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	<title>All India Digambar Jain Tirtha Sanrakshini Mahasabha &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जैन धरोहर दिवस पर जबलपुर संभाग की संगोष्ठी : संस्थाओं को पुरातत्व के संरक्षण में आगे आना होगा </title>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य।जबलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जबलपुर। भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य।<span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य। विचार संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिगंबर जैन बनी गुरुकुल जबलपुर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी जिनेश भैया मौजूद रहे एवं अध्यक्षता चिंतामणि जैन का. अध्यक्ष तीर्थ संरक्षणी सभा जबलपुर संभाग ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आभा जैन जॉइंट कमिश्नर, डॉ. रंजना जैन इतिहास विशेषज्ञ, प्रोफेसर दीपिका जैन की उपस्थिति रही।</p>
<p>मंगलाचरण महिला प्रकोष्ठ की प्रमुख नीलांजना जैन ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत समिति की कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट स्मृति भारती, पूर्णिमा जैन, संगीता जैन ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रंजना जैन ने जबलपुर संभाग में फैली हुई पुरातत्व संपदा के बारे में फील्ड की यथार्थ स्थिति सभी के समक्ष प्रस्तुत की। प्रोफेसर दीपिका जैन द्वारा कटनी जिले उमरिया पान तहसील में बिखरी हुई जैन मूर्तियां और उनके अवशेषों के बारे में जानकारी दी गई और साथ ही सुझाव दिया गया कि समाज की वरिष्ठ जन और संस्थाओं को पुरातत्व के संरक्षण में आगे आना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आभा जैन जॉइंट कमिश्नर द्वारा कहा गया कि हमारे पूर्वजों के द्वारा जो मूर्ति और मंदिर संरक्षित किए गए थे। उनके कारण आज हम तीर्थ की वंदना और दर्शन कर पा रहे हैं। अब हमारा दायित्व है कि हम आगामी पीढ़ी को इसी प्रकार से सुरक्षित और सुंदर मूर्तियां मूल स्वरूप में सुरक्षित हाथों में दे पाए। कार्यक्रम को सरकारी अध्यक्ष चिंतामणि जैन द्वारा संबोधित किया गया और तीर्थ संरक्षिणी सभा को सक्रिय करने हेतु सभी की सहभागिता पर जोर दिया।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा के प्रचार प्रसार और सीखने पर जोर</strong></p>
<p>संस्था उपाध्यक्ष अमिताभ भारती एडवोकेट द्वारा कहा गया कि जैन हेरिटेज विजिट प्रारंभ कर लोगो को जोड़ा जाए। सहसचिव एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने सुझाव दिया कि समस्या के साथ समाधान पर भी चर्चा आवश्यक है। इंजीनियर आशीष जैन द्वारा प्राकृत भाषा के प्रचार प्रसार और सीखने पर जोर दिया गया। महिला प्रमुख नीलांजना जैन द्वारा संगोष्ठी को अन्य संस्थाओं के सहयोग से वृहद रूप में किए जाने के लिए सहमति बनी।</p>
<p><strong>प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय करना होगा</strong></p>
<p>मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी जिनेश भैया अधिष्ठाता वर्णी गुरुकुल द्वारा बताया गया कि कि पुरातत्व के क्षेत्र में प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय करना होगा और प्राचीन मूर्तियों की संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है। कुंडलपुर की बड़े बाबा की मूर्ति का संरक्षण के बारे में भैया जी ने आश्वासन दिया कि वे सदैव पुरातत्व के संबंध में मार्गदर्शन और सहयोग संस्था को प्रदान करते रहेंगे।</p>
<p>समिति में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में एडवोकेट वैभव जैन, राजेश पूर्णिमा जैन, बसंत जैन, सुजीत जैन को सम्मिलित किया गया ।</p>
<p><strong>सबके सहयोग से हुई संगोष्ठी</strong></p>
<p>कार्यक्रम में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के पदाधिकारी विकास जैन की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट अमिताभ भारती एवं आभार प्रदर्शन एडवोकेट सत्येंद्र जैन द्वारा किया गया। भारत वर्षीय दिगंबर जैन प्रशासकीय संस्थान द्वारा कार्यक्रम सफल बनाने में सहयोग दिया गया। संस्था के अध्यक्ष डॉ यतीश जैन सचिव जिनेंद्र जैन के द्वारा ऑनलाइन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन दिया गया तथा नितिन जैन मीडिया प्रभारी का सहयोग रहा। अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
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		<title>जैन धरोहर दिवस पर श्रावकों की भूमिका पर हुआ मंथन : संस्था अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने तीर्थ संरक्षण पर दिया जोर </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:09:27 +0000</pubDate>
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<p><strong>भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य।<span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जबलपुर।</strong> भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य। विचार संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिगंबर जैन बनी गुरुकुल जबलपुर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी जिनेश भैया मौजूद रहे एवं अध्यक्षता चिंतामणि जैन कार्यकारी अध्यक्ष तीर्थ संरक्षणी सभा जबलपुर संभाग ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आभा जैन जॉइंट कमिश्नर, डॉ. रंजना जैन इतिहास विशेषज्ञ, प्रोफेसर दीपिका जैन की उपस्थिति रही। मंगलाचरण महिला प्रकोष्ठ की प्रमुख नीलांजना जैन ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत समिति की कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट स्मृति भारती, पूर्णिमा जैन, संगीता जैन ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रंजना जैन ने जबलपुर संभाग में फैली हुई पुरातत्व संपदा के बारे में फील्ड की यथार्थ स्थिति सभी के समक्ष प्रस्तुत की। प्रोफेसर दीपिका जैन द्वारा कटनी जिले उमरिया पान तहसील में बिखरी हुई जैन मूर्तियां और उनके अवशेषों के बारे में जानकारी दी गई और साथ ही सुझाव दिया गया कि समाज की वरिष्ठ जन और संस्थाओं को पुरातत्व के संरक्षण में आगे आना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आभा जैन जॉइंट कमिश्नर द्वारा कहा गया कि हमारे पूर्वजों के द्वारा जो मूर्ति और मंदिर संरक्षित किए गए थे। उनके कारण आज हम तीर्थ की वंदना और दर्शन कर पा रहे हैं। अब हमारा दायित्व है कि हम आगामी पीढ़ी को इसी प्रकार से सुरक्षित और सुंदर मूर्तियां मूल स्वरूप में सुरक्षित हाथों में दे पाए। कार्यक्रम को सरकारी अध्यक्ष चिंतामणि जैन द्वारा संबोधित किया गया और तीर्थ संरक्षिणी सभा को सक्रिय करने हेतु सभी की सहभागिता पर जोर दिया।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा का प्रचार-प्रसार किया जाए</strong></p>
<p>संस्था उपाध्यक्ष अमिताभ भारती एडवोकेट द्वारा कहा गया कि जैन हेरिटेज विजिट प्रारंभ कर लोगो को जोड़ा जाए। सहसचिव एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने सुझाव दिया कि समस्या के साथ समाधान पर भी चर्चा आवश्यक है। इंजीनियर आशीष जैन द्वारा प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार और सीखने पर जोर दिया गया। महिला प्रमुख नीलांजना जैन द्वारा संगोष्ठी को अन्य संस्थाओं के सहयोग से वृहद रूप में किए जाने के लिए सहमति बनी।</p>
<p><strong>प्राचीनता और आधुनिकता के समन्वय पर जोर</strong></p>
<p>मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी जिनेश भैया अधिष्ठाता वर्णी गुरुकुल द्वारा बताया गया कि कि पुरातत्व के क्षेत्र में प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय करना होगा और प्राचीन मूर्तियों की संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है। कुंडलपुर की बड़े बाबा की मूर्ति का संरक्षण के बारे में भैया जी ने आश्वासन दिया कि वे सदैव पुरातत्व के संबंध में मार्गदर्शन और सहयोग संस्था को प्रदान करते रहेंगे।</p>
<p>समिति में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में एडवोकेट वैभव जैन, राजेश पूर्णिमा जैन, बसंत जैन, सुजीत जैन को सम्मिलित किया गया। कार्यक्रम में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप पदाधिकारी विकास जैन की उपस्थिति रही। संचालन एडवोकेट अमिताभ भारती एवं आभार प्रदर्शन एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने किया। भारत वर्षीय दिगंबर जैन प्रशासकीय संस्थान द्वारा कार्यक्रम सफल बनाने में सहयोग दिया गया। संस्था के अध्यक्ष डॉ यतीश जैन सचिव जिनेंद्र जैन के द्वारा ऑनलाइन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन दिया गया तथा नितिन जैन मीडिया प्रभारी का सहयोग रहा। अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
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		<title>जैन धरोहर दिवस पर श्रावकों की भूमिका पर हुआ मंथन : संस्था अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने तीर्थ संरक्षण पर दिया जोर </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 05:17:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य।<span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जबलपुर।</strong> भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य। विचार संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिगंबर जैन बनी गुरुकुल जबलपुर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी जिनेश भैया मौजूद रहे एवं अध्यक्षता चिंतामणि जैन कार्यकारी अध्यक्ष तीर्थ संरक्षणी सभा जबलपुर संभाग ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आभा जैन जॉइंट कमिश्नर, डॉ. रंजना जैन इतिहास विशेषज्ञ, प्रोफेसर दीपिका जैन की उपस्थिति रही। मंगलाचरण महिला प्रकोष्ठ की प्रमुख नीलांजना जैन ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत समिति की कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट स्मृति भारती, पूर्णिमा जैन, संगीता जैन ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रंजना जैन ने जबलपुर संभाग में फैली हुई पुरातत्व संपदा के बारे में फील्ड की यथार्थ स्थिति सभी के समक्ष प्रस्तुत की। प्रोफेसर दीपिका जैन द्वारा कटनी जिले उमरिया पान तहसील में बिखरी हुई जैन मूर्तियां और उनके अवशेषों के बारे में जानकारी दी गई और साथ ही सुझाव दिया गया कि समाज की वरिष्ठ जन और संस्थाओं को पुरातत्व के संरक्षण में आगे आना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आभा जैन जॉइंट कमिश्नर द्वारा कहा गया कि हमारे पूर्वजों के द्वारा जो मूर्ति और मंदिर संरक्षित किए गए थे। उनके कारण आज हम तीर्थ की वंदना और दर्शन कर पा रहे हैं। अब हमारा दायित्व है कि हम आगामी पीढ़ी को इसी प्रकार से सुरक्षित और सुंदर मूर्तियां मूल स्वरूप में सुरक्षित हाथों में दे पाए। कार्यक्रम को सरकारी अध्यक्ष चिंतामणि जैन द्वारा संबोधित किया गया और तीर्थ संरक्षिणी सभा को सक्रिय करने हेतु सभी की सहभागिता पर जोर दिया।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा का प्रचार-प्रसार किया जाए</strong></p>
<p>संस्था उपाध्यक्ष अमिताभ भारती एडवोकेट द्वारा कहा गया कि जैन हेरिटेज विजिट प्रारंभ कर लोगो को जोड़ा जाए। सहसचिव एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने सुझाव दिया कि समस्या के साथ समाधान पर भी चर्चा आवश्यक है। इंजीनियर आशीष जैन द्वारा प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार और सीखने पर जोर दिया गया। महिला प्रमुख नीलांजना जैन द्वारा संगोष्ठी को अन्य संस्थाओं के सहयोग से वृहद रूप में किए जाने के लिए सहमति बनी।</p>
<p><strong>प्राचीनता और आधुनिकता के समन्वय पर जोर</strong></p>
<p>मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी जिनेश भैया अधिष्ठाता वर्णी गुरुकुल द्वारा बताया गया कि कि पुरातत्व के क्षेत्र में प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय करना होगा और प्राचीन मूर्तियों की संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है। कुंडलपुर की बड़े बाबा की मूर्ति का संरक्षण के बारे में भैया जी ने आश्वासन दिया कि वे सदैव पुरातत्व के संबंध में मार्गदर्शन और सहयोग संस्था को प्रदान करते रहेंगे।</p>
<p>समिति में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में एडवोकेट वैभव जैन, राजेश पूर्णिमा जैन, बसंत जैन, सुजीत जैन को सम्मिलित किया गया। कार्यक्रम में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप पदाधिकारी विकास जैन की उपस्थिति रही। संचालन एडवोकेट अमिताभ भारती एवं आभार प्रदर्शन एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने किया। भारत वर्षीय दिगंबर जैन प्रशासकीय संस्थान द्वारा कार्यक्रम सफल बनाने में सहयोग दिया गया। संस्था के अध्यक्ष डॉ यतीश जैन सचिव जिनेंद्र जैन के द्वारा ऑनलाइन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन दिया गया तथा नितिन जैन मीडिया प्रभारी का सहयोग रहा। अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:01:13 +0000</pubDate>
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<p><strong>भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य।<span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जबलपुर।</strong> भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा जबलपुर संभाग के द्वारा जैन धरोहर दिवस एवं निर्मल सेठी की पुण्यतिथि विचार गोष्ठी संपन्न हुई। विचार गोष्ठी का विषय था जैन धरोहर के संरक्षण में श्रावकों की भूमिका और कर्तव्य। विचार संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में श्री दिगंबर जैन बनी गुरुकुल जबलपुर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी जिनेश भैया मौजूद रहे एवं अध्यक्षता चिंतामणि जैन का. अध्यक्ष तीर्थ संरक्षणी सभा जबलपुर संभाग ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आभा जैन जॉइंट कमिश्नर, डॉ. रंजना जैन इतिहास विशेषज्ञ, प्रोफेसर दीपिका जैन की उपस्थिति रही।</p>
<p>मंगलाचरण महिला प्रकोष्ठ की प्रमुख नीलांजना जैन ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत समिति की कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट स्मृति भारती, पूर्णिमा जैन, संगीता जैन ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रंजना जैन ने जबलपुर संभाग में फैली हुई पुरातत्व संपदा के बारे में फील्ड की यथार्थ स्थिति सभी के समक्ष प्रस्तुत की। प्रोफेसर दीपिका जैन द्वारा कटनी जिले उमरिया पान तहसील में बिखरी हुई जैन मूर्तियां और उनके अवशेषों के बारे में जानकारी दी गई और साथ ही सुझाव दिया गया कि समाज की वरिष्ठ जन और संस्थाओं को पुरातत्व के संरक्षण में आगे आना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आभा जैन जॉइंट कमिश्नर द्वारा कहा गया कि हमारे पूर्वजों के द्वारा जो मूर्ति और मंदिर संरक्षित किए गए थे। उनके कारण आज हम तीर्थ की वंदना और दर्शन कर पा रहे हैं। अब हमारा दायित्व है कि हम आगामी पीढ़ी को इसी प्रकार से सुरक्षित और सुंदर मूर्तियां मूल स्वरूप में सुरक्षित हाथों में दे पाए। कार्यक्रम को सरकारी अध्यक्ष चिंतामणि जैन द्वारा संबोधित किया गया और तीर्थ संरक्षिणी सभा को सक्रिय करने हेतु सभी की सहभागिता पर जोर दिया।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा के प्रचार प्रसार और सीखने पर जोर</strong></p>
<p>संस्था उपाध्यक्ष अमिताभ भारती एडवोकेट द्वारा कहा गया कि जैन हेरिटेज विजिट प्रारंभ कर लोगो को जोड़ा जाए। सहसचिव एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने सुझाव दिया कि समस्या के साथ समाधान पर भी चर्चा आवश्यक है। इंजीनियर आशीष जैन द्वारा प्राकृत भाषा के प्रचार प्रसार और सीखने पर जोर दिया गया। महिला प्रमुख नीलांजना जैन द्वारा संगोष्ठी को अन्य संस्थाओं के सहयोग से वृहद रूप में किए जाने के लिए सहमति बनी।</p>
<p><strong>प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय करना होगा</strong></p>
<p>मुख्य अतिथि ब्रह्मचारी जिनेश भैया अधिष्ठाता वर्णी गुरुकुल द्वारा बताया गया कि कि पुरातत्व के क्षेत्र में प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय करना होगा और प्राचीन मूर्तियों की संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है। कुंडलपुर की बड़े बाबा की मूर्ति का संरक्षण के बारे में भैया जी ने आश्वासन दिया कि वे सदैव पुरातत्व के संबंध में मार्गदर्शन और सहयोग संस्था को प्रदान करते रहेंगे।</p>
<p>समिति में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में एडवोकेट वैभव जैन, राजेश पूर्णिमा जैन, बसंत जैन, सुजीत जैन को सम्मिलित किया गया ।</p>
<p><strong>सबके सहयोग से हुई संगोष्ठी</strong></p>
<p>कार्यक्रम में दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के पदाधिकारी विकास जैन की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट अमिताभ भारती एवं आभार प्रदर्शन एडवोकेट सत्येंद्र जैन द्वारा किया गया। भारत वर्षीय दिगंबर जैन प्रशासकीय संस्थान द्वारा कार्यक्रम सफल बनाने में सहयोग दिया गया। संस्था के अध्यक्ष डॉ यतीश जैन सचिव जिनेंद्र जैन के द्वारा ऑनलाइन उपस्थित रहकर मार्गदर्शन दिया गया तथा नितिन जैन मीडिया प्रभारी का सहयोग रहा। अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</p>
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