<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Acharya Shri Deshbhushan ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/acharya-shri-deshbhushan-ji/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Mon, 10 Jul 2023 17:27:34 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>Acharya Shri Deshbhushan ji &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>जैनधर्म के 5 तीर्थंकरों की ही जन्मभूमि : इस धरती के प्रथम शाश्वत तीर्थ अयोध्या का हो रहा है महत्वपूर्ण विकास </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/important_development_is_happening_in_ayodhya_the_first_eternal_pilgrimage_of_this_earth/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/important_development_is_happening_in_ayodhya_the_first_eternal_pilgrimage_of_this_earth/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Jul 2023 17:27:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Deshbhushan ji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shri Gyanmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Ayodhya]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[development]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[first eternal pilgrimage]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mangal Kalash Sthapana]]></category>
		<category><![CDATA[panchkalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Varsha Yoga]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री देशभूषण जी]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथम शाश्वत तीर्थ]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल कलश स्थापना]]></category>
		<category><![CDATA[वर्षायोग]]></category>
		<category><![CDATA[विकास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=48206</guid>

					<description><![CDATA[जैन संस्कृति की आन-बान-शान और हमारी पहचान, सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ, शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या का विकास सर्वोच्च जैन साध्वी दिव्यशक्ति भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से चल रहा है, जिसमें समस्त दिगम्बर जैन समाज को तन-मन-धन से सहयोग देकर पुण्य अर्जित का आह्वान निवेदित है। इसके विशेष आलेख के लेखक है डॉ. जीवन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>जैन संस्कृति की आन-बान-शान और हमारी पहचान, सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ, शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या का विकास सर्वोच्च जैन साध्वी दिव्यशक्ति भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से चल रहा है, जिसमें समस्त दिगम्बर जैन समाज को तन-मन-धन से सहयोग देकर पुण्य अर्जित का आह्वान निवेदित है। इसके विशेष आलेख के लेखक है डॉ. जीवन प्रकाश जैन, मंत्री और <span style="color: #ff0000;">प्रस्तुति है मनोज नायक(मुरैना) की&#8230;</span></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> पूरे विश्व भर में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी परमपूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी को साक्षात् सरस्वती स्वरूपा कहें या पवित्रतम चरणद्वय से सहित सिद्धहस्त साधिका कहें, उनकी इस शक्ति के साक्षात् परिणाम इस देश ने अनेक बार प्रत्यक्ष रूप से देखे, समझे और आभास किए हैं। पूज्य माताजी की शक्ति को चाहे जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ में देखें या ऋषभगिरि-मांगीतुुंगी तीर्थ के विशाल पर्वत पर अखण्ड पाषाण में विश्व की सबसे ऊंची 108 फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव प्रतिमा में देखें या फिर उनके द्वारा रचित 500 से अधिक ग्रंथों के विशाल साहित्य समूह में देखें, हर व्यक्ति इन कार्यों से अचम्भित होकर स्तब्ध, आश्चर्य और प्रगाढ़ आस्था के आलोक में डूब जाता है।</p>
<p><strong>असंभव कार्य किया</strong></p>
<p>आज 89 वर्षीय अपने योग्य जीवन को 70 वर्षीय साधना से चमत्कार स्वरूप बनाने वाली पूज्य माताजी के ऐसे शक्ति-आभास इस समाज ने समय-समय पर अनेक बार देखे हैं, जब अनूठे, विरले और असंभव जैसे कार्य भी इस धरती पर संभव होते नजर आए हैं। ठीक इसी क्रम में पुन: इस 89 वर्षीय पायदान पर पूरे समाज ने फिर एक बार ऐसा आश्चर्य, चमत्कार और वरदान तब देखा, जब 31 दिसम्बर 2022 को अयोध्या जैन तीर्थ की पावन धरती पर पूज्य माताजी के पवित्र चरणयुगल पड़ते ही यह धरती जाग उठी। परिणामस्वरूप मात्र एक अत्यन्त अल्प अंतराल में ही भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन तीर्थ-बड़ी मूर्ति परिसर में देखते ही देखते ऐसा विकासीय बदलाव आता गया और अप्रैल 30 से मई 7, 2023 की तारीख में यहां ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव से अयोध्या को देश ही नहीं पूरी दुनिया में विशाल जैन तीर्थ का स्वर्णिम सोपान प्राप्त हुआ। पूरे विश्व जैन समाज की दृष्टि इस चमत्कार पर और इस तीर्थ के महत्त्व पर लगातार बनी रही और अब भी निरंतर ही यह तीर्थ अपने नये विकास को लेकर चरम की ओर बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>साबित हुआ मील का पत्थर</strong></p>
<p>इस धरा पर कभी-कभी कोई विरले ही ऐसी घड़ियां पुण्योदय में आ जाती हैं कि जो भविष्य के लिए आज मील का पत्थर बन जाती हैं। एक लम्बा समय इन आशाओं से बंधा हुआ था कि क्या कभी अयोध्या का ऐतिहासिक विकास इस जैन समाज को प्राप्त हो पाएगा? लेकिन कभी इन आशाओं पर निराशा का अंकुश नहीं लग पाया और सतत ही ये आशाएं सबल होते हुए सन् 2023 में इतनी प्रबल हो गईं कि आज इस जैन संस्कृति को भगवान ऋषभदेव, भगवान अजितनाथ, भगवान अभिनंदननाथ, भगवान सुमतिनाथ एवं भगवान अनंतनाथ, वर्तमान के इन पांचों तीर्थंकरों की जन्मभूमि अयोध्या जैसा महातीर्थ पुन: एक ऐसे जागृत स्वरूप में प्राप्त हो गया कि अब हम भी गर्व के साथ इस बात का आगाज कर सकते हैं कि अयोध्या हमारे जैनधर्म के 5 तीर्थंकरों की ही जन्मभूमि नहीं अपितु यह शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि के रूप में अनादिकाल से पूज्य और मान्य रही है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-48210" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060.jpg" alt="" width="683" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060-128x300.jpg 128w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060-437x1024.jpg 437w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060-656x1536.jpg 656w" sizes="(max-width: 683px) 100vw, 683px" /></p>
<p><strong>गौरवशाली स्वरूप लौटा</strong></p>
<p>ऐसा भी नहीं कि अयोध्या में हमारा अस्तित्व नहीं था लेकिन जो अस्तित्व था, वो इतने गौरवशाली स्वरूप में नहीं था, जिसको लेकर हम अपने अनादिनिधन जैनधर्म की गरिमा को जन-जन के सामने प्रस्तुत कर सकें। यह विकास की दृष्टि आज नहीं अपितु सर्वप्रथम सन् 1965 में आचार्यरत्न श्री देशभूषण जी महाराज के उन दिव्य नयनों में प्राप्त हुई, जिनसे उन्होंने इस अयोध्या के लिए नई आशाओं और विकास का स्वप्न देखकर 31 फुट उत्तुंंग भगवान ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा विराजमान करवाई और सुंदर जिनमंदिर का भी निर्माण हुआ। इससे पूर्व आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज की ही कृपा प्रसाद से कटरा मोहल्ले के भगवान सुमतिनाथ जिनमंदिर में भगवान आदिनाथ-भरत-बाहुबली की सुन्दर और विशाल जिनप्रतिमाओं का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भी आचार्य श्री के ही सान्निध्य में सन् 1952 में सम्पन्न हुआ था।</p>
<p><strong>अयोध्या का विकास नए अंदाज में</strong></p>
<p>अत: आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज ने सतत अपनी दृष्टि अयोध्या की तरफ रखी और उसके बाद उन्हीं के करकमलों से क्षुल्लिका दीक्षा प्राप्त उनकी शिष्यारत्न वर्तमान की गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी ने सन् 1994-1995 से इस अयोध्या की जीर्ण-शीर्ण स्थिति को अपनी दृष्टि में प्रमुख लक्ष्य पर लिया और सतत चरैवेती-चरैवेती के सिद्धान्त पर चलते हुए उन्होंने धीरे-धीरे इस अयोध्या के विकास को एक नया अंदाज प्रदान किया। सर्वप्रथम बड़ी मूर्ति जिनमंदिर परिसर में त्रिकाल चौबीसी जिनमंदिर, समवसरण जिनमंदिर आदि के निर्माण, तीर्थ पर धर्मशाला, भोजनशाला आदि समुचित व्यवस्थाओं का प्रबंध आदि के साथ क्रमश: पांचों भगवन्तों की टोकों पर सुंदर-सुंदर जिनमंदिरों के निर्माण भी सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>वर्तमान में हो रहा विकास कार्य </strong></p>
<p>पुन: अब इस जैन संस्कृति के आद्य केन्द्र को नई ऊंचाईयां प्रदान करने के लिए पूज्य माताजी ने सन् 2019 में अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी व समाज को बड़ी मूर्ति परिसर विस्तृत रूप से सजाने-संवारने की प्रेरणा प्रदान की, जिसके फलस्वरूप आज हम सबके मध्य 31 फुट उत्तुंग भगवान भरत प्रतिमा से समन्वित विशाल जिनमंदिर, भगवान ऋषभदेव के मोक्ष प्राप्त 101 पुत्रों का विश्वशांति जिनमंदिर, रत्नमयी प्रतिमाओं वाला तीस चौबीसी जिनमंदिर, तीनलोक रचना एवं सर्वतोभद्र महल जैसी सुन्दर-सुन्दर कृतियां विकासशील नजर आ रही हैं। इतना ही नहीं नवम्बर 2019 में पूज्य माताजी द्वारा साक्षात् सान्निध्य देकर भगवान भरत जिनमंदिर और विश्वशांति जिनमंदिर का शिलापूजन भी सम्पन्न कराया गया और पुन: इस तीर्थ के विकास की ललक लेकर 89 वर्ष की आयु में हस्तिनापुर से 31 दिसम्बर 2022 को पूज्य माताजी का आगमन अयोध्या में हुआ और 30 अप्रैल से 7 मई 2023 तक यहां भव्य तीस चौबीसी तीर्थंकर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव सम्पन्न होकर यह जैन संस्कृति का शाश्वत तीर्थ अयोध्या नये प्रकाश को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>सहयोग करें</strong></p>
<p>इसी नये प्रकाश का विस्तृत वर्णन करने के लिए पाठकों के समक्ष यह आलेख प्रस्तुत किया गया है। साथ ही सभी बंधुओं से यह भी निवेदन है कि इस तीर्थ के विकास में तन-मन-धन के साथ अपना सहयोग प्रदान करें। क्योंकि जैनधर्म में दो ही शाश्वत तीर्थ हैं जिनमें प्रथम शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या है एवं द्वितीय शाश्वत तीर्थंकर निर्वाणभूमि सम्मेदशिखर जी कहलाती है। अत: दिगम्बर जैन समाज के समस्त बंधुजन अब इस शाश्वत तीर्थ अयोध्या के महत्वपूर्ण विकास में अपना योगदान अवश्य प्रदान करें। इसके लिए कार्यालय में 9520554138, 9520554164, 9520554171, 9520554172 पर संपर्क किया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/important_development_is_happening_in_ayodhya_the_first_eternal_pilgrimage_of_this_earth/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
