<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>32 अर्घ्य समर्पित &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/32-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%98%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%A4/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 05 Jul 2025 11:57:12 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>32 अर्घ्य समर्पित &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>श्री सिद्धचक्र विधान में रविवार को 64 अर्घ्य से होगा पूजन: सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में धर्मलाभ ले रहे गुरु भक्त </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/in_shri_siddhachakra_vidhan_worship_will_be_done_with_64_arghyas_on_sunday/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/in_shri_siddhachakra_vidhan_worship_will_be_done_with_64_arghyas_on_sunday/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 11:57:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[32 Arghya dedicated]]></category>
		<category><![CDATA[32 अर्घ्य समर्पित]]></category>
		<category><![CDATA[Big Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Eight day worship of Siddhas]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Viloksagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Siddhachakra Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[बड़े जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री]]></category>
		<category><![CDATA[श्री सिद्धचक्र विधान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84416</guid>

					<description><![CDATA[बड़े जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ सरलता के साथ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए तीसरे दिन 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रविवार को चौथे दिन 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़े जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ सरलता के साथ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए तीसरे दिन 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रविवार को चौथे दिन 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। इस अवसर पर मुनिश्री विलोकसागर जी का उद्बोधन हुआ।<span style="color: #ff0000"> मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> हम अपने इष्ट को पूजते तो हैं, उनकी भक्ति तो करते हैं, उनकी जय जयकार तो बोलते हैं लेकिन, उनको हृदय से स्वीकार नहीं करते, उनके बताए हुए सिद्धांतों का पालन नहीं करते, उनके बताए गए मार्ग पर नहीं चलते। इसी प्रकार आप साधु को तो पूजते हैं लेकिन, साधु के बताए हुए मार्ग को स्वीकार नहीं करते। यह उद्गार जैन संत मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र विधान के तीसरे दिन बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जैन साधु भगवान महावीर की उपासना करते हुए उन्हें जीने का प्रयास करते हैं, उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हैं, उनके सिद्धांतों का पूर्णतः पालन करते हैं। जैन साधु आहार भी लेते हैं तो इसलिए लेते हैं ताकि उनकी साधना चलती रहे। यदि उनका आहार भी साधना में बाधक बनता है तो वे आहार का भी त्याग कर देते हैं। जैन साधु केवल उसी व्यक्ति के हाथ से या उसी व्यक्ति के घर आहार लेते हैं जो भगवान महावीर के सिद्धांतों का पालन करता है। जिसके मन और विचारों में अहिंसा है, जो पाप कर्मों से दूर रहता है, सप्त व्यसनों का उपयोग नहीं करता है।</p>
<p><strong>अपने बच्चों को संस्कारित करना होगा</strong><br />
मुनिश्री का कहना है कि जो व्यक्ति या परिवार श्रद्धा पूर्वक शुद्ध भोजन तैयार करता है, जिसकी भावनाएं पवित्र हैं, जिसके मन में यह भाव होता है कि साधु के आहार से मेरा कल्याण होगा और साधु की साधना में सहायक होगा। ऐसे ही परिवारों में साधु आहार लेता है। साधु के मन में भी यह भाव होता है कि चरित्रवान व्यक्ति के यहां आहार होगा तो हमारी साधना भी बाधित नहीं होगी। कदाचित भूलवश व्यसनी व्यक्ति के यहां अथवा पाप प्रवृति के व्यक्ति के यहां आहार होता है तो साधु अन्तराय कर देते हैं, उपवास कर लेते हैं। इस श्रमण परम्परा को जीवंत बनाए रखने के लिए अपने बच्चों को संस्कारित करना होगा। हमारी संस्कृति तभी जीवित रह सकती है, तब हमारी आने वाली पीढ़ी संस्कारवान होगी।</p>
<p><strong>रविवार को 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे</strong><br />
बड़े जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ सरलता के साथ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए तीसरे दिन 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रविवार को चौथे दिन 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। विधान पूजन से पूर्व भगवान पार्श्वनाथ का जलाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन मंत्री विनोद जैन, नेमीचंद जैन बर्तन वाले, प्रकाशचंद दही, निर्मल जैन भंडारी, दर्शनलाल लोहिया, मनोज जैन नायक ने किया। मंचासीन मुनिराजों का पाद प्रक्षालन सौधर्म इंद्र पवनकुमार सिद्धार्थ जैन एवं शास्त्र भेंट श्रावक श्रेष्ठियों ने किया।</p>
<p><strong>विधान कराने से कोढ़ हुआ था ठीक </strong><br />
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान सर्व प्रथम मैना सुंदरी ने किया था। मैना सुंदरी के पति श्रीपाल को कोढ़ की बीमारी थी। एक जैन मुनिराज ने मैना सुंदरी को बताया कि यदि तुम अपने पति का कोढ़ ठीक करना चाहती हो तो भक्ति एवं श्रद्धा के साथ श्री सिद्धचक्र विधान करो। मुनिराज ने बताया कि मैना सुंदरी ने विधान किया। विधान के दौरान श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक कोढ़ पर लगाया गया। उससे उसके पति का कोढ़ ठीक हो गया। तभी से श्री सिद्धचक्र विधान का महत्व बढ़ गया और सभी लोग इस विधान को करने के लिए लालायित रहते हैं।</p>
<p><strong>प्रतिदिन शाम को होती है महाआरती</strong><br />
शुक्रवार शाम की महाआरती नरेंद्रकुमार कुलभूषण जैन सदर बाजार के निज निवास से गाजे-बाजे के साथ घोड़ा बग्गी में बड़े जैन मंदिर पहुंची। शनिवार की महाआरती सौधर्म इंद्र पवनकुमार सिद्धार्थ जैन के निज निवास से बड़े जैन मंदिर पहुंची। महाआरती में अत्यंत भक्ति भाव से मंगलगीत एवं जय जय कार करते हुए साधर्मी बंधु अपनी खुशी को व्यक्त कर रहे थे। बड़े जैन मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ, श्री पंच परमेष्ठी की आरती की गई। तत्पश्चात जैन भजनों पर गुरु भक्ति करते हुए सभी ने नृत्य किया। रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/in_shri_siddhachakra_vidhan_worship_will_be_done_with_64_arghyas_on_sunday/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
