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	<title>Advisor Dinesh Muni &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>पंजाब लोक भवन में नवकार महामंत्र महाजाप संपन्न : कटारिया ने कहा-सबसे पहले मैं समाज का श्रावक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:31:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंजाब लोक भवन का सभागार उस समय केवल एक भवन नहीं रहा, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का जीवंत तीर्थ बन गया। जब विश्व शांति, मानव कल्याण और सार्वभौमिक सद्भाव की भावना के साथ नवकार महामंत्र का विराट महाजाप संपन्न हुआ। चंडीगढ़ से पढ़िए, यह खबर&#8230;. चंडीगढ़। पंजाब लोक भवन का सभागार उस समय केवल एक भवन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पंजाब लोक भवन का सभागार उस समय केवल एक भवन नहीं रहा, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का जीवंत तीर्थ बन गया। जब विश्व शांति, मानव कल्याण और सार्वभौमिक सद्भाव की भावना के साथ नवकार महामंत्र का विराट महाजाप संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">चंडीगढ़ से पढ़िए, यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब लोक भवन का सभागार उस समय केवल एक भवन नहीं रहा, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का जीवंत तीर्थ बन गया। जब विश्व शांति, मानव कल्याण और सार्वभौमिक सद्भाव की भावना के साथ नवकार महामंत्र का विराट महाजाप संपन्न हुआ। श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि, डॉ द्वीपेंद्र मुनि, डॉ पुष्पेंद्र मुनि महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब सामूहिक चेतना आध्यात्मिक उद्देश्य से एकत्र होती है, तब मंत्र केवल ध्वनि नहीं रहते, वे ऊर्जा में परिवर्तित होकर वातावरण को रूपांतरित कर देते हैं।</p>
<p><strong>मंत्रोच्चार से जागृत हुई सामूहिक चेतना</strong></p>
<p>सैकड़ों श्रद्धालुओं की एकाग्र साधना से उठती नवकार महामंत्र की नादधारा ने लोकपाल भवन (राज भवन) के कण-कण को स्पंदित कर दिया।</p>
<p>डॉ पुष्पेंद्र मुनि द्वारा “णमो अरिहंताणं…” की लयबद्ध गूँज ने उपस्थित जनसमूह को एक ऐसी आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की, जहाँ व्यक्ति स्वयं से ऊपर उठकर समाज और विश्व के लिए मंगल की कामना करता दिखाई दिया। आयोजन के दौरान अनुशासन, शांति और गहन तन्मयता का जो दृश्य उपस्थित हुआ, वह आधुनिक समय में सामूहिक साधना की दुर्लभ मिसाल बना।</p>
<p>पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्रावक गुलाबचंद कटारिया ने अपने उद्बोधन में नवकार महामंत्र की दार्शनिक गहराई को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मंत्र किसी देवी-देवता या अवतार विशेष की स्तुति नहीं करता, बल्कि अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु—इन पंच परमेष्ठियों के गुणों को नमन करता है। यही कारण है कि नवकार महामंत्र संकीर्ण धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर सर्वधर्म समन्वय का सेतु बनता है। उन्होंने कहा कि हर धर्म का अपना मंत्र होता है, पर नवकार महामंत्र लोक के समस्त पापों का नाश करने वाला, सर्वकालिक और सार्वजनीन प्रभाव वाला मंत्र है। यह आत्मा को भीतर से शुद्ध करता है और मनुष्य को करुणा, संयम और विवेक के पथ पर अग्रसर करता है। “नवकार महामंत्र सिर्फ एक मंत्र नहीं, यह हमारी आस्था का मूल है”—उनका यह कथन सभागार में उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में गूंजता प्रतीत हुआ।</p>
<p>राज्यपाल कटारिया ने भावपूर्ण शब्दों में अपने धर्मगुरु उपाध्याय पुष्कर मुनि को स्मरण किया। उन्होंने बताया कि पुष्कर मुनि प्रतिदिन तीन बार नवकार महामंत्र का जाप कर मंगलपाठ सुनाते थे और अपने शिष्यों तथा गृहस्थ अनुयायियों को भी इसका अभ्यास करने की प्रेरणा देते थे। उन्होंने जीवन भर देखा कि किस प्रकार यह महामंत्र संकट, भय और निराशा में डूबे लोगों के लिए संबल बना।</p>
<p>उपाध्याय पुष्कर मुनि व आचार्य देवेन्द्र मुनि के साथ बिताए गए आंतरिक क्षणों को साझा करते हुए कटारिया ने कहा कि उन्होंने स्वयं अनेक बार इस मंत्र के अकल्पनीय प्रभावों का साक्षात्कार किया है। उन्होंने कहा कि यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि श्रद्धा, एकाग्रता और आत्मिक अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने माता-पिताओं से आग्रह किया कि वे आने वाली पीढ़ी को नवकार महामंत्र के अर्थ, मूल्य और आध्यात्मिक प्रभाव से परिचित कराएं, ताकि युवा वर्ग मानसिक तनाव, हिंसा और भटकाव से दूर रह सके।</p>
<p><strong>“परस्परोपग्रहो जीवनम्”: आज के युग का महामंत्र </strong></p>
<p>अपने संबोधन में राज्यपाल ने जैन दर्शन के मूल सूत्र “परस्परोपग्रहो जीवनम्” को आज के वैश्विक संदर्भ में व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि यह सूत्र केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति का घोषणापत्र है। सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं—यह भावना यदि समाज और राष्ट्रों के बीच विकसित हो जाए, तो संघर्ष, शोषण और युद्ध स्वतः समाप्त हो सकते हैं।</p>
<p>कटारिया ने कहा- सबसे पहले मैं समाज का श्रावक हूं, बाद में राज्यपाल। जीवन में जो भी अच्छा है, वह संतों और महापुरुषों की कृपा से मिला है। उन्होंने जैन संतों की तपस्या, साधना, पद विहार की अनुमोदना करते हुए कहा कि वास्तव में जैन संतों का जीवन त्यागमय होता है, और यही कारण है कि हमारा मस्तक भी संतों के चरणों में नतमस्तक होता है।</p>
<p>श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने अपने प्रवचन में नवकार महामंत्र की आध्यात्मिक महिमा को गहराई से प्रतिपादित किया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में नवकार महामंत्र को अनादि, अनंत और सर्वश्रेष्ठ मंत्र माना गया है। यह शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा की सतत प्रवाहित धारा है। उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह व्यक्ति-पूजा से ऊपर उठकर गुण-पूजा की प्रेरणा देता है। यह मंत्र आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सीधा मार्ग है। श्रद्धा और निष्ठा के साथ किया गया जाप पाप कर्मों की निर्जरा करता है, मन को शांति, साहस और आत्मबल प्रदान करता है तथा साधक को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। “यह सर्व मंगल मांगल्यम् है”—दिनेश मुनि का यह कथन पूरे आयोजन का सार बन गया।</p>
<p><strong>भक्ति, शांति और सामूहिक संकल्प</strong></p>
<p>महाजाप के दौरान लोक भवन में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में पूर्णतः डूबे दिखाई दिए। मंत्रोच्चार के प्रत्येक क्षण में अनुशासन, एकाग्रता और आंतरिक शांति का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिला। आयोजन का समापन विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, मानवता की रक्षा और अहिंसा के प्रसार के संकल्प के साथ हुआ। यह महाजाप केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आधुनिक समाज के लिए यह संदेश था कि आंतरिक शांति के बिना बाहरी शांति संभव नहीं है। नवकार महामंत्र की यह सामूहिक साधना मानवता को करुणा, संयम और सहअस्तित्व के पथ पर ले जाने का एक मौन लेकिन सशक्त आह्वान बनकर उभरी। उल्लेखनीय है कि सलाहकार दिनेश मुनि का दो दिवसीय प्रवास लोक भवन में रहा, जहां पर राज्यपाल सुश्रावक श्री गुलाबचंद कटारिया, धर्मपत्नी सुश्राविका अनीता कटारिया, शिवकुमार बागरेचा, राखी बागरेचा, मुकेश सांड, अणु सांड सहित कटारिया परिवार के सदस्यो ने गुरु सेवा भक्ति की।</p>
<p><strong>राज्यपाल ने दिनेश मुनि के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की</strong></p>
<p>समारोह के दौरान राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि का भव्य अभिनंदन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने दिनेश मुनि के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया। राज्यपाल ने इस क्षण को अपने लिए सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि मुनि श्री का सानिध्य प्राप्त कर वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।</p>
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		<title>मूक पशुओं की सेवा कर निभाया जीवदया का अनुपम कर्तव्य : सलाहकार दिनेश मुनि की प्रेरणा से एसएस जैन सभा मोहाली ने किया कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:39:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जब नववर्ष 2026 के स्वागत में देश-दुनिया आतिशबाज़ी, पार्टियों और भौतिक उल्लास में डूबी हुई थी, उसी समय मोहाली की धरती पर एक ऐसा दृश्य आकार ले रहा था, जो शांति, करुणा और अहिंसा के मूल्यों को जीवंत कर रहा था। जैन संत श्री जीनेश मुनि जी महाराज एवं श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जब नववर्ष 2026 के स्वागत में देश-दुनिया आतिशबाज़ी, पार्टियों और भौतिक उल्लास में डूबी हुई थी, उसी समय मोहाली की धरती पर एक ऐसा दृश्य आकार ले रहा था, जो शांति, करुणा और अहिंसा के मूल्यों को जीवंत कर रहा था। जैन संत श्री जीनेश मुनि जी महाराज एवं श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि जी महाराज की पावन प्रेरणा से एसएस जैन सभा, मोहाली ने नववर्ष का आरंभ सेवा और संवेदना के संकल्प के साथ किया। <span style="color: #ff0000">मोहाली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मोहाली।</strong> जब नववर्ष 2026 के स्वागत में देश-दुनिया आतिशबाज़ी, पार्टियों और भौतिक उल्लास में डूबी हुई थी, उसी समय मोहाली की धरती पर एक ऐसा दृश्य आकार ले रहा था, जो शांति, करुणा और अहिंसा के मूल्यों को जीवंत कर रहा था। जैन संत श्री जीनेश मुनि जी महाराज एवं श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि जी महाराज की पावन प्रेरणा से एसएस जैन सभा, मोहाली ने नववर्ष का आरंभ सेवा और संवेदना के संकल्प के साथ किया। सभा के अध्यक्ष अशोक जैन, पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि नववर्ष का स्वागत केवल आत्म केंद्रित आनंद से नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व निभाकर होना चाहिए। जीवदया को समर्पित अनेक सेवा कार्यक्रम किए। इस अवसर पर अपने आध्यात्मिक संबोधन में श्रमण संघीय सलाहकार दिनेश मुनि ने मूक पशुओं की सेवा को धर्म का सर्वाेच्च स्वरूप बताया। उन्होंने कहा, बेजुबान जानवरों की पीड़ा को समझना और विशेषकर इस कड़कड़ाती ठंड में उनके आहार की व्यवस्था करना ही वास्तविक सेवा धर्म है। जो जीव अपनी व्यथा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, उनके प्रति दया भाव रखना ही हमें श्रेष्ठ मानव बनाता है।</p>
<p><strong>विविध जीवदया उपक्रम</strong></p>
<p>नववर्ष के शुभारंभ पर इन कार्यक्रमों के तहत जीव-जंतुओं की प्रकृति के अनुसार उन्हें भोजन कराया गया। जिसमें गौ सेवा, गायों को पौष्टिक गुड़ और चारा, श्वानों के लिए ब्रेड, बिस्किट, पक्षियों के लिए बाजरा और चींटियों के लिए दाना (कसारी) और बंदरों के लिए केला अन्य फल दिए गए।</p>
<p><strong>स्व-अर्जित धन से अनूठी पहल</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इस पूरे सेवा कार्य के लिए किसी बाहरी चंदे का उपयोग नहीं किया गया। एसएस जैन सभा, मोहाली के सदस्यों ने अपनी मेहनत की कमाई (स्व-अर्जित धन) से सहयोग राशि एकत्रित की और इस सेवा उपक्रम को सफल बनाया। सदस्यों का मानना है कि अपनी नेक कमाई का एक हिस्सा परोपकार में लगाना ही धन की वास्तविक सार्थकता है।</p>
<p><strong>जैन दर्शन में जीवदया का महत्व</strong></p>
<p>जैन धर्म में ‘जीवदया’ को सर्वाेच्च पुण्य माना गया है। प्रत्येक जीव में आत्मा का वास मानने वाला जैन दर्शन सिखाता है कि सभी जीव जीना चाहते हैं, सुख चाहते हैं और दुख से बचना चाहते हैं।</p>
<p>इसी सिद्धांत को व्यवहार में उतारते हुए एसएस जैन सभा ने यह कार्यक्रम किया, जो केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन दर्शन का सजीव उदाहरण बन गया।</p>
<p><strong>भविष्य का संकल्प</strong></p>
<p>सभा के कोषाध्यक्ष सुरेश जैन ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर सभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि जीवदया, अहिंसा और सेवा के ऐसे कार्य केवल नववर्ष तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे वर्ष निरंतर चलते रहेंगे। इस अवसर पर एसएस जैन सभा, मोहाली के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। इन्होंने इस पुण्य कार्य को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।</p>
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