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	<title>24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान महावीर का गर्भ कल्याणक महोत्सव 1 जुलाई को: तिथि के अनुसार आषाढ़ शुक्ज षष्ठी को मनाया जाएगा </title>
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		<pubDate>Tue, 01 Jul 2025 03:00:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक एक जुलाई को मनाया जाएगा। जिनालयों में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक होंगे। सुख समृद्धि एवं शांति की कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाए तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक एक जुलाई को मनाया जाएगा। जिनालयों में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक होंगे। सुख समृद्धि एवं शांति की कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाए तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज के पाठकों के लिए यह विशेष जानकारी उपसंपादक प्रीतम लखवाल द्वारा यहां साझा की जा रही है।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्मावलंबियों द्वारा 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक किया जाएगा। सभी सुख समृद्धि एवं शांति की मंगलमयी कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाएगा। भगवान महावीर के गर्भ कल्याणक दिवस इस बार एक जुलाई को आ रहा है। तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों में वर्णित जानकारी के अनुसार भगवान महावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही अद्भुत रत्न वर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोेचते-सोचते वे गहरी नींद में सो गईं।</p>
<p>उसी रात को अंतिम प्रहर में महारानी ने सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे। वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी का दिन था। रानी त्रिशला ने गर्भ स्थिति में यह मंगलकारी शुभ स्वप्न देखे थे। सुबह जागने पर रानी के महाराज सिद्धार्थ से अपने स्वप्नों की चर्चा की और उसका फल जानने की इच्छा प्रकट की। राजा सिद्धार्थ कुशल राजनीतिश्र के साथ्ज्ञ ज्योतिष शास्त्र के भी विद्वान थे। उन्होंने रानी से कहा कि एक-एक कर अपना स्वप्न बताएं। वे उसी प्रकार उसका फल बताते चलेंगे। तब महारानी त्रिशला ने अपने सारे स्वप्न् उन्हें एक-एक कर विस्तार से सुनाए।</p>
<p><strong>आइए जानते हैं महारानी ने कौन से 16 स्वप्न देखे</strong></p>
<p>रानी ने पहले स्वप्न के बारे में बताया कि एक अति विशाल श्वेत हाथी दिखाई दिया। राजा सिद्धार्थ ने इसका फल बताते हुए कहा कि उनके घर एक अद्भुत पुत्र-रत्न उत्पन्न होगा। रानी ने दूसरे स्वप्न के बारे में बताया कि श्वेत वृषभ दिखाई दिया। राजा ने बताया कि वह पुत्र जगत का कल्याण करने वाला होगा। तीसरे स्वप्न के बारे में जब रानी ने बताया कि श्वेत वर्ण और लाल अयालों वाला सिंह दिखा तो राजा ने इसका फल बताया कि वह पुत्र सिंह के सामन बलशाली होगा। चौथे स्वप्न में रानी ने देखा कि कमलासन लक्ष्मी का अभिषेक करते हुए दो हाथी भी दिखे। इसका फल बताया गया कि देवलोक से देवगण आकर उस पुत्र का अभिषेक करेंगे। पांचवे स्वप्न में रानी ने दो सुगंधित पुष्पमालाएं देखीं। राजा ने उनको बताया कि वह पुत्र धर्म तीर्थ स्थापित करेगा और जन-जन द्वारा पूजित होगा। छठे स्वप्न में पूर्ण चंद्रमा नजर आया तो उसके फल के बारे में बताया गया कि उसके जन्म से तीनों लोक आनंदित होंगे।</p>
<p>सातवें स्वप्न में उदय होता सूर्य नजर आया तो उन्हें बताया गया कि वह पुत्र सूर्य के समान तेजयुक्त और पापी प्राणियों का उद्धार करने वाला होगा। आठवें स्वप्न में कमल पत्रों से ढंके दो स्वर्ण कलश थे तो इस बारे में राजा ने बताया कि वह पुत्र अनेक निधियों का स्वामी निधिपति होगा। नौवें स्वप्न में कमल सरोवर में क्रीड़ा करती दो मछलियां दिखी। इसके बारे में यह फल बताया कि वह पुत्र महा आनंद दाता और दुःख हर्ता होगा। 10वें स्वप्न में रानी ने कमलों से भरा जलाशय देखा तो राजा ने उन्हें बताया कि 1008 शुभ लक्षणों से युक्त पुत्र प्राप्त होगा। 11वंे स्वप्न का जिक्र करते हुए रानी ने कहा कि लहरें उछालता समुद्र दिखा। राजा ने उन्हें बताया कि भूत-भविष्य और वर्तमान का ज्ञाता केवली पुत्र होगा। 12वंे स्वप्न में हीरे-मोती और रत्न जड़ित सिंहासन देखा। इस बारे में बताया गया कि आपका पुत्र राज्य का स्वामी और प्रजा का हित चिंतक रहेगा। 13वें स्वप्न में स्वर्ग का विमान देखा गया। इसके बारे में इस जन्म से पूर्व वह पुत्र स्वर्ग में देवता होगा। चौदहवें स्वप्न में रानी ने पृथ्वी को भेदकर निकलता नागों के राजा नागेंद्र का विमान देखा तो राजा ने बताया कि वह पुत्र जन्म से ही त्रिकालदर्शी होगा। 15 स्वप्न में रानी ने रत्नों का ढेर देखा।</p>
<p>राजा ने उन्हें बताया कि वह पुत्र अनंत गुणों से संपन्न होगा। सोलहवें स्वप्न में रानी ने धुआ रहित अग्निी देखी। इस पर राजा सिद्धार्थ ने उन्हें बताया कि वह पुत्र सांसारिक कर्मों का अंत करके मोक्ष को प्राप्त होगा। इन स्वप्नों के साथ ही भगवान महावीर ने रानी त्रिशला के गर्भ में प्रवेश किया और कालांतर तक उनकी कीर्ति हुई। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में पूरे जगत में पूजित हुए। आज भी जैन धर्मावलंबी भगवान महावीर जी की पूर्ण भक्ति भावना से पूजा, अर्चना और अभिषेक आदि विधान करते हैं।</p>
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		<title>जन्मोत्सव का पारणा (झूला) झुलाने की मची होड़: समाजजनों ने भजनों पर भक्ति का लिया आनंद </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Apr 2025 08:29:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर दाहोद के युवाओं ने पारणा सजाया। भगवान को झूला झुलाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। युवाओं ने अपनी कल्पना शक्ति से 16 दिव्य स्वप्न और अन्य दृश्यों को बखूबी साकार किया। दाहोद से पढ़िए यह खबर&#8230; दाहोद। भगवान श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक पर शाम के समय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर दाहोद के युवाओं ने पारणा सजाया। भगवान को झूला झुलाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। युवाओं ने अपनी कल्पना शक्ति से 16 दिव्य स्वप्न और अन्य दृश्यों को बखूबी साकार किया। <span style="color: #ff0000">दाहोद से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दाहोद।</strong> भगवान श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक पर शाम के समय नगर में जन्मोत्सव का पारणा (झूला) झुलाने का कार्यक्रम किया गया। जैन धर्म में इस पर्व का खास महत्व है और यह त्योहार जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थांकर भगवान महावीर को समर्पित है। उनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता का नाम रानी त्रिशला था। उनके जन्म के समय जैसा दृश्य होगा। ऐसा ही नगर के समीर दोषी, मनन सरैया, कुणाल दोषी, पूर्वी सेठ ने नवीन अद्भुत झूला तैयार किया। जिसमें भगवान के जन्म से पूर्व माता त्रिशला को दिखे 16 दिव्य स्वप्न का चित्रण खूब सुंदर तरीके से किया गया था। साथ ही भगवान महावीर के समय काल में शेर और गाय एक घाट से पानी पीते थे।</p>
<p>भगवान महावीर स्वामी का संदेश अहिंसा परमो धर्मः का उल्लेख करते हुए सभी समाजजन कार्यक्रम में मौजूद रहे। प्रसिद्ध भजन गायक कलाकार तरुण भाई के भजनों पर भक्तिं करते हुए आनंद उल्लास से भगवान का जन्मोत्सव मनाया। समाज के सभी बड़े, बुजुगर्, महिलाओं और बालकों ने उत्साह के साथ झुलाया। दिगंबर बीस पंथी ट्रस्ट के ट्रस्टी शैलेश भाई सरैया ने चारों युवाओं, यंग दिगंबर ग्रुप और उपस्थित सभी समाजजनों का आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>जैन शिक्षक सामाजिक समूह ने बांटे पौधे एवं फल: महावीर जयंती पर हुआ आयोजन  </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Apr 2025 07:32:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन शिक्षक सामाजिक समूह ने प्रधान डाकघर के पास पौधे एवं फल वितरित किए। इस मौके पर अधिक से अधिक पौधे लगाकर प्रकृति के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। पौधे और फल वितरण में बड़ी संख्या में संस्था के पदाधिकारी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन शिक्षक सामाजिक समूह ने प्रधान डाकघर के पास पौधे एवं फल वितरित किए। इस मौके पर अधिक से अधिक पौधे लगाकर प्रकृति के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। पौधे और फल वितरण में बड़ी संख्या में संस्था के पदाधिकारी और जैन समाज के लोग मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से राजीव सिंघई की पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर जैन शिक्षक सामाजिक समूह ने प्रधान डाकघर के पास पौधे एवं फल वितरित किए। इस दौरान जैन पंचायत के अध्यक्ष अक्षय टडैया ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों और जीवन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उनके सिद्धांत आज भी प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को समझने में मदद करते हैं। महावीर स्वामी ने जीवों के प्रति करुणा और दया का भाव रखने की शिक्षा दी। जो हमें पर्यावरण और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलने के लिए प्रेरित करता है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद निरंजन ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर्यावरण संरक्षण के लिए जन समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधों का वितरण किया गया। वर्तमान समय में भीषण गर्मी एवं हीट वेब के कारण पौधरोपण की महती आवश्यकता है। हम अधिक से अधिक पौधे लगाएं। जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहे।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस दौरान दिगंबर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, संयोजक सनत खजुरिया, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद निरंजन, व्यापारी नेता अजय साइकिल, अजय जैन, मनोज साहू, सुरेश अग्रवाल, जैन शिक्षक सामाजिक समूह के निर्देशक सत्येंद्र जैन, कोषाध्यक्ष राहुल जैन, संयोजक अंतिम जैन, प्रदुम्न जैन, मीडिया प्रभारी राजीव बजाज, पुष्पेंद्र जैन ,जितेंद्र वैद्य, अमित जैन, सुशील जैन, नितिन कड़ंकी, अमन जैन, असीम खजुरिया, ममता जैन, स्नेहवर्षा जैन, सपना जैन, संध्या जैन, मोनिका जैन, गरिमा जैन, रश्मि जैन, अमित शास्त्री, रीतेश जैन मौजूद रहे।</p>
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		<title>भगवान महावीर जन्म जयंती पर उपमुख्यमंत्री ने किया शिलान्यासः भगवान महावीर की मूर्ति की स्थापना के शिलान्यास के साथ आगाज हुआ  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/bhagwan_mahavirs_birth_anniversary_started_with_the_foundation_stone_laying_for_the_installation_of_the_statue/</link>
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		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 07:37:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर जिनका जन्म कुंडलपुर नगरी जिला नालंदा बिहार प्रदेश में हुआ था। प्रदेश सरकार ने जैन समाज की मांग को देखते हुए सन 2002 में भगवान महावीर की जन्म जयंती के उपलक्ष पर डालीगंज मुख्य मार्ग पर स्थित हाथी पार्क को “भगवान महावीर पार्क” करने का निर्णय लिया था। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर जिनका जन्म कुंडलपुर नगरी जिला नालंदा बिहार प्रदेश में हुआ था। प्रदेश सरकार ने जैन समाज की मांग को देखते हुए सन 2002 में भगवान महावीर की जन्म जयंती के उपलक्ष पर डालीगंज मुख्य मार्ग पर स्थित हाथी पार्क को “भगवान महावीर पार्क” करने का निर्णय लिया था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए लखनऊ से दीपक प्रधान की विशेष रिपोर्ट</span></strong></p>
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<p><strong>लखनऊ।</strong> भगवान महावीर जिन्होंने जन-जन को दिया जियो और जीने दो का उपदेश। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर जिनका जन्म कुंडलपुर नगरी जिला नालंदा बिहार प्रदेश में हुआ था। प्रदेश सरकार ने जैन समाज की मांग को देखते हुए सन 2002 में भगवान महावीर की जन्म जयंती के उपलक्ष पर डालीगंज मुख्य मार्ग पर स्थित हाथी पार्क को “भगवान महावीर पार्क” करने का निर्णय लिया था। तत्पश्चात उसमें लाल रंग के पत्थर की मूर्ति पद्मासन रूप में रखी गई थी जिसको 2012 में कुछ उपद्रवियों ने जगह-जगह तोड़ दिया था।</p>
<p><strong>उपमुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया</strong></p>
<p>जैन समाज ने अपने प्रयास से उस टूटी मूर्ति की जगह नई मूर्ति रखवाई। लेकिन पुरानी मूर्ति का ठीक से रखरखाव न होने की वजह से लोग अक्सर उस पर अनर्गल तरीके से फोटो खिंचवाते थे। यह संदर्भ को संज्ञान में लेते हुए अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद-उत्तर प्रदेश प्रांत ने अपने प्रयासों से उस मूर्ति को राजस्थान से कारीगरों को बुलाकर के मरम्मत करवाई एवं आज 2 अप्रैल को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय श्री बृजेश पाठक जी, राज्य मंत्री श्री जसवंत सिंह सैनी, विधायक श्रीमान नीरज बोरा के तत्वाधान में उसी मेन मार्ग के मध्य रोड पर मूर्ति रखने के लिए शिलान्यास एवं पूजन कार्यक्रम रखा गया, जिसमें माननीय अतिथियों द्वारा पूजा विधि करने के उपरांत शिलान्यास किया गया। साथ में ही अवध जैन समाज की गौरव पूज्य गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का भी कीर्ति स्तंभ यहाँ लगाया जाएगा क्योंकि पूज्य ज्ञानमती माता जी की कीर्ति पताका पूरे विश्व में उनके कार्यकलापों की वजह से फैली हुई है।</p>
<p><strong>गणमान्यजनों की उपस्थिति रही</strong></p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ तनिषा जैन भक्ति नृत्य करके , स्वागत गीत सहादतगंज जैन महिला मंडल एवं याहियागंज जैन महिला मंडल की तरफ से सुंदर भजन का वाचन किया गया। गरिमामयी उपस्थित के रूप में अयोध्या से पीठाधीश स्वामी रविंद्रकीर्ति जी महाराज, युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन प्रकाश जैन जी, चौक क्षेत्र के सभासद श्री अनु मिश्रा जी भी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>सभी समाज को सर उठाकर के जीने का अधिकार </strong></p>
<p>माननीय उपमुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि वह समय चला गया जब कुछ लोग अपनी खराब मानसिकता के कारण दूसरे समाज का अहित करते थे आज योगी युग में सभी समाज को सर उठाकर के जीने का अधिकार है। उद्बोधन के मध्य ही माननीय उपमुख्यमंत्री जी ने नीरज बोरा जी विधायक को निर्देश दिया कि तत्काल रूप से पार्क की कटी हुई लाइट एवं जो भी अवस्थाएं पार्क में चल नहीं उसको निश्चित रूप से ठीक करवाने का आग्रह किया।</p>
<p><strong>पद्मासन मूर्ति स्थापित होगी </strong></p>
<p>मूर्ति के शिलान्यास के उपरांत दोनों सड़क के बीच में 10 फीट का स्टैंड सीमेंट एवं सरिया का बनवाया जाएगा जिस पर 8 फिट पद्मासन मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। यह कार्य युवा परिषद के सदस्य श्री विशाल जैन आर्किटेक्ट के कुशल निर्देशन में संपन्न होगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से आदीश जैन, कैलाशचंद्र जैन, अमरचंद जैन, रितेश जैन, बंटी जैन, बच्चू जैन ,नीतिश जैन, वीर कुमार जैन, शुभचंद जैन, श्री जैन धर्म प्रवर्धिनी सभा के अध्यक्ष विनय जैन, निधेश जैन, परमेन्द्र जैन, अंकुर जैन, तेजकुमार जैन, महावीर जैन गंगवाल, पारस , राजेश, शैंकी, प्रभात, अंकित जैन आदि लोग उपस्थित रहे। प्रोफेसर अभय कुमार जैन ने भी अपने उद्बोधन में शिक्षाप्रद बातें कहीं। मंच का संचालन सिद्धार्थ जैन ने किया।</p>
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		<title>भगवान आदिनाथ की पुरा महत्व की मूर्तियां देश में उपलब्ध : बावनगजा में है विश्व प्रसिद्ध आदिनाथ जी की प्रतिमा </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 16:38:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[24th Tirthankara Lord Mahavir Swami]]></category>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जिनका जन्मोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की नवमी 23 मार्च रविवार को आ रही है। यह जन्मोत्सव संपूर्ण विश्व में मनाया जा रहा है। इसके ठीक 18 दिनों बाद जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इंदौर से पढ़िए ओम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जिनका जन्मोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की नवमी 23 मार्च रविवार को आ रही है। यह जन्मोत्सव संपूर्ण विश्व में मनाया जा रहा है। इसके ठीक 18 दिनों बाद जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए ओम कीर्ति पाटोदी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जिनका जन्मोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की नवमी 23 मार्च रविवार को आ रही है। यह जन्मोत्सव संपूर्ण विश्व में मनाया जा रहा है। इसके ठीक 18 दिनों बाद जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। पुरातत्व के महत्व की दृष्टि से देखते हैं तो भगवान आदिनाथ की अति प्राचीन दुर्लभ प्रतिमा देश में विद्यमान है। वहीं विदेशी संग्रहालयों में भी सैकड़ों जिन प्रतिमाएं संरक्षित हैं। भगवान श्री आदिनाथ भारत वर्ष के महत्वपूर्ण महापुरुष हुए हैं, जिनके बगैर भारतीय संस्कृति और इतिहास कल्पना नहीं की जा सकती। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि देश में भगवान आदिनाथ स्वामी (ऋषभदेव) की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमाओं की बात करें तो इसमें हमारे निकट ही बड़वानी जिले का बावनगजा एक महत्वपूर्ण स्थान है। जहां पर अति प्राचीन आदि जिन प्रतिमा मौजूद हैं। जिसकी ऊंचाई बावनगज अर्थात 84 फीट है। सर्वांग सुंदर यह प्रतिमा अत्यंत मनोहारी है। यह प्रतिमा सतपुड़ा की पहाड़ी श्रंखला में मनमोहक प्राकृतिक वादियों में पहाड़ी को काटकर बनाई गई है। यह स्थान सिद्ध क्षेत्र है क्योंकि, यहां से इंद्रजीत और कुंभकरण मुनि मोक्ष गए थे। जिसका उल्लेख प्राकृत की निर्वाण कांड की गाथा में मिलता है। इस आधार पर इस स्थान का संबंध रामायण काल से जुड़ जाता है।</p>
<p><strong>बदनावर में भी प्राप्त हुई प्रतिमाएं</strong></p>
<p>यहां पर दर्जनों जैन मंदिर हैं। जिसमें सैकड़ों जिन प्रतिमाएं विराजमान हैं। प्राचीन प्रतिमाओं पर लेख उपलब्ध नहीं है परन्तु यहां की लेख युक्त प्रतिमाएं भी उपलब्ध है जिससे हजार वर्ष प्राचीन इतिहास जानकारियां मिलती है। इंदौर के निकट धार जिले का बदनावर (वर्द्धमानपुर) नगर भी पुरा महत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगर है। यहां से भगवान आदिनाथ स्वामी की कई प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। जिसमें जवाहर मार्ग स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं मालीपुरा स्थित भोयरावाला मंदिर में भगवान आदिनाथ की हजारों वर्ष प्राचीन प्रतिमा विराजमान है। इसके अलावा भूगर्भ से प्राप्त भगवान आदिनाथ स्वामी की एक महत्वपूर्ण प्रतिमा धार नगर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। वहीं उज्जैन के जयसिंहपुरा में स्थित जैन संग्रहालय में भी बदनावर वर्द्धमानपुर से प्राप्त भगवान आदिनाथ स्वामी की लेख युक्त प्रतिमाएं संग्रहित हैं।</p>
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