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	<title>Acharya Shri Pulak Sagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Acharya Shri Pulak Sagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गायत्री नगर मंदिर में खेली केसर तिलक होली : अभिषेक और विश्व शांति के लिए शांतिधारा की </title>
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		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 04:55:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज के आर्शीवाद से इस वर्ष भी अष्टान्हिका महापर्व और होली के पावन अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में 2 मार्च प्रातः 6.45 बजे दिगम्बर जैन मंदिर में अभिषेक और विश्व शांति के लिए शांतिधारा की गई। जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज के आर्शीवाद से इस वर्ष भी अष्टान्हिका महापर्व और होली के पावन अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में 2 मार्च प्रातः 6.45 बजे दिगम्बर जैन मंदिर में अभिषेक और विश्व शांति के लिए शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज के आर्शीवाद से इस वर्ष भी अष्टान्हिका महापर्व और होली के पावन अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में 2 मार्च प्रातः 6.45 बजे दिगम्बर जैन मंदिर में अभिषेक और विश्व शांति के लिए शांतिधारा की गई। इसके बाद पुलक मंच परिवार की ओर से मंदिर जी में केसर होली का आयोजन हुआ। पुलक मंच गायत्री नगर, महारानी फार्म की धर्ममंत्री अनिता बडजात्या ने बताया कि मंदिर प्रबन्ध समिति को पुलक मंच परिवार की राष्ट्रीय महामंत्री बीना टोंग्या, शाखा अध्यक्ष मंजू सेवावाली महामंत्री रेखा झांझरी के नेर्तत्व में पुलक मंच परिवार द्वारा 121ग्राम केसर प्रदान की गई एवं जिनशंरण तीर्थ, महाराष्ट्र में भी 21ग्राम केसर प्रदान की गई। इसके बाद पदाधिकारियों ने केसर तिलक लगाकर होली का यह पर्व मनाया।</p>
<p><strong>यह समाजजन उपस्थिति रही</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम में पुलक मंच परिवार के महामंत्री सुरेश जैन, संरक्षक अनिल टोंग्या, रशिम तोतुका, विमला जैन, ज्योति जैन, मन्दिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष अरुण शाह, अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन, मंत्री अमित काला, प्रवक्ता राकेश पाटोदी, अशोक विधानसभा वाले, विजय सोगानी आदि के साथ पुलक मंच परिवार के पदाधिकारी और सदस्य गण एवं समाज के अन्य गणमान्य लोग, महिला पुरूष भी शामिल थे। आभार राष्ट्रीय महामंत्री टोंग्या ने माना।</p>
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		<title>हित मीत प्रिय वचन बोलो, वाणी में मिठास घोलो: धरियावद में धर्मसभा में बही ज्ञानगंगा </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 13:09:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने धरियावद मंगल प्रवेश के दूसरे दिन शनिवार को श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में धर्मसभा में प्रकट किए। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन मौजूद रहे। धरियावद से पढ़िए, यह खबर&#8230; धरियावद। नारकी, तिर्यंच, देवता और मनुष्य सभी को तन प्राप्त होता है, किन्तु तन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने धरियावद मंगल प्रवेश के दूसरे दिन शनिवार को श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में धर्मसभा में प्रकट किए। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी समाजजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> नारकी, तिर्यंच, देवता और मनुष्य सभी को तन प्राप्त होता है, किन्तु तन और मन सिर्फ मनुष्य को ही मिलता है। मनुष्य मन से पवित्र हो सकता है। यह विचार आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने धरियावद मंगल प्रवेश के दूसरे दिन शनिवार को श्री चंद्रप्रभ उद्यान परिसर के आनंद सभागार में धर्मसभा में प्रकट किए। उन्होंने कहा कि कंकर से शंकर, पशु से परमेश्वर, नर से नारायण आदि बनने की क्षमता सिर्फ मनुष्य में ही होती है परंतु, यह सब अगर मनुष्य नहीं बन सके तो कम से कम सच्चे इंसान बनने का पुरुषार्थ तो सब मनुष्य को अवश्य करना चाहिए। प्रकृति ने एक कला अन्य जीवों के अलावा सिर्फ मनुष्यों को ही दी है। वह बोलने की कला है। यह सिर्फ मनुष्यों को प्राप्त होती है। परंतु यह विचारणीय है कि क्या बोलना है, कब बोलना है और कैसे बोलना है।</p>
<p>यह सब जिंदगी भर बड़बड़ाते रहने के बावजूद भी कई मनुष्य बोलना नहीं सीख पाते हैं। मनुष्य के शरीर में कान, आंख, नाक, हाथ और पैर सभी अंग दो-दो दिए गए हैं। मगर इन दोनों का काम एक ही होता है। शरीर में एक अंग ऐसा है जो एक ही है लेकिन काम दो करता है। वह है जिव्हा (जीभ)। यह चखना और बकना, दो काम करती है। विद्वान और मनीषी कहते हैं कि हमें भाषा समिति का पालन करते हुए सुनना ज्यादा और बोलना कम चाहिए, पर हो उलटा रहा है। मनुष्य बोलते ज्यादा और सुनते कम हैं। क्या बोलना है, कब बोलना है और कैसे बोलना है? अगर यह सब नहीं आता है तो जानवर की तरह मौन (चुप) रहना सीख लेना चाहिए।</p>
<p><strong>वाणी में मिठास घोलना नहीं भूलना चाहिए</strong></p>
<p>आचार्य श्री पुलक सागर जी ने प्रवचन सभा में कहा कि चाय में चीनी डालना भूल जाएं, तो कोई फर्क नहीं पड़ता है। मगर वाणी में मिठास घोलना नहीं भूलना चाहिए। मीठा खाओ या न खाओ, कोई बात नहीं पर अपनी वाणी में मिठास जरूर घोलें। मिठाई तो हर बार मीठी बनती है, लेकिन इस बार व्यवहार और वाणी को भी मीठा बनाएं। वाणी में बाण नहीं वीणा की मधुर झंकार बरसनी चाहिए।</p>
<p><strong>वाणी मरने के बाद भी अमर रहती है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने एक उक्ति सुनाते हुए कहा कि अगर बोलेगा भाभी काणी तो मिलेगा छाछ में पाणी और अगर बोलोगे भाभी अच्छी, तो मिलेगी पीने में लस्सी। उन्होंने कहा कि जीवन में 20 प्रतिशत महत्व सुंदरता का तो 80 प्रतिशत बोलने का होता है। मीठा बोलने वालों की वाणी मरने के बाद भी अमर रहती है और लोगों के दिलों में वास करती है।</p>
<p><strong>अपनी जुबान पर नियंत्रण रखे</strong></p>
<p>पुलक सागर जी महाराज ने आगे कहा कि जुबान को संभालना चाहिए। घोड़े की जुबान पर लगाम होती है, लेकिन मनुष्य की जुबान पर नहीं होती है। गाली का जवाब गोली से, ईंट का जवाब पत्थर से, चांटे का जवाब घूंसे से नहीं देना चाहिए। अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना चाहिए। घर की उलझनों को मिटाना है तो अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर परिवार एवं समाज में व्यवहार बनाने चाहिए।</p>
<p><strong>हमेशा हल्के मूड में रहें</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि वह धरियावद में जुड़े हुए को तोड़ने नहीं बल्कि टूटे हुए को जोड़ने आए हैं। वह परिवार और समाज की एकता पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आभूषण, कपड़े, अच्छे प्रसाधन से जीवन सुंदर नहीं होता है। चाय में चीनी डालना भले ही भूल जाएं, लेकिन वाणी में मिठास घोलना नहीं भूलना चाहिए। आज के युग में डायबिटीज शक्कर से नहीं बल्कि वाणी में टक्कर से बढ़ रही है। हमेशा हल्के मूड में रहें, ज्यादा सीरियस नहीं बनना चाहिए।</p>
<p><strong>धर्म से दूर हो रहे युवा -आचार्य चंद्र सागर जी </strong></p>
<p>धर्मसभा में मौजूद आचार्य श्री चंद्र सागर जी महाराज ने कहा कि आज के युग में मंदिर नव निर्माण और जीर्णाेद्धार के काम तो नित नए देखने को मिल रहे हैं, पर मंदिरों की देखभाल, पूजा-पाठ, दर्शन-स्तुति आदि करने वालों में ज्यादातर बुजुर्ग और वृद्ध ही दिखाई देते हैं। कहीं-कहीं तो मंदिर पुजारी के भरोसे ही छोड़ दिए जाते हैं जो पूजा करके चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में युवा वर्ग धर्म से दूर होता जा रहा है। जीवन में धन संचय कमाना, खाना और जोड़कर रखने की प्रवृत्ति चल पड़ी है। यही युवाओं का लक्ष्य बन कर रह गया है। इन सबका प्रमुख कारण लौकिक शिक्षा में होड़ा-होड़ी है। इससे युवा विदेश की ओर भाग कर अपने धर्म एवं संस्कृति से दूर होता चला जा रहा है।</p>
<p><strong>वर्षायोग के बाद 4 महीने धरियावद को देने का निवेदन</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि प्राचीन समय में आश्रम और गुरुकुल में सभी तरह के संस्कारों युक्त धार्मिक और लौकिक शिक्षा प्रदान की जाती थी। इसमें पुरुष वर्ग को 72 कलाओं का और स्त्री वर्ग को 64 कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता था। धर्मसभा में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन ने आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज को आगामी वर्षायोग के बाद 4 महीने धरियावद को देने का निवेदन किया। धर्मसभा में दोनों आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य महेंद्र कुमार-अनिता देवी चंपावत (अरिहंत शिक्षण संस्थान) परिवार को मिला। भींडर से आए दिंगबर जैन समाज के सदस्यों ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर भिंडर की ओर विहार करने की विनती की। इसके बाद दोपहर में पुलक मंच एवं महिला जागृति मंच गठन की बैठक और सायंकाल में आनंद यात्रा, आरती, गुरुभक्ति का आयोजन हुआ।</p>
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		<title>29 सितंबर को होगा 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन : राष्ट्रीय महाधिवेशन की तैयारी को लेकर गुरुदेव का आशीर्वचन </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 15:25:30 +0000</pubDate>
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<p><strong>भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक उद्योगपति सुमेश वानावत ने बताया कि 29 तारीख को नगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सचिन गंगावत विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऋषभदेव।</strong> भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक उद्योगपति सुमेश वानावत ने बताया कि 29 तारीख को नगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होगा, जिसकी तैयारी और भव्यता को लेकर मंच की दोनों शाखाओं की बैठक गुरुदेव के निर्देशन में की गई। उल्लेखनीय है कि चातुर्मास का मुख्य कलश स्थापनाकर्ता भी सुमेश वानावत परिवार ही है। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने कहा कि संपूर्ण देश में व्याप्त पुलक मंच परिवार की समस्त शाखाओं का एक अधिवेशन एक मंच महोत्सव 29 तारीख को गुरुदेव की चातुर्मास स्थली केसरियाजी में आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>निरंतर लोगों में उत्साह बढ़ रहा है। पूरे देश की शाखाएं बढ़-चढ़कर इस महोत्सव में हिस्सा ले रही हैं और सभी की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। गुरुदेव ने कहा कि इस अधिवेशन में कई व्यवस्थाओं को समय के अनुरूप बदला जाएगा। कई लोग राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान लेंगे, और कई शाखाओं के पुरस्कारों का भी इंतजार हो रहा है। उन्होंने आने वाले सभी भक्तों, शिष्यों और मंच परिवार को आशीर्वाद दिया कि जितने उत्साह के साथ वे आए हैं, उससे 10 गुना उत्साह के साथ वापस जाएंगे। उन्होंने सभी को रास्ते में कोई बाधा न आने का आशीर्वाद दिया और कहा कि मंगलमय तरीके से आएं और हंसते-खिलखिलाते विदा हों। गुरुदेव ने आगे कहा कि पुलक मंच परिवार अनुशासन, गुरुभक्ति और समर्पण की मिसाल है।</p>
<p>किसी आचार्य के निर्देशन में इतना बड़ा परिवार है, जो महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है। गुरुदेव ने कहा कि मैं जहां चतुर्मास कर रहा हूं, वह भगवान ऋषभदेव की नगरी है। शहर छोटा है, लेकिन यहां के लोगों का दिल और व्यवस्थाएं बहुत बड़ी हैं। आवासीय व्यवस्था को लेकर गुरुदेव ने कहा कि एक रात का रेन बसेरा है और सुबह निकल जाना है। अंत में उन्होंने कहा कि गुरुदेव के चरणों में बैठकर इस उत्सव का आनंद लें। इस मौके पर दोनों मंच परिवार के सदस्य उपस्थित थे।</p>
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		<title>29 सितंबर को होगा 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन :  राष्ट्रीय महाधिवेशन की तैयारी को लेकर गुरुदेव का आशीर्वचन </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 07:55:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक उद्योगपति सुमेश वानावत ने बताया कि 29 तारीख को नगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सचिन गंगावत विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>ऋषभदेव।</strong> भारत गौरव राष्ट्र संत, राजकीय अतिथि, शांतिदूत आचार्य श्री गुरुदेव पुलक सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 29 सितंबर, रविवार को 27वां राष्ट्रीय महाधिवेशन आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन की भव्यता को लेकर गुरुदेव ने आशीर्वचन दिए। जिनशरणम ट्रस्ट के ट्रस्टी और उदयपुर हिरणमंगरी शाखा के परम संरक्षक, अधिवेशन के मुख्य संयोजक उद्योगपति सुमेश वानावत ने बताया कि 29 तारीख को नगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन होगा, जिसकी तैयारी और भव्यता को लेकर मंच की दोनों शाखाओं की बैठक गुरुदेव के निर्देशन में की गई। उल्लेखनीय है कि चातुर्मास का मुख्य कलश स्थापनाकर्ता भी सुमेश वानावत परिवार ही है।</p>
<p>इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव ने कहा कि संपूर्ण देश में व्याप्त पुलक मंच परिवार की समस्त शाखाओं का एक अधिवेशन एक मंच महोत्सव 29 तारीख को गुरुदेव की चातुर्मास स्थली केसरियाजी में आयोजित किया जा रहा है। निरंतर लोगों में उत्साह बढ़ रहा है। पूरे देश की शाखाएं बढ़-चढ़कर इस महोत्सव में हिस्सा ले रही हैं और सभी की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। गुरुदेव ने कहा कि इस अधिवेशन में कई व्यवस्थाओं को समय के अनुरूप बदला जाएगा।</p>
<p>कई लोग राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान लेंगे, और कई शाखाओं के पुरस्कारों का भी इंतजार हो रहा है। उन्होंने आने वाले सभी भक्तों, शिष्यों और मंच परिवार को आशीर्वाद दिया कि जितने उत्साह के साथ वे आए हैं, उससे 10 गुना उत्साह के साथ वापस जाएंगे। उन्होंने सभी को रास्ते में कोई बाधा न आने का आशीर्वाद दिया और कहा कि मंगलमय तरीके से आएं और हंसते-खिलखिलाते विदा हों। गुरुदेव ने आगे कहा कि पुलक मंच परिवार अनुशासन, गुरुभक्ति और समर्पण की मिसाल है।</p>
<p>किसी आचार्य के निर्देशन में इतना बड़ा परिवार है, जो महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है। गुरुदेव ने कहा कि मैं जहां चतुर्मास कर रहा हूं, वह भगवान ऋषभदेव की नगरी है। शहर छोटा है, लेकिन यहां के लोगों का दिल और व्यवस्थाएं बहुत बड़ी हैं। आवासीय व्यवस्था को लेकर गुरुदेव ने कहा कि एक रात का रेन बसेरा है और सुबह निकल जाना है। अंत में उन्होंने कहा कि गुरुदेव के चरणों में बैठकर इस उत्सव का आनंद लें। इस मौके पर दोनों मंच परिवार के सदस्य उपस्थित थे।</p>
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