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	<title>Acharya Shri Dharmasagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>Acharya Shri Dharmasagar Ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सीकर में दूसरी बार होगा आचार्य श्री धर्मसागर जी की जन्मभूमि पर मंगल प्रवेश : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी संघ करेगा नगर भ्रमण, श्रावक-श्राविकाओं में उत्साह का माहौल  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:58:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर सीकर। अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। <span style="color: #ff0000">सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सीकर।</strong> अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से सन 1969 में दीक्षित 57 वर्ष के संयमी जीवन में 37 वर्षों से आचार्य पद पर प्रतिष्ठित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का सीकर में आचार्य बनने के बाद पहली बार भव्य मंगल प्रवेश होगाा। इससे पूर्व वे सन 1986-87 में मुनि अवस्था में सीकर पधारे थे।</p>
<p><strong>आत्मा में विचारों और कार्यों से कर्म का बंध होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री धर्मसागर जी कल्पवृक्ष के समान थे। जैसे भोगभूमि में कल्पवृक्ष से मनचाही वस्तु मिल जाती थी, वैसे ही उनसे हमें धर्म और ज्ञान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि आत्मा में विचारों और कार्यों से कर्म का बंध होता है जिससे भावानुसार पुण्य या पाप अर्जित होता है। वर्तमान में 24 तीर्थंकरों ने धर्म का प्रवर्तन किया है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री धर्मसागर जी चर्या के प्रति अत्यंत सजग थे</strong></p>
<p>डॉ. राजेश पंचोलिया और विवेक पाटोदी के अनुसार आचार्य श्री ने गुणानुवाद करते हुए बताया कि आचार्य श्री धर्मसागर जी चर्या के प्रति अत्यंत सजग थे। बीमारी और कमजोरी के बावजूद वे प्रतिमाह देवपुरा विहार कर रात्रि विश्राम वहीं करते और अगले दिन आहार लेकर पुनः विहार करते थे। उन्होंने ऐसा तीन माह तक किया। उसी पुण्य के कारण सीकर की पहली धर्मसभा देवपुरा में हुई। वर्ष 1972 में लाडनूं का वर्षायोग पूर्ण कर 1973 का वर्षायोग आचार्य श्री धर्मसागर जी ने सीकर में किया और यहीं से वे महावीर स्वामी महोत्सव के लिए दिल्ली गए थे।</p>
<p><strong>प्रातः नींद खुलते ही पंच परमेष्ठी का ध्यान करें और मंदिर में पूजन </strong></p>
<p>मुनि श्री हितेन्द्रसागर जी ने कहा कि जिन दर्शन और भगवान के नाम स्मरण से सुख प्राप्त होता है और कष्ट दूर होते हैं। सभी को प्रातः नींद खुलते ही पंच परमेष्ठी का ध्यान कर मंदिर जाकर दर्शन, अभिषेक और पूजन करना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2020 के कोरोना काल का उदाहरण देते हुए बताया कि संघ के साधु-श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति से 20 दिन में रोगमुक्ति पाई। उस समय सीकर के युवा आशीष जयपुरिया ने बेलगांव जाकर प्राणों की बाजी लगाकर संघ सेवा की जो प्रशंसनीय है।</p>
<p><strong>37 पिच्छी के साथ आचार्यश्री का होगा मंगल प्रवेश और 58वां चातुर्मास</strong></p>
<p>नगर के इतिहास में पहली बार आचार्य श्री का यह मंगल प्रवेश 10 मुनिराज, 20 आर्यिका माताजी, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक और 1 क्षुल्लिका सहित 37 पिच्छी के साथ होगा। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के महेश बाकलीवाल, संतोष विनायगा, अजीत जयपुरिया, अभिनव सेठी और आशीष जयपुरिया के अनुसार संघ दिगंबर जैन चन्द्रप्रभ जिनालय से प्रस्थान कर संघ चैत्यालय, नगर के विभिन्न जिनालयों के दर्शन करता हुआ सिल्वर जुबली रोड, स्टेशन रोड, अहिंसा सर्किल, जाट बाजार, कोतवाली रोड, बावड़ी गेट और बजाज रोड होते हुए पारस भवन दंग की नसिया पहुंचेगा, जहां आचार्य श्री का 58वां चातुर्मास होगा।</p>
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		<title>आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस मनाया : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दीक्षा गुरु को स्मरण कर उनका गुणानुवाद किया  </title>
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		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 13:03:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस गुरु भक्तों ने मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री धर्मसागर विधान का पूजन किया गया। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया इंदौर की यह खबर&#8230; निवाई। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस गुरु भक्तों ने मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री धर्मसागर विधान का पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया इंदौर की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस गुरु भक्तों ने मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री धर्मसागर विधान का पूजन किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दीक्षा गुरु को स्मरण कर उनका गुणानुवाद कर बताया कि आज ऐसे भव्य पुण्यात्मा को स्मरण करने का दिन है। जिनके जन्म दिवस और समाधि दिवस पर तीर्थंकर भगवान का कल्याणक दिवस था और जो श्रमण परंपरा के गौरव प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की मूल परंपरा में तृतीय पट्टाधीश बने। गंभीरा में सन 1914 में श्री धर्मनाथ भगवान के केवल ज्ञान कल्याणक दिवस पर जन्मे चिरंजीलाल जी का प्राथमिक जीवन संघर्ष तथा निर्माेहता के साथ बीता। मात्र 15 वर्ष की उम्र में शुद्ध जल के नियम 30 वर्ष की उम्र में क्षुल्लक तथा 38 वर्ष की उम्र में मुनि दीक्षा ली।</p>
<p><strong>साधु जीवन के 43 वर्षाें में 76 दीक्षा दीं</strong></p>
<p>संयोग देखिए कि श्री धर्मनाथ भगवान के कल्याणक पर जन्मे आपकी मुनि दीक्षा बाद नाम भी भगवान के नाम पर ही मुनि श्री धर्मसागर जी किया गया। सन 1969 में आप द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिवसागर जी की समाधि के बाद तृतीय पट्टाधीश बनाए गए। साधु जीवन के 43 वर्षाें में आपने 76 दीक्षा दीं। जिसमे आचार्य पदारोहण पर 11 भव्य प्राणियों को दीक्षा दी। जिसमें हमें भी मुनि दीक्षा देकर हम पर उपकार किया। यह मंगल देशना आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने श्री धर्म सागर विधान के पूजन पर प्रगट की।</p>
<p><strong>113 वां वर्ष वर्धन अवतरण दिवस </strong></p>
<p>पवन बोहरा के अनुसार वर्तमान में आचार्य श्री वर्धमान सागर, आर्यिका श्री शुभमति माताजी सहित 6 शिष्य एवं शिष्या धर्म प्रभावना कर रहे हैं। आज आपका 113 वां वर्ष वर्धन अवतरण दिवस है। सन 1987 में आपकी समाधि श्री मुनिसुव्रत नाथ भगवान के केवल ज्ञान कल्याणक के दिन सीकर में हुई थी।</p>
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		<title>सूरी मंत्रोच्चार से प्रतिमाएं पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित कर पूजनीय होती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान के बारे में बताया  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 16:34:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> भगवान के अभिषेक के बिना पूजन अधूरी होती है। आगम में पुरुष और महिला दोनों को अभिषेक का अधिकार है। श्रावकाचार ग्रंथ पुरुष और महिला दोनों के लिए एक जैसा है। आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि धर्म से नाता, अवलंबन से मनुष्य जीवन में उन्नति होती है। श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान आदि श्रावकों के मुख्य कर्तव्यों में है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में आगे बताया कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ टोंक नगर में चातुर्मास किया था। बाद में पंचकल्याणक हुआ था। इसकी सुखद पुनरावृत्ति सन 2025 में हो रही है। पहले यहां वर्षायोग किया इसके बाद नवंबर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होगी।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं </strong></p>
<p>जैन समाज द्वारा जिन मंदिर में नूतन प्रतिमा स्थापित करने के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य भगवान के सानिध्य में सूरी मंत्रोच्चार के माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा कराई जाती है। इन धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण मनोभाव से करने और देखने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। इन पांच दिवसीय कार्यक्रम में भगवान के जन्म, गर्भकल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक की धार्मिक क्रियाएं होती है। जिसमें ज्ञान और मोक्ष कल्याणक पर भगवान को सूरी मंत्र द्वारा प्रतिष्ठित किया जाता है। णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं साधु, उपाध्याय, आचार्य, अरिहंत और सिद्ध भगवान जो वैराग्य धारण कर तप संयम से कर्मों की क्षय निर्जरा करते हुए सिद्धालय पर विराजित होते हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92413" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg" alt="" width="1200" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg 1200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-990x1320.jpg 990w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन </strong></p>
<p>सुनील सराफ, पवन कंटान के अनुसार अनुसार आदिनाथ जिनालय से श्री शांतिनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगह-जगह समाजजनों ने आचार्य श्री की आरती कर चरण प्रक्षालन किए। विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल रस, विभिन्न फलों के रस, शर्करा, धी, दूध, दही, सर्व औषधि; केशर लाल चंदन सफेद चंदन पुष्प हल्दी,सुगंधित जल आदि से किया। श्रीजी की शांतिधारा हुई। आचार्य श्री संघ सानिध्य में होने वाले पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन समाज के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री सानिध्य में किया। सोमवार को आर्यिका श्री महायश मति जी के केश लोचन हुए।</p>
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