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	<title>Acharyashree Vardhman Sagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Acharyashree Vardhman Sagarji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आत्म परिणाम से होती हैे सुख और दुःख की अनुभूति: आचार्यश्री वर्धमानसागरजी ने विहार के दौरान कहा कि हम सब पुण्यशाली हैं </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 15:49:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजकीय अतिथि आचार्यश्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषियों का मंगल विहार पीपल्दा पंचकल्याणक के लिए चल रहा है। शुक्रवार को दोपहर 6.6 किमी विहार कर संघ का रात्रि विश्राम सोगानी कॉलेज रवासा पर हुआ। पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पीपल्दा। राजकीय अतिथि आचार्यश्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषियों का मंगल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राजकीय अतिथि आचार्यश्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषियों का मंगल विहार पीपल्दा पंचकल्याणक के लिए चल रहा है। शुक्रवार को दोपहर 6.6 किमी विहार कर संघ का रात्रि विश्राम सोगानी कॉलेज रवासा पर हुआ। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा।</strong> राजकीय अतिथि आचार्यश्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषियों का मंगल विहार पीपल्दा पंचकल्याणक के लिए चल रहा है। शुक्रवार को दोपहर 6.6 किमी विहार कर संघ का रात्रि विश्राम सोगानी कॉलेज रवासा पर हुआ। 23 नवंबर को 3.5 किमी विहार कर आचार्य श्री संघ का मंगल प्रवेश बोली में हुआ। मुनि श्री हितेंद्रसागर जी, मुनि श्री भुवनसागर जी ( मुनि दीक्षा के बाद प्रथम बार) जन्म भूमि बोली में आए हैं। ससंघ की आहार चर्या बोली में होगी। इसके पूर्व आचार्य श्री वर्ष 2022 में बोली आए थे। अनायास मुनि श्री श्रेयस सागर जी की समाधि 18 दिसंबर 2022 को हुई थी।</p>
<p><strong>हमारी शक्ति में कर्म बंघ बाधक बन गए</strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमानसागरजी महाराज ने विहार के दौरान धर्मसभा में उपस्थित श्रावकों से कहा कि हम सब पुण्यशाली हैं कि हमें भी कभी ना कभी भगवान के समवशरण में श्रोता बनने का सौभाग्य मिला। हम आत्म परिणामों से सुख या दुःख का अनुभव करते हैं। आप लोग जाने अनजाने में कर्म का बंधकर लेते हैं। हमारी आत्मा के गुणों में कई बाधक तत्व भी हैं। हमारी शक्ति में कर्म बंघ बाधक बन गए। हमारे पास जो भी है कर्म बंघ में है। हमें हमेंशा अपनी दृष्टि को सम्यक रखना चाहिए। पाप हमारे जीवन में प्रति दिन, प्रतिक्षण होते हैं। पापों का प्रक्षालन हम करना चाहते हैं लेकिन, हमारी श्रद्धा और आस्था नहीं बनती है। णमोकार महामंत्र तो लाखों मंत्रों का जन्मदाता है। उसी से सारे मंत्र बने हैं।</p>
<p><strong>हमने जड़ को छोड़ दिया है</strong></p>
<p>आपको यदि रोग दूर करने के लिए मंत्र देते हैं ,धन प्राप्ति के लिए मंत्र देते हैं तो भी सारी बात तो अर्थहीन हो जाती है कि हमने जड़ को छोड़ दिया है। हम डाल, पत्तों में ही लगे हुए हैं। इसलिए जीवन में सुख और शांति का अभाव हमें दिखाई देता है। आचार्यश्री ने कहा कि पुण्यवानों को ही अच्छी वस्तुएं मिलती है और पुण्य कर्मों से ही उन्हें प्राप्त होती है। सुनीता शाह, बाबूलाल शाह, जितेंद्र शाह ने बताया कि आचार्य श्री के शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी दूसरी बार एवं मुनि श्री भुवन सागर जी की दीक्षा के बाद पहली बार गृहस्थ अवस्था की जन्म और कर्म भूमि बोली नगर है। संपूर्ण नगर गौरवान्वित एवं आल्हादित है। संपूर्ण नगर को फ्लेक्स, बैनर, रांगोली और वंदनवार से सजाया गया हैं।</p>
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		<title>12 अगस्त को होगा पुरानी टोंक में आचार्यश्री का मंगल प्रवेश: आचार्यश्री वर्धमान सागरजी पंच कल्याणक महोत्सव की तारीख की करेंगे घोषणा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 13:07:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल सरावगी समाज समिति टोंक के तत्वावधान में जैन समाज की ओर से आचार्य गुरुवर वर्धमान सागर महाराज को पुरानी टोंक आगमन के लिए श्रीफ़ल भेंट किया गया। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ने प्रवचन के दौरान घोषणा कर पुरानी टोंक आने का आशीर्वाद दिया। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। श्री दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल सरावगी समाज समिति टोंक के तत्वावधान में जैन समाज की ओर से आचार्य गुरुवर वर्धमान सागर महाराज को पुरानी टोंक आगमन के लिए श्रीफ़ल भेंट किया गया। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ने प्रवचन के दौरान घोषणा कर पुरानी टोंक आने का आशीर्वाद दिया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> श्री दिगंबर जैन खंडेलवाल सरावगी समाज समिति टोंक के तत्वावधान में जैन समाज की ओर से आचार्य गुरुवर वर्धमान सागर महाराज को पुरानी टोंक आगमन के लिए श्रीफ़ल भेंट किया गया। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ने प्रवचन के दौरान घोषणा कर पुरानी टोंक आने का आशीर्वाद दिया। गुरुवर ससंघ 12 अगस्त को पुरानी टोंक आएंगे। राजेश अरिहंत ने बताया कि गुरुवर के पुरानी टोंक आगमन के आशीर्वाद को सुनकर पुरानी टोंक निवासी श्रद्धालुओं में हर्ष की अपार लहर दौड़ गई। समाज के अध्यक्ष शैलेंद्र चौधरी, अशोक छाबड़ा, सुरेंद्र जयपुरिया, ओमप्रकाश सोनी, देवेंद्र जैन, प्रकाश पटवारी, राकेश कासलीवाल, अजय सोगानी, जितेश जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं महिला पुरुषों बच्चों ने मिलकर आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंटकर जयकारे लगाए।</p>
<p><strong>भक्ति भाव से निकाला जाएगा मंगल प्रवेश जुलूस </strong></p>
<p>12 अगस्त को आचार्य संघ का अमीरगंज नसिया से मंगल विहार का जुलूस प्रातः 6 बजे रवाना होगा। जुलूस में बैंडबाजे की मधुर धुनों पर श्रावक भक्ति नृत्य करते हुए हाथों में केसरिया, पंचरंगी ध्वज थामे हुए जयकारे लगाते हुए हाथों में जैन धर्म के दोहे लिखे हुए तख्तियां थामे हुए भक्ति भाव के साथ चलेंगे। जुलूस बड़ा कुआं पांच बत्ती सुभाष बाजार घंटाघर बाबरों का चौक, छोटा बाजार, नया मंदिर मार्ग होते हुए पांच मंदिर पर भव्य मंगल प्रवेश होगा। जहां पर आचार्य संघ पांच मंदिर जी के दर्शन करेंगे।</p>
<p><strong>मंदिर परिसर को सजाया जा रहा </strong></p>
<p>श्री 1008 श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नवीन जिनालय में उनके मंगल प्रवचन होंगे एवं नवीन जिनालय में भगवान विराजमान करने के लिए भव्य पंच कल्याणक महोत्सव की तारीख की घोषणा गुरुदेव के मुखारविंद से होगी। इस कार्यक्रम के लिए संपूर्ण पांच मंदिर परिसर को खूबसूरत डेकोरेशन एवं फ्लेक्स बैनर से सजाया गया है।</p>
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		<title>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित प्रतापगढ़ के लिए मंगल विहारः 42 वर्षों बाद होगा मंगल प्रवेश  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 12:43:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित प्रतापगढ़ के लिए 8 मुनिराजों, 22 आर्यिका माताजी, एक ऐलक, दो क्षुल्लक कुल 34 साधुओं का मंगल विहार प्रतापगढ़ के लिए 28 मार्च को हुआ। 29 मार्च को प्रातः 7.3 किलोमीटर विहार कर आचार्यश्री संघ की आहार चर्या राजकीय स्कूल महुदीफला में होगी। पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित प्रतापगढ़ के लिए 8 मुनिराजों, 22 आर्यिका माताजी, एक ऐलक, दो क्षुल्लक कुल 34 साधुओं का मंगल विहार प्रतापगढ़ के लिए 28 मार्च को हुआ। 29 मार्च को प्रातः 7.3 किलोमीटर विहार कर आचार्यश्री संघ की आहार चर्या राजकीय स्कूल महुदीफला में होगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री चिन्मय सागरजी, श्री हितेंद्र सागर जी, श्री मुनिश्री प्रभव सागरजी, श्री चिंतन सागरजी, श्री दर्शित सागरजी, श्री प्रबुद्ध सागरजी ,श्री मुमुक्षु सागरजी, श्री प्रणित सागरजी आर्यिकाश्री शुभमतिजी, श्री शीतलमतीजी, श्रीचैत्यमतीजी, श्री वत्सलमतिजी, श्री विलोकमतिजी, श्री दिव्यांशुमतिजी, श्री पूर्णिमामतिजी, श्री मुदितमतिजी, श्री विचक्षणमतिजी, श्री समर्पितमतिजी, श्री निर्मुक्तमतिजी, श्री विनम्रमतिजी, श्री दर्शनामतिजी, श्री देशनामतिजी, श्री महायशमतिजी, श्री देवर्धिमतिजी, श्री प्रणतमतिजी, श्री निर्माेहमतिजी, श्रीपद्मयशमतिजी, श्री दिव्ययशमतिजी, श्री प्रेक्षामतिजी, श्री जिनेशमति, ऐलक श्री हर्ष सागरजी, क्षुल्लक श्री विशाल सागरजी, क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागरजी सहित 8 मुनिराजों, 22 आर्यिका माताजी, एक ऐलक, दो क्षुल्लक कुल 34 साधुओं का मंगल विहार प्रतापगढ़ के लिए 28 मार्च को हुआ।</p>
<p><strong>आहारचर्या हुई</strong></p>
<p>5.3 किलोमीटर विहार कर 28 की आहारचर्या राजकीय स्कूल जेलदा में हुई। दोपहर को आचार्य संघ का विहार 4.2 किलोमीटर होकर रात्रि विश्राम वन अधिकारी कार्यालय पुंगा तालाब निकट हुआ। 29 मार्च को प्रातः 7.3 किलोमीटर विहार कर आचार्यश्री संघ की आहारचर्या राजकीय स्कूल, महुदीफला में होगी।</p>
<p><strong>मुनि अवस्था ने वर्षायोग किया था</strong></p>
<p>उल्लेखनीय हैं कि वर्ष 1983 में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने दीक्षा गुरु आचार्यश्री धर्म सागरजी संघ साथ मुनि अवस्था ने वर्षायोग किया था।</p>
<p><strong>पधारने हेतु श्रीफल भेंट किया</strong></p>
<p>प्रतापगढ़ दिगम्बर जैन समाज के भक्तगण महेंद्र शाह अध्यक्ष मुनि सेवा समिति प्रतापगढ़, संजय कुमार जैन, सचिव मुनि सेवा समिति, पंकज भास्कर, अनिल पटवा, मुकेश जैन, दीपक तलाठी, देवेंद्र बंडी, राजकुमार पतंगिया, दिलीप दोषी, दिलीप शाह, पारस मंडा सुमित दोषी सहित दिगंबर जैन समाज प्रतापगढ़ से अनेक भक्तों ने आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से संघ सहित प्रतापगढ़ पधारने हेतु धरियावद में श्रीफल भेंट किया था। प्रतापगढ़ में आचार्यश्री संघ की गरिमापूर्ण आगवानी के लिए विभिन्न समितियां गठित की गई।</p>
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		<title>82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का समाधि मरण हुआः 24 मार्च को विमान यात्रा डोला निकालकर आचार्य मुनि संघ सानिध्य में अग्नि संस्कार हुए </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/82_year_old_munishri_purna_sagarji_died_in_samadhi_in_dhariawad/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 12:47:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागर से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया। पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230; धरियावद। दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु। देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागर से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु। देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू। मरण समय गुरु पाद मूल हो व्रत संयम पालू, पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो। इन सार गर्भित भावनाओ को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते है। आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागरजी से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वाह्न 9.40 बजे धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया।</p>
<p><strong>डोला विमान यात्रा हजारों की उपस्थिति में निकाला गया</strong></p>
<p>ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, विकास भैया, लक्की रमावत ने बताया कि दोपहर 12.10 बजे समाधिस्थ 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का डोला विमान यात्रा आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ सानिध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकाला गया। मुनिश्री के डोले के आगे कमंडल लेकर भूमि शुद्धि का, मुनिश्री के डोले को कंधे लगाने का सौभाग्य महावीर, राजेंद्र मेहता थांदला एवं परिजनों को प्राप्त हुआ। नियत समाधि स्थल परिसर में पंडित हंसमुखजी के निर्देशन में मंत्रोचार से स्थल शुद्धि की गई। समाधिस्थ मुनिश्री की पूजन शांतिधारा और पंचामृत अभिषेक गृहस्थ अवस्था के परिजन पुत्र महावीर, राजेंद्र थांदला एवं परिवार द्वारा किया गया। परम पूज्य मुनिश्री की समाधि के कारण संघ के सभी साधुओं ने आज उपवास किया। अग्नि संस्कार के पश्चात उपस्थित आचार्य संघ, आर्यिका माताजी एवं समस्त समाज ने परिक्रमा देकर अपनी विनयाजंलि प्रस्तुत की।</p>
<p><strong>मुनिश्री पूर्ण सागरजी का सामान्य परिचय  </strong></p>
<p>थांदला मध्यप्रदेश के श्री रतनलाल मेहता 81 वर्षीय ने मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ समक्ष दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित किया। आपकी क्षुल्लक दीक्षा चतुर्थ पट्टाधीश आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य परम पूज्य मुनिश्री पुण्य सागरजी के करकमलों से सिद्धक्षेत्र सोनागिर में 9/07/2023 को हुई। आपका नूतन नामकरणजी क्षुल्लक श्री पूर्ण सागर हुआ। आपने जन्म नगरी थांदला मध्यप्रदेश में गृहस्थ अवस्था के भतीजे मुनिश्री पुण्य सागरजी से 6/5/2024 को मुनि दीक्षा ग्रहण की। गृहस्थ अवस्था की पत्नी ने भी आर्यिका दीक्षा लेकर श्री पूर्णिमामति बनी। उनकी भी समाधि पूर्व में ही हो गई। कुछ दिन पूर्व आपके केश लोचन भी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी एवं अन्य साधुओं ने किए।</p>
<p><strong>52 साधुओं के संघसानिध्य में णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ </strong></p>
<p>22 मार्च 2025 को आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमा याचना कर क्षमा भाव धारण कर चारो प्रकार के अन्न जल आदि का आजीवन त्यागकर यम संल्लेखना धारण कर सभी प्रकार के आहार का त्याग किया। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनि श्रीपुण्य सागरजी सहित संघ के साधु संबोधन करते रहे। यम संलेखना धारी मुनिश्री पूर्ण सागरजी का शांत परिणामो से निराकुलता सहित दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वान्ह 9.50 बजे उत्कृष्ट समाधि मरण आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, दीक्षा गुरु मुनिश्री पुण्य सागरजी सहित 52 साधुओं के संघ सानिध्य में आचार्यश्री के श्रीमुख से अरिहंत सिद्ध णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ। क्षपक मुनि पूर्ण सागरजी की विमान डोलयात्रा चन्द्र प्रभु संतभवन, परिसर से रवाना होकर समाधि स्थल पहुंची।</p>
<p><strong>धार्मिक विधि विधानपूर्वक अंतिम संस्कार हुए</strong></p>
<p>राजस्थान प्रांत के अनेक नगरों पारसोला, बांसवाड़ा, थांदला रीछा ,धरियावद, नरवाली, मुंगाडा, गामड़ी, दाहोद के हजारों गुरुभक्तों ने भाग लिया समाधिस्थल पर पूर्ण विधि विधान से विमान यात्रा पूर्व नियत स्थल पर ले गए जहाँ पर पूर्ण विधि विधान से समाधिस्थ मुनिश्री के धार्मिक संस्कार कर पूजन पंचामृत अभिषेक किए गए। अग्नि संस्कार पूर्व गृहस्थ अवस्था के पुत्र महावीर, राजेंद्र मेहता एवं परिजनों द्वारा किये गए।</p>
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		<title>नगर के व्यवसाई सरियाजी ने दीक्षा हेतु किया निवेदनः  सिद्ध भगवान का समुदाय ही सिद्धचक्र कहलाता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजी </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Mar 2025 09:28:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी धरियावद विराजित हैं। नगर के व्यवसाई ने दीक्षा हेतु आचार्यश्री को निवेदन किया। आचार्यश्री ने पूजन के दौरान चढ़ाए जाने वाले द्रव्य किस आशय से चढ़ाए जाते हैं उन गुणों बाबद सरल भाषा में बताया। जो सिद्ध भगवान का गुणागुवाद किया जाता है, उनकी प्रशंसा की जाती है। उसकी विवेचना करते हुए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी धरियावद विराजित हैं। नगर के व्यवसाई ने दीक्षा हेतु आचार्यश्री को निवेदन किया। आचार्यश्री ने पूजन के दौरान चढ़ाए जाने वाले द्रव्य किस आशय से चढ़ाए जाते हैं उन गुणों बाबद सरल भाषा में बताया। जो सिद्ध भगवान का गुणागुवाद किया जाता है, उनकी प्रशंसा की जाती है। उसकी विवेचना करते हुए बताया कि जो संसार के बंधनों से छूट गए हैं नौ कर्म से सर्वथा रहित हो गए हैं उन्हें सिद्ध कहते हैं।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए राजेश पंचोलिया से धरियावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद। </strong>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी धरियावद विराजित हैं नगर के व्यवसाई श्री भंवर लाल सरिया ने दीक्षा हेतु आचार्यश्री को निवेदन किया आपके पिता ने भी सन 1979 में दीक्षा लेकर मुनिश्री उदय सागरजी बने थे। आपकी समाधि 1980 में हुई। आचार्यश्री ने पूजन के दौरान चढ़ाए जाने वाले द्रव्य किस आशय से चढ़ाए जाते हैं उन गुणों बाबद सरल भाषा में बताया। जो सिद्ध भगवान का गुणागुवाद किया जाता है, उनकी प्रशंसा की जाती है उसकी विवेचना करते हुए बताया कि जो संसार के बंधनों से छूट गए हैं जिनमें अनंत दर्शन, अनंत ज्ञान, अनंत सुख और अनंत वीर्य प्रकट हो गए हैं, जो द्रव्य कर्म, भाव कर्म और नौ कर्म से सर्वथा रहित हो गए हैं उन्हें सिद्ध कहते हैं। ऐसे अनंत सिद्ध परमात्मा लोक के अग्रभाग में विराजित हैं सिद्ध भगवान का समुदाय ही सिद्धचक्र कहलाता है। यह मंगल देशना आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने प्रगट की।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75843" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-scaled.jpeg" alt="" width="1920" height="2560" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-scaled.jpeg 1920w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-225x300.jpeg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-768x1024.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-1152x1536.jpeg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-1536x2048.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-990x1320.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/WhatsApp-Image-2025-03-04-at-6.17.17-PM-1320x1760.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1920px) 100vw, 1920px" />सिद्धों का गुणानुवाद किया गया है </strong><br />
वीणा दीदी, गज्जू भैया के अनुसार आचार्यश्री ने उपदेश में बताया कि सिद्धचक्र विधान में सिद्धदशा प्रकट करने का विधान अर्थात उपाय बताते हुए सिद्धों का गुणानुवाद किया गया है। ज्ञानी का परम लक्ष्य पूर्ण सुख प्रकट करना है अर्थ। अतः उसके हृदय में पूर्ण सुखी अरिहंत और सिद्ध परमेष्ठी के गुणानुवाद के माध्यम से अपने लक्ष्य के प्रति सतर्क रहते हुए अशुभ भावों से सहज बच जाते हैं।</p>
<p><strong>संस्कार शिविरों के माध्यम से धर्म की वर्षा हो रही </strong><br />
सिद्धचक्र विधान से अनेक शारीरिक रोग तो दूर होते हैं। जबसे आचार्यश्री वर्धमान सागरजी धरियावद संघ सहित पधारे हैं। अब वर्षाकाल तो समाप्त हो गया है किंतु नगर में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के पधारने के बाद से लगातार धार्मिक अनुष्ठान, उपदेश, स्वाध्याय, धर्म के शिक्षण संस्कार शिविरों के माध्यम से सतत धर्म की वर्षा हो रही है।</p>
<p><strong>52 जिनालय निर्माण का संकल्प </strong><br />
संघ आगमन के बाद 52 साधुओं की उपस्थिति को चिर स्थाई रखने के लिए 52 जिनालय निर्माण का संकल्प नंदनवन, हिमवन विहारकर आचार्यश्री अजित सागरजी स्मृति चिकित्सा भवन हेतु आचार्यश्री सानिध्य में शिलान्यास हुआ। धार्मिक कार्यक्रमों में समाज के सभी उम्र के लोगों द्वारा शामिल होकर ज्ञान में वृद्धि हो रही हैं।</p>
<p><strong>मोक्ष कल्याणक 6 मार्च को</strong><br />
इसी अगली कड़ी में मूल नायक श्री चंद्र प्रभु का मोक्ष कल्याणक विशेष कार्यक्रमों सहित 6 मार्च को मनाया जाएगा। जिसमें भगवान का अनेक प्रकार के फलों, सूखे मेवे, दूध, दही, घी, केशर, चंदन, पुष्पों से पंचामृत अभिषेक होगा। फागुन शुक्ल अष्टमी 7 मार्च से 14 मार्च तक आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ के 52 साधुओं के मंगल सानिध्य और संहिता सूरी पंडित हंसमुखजी, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी के निर्देशन में श्री चंद्रप्रभु जिनालय में सिद्धचक्र मंडल विधान के माध्यम से चयनित सौभाग्यशाली इंद्र परिवारों द्वारा पूजन किया जावेगा।</p>
<p><strong>आचार्य पदारोहण तथा संयम दीक्षा वर्ष मनाया जाएगा </strong><br />
24 फरवरी 1969 को आचार्यश्री धर्मसागरजी को आचार्य पद दिया गया। उसी दिन श्री वर्धमान सागरजी सहित 11 दीक्षा हुई। इसी कारण आचार्यश्री धर्म सागरजी का 57वां आचार्य पदारोहण तथा आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का 57वां संयम दीक्षा वर्ष भक्ति भाव से मनाया जाने के लिए विशेष तैयारी चल रही हैं। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी 57 वर्ष के संयमी जीवन में 36 वर्षों से आचार्य हैं आपने अभी तक 113 दीक्षाएं दी हैं।</p>
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		<title>गुरु की कृपा आशीर्वाद से शिष्यों के सब कार्य पूर्ण होते हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः प्रभु भक्ति से वाणी और नेत्र ज्योति पुनः प्राप्त हुई  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/all_the_tasks_of_the_disciples_are_accomplished_by_the_blessings_of_the_guru_acharya_shri_vardhman_sagarji/</link>
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		<pubDate>Mon, 24 Feb 2025 09:51:27 +0000</pubDate>
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<p><strong>धरियावद आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सहित विराजित हैं। संघ सानिध्य में आचार्यश्री धर्म सागरजी का 57 वां आचार्य पदारोहण वर्ष एवं आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का 57वां दीक्षा वर्ष उत्साह, भक्ति एवम श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। भावांजलि में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने बताया कि आज हम जो कुछ है हमारे पूर्वाचार्यों, गुरुओं का आशीर्वाद है कि हम प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा का संचालन कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया से धरियावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सहित धरियावद विराजित हैं संघ सानिध्य में आचार्यश्री धर्म सागरजी का 57 वा आचार्य पदारोहण वर्ष एवं आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का 57वां दीक्षा वर्ष उत्साह, भक्ति एवम श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यश्री धर्म सागरजी के प्रति भावांजलि में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने बताया कि आज हम जो कुछ है हमारे पूर्वाचार्यों, गुरुओं का आशीर्वाद है कि हम प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा का कमजोर कंधो से संचालन कर रहे हैं।</p>
<p><strong>दीक्षा देकर उपकार किया </strong></p>
<p>गुरु की कृपा से शिष्यों के सभी कार्य पूर्ण होते हैं। आचार्यश्री धर्म सागरजी बहुत ही पुण्यशाली आत्मा रहंे। क्योंकि आपका जन्म और समाधि मरण तीर्थंकर भगवान के कल्याणक पर हुआ। आपने आचार्य पद फागुन शुक्ल 8 दिनांक 24 फरवरी 1969 को 11 दीक्षा दी। उस दिन हमें भी दीक्षा देकर उपकार किया। यह भावांजलि दीक्षागुरु आचार्यश्री धर्म सागरजी के 57वंे आचार्य पदारोहण वर्ष के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने प्रगट की।</p>
<p><strong>दिगंबर धर्म के सिद्धांतो की उपेक्षा नही होने दी </strong></p>
<p>गज्जू भैया, वीणा दीदी के अनुसार आचार्यश्री धर्म सागरजी महाराज के बारे में विनयांजलि प्रस्तुत करते हुए। आचार्यश्री ने अनेक संस्मरण भावविभोर होकर सुनाएं। आचार्यश्री शांति सागरजी की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश होने के कारण वर्ष 1974 में भगवान श्री महावीर स्वामी का 2500वां निर्वाण महोत्सव आचार्यश्री धर्म सागरजी के प्रमुख सानिध्य में देहली में मनाया गया। जैन धर्म के चारों समुदाय में कभी भी दिगंबर धर्म के सिद्धांतो की उपेक्षा नही होने दी। आचार्यश्री ने बताया कि आप इतने निस्पृही थे कि सिंहासन पर नही बैठते थे। आपके अभिवंदन ग्रन्थ को हाथ तक नहीं लगाया।</p>
<p><strong>प्रभु भक्ति से वाणी और नेत्र ज्योति पुनः प्राप्त हुई </strong></p>
<p>इसी परिसर ने 56 जिनालय बनाने की योजना हेतु मंगल आशीर्वाद भी दिया। इसके पूर्व मुनिश्री पुण्य सागरजी महाराज ने आचार्य धर्म सागरजी एवं आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का गुणानूवाद कर बताया कि इससे ज्ञान में वृद्धि ओर चरित्र निर्मल होता हैं। धरियाबाद का एक संस्मरण बताया कि जब आचार्यश्री, मुनि अवस्था में थे। तब आपकी वाणी अवरुद्ध हो गई थी जैसे ही मुनिश्री वर्धमान सागरजी ने आचार्य धर्म सागरजी की चरण वंदना धरियाबाद के इसी चंद्रप्रभु जिनालय में की तो आप की वाणी पूर्ण खुल गई। आपकी 19 वर्ष की उम्र में भी नेत्र ज्योति चली गई थी। जो प्रभु भक्ति से पुनः प्राप्त हुई।</p>
<p><strong>आचार्यों का गुणानुवाद किया </strong></p>
<p>संघस्थ मुनिश्री हितेंद्र सागरजी ने भी दोनों आचार्यों का गुणानुवाद किया महान आचार्यों के मंगलमय स्मरण से पापों का प्रक्षालन होता हैं। पंडित हंसमुख ने फागुन की अष्टांहिका में समाज की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधानाचार्य संघ सानिध्य में करने हेतु सानिध्य एवं आशीर्वाद चाहा। आपने भी आचार्यश्री धर्म सागरजी ओर आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का गुणानुवाद किया।</p>
<p><strong>जिनवाणी भेंट की व चरण प्रक्षालन किया</strong></p>
<p>आचार्यश्री के सानिध्य में आचार्यश्री धर्म सागरजी का पूजन हुआ। यह संयोग ही था कि 24 फरवरी फागुन शुक्ल 8 को आचार्यश्री धर्म सागरजी ने 11 दीक्षाए दी। जिनमे मुनिश्री वर्धमान सागरजी को 19 वर्ष की आयु में दीक्षा दी। वर्तमान में आचार्यश्री धर्म सागरजी के आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, आर्यिकाश्री शुभमतिजी सहित 6 शिष्य है। आज आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का भी समाज ने 57वां दीक्षा दिवस मनाया। समस्त मुनिराजों ने आचार्यश्री को जिनवाणी भेंट की। अनेक श्रद्धालुओं ने चरण प्रक्षालन और विशेष द्रव्यों से पूजन की तथा आचार्यश्री का गुणानुवाद किया।</p>
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		<title>वर्धमान सागरजी का 22 वर्षों बाद 33 साधुओं,नगर गौरव मुनिराज और आर्यिका माताजी के साथ मंगल प्रवेशः 23 फरवरी को 18 साधु करेंगे अगवानी। </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Feb 2025 12:36:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धरियावद नगर जहां अनेक जिनालय है यह अनेक साधुओं की जन्म भूमि, कर्मभूमि, दीक्षाभूमि, समाधि भूमि, पंचकल्याणक भूमि में प्रथमाचार्य शांति सागरजी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज अपने 33 साधुओं सहित 22 वर्षों के बाद भव्य मंगल प्रवेश कर रहे हैं। पढ़िए राजेश पंचोलिया से धरियावद की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धरियावद नगर जहां अनेक जिनालय है यह अनेक साधुओं की जन्म भूमि, कर्मभूमि, दीक्षाभूमि, समाधि भूमि, पंचकल्याणक भूमि में प्रथमाचार्य शांति सागरजी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज अपने 33 साधुओं सहित 22 वर्षों के बाद भव्य मंगल प्रवेश कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया से धरियावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> जहां अनेक जिनालय है। वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज अपने 33 साधुओं सहित 22 वर्षों के बाद दिनांक 23/2/2025 को भव्य मंगल प्रवेश कर रहे हैं। नगर में पूर्व से विराजित मुनि पुण्य सागर अपने साधुओं सहित आचार्य वर्धमान सागर की अगवानी चरण वंदना करेंगे। इसके पूर्व परम पूज्य वात्सल्य वारिधि राष्ट्रगौरव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ सहित का 22 फरवरी को मऊ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पर प्रथम बार हुआ।</p>
<p><strong>समाजजन ने की भव्य अगवानी</strong></p>
<p>आचार्य संघ सानिध्य में मूल श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक, शांति धारा सौभाग्यशाली परिवार द्वारा की गई। आहार और सामायिक के बाद आचार्य संघ का दोपहर 3 बजे धरियावाद की ओर मंगल विहार हुआ। धरियावाद में विराजित वात्सल्य मूर्ति मूनि श्री पुण्य सागरजी महाराज संघ सहित महु अतिशय क्षेत्र पहुँचकर अपने गुरू आचार्यश्री की चरण वंदना की। आचार्यश्री संघ का रात्रि विश्राम धरियावाद के समीप बालिका छात्रावास के पास नरेश सरिया के निजी आवास पर हुआ।</p>
<p><strong>23 को धरियावद में मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>23 को प्रात काल 8 बजे नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा सुनील, नीलेश, राकेश अनुसार आचार्य वर्धमान सागर की आहारचर्या 22 फरवरी को अतिशय क्षेत्र मऊ में हुई। संघ का 23 फरवरी को धरियावद मंगल प्रवेश होगा। सन 1950 में जन्मे 75 वर्षीय आचार्य वर्धमान सागर 24 फरवरी सन 1969 में दीक्षित होकर आपको आचार्य पद 24 जून सन 1990 में प्राप्त हुआ। 75 वर्षीय आचार्य वर्धमान सागर मुनि चिन्मय सागर, हितेंद्र सागर, प्रशम सागर, प्रभव सागर, चिंतन सागर, दर्शित सागर, प्रबुद्ध सागर, मुमुक्षु सागर, प्रणित सागर। शुभमति, शीतलमती, चैत्यमती वत्सलमति, विलोकमति, दिव्यांशुमति, पूर्णिमामति, मुदितमति, विचक्षणमति, समर्पितमति, निर्मुक्तमति, विनम्रमति, दर्शनामति, देशनामति, महायशमति, देवर्धिमति, प्रणतमति, निर्माेहमति, पद्मयशमति, दिव्ययशमति, प्रेक्षामति, जिनेशमति, क्षुल्लक विशाल सागर, क्षु प्राप्ति सागर सहित कुल 34 पीछी सभी जिनालयों के दर्शनकर आचार्यश्री आशीर्वाद उपदेश देंगे।</p>
<p><strong>विशाल मुनिसंघ के आगमन को लेकर सम्पूर्ण नगर उत्साहित</strong></p>
<p>नरसिंहपूरा एवं दशा हूमड दिगम्बर समाज अध्यक्ष ने बताया कि विशाल मुनिसंघ के आगमन को लेकर जैन समाज ही नहीं वरन सम्पूर्ण नगर उत्साहित हैं। नगर को दुल्हन की भांति सजाया गया है। घर-घर पर रोशनी और फ्लेक्स कट आउट लगाए गए हैं। घरों के सामने रंगोली बनाई जा रही है। समंतभद्र स्कूल के विद्यार्थी सहित नगर के पुरुष महिलायें धार्मिक मंडल निर्धारित वेषभूषा में अगवानी करेंगे। वर्ष 2001 में वर्षायोग आचार्यश्री ने इसी नगर में किया था।</p>
<p><strong>वर्धमान सागरजी का धरियावद से बहुत पुराना संबंध </strong></p>
<p>आचार्य वर्धमान सागर का धरियावद से बहुत पुराना संबंध है वर्ष 2001 का वर्षायोग धरियावद में किया। इसके पूर्व वर्ष 2002 में आप धरियावद विराजित थे। उस समय अनेक समाधियॉ आपके सानिध्य में हुई। यहां से 29 अप्रैल 2002 को विहार कर आप सनावद गए थे। इसके पश्चात आपका आगमन पुनः वर्ष 2003 में धरियावद में हुआ। अक्टूबर माह में आर्यिका दीक्षा दी। 14 दिसंबर 2003 को धरियावद से विहार किया।</p>
<p><strong>अनेक शिखर बंद जिनालयों की नगरी </strong></p>
<p>धरियावद नगर में 1008 श्री चंद्रप्रभु बड़ामंदिर ,श्री पदमप्रभु दिगंबर मंदिर, श्री आदिनाथ मंदिर श्री महावीरमंदिर ,श्री चंद्रप्रभु मंदिर नंदनवन, श्री आदिनाथ मंदिर नसिया जी सहित तीन चैत्यालय नगर में है।</p>
<p><strong>अनेक साधु की जन्म कर्म भूमि नगर गौरव साधुओं की विस्तृत श्रृंखला  </strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया के अनुसार आचार्य वर्धमानसागर महाराज द्वारा नगर में अनेक दीक्षित शिष्य है जिनमें समाधिस्थ मुनि श्रेयस सागर, समाधिस्थ मुनि पद्मकीर्ति सागर, मुनि मुमुक्षु सागर संघस्थ हैं, समाधिस्थ आर्यिका श्रेयमति, समाधिस्थ आर्यिका योगीमति, आ प्रेक्षामति होकर आप वर्तमान में आचार्य संघ में साथ में है। इसी प्रकार मुनि पुण्य सागर से नगर के मुनि उदित सागर, आर्यिका उत्साह मति है। समाधिस्थ मुनि सुधर्म सागर, समाधिस्थ मुनि उदय सागर, समाधिस्थ मुनि समाधि सागर नगर गौरव हैं। आर्यिका प्रेक्षामति दीक्षा के बाद प्रथम प्रवेश करेंगे।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडित इसी धरियावद नगर के </strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडित हंसमुख शास्त्री इसी धरियावद नगर के है। विश्व का सबसे छोटा 37 शिखरोंवाला जिन मंदिर नंदनवन धरियावद में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री द्वारा निर्मित नंदनवन में विश्व का सबसे छोटा 37 शिखरोंवाला श्री चंद्रप्रभु जिनालय स्थित है।</p>
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		<title>खूंता में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सहित 34 साधुओं ने प्रवेश कियाः 23 फरवरी को धरियावद में मंगल प्रवेश होगा  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 12:49:23 +0000</pubDate>
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<p><strong>पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का मंगल विहार धरियावद की ओर चल रहा है। आज नगर खूंता में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सहित 34 साधुओं ने प्रवेश किया। अगवानी समग्र दिगम्बर जैन समाज द्वारा की गई साथ ही आहारचर्या खूता नगर में हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया से धरियावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज का मंगल विहार धरियावद की ओर चल रहा है। 21 फरवरी को नगर खूंता में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सहित 34 साधुओं ने प्रवेश किया। आचार्य संघ की अगवानी समग्र दिगम्बर जैन समाज द्वारा की गई। आचार्य संघ की आहारचर्या खूता नगर में हुई।</p>
<p>गौरतलब है कि आचार्यश्री से दीक्षित शिष्य मुनि मुमुक्षु सागरजी, मुनि पदमकीर्ति सागरजी, तथा आर्यिकाश्री प्रेक्षामतिजी का यह पैतृक नगर है। दोपहर को आचार्य श्री संघ का मंगल विहार धरियावद से 2 किलोमीटर दूर अतिशय क्षेत्र मऊ में हुआ संघ का रात्रि विश्राम ओर 22 फरवरी की आहारचर्या, मऊ में होगी। 23 फरवरी को प्रातः धरियावद में मंगल प्रवेश होगा।</p>
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		<title>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित मंगल विहारः 21 फरवरी को खूंता होगा मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Feb 2025 12:26:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के आदिनाथ भगवान अतिशयकारी हैं। 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं। धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के आदिनाथ भगवान अतिशयकारी हैं। 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं। धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि पर प्रस्तावित योजना के बारे में आचार्यश्री से मार्ग दर्शन एवं आशीर्वाद चाहा। आचार्यश्री को धरियावद आने हेतु श्रीफल भेंट किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> नगर की समाज गुरु भक्त समाज है। नगर के आदिनाथ भगवान अतिशय कारी हैं। अध्यक्ष करनमलजी ने बताया कि 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। अभी बागड़ धरियावद खूंता होकर जाएंगे। अनुकूलता रही तो पुनः भी आ सकते हैं। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष करण मल मैदावत ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि पर प्रस्तावित योजना के बारे में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से मार्ग दर्शन एवं आशीर्वाद चाहा। सभा में खूंता समाज सहित प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जी धरियावद ने आचार्यश्री को धरियावद आने हेतु श्रीफल भेंट किया ।</p>
<p><strong>मुंगाणा में विहार हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर काफी नगरों के भक्त उपस्थित रहे। प्राचीन अतिशययुक्त चमत्कारी श्रीआदिनाथ भगवान दिगंबर मंदिर एवं श्रीअजीतनाथ भगवान जिनालय तथा नगर गौरव मुनि सुदृढ ़सागर, सुरम्य सागर, आर्यिका प्रीतिमती, आ श्रीसुप्रज्ञमति, क्षु श्रीसुभव सागरजी, क्षुल्लिका श्री सुगंधमति, क्षु श्री अटलमति की जन्म और कर्मभूमि मुंगाणा में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, 9 मुनिराज 20 आर्यिका माताजी और 2 क्षुल्लक साधु सहित 20 फरवरी को विहार हुआ। करणमल मैदावत, अनिरुद्ध अनुसार आचार्यश्री संघ सानिध्य में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक पूजन धार्मिक अनुष्ठान हुए।</p>
<p><strong>चरण प्रक्षालन आरती कर विदाई दी </strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया, राजेश पंचोलिया के अनुसार  आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनि चिन्मय सागरजी, हितेंद्र सागरजी, प्रशम सागरजी, प्रभव सागरजी, चिंतन सागरजी, दर्शित सागरजी, प्रबुद्ध सागरजी, मुमुक्षु सागरजी, प्रणित सागरजी आर्यिकाश्री शुभमतिजी, शीतलमतिजी, चैत्यमतिजी, वत्सलमतिजी, विलोकमतिजी, दिव्यांशुमतिजी, पूर्णिमामति मुदितमतिजी, विचक्षणमतिजी, समर्पितमतिजी, निर्मुक्तमतिजी, विनम्रमतिजी, दर्शनामतिजी, देशनामतिजी, महायशमतिजी, देवर्धिमतिजी, प्रणतमतिजी, निर्माेहमतिजी, पद्मयशमतिजी, दिव्ययशमतिजी, प्रेक्षामतिजी, जिनेशमति, क्षुल्लक विशाल सागरजी, क्षुल्लक प्राप्ति सागरजी, संघ का 20 फरवरी को मंगल विहार हुआ। समाजजनों ने निवास के सामने चरण प्रक्षालन आरती कर विदाई दी। रात्रि विश्राम नाड़ की राजकीय स्कूल में होगा।</p>
<p><strong>आचार्य संघ का प्रवेश व आहारचर्या खूंता में </strong></p>
<p>21 फरवरी को आचार्य संघ का प्रवेश श्री आदिनाथ दिगम्बर मन्दिर, खूंता होगा संघ की आहारचर्या खूंता में होगी। इस अवसर पर पारसोला से भी काफी भक्त उपस्थित रहे।</p>
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