<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Acharya Shri Nirbhaysagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/acharya-shri-nirbhaysagar-ji-maharaj/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sun, 07 Sep 2025 16:15:25 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Acharya Shri Nirbhaysagar Ji Maharaj &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>जीवन में नम्रता और मधुरता क्षमावाणी में निहित: आचार्यश्री निर्भय सागरली ने बताई क्षमा धर्म की श्रेष्ठता </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/in_life_humility_and_kindness_are_found_in_the_power_of_forgiveness/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/in_life_humility_and_kindness_are_found_in_the_power_of_forgiveness/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 16:15:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhaysagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Saint]]></category>
		<category><![CDATA[Foot Washing Ceremony श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Panchayat]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Kshama vani]]></category>
		<category><![CDATA[Pathshala Family]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[क्षमावाणी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन पंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पाठशाला परिवार]]></category>
		<category><![CDATA[पाद प्रक्षालन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=90161</guid>

					<description><![CDATA[आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा धारण यदि व्यक्ति अपने जीवन में कर ले तो महानता को प्राप्त तो करता ही है। साथ ही परिणानों में निर्मलता आती है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा धारण यदि व्यक्ति अपने जीवन में कर ले तो महानता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा धारण यदि व्यक्ति अपने जीवन में कर ले तो महानता को प्राप्त तो करता ही है। साथ ही परिणानों में निर्मलता आती है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा धारण यदि व्यक्ति अपने जीवन में कर ले तो महानता को प्राप्त तो करता ही है। साथ ही परिणानों में निर्मलता आती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने द्वारा किए गए गलत कार्यों के प्रति यदि विचार कर उन्हें भविष्य में न करने का संकल्प ले तो उससे वर्तमान जीवन तो सुधरता ही है साथ ही परिणाम पवित्र होते हैं। आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने क्षमावाणी को जीवन में उतारने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल जैनियों का ही नहीं प्रत्येक नागरिक का है। इस दिन आपस में अपने मन के परिणामों की क्लेषता को दूर कर निर्मलता के भाव आते हैं। धर्मसभा का शुभारंम आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख उप्र के राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ द्वारा किया गया। जबकि आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन कार्यकम के पुष्यार्जक परिवार समाज श्रेष्ठी डॉ. राजकुमार जैन, नयन जैन परिवार ने किया। शास्त्र भेंट कर पाठशाला परिवार के वहनों के साथ नीलम जैन, प्रिया सोनाली, निर्मला जैन, अभिलाषा अनीता मोदी ने पुण्यार्जन किया।</p>
<p><strong>इन्होंने भी किए विचार व्यक्त </strong></p>
<p>जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडया ने जैनदर्शन में क्षमावाणी पर्व के महत्व का जिक्र करते हुए बताया कि पर्यूषण पर्व में दस दिनों तक श्रावक आध्यात्मिक तत्वों की आराधना करके अपना और अपने जीवन मूल्यों का स्पर्श करते हैं। इसके माध्यम से एक दूसरे से क्षमा याचना करते हैं। धर्मसभा में राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ, विधायक सदर रामरतन कुशवाहा, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, जिलाध्यक्ष भाजपा हरिश्चन्द्र रावत, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप चौबे, राजकुमार जैन चूना, रमेश सिंह लोधी, मुन्नालाल जैन अभिलाषा, गहेन्द्र जैन मयूर, अनिल जैन अंचल, नरेन्द्र कडकी, हरीश कपूर टीटू, नरेन्द्र जैन कडकी,गंधर्व सिंह लोधी, डॉ दीपक चौबे, अजय बरया, रामेश्वर मालवीय,उदय चन्द सराफ ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर राज्यमंत्री के साथ ने श्रेष्ठीजनों के साथ आचार्यश्री द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। संचालन जैन पंचायत के महामंत्री आकाश जैन ने किया। कार्यक्रम के दौरान उपजिलाधिकारी मनीष कुमार ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p><strong>इनका भी सहयोग सराहनीय रहा</strong></p>
<p>इस मौके पर प्रमुख रूप डॉ. रामगोपाल साहू, महेश श्रीवास्तव, महेन्द्र प्रतापसिंह बुंदेला, गुलाम मुहम्मद गामा, लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा, कन्हैयालाल नामदेव, डा० मनवीर सिंह तोमर, लक्ष्मी रावत, नरेंद्र पाठक, आलोक मयूर, डॉ. विशाल जैन अभिलाषा आदि मौजूद रहे। आयोजन की व्यवस्थाओं को संयोजित करने में मंदिर प्रबंधक मनोज जैन बबीना अजय जैन मंगचारी का सहयोग रहा। अमिनंदनोदय तीर्थ पर क्षमापर्व का आयोजन हुआ जिसकी संयोजना मंदिर प्रबंधक गोदी पंकज जैन अशोक जैन दैलवारा ने की।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/in_life_humility_and_kindness_are_found_in_the_power_of_forgiveness/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मनुष्य जीवन साधनों के लिए नहीं साधना के लिए है :  आचार्यश्री निर्भर सागरजी ने बताए जीवन को साधने के साधन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/human_life_is_not_for_means_but_for_sadhana/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/human_life_is_not_for_means_but_for_sadhana/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 11:40:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhaysagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Divine Sermons]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mahroni (Lalitpur)]]></category>
		<category><![CDATA[Right Character]]></category>
		<category><![CDATA[Right Knowledge]]></category>
		<category><![CDATA[Right Philosophy]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भयसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्य प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[महरौनी(ललितपुर)]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सम्यक चारित्र]]></category>
		<category><![CDATA[सम्यक ज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[सम्यक दर्शन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=83846</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ महरौनी में विगत 8 दिनों से विराजित हैं, जो हर दिन अपने दिव्य प्रवचन के माध्यम से ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। गुरुवार को धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन साधना के लिए मिला है साधनों के लिए नहीं। व्यक्ति जीवन भर साधन जुटाता है [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ महरौनी में विगत 8 दिनों से विराजित हैं, जो हर दिन अपने दिव्य प्रवचन के माध्यम से ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। गुरुवार को धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन साधना के लिए मिला है साधनों के लिए नहीं। व्यक्ति जीवन भर साधन जुटाता है और आत्म साधना के लक्ष्य को भूल जाता है। <span style="color: #ff0000">महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी(ललितपुर)।</strong> आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ महरौनी में विगत 8 दिनों से विराजित हैं, जो हर दिन अपने दिव्य प्रवचन के माध्यम से ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। गुरुवार को धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन साधना के लिए मिला है साधनों के लिए नहीं। व्यक्ति जीवन भर साधन जुटाता है और आत्म साधना के लक्ष्य को भूल जाता है। साधनों से सारी जिंदगी सुख भोगता है फिर भी तृप्त नहीं हो पाता है। यदि साधना एक बार कर ले तो जीवन सुधर जाता है। आचार्य श्री ने कहा कि जीवन का लक्ष्य इंद्रियों का सुख जीवन का भोग नहीं, आत्मा के उपभोग का भोग होना चाहिए। ज्ञान, सुख, संवेदना ही आत्मा का भोग है। इंद्रिय सुख भोगने से दुख मिलता है और आत्मा का सुख भोगने से सुख मिलता है।</p>
<p>प्रत्येक व्यक्ति को जीवन को भोग नहीं उपयोग करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा मनुष्य को फालतू बातों में समय न गंवाकर, अपना कीमती समय स्वयं के कल्याण में लगाना चाहिए क्योंकि, व्यक्ति के जीवन का कोई भरोसा नहीं है। जीवन एक पानी की बूंद के समान है। जीवन एक घड़ी है, जीवन उड़ती हुई पतंग है, यह कब मिट जाए, कब बुझ जाए, कब कट जाए इसका कोई भरोसा नहीं। व्यक्ति को अपना व्यक्तित्व नर से नार की ओर नहीं, बल्कि नर से नारायण की ओर ले जाना चाहिए।</p>
<p>नर से नारायण बनने के लिए व्यक्ति को कम खाना, गम खाना और नम जाना चाहिए। मानव जीवन चलाने के लिए व्यक्ति को रोटी, कपड़ा और मकान इन तीन वस्तुओं की आवश्यकता होती है और मोक्ष जाने के लिए भी सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र तीन चीजों की ही आवश्यकता होती है। जो सहन करता है, वही समर्थ बनता है। जीवन मे एक सूत्र अपनाओ जीवन में कितना भी दुख आए, कितनी भी प्रतिकूलताएं आएं, कैसी भी परेशानियां हों, अपना धैर्य मत खोओ और सहन करो, जो सामने आए, उसका सामना करो। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/human_life_is_not_for_means_but_for_sadhana/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
