<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/acharya-virag-sagar-maharaj-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9C/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 10 Jul 2024 08:07:34 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>गणाचार्य विरागसागरजी की अभूतपूर्व समाधि अवसर पर विशेष लेख : दिगम्बरत्व की अनुपम यात्रा के समाधि शिखर संत आचार्य विरागसागरजी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/saint_acharya_viragsagarji_the_unique_journey_of_digambaratva/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/saint_acharya_viragsagarji_the_unique_journey_of_digambaratva/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jul 2024 08:07:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dol Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Maran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlelekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोल यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि मरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=63226</guid>

					<description><![CDATA[जन्मनाम अरविंद यानी कमल, जन्म से ही संसार रूपी समुद्र में कमल सम जीवन जीने वाले व्यक्तित्व ने अपनी 41 वर्षीय दिगम्बरत्व की अनुपम यात्रा का शिखर आरोहण अभूतपूर्व, अनुपम अविस्मरणीय समाधि से कर दिगम्बर जैन जगत के सामने अपनी सरलता, सहजता, संस्कार, समर्पण, शुचिता के साथ सम्यक्त्व का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो युगों-युगों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जन्मनाम अरविंद यानी कमल, जन्म से ही संसार रूपी समुद्र में कमल सम जीवन जीने वाले व्यक्तित्व ने अपनी 41 वर्षीय दिगम्बरत्व की अनुपम यात्रा का शिखर आरोहण अभूतपूर्व, अनुपम अविस्मरणीय समाधि से कर दिगम्बर जैन जगत के सामने अपनी सरलता, सहजता, संस्कार, समर्पण, शुचिता के साथ सम्यक्त्व का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो युगों-युगों तक जयवंत होकर दिगम्बरत्व की ध्वज पताका को कायम रखेगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेन्द्र जैन &#8216;महावीर&#8217; का विशेष लेख</span></strong></p>
<hr />
<p>जन्मनाम अरविंद यानी कमल, जन्म से ही संसार रूपी समुद्र में कमल सम जीवन जीने वाले व्यक्तित्व ने अपनी 41 वर्षीय दिगम्बरत्व की अनुपम यात्रा का शिखर आरोहण अभूतपूर्व, अनुपम अविस्मरणीय समाधि से कर दिगम्बर जैन जगत के सामने अपनी सरलता, सहजता, संस्कार, समर्पण, शुचिता के साथ सम्यक्त्व का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जो युगों-युगों तक जयवंत होकर दिगम्बरत्व की ध्वज पताका को कायम रखेगा।</p>
<p><strong>कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों</strong></p>
<p>ऐसा ही सांसारिक लोगों के बीच चमत्कार दिखाया है गणाचार्य विरागसागरजी महाराज ने उन्होंने जो समाधि पूर्व अपना वीडियो रिकार्ड कराया वह उनके अध्ययन की स्पष्टता आगम के प्रति उनके बहुमान को प्रदर्शित करता है। वैसे तो जैन जगत में दीक्षा ली ही इसलिए जाती है कि समाधि संल्लेखना को धारण कर आत्म पथिक बने। 350 दीक्षाओं के प्रदाता होने का सौभाग्य हासिल करने वाले गणाचार्य विरागसागरजी महाराज ने अपने आपको उस दौर में स्थापित किया जिस दौर में उनका विरोध भी हुआ। अपने विरोधियों को बौना साबित करते हुए गणाचार्य श्री विरागसागरजी ने अपने संघ को ऐसा मजबूत बनाया जहां से दिगम्बरत्व का सच्चा दिग्दर्शन करने में उनके शिष्य प्रशिष्यों ने कोई कसर नहीं छोड़ी ।</p>
<p>दिन-रात आत्मा का चिंतन मृदु संभाषण में वहीं कथन</p>
<p>निर्वस्त्र दिगम्बर काया में भी, प्रकट हो रहा अन्तर्मन</p>
<p>&#8230;. पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए वे एक ऐसे आचार्य बने जिन्होंने देश के ललाट पर एक ऐसी चमक बिखेरी जिससे जैन धर्म में उत्तर-दक्षिण की दुरियां मिटी साथ ही पंथवाद की बेड़ियों में जकड़ा समाज भी अपने आपमें महसूस करने लगा कि दिगम्बरत्व एक ऐसा देश है जिसे पालन करने वाला जीवन जीने की कला के साथ मृत्यु को प्राप्त करने की कला भी सीखता है ।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63228" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0015.jpg" alt="" width="1078" height="464" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0015.jpg 1078w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0015-300x129.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0015-1024x441.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0015-768x331.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0015-990x426.jpg 990w" sizes="(max-width: 1078px) 100vw, 1078px" />संल्लेखना की पवित्रता के पोषक बने गणाचार्य विरागसागरजी</strong></p>
<p>जब व्यक्ति जन्म लेता है उसी दिन से मृत्यु की यात्रा प्रारंभ हो जाती है । जीवन और मृत्यु के दो पृष्ठ के बीच जीवन की पुस्तक में मनुष्य का वह सब कुछ अंकित होता है जो उसे अजर-अमर बनाता है। गणाचार्य विरागसागरजी महाराज ने अपना संयमी जीवन महत 16 वर्ष की आयु में प्रारंभ कर दिया था। जिस आयु में हम अपना जीवन खेलकूद में व्यतीत करते है । उस आयु में आपने अपने हाथों से पिच्छी धारण कर तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागरजी महाराज से क्षुल्लक दीक्षा ले ली थी । लौकिक शिक्षा पाँचवी तक अलौकिक पंच महाव्रत में अंतिम समय तक दृढ़ रहे गणाचार्य</p>
<p>यदि हम लौकिक शिक्षा की बात करें तो वे केवल पांचवी तक ही पढ़े, शांति निकेतन कटनी में आपने मध्यमा (इन्टर) तक शिक्षा लेकर अपने आपको अलौकिक बनाने का उपक्रम कर लिया । वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागरजी महाराज के विश्वास पर खरे उतरे क्षुल्लक पूर्ण सागर को पूर्ण दिगम्बर बनाने वाले आचार्यश्री विमलसागरजी महाराज ने अपने वात्सल्य से पांचवी पास एक युवा को जीवन की कठिनतम शिक्षा की दीक्षा प्रदान करते हुए पूर्ण दिगम्बरत्व प्रदान किया । महाराष्ट्र का औरंगाबाद धन्य हुआ और नामकरण हो गया मुनिश्री विरागसागरजी महाराज ।</p>
<p>गुरुमुख से निकले &#8216;विराग&#8217; नाम को सार्थक करने निकले मुनि विरागसागरजी महाराज ने अपने तप त्याग &#8211; अध्ययन-मनन- चिंतन-स्वाध्याय के साथ अपनी चर्या का साम्य स्थापित करते हुए अनेक आयाम स्थापित किये । अपने आपको स्थापित करते हुए आपने अपने आपको इतना सक्षम बनाया कि 8 नवम्बर 1992 को सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि में गुरु आज्ञा से आपको जैन दर्शन के 36 मूलगुण धारी आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया । आचार्य पद प्रतिष्ठापन अवसर पर अपनी निस्पृहता प्रदर्शित करते हुए आपने कहा &#8216;गुरु बना नहीं जाता, बना दिया जाता है और शिष्य बनाये नहीं जाते, बन जाते है ।&#8217;</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63229" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014.jpg" alt="" width="1500" height="1125" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014.jpg 1500w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240710-WA0014-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1500px) 100vw, 1500px" />गुरु के विश्वास पर खरे उतरे शिष्यों की लग गई कतारें</strong></p>
<p>आचार्य श्री विरागसागरजी महाराज ने पद पर प्रतिष्ठित होने के बाद एवं समर्थ व सक्षम आचार्य के रूप में अपने आपको स्थापित किया उनके वाक्य शिष्य बनाये नहीं जाते बन जाते है का ऐसा असर हुआ कि शिष्यों की कतारे लग गई । आपने आचार्य, उपाध्याय, मुनि, आर्यिका, ऐलक, क्षुल्लक के रूप में 350 दीक्षाएं प्रदान की । आपने अपने शिष्यों में से आचार्य बनाये और उन्हें स्वतंत्रता देकर दिगम्बर धर्म को प्रभावी बनाने का आदेश दिया। देखते-देखते उनके शिष्यों ने सैकड़ों प्रशिष्य तैयार कर दिए जो आज संपूर्ण देश में अपना डंका बजा रहे है । उन्हीं में से एक श्रमणाचार्य 108 विशुद्धसागरजी महाराज को अपनी समाधि के कुछ घण्टे पहले अपना उत्तराधिकारी घोषित करने वाले आचार्यश्री विरागसागरजी महाराज ने जो अपना चेतनामयी विडियो बनवाया व उसमें जिस निस्पृहता से अपना निर्भीक, निराकुल कथन किया वह युगों-युगों तक गणाचार्य विरागसागरजी महाराज को अमरत्व प्रदान कर गया ।</p>
<p>2 जुलाई 2024 को गंभीर हार्टअटैक, समाज एवं चिकित्सकों को दृढता पूर्वक इलाज से इन्कार, पंच महाव्रतों के प्रति अभूतपूर्व दृढ़ता और 3 जुलाई 2024 को स्व संवेदन के साथ आहार चर्या करना फिर स्व-प्रेरणा से अपना विवेकपूर्ण वीडियो संदेश देना, उसमें भी सबसे क्षमा सबको क्षमा और यह कहना कि आज बोल रहे है कल न बोल पाए, आज ध्यान है कल ध्यान न रहे । मैंने पूरा विडियो कई बार सुना उनका हर शब्द न केवल स्पष्ट है बल्कि संसार के प्रति वैराग्य भाव के चरमोत्कर्ष को दर्शाता है। किसी साधक की साधना का नवनीत समाधि के प्रति ललक को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जैन दर्शन में सारे पद भार रूप है जिन्हें छोड़ना होता है पद मोक्षमार्ग में बाधक है। इस भावना के साथ उन्होंने अपने पद को छोड़ा और 4 जुलाई 2024 की प्रातःकालीन ब्रह्मबेला के पूर्व 2.27 बजे इस नश्वर देह का त्याग पूर्ण विवेक व प्रतिक्रमण सामायिक के उपरांत किया जो उन्हें एक ऐसा तपस्वी निरूपित करता है जो जैन दर्शन में समाधि की नजीर के रूप में स्थापित करेगा ।</p>
<p><strong>वर्तमान काल में युग प्रतिक्रमण के जनक थे गणाचार्य</strong></p>
<p>हम सबने प्रतिक्रमण खूब सुना लेकिन युग प्रतिक्रमण की चर्चा गणाचार्य विरागसागरजी के मुख से सुनी व देखी । अपने संघ के प्रत्येक साधु के इस निमित्त बुलाकर जैनत्व में प्रभावना का संदेश देकर उन्होंने युग प्रतिक्रमण को जीवंत किया ।</p>
<p>विद्वानों के प्रति अपूर्व स्नेह रखने वाले गणाचार्यजी ने अनेक सम्मेलन कराये, प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया, साहित्य सृजन किया, जीवंत कृतिया तैयार की। उनकी सरलता की सुगंध इतनी फैली थी कि उनसे दीक्षा लेने की लंबी कतार थी । उनकी पारखी नजर ने हमें ऐसे अनेक हीरे दिये जो दिगम्बरत्व के क्षितिज पर अपनी उत्कृष्टता को प्रदर्शित कर रहे है। आचार्य विशुद्धसागरजी, आचार्य विमर्शसागरजी, आचार्य विनम्रसागरजी, आचार्य विनिश्चयसागरजी, आचार्य विभवसागरजी सहित अनेक शिष्य-प्रशिष्य साहित्य सरोवर के राजहंस बनकर जिनागम की सेवा कर रहे है ।</p>
<p><strong>&#8216;वि&#8217; से प्रारंभ शिष्य परम्परा जैन दर्शन की विराग परम्परा</strong></p>
<p>आचार्य विमलसागरजी महाराज से विरागसागर नाम पाकर अपने शिष्यों के नाम में उन्होंने &#8216;वि&#8217; अवश्य जोड़ा जो उनकी एक विशिष्ट पहचान बनी संपूर्ण देश में &#8216;वि&#8217; से प्रारंभ होने वाले अधिकांश नामों को यह माना जा सकता है कि वे गणाचार्य विरागसागरजी महाराज के शिष्य है। मुझे उनका चरण सान्निध्य जुलाई 2013 पावागिरि ऊन से सिद्धवरकूट &#8211; इन्दौर यात्रा के दौरान मिला । सिद्धवरकूट कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष स्व.श्री प्रदीपकुमारसिंहजी कासलीवाल इन्दौर ने मुझे ( राजेन्द्र जैन महावीर ) व श्री आशीष चौधरी, मुकेश न पेप्सी सनावद को यात्रा की जिम्मेदारी सौंपी, उस दौरान लगभग 1 माह तक हम आचार्यश्री के चरण सान्निध्य में रहे । 09 जुलाई 2013 को आचार्य वर्धमानसागरजी महाराज की जन्मभूमि सनावद में उनका अभूतपूर्व प्रवेश हुआ, उनकी सरलता, सहजता देखकर मन प्रसन्नता से भर जाता रहा । ऐसे महान तपस्वी संत जिन्होंने अपने शरीर की आयु के 61 वर्ष में से 41 वर्ष दिगम्बरत्व की सेवा में लगाए व दिगम्बरत्व के नवनीत संलेखना समाधि को श्रेष्ठतम ऊंचाईयों प्रदान की ऐसे महान गुरुवर के चरणों में अपनी विनम्र विनयांजलि समर्पित करता हूँ ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/saint_acharya_viragsagarji_the_unique_journey_of_digambaratva/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विरागसागर महाराज का समाधिमरण : गणाचार्य की समाधि से हम सब शोक संतप्त हैं </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/grieving_samadhi_ganacharya/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/grieving_samadhi_ganacharya/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jul 2024 09:19:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dol Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Maran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlelekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोल यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि मरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62938</guid>

					<description><![CDATA[ जैन समाज ने गणाचार्य विराज सागर की समाधि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। समाज के लोगों ने कहा कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि 6 माह पूर्व श्रमण संस्कृति के महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज समाधिस्थ हुए थे इस दुख से हम सब उ बर ही नहीं पाए थे कि कल श्रमण संस्कृति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> जैन समाज ने गणाचार्य विराज सागर की समाधि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। समाज के लोगों ने कहा कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि 6 माह पूर्व श्रमण संस्कृति के महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज समाधिस्थ हुए थे इस दुख से हम सब उ बर ही नहीं पाए थे कि कल श्रमण संस्कृति के महान आचार्यों  मे से एक और आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज भी समाधिस्थ हो गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समाज ने गणाचार्य विराज सागर की समाधि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। समाज के लोगों ने कहा कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि 6 माह पूर्व श्रमण संस्कृति के महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज समाधिस्थ हुए थे इस दुख से हम सब उ बर ही नहीं पाए थे कि कल श्रमण संस्कृति के महान आचार्यों</p>
<p>मे से एक और आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज भी समाधिस्थ हो गए। इन दोनों महान आचार्यों का श्रमण संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण अवदान रहा है।</p>
<p>लगभग 400 से अधिक मुनि एवं आर्यिकाओं को जैनेश्वरी दीक्षा देकर श्रमण संस्कृति को गौरवांवित करने वाले आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज</p>
<p>एक उत्कृष्ट क्षयोपशम धारी और वात्सल्य से भरपूर राष्ट्र संत थे। लगभग 10 वर्ष पूर्व आचार्य श्री ने इंदौर के दलाल बाग छत्रपति नगर में लगभग 70 पिच्छियों के साथ चातुर्मास किया था जिसकी स्मृतियां हम सबके हृदय एवं मस्तिष्क पटल पर आज चंदन गंध की तरह अंकित है। इस दुखद प्रसंग पर आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक पारमार्थिक ट्रस्ट एवं दिगंबर जैन समाज छत्रपति नगर, अग्रसेन नगर, गौरव नगर एवं महावीर बाग दिगंबर जैन समाज की ओर से हार्दिक विनयांजलि और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, कार्याध्यक्ष डॉ. जैनेंद्र जैन, महामंत्री विपुल बांझल एवं समस्त पदाधिकारी एवं ट्रस्टी गण, मुक्ता जैन अध्यक्ष दिगंबर जैन परवार समाज महिला मंडल, राजेश जैन दद्दू मीडिया प्रभारी ने शोक व्यक्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/grieving_samadhi_ganacharya/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गणाचार्य विरागसागर महाराज का समाधिमरण : जैन समाज के लिए बड़ी क्षति </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/big_loss_jain_society/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/big_loss_jain_society/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jul 2024 08:04:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dol Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Maran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlelekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोल यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि मरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62927</guid>

					<description><![CDATA[इंदौर। एक और जैन धर्म, जैन समाज के संत शिरोमणि बुन्देलखण्ड के प्रथमाचार्य युग प्रतिक्रमण प्रवर्तक गणाचार्य 108श्री विराग सागर जी महाराज का समाधिस्थ हो जाना जैन समाज के लिए बड़ी क्षति है। दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन शोक और दुःख पर श्री प्रभु से प्रार्थना की कि आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर।</strong> एक और जैन धर्म, जैन समाज के संत शिरोमणि बुन्देलखण्ड के प्रथमाचार्य युग प्रतिक्रमण प्रवर्तक गणाचार्य 108श्री विराग सागर जी महाराज का समाधिस्थ हो जाना जैन समाज के लिए बड़ी क्षति है।</p>
<p>दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन शोक और दुःख पर श्री प्रभु से प्रार्थना की कि आचार्य श्री का जीव मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हुए सिद्ध शिला में विराजमान हो।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/big_loss_jain_society/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्मृति शेष : विरागसागर जी महाराज जब कांच मंदिर पधारे </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/when_viragsagar_ji_maharaj_visited_the_kanch_mandir/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/when_viragsagar_ji_maharaj_visited_the_kanch_mandir/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jul 2024 08:01:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dol Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Maran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlelekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोल यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि मरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62923</guid>

					<description><![CDATA[गणाचार्य विरागसागर जी महारजा जब कांच मंदिर पधारे, तब परम पूज्य भरत सागर जी महाराज भी यहीं विराजमान थे। दोनों शीशमहल में मिले, भरत सागर जी उच्च आसन पर विराजमान थे, विराग सागर जी को देखते बोले , आ जाओ इसी पर बैठ जाओ, दोनों एक सिहांसन पर बैठे। दोनों ने ही खूब हंसते मुस्कुराते [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गणाचार्य विरागसागर जी महारजा जब कांच मंदिर पधारे, तब परम पूज्य भरत सागर जी महाराज भी यहीं विराजमान थे। दोनों शीशमहल में मिले, भरत सागर जी उच्च आसन पर विराजमान थे, विराग सागर जी को देखते बोले , आ जाओ इसी पर बैठ जाओ, दोनों एक सिहांसन पर बैठे। दोनों ने ही खूब हंसते मुस्कुराते चर्चा की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए नकुल पाटोदी की ओर से यह विशेष स्मृति शेष</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> गणाचार्य विरागसागर जी महारजा जब कांच मंदिर पधारे, तब परम पूज्य भरत सागर जी महाराज भी यहीं विराजमान थे। दोनों शीशमहल में मिले, भरत सागर जी उच्च आसन पर विराजमान थे, विराग सागर जी को देखते बोले , आ जाओ इसी पर बैठ जाओ, दोनों एक सिहांसन पर बैठे। दोनों ने ही खूब हंसते मुस्कुराते चर्चा की। आज पुनः वह दृश्य जीवंत हो गया। दोनों ही युग पुरुष अब हमारे बीच नहीं हैं। समाज की बड़ी क्षति है। याद आता है, विराग सागर जी का वह दृश्य, समाज की सर सेठ हुकमचंद धर्मशाला में रात्रि विश्राम था।</p>
<p>रात गुरुदेव ने मुझे, समाज अध्यक्ष विजय कासलीवाल, देवेन्द्र पाटोदी, राजकुमार, ऋषभ, पाटनी को बुलाया और कहा कि शीशमहल की छत व्यवस्था करो, समाज ने हाथो-हाथ व्यवस्था की गई। सुबह बोले, नकुल आनंद आ गया, यही रुकने का मन है , पर आगे कार्यक्रम हैं। गणाचार्य की आकस्मिक क्षति से पूरा समाज हत प्रभ है, आहत है। प्रभु दरबार में उच्च आसन मिले यही प्रार्थना है</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/when_viragsagar_ji_maharaj_visited_the_kanch_mandir/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विराग सागर महाराज का समाधिमरण : विनयांजलि सभा आज रात आठ बजे </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vinyananjali_sabha_tonight_eight_oclock/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/vinyananjali_sabha_tonight_eight_oclock/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jul 2024 08:06:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dol Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Maran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlelekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोल यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि मरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62918</guid>

					<description><![CDATA[इंदौर। गणाचार्य श्री विरागसागरजी महाराज का बुधवार रात्रि 2.30 बजे संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण हो गया है। देश के सबसे ज्यादा दीक्षा देने वाले गणाचार्य जी की समाधि के समाचार सुनकर इस होने वाली आकस्मिक क्षति से पूरा समाज आहत है। गणाचार्य विरागसागरजी का 2013 में इंदौर में छत्रपति नगर और दलाल बाग में भव्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर।</strong> गणाचार्य श्री विरागसागरजी महाराज का बुधवार रात्रि 2.30 बजे संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण हो गया है। देश के सबसे ज्यादा दीक्षा देने वाले गणाचार्य जी की समाधि के समाचार सुनकर इस होने वाली आकस्मिक क्षति से पूरा समाज आहत है। गणाचार्य विरागसागरजी का 2013 में इंदौर में छत्रपति नगर और दलाल बाग में भव्य चातुर्मास पुलकमंच परिवार के तत्वाधान में छत्रपति नगर जैन समाज के साथ अतिभव्यतापूर्ण रूप से सम्पन्न हुआ था।</p>
<p>गणाचार्य जी के साथ लगभग 6 माह का सानिध्य 66 पिच्छी के साथ प्राप्त हुआ था। विनयांजलि सभा चार जुलाई को रात्रि 8:00 बजे श्री दिगम्बर जैन लश्करी मन्दिर गोराकुण्ड इंदौर पर रखी गई है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/vinyananjali_sabha_tonight_eight_oclock/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य विराग सागर महाराज की समाधि : 11 बजे निकाली जाएगी डोल यात्रा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/samadhi_acharya_virag_sagar_maharaj/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/samadhi_acharya_virag_sagar_maharaj/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jul 2024 07:58:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Dol Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Maran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlelekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोल यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि मरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=62910</guid>

					<description><![CDATA[रम पूज्य चर्या चूड़ामणि गणाचार्य आचार्य भगवन्त श्री विरागसागरजी गुरुदेव की समाधि 4 जुलाई की रात 2.30 बजे हुई। उनका अंतिम डोला सुबह ठीक 11.00 बजे महाराष्ट्र के अक्षय मंगल कार्यलय, देवमूर्ति ग्राम, सिंदखेड राजा रोड जालना से एक किलोमीटर दूरी पर पाटनी फार्म परिसर में होगा। पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230; जालना। परम पूज्य चर्या चूड़ामणि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रम पूज्य चर्या चूड़ामणि गणाचार्य आचार्य भगवन्त श्री विरागसागरजी गुरुदेव की समाधि 4 जुलाई की रात 2.30 बजे हुई। उनका अंतिम डोला सुबह ठीक 11.00 बजे महाराष्ट्र के अक्षय मंगल कार्यलय, देवमूर्ति ग्राम, सिंदखेड राजा रोड जालना से एक किलोमीटर दूरी पर पाटनी फार्म परिसर में होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जालना।</strong> परम पूज्य चर्या चूड़ामणि गणाचार्य आचार्य भगवन्त श्री विरागसागरजी गुरुदेव की समाधि 4 जुलाई की रात 2.30 बजे हुई। उनका अंतिम डोला सुबह ठीक 11.00 बजे महाराष्ट्र के अक्षय मंगल कार्यलय, देवमूर्ति ग्राम, सिंदखेड राजा रोड जालना से एक किलोमीटर दूरी पर पाटनी फार्म परिसर में होगा।</p>
<p><strong>परिचय </strong></p>
<p>विराग सागर महाराज का लौकिक नाम अरविंद था। उनका जन्म 2 मई 1963 को पथरिया जिला, दमोह (म.प्र.) में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री कपूरचंद जी (समाधिस्थ क्षुल्लक श्री विश्ववन्ध सागर जी) व माता का नाम श्रीमती श्यामा देवी (समाधिस्थ श्री विशांत श्री माता जी) है | उन्होंने आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज द्वारा [क्षुल्लक] दीक्षा (2 फरवरी 1980 को ग्राम बुढार ,जिला-शहडोल ,म.प्र. ग्रहण की। उन्हें आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज द्वारा मुनि दीक्षा 9 दिसंबर 1983 को औरंगाबाद में दी। आचार्य पद 8 नवंबर 1992 को सिद्ध क्षेत्र द्रोणगिरी जिला (छतरपुर) में प्राप्त किया।</p>
<p><strong>सृजन</strong></p>
<p>आचार्य श्री एक सृजनशील गणेषक तथा चिन्तक थे। अपने गहरे चिंतन की छाप प्रकट करने वाला उनका साहित्य निम्न उल्लेखित है- शुद्धोपयोग ,आगम चकखू साहू ,सम्यक दर्शन, संल्लेखना से समाधि, तीर्थंकर ऐसे बने, कर्म विज्ञान भाग एक व 2, चैतन्य चिंतन ,साधना,आरधना आदि।</p>
<p><strong>शिष्य गण</strong></p>
<p>227दीक्षित साधु (आचार्य 7, मुनि 83, गणिनी 4, आर्यिका 69 , क्षुल्लक 25 , एलक 5 , क्षुल्लिका 25)</p>
<p>उनके द्वारा दीक्षित आचार्य विमर्श सागर, आचार्य विशुद्ध सागर, आचार्य विशद सागर, आचार्य विभव सागर, आचार्य विहर्ष सागर ,आचार्य विनिश्चय सागर व आचार्य विमद सागर सात आचार्य हैं |</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/samadhi_acharya_virag_sagar_maharaj/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गणाचार्य श्री विराग सागर जी गुरुदेव से ली थी दीक्षा : श्रेयांसगिरि में आर्यिका विचारश्री माताजी का हुआ संल्लेखना समाधि महोत्सव </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sanlekhna_samadhi_festival_aryika_vicharshree_mataji_shreyansgiri/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/sanlekhna_samadhi_festival_aryika_vicharshree_mataji_shreyansgiri/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Jul 2023 08:03:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Virag Sagar Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Vicharshree Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Panna]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhimaran]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Shreyansgiri]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विराग सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका विचारश्री माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पन्ना]]></category>
		<category><![CDATA[श्रेयांसगिरि]]></category>
		<category><![CDATA[समाधिमरण]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=49336</guid>

					<description><![CDATA[बीते 21 जुलाई को देवेंद्रनगर निवासी ब्रह्मचारिणी कुसुम जी की आर्यिका दीक्षा सुबह 10:00 बजे संपन्न हुई एवं दोपहर 1:45 पर समाधि मरण हो गया। इसके बाद शाम 5:30 पर गाजे-बाजे के साथ धूमधाम भक्ति भाव जयकारों के साथ अंतिम दर्शन पश्चात समाधि महोत्सव हजारों जैन-जैनेत्तर धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। पढ़िए राजेश रागी/ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बीते 21 जुलाई को देवेंद्रनगर निवासी ब्रह्मचारिणी कुसुम जी की आर्यिका दीक्षा सुबह 10:00 बजे संपन्न हुई एवं दोपहर 1:45 पर समाधि मरण हो गया। इसके बाद शाम 5:30 पर गाजे-बाजे के साथ धूमधाम भक्ति भाव जयकारों के साथ अंतिम दर्शन पश्चात समाधि महोत्सव हजारों जैन-जैनेत्तर धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश रागी/ भरत सेठ की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पन्ना।</strong> जिले सलेहा के समीपवर्ती अतिप्राचीन दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र श्रेयांसगिरि पर चातुर्मासरत राष्ट्रसंत, भारत गौरव गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज विशाल संघ सहित विराजमान है। मीडिया समिति के भरत सेठ ने बताया कि पिछले सप्ताह सागर निवासी ब्रह्मचारिणी क्रांति जी की दीक्षा उपरांत समाधि महोत्सव संपन्न हुआ।</p>
<p>बीते 21 जुलाई को देवेंद्रनगर निवासी ब्रह्मचारिणी कुसुम जी की आर्यिका दीक्षा सुबह 10:00 बजे संपन्न हुई एवं दोपहर 1:45 पर समाधि मरण हो गया। इसके बाद शाम 5:30 पर गाजे-बाजे के साथ धूमधाम भक्ति भाव जयकारों के साथ अंतिम दर्शन पश्चात समाधि महोत्सव हजारों जैन-जैनेत्तर धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>जीवन भर शुद्ध आचार विचार का ध्यान</strong></p>
<p>यूं तो संसार में प्रतिक्षण अनेकों प्राणियों का जन्म मरण होता रहता है लेकिन उस मरण को समाधि मरण महोत्सव बनाने वाले विरले ही पुण्यवान होते हैं। अनेक संतों ने अपने साधनामय जीवन को समाधि मरण करके सफल किया है। जीवन भर किए गए अन्य कार्यों की सफलता तभी मानी जाती है, जब अंत समय व्रत संयम का पालन करते हुए गुरु चरणों में भगवान के नाम स्मरण के साथ समाधि मरण करने का अवसर प्राप्त हो। ऐसी ही थीं कुसुम बाई, जिनका जन्म पन्ना में हुआ तथा देवेंद्रनगर की निवासी थीं। आपकी उम्र 87 वर्ष की थी। आप अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। आपके पति स्वर्गीय श्री राजकुमार जी थे। आप के 2 पुत्र जिनेंद्र, सुशील एवं दो पुत्रियां उषा, रानी हैं। आपने बचपन से ही आलू प्याज आदि का स्पर्श भी नहीं किया।</p>
<p>इसके साथ ही बच्चों की शादी के बाद कभी किसी को रात्रि भोजन तक नहीं दिया। आपका सदैव प्रातः 11:00 बजे तक अन्य जल का त्याग रहता था। साधु-संतों के आहार उपरांत ही भोजन किया करती थीं तथा नगर में साधु-संतों के आ जाने पर बड़ी श्रद्धा भक्ति के साथ चौका लगाने व आहार देने में अत्यधिक रुचि रहती थी। लगभग 50 वर्षों से आप शुद्ध भोजन पानी तथा 2 वर्ष से एकासन के नियम में दृढ़ थीं। इसके साथ ही अष्टमी, चतुर्दशी एकासन अनंत चौदस आजीवन मौन पूर्वक उपवास तथा अपने जीवन काल में 1500 उपवास और 3000 एकासन की साधना में संलग्न थीं, लगभग 15 दिनों से आपने पूज्य गुरुदेव गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के चरणों में दीक्षा लेने की पवित्र भावना की थी।</p>
<p>आपको 18 जुलाई मंगलवार को पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी गुरुदेव द्वारा सप्तम प्रतिमा के व्रत दिए गए, 21 जुलाई प्रातः काल 9:45 पर क्षुल्लिका दीक्षा एवं 11:30 पर आर्यिका दीक्षा के व्रत प्रदान किए गए और आपका नाम रखा गया श्रमणी आयिका विचार श्री माताजी क्योंकि उन्होंने जीवन भर शुद्ध आचार विचार का ध्यान रखा है।</p>
<p>अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि तीर्थ पर परम पूज्य गणाचार्य गुरुदेव के कुशल नेतृत्व मे मंत्रोच्चारण के साथ सिद्ध परमात्मा का स्मरण करते हुए चतुर्विद संघ के समक्ष चारों प्रकार के आहार का त्याग पूर्वक यम संल्लेखना सहित 1:45 पर अंतिम स्वास छोड़ी और अपनी मृत्यु को समाधि महोत्सव बना लिया. बड़ी क्षमता के साथ माताजी ने नश्वर देह का विसर्जन कर स्वर्ग की ओर प्रयाण किया। समाधि की खबर लगते ही अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में जैन जैनेत्तर धर्मावलंबियों का तांता लगा रहा, वहीं मृत्यु महोत्सव में सम्मिलित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/sanlekhna_samadhi_festival_aryika_vicharshree_mataji_shreyansgiri/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
