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	<title>Adinath Temple &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>बोली नहीं, बदलाव श्वेताम्बर जैन समाज की नई परिभाषा : समाज का पैसा शिक्षा और स्वास्थ्य पर होगा खर्च </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:21:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिले का छोटा सा कस्बा था सोजत। वहीं श्वेताम्बर जैन समाज का 400 साल पुराना आदिनाथ मंदिर था। संगमरमर की कारीगरी, सोने के कलश, चांदी के दरवाजे। हर साल महावीर जयंती पर आरती की बोली 7 लाख तक जाती थी। गांव वाले गर्व से कहते कि हमारे भगवान सबसे अमीर हैं। पाली से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिले का छोटा सा कस्बा था सोजत। वहीं श्वेताम्बर जैन समाज का 400 साल पुराना आदिनाथ मंदिर था। संगमरमर की कारीगरी, सोने के कलश, चांदी के दरवाजे। हर साल महावीर जयंती पर आरती की बोली 7 लाख तक जाती थी। गांव वाले गर्व से कहते कि हमारे भगवान सबसे अमीर हैं। <span style="color: #ff0000">पाली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पाली।</strong> जिले का छोटा सा कस्बा था सोजत। वहीं श्वेताम्बर जैन समाज का 400 साल पुराना आदिनाथ मंदिर था। संगमरमर की कारीगरी, सोने के कलश, चांदी के दरवाजे। हर साल महावीर जयंती पर आरती की बोली 7 लाख तक जाती थी। गांव वाले गर्व से कहते कि हमारे भगवान सबसे अमीर हैं। उसी कस्बे में रहता था 22 साल का विपुल जैन। पिता पापड़-बड़ी का ठेला लगाते थे। विपुल ने बी.टेक किया था, केट में 99 पर्सेंट आई थी। आईआईटी मुंबई में एमटेक का एडमिशन पक्का था। फीस 1.2 लाख सालाना। स्कॉलरशिप नहीं मिली। विपुल के पिता सेठ मोहनलाल जैन के पास गए। मोहनलाल ट्रस्ट के अध्यक्ष थे। हर साल आरती की बोली वही लगाते थे। सेठजी, बस 50 हजार का लोन दे दो, ब्याज समेत लौटा दूंगा। बेटा पढ़-लिखकर नाम करेगा। मोहनलाल ने सिर हिलाया, बेटा, ट्रस्ट का पैसा भगवान का है। वो सिर्फ धर्म के काम में लगता है। मंदिर का जीर्णाेद्धार चल रहा है। 15 लाख की नई प्रतिमा आ रही है। समझा कर। उसी रात विपुल ने सोजत छोड़ दिया। अहमदाबाद में एक फैक्ट्री में 12 हजार की नौकरी पकड़ ली। आईआईटी का सपना वहीं दम तोड़ गया।</p>
<p>3 साल बाद, 2026 की चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को सोजत के मंदिर में महावीर जन्म कल्याणक था। आरती की बोली शुरू हुई। 1 लाख, 2 लाख, मोहनलाल खड़े हुए 5 लाख एक रुपया। तभी पीछे से आवाज आई, 5 लाख 11 हजार। सबने पलटकर देखा। कोट-पैंट में विपुल खड़ा था। साथ में 4 लड़के-लड़कियां। मोहनलाल चौंके, तू? विपुल हाथ जोड़कर बोला, सेठजी, बोली मैं नहीं लगाऊंगा। बस आपसे 2 मिनट मांगता हूं। सभा शांत हुई। विपुल ने माइक संभाला और कहा कि 3 साल पहले मैं इसी मंदिर में 50 हजार मांगने आया था। नहीं मिले। मैं टूट गया था। फिर अहमदाबाद में मुझे माहेश्वरी समाज के एजुकेशन लोन फाउंडेशन का पता चला। उन्होंने बिना ब्याज 1.5 लाख दिए। शर्त सिर्फ एक थी कि पढ़कर 2 और बच्चों को पढ़ाना। मैंने आईआईटी किया। कैंपस में 28 लाख का पैकेज मिला। आज मैं बेंगलुरु में हूं। मेरे साथ ये चारों बच्चे खड़े हैं। रेखा, इसके पिता हमारे मंदिर में सफाई करते हैं। रमेश, इसकी मां विधवा है, लोगों के घर बर्तन मांजती है। दोनों को मैंने केट की कोचिंग दिलवाई। आज रेखा आईआईएम अहमदाबाद में है, रमेश आईआईएम कलकत्ता में।</p>
<p>सभा में सन्नाटा था। विपुल रुका नहीं। श्वेताम्बर परंपरा ने हमें अपरिग्रह सिखाया- जरूरत से ज्यादा मत जोड़ो। अनेकांतवाद सिखाया- सबका दृष्टिकोण समझो। भगवान महावीर ने राजपाट छोड़कर सत्य खोजा, महल नहीं बनवाए। उन्होंने कहा था- जीवदया सबसे बड़ा धर्म है। तो बताइए सेठजी, क्या भगवान 15 लाख की मूर्ति से ज्यादा खुश होंगे या रेखा के आईआईएम जाने से? क्या सोने के कलश पर चढ़ा घी, रमेश की किताबों पर खर्च हुए पैसों से ज्यादा पवित्र है? मोहनलाल की आंखें झुकी थीं। विपुल ने जेब से चेक निकाला। ये 5 लाख 11 हजार की बोली मैं मंदिर में नहीं लगा रहा। आज हम 5 लोग मिलकर सोजत श्वेताम्बर शिक्षा निधि शुरू कर रहे हैं। इसमें पहला दान मेरा है। इसका ब्याज नहीं होगा। सिर्फ एक वचन होगा- लेने वाला कल 2 और को देगा। अग्रवाल समाज अस्पताल बनाता है। माहेश्वरी समाज स्टार्टअप फंड देता है। राजपुरोहित समाज यूपीएससी कोचिंग चलाता है। सीरवी समाज लॉजिस्टिक हब बना रहा है। तो हम जैन, जिनका मूल मंत्र ही जियो और जीने दो है, सिर्फ पत्थर पर पैसा क्यों लुटाएं? मैं आरती की बोली का विरोधी नहीं। पर जब मेरे समाज का बच्चा फीस के लिए रोए, और हम लाखों की प्रतिमा मंगवाएं- तो वो धर्म नहीं, दिखावा है। तीर्थंकरों ने हमें त्याग सिखाया था, तिजोरी भरना नहीं। सभा में सबसे पहले हाथ चौधरी साब ने उठाया। सीरवी समाज के मुखिया थे। विपुल बेटा, मेरी तरफ से 2 लाख इस निधि में। मेरा पोता भी तेरे साथ आईआईटी में पढ़ता है। फिर माहेश्वरी समाज के व्यापारी बोले कि हमारे कॉमर्स कॉलेज में जैन बच्चों को 50 प्रतिशत स्कॉलरशिप। मोहनलाल उठे। आंखें नम थीं। 70 साल के जीवन में पहली बार वो मंच पर लड़खड़ाए। विपुल, आज तूने मेरी आंखें खोल दी। 40 साल से मैं बोली लगाता आया। सोचा पुण्य मिल रहा है। पर असली पुण्य तो तेरे चेहरे पर है। उन्होंने माइक लिया, ष्आज से सोजत श्वेताम्बर ट्रस्ट का 60 प्रतिशत पैसा शिक्षा और स्वास्थ्य पर लगेगा। 40 प्रतिशत मंदिर रखरखाव पर और हां, श्जैन लोन फाउंडेशनश् आज से ही शुरू। पहला लोन रेखा की छोटी बहन को -एमबीबीएस की फीस के लिए। पूरी सभा खड़ी होकर ताली बजा रही थी। घंटियों की आवाज के बीच एक नई आरती शुरू हो चुकी थी &#8211; आत्मनिर्भरता की आरती।</p>
<p><strong>’6 महीने बाद का सोजत’</strong></p>
<p>मंदिर वही था। पर अब उसके पीछे महावीर कोचिंग सेंटर चलता था। 80 बच्चे फ्री में पढ़ते थे। 12 बच्चे नीट जेईई निकाल चुके थे। ट्रस्ट ने 3 परिवारों को बिजनेस लोन दिया था। एक पापड़ का कारखाना, एक केमिकल यूनिट, एक डिजिटल मार्केटिंग फर्म।</p>
<p>दीवाली पर मोहनलाल ने घोषणा कीरू ष्इस साल आरती की बोली नहीं होगी। बोली लगेगी संकल्पों की। कौन कितने बच्चों को पढ़ाएगा, कितने रोजगार देगा- उसकी बोली लगेगी। विपुल दिवाली पर सोजत आया। मंदिर में नई संगमरमर की पट्टिका लगी थी। लिखा था- न स देवेसु बंदामि, जे अन्नं न पहावए। जो दूसरों को आगे न बढ़ाए, मैं उस देव को नहीं पूजता। नीचे छोटा लिखा था-सोजत श्वेताम्बर शिक्षा निधिः 1.2 करोड़, लाभार्थी: 47 छात्र। मोहनलाल ने विपुल को गले लगाया। बेटा, तूने साबित कर दिया- भगवान मूर्ति में नहीं, मजबूर की मदद में बसते हैं। हमने सालों सोने के सिंहासन पर भगवान बिठाए। तूने भगवान को बच्चों की किताबों में बिठा दिया।</p>
<p><strong>श्वेताम्बर जैन दृष्टि से</strong></p>
<p>श्वेताम्बर आगमों में दान को 4 प्रकार का बताया है- आहार दान, औषध दान, ज्ञान दान, अभय दान। ज्ञान दान को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। भगवान महावीर स्वयं राजा के पुत्र थे। उन्होंने महल, हीरे, सेना सब त्यागकर श्केवलज्ञानश् चुना।</p>
<p>आज जब हम 10 लाख की बोली लगाकर क्षणिक अहंकार तुष्ट करते हैं, तब हम महावीर के ‘अपरिग्रह व्रत के उलट चलते हैं। मंदिर बनाना गलत नहीं- पर मंदिर के बाहर खड़ा भूखा, बेरोजगार, अशिक्षित जैन युवा, उस संगमरमर से ज्यादा महत्वपूर्ण है। श्वेताम्बर परंपरा संघ को महत्व देती है। संघ यानी साथ चलना। अगर संघ का एक सदस्य पीछे छूट जाए, तो पूरी यात्रा अधूरी है। बोली नहीं, बदलाव का मंत्र यही है- पैसा वहीं लगे जहां से अगला महावीर, अगला आर्य सुधर्मा, अगला वैज्ञानिक, अगला उद्यमी निकले। धर्म वो नहीं जो दीवारों को सोने से मढ़ दे। धर्म वो है जो इंसान के भविष्य को रोशन कर दे। क्योंकि अंत में तीर्थंकर भी यही पूछेंगे-मेरे नाम पर कितने दीप जलाए? नहीं। मेरे बताए रास्ते पर कितने जीवन संवारे? तो फैसला हमें करना है- पत्थर पूजने हैं या भविष्य गढ़ने है ? आरती की बोली लगानी है या आत्मनिर्भरता की नींव रखनी है? जवाब मंदिर की घंटियों में नहीं, एक बच्चे की मुस्कान में मिलेगा।</p>
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		<title>जीवन में अनुशासन संस्कार से होती है सुख शांति : आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने श्यामनगर में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:49:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्याम नगर जयपुर के आदिनाथ मंदिर में प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मैत्री, अनुशासन, संस्कार, जीवन शैली में बदलाव आदि बातों पर उपदेश में बताया कि सभी जीवों से मैत्री” छोटा हो या बड़ा, मनुष्य हो या तिर्यंच (पशु-पक्षी) देव हो या अन्य जीव सबके प्रति एक ही भावना-सभी सुखी रहें। जयपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्याम नगर जयपुर के आदिनाथ मंदिर में प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मैत्री, अनुशासन, संस्कार, जीवन शैली में बदलाव आदि बातों पर उपदेश में बताया कि सभी जीवों से मैत्री” छोटा हो या बड़ा, मनुष्य हो या तिर्यंच (पशु-पक्षी) देव हो या अन्य जीव सबके प्रति एक ही भावना-सभी सुखी रहें। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। श्याम नगर जयपुर के आदिनाथ मंदिर में प्रवचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मैत्री, अनुशासन, संस्कार, जीवन शैली में बदलाव आदि बातों पर उपदेश में बताया कि सभी जीवों से मैत्री” छोटा हो या बड़ा, मनुष्य हो या तिर्यंच (पशु-पक्षी) देव हो या अन्य जीव सबके प्रति एक ही भावना-सभी सुखी रहें। मित्रता सीमित होती है (कुछ लोगों तक), उसमें शत्रुता भी हो सकती है लेकिन मैत्री सर्वव्यापी (सबके लिए) इसमें किसी के प्रति बैर नहीं होता। घर से ही शुरू होती है साधना हम बाहर तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन घर में ही झगड़े होते हैंपति-पत्नी में मतभेद परिवार में टकराव जब घर में शांति नहीं तो बाहर की बातें व्यर्थ हैं।</p>
<p><strong>पहले सादगी थी मर्यादा थी</strong></p>
<p>सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य श्री ने आगे कहा कि अनुशासन जीवन शास्त्र के अनुसार चलना चाहिए। जब जीवन में अनुशासन होगा तब ही सुख और शांति आएगी। बिना अनुशासन टकराव और अशांति निश्चित है। हमारी जीवन शैली भी बदल गई है। चूल्हा, गैस से श्रम कम होकर आराम होकर व्यायाम के अभाव में शरीर कमजोर (जैसे घुटनों की समस्या) हो रहा है। अपने घर का वातावरण कैसा है? शांति है या तनाव? संस्कार हैं या केवल सुविधा? पहले सादगी थी,मर्यादा थी ,आज टीवी, मोबाइल, सुविधाएँ लेकिन, इनका सही उपयोग ही लाभकारी है। बच्चों को कैसे संस्कारित करें। बच्चों को उपदेश से नहीं अपने आचरण से सिखाएं खुद मोबाइल छोड़ेंगे,बच्चे सीखेंगे, खुद संयम रखेंगे, बच्चे अपनाएंगे। भोजन करते समय ध्यान होना चाहिए तभी स्वाद और स्वास्थ्य दोनों मिलते हैं। जब आपका जीवन आदर्श बनेगा लोग अपने आप प्रेरित होंगे धर्म केवल बोलने की चीज नहीं जीने की चीज है।</p>
<p><strong>अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं</strong></p>
<p>मैत्री भाव अपनाओ घर से शुरुआत करो बच्चों को आचरण से सिखाओ याद रखें। पहले स्वयं बनो, फिर संसार बदलेगा संघस्थ आर्यिका महायशमती माताजी ने प्रवचन में श्रावक, श्राविकाओं के कर्तव्य, आने वाली पीढ़ी के प्रति दायित्व, देव दर्शन धर्म के संस्कार आदि पर सरल भाषा में प्रभावी उपदेश में बताया कि आप सभी यहां अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं। जब से आचार्य श्री का जयपुर महानगर में पदार्पण हुआ है, तब से निरंतर ज्ञान की गंगा प्रवाहित हो रही है और आप सभी उस ज्ञान में डुबकी लगाकर अपने जीवन को पावन बना रहे हैं। श्रावक-श्राविकाओं के मुख्य कर्तव्य हैं-देव पूजा, गुरु भक्ति (वैयावृत्य)। श्याम नगर में यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता होती है कि यहां जिनागम अनुसार अभिषेक, पूजन और आराधना की परंपरा निरंतर चल रही है। आने वाली पीढ़ी के लिएअब हमारा कर्तव्य है कि अपने बच्चों को धर्म से जोड़ें। उन्हें प्रतिदिन जिनेंद्र भगवान के दर्शन कराएं ।</p>
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		<title>पंच कल्याण प्रतिष्ठा वार्षिक महोत्सव में उमड़े श्रद्धालु: 52 डेरी जिनालय पर नवीन धर्म ध्वजा लगाई </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:14:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में मुनिश्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मान स्तंभ पंच कल्याण प्रतिष्ठा वार्षिक उत्सव के तहत मंगलवार सुबह आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया में विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। नोगामा से पढ़िए, सुरेशचंद गांधी की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में मुनिश्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मान स्तंभ पंच कल्याण प्रतिष्ठा वार्षिक उत्सव के तहत मंगलवार सुबह आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया में विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">नोगामा से पढ़िए, सुरेशचंद गांधी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> नगर में मुनिश्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या सिद्ध श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मानस स्तंभ पंच कल्याण प्रतिष्ठा वार्षिक उत्सव के तहत मंगलवार सुबह आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया में विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। इसके बाद माताजी के मुखारविंद से मानव स्तंभ में स्थित चारों प्रतिमाओं का अभिषेक कर शांतिधारा 108 कलशों से की गई। प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य गांधी मनीष कुमार, सुरेशचंद्र ,सुभाष नानावटी , विपुल पंचोरी, लक्ष्मी पिंडारमिया, निलेश जीतमल को प्राप्त हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर मानव स्तंभ पर धर्म ध्वजा दीपक कुमार पंचोरी, अमृतलाल को चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। माताजी को जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य गीतांश पंचोलीए विपुल को प्राप्त हुआ एवं 52 डेरी जिनालय पर नवीन धर्म ध्वजा लगाई गई। शाम को मंदिरजी में 48 दीप विधान के दीप प्रज्वलित किय गए। संचालन रमेशचंद्र गांधी ने किया।</p>
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		<title>रामगंजमंडी में आदिनाथ मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आगाज : पहले दिन पूजन, ध्वजारोहण और आचार्य श्री के प्रवचनों से गूंजा वातावरण </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 03:35:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में आदिनाथ मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन विविध धार्मिक अनुष्ठान, ध्वजारोहण और आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वर के प्रवचन हुए। पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी आशीर्वाद लिया। पूरे दिन भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;.. रामगंजमंडी के बाजार नंबर 3 स्थित भगवान आदिनाथ मंदिर के प्रतिष्ठा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी में आदिनाथ मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रथम दिन विविध धार्मिक अनुष्ठान, ध्वजारोहण और आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वर के प्रवचन हुए। पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी आशीर्वाद लिया। पूरे दिन भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;..</span></strong></p>
<hr />
<p>रामगंजमंडी के बाजार नंबर 3 स्थित भगवान आदिनाथ मंदिर के प्रतिष्ठा महोत्सव का प्रथम दिन भक्ति और उल्लास के साथ शुरू हुआ। सुबह से ही कुम्भ स्थापना, दीप स्थापना, ज्वारारोपण, नवग्रह, अष्ट मंगल सहित कई पूजन विधिवत सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>दादाबाड़ी की ध्वजा चढ़ी, श्रद्धा उमड़ी</strong></p>
<p>मंदिर परिसर में जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी की वार्षिक ध्वजा भी धूमधाम से चढ़ाई गई। ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य पालेचा परिवार नैनवा वालों को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>पूर्व विधायक ने लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>कार्यक्रम में पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने पहुंचकर आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वर से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि संतों की भक्ति ही सच्ची भक्ति है और उनके सानिध्य में ही भगवान के दर्शन होते हैं।</p>
<p><strong>आचार्य श्री के प्रेरक प्रवचन</strong></p>
<p>आचार्य मणिप्रभ सुरीश्वर ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में निराशा नहीं, बल्कि धैर्य और पुरुषार्थ जरूरी है। उन्होंने करुणा, सेवा और निस्वार्थ भाव को जीवन का आधार बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा—भगवान के सामने याचक नहीं, बल्कि सच्चे भक्त बनकर जाओ।</p>
<p><strong>आंख और दर्पण का अनोखा उदाहरण</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आंख और दर्पण का अंतर बताते हुए कहा कि दुनिया को दर्पण की तरह देखो, लेकिन परमात्मा को कैमरे की तरह अपने मन में बसाओ। यही सच्ची भक्ति है।</p>
<p><strong>प्रतिभाओं और सहयोगियों का सम्मान</strong></p>
<p>कार्यक्रम में भजन गायकों और सहयोग देने वाले समाजसेवियों का सम्मान भी किया गया। साथ ही जाजम की बोली का लाभ रांका परिवार ने लिया।</p>
<p><strong>शोभायात्रा की तैयारी जोरों पर</strong></p>
<p>ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि मंगलवार सुबह भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊंट और बैंड आकर्षण का केंद्र होंगे।</p>
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		<title>मुनि श्री के सानिध्य में भगवान मल्लिनाथ के मोक्ष कल्याण पर निर्वाण लाडू चढ़ाया : मंदिर में भक्तामर दीप के 48 दीप प्रज्वलित किए </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 14:42:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान मल्लिनाथ के मोक्ष कल्याण के उपलक्ष्य में रविवार को आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांतिधारा अभिषेक के मुनि श्री के सानिध्य में हुई। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230;   नौगामा। भगवान मल्लिनाथ के मोक्ष कल्याण के उपलक्ष्य में रविवार को आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान मल्लिनाथ के मोक्ष कल्याण के उपलक्ष्य में रविवार को आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांतिधारा अभिषेक के मुनि श्री के सानिध्य में हुई। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  नौगामा।</strong> भगवान मल्लिनाथ के मोक्ष कल्याण के उपलक्ष्य में रविवार को आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी विशेष शांतिधारा अभिषेक के मुनि श्री के सानिध्य में हुई। अभिषेक करने का प्रथम सौभाग्य मेहता निलेश बडौदा,अनिल जैन मुंबई वालों को प्राप्त हुआ। इस अवसर बड़े भक्ति भाव से भगवान विमलनाथ का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य मुंबई वालों को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर रविवार को जैन पाठशाला के बच्चों द्वारा भगवान मल्लिनाथ की पूजन बड़े भक्ति भाव से वाद्य यंत्रों के मधुर स्वर लहरों के साथ नानावटी कुसुमलता वीणा दीदी के सानिध्य में की गई एवं छात्रों को पंचोरी कैलाश मोदी की ओर से पारितोषिक दिया गया।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मल्लिनाथ 19 वें तीर्थंकर हैं और भगवान का मोक्ष सम्मेद शिखर तीर्थ पर हुआ। मल्लिनाथ भगवान का चिन्ह कलश मुनिश्री ने लघु सम्मेद शिखर की वंदना की। मुनि श्री ने कहा कि यहां तीर्थ क्षेत्र साधु संतों के आराधना स्थल है। इस तीर्थ क्षेत्र पर नवनिर्माण अधीन भगवान मुनि सुव्रतनाथ का जिनालय शीघ्र बनकर तैयार हो जाए एवं प्रभु की प्रतिमा शीघ्र विराजमान हो, ऐसा हमारा आशीर्वाद है। शाम को मंदिर में भक्तामर दीप के 48 दीप प्रज्वलित किए गए।</p>
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		<title>भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू चढ़ाया : जैन पाठशाला के छात्रों ने 48 दीप विधान किया  </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 09:00:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदेय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांतिधारा और अभिषेक किया गया। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230; नौगामा। भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदेय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदेय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांतिधारा और अभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> भगवान मुनि सुव्रतनाथ जी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदेय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांतिधारा और अभिषेक किया गया। अभिषेक करने का प्रथम सौभाग्य जयेशकुमार शांतिलाल को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर बड़े भक्ति भाव से भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाने का प्रथम सौभाग्य महिला मंडल नौगामा, पंचोरी हेमलता सुभाषचंद्र, महावीर ट्रेडर्स को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर बड़े भक्ति भाव से वाद्य यंत्रों के मधुर स्वर लहरियों के साथ वीणा दीदी के सानिध्य में भगवान मुनिसुव्रतनाथजी का पूजन किया गया। इस अवसर पर पर विधानाचार्य रमेशचंद्र गांधी ने बताया कि नौगामा नगर का यह गौरव है कि सुखोदय तीर्थ नसिया जी में फीट नवनिर्माण जिनालय बन रहा है। जिसमें 15 फीट के काले पाषाण की पद्मासन प्रतिमा शीघ्र ही विराजमान होगी। सभी से भावना भाते हैं कि यहां जिनालय शीघ्र बनकर प्रतिष्ठा हो ऐसी हमारी भावना है। शाम को जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा 48 दीप विधान के 48 दीप प्रज्वलित किए गए।</p>
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		<title>आदिनाथ मिलन महिला मंडल की एक दिवसीय धार्मिक यात्रा: बनेडियाजी में भगवान अजितनाथ विधान में लिया हिस्सा  </title>
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		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 14:18:54 +0000</pubDate>
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<p><strong>आदिनाथ मिलन महिला मंडल द्वारा एक दिवसीय तीर्थ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का आरंभ प्रातः मिलन हाईट्स स्थित आदिनाथ मंदिर से हुआ। बनेडियाजी पहुंचने पर पंडितजी के सान्निध्य में अजितनाथ विधान अत्यंत विधि एवं भावपूर्ण रूप से संपन्न कराया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, रुचि चौविश्या की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। आदिनाथ मिलन महिला मंडल द्वारा एक दिवसीय तीर्थ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का आरंभ प्रातः मिलन हाईट्स स्थित आदिनाथ मंदिर से हुआ। बनेडियाजी पहुंचने पर पंडितजी के सान्निध्य में अजितनाथ विधान अत्यंत विधि एवं भावपूर्ण रूप से संपन्न कराया गया। इसके पश्चात भोजन का कार्यक्रम हुआ। सभी सदस्य गुलावट पहुंची, जहां तालाब भ्रमण किया गया तथा नौका विहार का आनंद लिया गया। वहां से आगे कल्पतरु एवं समर्थ सिटी स्थित जैन मंदिरों में भक्ति की गई। क्रमशः ढाई द्वीप में दर्शन एवं भक्ति की गई तथा इसके उपरांत सुमति धाम और मलयगिरि मंदिर में आराधना की गई। इस तीर्थ यात्रा में निहारिका जैन, रीता जैन, मिल्की जैन, संध्या जैन, रागिनी जैन, रजनी जैन, सुनीता पड़लिया, विद्या जैन, कुमुद जैन, अनीता जैन, रेणु जैन, किरण दोषी, अंजू जैन, कविता जैन, भारती लुहाडिया, राजकुमारी जैन, रजनी समैया, शकुन जैन, सोनू जैन, अल्पना जैन एवं रुचि चोविश्या जैन ने भाग लिया। यह यात्रा धार्मिक आस्था, अनुशासन एवं सामूहिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनी।</p>
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		<title>मुनि श्री विनम्र सागर जी के सानिध्य में चढ़ाया निर्वाण लाडू: सुखोदय तीर्थ में पूजन, अभिषेक के साथ विविध धार्मिक क्रियाएं हुई  </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Oct 2025 11:52:53 +0000</pubDate>
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<p><strong>मुनि श्री विनम्रसागर जी का मंगल प्रवेश बागीदौरा से नौगामा में गुरुवर को प्रातः बैंडबाजों के साथ जनसमूह द्वारा अगवानी की गई। मुनि श्री ने भगवान महावीर समवशरण मंदिर, आदिनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन किए। वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के दर्शन अभिभूत हुए। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद गांधी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> मुनि श्री विनम्रसागर जी का मंगल प्रवेश बागीदौरा से नौगामा में गुरुवर को प्रातः बैंडबाजों के साथ जनसमूह द्वारा अगवानी की गई। मुनि श्री ने भगवान महावीर समवशरण मंदिर, आदिनाथ मंदिर में भगवान के दर्शन किए। वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के दर्शन अभिभूत हुए। विशाल जनसमूह के साथ महाराज श्री सुखोदय तीर्थ पहुंचे। जहां पर 24 टोंक मुख्य मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा आदि के दर्शन कर भगवान मुनिसुव्रत नाथ मंदिर शीघ्र बने। इसके लिए आशीर्वाद प्रदान किया। ध्वजारोहण करने का सौभाग्य पिंडारमियां प्रदीप रतनलाल मोहनलाल मीठालाल परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>तत्पश्चात गीतकार की मधुर स्वर लहरियों के साथ भगवान का अभिषेक किया गया। अभिषेक करने का सौभाग्य नंदन जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद दीप प्रज्वलन किया गया। विधानाचार्य रमेशचंद्र गांधी के दिशा निर्देशन में भगवान महावीर स्वामी एवं आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज की पूजन बड़े भक्ति भाव से महिलाओं ने गरबा नृत्य करते हुए विभिन्न गांव से पधारे हुए धर्मप्रेमी बंधुओं द्वारा अष्ट द्रव्य के थाल सजाकर नाचते-गाते हुए अर्घ्य चढ़ाए। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीय, प्रधान सुभाष खराड़ी, ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश सुथार, सरपंच नरेश परमार का आगमन हुआ। सभी अतिथियों को दुपट्टा औढ़ाकर समाज द्वारा सम्मान किया गया।</p>
<p>भरडा केसरीमल हीरालाल डडूका ने लाडू के लिए राशि भेंट की। निर्वाण कांड पूजा के बाद बड़े भक्ति भाव से पधारे हुए धर्म प्रेमी बंधुओं द्वारा निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इस अवसर पर जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। दिगंबर जैन समाज द्वारा वात्सल्य भोज दिया गया। आभार कोषाध्यक्ष रमणलाला जैन और सुभाष चंद्र नानावटी ने माना।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ में 3 नवंबर को पीछी परिवर्तन : 7 से 12 नवंबर तक टोंक में होगा पंच कल्याणक महोत्सव </title>
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		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 11:26:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[टोंक में 3 नवंबर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ के सानिध्य में पीछी परिवर्तन समारोह आयोजित होगा। इसके बाद 7 से 12 नवंबर तक पंच कल्याणक महोत्सव संपन्न होगा। आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज द्वारा दीक्षा प्राप्त साधु-आर्यिका एवं समाज की सहभागिता से यह आयोजन होगा। पढ़िए राजेश पंचोलिया की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>टोंक में 3 नवंबर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ के सानिध्य में पीछी परिवर्तन समारोह आयोजित होगा। इसके बाद 7 से 12 नवंबर तक पंच कल्याणक महोत्सव संपन्न होगा। आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज द्वारा दीक्षा प्राप्त साधु-आर्यिका एवं समाज की सहभागिता से यह आयोजन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>आत्मा पर कर्मों के आश्रव से संसार में परिभ्रमण होता है, और संयम तथा दीक्षा अपनाना ही सही मार्ग है। आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज ने बताया कि मुनि अवस्था में उन्हें श्री महावीर स्वामी के दर्शन प्राप्त हुए। द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी की अनायास समाधि के बाद, आचार्य श्री धर्म सागर जी तृतीय पट्टाधीश नियुक्त हुए और 24 फरवरी 1969 को 11 व्यक्तियों को दिगंबर दीक्षा दी गई।</p>
<p>आचार्य श्री धर्म सागर जी ने अनेक नगरों में दीक्षाएं दी और सन 1987 में सीकर में अघोषित संलेखना के दौरान साधु जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने सदैव जैन समाज के हितों की रक्षा की और समाधि स्थल के नवीनीकरण की प्रेरणा दी।</p>
<p>टोंक नगर में 7 से 12 नवंबर तक पंच कल्याणक प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाएगा। आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ के सानिध्य में श्रेष्ठी श्री मोहनलालजी जैन पुना छामुनिया को “वात्सल्यभक्त” की उपाधि से सम्मानित किया गया।</p>
<p>पंचकल्याणक समिति के पदाधिकारियों ने सम्पूर्ण जैन समाज को कार्यक्रम में सादर आमंत्रित किया। 3 नवंबर को श्री आदिनाथ नसिया में 34 साधुओं के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा पीछी परिवर्तन किया जाएगा।</p>
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		<title>नौगामा में रथोत्सव बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया; विशाल शोभायात्रा, पूजन और सम्मान समारोह के साथ आयोजन </title>
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		<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 14:11:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नौगामा नगर में भगवान आदिनाथ और भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं के साथ रथोत्सव बड़े धूमधाम और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। शोभायात्रा, पूजन, गरबा नृत्य और सम्मान समारोह ने आयोजन को भव्य बना दिया। पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट… नौगामा, जिला बांसवाड़ा। नौगामा नगर में आज रथोत्सव बड़े हर्ष और उल्लास के साथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नौगामा नगर में भगवान आदिनाथ और भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं के साथ रथोत्सव बड़े धूमधाम और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। शोभायात्रा, पूजन, गरबा नृत्य और सम्मान समारोह ने आयोजन को भव्य बना दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा, जिला बांसवाड़ा।</strong> नौगामा नगर में आज रथोत्सव बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रातः श्री 1008 आदिनाथ मंदिर, महावीर समवशरण और सुखखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष शांतिधारा अभिषेक के बाद भगवान आदिनाथ और भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं को गढ़गोटी रथ में विराजमान कर बैंड-बाजों के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई।</p>
<p>यह शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पंडाल तक पहुंची। वहां भगवान आदिनाथ और पार्श्वनाथ का पूजन ब्रह्मचारी संदीप भैया और सांगानेर संस्थान से पधारे अनुभव शास्त्री के सान्निध्य में वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनियों के बीच संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>केसरिया वस्त्र धारण कर गरबा नृत्य </strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन पाठशालाओं की अध्यापिकाओं तथा इस वर्ष 5, 10 और 16 उपवास करने वाले धर्मप्रेमियों को दुपट्टा और माला पहनाकर सम्मानित किया गया। दोपहर 1 बजे काष्ठ निर्मित गढ़गोटी रथ पर धर्म ध्वजा सजाकर पुनः शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें पुरुषों ने सफेद और महिलाओं ने केसरिया वस्त्र धारण कर गरबा नृत्य प्रस्तुत किया।</p>
<p>शोभायात्रा समवशरण मंदिर परिसर पहुंची, जहां अष्टद्रव्य से पूजन अर्पित किया गया। इसके बाद शोभायात्रा तालाब बस स्टैंड पहुंची, जहां पूजन भैया जी का सम्मान समारोह और फूलमाला की बोली हुई। पहली बोली का सौभाग्य प्रसुख खुशपाल मगनलाल गांधी और उत्सव हीरालाल परिवार को प्राप्त हुआ। शोभायात्रा नगर की गलियों से होती हुई भगवान के जयकारों के साथ आदिनाथ मंदिर लौटी, जहां रथ भंडार किया गया। इसके उपरांत वात्सल्य भोजन आयोजित हुआ। नवयुवक मंडल और बालिका मंडल द्वारा समवशरण मंदिर दर्शन के साथ शोभायात्रा का समापन हुआ।</p>
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