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	<title>Acharya Shri Indranandi Ji Maharaj Sangh &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Acharya Shri Indranandi Ji Maharaj Sangh &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आगरा में जैन संतों की धर्मसभा का भव्य आगाज: आर्यिका विकर्षमति माताजी ने दिया विचारों को शुद्ध रखने का संदेश </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 06:30:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में शुक्रवार को हरि पर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में शुक्रवार को हरि पर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में शुक्रवार को हरि पर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में शुक्रवार को हरि पर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। यह धर्मसभा आचार्य श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ और गणिनी शिरोमणि आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी एवं विज्ञमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित हुई। धर्मसभा का शुभारंभ आगरा दिगंबर जैन परिषद के पदाधिकारियों द्वारा भगवान महावीर स्वामी के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके बाद श्री शांतिनाथ महिला मंडल द्वारा सुमधुर मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विकर्षमति माताजी ने जीवन में विचारों की शुद्धि पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारा आचरण हमारे विचारों के अनुरूप ही तय होता है। विचार दो प्रकार के होते हैं—एक मिथ्या विचार और दूसरा शुद्ध विचार। माताजी ने दोनों विचारों के अंतर को समझाते हुए कहा कि जब हम किसी की बुराई करते हैं या किसी को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं, तो वह मिथ्या विचार है। किसी को नीचा दिखाकर भले ही कोई खुश हो ले, लेकिन वास्तव में वह अपने लिए पाप कर्मों का बंध कर रहा होता है। जब हमारे मन में प्राणिमात्र के प्रति दया का भाव जागृत होता है, तो वह सम्यक दृष्टि और शुद्ध विचार कहलाता है।</p>
<p><strong>चील की नजर नहीं, सम्यक दृष्टि अपनाएं</strong></p>
<p>आर्यिका श्री ने एक मर्मस्पर्शी उदाहरण देते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि जीव हमेशा जमीन से आसमान की तरफ (उच्च आदर्शों की ओर) देखता है। इसके विपरीत, मिथ्या दृष्टि जीव आसमान में उड़ने वाली उस चील की भांति होता है, जिसकी नजरें इतनी ऊंचाई पर होकर भी जमीन पर पड़े मांस के टुकड़े (दूसरों की कमियों और वासनाओं) पर टिकी रहती हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया कि यदि इस संसार में अपना भव (जन्म-मरण का चक्र) सुधारना है, तो अपने विचारों को हमेशा शुद्ध रखें और सभी जीवों पर दया भाव रखें।</p>
<p><strong>पुरुषार्थ करके संसार बढ़ा सकता है</strong></p>
<p>मुनि श्री उत्कर्ष नंदी महाराज जी ने अपनी अमृतवाणी से कहा कि समझेंगे तभी संसार से पार होने के रास्ते मिल सकते हैं। जिसने जान लिया कि दूध में घी है। जिसने जान लिया कि दूध में घी है, दूध में घी में दूध नहीं है, दूध में घी है। घी अलग है, छाछ अलग है। दोनों चीजें दूध में प्राप्त हो सकती हैं। जिसे जो चाहिए वो ले सकता है। अगर घी चाहिए तो छाछ को अलग कर दो और छाछ चाहिए तो घी को अलग कर दो। इसी प्रकार संसार में जो प्राणी हैं, वो पुरुषार्थ करके चाहे तो मोक्ष प्राप्त कर सकता है और चाहे तो पुरुषार्थ करके संसार बढ़ा सकता है।</p>
<p><strong>चार प्रकार के पुरुषार्थ बताए गए हैं</strong></p>
<p>धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष</p>
<p>धर्म पुरुषार्थ अगर करेगा जीव, और धर्म पूर्वक काम को, अर्थ को सेवन करेगा तो मोक्ष को प्राप्त कर सकता है, मोक्ष पद को प्राप्त कर सकता है। लेकिन संसार का प्राणी धर्म को भूल जाता है। अर्थ और काम पुरुषार्थ के पीछे लगा रहता है। पूरा जीवन पैसा कमाने में और विषयों को, भोगों को भोगने में पूरा कर देता है।</p>
<p><strong>धर्म पुरुषार्थ के द्वारा मोक्ष को प्राप्त कर सकता है</strong></p>
<p>धर्म को भूल जाता है और जब धर्म को भूल गया तो मोक्ष तो भूल ही जाएगा, प्राप्त होना ही नहीं है। ज्ञानी जीव की पहचान है, धर्म पूर्वक अर्थ कमाए, मर्यादा पूर्वक भोगों को भोगे, तो कोई दिक्कत नहीं। वो क्रमशः मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। धर्म पुरुषार्थ के द्वारा मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। अगर वो अर्थ में, काम में लगा रहा, तो वो इसी संसार में, चार गतियों में परिभ्रमण करता रहेगा।</p>
<p><strong>मोक्ष के लिए भेद-विज्ञान होना ज़रूरी है</strong></p>
<p>मोक्ष प्राप्त करने के लिए भेद-विज्ञान होना ज़रूरी है और आत्मा और शरीर को अलग करना इतना सहज, इतना आसान नहीं है। जब तक आदमी भेद-विज्ञान प्राप्त नहीं करेगा, तब तक आगे नहीं बढ़ पाता। मोक्ष मार्ग में भेद-विज्ञान सोचने से, पढ़ने से, सुनने से नहीं होता। इसके लिए प्रयत्न पूर्वक पुरुषार्थ करना पड़ता है। बहुत अधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता पड़ती है। धर्मसभा का संचालन महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार द्वारा किया गया l</p>
<p><strong> यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>धर्म सभा मे मुख्य रूप से पूर्व महामंत्री सुनील जैन ठेकेदार, परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, कोषाध्यक्ष राकेश जैन पर्दे वाले, उपमंत्री विमल जैन, अनंत जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, कुमार मंगलम जैन, मनीष जैन लवली, पंकज जैन, रवि जैन, सुरेन्द्र जैन, सुशील जैन आदित्य जैन, उषा जैन, बीना बैनाड़ा अनीता जैन सकल जैन समाज मौजूद था। 13 जून को प्रातः 8:15 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका की मंगल प्रवचन आचार्य शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत आगरा में होंगे।</p>
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		<title>जब हम बार-बार वीतरागता के दर्शन करेंगे तो पुण्य जाग्रत होगा : आचार्य श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ की धर्मसभा में हो रहा धर्म जागरण </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:15:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री शांतिनाथ सभागार एमडी. जैन, हरिपर्वत में आचार्य श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ की धर्म सभा का शुभारंभ आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारी ने दीप प्रज्वलन किया। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230; आगरा। दिगंबर जैन परिषद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री शांतिनाथ सभागार एमडी. जैन, हरिपर्वत में आचार्य श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ की धर्म सभा का शुभारंभ आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारी ने दीप प्रज्वलन किया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा</strong>। दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री शांतिनाथ सभागार एमडी. जैन, हरिपर्वत में आचार्य श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ की धर्म सभा का शुभारंभ आगरा दिगम्बर जैन परिषद के पदाधिकारी ने दीप प्रज्वलन करके किया। आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा में कहा कि एक बालक ने गुरुदेव से प्रश्न किया कि मंदिर जाने और उस पत्थर की मूर्ति के रोज दर्शन करने से क्या होगा? गुरुदेव ने बालक से कहा कि तुम पढ़ते हो। बालक ने कहा- हां मैं पढ़ता हूं। मैं साइंस का स्टूडेंट हूं तो गुरुदेव ने कहा- बताओ एक लोहे के टुकड़े को तुम चुंबक कैसे बनाओगे? उस बच्चे ने फटाक से उत्तर दिया कि अरे गुरुदेव इसमें कौन सी बड़ी बात है? मैं अपनी लैब में जाऊंगा। उस लोहे के टुकड़े को जाकर चुम्बक से बार-बार स्पर्श कराऊंगा। बार-बार स्पर्श कराऊंगा। बार-बार स्पर्श कराते-कराते वो लोहे का टुकड़ा भी चुम्बक बन जाएगा तो गुरुदेव बोले- बस बेटा, जब हम बार-बार वीतरागता के दर्शन करेंगे। बार-बार वीतराग प्रतिमा के सामने खड़े होकर के स्तुति करेंगे, पूजा पाठ करेंगे तो एक-एक दिन आपका आत्मा भी जो अनादि काल से कर्म किट्ट कालिमा से लथपथ हो रहा है, ये शुद्ध पद को प्राप्त हो जाएगा।</p>
<p>मित्रों, मंदिर आना बड़ी बात नहीं है, मंदिर से घर जाना बहुत बड़ी बात है। धर्म सभा का संचालन महामंत्री मनीष जैन द्वारा किया गया। धर्म सभा में मुख्य रूप से आगरा दिगम्बर जैन परिषद के महामंत्री मनीष कुमार जैन, उपमंत्री विमल जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, सुशील जैन, अविनाश जैन, चक्रेश जैन, सचिन जैन, पंकज जैन, उषा जैन, मार्सनस कांता जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन, सकल जैन समाज मौजूद था l 6 जून को प्रातः 8:15 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका की मंगल प्रवचन आचार्य शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत आगरा में होंगे l</p>
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		<title>श्रद्धा से पाषाण में भी परमात्मा नजर आते हैं - स्वस्तिभूषण माताजी : कल्पद्रुम महामंडल विधान में 800 अर्घ्य किए अर्पित </title>
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		<pubDate>Tue, 06 May 2025 07:47:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में कल्पद्रुम महामंडल विधान जारी है। समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्रीजी का प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में की गई। कल्पतरु महामंडल विधान के [&#8230;]]]></description>
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<p>बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में कल्पद्रुम महामंडल विधान जारी है। समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्रीजी का प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में की गई। कल्पतरु महामंडल विधान के 800 अर्घ्य श्रीफल सहित श्रीजी को समर्पित किए गए। केकड़ी से पढ़िए, <strong><span style="color: #ff0000">अभिषेक जैन लुहाड़िया और रमेश बंसल पारस की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी</strong>। जब भक्ति की लहर आत्मा में उमड़ती है तो सब कुछ भूल जाते हैं। बाह्य प्रक्रिया उसे बिल्कुल भी नजर नहीं आती है। श्रद्धा से पाषाण में भी परमात्मा नजर आते हैं। श्री कल्पतरु महामंडल विधान तीर्थंकर महावीर के अद्वितीय महिमा मंडल मंगल अर्घ्याें द्वारा पवित्र पूजा करने का एक मात्र उपाय है। बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में मय संगीत एवं साज बाज के साथ चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान के अंतर्गत विधान में चौबीस तीर्थकरों की स्तुति करने पर ऐसा लगता है की संपूर्ण जैन दर्शन की आत्मा का सुख अनुभव हो रहा है इस अवसर पर आर्यिका माताजी ने कहा कि एक-एक नाम के मंत्र का जाप करने से कर्मों के बंधन ढीले पड़ते हैं। प्रातः जिनाभिषेक एवं शांतिधारा एवं समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्री जी का अभिषेक मुनिश्री तथा आर्यिका ससंघ के सानिध्य में किए गए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि कल्पतरु महामंडल विधान के 800 अर्घ्य श्रीफल सहित श्री जी के समर्पित किए गए। समाज के अमरचंद चौरूका ने बताया कि मंगलवार को प्रातः आचार्य मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में कल्पतरु महामंडल विधान का समापन पूर्णाहुति एवं विश्व शांति कामना महायज्ञ होगा। शाम को आरती भक्ति आनंद यात्रा सहित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का संचालन कपिल भैया द्वारा किया गया।</p>
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