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	<title>Acharyashree Vardhmansagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Acharyashree Vardhmansagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>देव शास्त्र गुरु की शरण ही सच्ची शरण: आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि आचार्य परमेष्ठी हमें आत्म कल्याण का मार्ग दिखाते हैं </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 08:51:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। संसार के सभी संबंध और साधन अस्थायी हैं, जबकि आत्मा शाश्वत है। हम सभी नमस्कार महामंत्र का जाप करते हैं, पर उसके गूढ़ अर्थ को समझना भी आवश्यक है। सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि यह मंत्र पंच परमेष्ठी, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु की वंदना है, जो हमें आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। सच्चा मंगल केवल बाहरी कार्यों (जैसे विवाह आदि) में नहीं, बल्कि धर्म, संयम और आत्मचिंतन में है। भगवान की भक्ति के साथ विनय (नम्रता) और सही आचरण भी जरूरी है। हमें यह समझना चाहिए कि हर छोटे से छोटे जीव में भी आत्मा है, इसलिए सभी के प्रति करुणा और समान भाव रखना चाहिए। यह शरीर आत्मा का मंदिर है और मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ एवं मूल्यवान है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री के दर्शन के लिए भक्त पधार रहे हैं</strong></p>
<p>पूर्वाचार्यों की परंपरा और आगम हमारे मार्गदर्शक हैं, जिन्हें हमें बनाए रखना चाहिए। धर्म के मार्ग में स्त्री और पुरुष दोनों का समान अधिकार और सहभाग है। अतः हमें लज्जा, मर्यादा, भक्ति और सही आचरण के साथ जीवन जीते हुए भगवान की शरण में रहकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रतिदिन अनेक नगरों से आचार्य श्री के दर्शन के लिए भक्त पधार रहे है। उदयपुर के विधायक ताराचंद जैन एवं श्राविका रत्न 6 प्रतिमा व्रत धारी सुशीला अशोक पाटनी आरके मार्बल किशनगढ़ दर्शन के लिए पधारे।</p>
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		<title>टोंक में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी का मंगल प्रवेश : नगर में आकर्षक सजावट के साथ उत्साह का माहौल  </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 07:42:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। ऐतिहासिक संयोग और तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर टोंक नगर को तीन अद्वितीय सौभाग्य एक साथ प्राप्त हो रहे हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 75वां हीरक जन्म जयंती महोत्सव, संयम वर्ष का 57वां चातुर्मास होगा।</p>
<p><strong>मंगल प्रवेश और शोभायात्रा निकाली  </strong></p>
<p>9 जुलाई को चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना के लिए 7 जुलाई को प्रातः भव्य नगर प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर कल्पना गार्डन से जैन नसिया तक लगभग डेढ़ किमी लंबी दिव्य शोभायात्रा निकाली गई। पूरे मार्ग पर 31 भव्य स्वागत द्वार, आकर्षक विद्युत सजावट एवं पुष्पवर्षा की विशेष तैयारियां की गई थीं। जैन नसिया को आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सुसज्जित किया गया था। जैसे ही आचार्य श्री ससंघ नगर सीमा में पहुंचेंगे, शाही बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों, जयघोष और भक्ति के स्वर वातावरण में गूंज उठे। किशनगढ़, नेनवा एवं टोंक के शाही बैंड अपनी मधुर सुर लहरियों से स्वागत कर रहे थे।</p>
<p><strong>36 साधु-साध्वी का दिव्य ससंघ आगमन</strong></p>
<p>इस मंगल विहार में आचार्य श्री के साथ 10 मुनि, 22 आर्यिका, 1 ऐलक एवं 2 क्षुल्लक सहित कुल 36 साधु-साध्वी सम्मिलित हैं। नगर में अद्भुत उत्साह का वातावरण है। नगर के सभी धार्मिक-सामाजिक संगठन तन, मन, धन से जुटकर तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ऐसा वातावरण है मानो नगरवासी अनेक पर्वों को एक साथ उल्लासपूर्वक मना रहे है। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर पर रहेगी। टोंक-सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, जिला प्रमुख सरोज नरेश बंसल, पूर्व विधायक अजीतसिंह मेहता, नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन, टोडारायसिंह के पूर्व चेयरमैन संतकुमार जैन, भाजपा युवा नेता विनायक जैन, संजय संघी, सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहकर आचार्य श्री ससंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>चातुर्मास समिति के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे</strong></p>
<p>चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, संयोजक कमल आंडरा, राजेश बोरदा, पप्पू नमक, लालचंद फूलेता, सुरेश संघी, सीटू आरटी, अनिल कंटान, सुमित दाखिया, अम्मु छामुनिया, नरेंद्र दाखिया, सुनील सर्राफ, पारस बहड़, विनोद कल्ली, प्रदीप सर्राफ, मुकेश करवर, टोनू सर्राफ, कमल सर्राफ, अंकित बगड़ी, किन्नी शिवाड़िया, मुकेश बरवास, सोनू बरवास, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़, नीटू छामुनिया, अर्पित पासरोटियां, ज्ञान संघी, कुंदन आंडरा, देवेंद्र आंडरा, उमेश संघी, मुकेश दतवास, वीरेंद्र संघी, पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्य, शांतिधारा परिवार समिति के सदस्य, महिला मंडल, बालिका मंडल उपस्थित रहे। यह पुण्य अवसर टोंक नगर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बन रहा है।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रशम सागर जी का चारों प्रकार के आहार का त्याग: संयम साधना करते हुए यम संल्लेखना धारण की </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 09:53:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[88 वर्षीय मुनि श्री प्रशमसागर जी महाराज ने शरीर संयम साधना में बाधक होने के कारण चारों आहार का त्याग किया। आचार्यश्री वर्धमानसागर जी सहित विराजित संघ से क्षमायाचना कर यम संल्लेखना धारण की। वे आचार्यश्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित हैं। धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; धरियावद। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>88 वर्षीय मुनि श्री प्रशमसागर जी महाराज ने शरीर संयम साधना में बाधक होने के कारण चारों आहार का त्याग किया। आचार्यश्री वर्धमानसागर जी सहित विराजित संघ से क्षमायाचना कर यम संल्लेखना धारण की। वे आचार्यश्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित हैं। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्टपरंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज धर्मनगरी में 53 साधुओं सहित विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 88 वर्षीय मुनि श्री प्रशमसागर जी महाराज ने शरीर संयम साधना में बाधक होने के कारण 14 वर्ष के संयमी जीवन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से क्षमा याचना करते हुए मुनि श्री पुण्य सागर जी सहित समस्त मुनिराज, आर्यिका माताजी, भैया दीदी, परिजनों समाज से क्षमा याचना कर आचार्य संघ समक्ष चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संल्लेखना धारण की। आपकी संयम साधना चल रही है।</p>
<p><strong>आहार का त्याग कर संल्लेखना धारण वीर साधु करते हैं</strong></p>
<p>शास्त्रीय भाषा में सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यग्चारित्ररूप रत्नत्रय सहित परिणामों, भावों के रहते हुए चारों प्रकार के आहार का त्याग कर संल्लेखना धारण वीर साधु करते हैं। शास्त्रों में सत् लेखना सत् सम्यक प्रकार से लेखना याने कृश करना नष्ट करना, किसे कृश करना कम करना शरीर और कषाय को। सम्यक शब्द का अर्थ होता है किसी सांसारिक ख्याति लाभ पूजा से रहित होकर अंतरंग और बहिरंग तपश्चरण करना संल्लेखना कहलाता है। यह संबोधन आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने मुनि श्री प्रशम सागर जी को कर हर समय सजग सावधान रहने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>मृत्यु को अपनी आंखों से देखना समाधिमरण</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने बताया कि मृत्यु को अपनी आंखों से देखना समाधिमरण है और मृत्यु को अपनी आंखों से वही व्यक्ति देख सकता है, जिसने अपनी आंखों से जन्म देखा होगा। इसमें रहस्य यह उद्घाटित होता है कि माता से सब जन्म लेते हैं। उस जन्म को सभी नहीं देख सकते हैं लेकिन, जो जिनेंद्र वचनों पर श्रद्धा रखकर संसार शरीर भोगों से विरक्त होकर गुरु सानिध्य में तप साधना करते हैं। सरल भाषा में समाधिमरण को समझना चाहे तो साधु शत्रु-मित्र स्वजन परजन से क्षमा मांगकर और क्षमा कर आहार पानी की इच्छा से रहित होकर, पंचपरमेष्ठी का श्रवण करते हुए गुरु चरण में अपना जीवन समर्पित करते हैं।</p>
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