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	<title>Acharya Shri Vidyasagar Ji Maharaj श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>संयम पथ के 51 वर्ष में पहली बार रामगंजमंडी आएंगे मुनिश्री योगसागर जी : जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन होगा </title>
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		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 08:06:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। उन्हें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया जाएगा। इसको लेकर समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन किया जाएगा।</p>
<p><strong>राजस्थान में ऐतिहासिक आगमन</strong></p>
<p>1979 के बाद लगभग 47 वर्षों के अंतराल में महाराज श्री का राजस्थान में पुनः मंगल आगमन हुआ है।</p>
<p>विशेष रूप से रामगंजमंडी नगर में यह उनका प्रथम आगमन है, जिससे नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में अपूर्व धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना है।महाराज श्री के सानिध्य में 27 जनवरी की बेला में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मनाया जाएगा।</p>
<p><strong> मुनि श्री योगसागर जी : त्याग और तप की जीवंत प्रतिमा</strong></p>
<p>मुनि श्री योगसागर जी महाराज दिगंबर जैन परंपरा के एक श्रेष्ठ, तपस्वी और सिद्ध साधक हैं। उनका जीवन आडंबर से दूर, कठोर संयम, शुद्ध चर्या और आत्मशुद्धि को समर्पित है। वर्तमान समय में वे दीक्षा-काल के अनुसार सबसे वरिष्ठ मुनिपदधारी हैं और &#8216;मुनि शिरोमणि&#8217; के रूप में श्रद्धापूर्वक सम्मानित हैं।</p>
<p><strong>जन्म एवं पारिवारिक परिचय</strong></p>
<p>महाराज श्री का जन्म 13 सितंबर 1956 (गुरुवार) को हुआ। आपके पिता मलप्पा जैन एवं माता श्रीमतीबाई जैन हैं। बचपन से ही उनमें वैराग्य और धर्मभाव प्रबल रहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संयम पथ की यात्रा</p>
<p>ब्रह्मचर्य व्रत : 2 मई 1975</p>
<p>क्षुल्लक दीक्षा : 18 दिसंबर 1975</p>
<p>ऐलक दीक्षा : 19 नवंबर 1977</p>
<p>मुनि दीक्षा : 15 अप्रैल 1980</p>
<p><strong>निर्यापक पद : 8 मार्च 2019</strong></p>
<p>इन चरणों से गुजरते हुए महाराज श्री ने पूर्ण दिगंबर मुनि जीवन को अंगीकार किया। गुरु परंपरा एवं विशेषता मुनि श्री योगसागर जी महाराज आचार्य परंपरा के महान संत आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित हैं। योग सागर जी मुनिराज अपने दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर जी और वर्तमान आचार्य समय सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के सगे भाई हैं।</p>
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		<title>चातुर्मास की सार्थकता को किया सिद्ध : मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने गुरुवर के सपनों को किया पूरा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Nov 2024 09:01:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्तमान समय में शिष्य द्वारा गुरु को दी गई सच्ची विनयांजलि का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा रखी गई स्वर्ण भद्र कूट मंदिर की आधारशिला को पूरा करने का संकल्प लिया और इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए। मुनि श्री विनम्र सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्तमान समय में शिष्य द्वारा गुरु को दी गई सच्ची विनयांजलि का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा रखी गई स्वर्ण भद्र कूट मंदिर की आधारशिला को पूरा करने का संकल्प लिया और इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए। मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने चातुर्मास के दौरान इंदौर में आयोजित कार्यक्रमों में शिष्य और गुरु के रिश्ते को मजबूत करने, जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार और समाज को सही दिशा देने का कार्य किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए वीर निकलंक के संपादक आनंद कासलीवाल की कलम से&#8230;&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> वर्तमान समय में शिष्य द्वारा गुरु को दी गई सच्ची विनयांजलि का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा रखी गई स्वर्ण भद्र कूट मंदिर की आधारशिला को पूरा करने का संकल्प लिया और इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए। मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने चातुर्मास के दौरान इंदौर में आयोजित कार्यक्रमों में शिष्य और गुरु के रिश्ते को मजबूत करने, जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार और समाज को सही दिशा देने का कार्य किया। इस चातुर्मास का उद्देश्य केवल धर्म के प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे समाज में जागरूकता फैलाने और देशभक्ति की भावना को भी बढ़ावा देने के लिए किया गया।</p>
<p><strong>चातुर्मास में किए गए विशेष प्रयास</strong></p>
<p><strong>1. देशभक्ति और सैनिकों का सम्मान</strong></p>
<p>इस चातुर्मास के दौरान उन सैनिकों का सम्मान किया गया जिन्होंने देश की रक्षा में अपनी जान दी। यह कार्यक्रम देश के प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करने वाला था।</p>
<p><strong>2. बच्चों का उपनयन संस्का</strong></p>
<p>हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार जैन समाज ने इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का उपनयन संस्कार किया। लगभग 3000 बच्चों को जैन धर्म के नियमों और वचनों से अवगत कराते हुए उनका उपनयन संस्कार किया गया। इस संस्कार से आने वाली पीढ़ी को धार्मिक दिशा मिली और जैन धर्म के प्रति उनकी श्रद्धा और आस्था मजबूत हुई। इस वर्ष पहली बार लड़कियों का भी उपनयन संस्कार किया गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।</p>
<p><strong>3. सोशल मीडिया और गलत संस्कारों का विरोध</strong></p>
<p>मुनि श्री विनम्र सागर जी ने सोशल मीडिया पर चल रहे गलत संस्कारों और वीडियो का सार्वजनिक रूप से विरोध किया। उन्होंने समाज को जागरूक किया कि वे सोशल मीडिया से दूर रहें और धर्म से जुड़कर अपने जीवन को सही दिशा दें।</p>
<p><strong>4. सर्व धर्म सभा का आयोजन</strong></p>
<p>चातुर्मास के दौरान एक सर्व धर्म सभा का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न संप्रदायों के संतों ने सत्य, अहिंसा और शाकाहार पर अपने विचार रखे। यह सभा लगभग 150 देशों में प्रसारित की गई, जिससे जैन धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ और अहिंसा के सिद्धांत की चर्चा पूरी दुनिया में हुई।</p>
<p><strong>5. चातुर्मास के दौरान अनुशासन और साधन</strong></p>
<p>पूरे चातुर्मास के दौरान न तो कोई प्रदर्शन हुआ, न कोई आडंबर या वैभव दिखने को मिला। यह समय केवल गुरु के सपनों को साकार करने और जैन धर्म को नई दिशा देने का था। मुनि श्री विनम्र सागर जी द्वारा किए गए इस चातुर्मास में पूरी तरह से अनुशासन और साधना की झलक देखने को मिली, जैसा कि परम पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज और आचार्य श्री संयम सागर जी महाराज के अनुशासन में था। चातुर्मास समिति के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस अनुशासन का पालन पूरी निष्ठा से किया, और इसका प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव समाज पर पड़ा।</p>
<p><strong>6. सार्थक चातुर्मास और नई दिशा</strong></p>
<p>यह चातुर्मास न केवल गुरु के सपनों को पूरा करने के लिए था, बल्कि यह जैन समाज को एक नई दिशा देने और जैन धर्म के प्रभावों को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रयास था। मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज के नेतृत्व में यह चातुर्मास पूरी तरह से सफल हुआ। समाज के प्रत्येक व्यक्ति ने इस चातुर्मास से बहुत कुछ सीखा और धर्म के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था को और अधिक मजबूत किया।</p>
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		<title>आचार्य श्री शरद पूर्णिमा के चंद्रमा के समान शीतल और सूर्य की भांति तपस्या के तेज से अलंकृत थे : आचार्य श्री विद्यासागर जी का इंदौर के लिए योगदान है अतुलनीय  </title>
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		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 14:48:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्र का संपूर्ण जैन समाज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के समाधिस्थ होने के बाद आज पहली बार उनके जन्मदिवस पर उन्हें विनत भाव से स्मरण कर श्रद्धा सुमन एवं विननयांजलि समर्पित करेगा। आचार्य श्री विद्यासागर जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के ग्राम सदलगा में हुआ और उन्होंने 17 फरवरी 2024 को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्र का संपूर्ण जैन समाज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के समाधिस्थ होने के बाद आज पहली बार उनके जन्मदिवस पर उन्हें विनत भाव से स्मरण कर श्रद्धा सुमन एवं विननयांजलि समर्पित करेगा। आचार्य श्री विद्यासागर जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के ग्राम सदलगा में हुआ और उन्होंने 17 फरवरी 2024 को चंद्रगिरी डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) में समाधिस्थ होकर अपने जीवन का समापन किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए डॉ. जैनेन्द्र जैन की विशेष विनयांजलि&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> राष्ट्र का संपूर्ण जैन समाज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के समाधिस्थ होने के बाद आज पहली बार उनके जन्मदिवस पर उन्हें विनत भाव से स्मरण कर श्रद्धा सुमन एवं विननयांजलि समर्पित करेगा। आचार्य श्री विद्यासागर जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के ग्राम सदलगा में हुआ और उन्होंने 17 फरवरी 2024 को चंद्रगिरी डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) में समाधिस्थ होकर अपने जीवन का समापन किया।</p>
<p>श्रमण संस्कृति के महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने 5 दशक से अधिक समय तक देश के विभिन्न शहरों में पदत्राण विहीन चरणों से पद बिहार करते हुए अथवा चातुर्मास करते हुए अपने त्याग, तपस्या, ज्ञान, साधना, और करुणा की प्रभा से न केवल जैन क्षितिज को आलोकित किया, बल्कि श्रमण संस्कृति (जिन शासन) को भी गौरवान्वित किया। वे जैनों के ही नहीं, जन-जन के संत थे। इंदौर की धरती पर निवासरत बहुत सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें दो बार आचार्य श्री का चरण सानिध्य मिला और उनकी चरण वंदना एवं अभिषेक करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। पहली बार 29 जुलाई 1999 को आचार्य श्री अपने 44 शिष्यों के साथ आए थे, और दूसरी बार 2024 में 29 शिष्यों के साथ चातुर्मास के निमित्त नगर में आए। हालांकि, 1967 में भी वे ब्रह्मचारी विद्याधर के रूप में तीन दिन के लिए आचार्य श्री देश भूषण जी महाराज के संघ के साथ इंदौर आए थे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68526" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241016-WA0039.jpg" alt="" width="512" height="371" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241016-WA0039.jpg 512w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241016-WA0039-300x217.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241016-WA0039-74x55.jpg 74w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /> आचार्य श्री का धर्म, समाज, संस्कृति, साहित्य, राष्ट्रभाषा, गौ रक्षा, स्त्री शिक्षा, चिकित्सा एवं हथकरघा आदि क्षेत्रों में जो योगदान है, वह वर्णणातीत और स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने योग्य है। इंदौर नगर में भी उनके आशीर्वाद एवं प्रेरणा से दयोदय चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना हुई, जिसमें प्रतिभास्थली (आवासीय कन्या विद्यालय), गौशाला, एवं सहस्त्र कूट एवं सर्वतोभद्र जिनालय का निर्माण उनकी ही प्रेरणा एवं आशीर्वाद का फल है। यहां यह उल्लेख करना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आचार्य श्री शरद पूर्णिमा के चंद्रमा के समान शीतल और सूर्य की भांति तपस्या के तेज से अलंकृत थे। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका नाम, काम, और अवदान एवं स्मृतियां उन्हें हमेशा जीवंत बनाए रखेंगी। वे थे, वे हैं और रहेंगे।</p>
<p>ऐसे महा मुनींद्र समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर कोटि कोटि नमन।</p>
<p>डॉ. जैनेन्द्र जैन, राजेश जैन दद्दू</p>
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		<title>भगवान अभिनंदननाथ जी का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 13 मई को  कुंडलपुर में आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के सानिध्य में जाएगा मनाया </title>
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		<pubDate>Mon, 13 May 2024 03:22:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान श्री अभिनंदन नाथ जी का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 13 मई को पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में धूमधाम से मनाया जाएगा। पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट …… कुंडलपुर। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान श्री अभिनंदन नाथ जी का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 13 मई को पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में धूमधाम से मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान श्री अभिनंदन नाथ जी का गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 13 मई को पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रातः भक्तांमर महामंडल विधान , पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक ,शांति धारा ,पूजन ,विधान होगा।भक्ति भाव से निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।</p>
<p>पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की पूजन होगी ।मुनिश्री के मंगल प्रवचन होंगे । मुनि संघ एवं आर्यिका संघ की आहार चर्या होगी । सांयकाल आचार्य भक्ति, भक्तांमर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती होगी।</p>
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		<title>जयनिशांत द्वारा लंदन में हुई जिनशासन की प्रभावना: भारत के मंदिरों में होने का कराया अहसास  </title>
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		<pubDate>Sun, 28 Apr 2024 10:20:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हैरो लंदन में आयोजित वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के मांगलिक अनुष्ठान को अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् के महामंत्री ब्र. जयकुमार निशांत भैया ने सम्पन्न कराते हुए, समस्त युनाइटेड किंगडम के श्रावकों का मनमोहा। यह आयोजन स्व.चतुर्भज जैन,चन्द्र‌कांता जैन छतरपुर के सुपुत्र राजेश जैन, मीता जैन, पुत्री अनन्या एवं पुत्र अरिहंत द्वारा अपने गृह निवास के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हैरो लंदन में आयोजित वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के मांगलिक अनुष्ठान को अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् के महामंत्री ब्र. जयकुमार निशांत भैया ने सम्पन्न कराते हुए, समस्त युनाइटेड किंगडम के श्रावकों का मनमोहा। यह आयोजन स्व.चतुर्भज जैन,चन्द्र‌कांता जैन छतरपुर के सुपुत्र राजेश जैन, मीता जैन, पुत्री अनन्या एवं पुत्र अरिहंत द्वारा अपने गृह निवास के नवनिर्मित गृह चैत्यालय में सम्पन्न हुआ है।<span style="color: #ff0000">पढि़ए डॉ सुनील संचय की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
<hr />
<p>हैरो लंदन में आयोजित वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के मांगलिक अनुष्ठान को अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् के महामंत्री ब्र. जयकुमार निशांत भैया ने सम्पन्न कराते हुए, समस्त युनाइटेड किंगडम के श्रावकों का मनमोहा। यह आयोजन स्व.चतुर्भज जैन,चन्द्र‌कांता जैन छतरपुर के सुपुत्र राजेश जैन, मीता जैन, पुत्री अनन्या एवं पुत्र अरिहंत द्वारा अपने गृह निवास के नवनिर्मित गृह चैत्यालय में सम्पन्न हुआ है।मूलनायक शांतिनाथ के साथ श्री संभवनाथ, श्री सुमतिनाथ, श्रीविमलनाथ, श्री अरनाथ भगवान वेदी में विराजित किए‌ गए। इन बिम्बों की प्रतिष्ठा संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में कुण्डलपुर पंचकल्याणक में सम्पन्न हुई थी। राजेश की भावना थी यह महानुष्ठान ब्र. जयनिशांत भैया के सानिध्य में हो। भैया की लंदन आने की समस्त प्रक्रिया तत्परता से सम्पन्न कराई गई।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59669" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0020-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> श्रीजी की शोभायात्रा का प्राप्त किया सौभाग्य</strong></p>
<p>इस आयोजन का ध्वजारोहण संतोष, सीमा इन्दौर (मीता के माता- पिता] ने सम्पन्न किया। इस आयोजन के सौधर्म राजेश-मीता, कुबेर कौशल,ख्याति शाह ईडर, यज्ञनायक अमित, बरखा शाह ईडर, ईशान ,इंद्र ,संकेत ,रिचा शाह अहमदाबाद, सनन, इन्द्र ,नीलेश ,प्रीति काले कोपरगांव, महेन्द्र, योगेन्द्र, श्वेता नागपुर को सोभाग्य प्राप्त हुआ।समस्त क्रिया विधि में सभी परिवारों ने उत्साह पूर्वक, संयम साधना के साथ सहभागिता की,सभी बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम नीरज ,राजू जैन कोटा के निर्देशन में सम्पन्न किए। निशांत भैया की प्रेरणा से सभी परिवारों ने पूजा, अभिषेक, स्वाध्याय,रात्रिभोजन त्याग आदि नियम लेकर श्रीजी स्थापना, जिनवाणी स्थापना, अष्टमंगल, अष्टप्रातिहार्य स्थापना का गौरव सहर्ष प्राप्त किया। आगमोक्त क्रियाविधि पूजा पद्धति एवं शास्त्र सभा में यू. के. के सभी जिनालयों के पदाधिकारी एवं श्रावक उपस्थित हुए।सभी ने श्रीजी की शोभायात्रा में उपस्थित होने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59670" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0017-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />अंग्रेजी के साथ हिन्दी एवं संस्कृत भी का अभ्यास </strong></p>
<p>श्री शांतिनाथ जिनालय स्लाओ, श्री महावीर जिनालय हैरो, श्री वासुपूज्य जिनालय कोवेंट्री, श्री अजितनाथ जिनालय मिल्टन कीन्स, श्री पार्श्वनाथ जिनालय वर्मिंघम तथा श्री कैलाशगिरि जिनालय हाँसको तथा श्री महावीर जिनालय (श्वेतांबर) पोटर्सबार के माध्यम से प्रभावना की।यहाँ 3-4° तापमान होने पर सभी बच्चों ने धोती -दुपट्टा पहनकर प्रतिदिन अभिषेक, पूजा ,विधान , वेदीशुद्धि एवं संस्कार करते हुए पूजा का नियम लिया है। प्रतिदिन 200- 300 श्रावकों की उपस्थिति रही। शुद्ध भोजन की व्यवस्था भी रखी गई। इंद्र-इन्द्राणी एवं सभी श्रावक- श्राविकाओं को यह महसूस ही नहीं हुआ कि आयोजन लंदन में हो रहा है। निशान्त भैया ने सभी को भारत के मंदिरों में होने का अहसास कराया ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59671" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0018-990x660.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आपके प्रवचन के माध्यम से कई लोगों ने विभिन्न नियम अपनी क्षमता एवं सुविधानुसार लिए। भैया ने हैरो के शांतिनाथ जिनालय में शास्त्र भण्डार स्थापित करने की योजना रखी जिसमें सभी ने सहयोग देने का संकल्प किया। यहाँ संचालित बच्चों की पाठशाला में अंग्रेजी के साथ हिन्दी एवं संस्कृत भी का अभ्यास कराया जाता है जिससे सभी प्रभुभक्ति, आरती स्तुति करके अपना कल्याण पथ प्रशस्त कर रहे हैं।सभी जिनालयों के पदाधिकारियों ने जयनिशांत भैया को अपने जिनालय में दर्शन एवं प्रवचन हेतु आमंत्रित किया।ब्र. जय निशान्त भैया द्वारा लंदन में की गई प्रभावना के अनेक विद्वानों, गणमान्य लोगों ने उन्हें शुभकामना व बधाई प्रेषित की है।</p>
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		<title>जो जैसा कर्म करता है वैसा फल मिलता है- आचार्य श्री समयसागर जी महाराज    कई प्रसंगों से समझाया चिंतन का महत्त्व और जीवन का उद्देश्य      </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Apr 2024 10:53:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युगश्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा, कर्मों का आश्रय जो हो रहा है उसको रोकना है। उसका निरोध करना है और निरोध करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधन आगम के माध्यम से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युगश्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा, कर्मों का आश्रय जो हो रहा है उसको रोकना है। उसका निरोध करना है और निरोध करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधन आगम के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू पूरी रिपोर्ट&#8230;     </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युगश्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा, कर्मों का आश्रय जो हो रहा है उसको रोकना है। उसका निरोध करना है और निरोध करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधन आगम के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं। उसमें एक अनुप्रेक्षा को प्राथमिकता देते हुए कल विषय रखा था। इस विषय को जो गुरुदेव ने समय-समय पर दिया है उसी को समय-समय पर हम स्मरण में लाने का पुरुषार्थ कर रहे हैं। उन्होंने एक बार में नहीं कई बार प्रसंग पढ़ाया है कि चिंतन जो होता है वह पर्याय का भी विषय बनाकर चिंतन होता है और पर्याय को भी विषय बनाकर किया जा सकता है।</p>
<p>बहुत अनोखी बात उन्होंने यह कही है कि द्रव्य का चिंतन करने से भीती समाप्त होती है और पर्याय का चिंतन करने से वैराग उत्पन्न होता है। आप क्या चाहते हैं भीती से ऊपर उठना चाहते हैं तो आप किसका सहारा लेते हैं समझने के लिए सामने व्याग्र आ गया अथवा बहुत बड़ा विशाल अजगर जिसको बोलते अगर इस सभा में अजगर आ जाए तो निश्चित रूप से भय की उदीयता होगी। ध्यान देने की बात यह है कि हम या आप व्याग्र से डरते सर्पादिक से डरते है क्यों डरते हैं सत्य यह है हमें मृत्यु से भीती होने के कारण उस व्याघ्र या क्रूर स्वभाव वाले र्तियंच होते उनसे बचाने का पुरुषार्थ करते। जिसे मृत्यु का भय नहीं है तो सामने भी बैठे, पीछे भी बैठे, आगे बैठे, उसके बीच में वह बैठेंगे और द्रव्य का चिंतन करेंगे। सोचो विचार जो गुरुदेव चिंतन करते हैं हम और आप भी चिंतन करते प्रयोग चिंतन करो भीती समाप्त होगी। दोहा लिखा है। अंत किसी का कब हुआ अनंत सभी संत, पर सब मिटता सा लगा पतझड़ पुन: बसंत। पदार्थ की ना उत्पत्ति होती ना पदार्थ का विनाश होता है भय से ऊपर उठना चाहो तो द्रव्य का चिंतन करो स्वभाव का चिंतन करो। स्वभाव का अर्थ प्रत्येक पदार्थ का अपना-अपना स्वभाव है उसका चिंतन करो तो आकर्षक विकर्षण समाप्त होगा। भीती उत्पन्न नहीं होगी।</p>
<p><strong>सात प्रकार के हैं भय    </strong></p>
<p>आचार्य महाराज पढ़ा रहे थे पूछा कितने प्रकार के भय होते हैं। एक महाराज ने कहा आठ प्रकार के भय होते हैं। आचार्य महाराज ने कहा हमने पढ़ाया है सात प्रकार के भय होते सबको ज्ञात है। सात प्रकार के भय होते हैं आठवां वह जो आपको डर भीती उत्पन्न होती है। गुरुदेव ने कहा मुझसे क्यों डरते हो तुम पाप से डरो। श्रमण के लिए संसारी प्राणी नरक जाने से डरता है किंतु नरक में कारण भूत जो सामग्री होती उससे बचना चाहता है। सन् १९87 की बात है आचार्य महाराज का चातुर्मास थोवन जी में हुआ। संघ के साथ हुआ। उस समय अपराह्न बेला में आचार्य भक्ति संपन्न हुई और मेरे पास एक सज्जन आए। उन्होंने हाथ जोड़कर निवेदन किया मुझे डर लगता है। किससे डर लगता है महाराज स्वाध्याय करने से हमें डर लगता है। क्यों इस प्रकार के परिणाम करने से र्तियंच आयु का बंध होता है। इस प्रकार के परिणाम करने से अनेक प्रकार के कर्मों का बंध होता है। यह चर्चा आगम में मिलती है इसलिए मुझे डर लगता है नरक जाने से क्यों डरते हो। नरक जाने के जो कारण है उनसे बचो तो भगवान मेरा भविष्य कैसा रहेगा।</p>
<p>एक प्रसंग और स्मरण में आ रहा महाराज हमने सुना है अनेक व्यक्तियों के मुख से हमने सुना है महाराज आप भविष्य जानते हैं। मान लो एक व्यक्ति चोरी कर रहा है तो उसका भविष्य जेल होगा। यह पक्की बात है जो जैसा कर्म करता है निश्चित रूप से वैसा फल मिलता है। आगम के अनुरूप में बात कर रहा हूं गुरुदेव ने जो बात आगम के अनुरूप रखी है वही मैं बात कर रहा हूं परिणामों के आश्रित ही भविष्य होगा।</p>
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