<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>All India Digambar Jain Shastri Parishad &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/all-india-digambar-jain-shastri-parishad/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 05 Jun 2026 10:28:31 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>All India Digambar Jain Shastri Parishad &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>वार्षिक अधिवेशन में अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित : शताधिक विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ भव्य समारोह  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/several_important_resolutions_passed_at_the_annual_session/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/several_important_resolutions_passed_at_the_annual_session/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 10:28:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[All India Digambar Jain Shastri Parishad]]></category>
		<category><![CDATA[Annual Convention]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Swasti Bhushan Mataji Sansangh]]></category>
		<category><![CDATA[Award Investiture Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Keshavraipatan]]></category>
		<category><![CDATA[Morena Gurukul]]></category>
		<category><![CDATA[Mulnayak Lord Munisuvratnath Yes]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Teaching-Training Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Wagarh Gurukulam]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[आध्यात्मिक वातावरण]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[केशवरायपाटन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पुरस्कार अलंकरण समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना गुरुकुल]]></category>
		<category><![CDATA[मूलनायक भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी]]></category>
		<category><![CDATA[वागढ़ गुरुकुलम्]]></category>
		<category><![CDATA[वार्षिक अधिवेशन]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षण प्रशिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=107766</guid>

					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् का शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर एवं पुरस्कार अलंकरण समारोह विगत दिनों केशवरायपाटन में संपन्न हुआ। इसमें विद्वानों की मौजूदगी में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी। आयोजन आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ। केशवराय पाटन से पढ़िए, डॉ. सुनील जैन संचय की यह रिपोर्ट&#8230; केशवराय पाटन (बूंदी)। श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् का शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर एवं पुरस्कार अलंकरण समारोह विगत दिनों केशवरायपाटन में संपन्न हुआ। इसमें विद्वानों की मौजूदगी में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी। आयोजन आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ। <span style="color: #ff0000">केशवराय पाटन से पढ़िए, डॉ. सुनील जैन संचय की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केशवराय पाटन (बूंदी)।</strong> श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवराय पाटन में गणिनी आर्यिकारत्न श्री स्वस्ति भूषण माता जी ससंघ के पावन सान्निध्य में अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्रि-परिषद् के तत्वावधान में शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर, वार्षिक अधिवेशन एवं पुरस्कार अलंकरण समारोह 25 से 30 मई तक आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे शताधिक विद्वानों ने सहभागिता की। शिविर के दौरान ध्यान एवं योग, भक्तियों का स्वरूप, ज्योतिष, मुहूर्त, प्राकृत भाषा, धर्मध्यान एवं शुक्लध्यान, मूर्ति विज्ञान सहित विविध विषयों पर वरिष्ठ विद्वानों एवं विदुषियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।</p>
<p><strong>कार्यकारिणी बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय </strong></p>
<p>28 मई की रात्रि में परिषद् के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत की अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संस्था के आगामी कार्यक्रमों, विभिन्न गतिविधियों एवं समाजोपयोगी कार्यों पर गहन विचार-विमर्श कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।</p>
<p><strong>साधारण सभा का अधिवेशन संपन्न </strong></p>
<p>29 मई को साधारण सभा का खुला अधिवेशन किया गया। जिसमें कोषाध्यक्ष पंडित सुखमाल जैन सहारनपुर ने आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया तथा महामंत्री ब्र. जयकुमार जैन निशांत टीकमगढ़ ने गत बैठक की कार्रवाई का वाचन किया।</p>
<p><strong>अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत </strong></p>
<p>अधिवेशन में विद्वानों ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर अपने विचार रखे। चर्चा के बाद अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें जनगणना में धर्म के कॉलम में जैन एवं भाषा के कॉलम में प्राकृत भाषा अंकित करने, आचार्य श्री शांतिसागरजी छाणी आचार्य पद पदारोहण शताब्दी वर्ष समारोह, रीवा में आर्यिका माता जी के साथ हुई सड़क दुर्घटना एवं साधु सुरक्षा, भोजशाला प्रकरण में जैन संस्कृति से जुड़े प्रमाणों की उपेक्षा, मंदिरों एवं जैन आयतनों की दीवारों पर जैन प्रतीकों के निर्माण, दीक्षा प्रदाता द्वारा दीक्षार्थी को पूर्ण परिपक्व करने के बाद ही दीक्षा प्रदान करने सहित कई प्रस्ताव सम्मिलित रहे। साथ ही आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माता जी की प्रेरणा से जहाजपुर, सोनागिर, केशवरायपाटन, प्यावड़ी आदि तीर्थ क्षेत्र के जीर्णाेद्धार कार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा शोक संवेदनाओं से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए।</p>
<p><strong>चंबल तट पर ध्यान-योग एवं भगवान मुनिसुव्रतनाथ का अभिषेक  </strong></p>
<p>30 मई को प्रातः चंबल नदी के सुरम्य तट पर माताजी के साथ सभी विद्वानों, मुरैना गुरुकुल एवं नवागढ़ गुरुकुलम् के बच्चों ने ध्यान एवं योग किया। इसके बाद मूलनायक भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। जिसमें विद्वानों ने बोली लेकर पुण्यार्जन किया।</p>
<p><strong>विद्वानों का हुआ सम्मान एवं उपाधियों से अलंकरण </strong></p>
<p>समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को परिषद् के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। डॉ. मनोज निर्लिप्त अलीगढ़, डॉ. मोहन जैन मैसूर, महावीर शास्त्री आगरा, पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित प्रद्युम्न कुमार जैन शास्त्री जयपुर, चक्रेश शास्त्री मुरैना, डॉ. शैलेश जैन उदयपुर, पंडित सुरेश जैन दमोह, डॉ. राजेंद्र पाटिल श्रवणबेलगोला एवं डॉ. संजय शास्त्री टीकमगढ़ सहित दस विद्वानों को शास्त्रि-परिषद् के पुरस्कारों से अलंकृत किया गया। पंडित मनीष संजू टीकमगढ़ एवं डॉ. भरत शास्त्री इंदौर को प्रतिष्ठाचार्य तथा पंडित देवेंद्र शास्त्री केकड़ी एवं पंडित संतोष शाहगढ़ को विधानाचार्य की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर विभिन्न कृतियों का विमोचन भी हुआ। केशवराय पाटन अतिशय क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष गुलाबचंद जैन (चूना वालों) सहित समिति के सदस्यों ने सभी विद्वानों का सम्मान किया। सकल जैन समाज एवं प्रबंध समिति द्वारा आगामी चातुर्मास के लिए आर्यिका संघ के लिए श्रीफल समर्पित किया गया।</p>
<p><strong>शास्त्रि परिषद् कृ आर्षमार्गी विद्वानों की प्राचीन संस्था </strong></p>
<p>अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने कहा कि अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्रि-परिषद् आर्षमार्गी विद्वानों की शताधिक वर्ष पुरानी संस्था है, जिसने धर्म, दर्शन एवं समाज के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने आयोजन के लिए प्रबंध समिति एवं सकल समाज का आभार व्यक्त करते हुए विद्वानों को आगामी कार्यों के लिए दिशा-निर्देशन प्रदान किया।</p>
<p><strong>विद्वान समाज के मार्गदर्शक दीपक हैं &#8211; आर्यिका स्वस्तिभूषण माता जी</strong></p>
<p>इस अवसर पर गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि विद्वान दीपक की तरह समाज को प्रकाशित करता है। समाज की समस्याओं का समाधान विद्वानों को करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार अपने बच्चों को विद्वान बनाने का प्रयास करे, विद्वान अपने बच्चों को विद्वान बनाएं। माता जी ने विद्वानों के अध्ययन, साधना एवं परिश्रम की सराहना करते हुए वर्तमान समय की विसंगतियों को दूर करने में विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई और शास्त्रि-परिषद् के कार्यों की प्रशंसा की।</p>
<p><strong>शताधिक विद्वानों की रही गरिमामयी उपस्थिति </strong></p>
<p>आयोजन में डॉ श्रेयांस कुमार जैन बडौत अध्यक्ष, ब्र. जयकुमार जैन निशांत टीकमगढ़, महामंत्री एवं संयोजक, पंडित विनोदकुमार जैन रजवांस उपाध्यक्ष, पंडित पवन दीवान सागर उपाध्यक्ष, पंडित जयंत सीकर उपाध्यक्ष, पंडित सुखमाल जैन सहारनपुर कोषाध्यक्ष, डॉ. आशीष जैन आचार्य सागर संयुक्तमंत्री, डॉ. सोनल कुमार जैन दिल्ली संयुक्त मंत्री, डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर प्रचारमंत्री, ब्रह्मचारी डॉ. धर्मेंद्रकुमार जैन जयपुर, पं.राजकुमार शास्त्री, सागर, ब्र. जिनेश मलैया इंदौर, सोमचंद जैन शास्त्री मैनवार (सह संयोजक शिविर), पं. प्रद्युम्न कुमार शास्त्री जयपुर ,डॉ शैलेश जैन उदयपुर , पंडित गजेन्द्र जैन (गुलगंज) केशवराव पाटन,पं उदय जैन शास्त्री कोटा, पं.जितेंद्र जैन शास्त्री, कोटा, पं.श्रीनंदन जैन, टीकमगढ़, डॉ. निर्मल शास्त्री, टीकमगढ़, पं. संजय जैन शास्त्री,टीकमगढ, डॉ राजेश शास्त्री ललितपुर, .मनीष संजू, टीकमगढ़, डॉ. भारत शास्त्री इंदौर, सचिन जैन ‘चिन्मय’ टीकमगढ, पं.विनोद जैन शास्त्री, बबीना कैंट,पं. महावीर प्रसाद जैन, आगरा, पं. इंद्रसेन जैन, सहारनपुर, ब्र. पं. कमल जैन हाथीशाह, भोपाल, डॉ. ज्योति बाबू शास्त्री, उदयपुर , डॉ ज्योति जैन खतौली, पं. अजित कुमार जैन बड़ागांव धसान , पं. सनत कुमार जैन, रजवांस, पं. विनय कुमार जैन, अहार जी, पं. अखिलेश शास्त्री, रामटोरिया , पं. सुनील कुमार जैन शास्त्री बड़ागांव, पंडित विवेक जैन (बलदेवगढ़) दिल्ली, डॉ. मनोज जैन श्निर्लिप्तश्, अलीगढ़, पं शशांक जैन सिघंई बड़ामलहरा , पं प्रशान्त शास्त्री मड़ावरा, पं कैलाश शास्त्री मैनवार, पं ऋषभ शास्त्री ललितपुर , पं. ब्रजेश शास्त्री महुआ, भीलवाड़ा ,देवेश कुमार शास्त्री बलेह , पंडित मुकेश विनम्र गुड़गांव, पं. अखिलेश शास्त्रीष्सुप्रज्ञष्रमगढा,पं.रमेशचंद जैन शास्त्री ‘दाऊ’ जोबनेर जयपुर, डॉ. राजेंद्र पाटिल, श्रवणबेलगोला, पं देवेन्द्रकुमार जैन शास्त्री, केकड़ी, पं. जयकुमार, दुर्ग, पं. संजय जैन शास्त्री टीकमगढ़, चन्द्रेश शास्त्री भोपाल, पं. शैलेंद्र जैन शास्त्री भेलसी. पं. राजकुमार शास्त्री, भगवा, पं. चक्रेश शास्त्री मुरैना, पं.उदयचंद्र शास्त्री, सागर, मनीष विद्यार्थी, सागर, पं. राजकुमार जैन, कर्द, डॉ बाहुबली जैन, इंदौर, सविता शास्त्री, बड़नगर, पं अशोक जैन शास्त्री खतौली, पं. ऋषभ कुमार जैन बड़ागांव, अंकित जैन, बडागांव (धसान) आदि शताधिक विद्वान उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/several_important_resolutions_passed_at_the_annual_session/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पांचवीं स्नातकोत्तर उपाधि पर हुआ प्राप्त : डॉ. सोनल कुमार जैन को जैनागम एवं प्राकृत साहित्य में स्वर्ण पदक </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/dr_sonal_kumar_jain_was_awarded_the_gold_medal_in_jainagam_and_prakrit_literature/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/dr_sonal_kumar_jain_was_awarded_the_gold_medal_in_jainagam_and_prakrit_literature/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 12:33:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[All India Digambar Jain Shastri Parishad]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Sonal Kumar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Governor श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Gulab Chand Kataria]]></category>
		<category><![CDATA[Haribhau Bagde]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mohanlal Sukhadia University]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[udaipur]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[उदयपुर]]></category>
		<category><![CDATA[गुलाब चंद कटारिया]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. सोनल कुमार जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[राज्यपाल]]></category>
		<category><![CDATA[सागर]]></category>
		<category><![CDATA[हरिभाऊ बागड़े]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96984</guid>

					<description><![CDATA[मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर के 33वें दीक्षांत समारोह में जैन दर्शन एवं प्राकृत साहित्य विषय में एम.ए. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रीपरिषद् के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं युवा मनीषी डॉ. सोनल कुमार जैन को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की विशेष रिपोर्ट&#8230; सागर। मोहनलाल सुखाड़िया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर के 33वें दीक्षांत समारोह में जैन दर्शन एवं प्राकृत साहित्य विषय में एम.ए. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रीपरिषद् के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं युवा मनीषी डॉ. सोनल कुमार जैन को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर</strong>। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर के 33वें दीक्षांत समारोह में जैन दर्शन एवं प्राकृत साहित्य विषय में एम.ए. परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रीपरिषद् के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं युवा मनीषी डॉ. सोनल कुमार जैन को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से 202 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इस दीक्षांत समारोह में कुल 254 शोधोपाधियां तथा 109 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।</p>
<p>समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा तथा राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। स्वर्ण पदक का वितरण इन विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह का मुख्य दीक्षांत भाषण पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने दिया।</p>
<p>डॉ. सोनल कुमार जैन को यह स्वर्ण पदक उनकी पांचवीं स्नातकोत्तर उपाधि पर प्राप्त हुआ है। यह अब तक उन्हें मिलने वाला सातवां स्वर्ण पदक है। उनकी इस उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रिपरिषद् सहित देशभर के विद्वानों, शिक्षाविदों, मनीषी विद्यार्थियों, सागर परिजनों एवं समाजजनों ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/dr_sonal_kumar_jain_was_awarded_the_gold_medal_in_jainagam_and_prakrit_literature/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शास्त्री परिषद को मिला आचार्य विशुद्ध सागरजी का आशीर्वाद : अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद् की कार्यकारिणी बैठक संपन्न  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shastri_parishad_receives_blessings_from_acharya_vishuddha_sagarji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/shastri_parishad_receives_blessings_from_acharya_vishuddha_sagarji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 08:53:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vishuddha Sagarji]]></category>
		<category><![CDATA[All India Digambar Jain Shastri Parishad]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन महासभा]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95030</guid>

					<description><![CDATA[श्रीमद् जिनेंद्र पंच कल्याणक एवं शांतिनाथ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद् की कार्यकारिणी बैठक आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में की गई। सागर (सिरोंज) से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; सागर (सिरोंज)। श्रीमद् जिनेंद्र पंच कल्याणक एवं शांतिनाथ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रीमद् जिनेंद्र पंच कल्याणक एवं शांतिनाथ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद् की कार्यकारिणी बैठक आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में की गई। <span style="color: #ff0000">सागर (सिरोंज) से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर (सिरोंज)।</strong> श्रीमद् जिनेंद्र पंच कल्याणक एवं शांतिनाथ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद् की कार्यकारिणी बैठक आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में की गई। यह महोत्सव सागर के श्रेष्ठ समाज गौरव श्रीमंत सेठ पाणाशाह संतोषकुमार जैन घड़ी परिवार द्वारा बीटीआईआरटी, जिसमें इंजीनियरिंग, फार्मेसी, नर्सिंग, बीएड आदि की शिक्षा दी जाती है, के प्रांगण में श्री शांतिनाथ जिनालय का निर्माण किया गया है। इस आयोजन को विशेष गौरव प्राप्त हुआ है। जिसमें किसी प्रकार की बोली या पात्रों से राशि का संयोजन नहीं किया गया है। दान में आई हुई समस्त राशि सिद्ध क्षेत्र द्रोण गिरि में व्रती आश्रम में निर्मित सहस्रर कूट चैत्यालय को प्रदत्त की जाएगी। डॉ. श्रेयांशकुमार बड़ौत की अध्यक्षता एवं ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत के निर्देशन में हुई कार्यकारिणी बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।</p>
<p><strong>युवा पीढ़ी को दिग्दर्शन कराने वाला साहित्य प्रकाशित हो </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने शास्त्री परिषद् के विद्वानों को आशीर्वाद देते हुए प्रवचन सभा में कहा वर्तमान में जैनत्व के संस्कारों पर कुठाराघात किया जा रहा है। युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका अनिवार्य है। आचार्य श्री ने कहा शास्त्री परिषद् के विद्वानों ने श्रुत संरक्षण के साथ संस्कृति संरक्षण में सक्रिय योगदान दिया है। वर्तमान में युवा पीढ़ी को दिग्दर्शन कराने वाला विशेष साहित्य प्रकाशित किया जाना चाहिए। जिससे उनको जनता का सम्यक् दिशा बोध कराया जा सके। इस महोत्सव के प्रणेता संतोष कुमार जैन घड़ी का अभिनंदन प्रशस्ति, शाल, श्रीफल, पगड़ी एवं ’श्रावक शिरोमणि’ के विरद् से अलंकृत कर किया गया। सफल आयोजन के लिए सभी ने संतोष घड़ी परिवार को शुभकामनाएं प्रेषित की।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/shastri_parishad_receives_blessings_from_acharya_vishuddha_sagarji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षण प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन : ज्ञान बिना जीवन का कल्याण नहीं &#8211; स्वस्तिभूषण माताजी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/there_is_no_welfare_of_life_without_knowledge_swastibhushan_mataji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/there_is_no_welfare_of_life_without_knowledge_swastibhushan_mataji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 May 2023 15:57:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[agra]]></category>
		<category><![CDATA[All India Digambar Jain Shastri Parishad]]></category>
		<category><![CDATA[Digamber Jain]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain religion]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Lakshmi Bhushan Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Mangal Anand Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Sonagir]]></category>
		<category><![CDATA[Swastibhushan Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री मंगल आनंद महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[लक्ष्मी भूषण माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[सोनागिर]]></category>
		<category><![CDATA[स्वस्तिभूषण माताजी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=45239</guid>

					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के द्वारा श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर में आयोजित शिक्षण प्रशिक्षण शिविर में दूसरे दिन प्रातः भगवान चंद्रप्रभु के प्रांगण में आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी के द्वारा ध्यान कराया गया। तत्पश्चात प्रातः कालीन सत्र में ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत टीकमगढ़ द्वारा अक्षर विन्यास अक्षर, बीजाक्षर, पिंडाक्षर का विशद विवेचन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के द्वारा श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर में आयोजित शिक्षण प्रशिक्षण शिविर में दूसरे दिन प्रातः भगवान चंद्रप्रभु के प्रांगण में आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी के द्वारा ध्यान कराया गया। तत्पश्चात प्रातः कालीन सत्र में ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत टीकमगढ़ द्वारा अक्षर विन्यास अक्षर, बीजाक्षर, पिंडाक्षर का विशद विवेचन किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनीष विद्यार्थी सागर की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सोनागिर।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के द्वारा श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर में आयोजित शिक्षण प्रशिक्षण शिविर में दूसरे दिन प्रातः भगवान चंद्रप्रभु के प्रांगण में आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी के द्वारा ध्यान कराया गया। तत्पश्चात प्रातः कालीन सत्र में ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत टीकमगढ़ द्वारा अक्षर विन्यास अक्षर, बीजाक्षर, पिंडाक्षर का विशद विवेचन किया गया। आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने ज्ञान के माध्यम से जीवन के उत्थान, सदाचरण, बुराई से बचाव, अज्ञान, मोह का अंधेरा हटाकर, सुख शांति की वृद्धि करते हुए, मोक्षमार्ग की क्षमता पात्रता एवं योग्यता का हेतु बताया। ज्ञान आते ही दृष्टिकोण बदल जाता है, क्षमता बढ़ जाती है, जीने का लक्ष्य एवं उसकी दिशा बदल जाती है। दोपहर कालीन सत्र में ब्रह्मचारी निशांत भैया ने अक्षरों का विन्यास बताते हुए कहा मंत्र का प्रयोग चार प्रकार से कर सकते हैं ..1. बैखरी, 2. उपांशु. 3. पश्य, 4. परा । तदनुसार णमोकार मंत्र के उच्चारण एवं ध्यान से प्राणायाम विधि द्वारा प्रयोग करने पर शरीर की आंतरिक शुद्धि के साथ पांच इंद्रीय एवं बलों को पुष्ट किया जाता है, जिससे हमारी शारीरिक क्षमता के साथ आध्यात्मिक एवं दार्शनिक योग्यता का भी लक्ष्य निश्चित होता है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45243" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-2.jpeg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-2.jpeg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-2-225x300.jpeg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-2-768x1024.jpeg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" /></p>
<p><strong>कथनी-करनी में मिटाना होगा भेद</strong></p>
<p>इस अवसर पर डॉ. श्रेयांस कुमार जी बड़ौत ने तत्वार्थ सूत्र मोक्ष मार्ग के माध्यम से समिति, गुप्ति एवं 10 धर्म का विशद विवेचन किया। जिसके माध्यम से मुनि धर्म की उत्कृष्टता होती है। समापन सत्र में मुनि श्री मंगल आनंद महाराज ने कहा वर्तमान परिवेश प्रदर्शन का है। प्रदर्शन की प्रवृत्ति से संवर, निर्जरा के साथ मोक्षमार्ग भी दूर होता जा रहा है। आज त्याग धर्म भी प्रदर्शन का हेतु बन गया है। मनुष्य का आहार त्याग भी आडंबर का कारण बन गया है। विडंबना है कि हम निर्ग्रंथ, दिगंबर, त्यागी अपरग्रही संत हैं फिर भी समाज का लाखों का खर्च हो रहा है। क्यों! क्या यह आगम मार्ग है? समाज को विद्वानों को एवं श्रमणों को इस पर विचार करना चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45244" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-1.jpeg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-1.jpeg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-1-225x300.jpeg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/WhatsApp-Image-2023-05-30-at-9.22.35-PM-1-768x1024.jpeg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" /></p>
<p>जब तक हमारा कथनी और करनी का भेद नहीं मिटेगा, तब तक हमारा मोक्ष मार्ग प्रशस्त नहीं है। आज के सत्र में मुरैना गुरुकुल से 26 छात्र शिक्षण हेतु उपस्थित हुए। विद्वानों में डॉ. टीकमचंद जी दिल्ली,पंं. कमल हाथीशाह भोपाल, पं. दिनेश कुमार जी भिलाई, पं. जयकुमार जी दुर्ग, प्राचार्य चक्रेश जैन मुरैना,पंं. संजीव महरौनी , पं. मनीष विद्यार्थी एवं मुरैना विद्यालय के विद्यार्थियों सहित कई आदि विद्वानों का आगमन हुआ। विद्वानों की समस्त व्यवस्था पं.सोमचंद्र मेनवार,पं.चंदर प्रकाश चंदर तत्पता से संभाल रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/there_is_no_welfare_of_life_without_knowledge_swastibhushan_mataji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
