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	<title>Acharya Shri Vimarsh Sagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आत्म तत्त्व ही परिष्कृत होकर परमात्मा बनता है : आचार्य श्री विमर्शसागर जी के सानिध्य में श्री 1008 समवसरण महामण्डल विधान हुआ </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 12:24:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[1008 समवसरण महामण्डल विधान में हजारों की संख्या में श्रद्धालु इन्द्र-इन्द्राणी बनकर श्री जिनेन्द्र भगवान की महा-आराधना कर रहे हैं। मेरठ से सोनल जैन की यह रिपोर्ट पढ़िए&#8230; मेरठ। मेरा महानगर के मध्य लगा भव्यातिभव्य आकर्षक श्री समवसरण है। सम्पूर्ण मेरठ एवं अनेकों नगर शहरों से बृहद संख्या में श्रद्धालु भक्त गण पहुंच रहे हैं। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>1008 समवसरण महामण्डल विधान में हजारों की संख्या में श्रद्धालु इन्द्र-इन्द्राणी बनकर श्री जिनेन्द्र भगवान की महा-आराधना कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">मेरठ से सोनल जैन की यह रिपोर्ट पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मेरठ।</strong> मेरा महानगर के मध्य लगा भव्यातिभव्य आकर्षक श्री समवसरण है। सम्पूर्ण मेरठ एवं अनेकों नगर शहरों से बृहद संख्या में श्रद्धालु भक्त गण पहुंच रहे हैं। श्री 1008 समवसरण महामण्डल विधान में हजारों की संख्या में श्रद्धालु इन्द्र-इन्द्राणी बनकर श्री जिनेन्द्र भगवान की महा-आराधना कर रहे हैं। मेरठ धर्मनगरी का महासौभाग्य जागा है आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के विशाल चतुर्विध संघ (35 पिच्छी) के सानिध्य के रूप में। आचार्य प्रवर ने श्री महावीर जयन्ती भवन में लगे भव्य समवसरण के बीच में उपस्थित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस धरा पर तीर्थकर परमात्मा ही एकमात्र ऐसे महापुरुष हैं। जिनकी धर्मसभा &#8220;समवसरण सभा &#8220;कहलाती है। तीर्थकर परमात्मा ही एकमात्र पुण्यात्मा होते हैं। जिनके पुण्य के आगे तीनों लोक के जीवों का भी पुष्य एकत्रित कर लिया जाए तब भी तीर्थकर प्रभु के समक्ष सब जीवों का पुष्य नगव्य है। सर्वोत्कृष्ट पुष्प महापुयुष की संगति-सानिध्य से हम भी पुष्य से भरने लगते हैं।</p>
<p>पूज्य आचार्यश्री ने जीवन जीने की समीचीन दृष्टि देते हुए कहा &#8211; आप बाजार जार से आम खरीद कर लाह और मान लीजिए उनमें एक आम सड़ा हुआ है, आप उस सड़े हुए आम का क्या करोगे? फेंक दोगे। आप उस सड़े आम को फेंक सकते हो लेकिन, कोई ज्ञानी पुरुष होगा वह सड़े आम को फेंक नहीं सकता क्योंकि, वह जनता है कि भले ही आम का गूदा सड़ा है लेकिन उस सड़े आम के अंदर भी वह शक्ति मौजूद है जिससे नया आम का वृक्ष पैदा किया जा सकता है। एक ठीक इसी प्रकार, बंधुओ। आप सब भी सड़े आम हो, &#8216;आपका क्या होगा ? आपके अन्दर भी मिथ्यात्व, असंयम, कषाय, प्रमाद आदि विकारों की सड़न लगी हुई है। तीर्थकर परमात्मा ने दो प्रकार की दृष्टि प्रदान की है हमें. द्रव्य दृष्टि और दूसरी पर्याय दृष्टि।</p>
<p>आपकी एकांत दृष्टि है इसलिए आपको आम हो या आपका जीवन दोनों में आपको सड़न ही दिखाई देती है। अपने हित के लिए आपको अपने जीवन से इस सड़न को दूर करना होगा और अपने मूल तत्त्व को जानकर अर्थात आत्मतत्त्व को जानकर, श्रद्वान कर और उसी का भाश्रय कर आत्मा को परमात्मा बनाना होगा।</p>
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		<title>35 पिच्छीधारी साधकों के सान्निध्य में मनाया गया भगवान महावीर का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव : जैन संस्कृति की रक्षा में प्रत्येक भारतीय को आगे आना होगा &#8211; आचार्य श्री विमर्शसागर जी  </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:27:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्तमान शासन नायक, अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव देश-विदेश के साथ मेरठ महानगर में भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया, ताकि प्रत्येक व्यक्ति विश्व शांति के लिए अपने स्तर पर योगदान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्तमान शासन नायक, अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव देश-विदेश के साथ मेरठ महानगर में भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया, ताकि प्रत्येक व्यक्ति विश्व शांति के लिए अपने स्तर पर योगदान दे सके। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मेरठ।</strong> वर्तमान शासन नायक, अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव देश-विदेश के साथ मेरठ महानगर में भी अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया, ताकि प्रत्येक व्यक्ति विश्व शांति के लिए अपने स्तर पर योगदान दे सके।</p>
<p>इस वर्ष मेरठ को विशेष रूप से विशाल आचार्य संघ के सान्निध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ। युग के महासंत, “जीवन है पानी की बूँद” महाकाव्य के रचनाकार भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ के साथ आचार्य प्रवर, 10 मुनिराज, 17 आर्यिका माताजी, 6 सुल्लिका माताजी, 1 क्षुल्लक जी एवं अनेक त्यागी-व्रती साधक-साधिकाओं का पावन सान्निध्य मेरठ को प्राप्त हुआ। यह अवसर मेरठ के इतिहास में स्वर्णिम और अभूतपूर्व माना जा रहा है।</p>
<p>मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष सुरेश जैन ‘ऋतुराज’ ने कहा कि भगवान महावीर का जन्म कल्याणक तो अनेक बार मनाया गया, लेकिन 35 पीछीधारी साधक-साधिकाओं के चतुर्विध संघ का सान्निध्य पहली बार प्राप्त हुआ है। आचार्य श्री एवं संघ की सरलता और तपस्या को देखकर प्राचीन काल की साधुचर्या का अनुभव होता है।</p>
<p><strong>भव्य रथयात्रा से हुई जिनागम पंथ की प्रभावना</strong></p>
<p>धर्मनगरी मेरठ के तीरगरान दिगंबर जैन मंदिर से भगवान महावीर की भव्य रथयात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई शारदा रोड स्थित महावीर जयंती भवन पहुंची। रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में भक्ति का वातावरण बना रहा।</p>
<p>महावीर जयंती भवन में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने कहा कि भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर हैं और उनसे पूर्व भी 23 तीर्थंकर इस धरा पर धर्म का प्रवर्तन कर चुके हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जैन धर्म के प्राचीन इतिहास को दबाया जा रहा है और इसे केवल 2650 वर्ष पुराना बताकर सीमित किया जा रहा है, जो अनुचित है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म वही है जो सबको गले लगाए और सर्वहित एवं सर्वकल्याण की भावना सिखाए। जैन धर्म ने कभी किसी पर अपना अधिकार नहीं जताया, बल्कि हमेशा सहिष्णुता और अहिंसा का मार्ग दिखाया है। उन्होंने सभी भारतीय नागरिकों से आह्वान किया कि वे प्राचीन जैन संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आएं और अपनी आवाज बुलंद करें। इस अवसर पर पूरे मेरठ महानगर में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।</p>
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		<title>सम्यक दर्शन से मिटत हैं अनंत दुःख : आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने मेरठ में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 15:18:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सम्यक दर्शन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब व्यक्ति को सम्यक दृष्टि प्राप्त हो जाती है, तब उसके जीवन में व्याप्त अनेक प्रकार के भ्रम, मोह और दुःख धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। मेरठ से पढ़िए, यह खबर&#8230; मेरठ। नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सम्यक दर्शन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब व्यक्ति को सम्यक दृष्टि प्राप्त हो जाती है, तब उसके जीवन में व्याप्त अनेक प्रकार के भ्रम, मोह और दुःख धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। <span style="color: #ff0000">मेरठ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मेरठ।</strong> नगर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सम्यक दर्शन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब व्यक्ति को सम्यक दृष्टि प्राप्त हो जाती है, तब उसके जीवन में व्याप्त अनेक प्रकार के भ्रम, मोह और दुःख धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। सम्यक दर्शन व्यक्ति को सत्य का बोध कराता है और उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि संसार में जो भी सुख-दुःख मनुष्य को प्राप्त होते हैं, वे किसी दूसरे व्यक्ति के कारण नहीं, बल्कि उसके अपने कर्मों का फल होते हैं।</p>
<p><strong>सम्यक दर्शन प्राप्त होने पर अज्ञान का होता है नाश</strong></p>
<p>उदाहरण स्वरूप राम और सीता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सीता के जीवन में जो कष्ट आए, वे किसी के द्वारा दिए गए नहीं थे, बल्कि उनके स्वयं के कर्मों का परिणाम थे। राम केवल निमित्त बने थे। इस प्रकार प्रत्येक जीव अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त करता है। उन्होंने आगे कहा कि सम्यक दर्शन प्राप्त होने पर अज्ञान और मोह का नाश होने लगता है। अज्ञान के कारण ही जीव अनेक प्रकार के दुखों में उलझा रहता है, लेकिन जब सम्यक दृष्टि जागृत होती है, तब अनंत दुःखों के कारण बनने वाले भ्रम स्वतः समाप्त हो जाते हैं और जीवन में शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p><strong>शास्त्र मनुष्य को सत्य और असत्य का विवेक देते हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धार्मिक शास्त्रों के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चा शास्त्र वही है जिसमें केवल अच्छी-अच्छी बातें ही नहीं होती, बल्कि जीवन की अच्छाई-बुराई दोनों का यथार्थ चित्रण भी होता है। ऐसे शास्त्र मनुष्य को सत्य और असत्य का विवेक प्रदान करते हैं तथा उसे संतुलित और सदाचारी जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सम्यक दर्शन के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं और धर्म मार्ग पर चलकर आत्मिक उन्नति का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सम्यक दृष्टि का अनुसरण करने से व्यक्ति का जीवन मंगलमय बनता है और समाज में शांति, सद्भाव तथा नैतिक मूल्यों की स्थापना होती है।</p>
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		<title>सिद्ध चक्र महामंडल विधान विश्वविश्व शांति महायज्ञ 24 से : समाजजनों से कार्यक्रम में भाग लेने की अपील  </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 13:55:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्श सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्वविश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। भिंड से सोनल जैन की यह खबर&#8230; भिंड। आचार्य श्री विमर्श सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्वविश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्श सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्वविश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">भिंड से सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> आचार्य श्री विमर्श सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नगर में सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं विश्वविश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। नगर में भगवान महावीर स्वामी की अनुकंपा एवं आचार्य श्री विमर्श सागर जी के मंगल आशीर्वाद से श्री दिगंबर जैन सूर्य सागर उदासीन आश्रम नसिया जी जैन मंदिर में 24 फ़रवरी से 4 मार्च तक सिद्धचक्र महामंडल का विधान एवं विश्वविश्व शांति महायज्ञ होने जा रहा है। आप सभी धर्म प्रेमी बंधुओ से निवेदन है कि आप सभी इस आयोजन में पधार कर धर्म लाभ लें। कार्यक्रम के पुण्यार्जक परिवार नाथूराम जैन,  सुलेखा राकेश जैन, शालिनी रजत जैन, रीतिशा अमन जैन, अनुज जैन, वाणी जैन, जिनीषा जैन एवं समस्त लोटामार परिवार हैं।</p>
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		<title>बड़े जैन मंदिर में किया छठवां साप्ताहिक जिनाभिषेक : आर्यिका श्री विमर्शिता श्री माताजी के मंगल निर्देशन में हुआ आयोजन  </title>
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		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 12:22:36 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्यश्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के मंगल भावना और आशीर्वाद एवं आर्यिका श्री विमर्शिता श्री माताजी के मंगल निर्देशन में मंगलवार को बड़े जैन मंदिर में छठवां साप्ताहिक जिनाभिषेक पूरे भक्ति भाव एवं युवा जोश के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">एटा से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>एटा।</strong> भावलिंगी संत की मंगल भावना और आशीर्वाद एवं आर्यिका श्री विमर्शिता श्री माताजी के मंगल निर्देशन में मंगलवार को छठवां साप्ताहिक जिनाभिषेक हुआ। आचार्यश्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के मंगल भावना और आशीर्वाद एवं आर्यिका श्री विमर्शिता श्री माताजी के मंगल निर्देशन में मंगलवार को बड़े जैन मंदिर में छठवां साप्ताहिक जिनाभिषेक पूरे भक्ति भाव एवं युवा जोश के साथ हुआ। आओ करे सभी समस्याओं का हल प्रभु के मस्तक पर एक कलशा जल। हो जाएं तैयार आ रहा है सातवां साप्ताहिक अभिषेक। जनवरी मंगलवार को सुबह 6.30 बजे श्री दिगम्बर जैन बड़ा जैन मंदिर पुरानी बस्ती में इसका आयोजन होगा। भावलिंगी संत गुरु विमर्श की भावना होगी साकार। साप्ताहिक जिनाभिषेक लगेगा एटा में त्योहार। इसके आयोजक जिनाग़म पंथी श्रावक संघ एवं गुरु विमर्श परिवार एटा है।</p>
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		<title>संसार में जीवात्मा तब तक ही रहता है जब तक जीव के अंदर संसार : बड़ौत में 35 पिच्छीधारी संयमियों की शीतकालीन मंगल कलश स्थापना  </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 13:43:41 +0000</pubDate>
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<p><strong>‘जीवन है पानी की बूंद’ महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज, जिनके पादमूल में 35 पिच्छीधारी संयमी साधक संयम की साधना, रत्नत्रय की आराधना में संलग्न रहते हैं। ऐसे विशाल चतु‌र्विधसंघ के अधिनायक श्रेष्ठ दिगंबराचार्य का ससंघ शीतकालीन प्रवास धर्मनगरी बड़ौत में हो रहा है। <span style="color: #ff0000">बड़ौत से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> बड़ौत।</strong> जीवन है पानी की बूंद ष् महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज, जिनके पादमूल में 35 पिच्छीधारी संयमी साधक संयम की साधना, रत्नत्रय की आराधना में संलग्न रहते हैं। ऐसे विशाल चतु‌र्विधसंघ के अधिनायक श्रेष्ठ दिगंबराचार्य का ससंघ शीतकालीन प्रवास धर्मनगरी बड़ौत में हो रहा है। दिसंबर माह की प्रचंड शीत-ठंड के साथ आचार्य के श्रीमुख से होगी शीतकालीन वाचना। प्रातः काल की धर्मसभा में श्री रयणसार महाग्रंथ पर आचार्य गुरुवर धर्माेपदेश प्रदान करेंगे। वहीं दोपहर काल में श्री षट्‌खंडागम जी महाग्रंथ की धवला पुस्तक-1पर आचार्य संघ के सानिध्य में वाचना होगी। जिसके वाचना प्रमुख डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत रहेंगे। 18 दिसंबर की प्रातः बेला की धर्मसभा में आचार्य श्री के चतुर्विध संघ सानिध्य में शीतकालीन वाचना का मंगल कलश स्थापित किया गया। वाचना के कलश स्थापना का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी जिनागम पंथी ब्रिजेन्द्र जैन, तरुण जैन (भगवती स्टील) परिवार ने लिया। शीतकालीन वाचना कलश स्थापना में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि संसार में जीवात्मा तब तक ही रहता है। जब तक जीव के अंदर संसार रहता है।</p>
<p>बाहर का संसार चतुर्गति रूप है तो आपके अंदर रहने वाला संसार आपके ही राग-देष-मोह रूप विभाव परिणाम हैं। यह जीव अपने ही अंदर के रागादि विभावों से प्रेरित होकर अपने संसार को बढ़ाता रहता है। परम हितकारी निर्ग्रंथ मुनिराज भव्य जीवों को राग-द्वेष-मोह आदि विभावों से बचने का उपाय बतलाते हैं। आत्म हित चाहने वाले भव्य जीवात्मा रागादि विभावों से स्वयं की रक्षा करते हुए पर पदार्थ एवं पर भावों से रुचि हटाकर आत्म स्वभाव में ही रुचि बढ़ाते हुए निज आत्म तत्त्व में लीन होता है।</p>
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		<title>बीज की भांति आत्मा ही बनता है परमात्मा : बड़ौत में गूंजी विमर्श वाणी श्रद्धालु हुए लाभान्वित  </title>
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		<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 03:48:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ 35पिच्छी का बड़ौत धर्मनगरी में शीतकालीन प्रवास हो रहा है। यहां उनके प्रवचनों का धर्मलाभ यहां की जनता ले रही है। बड़ौत से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर.. बड़ौत। 11 वर्षों बाद धर्मनगरी बड़ौत में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज की महामंगलमय वाणी गूंज रही है। सन् [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ 35पिच्छी का बड़ौत धर्मनगरी में शीतकालीन प्रवास हो रहा है। यहां उनके प्रवचनों का धर्मलाभ यहां की जनता ले रही है। <span style="color: #ff0000">बड़ौत से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ौत।</strong> 11 वर्षों बाद धर्मनगरी बड़ौत में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज की महामंगलमय वाणी गूंज रही है। सन् 2014 में आचार्य श्री ससंघ का चातुर्मास बड़ौत में हुआ था। बड़ौत नगर के गुरु भक्त आचार्य गुरुवर को नगर में लाने का अथक प्रयास करते रहे। दीर्घ अंतराल के बाद् आचार्य गुरुवर का पुनः आगमन धर्मनगरी बड़ौत में हुआ तो लगा मानो दीवाली ही नगर में आ गई हो। बड़ौत जैन समाज के विशेष आग्रह निवेदन पर आचार्य श्री ने बड़ौत समाज को ‘शीतकालीन प्रवास’ का मंगलमय शुभशीष प्रदान किया। मंगलवार से बड़ौत के अजितनाथ सभागार मंडी में श्री रयणसार ग्रंथ पर मंगलमय वाचना प्रारंभ हो रही है। प्रातः काल की बेला में भव्य श्रावक-श्राविकाएं गुरु आराधना पूर्वक गुरुवर की दिव्य देशना श्रवण करेंगे। मंगलवार को प्रातः काल की धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा जब तक बीज धरती में बोया नहीं जाता तब तक वह फल प्रदान करने में समर्थ नहीं हो सकता। बीज भूमि को देखता रहे और भूमि बीज को देखती रहे, इतने मात्र से न तो भूमि फसल प्रदान कर सकती है और नहीं बीज फल दे सकता है।</p>
<p>ठीक इसी प्रकार आप भगवान को मात्र देखते रहे कभी अपना समर्पण न कर सके तो भगवान को देखने मात्र से आप भगवान नहीं बन सकेंगे। भगवान बनने की पहली आवश्यकता है ‘आत्म समर्पण’ अर्थात् अब ‘मैं जो कुछ भी करूंगा वह एक मात्र जिनेन्द्र भगवान के द्वारा बतलाए मार्ग के अनुसार ही करूंगा, अपनी स्वेच्छाचार प्रवृत्ति नहीं करूंगा’ ऐसी आत्म समर्पण की भावना जहां जन्म लेती है वहीं से भगवान बनने की यात्रा प्रारंभ हो जाती है। बीज को उगाने के लिए भूमि ही पर्याप्त नहीं है, भूमि भी उर्वरा होना चाहिए। ऊसर अर्थात् बंजर भूमि में बोया गया बीज नष्ट हो जाता है। ठीक इसी प्रकार, आपकी भावनाएं श्रेष्ठ हैं।</p>
<p>आपका आत्म समर्पण समीचीन है किन्तु जहां आपका समर्पण है, वह पात्र श्रेष्ठ नहीं है तब भी आपको समर्पण का फल प्राप्त नहीं हो सकता। ध्यान रखो, जिन्होंने राग-द्वेष-मौह से रहित वीतरण भाव प्राप्त कर लिया हो, सर्वतता और हितोपदेशिता प्रगट कर ली हो ऐसे सच्चे। देव-जिनेंद्र देव सच्चे शास्त्र एवं सच्चे गुरु निर्गन्य वीतरागी गुरु ही वास्तव में आत्म समर्पण के लिए श्रेष्ठ आश्रय करने योग्य हों। इनकी शरण में किया गया आत्म समर्पण ही एक दिन भक्त को भगवान बना देता है।</p>
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		<title>जहां सारे भेष विसर्जित हो जाते हैं वहां दिगंबर भेष जन्म लेता है : आचार्य श्री विमर्श सागर जी के सानिध्य में आचार्य श्री विरागसागर जी का मनाया 43 वां दीक्षा दिवस  </title>
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		<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 09:46:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विराग सागर जी का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस बुढ़ाना धर्मनगर में मनाया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (35 पिच्छी) के सानिध्य में बुढ़ाना शहर के कृष्णा पैलेस में हुआ &#8216;विराग महोत्सव&#8217; मनाया गया। बुढ़ाना (उप्र) से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; बुढ़ाना (उप्र)। आचार्य श्री विराग सागर जी का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर जी का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस बुढ़ाना धर्मनगर में मनाया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (35 पिच्छी) के सानिध्य में बुढ़ाना शहर के कृष्णा पैलेस में हुआ &#8216;विराग महोत्सव&#8217; मनाया गया। <span style="color: #ff0000">बुढ़ाना (उप्र) से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बुढ़ाना (उप्र)।</strong> आचार्य श्री विराग सागर जी का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस बुढ़ाना धर्मनगर में मनाया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (35 पिच्छी) के सानिध्य में बुढ़ाना शहर के कृष्णा पैलेस में हुआ &#8216;विराग महोत्सव&#8217; मनाया गया। मंगलवार को संपूर्ण भारत वर्ष में आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य गुरुवर के 500-550 शिष्य प्रशिष्यों ने धर्म समाजों के मध्य गुरुवर का संयमोत्सव मनाया। बुढ़ाना धर्मनगर में आयोजित गुरुवर के 43 वें महामुनि दीक्षा दिवस पर भक्तों और शिष्यों की विनयांजलि के उपरांत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने अपने गुरुवर आचार्य श्री विरामसागर जी के चरणों में भाव विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा कि यह पावन पवित्र जिनमुद्रा मात्र इस धरती पर ही मान्य नहीं है अपित यह जिनमुद्रा संपूर्ण तीनों लोकों में वंदनीय,अर्थनीय, पूजनीय है। आज वह श्रेष्ठ दिवस है।</p>
<p><strong>9  दिसम्बर 1983 को मुनि मुद्रा को धारण किया</strong></p>
<p>जब इस युवा के महान संत आचार्य विरागसागर जी महामुनिराज ने 9  दिसम्बर 1983 को महाराष्ट्र प्रांत के औरंगाबाद धर्मनगरी में जिनेन्द्र भगवान द्वारा प्रतिपादित सर्वश्रेष्ठ मुनि मुद्रा को धारण किया था। हमारे आचार्य गुरुदेव अत्यंत सरल स्वभावी थे। वे जहां से गुजर जाते थे वहीं से अनेकों युवा साथी सांसारिक भोग-विलासों को ठुकराकर वैराग्य पथ को अंगीकार कर लिया करते थे।</p>
<p><strong>भक्ति युक्त भाव विनयांजलि समर्पित</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने प्रवचनों में कहा- बन्धुओं ! दिगम्बर भेष इस धरा पर अलौकिक हुआ करता है, जहां अन्य कोई वेशभूषा नहीं ओढ़ी जाती। अपितु जहां सारे भेष विसर्जित हो जाते हैं, वहां दिगम्बर भेष जन्म लेता है। आचार्य गुरुवर की साधना का माहात्म्य बताते हुए आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि साधक ने अपने पूरे जीवन काल में कैसी उत्कृष्ट साधना की है। यह उसका अंतिम समय बताता है। आचार्य श्री ने अपनी साधना का फल उत्कृष्ट समाधि के रूप में हमारे बीच प्रस्तुत किया। बंधुओं आचार्य गुरुवर जैसी सर्वश्रेष्ठ समाधि दूर-दूर तक भी नहीं देखी जाती है। आज के शुभ दिवस पर हम सभी गुरुवर के चरणों में भक्ति युक्त भाव विनयांजलि समर्पित करते हैं।</p>
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		<title>दुर्गुणों के नाश एवं सद्‌गुणों की प्राप्ति के लिए धर्म जरूरी : आचार्य श्री विमर्श सागर जी की अगवानी में बुढ़ाना समाज उमड़ा  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/religion_is_necessary_for_the_destruction_of_bad_qualities_and_the_attainment_of_good_qualities/</link>
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		<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 12:50:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म की शरण में आने से हमें वह प्राप्त होता है, जो संसार में कहीं भी प्राप्त नहीं होता। धर्म हमें वह देता है, जो वचनों से नहीं कहा जा सकता, वह अनिर्वचनीय होता है। धर्म पालन करने के फल लोक में सर्वाेत्कृष्ट होते हैं। यह मंगलकारी सदुपदेश मुज़फ़्फ़रनगर जनपद के बुढाना नगर में विराजमान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्म की शरण में आने से हमें वह प्राप्त होता है, जो संसार में कहीं भी प्राप्त नहीं होता। धर्म हमें वह देता है, जो वचनों से नहीं कहा जा सकता, वह अनिर्वचनीय होता है। धर्म पालन करने के फल लोक में सर्वाेत्कृष्ट होते हैं। यह मंगलकारी सदुपदेश मुज़फ़्फ़रनगर जनपद के बुढाना नगर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने दिया। <span style="color: #ff0000">बुढ़ाना से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>बुढ़ाना।</strong> धर्म की शरण में आने से हमें वह प्राप्त होता है, जो संसार में कहीं भी प्राप्त नहीं होता। धर्म हमें वह देता है, जो वचनों से नहीं कहा जा सकता, वह अनिर्वचनीय होता है। धर्म पालन करने के फल लोक में सर्वाेत्कृष्ट होते हैं। यह मंगलकारी सदुपदेश मुज़फ़्फ़रनगर जनपद के बुढाना नगर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने दिया। रविवार को संध्या बेला में बुढ़ाना धर्मनगरी का परम सौभाग्य जागा, जब 35 पिच्छीधारी संयमी साधकों के साथ जीवन है पानी की बूंदे महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज का ससंघ आगमन हुआ।</p>
<p>बुढाना नगरवासियों को तो मानो संपूर्ण पर्व-त्योहार एक साथ मनाने के लिए प्राप्त हो गए हों। बुढ़ाना के बाशिंदे समीप के शाहपुर नगर से पदविहार कराते हुए विशाल चतुर्विध आचार्य संघ को अपने नगर में लेकर आए और भव्य मंगल स्वागत अभिनंदन करते हुए आचार्य श्री का द्वार-द्वार पर पाद‌ प्रक्षालन एवं आरती करते हुए अपने सौभाग्य को द्विगुणित किया। अपार जनसमूह के उल्लास को उमड़ता देख जैन समाज के प्रतिनिधि ने कहा कि आज तो हमारे जन्मों-जन्मों का पुण्य एकत्रित होकर उदय में आया है, जो समवशरण की भांति भावलिंगी संत के ससंघ का सानिध्य हमें प्राप्त हुआ। आचार्यश्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि धर्म हमारे जीवन से दुर्गुणों को हटाकर सद्‌गुणों की फसल पैदा करता है। जिसमें आत्मा के सुख-आनंद रूपी फलों की प्राप्ति हमें होती है। धर्म की प्राप्ति कहीं बाहर नहीं होती, धर्म वास्तव में हमारी आत्मा का ही स्वभाव है, जिसे सच्चे देव, सच्चे शास्त्र एवं सच्चे गुरु तथा पंच परमेष्ठी की आराधना से स्वयं में ही प्रकट किया जाता है।</p>
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		<title>तन की शुद्धि जल से, चेतन की शुद्धि भावों से होती है: आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने जैन मिलन विहार में किया धर्मसभा को संबोधित  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 09:38:36 +0000</pubDate>
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<p><strong>मुज़फ़्फ़रनगर की पावन धर्मधरा पर 35 पिच्छीधारी संयमियों के साथ आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपूर्व धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। जैन मिलन विहार में उपस्थित विशाल धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि जिनेंद्र देव कहते हैं कि एक गृहस्थ श्रावक को प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। <span style="color: #ff0000">मुजफ्फरनगर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुज़फ़्फ़रनगर (उप्र)।</strong> जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी दिगंबर जैन परंपरा में सर्वश्रेष्ठ साधक एवं विशाल चतुर्विध संघ के अधिनायक संघ शिरोमणि अद्वितीय संत हैं। मुज़फ़्फ़रनगर की पावन धर्मधरा पर 35 पिच्छीधारी संयमियों के साथ आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपूर्व धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। जैन मिलन विहार में उपस्थित विशाल धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि जिनेंद्र देव कहते हैं कि एक गृहस्थ श्रावक को प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। बंधुओ! आप जन्म से लेकर आज तक तन अर्थात् शरीर को स्नान कराते आए हैं। ध्यान रखो, जल से शरीर की शुद्धि हो सकती है किंतु यदि आपको अपने चेतन को शुद्ध करना है तो वह बाहरी जल से शुद्ध नहीं होगा, चेतन शुद्धि के लिए आपको शुभ-शुद्ध भावजल की आवश्यकता है। भाव शुद्धि के बिना तीन काल में भी आपके चेतन-आत्मा की शुद्धि नहीं हो सकती। बंधुओ शरीर तन को स्नान कराते हुए तो अनादि काल बिता दिया। अब एक बार अपने भावों को संभालकर भावशुद्धि द्वारा अपने चेतन आत्मा को स्नान करा लो, आपकी आत्मा भी परमात्मा हो जाएगी।</p>
<p><strong>जल को छानकर ही उपयोग करना चाहिए</strong></p>
<p>जल की महत्ता बताते हुए आचार्य श्री ने कहा जिनेंद्र भगवान ने पानी की एक बूंद में असंख्यात जीव बतलाए हैं, वर्तमान में वैज्ञानिक भी एक बूंद पानी में 36,450 जीव बताते हैं। बंधुओं! आप प्रतिदिन स्नान करते हैं, छने हुए जल से या बिना छने जल से। विचार करना, आपने अनछने जल से स्नान कर लिया। आपने अपने शरीर की शुद्धि की है या शरीर को अशुद्ध कर लिया। आपकी जेब में रूमाल हो या न हो लेकिन, पानी छानने का छन्ना अवश्य होना चाहिए। पानी छानने का छन्ना आपके अहिंसक होने का प्रतीक है। अहिंसा धर्म का पालक अवश्य ही पानी छानकर ही प्रयोग करेगा। आपके पास छन्ना है तो समझ लेना आपके पर चारों अनुयोगों के शास्त्र है, क्योंकि आपके पास अहिंसा धर्म का आचरण है।</p>
<p><strong>इस तरह रहेगा विहार का मार्ग</strong></p>
<p>3 दिसंबर की मध्याह्न बेला में आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ जैन मिलन विहार कॉलोनी से पद विहार करते हुए नंदगांव में पदार्पण करेंगे। 4 दिसंबर की प्रातः बेला में आचार्य संघ की आहार चर्या नंदगांव में ही होगी। 4 दिसंबर को मध्याह्न बेला में आचार्य श्री विमर्शसागर जी अतिशय क्षेत्र वहलना में पदार्पण करेंगे, जहां उन्हीं के सानिध्य में आचार्य विमर्श सागर प्रवचन सभागार का लोकार्पण किया जाएगा। शाम को आचार्य संघ पद‌विहार करते हुए ग्राम तावली पहुं‌चेंगे।</p>
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