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	<title>Acharya Shri Pragya Sagar Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>Acharya Shri Pragya Sagar Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>नववर्ष की पूर्व संध्या पर पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा रखे तैयार : आचार्यश्री ने प्रवचन में नए साल में संकल्प लेने की बात कही  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 14:28:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने नववर्ष के पूर्व दिवस अपना मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है। इस वर्ष में कितना दान किया, कितना धर्म किया, कितना पाप किया, कितना पुण्य किया। इन सभी कार्यों की एक सूची [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने नववर्ष के पूर्व दिवस अपना मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है। इस वर्ष में कितना दान किया, कितना धर्म किया, कितना पाप किया, कितना पुण्य किया। इन सभी कार्यों की एक सूची बनानी है। जो अच्छे कार्य इस वर्ष में करने बाकी रह गए हैं। <span style="color: #ff0000">केकड़ी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी</strong>। आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने नववर्ष के पूर्व दिवस अपना मंगल उद्बोधन देते हुए कहा कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है। इस वर्ष में कितना दान किया, कितना धर्म किया, कितना पाप किया, कितना पुण्य किया। इन सभी कार्यों की एक सूची बनानी है। जो अच्छे कार्य इस वर्ष में करने बाकी रह गए हैं। अगले वर्ष में इसे निश्चित रूप से पूर्ण करना है। उन्होंने कहा जो गलत कार्य पाप का बंध इस वर्ष में हो गया है, उसके लिए पश्चाताप करके नियम लेना है कि नववर्ष में ऐसा कभी नहीं हो। नववर्ष के एक दिन पूर्व आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि डॉक्टर को अपने मरीज के लिए, माताऋपिता को अपने बच्चों के लिए और गुरु को अपने शिष्यों के भविष्य के लिए निर्दयी होना पड़ता है। गुस्सा अपनों को सुधारने के लिए किया जाता है। मरीज पर गुस्सा करके निर्दयी बनकर उसका इलाज करने के बाद वही मरीज उस डॉक्टर को भगवान मानने लग जाता है। दूध और पानी का उदाहरण देते हुए मुनिराज ने बताया कि पानी और दूध दोनांे को गरम करो, दूध उबलकर बाहर निकलता रहता है और समाप्त हो जाता है जबकि, पानी गर्म होकर भी बाहर नहीं निकलता है। गुस्सा मानव प्रवृति है परंतु पानी की तरह हो ज्यादा उफनकर अपना अस्तित्व समाप्त नहीं करना चाहिए।</p>
<p><strong>सांयकालीन कार्यक्रम में महाआरती की </strong></p>
<p>समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन (मावा) वालो ने बताया कि आनंदयात्रा के पश्चात आचार्यश्री द्वारा प्रश्नमंच का आयोजन किया गया तथा महाआरती की गई। प्रातःकालीन जिनाभिषेक,नित्यनियम पूजा, शांतिधारा का आयोजन आचार्यश्री के सानिध्य में किया गया। भगवान नेमिनाथ की शांतिधारा का पुण्यार्जन ज्ञानचंद सुनीलकुमार जैन ज्वैलर्स ने प्राप्त किया।</p>
<p><strong> चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट</strong></p>
<p>आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन भागचंद ज्ञानचंद जैन, कुमार विनय कुमार सोनू, मोनू सावर परिवार ने किया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हगामीलाल हेमराज जैन बड़गांव वालों ने प्राप्त किया। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट राजेश कुमार कमलेश कुमार मनोहरपुरा वालों ने किया।</p>
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		<title>पंच तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का मंगल प्रवेश : धर्मप्रेमियों ने भव्य जुलूस के साथ आचार्य संघ की अगवानी की </title>
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		<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 08:32:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ नेमिनाथ जैन मंदिर बोहरा कॉलोनी केकड़ी में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज का केकड़ी में धूमधाम से मंगल प्रवेश हुआ। केकड़ी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; केकड़ी। श्री नेमिनाथ जैन मंदिर बोहरा कॉलोनी केकड़ी में आचार्य श्री प्रज्ञा सागरजी महाराज का केकड़ी में धूमधाम से मंगल प्रवेश हुआ। समाज के अध्यक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> नेमिनाथ जैन मंदिर बोहरा कॉलोनी केकड़ी में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज का केकड़ी में धूमधाम से मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">केकड़ी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी।</strong> श्री नेमिनाथ जैन मंदिर बोहरा कॉलोनी केकड़ी में आचार्य श्री प्रज्ञा सागरजी महाराज का केकड़ी में धूमधाम से मंगल प्रवेश हुआ। समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वेलर्स व मंत्री कैलाश जैन मावा वालों ने बताया कि सकल जैन समाज एवं धर्मप्रेमियों ने भव्य जुलूस के साथ आचार्य संघ की अगवानी की। सावर तिराहे से सरदार पेट्रोल पंप, पुलिस थाना, तीन बत्ती, घंटाघर होते हुए जुलूस बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मंदिर पहुँचा जहाँ जुलूस धर्मसभा में परिवर्तित हो गया।</p>
<p>दीप प्रज्ज्वलन का सौभाग्य देवालाल सुरेश कुमार, आनंद कुमार उनियारा परिवार ने प्राप्त किया। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन महेन्द्र कुमारज़ रमेशकुमार, जयेश रांटा परिवार ने किया। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट का सौभाग्य पारस मल महावीर प्रसाद लाभ चंद बघेरा परिवार ने प्राप्त किया। संघस्थ मुनि व आर्यिका को शास्त्र भेंट का सौभाग्य भाग चंद ज्ञान चंद जैन कुमार विनय ,सोनू, मोनू अग्रवाल सावर, भाग चंद ज्ञान चंद सुनील कुमार जैन ज्वैलर्स, चांद मल शीतल कुमार पारा,विनोद कुमार गणेश कुमार मेहरुकलां ने प्राप्त किया। शांति नाथ बहु मंडल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>मंगल प्रवचन</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने मंगल प्रवचन करते हुए बताया कि उनका 16 वर्षों बाद पुनः कनकावती नगरी में प्रवेश हुआ है।</p>
<p>आठ दिन के अल्पप्रवास के दौरान केकड़ी नगरी में जिनधर्म की गंगा बहाने की बात कहीं। कार्यक्रम का संचालन पंडित अनिकेत भैया ने किया । आचार्य श्री आहारचार्य का असीम सौभाग्य महेंद्र कुमार जयेश कुमार रांटा ने प्राप्त किया।</p>
<p><strong> यह रहेंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>आचार्य श्री के नित्य कार्यक्रम नित्य नियम पूजा, शांतिधारा के पश्चात प्रतिदिन पांडाल में मंगल प्रवचन होंगे। दिन में शास्त्र सभा व शाम को आनंदयात्रा का कार्यक्रम सम्पन होगा।</p>
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		<title>ऐतिहासिक और भव्य आयोजन के साक्षी बने श्रद्धालु : आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज के सानिध्य में निकली पदयात्रा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:32:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज के सानिध्य में कोटा से स्वास्तिधाम तक निकली जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा ने न केवल जिनशासन की प्रभावना दिखाई, बल्कि हरित क्रांति का संदेश भी दिया। इस भव्य पदयात्रा का मुख्य संयोजन मिथुन मित्तल और रामगंजमंडी नगर के युवा कार्यकर्ताओं ने किया। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट&#8230; रामगंजमंडी। परम पूज्य पर्यावरण [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज के सानिध्य में कोटा से स्वास्तिधाम तक निकली जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा ने न केवल जिनशासन की प्रभावना दिखाई, बल्कि हरित क्रांति का संदेश भी दिया। इस भव्य पदयात्रा का मुख्य संयोजन मिथुन मित्तल और रामगंजमंडी नगर के युवा कार्यकर्ताओं ने किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> परम पूज्य पर्यावरण संरक्षक एवं तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज के सानिध्य में कोटा से स्वास्तिधाम तक निकली जिनधर्म प्रभावना पदयात्रा ने न केवल जिनशासन की प्रभावना दिखाई, बल्कि हरित क्रांति का संदेश भी दिया। इस भव्य पदयात्रा का मुख्य संयोजन मिथुन मित्तल और रामगंजमंडी नगर के युवा कार्यकर्ताओं ने किया।</p>
<p><strong>अविस्मरणीय पदयात्रा का अनुभव</strong></p>
<p>पदयात्रा के दौरान शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि यह एक ऐसा पल था जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। पैदल चलने के बावजूद थकान महसूस नहीं हुई और भक्त भक्ति और नृत्य के माध्यम से यात्रा का आनंद लेते रहे। पदयात्रा में भोजन और आवास की व्यवस्थाएं किसी शादी समारोह जैसी की गईं। प्रत्येक रुकावट स्थल पर धर्मशाला के बजाय रिसोर्ट जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।</p>
<p><strong>गुरु और श्रद्धालुओं का दिव्य मिलन</strong></p>
<p>पदयात्रा के दौरान गणिनी गुरु मां आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी स्वयं संघ सहित आचार्य श्री के स्वागत के लिए जहाजपुर कस्बे में उपस्थित हुईं। जगह-जगह स्वागत द्वार और तोरण द्वार से आगवानी की गई। भक्तों ने भक्ति में झूमते हुए गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया</p>
<p>स्वस्तिधाम तीर्थ पर महिला शक्ति ने मंगल कलश लेकर गुरुदेव का भव्य स्वागत किया। क्षेत्र समिति द्वारा भी ऐतिहासिक आगवानी की गई, जिसे स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा।</p>
<p><strong>जिनधर्म प्रभावना में आचार्य श्री का योगदान</strong></p>
<p>गणिनी गुरु मा स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि जिनधर्म की प्रभावना में आचार्य श्री का बड़ा योगदान है। उन्होंने पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि आचार्य श्री के मार्गदर्शन में भक्तों ने पदयात्रा में सहभागिता की और इस दिव्य आयोजन का आनंद लिया।</p>
<p>आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर महाराज ने कहा कि जो सरल होता है वह तरल होता है, और जो तरल होता है वह शुद्ध बहाव में होता है। उन्होंने प्रज्ञासागर नाम के महत्व को बताते हुए कहा कि साधना के द्वारा ऊँचाइयाँ छूना और अनुकरणीय बनना संभव है।</p>
<p><strong>पदयात्रा का समापन</strong></p>
<p>शनिवार की बेला में पदयात्रा का समापन हुआ। प्रातः श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा संपन्न हुई। इसके बाद आहारचर्या, दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण और मंगलाचरण किया गया। पदयात्रा में विशेष सहयोग देने वाले भक्तों का सम्मान किया गया और आसपास के क्षेत्र से आए भक्तों ने गुरुवर से आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि श्रद्धालुओं ने जहाजपुर पदयात्रा में स्वर्ण कलश बनकर इसे पूर्णता प्रदान की है।</p>
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		<title>आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने किया केशलोच: उज्जैन तपोभूमि पर विराजित हैं आचार्य श्री </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 06:42:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तपोभूमि प्रणेता आचार्यश्री प्रज्ञा सागर महाराज ने मंगलवार प्रातः बेला में तपोभूमि में स्वयं अपने हाथों से केशो का लोचन किया। इस अवसर पर आचार्य श्री का उपवास रहा। यह बिना कुछ खाए पिए भूख और प्यास को सहन करते हुए उपवास पर रहें, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट तप साधना साधना है। उज्जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तपोभूमि प्रणेता आचार्यश्री प्रज्ञा सागर महाराज ने मंगलवार प्रातः बेला में तपोभूमि में स्वयं अपने हाथों से केशो का लोचन किया। इस अवसर पर आचार्य श्री का उपवास रहा। यह बिना कुछ खाए पिए भूख और प्यास को सहन करते हुए उपवास पर रहें, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट तप साधना साधना है। <span style="color: #ff0000">उज्जैन से पढ़िए अभिषेक जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  उज्जैन।</strong> तपोभूमि प्रणेता आचार्यश्री प्रज्ञा सागर महाराज ने मंगलवार प्रातः बेला में तपोभूमि में स्वयं अपने हाथों से केशो का लोचन किया। इस अवसर पर आचार्य श्री का उपवास रहा। स्वयं के हाथों बिना किसी अस्त्र के अपने हाथों से घास फूस की तरह संत केशों को निकालते हैं, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना होती है। ऐसी भीषण गर्मी में हम प्यासे से नहीं रह पाते हैं। थोड़ी सी गर्मी में हम व्याकुल हो उठते हैं। ऐसे में गुरुदेव बिना कुछ खाए पिए भूख और प्यास को सहन करते हुए उपवास पर रहें, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट तप साधना साधना है। उनके साथ मुनि श्री प्रिय तीर्थ महाराज आदि रहे।</p>
<p><strong>पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना </strong></p>
<p>केशलोच के बारे में जाने तो यह करना कोई साधारण बात नहीं है, यह जैन संतों का सबसे कठोर तप माना गया है। आम आदमी के जीवन में यदि एक बार गलती से बाल उखड़ जाए तो वह दर्द के मारे कांपने लगता है लेकिन, जैन संत तो बिना किसी औजार के सीधे अपने हाथों से बालों को खींचकर निकाल देते हैं। जैन संत सदा स्वावलंबी होते हैं। वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों ना हो। वे समभाव में उसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं। साधु शरीर की सुंदरता को नष्ट करने के लिए अहिंसा धर्म का पालन करते हुए केशलोच करते हैं। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती हैं। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है।</p>
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