। लालच, तृष्णा, लालसा ,चाह आदि लोभ के ही नाम है। उन्होंने कहा इस दस लक्षण पर्व में जो हम पालन करते हैं, जो हम सीखते हैं, उस सात्विकता को हम अपने जीवन में कैसे ला सकते हैं। इस पर भी सभी लोगों को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाहर से पधारे विद्वानों के मार्गदर्शन में उनकी ज्ञानवाणी से हम सभी को एक नई दिशा और नई रोशनी मिलेगी। इस दौरान मंदिर की में भगवान की महा आरती कर प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया गया</p>
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		<title>बेटी है तो कल है कन्या के जन्म पर झूम उठे ननिहाल पक्ष के लोग, जमकर बजाए ढोल -नगाड़े  </title>
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		<pubDate>Wed, 29 May 2024 08:01:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन गली में निवास करने वाले एक परिवार ने अपनी बेटी के प्रथम संतान के रूप में जन्मी कन्या का ननिहाल में प्रथम आगमन पर जोरदार स्वागत कर मिसाल कायम की है। इसके जरिए इस परिवार ने पूरे समाज को यह संदेश दिया है । बेटी है तो कल है,बेटी दो घरों को जोड़ती है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन गली में निवास करने वाले एक परिवार ने अपनी बेटी के प्रथम संतान के रूप में जन्मी कन्या का ननिहाल में प्रथम आगमन पर जोरदार स्वागत कर मिसाल कायम की है। इसके जरिए इस परिवार ने पूरे समाज को यह संदेश दिया है । बेटी है तो कल है,बेटी दो घरों को जोड़ती है। इस दौरान पूरा ननिहाल पक्ष नाना-नानी,मामा-मामी, बुआ सहित सभी परिजन तीन माह की बालिका के स्वागत में झूम उठे ।इस जश्न की चर्चा पूरे शहर में है। इस परिवार ने ऐसा करके समाज को बेटा-बेटी के एक समान होने का संदेश भी दिया है। <span style="color: #ff0000">पढि़ए अजय जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
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<p><strong>अम्बाह।</strong> शहर की जैन गली में निवास करने वाले एक परिवार ने अपनी बेटी के प्रथम संतान के रूप में जन्मी कन्या का ननिहाल में प्रथम आगमन पर जोरदार स्वागत कर मिसाल कायम की है। इसके जरिए इस परिवार ने पूरे समाज को यह संदेश दिया है । बेटी है तो कल है,बेटी दो घरों को जोड़ती है। इस दौरान पूरा ननिहाल पक्ष नाना-नानी,मामा-मामी, बुआ सहित सभी परिजन तीन माह की बालिका के स्वागत में झूम उठे ।इस जश्न की चर्चा पूरे शहर में है।</p>
<p>इस परिवार ने ऐसा करके समाज को बेटा-बेटी के एक समान होने का संदेश भी दिया है और बताया है कि बेटियां भी बेटों से काम नहीं है। जैन गली में रहने वाले अजय जैन पप्पा की बेटी हिमानी के प्रथम संतान के रूप में तीन माह पूर्व एक कन्या ने जन्म लिया था।मंगलवार को हिमानी जब अपनी तीन माह की बेटी को लेकर अपने पिता के घर आयी तो पूरे ननिहाल पक्ष ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया ।नन्ही परी की ढोल, नगाड़ा और आतिशबाजी कर भव्य अगवानी की गई।ऐसा करके परिवार ने बेटा-बेटी के एक समान होने का संदेश दिया।</p>
<p>जैन गली के शुरुआत में ही हिमानी और उसकी बेटी गाम्या का धूमधाम से स्वागत किया गया। ढोल, नगाड़ा और आतिशबाजी करके नाना नानी ने खूब खुशी मनाई।अजय जैन पप्पा सर्राफा व्यापारी हैं।उनकी बेटी हिमानी ने तीन माह पूर्व प्रथम संतान के रूप में कन्या को जन्म दिया था। हिमानी की बेटी जब तीन माह की हो गयी। तब वह उसे लेकर अपने पिता के घर अम्बाह आई। इस दौरान हिमानी के माता- पिता सहित पूरे परिवार ने इस मौके पर जश्न मनाया।पहली बार कन्या के घर आने की खुशी में हिमानी के पापा ने घर को फूलों से सजा दिया। बैंड- बाजा बुलवाए गए। पटाखे फोड़े और आतिशबाजी की गयी।बेटी के घर आते ही गाजे-बाजे की धुन पर पूरा परिवार झूम उठा।</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का मंत्रोच्चार के बीच हुआ महामस्तकाभिषेक भगवान से की ब्रह्मांड में शांति एवं सदभाव की कामना    </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 May 2024 13:49:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[सकल दिगंबर जैन समाज ने हथिनी गांव में जगत कल्याण की कामना हेतु जैन साध्वी गणिनी आर्यिका सौम्यनंदनी माता जी एवं गणिनी आर्यिका सुयोग्यनँदनी माताजी के मंगल आशीर्वाद से श्री दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र हथिनी के जैन मंदिर में भगवान श्री आदिनाथ की विशाल प्रतिमा का सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंत्रोच्चार की ध्वनि के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सकल दिगंबर जैन समाज ने हथिनी गांव में जगत कल्याण की कामना हेतु जैन साध्वी गणिनी आर्यिका सौम्यनंदनी माता जी एवं गणिनी आर्यिका सुयोग्यनँदनी माताजी के मंगल आशीर्वाद से श्री दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र हथिनी के जैन मंदिर में भगवान श्री आदिनाथ की विशाल प्रतिमा का सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंत्रोच्चार की ध्वनि के बीच महामस्तकाभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">पढि़ए अजय जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
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<p><strong>अम्बाह।</strong> सकल दिगंबर जैन समाज ने हथिनी गांव में जगत कल्याण की कामना हेतु जैन साध्वी गणिनी आर्यिका सौम्यनंदनी माता जी एवं गणिनी आर्यिका सुयोग्यनँदनी माताजी के मंगल आशीर्वाद से श्री दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र हथिनी के जैन मंदिर में भगवान श्री आदिनाथ की विशाल प्रतिमा का सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंत्रोच्चार की ध्वनि के बीच महामस्तकाभिषेक किया गया। इस आयोजन के दौरान मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालु भगवान आदिनाथ के जयकारे लगाते रहे ।सभी ने सामूहिक रूप से भगवान से ब्रह्मांड में शांति एवं सदभाव की कामना की।</p>
<p>इस अवसर पर सुबह मांगलिक क्रियाएं संपन्न होने के बाद मंत्रोच्चार प्रारंभ हुआ। जो आयोजन संपन्न होने तक अनवरत चलता रहा। इस दौरान अभिषेक के लिये श्रद्धालुओं की लंबी कतार मंदिर प्रागंण में लगी रही भगवान का महामस्तकाभिषेक करने के लिये सैकड़ों अनुयायी सुबह से ही तन -मन की विशुद्धि के साथ पीले धोती, दुपट्टे में अभिषेक में शामिल हुए। इस अवसर पर जगत कल्याण की कामना के लिए शांति धारा भी की गई ।</p>
<p>आयोजन में शामिल मुरैना के नीलेश जैन ने बताया कि हथिनी की पावन धरा पर स्थापित भगवान आदिनाथ का यह जिनालय युगों- युगों तक सत्य अहिंसा और शांति का संदेश देता रहेगा ।नीलेश जैन ने कहा कि जैन धर्म के अनुसार स्वयं को जीतना ही जग को जीतना है ।अष्ट कर्मों का नाश कर दोषों से पूरी तरह मुक्त होना ही मानव जीवन का लक्ष्य है ।और इसी बात की प्रेरणा हमे मंदिर में विराजमान भगवान आदिनाथ की यह भव्य मूर्ति देती है कि संसारी दुखों से मुक्त होने के लिए हमें मोक्ष मार्ग अपनाना चाहिए ।आयोजन में पुलकित जैन और उनकी टीम इंडिया ने व्यवस्था बनाने में विशेष सहयोग दिया। कार्यक्रम उपरांत सभी के लिए वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया</p>
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