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	<title>Acharyashree Viragsagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Acharyashree Viragsagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी का 33वां आचार्य पदारोहण मनाया: चित्र का अनावरण कर आचार्य भक्ति की  </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 09:35:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धार शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। धार से पढ़िए, साभार यह खबर&#8230; धार। शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धार शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। <span style="color: #ff0000">धार से पढ़िए, साभार यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धार।</strong> शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। कार्यक्रम का आरंभ अद्विता व अद्वेत के मंगलाचरण नृत्य से हुई। इसके बाद छाबड़ा परिवार ने आचार्यश्री के चित्र का अनावरण कर द्वीप प्रज्वलन किया। पाद प्रक्षालन कर उन्हें जिनवाणी भेंट की गई। आचार्यश्री के जीवन प्रसंग के बारे में बताया गया कि वे मात्र 17 वर्ष की आयु में गृह त्यागर कर संयम के मार्ग पर चले थे। 1983 में दीक्षा धारण की और 1992 में आचार्य पद आदि की विभिन्न ऐतिहासिक घटनाएं सामने आईं।</p>
<p>आचार्यश्री ने तीन सौ से अधिक संयमियों को दीक्षा प्रदान की और 170 मुनि वृतियों को सल्लेखना समाधि करवाई। आज उनके शिष्य पूरे देश में जैन धर्म की प्रभावना और प्रचार-प्रसार में अनवरत लगे हैं। छाबड़ा परिवार ने चातुर्मास में मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त किया था। इस अवसर पर उन्होंने गुरुदेव की सेवा में विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष श्रेणिक गंगवाल, सचिव संजय छाबड़ा सहित अन्य समाजजन और गुरु भक्त मौजूद रहे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को मुनिराजों ने प्रस्तुत की विनयांजलि: भक्ति भाव से आचार्यश्री का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया  </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 11:39:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> तप, साधना एवं त्याग के लिए जाने वाले इस नगर में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। नगर में पद विहार के पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज ससंघ एवं नगर में चातुर्मास रत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। जिसमें पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने करने का सौभाग्य श्रीकांत जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस क्रम में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज एवं युगल मुनिराज के सानिध्य में आचार्य छत्तीसी विधान रचाया गया। जिसमें उपाध्याय मुनि श्री द्वारा प्रत्येक अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया। कुल 36 अर्घ्य समर्पित किए गए। उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य खुशकवर बाई सुरेशचंद पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनि श्री निर्वेद सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विपिनकुमार संजयकुमार बदूद परिवार तथा मुनि श्री साध्य सागरजी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल वैभव सराफ परिवार को एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल कुमार बारिश कुमार बदूद परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विराजमान मुनि श्री निर्वेद सागर जी, मुनि श्री साध्य सागर जी, मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने आचार्य श्री विरागसागर जी के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p><strong>मुनिराजों ने विनयांजलि में किया गुरु का गुणानुवाद </strong></p>
<p>उपाध्याय मुनि श्री ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि में कहा कि उन्होंने सभी मुनिराजों के साथ आनंद और वात्सल्य के साथ रहना सिखाया है। इस युग प्रतिक्रमण करवाने वाले आचार्य परमेष्टी थे तो वो आचार्य विराग सागर जी महाराज थे। जिन्होंने प्राचीन परंपराओं का उद्वहन पुनः किया है जिससे संघ इकट्ठा होता था। एक बात ध्यान रखना जो काम धन भी नहीं करता वो काम आचार्य श्री ने करके दिखाया। आप ने छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दीक्षा लेने वाले उपकारियों पर उपकार किया। वास्तव में वो बुजुर्गाें के देवता कहलाते थे। आप ने कहा कि समाधि मरण कैसे किया जाता है, आचार्य पद कैसे छोड़ा जाता है, संघ व्यवस्थित कैसे किया जाता है, अगर किसी से सीखना हो तो ये आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज ने कर दिखाया। आचार्य भगवन के गुण भी अनंत है, आप के उपकार भी अनंत है। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, कमल केके ब्रह्मचारी पारस भैया, अर्पित भईया द्वारा सुमधुर भजन एवं भक्तिकर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी किए केशलोच </strong></p>
<p>दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नहीं रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केशलोच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमंे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोंच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है। जिसके प्रायश्चित स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हैं जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नहीं रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं।</p>
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		<title>भगवान से बड़ा है गुरु का पद, जो उनके निकट ले जाते हैं: सनावद में विनयांजलि और गुणानुवाद सभा हुई </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 10:36:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में हेमंत काका, वीरेंद्र बाबा, प्रवीण जैन, सुनील पांवणा, नवनीत जैन, सुरेश मुंशी ,सुनील मास्टर साब, हर्षित जैन ने श्री जी का पंचामृत अभिषेक कर शांति धारा की। संत निलय में समाधि दिवस एवं अवतरण दिवस पर सभा का शुभारंभ आचार्य विराग सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष प्रदीप पंचोलिया, कमल केके, सुदेश जटाले, प्रशांत जैन, संगीता पाटोदी ने दीप प्रज्वलन कर किया। मंगलाचरण प्रदीप पंचोलिया ने किया।</p>
<p>आचार्य विराग सागर जी महाराज का पूजन किया गया। जिसमें समाज के सभी उम्र वर्ग के सदस्यों ने अलग-अलग क्रम में अर्घ्य समर्पित किए। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी का अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य मधु निर्मलचंद भूच परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिराजों के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने सौभाग्य अक्षयकुमार सराफ एवं संजयकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>समाजजनों ने किया गुणानुवाद </strong></p>
<p>इस अवसर पर राजेंद्र जैन महावीर ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के प्रति अपनी विनयांजलि एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज के प्रति अपना गुणानुवाद प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस प्रकार विश्व को सूर्य राह दिखाता है। सूर्य पथ प्रदर्शित करता है। ऐसे ही मुनि विश्व सूर्य सागर जी महाराज अपनी चर्या के माध्यम से साम्य स्थापित करते हुए हम सब को उपदेश दे रहे है। जैन ने आचार्य विराग सागर जी के जीवन पर प्रकाश डाल अपने अनुभव साझा किए। इसी क्रम में नरेंद्र भारती,अनुभव जैन, संगीता पाटोदी, प्रशांत जैन ने भी अपनी विनयांजलि एवं मुनिश्री का गुणानुवाद किया।</p>
<p><strong>आपके नगर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री साध्य सागर जी ने कहा की आज वो दिन है। जिसमें जैन धर्म की धरोहर में वृद्धि हुई थी। आज के दिन हमारे जैन धर्म की धरोहर मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का अवतरण दिवस है। आज विराग सागर जी के आशीर्वाद से मुनिश्री ने दीक्षा लेकर आपके नगर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। आचार्य विराग सागर जी ने जीवन काल में इतनी अच्छी रचना की। जिसमें सभी साधुओं को अपनी अपनी योग्यता के अनुसार पद देकर आज जैन धर्म के झंडे को बुलंद कर रहे हैं। इनमें से एक हैं मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी, जो आप अपने ज्ञान के प्रकाश को चहुं ओर फैला रहे हैं।</p>
<p><strong>गुरु का उपकार भुलाए नहीं भूलाता </strong></p>
<p>मुनि श्री विश्वसूर्य सागर ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज को अपनी विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा कि आचार्य श्री ने जो उपकार हमारे ऊपर किए हैं। उनको हम नहीं भुला सकते है। हमारे गुरु की महिमा अपरंपार है। मुनिश्री ने कहा की गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पांव, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय की लाइनों को चरितार्थ करते हुए गुरु ही वह व्यक्ति है जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। ऐसे गुरुदेव को हम बारम्बार नमोस्तु करते हैं। आचार्य वर्धमान सागर युवा संघ के द्वारा प्रभावना वितरण की गई। संचालन प्रशांत चौधरी ने किया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को विनयांजलि अर्पित की: पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 08:02:09 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। 4 जुलाई गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज का 73 वां अवतरण दिवस पर का आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय में कार्यक्रम हुए।</p>
<p>प्रातः 7 बजे से पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनि संघ के सानिध्य में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रातः 8.30 बजे से गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज का विशेष पूजन मुनिश्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, पिच्छी परिवर्तन, विनयांजलि सभा में मुनिद्वय ने आशीर्वचन दिए। प्रातः 10 बजे आहारचर्या हुई।</p>
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