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	<title>512 अर्घ्य समर्पित &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>512 अर्घ्य समर्पित &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्रीजी के समक्ष मंडल पर 512 अर्घ्य समर्पित किए: शालीमार एन्क्लेव जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में भक्तिपूर्ण उल्लास छाया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:28:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित हो रहा है। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित हो रहा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> कमला नगर स्थित शालीमार एन्क्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित हो रहा है। उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्व साम्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य तथा पुण्यशाली पारस जैन कंसल एवं मधु जैन कंसल परिवार के सौजन्य से इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिल रही है। विधान के पांचवें दिन शुक्रवार प्रातः भगवान आदिनाथ के पावन अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।</p>
<p><strong>मंत्रोच्चार और भक्ति की मधुर ध्वनि गूंजती रही</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया के कुशल निर्देशन में विधान के पात्रों द्वारा अष्ट द्रव्यों से विधिपूर्वक पूजन किया गया तथा श्रीजी के समक्ष मंडल पर 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार और भक्ति की मधुर ध्वनि गूंजती रही। सायंकाल संगीतमय वातावरण में श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ की भव्य मंगल आरती कर धर्म लाभ प्राप्त किया। दिनभर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी।</p>
<p><strong>यह श्रद्धालुगण उपस्थित रहे</strong></p>
<p>इस अवसर पर पारस जैन कंसल, संभव जैन कंसल, राजकुमार ‘गुड्डू’ राजू गोधा, संजू गोधा, गौरव जैन, रूपचंद जैन, मुकेश जैन रपरिया, शैलेंद्र जैन, विनीत जैन, अभिषेक जैन अजीत जैन, मधु जैन कंसल, अनामिका जैन, अनुभूति जैन, कीर्ति जैन, संगीता जैन, वैशाली जैन, शशि जैन, मिथलेश जैन सहित कमला नगर जैन समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>धर्म की आराधना से जीवन पवित्र हो जाता है : मुनिश्री विलोकसागरजी ने सिद्धचक्र विधान में धर्म के प्रभाव पर प्रकाश डाला </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 May 2025 12:58:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म की आराधना करने से सब कुछ शीतल हो जाता है। मुनिश्री ने कहा कि शास्त्रों और पुराणों में अनेकों घटनाओं से साबित होता है कि धर्म [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म की आराधना करने से सब कुछ शीतल हो जाता है। मुनिश्री ने कहा कि शास्त्रों और पुराणों में अनेकों घटनाओं से साबित होता है कि धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> सांसारिक प्राणी धर्म को यहां-वहां ढूंढता फिरता है। वह धर्म को मंदिरों में, पहाड़ों में तलाशता है लेकिन, धर्म कहां है, धर्म तो प्राणी मात्र के अंदर है। प्रत्येक प्राणी के हृदय में धर्म विराजमान हैं। धर्म कोई बाजारू वस्तु नहीं हैं, जिसे बाजार से खरीदा जा सके। धर्म तो अनुभव करने की चीज है। यह उद्गार मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धर्म के प्रभाव से जहर भी अमृत बन जाता है। तलवार की धार भी अपनी प्रकृति बदल लेती है, सर्प भी हार का रूप ले लेता है। धर्म की आराधना करने से सब कुछ शीतल हो जाता है। मुनिश्री ने कहा कि शास्त्रों और पुराणों में अनेकों घटनाओं से साबित होता है कि धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।</p>
<p>संसार में रहते हुए भी हम धर्म के बल पर सात्विक जीवन जी सकते हैं। धर्म हमें शक्ति देता है, प्रेरणा देता है, हमें दुखों से छुटकारा दिलाता है। धर्म क्या है, धर्म से क्या मिलता है। धर्म प्राणी मात्र को जीवन जीने की कला सिखाता है। नफरत में वात्सल्य के बीज अंकुरित करता है, आने वाले संकटों से निपटने की शक्ति देता है। धर्म से इंद्रिय सुख भले ही न मिले लेकिन, अतेंद्रीय सुख की प्राप्ति होती है। धर्म सांसारिक प्राणी के दुखों का नाश करता है, धर्म प्राणी मात्र को दुखों से निकालकर सुख की अनुभूति कराता है। जब अपने-अपनों से दूर हो जाएं, प्राणी संकटों ओर विषम परिस्थितियों में घिर जाए, आपका कोई सहारा न हो तब धर्म ही हमें सही रास्ता दिखाता है।</p>
<p><strong>जीने के लिए वायु की तरह धर्म भी आवश्यक है</strong></p>
<p>हमें धर्म की आराधना करते समय अपने इष्ट से यही प्रार्थना करना चाहिए कि हमारी आस्थाएं मजबूत हों। हम पर कैसा भी संकट आ जाए, कैसी भी विपत्ति आ जाए, हम अपने धर्म से दूर न हो जाएं, हे! भगवन हमें ऐसी शक्ति देना। धर्म की आराधना करने से जीवन पावन व पवित्र हो जाता है। जब सभी रास्ते बंद हो जाते है तब केवल धर्म का सहारा ही रह जाता है। भगवान राम ने जब सीताजी का त्याग किया था तब सीताजी ने धर्म का ही सहारा लिया था। जीवन रूपी नैया को पार करने के लिए धर्म परम आवश्यक है। यदि हम 24 घंटों में से कुछ समय धर्म को देंगे तो धर्म भी हमारी रक्षा करेगा। जिस तरह हमें जीवन जीने की लिए वायु की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार संस्कारित जीवन जीने के लिए धर्म भी अतिआवश्यक होता है।</p>
<p><strong>22 मई को होगी ज्ञान परीक्षा, सभी को मिलेगें पुरस्कार</strong></p>
<p>युगल मुनिराजों के पावन सानिध्य में 22 मई को आम लोगों के ज्ञान की परीक्षा ली जाएगी। मुनिश्री ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के व्यक्तित्व और कृतित्व से संबंधित 150 प्रश्नों का एक प्रश्न पत्र सभी को वितरित किया जाएगा। आप सभी उस प्रश्नपत्र को घर ले जाकर परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। इस ज्ञान परीक्षा में किसी भी उम्र का, कोई भी जैन अथवा अजैन व्यक्ति सम्मिलित हो सकता है। 22 मई को बड़े जैन मंदिर के प्रांगण में उसी प्रश्नपत्र के माध्यम से आपकी एक घंटे की परीक्षा होगी। ज्ञान परीक्षा में प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस ज्ञान परीक्षा को कराने का उद्देश्य आम लोगों को भगवान महावीर स्वामी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचित कराना है।</p>
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