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	<title>Acharya Shri Nirbhay Sagar श्रीफल जैन न्यूज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न : भगवान महावीर जन्म कल्याणक पर दिया जैन एकता और सादगीपूर्ण धर्म पालन का संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 09:23:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए नितिन जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पलवल (हरियाणा)।</strong> भगवान महावीर के पावन जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भूगर्भ से अवतरित दिव्य प्रतिमाओं का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और पवित्रता से ओत-प्रोत हो गया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। भक्तगणों ने स्नात्र पूजा एवं अभिषेक में बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंत्रोच्चार, धूप-दीप और भक्ति संगीत के मध्य जल, केसर, चंदन एवं पुष्पों से प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को धर्ममय एवं पवित्र बनाने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>सिद्धांतों पर डाला प्रकाश</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत शांतिधारा का आयोजन किया गया, जिसमें समस्त विश्व में शांति, सद्भाव, समृद्धि एवं अहिंसा के प्रसार की कामना की गई। “जियो और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्मः” के उद्घोष से पूरा तीर्थ क्षेत्र गुंजायमान रहा। इस अवसर पर भगवान महावीर के जीवन एवं उनके सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला गया। उनके त्याग, तप, संयम और सत्य के मार्ग को अपनाने का संदेश देते हुए कहा गया कि सच्चा धर्म बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता, करुणा और सरलता में निहित है।</p>
<p><strong>बताई एकजुटता की आवश्यकता</strong></p>
<p>जैन समाज की एकता पर विशेष बल देते हुए कहा गया कि वर्तमान समय में सभी मतभेदों और विभाजनों से ऊपर उठकर एकजुट होना आवश्यक है। भगवान महावीर के अनेकांत और सहिष्णुता के सिद्धांतों को अपनाकर ही समाज सशक्त और संगठित बन सकता है। साथ ही साधु-साध्वियों एवं श्रावक-श्राविकाओं से विनम्र आग्रह किया गया कि वे भगवान महावीर के मूल सिद्धांतों का पालन करें और धर्म को आडंबर एवं दिखावे से दूर रखते हुए सादगी, संयम और सत्यनिष्ठा के मार्ग पर चलें। धर्म की प्रभावशीलता आचरण से आती है, न कि बाहरी भव्यता से। यह आयोजन समस्त समाज के लिए प्रेरणादायक एवं कल्याणकारी सिद्ध हुआ, जिसने सभी को आत्मचिंतन और सच्चे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।</p>
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		<title>जन्म कल्याणक पर भगवान महावीर ने किया नगर भ्रमण धार्मिक आयोजन: समाज को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं &#8211; आचार्य निर्भयसागर </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 09:20:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैनाचार्य वैज्ञानिक संत आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य और अहिंसा का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। जिसने उनके सिद्धांतों को स्वीकार किया, वही सच्चे अर्थों में जैन कहलाने का अधिकारी है। उन्होंने आगे कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी के जन्म कल्याणक से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक तक लगातार 20 दिनों तक धार्मिक आयोजन किए जाने चाहिए, क्योंकि यह अवधि आत्मचिंतन, साधना और धर्म के गहन अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान यदि श्रद्धालु नियमित रूप से धर्मकार्य, स्वाध्याय और साधना में संलग्न रहें, तो उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। धार्मिक आयोजन समाज में धार्मिक जागरूकता को बढ़ाते हैं और लोगों को आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>जैन मित्र मंडल ने की रथयात्रा की भव्य अगवानी</strong></p>
<p>मानव सेवा हेतु समर्पित समाजसेवी संस्था जैन मित्र मंडल के एक सैकड़ा से अधिक कार्यकर्ताओं ने भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव पर आयोजित भव्य एवं विशाल श्रीजी शोभायात्रा की भव्य अगवानी की। जैन मित्र मंडल, मुरैना के सभी सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में—सिर पर गुलाबी एवं केसरिया पगड़ी तथा श्वेत वस्त्र धारण कर जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज ससंघ के साथ गगनभेदी जयघोष करते हुए चल रहे थे। एक समान परिधान में सुसज्जित सदस्य सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। गोपीनाथ की पुलिया पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से आचार्यश्री का पाद-प्रक्षालन किया तथा भगवान महावीर स्वामी की आरती कर भव्य स्वागत किया।</p>
<p><strong>रथयात्रा के समापन पर हुए कलशाभिषेक</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर भव्य एवं विशाल रथयात्रा निकाली गई। पीत वस्त्रों में सुसज्जित इंद्रों ने भगवान महावीर स्वामी को रथ में विराजमान कर बड़े जैन मंदिर से यात्रा प्रारंभ की। यह यात्रा गोपीनाथ की पुलिया, जीवाजी गंज, सूबात रोड, पुल तिराहा, हनुमान चौराहा, स्टेशन रोड, शंकर बाजार, सदर बाजार, सराफा बाजार और लोहिया बाजार से होती हुई पुनः बड़े जैन मंदिर पहुंची, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। जैन मंदिर में भगवान की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान कर विधिवत कलशाभिषेक किया गया। प्रासुक शुद्ध जल से भरे कलशों की जलधारा जैसे ही भगवान के मस्तक पर प्रवाहित हुई, पूरा मंडप तालियों, घंटा-घड़ियाल और महावीर स्वामी के जयकारों से गूंज उठा। सभी उपस्थित साधर्मी बंधुओं ने इस पावन अवसर पर सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>नंगे पैर चलकर, हाथों से खींचा भगवान का रथ</strong></p>
<p>भव्य रथयात्रा में जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज, मुनिश्री सुदत्तसागर महाराज, मुनिश्री भूदत्तसागर महाराज, क्षुल्लकश्री चंद्रदत्तसागर महाराज तथा क्षुल्लकश्री यशोदत्तसागर महाराज के सान्निध्य में सैकड़ों साधर्मी बंधु, माताएं, बहनें और युवा साथी शामिल हुए। सभी श्रद्धालु भगवान महावीर स्वामी का गुणगान करते हुए नंगे पैर चल रहे थे। युवा साथियों ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचकर अपनी जिनेंद्र भक्ति का परिचय दिया। भव्य शोभायात्रा में घोड़ों पर सवार युवाओं के हाथों में पचरंगा ध्वज, घोड़ा-बग्गी में विराजमान इंद्र-इंद्राणी एवं आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। सभी साधर्मी बंधु सिर पर सफेद टोपी और गले में सुनहरी चुनरी धारण किए हुए थे। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर भगवान महावीर स्वामी एवं पूज्य आचार्य संघ की आरती कर भव्य अगवानी की गई।</p>
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