<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Acharya Shri Vidyasagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/acharya-shri-vidyasagar-ji/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Thu, 30 Apr 2026 13:21:12 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Acharya Shri Vidyasagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>चंबल संभाग में 17 मई से प्रारंभ होंगे श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविर : 50 से अधिक स्थानों पर होंगे शिक्षण शिविर  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shramana_culture_training_camps_will_start_from_may_17_in_chambal_division/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/shramana_culture_training_camps_will_start_from_may_17_in_chambal_division/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:21:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sudhasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shramana Culture Teaching Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री सुधासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=106016</guid>

					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी 17 मई से श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के तत्वावधान में चंबल संभाग के नगर-नगर एवं गांव-गांव में श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविर प्रारंभ होने जा रहे हैं। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230; मुरैना। ग्रीष्मकालीन अवकाश में बच्चों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी 17 मई से श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के तत्वावधान में चंबल संभाग के नगर-नगर एवं गांव-गांव में श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविर प्रारंभ होने जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> ग्रीष्मकालीन अवकाश में बच्चों को धार्मिक शिक्षा एवं संस्कार देने के लिए विगत अनेकों वर्षों से जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के तत्वावधान में श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी 17 मई से श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के तत्वावधान में चंबल संभाग के नगर-नगर एवं गांव-गांव में श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविर प्रारंभ होने जा रहे हैं। ‎यह शिविर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित किए जा रहे हैं।</p>
<p>‎चम्बल संभाग शिविर प्रभारी विद्वत् नवनीत जैन शास्त्री एवं सह प्रभारी आशीष जैन शास्त्री के मार्गदर्शन में किया जाएगा। यह शिविर विशेष रूप से नई पीढ़ी को जैन धर्म, जैन दर्शन एवं आत्मकल्याण की शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किए जाते हैं। शिविरों में बालक-बालिकाओं एवं युवाओं को जैन सिद्धांत, पंच परमेष्ठी, णमोकार मंत्र, पूजन-विधान, अभिषेक शांति धारा, सामायिक, प्रतिक्रमण, तत्वज्ञान, मोक्षमार्ग, आत्मा-अनात्मा का विवेक तथा राग-द्वेष से मुक्त होने की प्रेरणा दी जाएगी । ‎‎इसके साथ ही शिविरों में जैन दर्शन से जुड़े विभिन्न ग्रंथों का अध्ययन भी कराया जाता है, जिससे नई पीढ़ी अपने धर्म को समझ सके, आत्मस्वरूप की पहचान कर सके और अपने जीवन को धर्ममय बना सके। पिछले वर्षों में लगभग चंबल संभाग के 50 से अधिक स्थानों पर ऐसे शिविरों का आयोजन किया गया, जिनसे अनेक बालक-बालिकाओं एवं युवाओं के जीवन में धर्म, संयम और आत्मजागरण की भावना विकसित हुई। ‎आज जब नई पीढ़ी अपने मूल धर्म और तत्वज्ञान से दूर होती जा रही है, ऐसे समय में यह शिक्षण शिविर जैन धर्म, आत्मचिंतन और तत्वज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/shramana_culture_training_camps_will_start_from_may_17_in_chambal_division/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनि श्री ने भोजन को जूठा नहीं छोड़ने का संकल्प दिलाया : झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/muni_shri_administered_a_pledge_not_to_leave_any_food_unfinished/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/muni_shri_administered_a_pledge_not_to_leave_any_food_unfinished/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 05:37:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Samay Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Diksha Memorial Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Bhavsagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Dharmasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री समय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री धर्मसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री भावसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=105267</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। झुमरी तिलैया से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> झुमरी तिलैया।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में 20अप्रैल को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को विशेष माना गया है। इसलिए इसका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। थाली में भोजन को जूठा छोड़ना इसका अनादर करने के समान है। ऐसे ही कुछ संस्कारों की शुरूआत की गई है। रोजाना हजारों लोग रोटी के बगैर भूखे सो जाते हैं और कई लोग थाली में भोजन को जूठा छोड़ देते हैं। भोजन उतना ही लो, जितना खा सको ताकि बचा हुआ भोजन किसी दूसरे के काम आ सके।</p>
<p><strong>अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा</strong></p>
<p>इन्हीं सब उद्देश्यों को लेकर एक विद्यालय में शनिवार का दिन &#8216;भोजन जूठा न छोड़ें&#8217; के रूप में मनाया जाता है। इस दिन एक भी बच्चा अपने टिफिन में भोजन को जूठा नहीं छोड़ता है। अगर भोजन बचता भी है तो उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी स्कूल की ही होतीहै। इतना ही नहीं इस स्कूल के सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और टीचर उन्हें पूरा भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा। कहा जाता है कि जूठन छोड़ना पाप है, फिर भी बहुत लोग जूठन छोड़ते हैं।</p>
<p>आजकल अन्न पैसे से खरीदते हैं। इसलिये लोग उसकी तुलना पैसे से करते हैं। जूठन छोड़ देते हैं और उसे फेंक देते हैं किन्तु यह वास्तविकता नहीं है।</p>
<p><strong>जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए</strong></p>
<p>पैसे से अन्न खरीदा नहीं जा सकता। अन्न धरती अपनी छाती चीर कर देती है। कोई उसका अपमान करता है तो धरती दुःखी होती है और दूसरे जन्म में उसे अन्न के लिये तरसाती है। आज से सभी संकल्प लें कि थाली में जूठन नहीं छोड़ेंगे और इतना लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में। जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए। आधा गिलास भरकर रिश्तेदारों को, मित्रों को, परिवार वालों को देना चाहिए। जिससे कि अन्न और जल की बर्बादी ना हो, पक्षी को भी सकोरे में जल रखना चाहिए। पशुओं के लिए भी जल की व्यवस्था करना चाहिए। सेविंग में एवं स्नान आदि कार्यो में जल की बचत करना चाहिए। जल की सोचे कल की सोचे। कई लोगों ने संकल्प लिया।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव 22 अप्रैल को</strong></p>
<p>समाज के पदाधिकारी ने कहा कि मुनि श्री धर्मसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव प्रथम चरण में 22 अप्रैल को प्रातः 6बजे ध्वजारोहण से प्रारंभ होगा। फिर नगर के इतिहास में प्रथम बार समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज एवं समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न की शुद्धि, अष्ट कुमारियों के द्वारा होगी। आचार्य छत्तीसी विधान होगा। मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 23अप्रैल को द्वितीय चरण में प्रातः6बजे मांगलिक क्रियाएं, गुरु महापूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुति, मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। यह झारखंड में प्रथम बार होगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/muni_shri_administered_a_pledge_not_to_leave_any_food_unfinished/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लोकसभा अध्यक्ष सिंगोली में होने जा रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आएंगे : पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2 से 7 अप्रैल तक तय </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lok_sabha_speaker_will_attend_the_panch_kalyanak_pratishtha_mahotsav_to_be_held_in_singoli/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lok_sabha_speaker_will_attend_the_panch_kalyanak_pratishtha_mahotsav_to_be_held_in_singoli/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 13:41:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lok Sabha Speaker Om Birla]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Pranamya Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak Pratishtha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री प्रणम्य सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=101102</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव जो कि 2 से 7 अप्रैल के मध्य होना तय है। सिंगोली से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; सिंगोली। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से मुनि श्री प्रणम्य सागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव जो कि 2 से 7 अप्रैल के मध्य होना तय है। <span style="color: #ff0000">सिंगोली से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सिंगोली।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव जो कि 2 से 7 अप्रैल के मध्य होना तय है। सिंगोली जैन समाज का प्रतिनिधि मंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को आमंत्रण एवं पधारने हेतु निवेदन करने पहुंचा। इस प्रतिनिधि मंडल में अध्यक्ष भरत जैन,पारस हरसौरा,राजेंद्र मोहिवाल, चांदमल जैन,शोभालाल जैन,सुभाष जैन,कमल जैन,सुभाष जैन,अशोक जैन,बसंत जैन,पुष्प जैन,हितेश जैन चेतन भैया ओर कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे। इसके साथ ही होने वाले कार्यक्रम की समस्त जानकारियां प्रदान की जानकारी देते हुए अध्यक्ष भरत जैन ने बताया कि बिरला ने समाज के इस निमंत्रण को प्रमुखता से लिया। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में आने की स्वीकृति प्रदान की। स्वीकृति मिलने के बाद अध्यक्ष भारत जैन एवं प्रतिनिधिमंडल ने उनका बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि आपका आना निश्चित ही नगर सिंगोली एवं जैन समाज के लिए गर्व का विषय है आपकी उपस्थिति से निश्चित ही यह कार्यक्रम अपने नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lok_sabha_speaker_will_attend_the_panch_kalyanak_pratishtha_mahotsav_to_be_held_in_singoli/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस मनाया&#039;: आचार्य छत्तीसी विधान कर आचार्यश्री के उपकारों पर प्रकाश डाला </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_second_samadhi_day_of_acharya_shri_vidyasagar_ji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_second_samadhi_day_of_acharya_shri_vidyasagar_ji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:54:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chhattisi Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Gayatri Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[jaipur]]></category>
		<category><![CDATA[Maharani Farm]]></category>
		<category><![CDATA[Pooja]]></category>
		<category><![CDATA[Second Samadhi Day]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य छत्तीसी विधान]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[गायत्री नगर]]></category>
		<category><![CDATA[जयपुर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्वितीय समाधि दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[महारानी फार्म]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100236</guid>

					<description><![CDATA[जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन विधानाचार्य अजीत शास्त्री के निर्देशन में किया गया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;   </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। जन-जन के हृदय सम्राट, प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव सदैव रखने वाले, आचार्य श्री विद्यासागर जी के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर श्री दिगंबर जैन मंदिर गायत्री नगर महारानी फार्म में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में बुधवार को प्रातः 8 बजे से नित्य प्रतिदिन अभिषेक शांतिधारा पूजा के बाद आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन विधानाचार्य अजीत शास्त्री के निर्देशन में किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि विधान में सौधर्म इंद्र बनकर वीरेंद्र सुनंदा अजमेरा ने विधान पूजा करवाई। इस अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा, उपाध्यक्ष अरुण शाह, मंत्री राजेश बोहरा, वरिष्ठ एडवोकेट विमल कुमार जैन, वरिष्ठ समाज सेवी अनिल गदिया, अशोक जैन विधानसभा वाले, अशोक जैन कासलीवाल एचपीसीएल वाले, बसंत बाकलीवाल, संतोष बाकलीवाल, सुनील जैन तिजारा वाले, कमल मालपुरा वाले आदि महिला-पुरुषों उपस्थित होकर विधान पूजा की। विधानाचार्य पंडित अजीत शास्त्री ने आचार्य श्री के उपकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूज्य आचार्य श्री जन-जन के परम आराध्य आचार्य थे, उन्होने जनजन के लिए अनेकों उपकार किए। सभी का आभार मंदिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अरुण शाह ने माना।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_second_samadhi_day_of_acharya_shri_vidyasagar_ji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शीतलधाम में विराजमान की जाने वाली 4 जिन प्रतिमा की भव्य अगवानी: भक्ति संगीत, जयघोष और मंगल पाठ के बीच वातावरण धर्ममय  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/grand_reception_for_the_four_jain_idols_to_be_installed_at_sheetaldham/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/grand_reception_for_the_four_jain_idols_to_be_installed_at_sheetaldham/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 13:26:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[4 Jain Idols]]></category>
		<category><![CDATA[4 जिन प्रतिमा]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Samaysagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Grand Welcome]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Sheetaldham]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री समयसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भव्य अगवानी]]></category>
		<category><![CDATA[शीतलधाम]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=99630</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम विदिशा बर्राे वाले बाबा के मंदिर में विराजमान होने वाली 4 प्रतिमाओं की ऐतिहासिक अगवानी विदिशा नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में हजारों की संख्या श्रद्धालुओं द्वारा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम विदिशा बर्राे वाले बाबा के मंदिर में विराजमान होने वाली 4 प्रतिमाओं की ऐतिहासिक अगवानी विदिशा नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में हजारों की संख्या श्रद्धालुओं द्वारा की गई। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम विदिशा बर्राे वाले बाबा के मंदिर में विराजमान होने वाली 4 प्रतिमाओं की ऐतिहासिक अगवानी विदिशा नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में हजारों की संख्या श्रद्धालुओं द्वारा की गई। जिससे पूरा नगर धर्ममय हो गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि श्री जी की मंगल अगवानी जुलूस में समाज बंधु अनुशासित पंक्तियों में चलते नजर आए। जुलूस के आगे चारों प्रतिमाएं रथ में चल रही थीं। नगर के प्रमुख मार्गों से निकले जुलूस का जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भक्ति संगीत, जयघोष और मंगल पाठ के बीच वातावरण श्रद्धा, शांति और सौहार्द से ओतप्रोत रहा।</p>
<p><strong>12 से 15 फरवरी तक शीतलधाम विदिशा में वेदिका शिलान्यास </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने कहा कि समवशरण ऐसी जगह है जहां सबके लिए समान अवसर है। इसलिए प्रत्येक परिवार के प्रत्येक सदस्य से एक एक शिला वेदिका में विराजमान होनी चाहिए। ज्ञात हो कि 12 से 15 फरवरी तक शीतलधाम विदिशा में वेदिका शिलान्यास का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यासागर नवयुवक मंडल सहित समस्त युवा वर्ग एवं महिला मंडलों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही। नगरवासियों ने इस भव्य आयोजन को सामाजिक एकता, धार्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम बताया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/grand_reception_for_the_four_jain_idols_to_be_installed_at_sheetaldham/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरुदेव भगवान बनकर आए थे तीर्थंकर बनने चले गए : कुंडलपुर में आचार्यश्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस मनाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_came_as_a_divine_being_and_departed_to_become_a_tirthankara/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_came_as_a_divine_being_and_departed_to_become_a_tirthankara/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 08:25:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chhattis Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaktamar mahamandal vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Riddhi Kalash]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Second Samadhi Day]]></category>
		<category><![CDATA[Shanti Dhara]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Siddha Kshetra Jain Pilgrimage Kundalpur]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[द्वितीय समाधि दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[भक्तामर महामंडल विधान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधु]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=99062</guid>

					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, मुनिराजों और माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान हुआ। कुंडलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, मुनिराजों और माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान हुआ। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज, मुनिराजों और माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान, आचार्य छत्तीसी विधान (पुण्यार्जक भामाशाह परिवार श्राविका श्रेष्ठी सुशीला पाटनी किशनगढ़), अभिषेक, शांतिधारा, ऋद्धि कलश हुआ। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि दोपहर में स्थानीय विद्याभवन में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज ने विनयांजलि व्यक्त करते वह कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी ने संपूर्ण बुंदेलखंड पूरे भारत देश में जैन धर्म की जो अलख जगाई है। उनके द्वारा अनेक तीर्थ का निर्माण हुआ। अनेक संतों अनेक आगम शास्त्रों का उद्भव हुआ। जिनधर्म को आगे बढ़ाने की उन्होंने कोशिश की उनकी प्रेरणा रही। जब तक उनका जीवन रहा तब तक उन्होंने जन-जन के कल्याण के लिए बहुत अच्छे कार्य किए। कितने दूर दृष्टि रहे गुरुदेव उन्होंने साधकों के साथ-साथ लोगों को धर्म मार्ग में लगाया। ऐसे महान संत जिनकी छवि क्या नेता क्या अभिनेता, जैन, अजैन सभी के दिलों में बसी हुई है। ऐसे आचार्य श्री विद्यासागर जी डोंगरगढ़ क्षेत्र में समाधिस्थ हुए।</p>
<p><strong>हम सभी हृदय में बसे हैं और सभी के अंतस में रहेंगे</strong></p>
<p>सभी उनका समाधि दिवस अत्यंत भक्ति भाव से मनाते हैं। संतों का दीक्षा दिवस, समाधि दिवस अवश्य मानना चाहिए और यही भावना रहे हमारा अंतिम मरण समाधि मरण पूर्वक हो। यही भावना बड़े बाबा के चरणों में बैठकर हम सभी भाते हैं। आचार्य विद्यासागर आचार्यों में चमकने वाले सूर्य थे। आचार्य श्री आगे-आगे चलते गए और कारवां बढ़ता गया। साधना बढ़ाते चले गए और साधना के पुण्य प्रताप से सभी कार्य होते चले गए। वे जंगल, तीर्थक्षेत्र एकांत में साधना करते थे। हमारे आराध्य हमारे बीच से चले गए लेकिन, हम सभी हृदय में बसे हैं और सभी के अंतस में रहेंगे। हमें उनके आदर्शों को प्राप्त करना है। आप सभी ने जो भी सुना ग्रहण किया, उसे जीवन में उतारना है।</p>
<p><strong>आचार्य भगवन जीवन जीने की कला सिखा गए</strong></p>
<p>इस अवसर पर सभी मुनि राजों ने, आर्यिका माता ने, दीदी, भैयाजी ने भावांजलि व्यक्त करते हुए कहा आचार्य भगवन जीवन जीने की कला सिखा गए। मरण की कला भी हम सबको सिखा गए। हम सबने सोचा भी नहीं था। छोटे बाबा आचार्य गुरुदेव की सबसे प्रिय तपोभूमि कुंडलपुर बड़े बाबा के चरणों में उनका समाधि दिवस मनाने का हमें अवसर प्राप्त होगा। हम सबकी यही भावना है कि आचार्य श्री के जैसा समाधिमरण हम सबका हो। पंचम काल में आप गुरुदेव भगवान बनकर आए थे। 24 तीर्थंकरों में तीर्थंकर बनने चले गए।</p>
<p><strong>इन साधुवृंदों और माताजी ने विनयांजलि प्रस्तुत की </strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विशालसागर जी, मुनि श्री विभोरसागर जी, मुनि श्री विलक्ष्य सागर जी, मुनि श्री विपिन सागर जी ,आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रथमसागर जी, मुनि श्री प्रणेयसागर जी, मुनि श्री योग्यसागर जी, मुनि श्री मनोज्ञ श्रमण जी, मुनिश्री सौम्यसागर जी, मुनि श्री जयंद् सागर जी, आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विभाश्वर सागर जी, मुनि श्री शुद्धोपयोग सागर जी ,मुनि श्री श्रीसागर जी, मुनि श्री श्रम सागर जी, आर्यिका श्री भक्तिभारती जी, आर्यिका श्री सुवंदन माताजी, क्षुल्लिका श्री वासल्य भारती जी, डॉ. सुनयश्री माताजी, क्षुल्लिका श्री सुमनश्री माताजी एवं दीदीजी ने आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी के प्रति अपनी अपनी विनयांजलि की अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन अजय भैया झापन तमूरा वालों ने किया।</p>
<p><strong>भक्तामर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री का पूजन संगीत की स्वर लहरियों के बीच झूमते-नाचते प्रत्येक अर्घ्य चढ़ाकर भक्ति प्रकट की। सांयकाल भक्तामर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई। संयम स्वर्ण कीर्ति स्तंभ पर एक दीप गुरु समीप सभी श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर आचार्य श्री की महाआरती कर गुरु चरणों में नमन किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_came_as_a_divine_being_and_departed_to_become_a_tirthankara/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी का द्वितीय समाधि दिवस : जिनवाणी आगम को जीवन का मार्ग बनाने वाले संत आचार्य श्री विद्यासागर जी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_second_death_anniversary_of_acharya_shri_vidyasagar_ji_of_the_shraman_culture/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_second_death_anniversary_of_acharya_shri_vidyasagar_ji_of_the_shraman_culture/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 09:11:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jinavani Agam]]></category>
		<category><![CDATA[Non-violence]]></category>
		<category><![CDATA[penance]]></category>
		<category><![CDATA[Renunciation श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Second Samadhi Day]]></category>
		<category><![CDATA[Self Control]]></category>
		<category><![CDATA[Self-purification]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Practice]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मशुद्धि]]></category>
		<category><![CDATA[जिनवाणी आगम]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्वितीय समाधि दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[वैराग्य]]></category>
		<category><![CDATA[संयम]]></category>
		<category><![CDATA[साधना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98985</guid>

					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रमण संस्कृति के आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का द्वितीय समाधि दिवस मंगलवार को पूरे भारत में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आचार्य श्री जी का देह का विसर्जन भले ही हुआ हो, पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का तप, संयम, साधना, देशना, उनका तप और करुणा जब-तक सूरज चांद रहेगा तब तक सदा अमर रहेंगे। जिनवाणी आगम को जीवन का मार्ग बनाने वाले इस वसुंधरा के महामहिम युगप्रवर्तक संत का समाधि दिवस हमें आत्मशुद्धि, अहिंसा और वैराग्य की प्रेरणा देता है। उनके उपदेश मानवता को सही दिशा दिखाते रहेंगे। विश्व वंदनीय आचार्य श्री के चरणों में श्रद्धा, समर्पण और शत-शत नमन। महाराज श्री के समाधि दिवस पर कोटि-कोटि त्रिबार नमोस्तु, नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_second_death_anniversary_of_acharya_shri_vidyasagar_ji_of_the_shraman_culture/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छा पूरी करना धर्म: मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में दिए मंगल आशीर्वचन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/serving_ones_parents_and_fulfilling_their_wishes_is_a_religious_duty/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/serving_ones_parents_and_fulfilling_their_wishes_is_a_religious_duty/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:34:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Morning Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhav Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Second Samadhi Day]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्वितीय समाधि दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[प्रातःकालीन धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संभव सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=97716</guid>

					<description><![CDATA[मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े बच्चों को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने उन सभी बच्चों के साथ उनके माता पिता को समझाते हुये कहा कि आप लोगों को भी यह ख्वाब नहीं देखना चाहिये कि मेरा बच्चा किस कंपनी में कितने बड़े पैकेज पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सब कुछ धन ही नहीं होता धन से भी बढ़कर बच्चों में अंदर के संस्कार होते है। बचपन में जो संस्कार पड़ जाते है वह ही उनका भविष्य बनाते है। मुनि श्री ने कहा कि धन की चिंता मत करो जिसने चोंच दी है वह दाना भी देगा उन्होंने कहा कि आपने अपने बच्चे को पढ़ाई करने विदेश भेज दिया अथवा इंजीनियर बनाकर विदेश में अथवा महानगरों में पहुंचा दिया। बच्चे में यदि संस्कार होंगे तो वह मां बाप की परवाह करेगा अन्यथा जिन कागज के नोटों के लिये आपने उसे विदेश भेजा था उस धन को कमाने में वह इतना व्यस्त हो जाता है कि फिर उसके पास इतना समय ही नहीं होता कि वह भारत आकर अपने बूढे मां बाप की सेवा कर सके।</p>
<p><strong>बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में है! </strong></p>
<p>उन्होंने बच्चों को एक सच्ची घटना सुनाते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय जैन परिवार में दो बेटों का जन्म होता है। मां बाप दोनों बच्चों को उच्च शिक्षा के लिये विदेश भेजते हैं। बच्चे शिक्षा के साथ साथ वहीं सेटिल हो जाते हैं। कुछ दिनों तक उनकी मोबाइल पर बातचीत होती रहती है और वह भी बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में उच्च पदों पर हैं। बच्चे थोड़े संस्कारित थे तो वह अपने माता-पिता को धन भी भेजते रहते थे। उनका विवाह हो गया और वह वहीं सैटल हो गए। इधर, बूढे मां-बाप अकेले थे और अपने बच्चों की याद करते करते उसकी मां बीमार पड़ जाती है तो पिता बच्चों को संदेश भेजते हैं कि तुम्हारी मां बीमार है और अपने बच्चे बहु नाती पोतों से मिलना चाहती है तो उधर से संदेश आता है कि आप उनका अच्छे से अच्छा अस्पताल में इलाज कराओ हमारे पास अभी समय नहीं है और मां का देहांत हो जाता है। इसकी सूचना पिता अपने दोनों बेटों को देता है तो उनके अंतिम संस्कार में छोटा बेटा अकेले पहुंचता है। पिता उससे पूछता है कि बड़का नहीं आया तो छोटा जबाब देता है कि भैया ने कहा है कि इस बार तुम चले जाओ अगली बार मैं चला जाऊंगा। जब पिता अपने यह संदेश सुनता है तो वह दुःखी होकर सुसाइड कर लेता है।</p>
<p><strong>सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा है</strong></p>
<p>एक और सच्ची घटना सुनाते हुये मुनि श्री ने कहा कि दो भाई थे। एक तो पढ़-लिखकर आईएएस अफसर बन गया और किसी महानगर में पहुंच गया। छोटा थोड़ा पढ़ने में कमजोर था सो उसने पढ़ाई की और अपनी पुस्तैनी दुकान संभाल ली और अपने माता-पिता की सेवा करता और साथ में रहता था लेकिन उसके माता-पिता तो बड़े बेटे बहू की ही तारीफ किया करते थे। इस बात से छोटे बेटे बहू को बहूत तकलीफ होती थी। वह कहता पिताजी सेवा तो आपकी हम ही करते हैं लेकिन, तारीफ आप हमेशा बड़े की करते हैं। ऐसी घटनाएं आजकल हर परिवार में आम हो गई है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा करने का ही होना चाहिए। जिन्होंने कितने कष्टों के साथ हमारा लालन-पालन किया और काबिल बनाया।</p>
<p><strong>50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी के द्वितीय समाधि दिवस 27 जनवरी को आ रहा है। उसके पूर्व 8 जनवरी गुरुवार को विदिशा नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों तथा समस्त आंगनवाड़ियों के माध्यम से श्री सकल दि. जैन समाज के महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता उन स्कूलों में जाकर 50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी। आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से पूर्णायु जबलपुर एवं दयोदय गौशाला बीना वारह के सहयोग से तैयार की गई है। इसके लिए रविवार दोपहर तीन बजे कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई। जिसमें उन सभी कार्यकर्ताओं को दवा पिलाने का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/serving_ones_parents_and_fulfilling_their_wishes_is_a_religious_duty/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जीवन खुशियों के इजहार के लिए मिला है आप सब इस इज्जत के हकदार : मुनि श्री सुधासागरजी ने कैदियों को जेल में दिए आशीर्वचन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/life_is_meant_to_be_lived_to_express_happiness_and_you_all_deserve_this_respect/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/life_is_meant_to_be_lived_to_express_happiness_and_you_all_deserve_this_respect/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 12:15:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Amarkantak]]></category>
		<category><![CDATA[AshokNagar]]></category>
		<category><![CDATA[Blessings]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Dindori]]></category>
		<category><![CDATA[District Jail]]></category>
		<category><![CDATA[Jailer Dixit]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sudhasagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अमरकंटक]]></category>
		<category><![CDATA[अशोकनगर]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आशीर्वचन]]></category>
		<category><![CDATA[जिला जेल]]></category>
		<category><![CDATA[जेलर दीक्षित]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[डिंडोरी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री सुधासागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96699</guid>

					<description><![CDATA[जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहती है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है। इस इज्जत के हकदार आप सब है। यह उद्गार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कैसे हमें इज्जत मिलती है, वह रास्ता हमें हनुमान बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहती है। भगवान के भक्त बनने का मतलब ये नहीं है कि तुम मेरी जय-जयकार करो। भक्ति का मतलब तुम्हें लोग इज्जत से देखें। तुम्हारे लिए एक विचार आए कि जब भगवान का भक्त ऐसा है तो भगवान कैसा होगा। भगवान जानते हैं कि वह हर जगह नहीं पहुंच सकते, इसलिए भगवान भक्तों को भेज देता है। श्रीराम दुनिया में इतने नहीं जाने गए, सबसे पहले लंका में हनुमानजी पहुंचे और उन्होंने लंका वासियों को दिखा दिया ये तो सभी भक्त हैं। मुनिश्री ने कहा कि जेल तो उन दुश्मनों के लिए बनाई गई है जो देश विरोधी है। ये हमारी मातृभूमि को अपना नहीं मानते। जिन्हें वंदे मातरम कहने में शर्म आती है। जेल उनके लिए बनाई गई है। मुनिश्री ने कहा कि मैं अपराधी के बीच में नहीं आया। मैं अपने भाइयों के बीच आया हूं। इतना अंतर क्यों है? हम सब की मां भारत माता है। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि जेलर साहब ने कई बार चातुर्मास कर रहे मुनि श्री के चरणों में पहुंचकर निवेदन किया कि जेल में बंद कैदियों को भी आपके मंगल प्रवचनों का लाभ मिले। मुनिश्री कृपा करके आज आपके बीच पधारे हैं। इस दौरान जेलर दीक्षित, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, पूर्व महामंत्री विपिन सिंघई, टीआई चौहान ने दीप प्रज्वलित किया।</p>
<p><strong>ऐसे संतों को देख कर मन श्रद्धा से नतमस्तक है</strong></p>
<p>इस दौरान जेलर दीक्षित ने कहा कि हम सब पर कृपा करके संत श्री हमारे बीच पधारे हैं। मुझे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सान्निध्य का लाभ अमरकंटक के निकट डिंडोरी जिला जेल में मिला था। आज इन कैदियों के उद्धार के लिए आपके चरण कई किमी पैदल चलकर आए हैं। पैरों में कुछ पहनते नहीं है। ऐसे संतों को देख कर मन श्रद्धा से नतमस्तक हो जाता है। इस दौरान विपिन सिंघई ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के टी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास साथ चल रहे थे।</p>
<p><strong>नशा करोगे तो खुशहाली नहीं आ सकती</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हमारा देश गरीब क्यों है? हम अमेरिका की बराबरी ना करें। अमेरिका का पैसा गलत तरीके से आता है। उनके सब साधन ऐसे हैं कि आप सोच नहीं सकते लेकिन, यदि आप अपने खून पसीने की कमाई से नशा करेंगे, शराब पियोगे तो आपके जीवन में कभी खुशहाली नहीं ला सकते। जेल तुम्हारे लिए दुःख देने के लिए नहीं मिली। जेल तुम्हारे लिए सुधरने का मौका देती है। इस धरती पर इज्जत से ज़ीने के लिए ईश्वर ने भेजा था। तुम क्या कर बैठे कभी ईगो पाइंट मत बनना, नशा मत करना, जिस भारत मां की गोदी में जन्म लिया। उसके साथ हम ऐसा कोई अपराध ना करें, जिससे आप को जेल में जाना पड़े। हम अपने जीवन सुव्यवस्थित बनाएं।</p>
<p><strong>’हमारी संस्कृति महान जहां श्रीकृष्ण भी शांति दूत बन जाते हैं</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि श्री रामचन्द्र जी एक भाई का गला उतार लेते हैं। एक भाई को गले लगा लेते हैं हमारी संस्कृति कैसी महान है। नारायण श्रीकृष्ण जी दुर्याेधन को समझाने के लिए दूत बन गए। आपके जेल अधीक्षक दीक्षित जी निवेदन करने आए तो मन में विचार आया कि श्रीकृष्ण जी जैसी महाशक्ति दूत बनने को तैयार हो गए, जिस पद को निकृष्ट माना जाता है फिर भी वे विश्व शांति के लिए दूत बन गए तो मैंने सोचा कि मेरा क्या बिगड़ता है। तेरी जिंदगी सुधरी है हम चले तो कुचल गया विश्वास हम लोग सदा नीचे देखकर चलते हैं। हम लोग के पैर के नीचे कहीं चीटी भी ना आ जाए। यहां पचास प्रतिशत अपराधी इगो के कारण झुक ना सके और अपराध कर बैठे। पच्चीस प्रतिशत अपराधी है जो प्रमाणन के कारण अपराध पर उतर आए। पच्चीस प्रतिशत आदतन अपराधी होते हैं। मैं यहां 75 प्रतिशत अपराधी को बचा सकता हूं। बस आपको कुछ चीजें हैं, जिनको आप अपने जीवन में उतरते चले जाएं।</p>
<p><strong>जेल इसलिए बनाई कि विदेशी उत्पात ना मचा दें</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो जेल इसलिए बनाई गई कि विदेशी आकर हमारे देश में उत्पात ना मचा दें। हम क्या कर बैठे, एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए अपने भाई से लड़ पड़े। जाओ मैं तुम्हारे लिए आशीर्वाद देता हूं कि आप भाई के कारण भिखारी नहीं बनोगे। श्री राम चाहते तो कोर्ट केस कर देते, वो चाहते तो पंचायत बिठा देते। हम साधु संतों के पास आते। कानून से राज्य से सब तरफ से वे अधिकारी थे। फिर भी उन्होंने अपना अधिकार क्यों नहीं माना। बस देखा कि आदेश कौन दे रहा है। मां ने कहा है बस श्री रामचंद्र जी वन के लिए चल दिए।</p>
<p><strong> आप अपनी सजा को भी आप ईमानदारी में बदल दो </strong></p>
<p>हम लोग भगवान की पताका लेकर आए हैं। साधु संत दुनिया में हैं तो वे इस बात का प्रतीक है कि इस दुनिया भगवान है। निर्मोही बनो तो संत बनकर बनो, ड़ाकू बनकर नहीं। मुनिश्री ने कहा कि जिन बंदियों को सजा हो जाती है। उनके परिवार की क्या दशा होती है। अच्छे के सब साथी होते हैं। बुरे का कोई साथी नहीं होता। क्या मुंह दिखाओगे भगवान को, मैंने तुम्हे हनुमान बनने भेजा था, आप क्या कर बैठे? आप अपनी सजा को भी आप ईमानदारी में बदल दो कि तुम्हारे लिए जेल के दरवाजे खुल जाएं, सजा प्रायश्चित बन जाए। आदर्श कैदी बन जाएं।</p>
<p><strong>भगवान सबका सबका कल्याण करते हैं</strong></p>
<p>जेल अधीक्षक हम साधु संतों को इसलिए जब मौका मिले तो लेकर आते हैं कि आपका जीवन सुधर जाए। आप सजा को प्रायश्चित मानो। यदि आप ने ऐसा दृढ़ निश्चय कर लिया कि मैंने जो अपराध किया है मैं उसका प्रायश्चित पूरी ईमानदारी से करुंगा और फिर हो सकता है कि आपके अच्छे काम को देख कर आपकी सजा भी माफ हो जाए। जो भगवान सबका सबका कल्याण करते हैं, उन्हें तुम्हारे अपराध के कारण सजा देनी पड़ी। हम भारत माता के साथ अपराध कर रहे हैं। मैं संदेश लेकर आया हूं भगवन। आपको थोड़ा सा पश्चाताप होना चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/life_is_meant_to_be_lived_to_express_happiness_and_you_all_deserve_this_respect/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी का ख्याति प्रकाश विदेशों तक था : मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने खजुराहो के संस्मरण सुनाए </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vidyasagars_fame_spread_to_foreign_countries/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vidyasagars_fame_spread_to_foreign_countries/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 09:29:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Current Currency]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[French]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Khajuraho Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhavasagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Spain]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[खजुराहो चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[फ्रांसीसी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संभवसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सामायिक मुद्रा]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95647</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी से जैन समाज तो प्रभावित था ही जैनेतर समाज और विदेशी नागरिक भी प्रभावित थे। मुनि श्री संभवसागर महाराज ने खजुराहो चातुर्मास का संस्मरण सुनाया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज से जैन समाज तो प्रभावित था ही जैनेतर समाज और विदेशी नागरिक भी प्रभावित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी से जैन समाज तो प्रभावित था ही जैनेतर समाज और विदेशी नागरिक भी प्रभावित थे। मुनि श्री संभवसागर महाराज ने खजुराहो चातुर्मास का संस्मरण सुनाया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज से जैन समाज तो प्रभावित था ही जैनेतर समाज और विदेशी नागरिक भी प्रभावित थे। मुनि श्री संभवसागर महाराज ने 2008 खजुराहो चातुर्मास का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि उधर, विदेशी पर्यटकों का बहुत आगमन हुआ, उसमें स्पेन और फ्रांसीसी थे। उन सभी के पास एक-दो कैमरा अवश्य रहते थे, वह कला पारखी थे। उन्होंने चारों दिशाओं के मंदिरों के समूह को देखा और उसकी बारीकियों को देखा और उसके फोटो भी लिए और गुरुदेव के दर्शन किए। उन्होंने शास्त्रों का अध्ययन तो नहीं किया था लेकिन, उन्होंने जब गुरुदेव को देखा तो वह देखते रह गए और वह आश्चर्य चकित थे।</p>
<p>उन्होंने पत्थर की मुद्रा तो बहुत देखी थी लेकिन, साक्षात वीतरागता की मुद्रा को देखा और दो-दो घंटे तक इस मुद्रा को देखते रहते थे। कभी आहार के समय तो कभी आचार्य श्री की सामायिक मुद्रा को देखा तो देखते रह गए। ठंड का मौसम था आचार्य श्री धूप में बैठे थे तो वह सैनानी आते और हाथ जोड़ते और टकटकी लगाए देखते रहते। यह जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vidyasagars_fame_spread_to_foreign_countries/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
