<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/acharya-shri-vardhman-sagar-maharaj/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 30 Aug 2025 05:00:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आध्यात्मिक साधना का अद्वितीय जीवनवृत्त : संयम, तप और वात्सल्य के प्रतीक हैं आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vardhman_sagar_ji_maharaj_is_a_symbol_of_restraint_penance_and_affection/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vardhman_sagar_ji_maharaj_is_a_symbol_of_restraint_penance_and_affection/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 05:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Article श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[birth anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Tonk]]></category>
		<category><![CDATA[अवतरण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आलेख]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीक्षेत्र टोंक]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=88963</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जीवन संयम, तप, करुणा और धर्मप्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है। 75वें जन्मदिवस पर उनका यह जीवनवृत्त समाज के लिए प्रेरणा, भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश है। पढ़िए राजेश पंचोलिया का विशेष आलेख&#8230;. भारत की आध्यात्मिक परंपरा में संयम, तप और करुणा के प्रतीक आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जीवन संयम, तप, करुणा और धर्मप्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है। 75वें जन्मदिवस पर उनका यह जीवनवृत्त समाज के लिए प्रेरणा, भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया का विशेष आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>भारत की आध्यात्मिक परंपरा में संयम, तप और करुणा के प्रतीक आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अपने साधु जीवन के 57 वर्षों में जिनधर्म की अखंड ज्योति प्रज्वलित की है। मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री ने राष्ट्रभर में धर्मप्रभावना का अद्वितीय कार्य किया। 18 सितम्बर 1950 को जन्मे यह महामानव भादवा सुदी सप्तमी को 75वें अवतरण दिवस पर प्रवेश कर रहे हैं। उनकी साधना, उपसर्गों पर विजय, तप और वात्सल्य ने उन्हें समाज के लिए प्रेरणा का आधार बना दिया है।</p>
<p><strong>परंपरा और दीक्षा</strong></p>
<p>20वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य 108 श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा में तृतीय पट्टाधीश आचार्य 108 श्री धर्मसागर जी से दीक्षित होकर, इस परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज बने।</p>
<p>उनकी दीक्षा 24 फरवरी 1969 (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी) को श्री महावीर जी में आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज से हुई।</p>
<p><strong>जन्मभूमि और बाल्यकाल</strong></p>
<p>आचार्य श्री का जन्म मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद नगर में हुआ, जो कई सिद्धक्षेत्रों के निकट स्थित है।</p>
<p>उनकी माता श्रीमती मनोरमा देवी जैन और पिता श्री कमलचंद जी जैन (पोरवाड़ उपजाति) थे। यशवंत नाम से जन्मे यह बालक अपने परिवार की 13वीं संतान थे। माता-पिता ने महावीर जी मंदिर में मन्नत मांगी थी कि यदि संतान जीवित हुई तो उसका मुंडन वहीं कराएंगे। बाद में यही स्थान उनकी मुनि दीक्षा का पावन स्थल बना।</p>
<p><strong>प्रारंभिक जीवन और संत-समागम</strong></p>
<p>मात्र 12 वर्ष की आयु में माता का असामयिक निधन हो गया।</p>
<p>युवावस्था में वे कई आचार्यों और आर्यिकाओं के संपर्क में आए। मई 1968 में संघ से जुड़ गए और आचार्य श्री शिवसागर जी महाराज से गृहत्याग का नियम लिया।</p>
<p><strong>उपसर्ग और नेत्रज्योति की पुनः प्राप्ति</strong></p>
<p>दीक्षा के बाद मात्र 19 वर्ष की उम्र में उनकी नेत्र ज्योति चली गई। डॉक्टरों ने इंजेक्शन के बिना दृष्टि लौटने की संभावना न के बराबर बताई। लेकिन मुनि श्री ने संकल्प किया कि वे उपचार नहीं कराएंगे।</p>
<p>लगातार 3 घंटे तक श्री शांति भक्ति का पाठ करने और प्रभु भक्ति की प्रभावना से 52 घंटे बाद उनकी नेत्र ज्योति लौट आई। यह घटना आज भी भक्तों के लिए आस्था का आधार है।</p>
<p><strong>आचार्य पद</strong></p>
<p>24 जून 1990 (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया) को राजस्थान के पारसोला में, आचार्य श्री अजितसागर जी महाराज के लिखित आदेश से उन्हें आचार्य पद प्रदान किया गया। 57 वर्ष के साधु जीवन में उन्होंने देशभर में धर्मप्रभावना की और अनेक तीर्थ क्षेत्रों में चातुर्मास व विहार किए।</p>
<p><strong>दीक्षाएं और पंचकल्याणक</strong></p>
<p>अब तक आचार्य श्री ने 117 दीक्षाएं दी हैं – जिनमें 41 मुनि, 45 आर्यिका, 15 ऐलक-क्षुल्लक और 13 क्षुल्लिका शामिल हैं। उन्होंने 70 से अधिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं कराई हैं।</p>
<p><strong>विशेष योगदान</strong></p>
<p>57 वर्षों में 70 से अधिक सल्लेखनाएं कराई हैं। उनकी विचारधारा – “हम हमारी छोड़ेंगे नहीं, औरों की बिगाड़ेंगे नहीं” – समाज के लिए प्रेरणादायी रही है।</p>
<p><strong>उपाधियां</strong></p>
<p>समाज ने उन्हें अनेक उपाधियां प्रदान कीं – आचार्य शिरोमणि, वात्सल्य वारिधि, राष्ट्र गौरव, तपोनिधि, संस्कृति संरक्षक, जिनधर्म प्रभावक इत्यादि।</p>
<p><strong>महामस्तकाभिषेक में मार्गदर्शन</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने 1008 श्री गोमटेश्वर बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक (1993, 2006, 2018) और 2022 में श्री महावीर स्वामी के महामस्तकाभिषेक में प्रमुख सानिध्य और मार्गदर्शन प्रदान किया।</p>
<p><strong>विलक्षण प्रसंग</strong></p>
<p>-1994 में श्रवण बेलगोला से कनकगिरि विहार के दौरान देवों ने सर्प रूप में आचार्य श्री का मार्ग रोका। बाद में क्षेत्र विकास के संकेत मिले।</p>
<p>-1988 में भिंडर में गुरु-शिष्य मिलन का भावपूर्ण प्रसंग घटित हुआ, जब आचार्य अजितसागर जी के चरणों को वर्धमान सागर जी के अश्रुओं ने अभिषिक्त किया और बदले में आचार्य श्री के अश्रु आशीर्वाद शिष्य के मस्तक पर गिरे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vardhman_sagar_ji_maharaj_is_a_symbol_of_restraint_penance_and_affection/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्षमा से ब्रह्मचर्य तक: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के प्रवचनों में जीवन की राह </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_of_life_in_the_discourses_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_of_life_in_the_discourses_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 03:44:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dashlakshan Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Tonk]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[टोंक]]></category>
		<category><![CDATA[दशलक्षण पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पर्युषण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=88742</guid>

					<description><![CDATA[&#8211; निष्कर्ष दशलक्षण महापर्व केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर है। क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, दान और ब्रह्मचर्य- ये सभी धर्म आत्मा के आभूषण हैं। इनके पालन से आत्मा पवित्र होती है और मोक्ष की ओर अग्रसर होती है। पढ़िए पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का दश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>&#8211; निष्कर्ष दशलक्षण महापर्व केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर है। क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, दान और ब्रह्मचर्य- ये सभी धर्म आत्मा के आभूषण हैं। इनके पालन से आत्मा पवित्र होती है और मोक्ष की ओर अग्रसर होती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का दश लक्षण पर विशेष प्रवचन श्रीफल जैन न्यूज में&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>दश लक्षण महापर्व है। वर्षभर याद करते हैं — आ रहा है, आ गया और चला गया। 355 दिन प्रतीक्षा के बाद दस दिन बाद वह चला जाता है। दश लक्षण पर्व वर्ष में तीन बार आता है, जबकि यह प्रति समय हमारे साथ होना चाहिए। महापर्व को आप भूलने का प्रयत्न नहीं करें। इसे स्मृति में रखें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सारा संसार विषय और कषायों से भरा हुआ है। अनादि काल से आप संसार में परिभ्रमण कर रहे हैं। संसारी लोगों ने विषय और कषाय को हितकारी माना है; इस कारण आप दुखी हैं। दश लक्षण पर्व तीन बार माघ, चैत्र और भाद्रपद माह में आता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सोचना यह है कि दश लक्षण पर्व के पहले सोलह कारणों की पूजा की जाती है। इन 16 कारणों की पूजा से तीर्थंकर नामक कर्म का बंधन होता है। इसलिए दश लक्षण से पूर्व 16 कारण पर्व आता है। यह महापर्व धरोहर बनकर आए हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आत्मा में विभव परिणीति है; इस कारण चारों गति में दुख होता है। रक्षाबंधन भी महापर्व है। विष्णु कुमार मुनि ने 700 मुनि राज की रक्षा की थी। देव-शास्त्र गुरु हमारे आराध्य देव हैं; उनके बिना संसार से पार होने का मार्ग नहीं मिलता। देव हमारे हृदय में विराजमान होना चाहिए। स्थापना में तो आप सबको बुलाते हैं और विसर्जन में कहते आए — जो देवगण और उन्हें जाने का कहते हैं। धर्म को धारण करना चाहिए, छोड़ना नहीं। पर्व में विशेष प्रकार की आराधना की जाती है। पर्व मुनि राज के हैं, श्रावक भी धारण कर सकते हैं।</p>
<p><strong> उत्तम क्षमा धर्म</strong></p>
<p>जीवन में वस्तुओं को जानने के कुछ लक्षण होते हैं और जीवन के कुछ ही क्षण। यूं तो पर्व बहुत आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन आत्मा को जानने का पर्व दशलक्षण है। वह जो आत्मा को पवित्र करें, जिसके निमित्त हमारी आत्मा पवित्र होती है, उसे पर्व कहते हैं।</p>
<p>दशलक्षण पर्व में 10 दिन तक 10 धर्मों की आराधना की जाती है।</p>
<p><strong>स्वभाव प्राप्ति के लिए सबसे पहले है उत्तम क्षमा&#8230;</strong></p>
<p>&#8220;उत&#8221; अर्थात उखाड़ दिया</p>
<p>&#8220;तम&#8221; अर्थात अंधकार को</p>
<p>जिस क्षमा के आने पर अज्ञान अंधकार, दर्शन मोह, चरित्र मोह का अंधकार नष्ट हो चुका है, उसी का नाम है उत्तम क्षमा।</p>
<p>आचार्य श्री कहते हैं — क्षमा चाहिए, सम्यक दृष्टि की क्षमा, क्षमा भाव की क्षमता। आइस फैक्ट्री जैसी क्षमता नहीं चाहिए; समता की फैक्ट्री होना चाहिए। बर्फ देखने को ठंडी होती है, लेकिन वास्तविकता में गर्म होती है।</p>
<p>सम्यक दृष्टि की क्षमता का नाम है उत्तम क्षमा। पांच प्रकार की अग्नि बताई गई है, जिसे हम किस प्रकार के जल से शांत कर सकते हैं:</p>
<p>क्रोध अग्नि &#8211; क्षमा रूपी जल</p>
<p>काम अग्नि- ब्रह्मचर्य व्रत</p>
<p>आर्त ध्यान अग्नि &#8211; धर्म ध्यान</p>
<p>जठ अग्नि &#8211; अनशन आदि ब्राह्य तप</p>
<p>कर्म अग्नि &#8211; संवर-निर्जरा रूपी जल</p>
<p>क्रोध कायरों का काम है और क्षमा वीरों का आभूषण। क्षमा रुपी खड़क तलवार से सभी पर विजय पाई जा सकती है। संसार में आज तक क्रोध के द्वारा किसी ने किसी को नहीं जीता।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संसार के प्राणी अग्नि ताप से घबराकर शीतल झरने की तलाश में हैं। यदि मनोरंजन करना ही है तो ऐसे कार्य करें जो अलौकिकता और आध्यात्मिकता की ओर ले जाएं। क्षमा को पृथ्वी के समान कहा गया है।</p>
<p><strong> &#8220;आज का पर्व हमें सहनशील होना सिखाता है।&#8221;</strong></p>
<p>क्षमा का विरोधी क्रोध है। शास्त्रों में बताया गया है, मनुष्य का आभूषण रूप, रूप का आभूषण गुण, गुण का आभूषण ज्ञान, और ज्ञान का आभूषण क्षमा।</p>
<p><strong>उत्तम मार्दव धर्म</strong></p>
<p>परिणाम की कोमलता उत्तम मार्दव धर्म है।</p>
<p>-मान कभी करना नहीं और स्वाभिमान कभी छोड़ना नहीं।</p>
<p>&#8211; सरल स्वभाव वाला, विनम्र गुण वाला, कोमल हृदय वाला व्यक्ति संपदा और आशीर्वाद पाता है।</p>
<p>&#8211; नमन और विनय से मोक्ष का द्वार खुलता है।</p>
<p>मार्दव भाव आत्मा का गुण है और अहंकार का नाशक।</p>
<p><strong>उत्तम आर्जव धर्म</strong></p>
<p>मन, वचन और काय में कुटिलता का परित्याग करके सरल निष्कपट भाव धारण करना उत्तम आर्जव धर्म है।</p>
<p>&#8211; सरल भाव धारण करने वाला अत्यंत सरस और मधुर होता है।</p>
<p>&#8211; आर्जव का अर्थ — विचार, वचन और आचरण में सामंजस्य।</p>
<p><strong> उत्तम सत्य धर्म</strong></p>
<p>दशलक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम सत्य धर्म के नाम।</p>
<p>-सत्य का अर्थ है तत्वों का सम्यक प्रस्तुतीकरण।</p>
<p>-सत्य विहीन आचरण कोरा आडंबर है।</p>
<p>-सत्य बोलने से समाज और आत्मा दोनों का कल्याण होता है।</p>
<p><strong>उत्तम शौच धर्म</strong></p>
<p>शौच धर्मआत्मा की पवित्रता का माध्यम है।</p>
<p>-लोभ, भोग और तृष्णा आत्मा की शुद्धता नष्ट करते हैं।</p>
<p>-शौच धर्म के पालन से आत्मा निर्मल और निर्लोभी बनती है।</p>
<p><strong>उत्तम संयम धर्म</strong></p>
<p>संयम धर्म का अर्थ है इच्छाओं और इंद्रियों का नियंत्रण।</p>
<p>-संयम आत्मा की उन्नति और शक्ति का साधन है।</p>
<p>-हिंसा, झूठ, चोरी और परिग्रह से विरत रहना संयम ह</p>
<p><strong>उत्तम तप धर्म</strong></p>
<p>तप धर्म का अर्थ है इच्छाओं का परित्याग और कर्मबंधन से मुक्ति।</p>
<p>-तप आत्मा को शुद्ध करता है।</p>
<p>-इच्छाओं का त्याग तप का मूल है।</p>
<p><strong>उत्तम त्याग धर्म</strong></p>
<p>त्याग धर्म में सांसारिक मोह, लोभ और भोग का त्याग शामिल है।</p>
<p>-त्याग से शांति और समभाव प्राप्त होता है।</p>
<p>-आचार्य श्री के अनुसार असली त्याग में आंतरिक और बाहरी परिग्रह का त्याग शामिल है।</p>
<p><strong>उत्तम दान धर्म</strong></p>
<p>दान धर्म आत्मा और समाज की समृद्धि का साधन है।</p>
<p>-आहार दान, शास्त्र दान, अभय दान और औषधि दान के माध्यम से पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>आकिंचन्य धर्म</strong></p>
<p>आकिंचन्य धर्म का अर्थ है परिग्रह रहित जीवन।</p>
<p>-बाहरी और आंतरिक परिग्रह का त्याग आत्मा को स्वतंत्र बनाता है।</p>
<p>-आकिंचन्य पुरुष संसार से पार उतरता है और मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।</p>
<p><strong>ब्रह्मचर्य धर्म</strong></p>
<p>ब्रह्मचर्य यानी शरीर, मन और वचन का ब्रह्मसंबंधी आचरण।</p>
<p>-ब्रह्मचर्य व्रत पालन करने वाला आत्मा में पूर्णता प्राप्त करता है।</p>
<p>-दशलक्षण पर्व में ब्रह्मचर्य की विशेष पूजा होती है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_of_life_in_the_discourses_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य वर्धमान सागर की शिष्या आर्यिका श्री तपनमति जी ने धारण की यम संल्लेखना : सभी प्रकार के आहार का किया त्याग </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/heres_a_refined_version_of_your_news_article/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/heres_a_refined_version_of_your_news_article/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Dec 2024 07:44:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shri Tapanmati Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dharmasabha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Parsola]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Varsha Yoga]]></category>
		<category><![CDATA[Yam Sanllekhna. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री तपनमति जी]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पारसोला]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[यम संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=71282</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर उन्होंने श्रीजी, आचार्य श्री संघ और सभी साधुओं से क्षमा याचना करते हुए, सभी प्रकार के आहार का त्याग कर लिया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की विशेष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर उन्होंने श्रीजी, आचार्य श्री संघ और सभी साधुओं से क्षमा याचना करते हुए, सभी प्रकार के आहार का त्याग कर लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पारसोला।</strong> आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 20 दिसंबर 2024 को यम संलेखना धारण की। इस अवसर पर उन्होंने श्रीजी, आचार्य श्री संघ और सभी साधुओं से क्षमा याचना करते हुए, सभी प्रकार के आहार का त्याग कर लिया। आर्यिका श्री तपनमति जी ने यह महत्वपूर्ण संकल्प 20 दिसंबर को लिया, और इससे पहले 8 दिसंबर 2024 को संस्तरारोहण किया था। संस्तरारोहण का अर्थ है, उस स्थान पर बैठना और उठना जहाँ क्षपक साधु बैठते और विश्राम करते हैं। इस प्रक्रिया को संस्तर आरोहण कहा जाता है। पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित पारसोला में विराजमान हैं, जहां निरंतर धर्म की गंगा प्रवाहित हो रही है।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री तपनमति जी के तप और त्याग की अनुमोदना</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया और राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि आर्यिका श्री तपनमति जी का जन्म 1 पुष्य शुक्ला दशमी, विक्रम संवत 1991 को श्रीमती मथुरा देवी और श्री लक्ष्मण जी के घर हुआ था, जो कूण जिला, उदयपुर के निवासी हैं। उनका विवाह श्री भगवानलाल लालावत से हुआ था। उन्होंने 11 अगस्त 2024 को पारसोला में पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। इस अवसर पर उल्लेखनीय बात यह है कि उनकी पुत्री, बाल ब्रह्मचारिणी भारती दीदी ने भी 29 अप्रैल 2015 को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से आर्यिका दीक्षा प्राप्त की थी। वर्तमान में वह आचार्य श्री के संघ में आर्यिका श्री समर्पित मति के रूप में विद्यमान हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/heres_a_refined_version_of_your_news_article/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>साधु के कष्ट को दूर करती है पिच्छिका : आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पिच्छीका परिवर्तन समारोह आयोजित </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/pichhika_parivartan_ceremony_held_under_the_aegis_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_sangha/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/pichhika_parivartan_ceremony_held_under_the_aegis_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_sangha/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Nov 2024 04:28:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dhamnod]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Pichhika Parivartan Ceremony श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Pratapgarh]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धामनोद]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक सभा]]></category>
		<category><![CDATA[पिच्छीका परिवर्तन समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=70268</guid>

					<description><![CDATA[प्रतापगढ़ जिले के पारसोला में विराजित आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में एक भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में देशभर से भक्तगण पहुंचे। आचार्य श्री ने धर्म सभा में प्रवचन करते हुए कहा कि दिगम्बर जैन साधु का संयम उपकरण &#8221; पिच्छिका&#8221; (पंख) और &#8220;कमंडल&#8221; साधु के स्वावलंबन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रतापगढ़ जिले के पारसोला में विराजित आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में एक भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में देशभर से भक्तगण पहुंचे। आचार्य श्री ने धर्म सभा में प्रवचन करते हुए कहा कि दिगम्बर जैन साधु का संयम उपकरण &#8221; पिच्छिका&#8221; (पंख) और &#8220;कमंडल&#8221; साधु के स्वावलंबन के प्रतीक होते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> प्रतापगढ़ जिले के पारसोला में विराजित आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में एक भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में देशभर से भक्तगण पहुंचे। आचार्य श्री ने धर्म सभा में प्रवचन करते हुए कहा कि दिगम्बर जैन साधु का संयम उपकरण &#8221; पिच्छिका&#8221; (पंख) और &#8220;कमंडल&#8221; साधु के स्वावलंबन के प्रतीक होते हैं। इन दोनों के बिना अहिंसा के मार्ग पर चलना संभव नहीं है। यही कारण है कि समस्त दिगम्बर साधु वर्ष में एक बार पिच्छिका का परिवर्तन करते हैं। आचार्य श्री ने पिच्छिका के गुण की महत्ता को बताते हुए कहा कि &#8221; पिच्छिका&#8221; धूल को ग्रहण नहीं करती, यह लघुता, सुकुमारता और झुकने वाली होती है। इसके अलावा, यह कभी आंसू नहीं आने देती और साधु के कष्ट को दूर करती है।</p>
<p>आचार्य श्री ने यह भी बताया कि मोर पंखों की तरह, पिच्छिका स्वयं छोड़ दी जाती है, जिससे हिंसा का कोई प्रश्न नहीं उठता है। उन्होंने कहा, &#8220;आज, संयम का रथ निरंतर चल रहा है, जिसका श्रेय प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर महाराज जी को जाता है। उनके जीवन में पुण्य और प्रसाद से जो अर्जित द्रव्य का त्याग किया गया, उसी से पुण्य की प्राप्ति होती है। आप भी संयम धारण करके अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं</p>
<p><strong> नृत्य और नाटिका की प्रस्तुत</strong></p>
<p>समारोह में आचार्य शांति सागर और अन्य पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया। यह सम्मान पारसोला समाज के अध्यक्ष गौरव पाटनी और पवित्र बड़जात्या को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने सुंदर नृत्य और नाटिका प्रस्तुत की, जो समारोह को एक विशेष आभा प्रदान कर रही थी। इस अवसर पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने विभिन्न भक्तों को नई पिच्छिका प्रदान की और पुरानी पिच्छीका का त्याग किया। जिनमें प्रमुख रूप से किशनगढ़ की मंजू देवी, आशीष मित्तल परिवार, हरिका श्री विशेषण मति माताजी, राजेंद्र कुमार परिवार आदि शामिल थे।</p>
<p><strong>चौका लगाने का प्रण</strong></p>
<p>कार्यक्रम में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पाठ प्रक्षालन करने का सौभाग्य किशनगढ़ के विमल कुमार, महेंद्र कुमार और समर्थ पत्नी को प्रदान किया। साथ ही, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य गौरव पाटनी, पवित्र बड़जात्या और अंकित जैन को मिला। समारोह के दौरान समरकंठली ने अपने उद्बोधन में कहा कि वह आगामी वर्ष भर चौका लगाएंगे और जीवनभर इस कार्यक्रम को आयोजित करते रहेंगे। मंच का संचालन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी और हरिका श्री महाजन माटी माताजी ने किया। इस कार्यक्रम में 16 से अधिक भक्तगण अन्य राज्यों से भी उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/pichhika_parivartan_ceremony_held_under_the_aegis_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_sangha/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संत निलय में हुआ भव्य रूप में पंचामृत अभिषेक व पूजन : नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 75वां वर्षवर्धन दिवस मनाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/75th_anniversary_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_celebrated/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/75th_anniversary_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_celebrated/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Sep 2024 16:46:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Birth Anniversary श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dashalakshana Parva]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Sanawad]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Uttam Arjaw Dharma]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तम आर्जव धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दशलक्षण पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पर्युषण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[सनावद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=65887</guid>

					<description><![CDATA[20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि  तपोनिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का आज सनावद नगर में 75वां वर्ष वर्धन दिवस बड़ी धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया। पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भादव सुदी सप्तमी की पावन बेला के अवसर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि  तपोनिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का आज सनावद नगर में 75वां वर्ष वर्धन दिवस बड़ी धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया। पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भादव सुदी सप्तमी की पावन बेला के अवसर पर प्रातः सर्वप्रथम बड़ा जैन मंदिर व संत निलय में भव्य रूप में पंचामृत अभिषेक व पूजन सभी भक्तों के द्वारा बहुत ही भक्ति भाव से किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> 20 वी सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधिश राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि  तपोनिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का आज सनावद नगर में 75वां वर्ष वर्धन दिवस बड़ी धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया। पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस भादव सुदी सप्तमी की पावन बेला के अवसर पर प्रातः सर्वप्रथम बड़ा जैन मंदिर व संत निलय में भव्य रूप में पंचामृत अभिषेक व पूजन सभी भक्तों के द्वारा बहुत ही भक्ति भाव से किया गया। इस अवसर पर  शांति धारा करने का सौभाग्य सुधीर कुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य में वृहद स्तर पर प्रथम बार मुनि हितेंद्र सागर जी महाराज द्वारा रचित आचार्य श्री वर्धमान सागर विधान का आयोजन किया गया, जिसमें प्रमुख सौधर्म इंद्र इंद्राणी बनने का सौभाग्य हितेश मेघा पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आर्यिका अनंतमति माताजी ने अपनी गुरु के प्रति अपनी विनियांजली प्रकट करते हुए कहा कि सनावद नगरी बहुत ही पुण्यशाली नगरी है जहां आज इतने बड़े आचार्य का जन्म हुआ। जो आज भी 20वी सदी के प्रथमाचार्य आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज की परंपरा का निर्वहन भली भाति रूप से कर रहे हैं। ऐसे गुरु बिरले होते है।</p>
<p>किस प्रकार समर्पण का भाव होना चाहिए, किस प्रकार आचार्य श्री आज भी अपने गुरुदेव की चर्या का निर्वहन कर रहे हैं वो आचार्य श्री से ही देखने को मिलती हे। इसी कड़ी में दोपहर में आर्यिका माताजी के सानिध्य में जिनवाणी पूजन करवाई गई। जिसका सौभाग्य कुसुमकुमार जैन काका एवं रेखा राकेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ। अगली कड़ी में शाम को श्रीजी की एवं आचार्य श्री की 75 दीपों से मंगल आरती की गई। प्रशांत चौधरी, प्रांशुल पंचोलिया, संगीता पाटोदी, पूर्णिमा जैन द्वारा भव्य भक्ति व आरती प्रस्तुत की गई।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-65889" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240910-WA0055-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आचार्य श्री वर्धमान सागर जी  महाराज का जीवन परिचय</strong></p>
<p>जैसा की ज्ञात हों की भरत चक्रवती के नाम पर अवतरित भारत देश मे राज्य मध्यप्रदेश में कई भव्य आत्माओं ने अवतरित होकर श्रमण मार्ग अपनाया है।</p>
<p>इसी राज्य खरगौन जिले के सनावद नगर जो कि सिद्ध क्षेत्र श्री सिद्धवरकूट श्री सिद्धक्षेत्र पावा गिरी ऊन श्री सिद्ध क्षेत्र चूल गिरी बावनगजा बड़वानी के निकट है।</p>
<p>इन सिद्ध क्षेत्रों से करोड़ों मुनि मोक्ष गए हैं। ऐसी पवित्र नगरी सनावद में पर्युषण पर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव दिवस पर एक प्रतिभा शाली कुल परिवार नगर का मान बढ़ाने वाले यशस्वी बालक का जन्म माता श्रीमती मनोरमा देवी की उज्जवल कोख से प्रसवित हुआ। आपके पिता श्री कमल चंद जी थे। 18 सितम्बर 1950 भादव शुक्ला 7 सप्तमी संवत 2006  को अवतरित होनहार भाग्यशाली पुत्र यशवंत कुमार के रूप में जन्म लिया। आप ने सन 1967 में श्री मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र में आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी से आजीवन शूद्र जल त्याग और  5 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत लिया। आप ने 18 वर्ष की उम्र में ही मुनि दिक्षा ग्रहण कर ली थी। कर्नाटक प्रांत के श्रवणबेलगोला 12 वर्षों में एक बार होने वाले महामस्तकाभिषेक में आप ने तीसरी बार अपना सानिध्य प्रधान किया है ।जो की अपने आप में बहुत ही आलौकिक एवं गर्व की बात है। आप अभी राजस्थान की पावन धरा पारसोला मेंअपने विशाल संघ सहित विराजमान हैं जो कि सनावद के लिए बहुत गर्व की बात है। इस अवसर पर कुसुम कुमार, हेमेंद्र कुमार, सन्मति जैन काका परिवार द्वारा प्रभावना वितरण वितरित की गई। इस अवसर पर सभी समाज जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/75th_anniversary_of_acharya_shri_vardhman_sagar_maharaj_celebrated/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आर्यिका सरस्वती माताजी का रहेगा सानिध्य : आज मनाया जा रहा है आचार्य श्री वर्धमान सागर का 75वां हीरक जयंती महोत्सव </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/75th_diamond_jubilee_festival_of_acharya_shri_vardhman_sagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/75th_diamond_jubilee_festival_of_acharya_shri_vardhman_sagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Sep 2024 10:02:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Saraswati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dashalakshana Parva]]></category>
		<category><![CDATA[Diamond Jubilee Festival श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Sanawad]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका सरस्वती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दशलक्षण पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पर्युषण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[सनावद]]></category>
		<category><![CDATA[हीरक जयंती महोत्सव]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=65813</guid>

					<description><![CDATA[सनावद। राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि आचार्य रत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज का आज भादव सुदी सप्तमी को 75 वी हीरक जयंती वर्ष के रूप में बड़ी भक्ति भाव से मनाया जा रहा है। सन्मति काका ने बताया कि इसके अंतर्गत संत निलय में आर्यिका सरस्वती माताजी के सानिध्य में प्रातः श्रीजी का पंचामृत अभिषेक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सनावद।</strong> राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि आचार्य रत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज का आज भादव सुदी सप्तमी को 75 वी हीरक जयंती वर्ष के रूप में बड़ी भक्ति भाव से मनाया जा रहा है। सन्मति काका ने बताया कि इसके अंतर्गत संत निलय में आर्यिका सरस्वती माताजी के सानिध्य में प्रातः श्रीजी का पंचामृत अभिषेक ,सामुहिक पूजन, तत्पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर मंडल विधान आयोजित किए गए। रात्रि में भव्य संगीतमय आरती प्रवचन एवं प्रश्नमंच आयोजित किये जायेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/75th_diamond_jubilee_festival_of_acharya_shri_vardhman_sagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
