<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>16वें तीर्थंकर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/16%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Thu, 14 May 2026 12:55:44 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>16वें तीर्थंकर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>भगवान शांतिनाथ के तीन कल्याणक का महासंगम : इंदौर सहित देशभर के जिनालयों में 15 मई मनेगा भगवान का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_grand_confluence_of_the_three_kalyanaks_of_lord_shantinath/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_grand_confluence_of_the_three_kalyanaks_of_lord_shantinath/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 12:55:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[16th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[16वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[and Liberation]]></category>
		<category><![CDATA[Birth]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Fifth Chakravarti]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[Mahamastakabhisheka]]></category>
		<category><![CDATA[penance]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Special Rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Threefold Kalyanakas]]></category>
		<category><![CDATA[Twelfth Kamadeva]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तप और मोक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[त्रिविध कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्वादश कामदेव]]></category>
		<category><![CDATA[पंचम चक्रवर्ती]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[महामस्तकाभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष अनुष्ठान]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=106756</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230; इंदौर। जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, पंचम चक्रवर्ती और द्वादश कामदेव भगवान शांतिनाथ स्वामी का त्रिविध कल्याणक (जन्म, तप और मोक्ष) महोत्सव शुक्रवार, 15 मई को देश भर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मालवा की पावन धरा इंदौर सहित देशभर के समस्त दिगंबर जैन मंदिरों, जिनालयों और चैत्यालयों में इस पावन अवसर पर विशेष अनुष्ठान, महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा और विश्वशांति महायज्ञ विधान आयोजित किए जाएंगे। सकल जैन समाज ने इस त्रिकल्याणक महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।</p>
<p><strong>एक ही पावन तिथि पर तीन कल्याणक का संयोग</strong></p>
<p>जैन पुराणों के अनुसार जेठ कृष्ण चतुर्दशी की पावन तिथि भगवान शांतिनाथ के जीवन में अद्भुत महत्व रखती है। इसी तिथि को उनका दीक्षा (तप) कल्याणक और मोक्ष कल्याणक हुआ था। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष उनका जन्म कल्याणक पर्व भी इसी समय के साथ जुड़कर त्रिकल्याणक महामहोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>भगवान शांतिनाथ का जीवन वृत्त और तीनों कल्याणक </strong></p>
<p>गर्भ एवं जन्म कल्याणक- हस्तिनापुर के इक्ष्वाकु वंशीय राजा विश्वसेन और माता ऐरादेवी (अचिरा) के आंगन में प्रभु का जन्म हुआ था। उनके गर्भ में आते ही पूरे राज्य में शांति की लहर दौड़ गई थी, इसलिए उनका नाम ‘शांतिनाथ’ रखा गया। वे 16वें तीर्थंकर होने के साथ-साथ तीन खंड के अधिपति पंचम चक्रवर्ती और कामदेव भी थे।</p>
<p>दीक्षा (तप) कल्याणक- राजसी वैभव, अटूट संपदा और चक्रवर्ती के सुखों का भोग करने के बाद एक दिन दर्पण में अपना रूप देखते समय भगवान को वैराग्य उत्पन्न हुआ। उन्होंने संसार की असारता को समझा और जेठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हस्तिनापुर के सहस्राम्र वन में दीक्षा धारण कर ली। वे आत्म-साधना और कठिन तपस्या में लीन हो गए।</p>
<p>मोक्ष कल्याणक- कठिन तप और ध्यान के बल पर प्रभु ने केवलज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ हिल) की पावन टोंक से जेठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही भगवान शांतिनाथ ने समस्त कर्मों का क्षय कर मोक्ष (निर्वाण) पद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>इंदौर सहित देश भर में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम</strong></p>
<p>इस महापर्व के अवसर पर इंदौर के कांच मंदिर, गोमटगिरी, दिगंबर जैन उदासीन आश्रम सहित सभी उपनगरीय जिनालयों में सुबह की वेला में देव-शास्त्र-गुरु पूजन होगा।</p>
<p>महामस्तकाभिषेक व शांतिधारा- स्वर्ण और रजत कलशों से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। विश्वशांति महायज्ञ-विश्व में सुख, समृद्धि और शांति की कामना के लिए विशेष आहुतियां दी जाएंगी। लाडू समर्पणरू निर्वाण लाडू चढ़ाकर भक्त प्रभु के मोक्ष कल्याणक की खुशियां मनाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमरू संध्याकाल में महाआरती, भक्तांबर पाठ और जिनेंद्र भक्ति के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संत समाज और विद्वानों के अनुसार भगवान शांतिनाथ की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट, रोग, शोक और मानसिक अशांति दूर होती है। समस्त जैन समाज इस पावन दिवस पर उपवास, एकासन और सामायिक कर आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_grand_confluence_of_the_three_kalyanaks_of_lord_shantinath/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक 29 दिसंबर को: पौष शुक्ल दशमी को तिथि को हुआ था केवल ज्ञान </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_16th_tirthankara_lord_shantinaths_gyan_kalyanak_is_on_december_29/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_16th_tirthankara_lord_shantinaths_gyan_kalyanak_is_on_december_29/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 14:22:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[16th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[16वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Ashoka Tree]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Divine Speech]]></category>
		<category><![CDATA[gyan kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Hastinapur]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[Nandi Vriksha]]></category>
		<category><![CDATA[Paush Shukla Dashami]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अशोक वृक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञान कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दिव्य वाणी]]></category>
		<category><![CDATA[नंदिवृक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[पौष शुक्ल दशमी]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[हस्तिनापुर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=97178</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक इस बार 29 दिसंबर को आ रहा है। भगवान शांतिनाथ ने पौष शुक्ल दशमी तिथि को केवल ज्ञान प्राप्त किया था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) पौष मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को हुआ था। श्रीफल जैन न्यूज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक इस बार 29 दिसंबर को आ रहा है। भगवान शांतिनाथ ने पौष शुक्ल दशमी तिथि को केवल ज्ञान प्राप्त किया था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) पौष मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को हुआ था। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक इस बार 29 दिसंबर को आ रहा है। भगवान शांतिनाथ ने पौष शुक्ल दशमी तिथि को केवल ज्ञान प्राप्त किया था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) पौष मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को हुआ था। जब उन्होंने हस्तिनापुर के पास सहस्राम्रवन में अशोक वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या के बाद केवल ज्ञान प्राप्त किया और लोकालोक के सभी पदार्थों को जाना, जिससे उन्हें दिव्य वाणी (देशना) के माध्यम से उपदेश देने और समवशरण की रचना का अवसर मिला। जिससे कई जीव मोक्ष मार्ग की ओर बढ़े। यहां यह भी उल्लेखित है कि दीक्षा के एक वर्ष बाद कठोर तपस्या के बाद नंदिवृक्ष (अशोक वृक्ष) के नीचे उन्हें लोकालोक का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ और वे सभी 18 दोषों से रहित हो गए। देवताओं ने आकर समवशरण (दिव्य सभा मंडप) की रचना की, और जहां प्रभु ने अपनी दिव्य वाणी (देशना) से उपदेश दिया। भगवान शांतिनाथ जी के 36 गणधर (प्रमुख शिष्य) हुए। जिनमें चक्रायुध प्रमुख थे। जिन्होंने प्रभु की वाणी को जन-जन तक पहुंचाया। इस ज्ञान कल्याणक से मोक्षमार्ग पुर्नस्थापित हुआ और अनेक जीवों ने दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त किया। भगवान शांतिनाथ, जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर हैं और उनका ज्ञान कल्याणक जैन धर्म में शांति, अहिंसा और आत्म-कल्याण के प्रतीक के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस तिथि को भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक शहर के दिगंबर जैन मंदिरों के अतिरिक्त देश भर में भी पांरपरिक धार्मिक उल्लास और पूर्ण भक्ति भावना के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष अर्चना के साथ अभिषेक, शांतिधारा पाठ का आयोजन किया जाता है। भगवान शांतिनाथ जी के संदेशों को स्मरण कर धर्म आराधना की जाती है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_16th_tirthankara_lord_shantinaths_gyan_kalyanak_is_on_december_29/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान श्री शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक 15 अगस्त को: भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है भगवान का गर्भ कल्याणक  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_shantinaths_garbha_kalyanak_on_15th_august/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_shantinaths_garbha_kalyanak_on_15th_august/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Aug 2025 06:09:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[16th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[16वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Bhadon Krishna Paksha Saptami]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shri Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Aarti]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Special Worship]]></category>
		<category><![CDATA[अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान श्री शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[भादों कृष्ण पक्ष सप्तमी]]></category>
		<category><![CDATA[महाआरती]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87634</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक पूर्ण भक्ति भाव से समूचे देश में दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा। भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याण तिथि के अनुसार भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है। इस बार यह 15 अगस्त को है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में आज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक पूर्ण भक्ति भाव से समूचे देश में दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा। भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याण तिथि के अनुसार भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है। इस बार यह 15 अगस्त को है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में आज <span style="color: #ff0000">पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित जानकारी&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक पूर्ण भक्ति भाव से समूचे देश में दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा। भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याण तिथि के अनुसार भादों की कृष्ण पक्ष की सप्तमी को आता है। इस बार यह 15 अगस्त को है। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है। यह दिन भाद्रपद कृष्ण सप्तमी को मनाया जाता है। जब भगवान शांतिनाथ की माता महारानी ऐरा के गर्भ में आने की घटना होती है। यह विदित है कि गर्भ कल्याणक तीर्थंकरों के जीवन की पांच महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जिन्हें पंचकल्याणक कहा जाता है। भगवान शांतिनाथ का नाम ही शांति का प्रतीक है और उनके गर्भ में आने से राज्य में सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण छा गया था। इसलिए उनका नाम शांतिनाथ रखा गया था। ग्रंथों के अनुसार तीर्थंकरों के जीवन की ये घटनाएं अन्य जीवों के कल्याण का आधार बनती हैं।</p>
<p>भगवान शांतिनाथ जी के गर्भ कल्याणक के उपलक्ष्य में दिगंबर जैन मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा, अभिषेक, शांतिधारा और महाआरती जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर भगवान शांतिनाथ की भक्ति और आराधना की जाती है। गर्भ कल्याणक दिवस पर भक्त भगवान शांतिनाथ से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। संक्षेप में देखा जाए तो भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक अवसर है, जो सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक है।</p>
<p><strong>कामदेव जैसे रूपवान थे भगवान शांतिनाथ </strong></p>
<p>शांतिनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थकरों में से अवसर्पिणी काल के 16वें तीर्थंकर थे। माना जाता हैं कि शांतिनाथ के संग 900 साधु मोक्ष गए थे। भगवान शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन हुआ था। तब भरणी नक्षत्र था। उनके पिता का नाम विश्वसेन था, जो हस्तिनापुर के राजा थे और माता का नाम महारानी ऐरा था। जैन ग्रंथों में शांतिनाथ को कामदेव जैसा स्वरूपवान बताया गया है। पिता के बाद शांतिनाथ हस्तिनापुर के राजा बने। जैन ग्रंथो के अनुसार उनकी 86 हजार रानियां थीं। उनके पास 84 लाख हाथी, 360 रसोइए, 84 करोड़ सैनिक, 28 हजार वन, 18 हजार मंडलिक राज्य, 360 राजवैद्य, 32 हजार अंगरक्षक देव, 32 चमर ढोलने वाले, 32 हजार मुकुटबंध राजा, 32 हजार सेवक देव, 16 हजार खेत, 56 हजार अंतर्दीप, 4 हजार मठ, 32 हजार देश, 86 करोड़ ग्राम, 1 करोड़ हंडे, 3 करोड़ गायें, 3करोड़ 50 लाख बंधु-बांधव, 10 प्रकार के दिव्य भोग, 9 निधियां और 24 रत्न, 3 करोड़ थालियां आदि संपदा थीं।</p>
<p>वैराग्य आने पर इन्हांेने ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को दीक्षा प्राप्त की। बारह माह की छ्दमस्थ अवस्था की साधना से शांतिनाथ ने पौष शुक्ल नवमी को ‘कैवल्य ज्ञान’ प्राप्त किया। ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन सम्मेद शिखर पर भगवान शांतितनाथ ने पार्थिव शरीर का त्याग किया था।</p>
<p><strong>लक्षण</strong></p>
<p>रंग-स्वर्ण, चिन्ह -हिरण, ऊंचाई-40 धनुष (120 मीटर), आयु- 7,00,000 वर्ष, वृक्ष- नंदी वृक्ष</p>
<p>शासक देव-यक्ष गरुड़, यक्षिणी निर्वाणी</p>
<p>गणधरः-प्रथम गणधर चक्रयुध स्वामी गणधरों की संख्या 36</p>
<p><strong>चिन्ह का महत्व</strong></p>
<p>हिरण शांतिनाथ भगवान का चिन्ह है। जैनधर्म की मान्यता के अनुसार हिरण की यह शिक्षा है कि तुम भी संसार में संगीत के समान प्रिय लगने वाले चापलूसों, चमचों की दिल लुभाने वाली बातों में न फ़ंसना अन्यथा बाद में पछताना पडे़गा। यदि तनाव मुक्ति चाहते हो तो मेरे समान सरल सीधा तथा पापों से बचो और चौकन्ना रहो।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shri_shantinaths_garbha_kalyanak_on_15th_august/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान शांतिनाथ जी का जन्म तप और मोक्ष कल्याणक 26 मई को : तिथि के अनुसार तीनों कल्याणक ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाएगा  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shantinath_jis_birth_penance_and_salvation_kalyanak_on_26_may/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shantinath_jis_birth_penance_and_salvation_kalyanak_on_26_may/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 May 2025 12:19:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[16th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[16वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[Auspicious Mangal Symbol]]></category>
		<category><![CDATA[Birth Penance and Salvation Kalyanak 26 May]]></category>
		<category><![CDATA[Chakra]]></category>
		<category><![CDATA[Conch]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[flag]]></category>
		<category><![CDATA[Hastinapur]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jyeshtha Krishna Chaturdashi]]></category>
		<category><![CDATA[Kravarti King]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shantinath Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Moon]]></category>
		<category><![CDATA[Mother Saraswati]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Sun]]></category>
		<category><![CDATA[toran]]></category>
		<category><![CDATA[क्रवर्ती राजा]]></category>
		<category><![CDATA[चक्र]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्र]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म तप और मोक्ष कल्याणक 26 मई]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी]]></category>
		<category><![CDATA[तोरण]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[ध्वजा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शांतिनाथ जी]]></category>
		<category><![CDATA[माँ सरस्वती]]></category>
		<category><![CDATA[शंख]]></category>
		<category><![CDATA[शुभ मंगल चिन्ह]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सूर्य]]></category>
		<category><![CDATA[हस्तिनापुर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=81611</guid>

					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ जी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याण 26 मई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार यह शुभ अवसर ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को आ रहा है। इस पुण्य मौके पर दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-पाठ और आराधना का दौर रहेगा। श्रीफल जैन न्यूज की ओर से विशेष कड़ी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ जी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याण 26 मई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार यह शुभ अवसर ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को आ रहा है। इस पुण्य मौके पर दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-पाठ और आराधना का दौर रहेगा। श्रीफल जैन न्यूज की ओर से विशेष कड़ी में आज पढ़िए, <span style="color: #ff0000">उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक एक ही दिन ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को हुआ आता है। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार जन्म हस्तिनापुर में हुआ था, उनके पिता राजा विश्वसेन और माता महारानी ऐरा थीं। वैराग्य आने पर उन्होंने हस्तिनापुर में ही दीक्षा ली। जिसे तप कल्याणक कहा जाता है। उन्होंने सम्मेदशिखर पर्वत पर तपस्या की और वहीं मोक्ष को प्राप्त हुए। भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 26 मई को आ रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि बचपन से ही भगवान शांतिनाथ कामदेव के सामन सुंदर थे। उनका मनोहारी रूप देखने के लिए देवराज इंद्र, इंद्राणी उपस्थित हुए थे। भगवान शांतिनाथ के शरीर की आभा स्वर्ण के समान थी। उनके शरीर पर सूर्य, चंद्र, ध्वजा, शंख, चक्र और तोरण के शुभ मंगल चिन्ह थे। जन्म से ही उनकी चिह्वा पर मां सरस्वती विराजित थीं। जब भगवान शांतिनाथ युवावस्था में पहुंचे तो राजा विश्वसेन ने उनका विवाह करवाया एवं स्वयं मुनि दीक्षा ले ली। राजा बने शांतिनाथ के शरीर पर जन्म से ही शुभ चिन्ह थे। इस कारण वे शीध्र चक्रवर्ती राजा बन गए।</p>
<p><strong>भगवान शांतिनाथ ने सैकड़ों वर्षों तक न्यायपूर्वक किया शासन </strong></p>
<p>भगवान शांतिनाथ जी की 96 हजार रानियां थीं। उनके पास 84 लाख हाथी, 360 रसोइए, 84 करोड सैनिक, 28 हजार वन, 18 हजार मंडलिक राज्य, 360 राजवैद्य, 32 हजार अंगरक्षक देव,32 चंवर ढुलाने वाले, 32 हजार मुकुटबंध राजा, 32 हजार सेवक देव, 16 हजार खेत, 56 हजार अंतर्दीप, 4 हजार मठ, 32 हजार देश, 96 करोड़ ग्राम, 1 करोड़ हंडे, 3 करोड़ गायें, 3 करोड़ 50 लाख बंधु-बांधव, 10 प्रकार के दिव्य भोग, 9 निधियां और 24 रत्न, 3 करोड़ थालियां आदि अकूत संपदा थी। इस अकूत संपदा के मालिक शांतिनाथ ने सैकड़ों वर्षों तक पूरी पृथ्वी पर न्यायपूर्वक शासन किया।</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>सोलह वर्षों तक घोर तप किया</strong></span></p>
<p>एक दिन वे दर्पण में अपना मुख देख रहे थे तभी उनकी किशोरावस्था का एक और मुख दिखाई दिया। मानों वह उन्हें कुछ संकेत कर रहा था। उस संकेत को देख वे समझ गए कि वे पहले किशोर थे फिर युवा हुए और अब प्रौढ़। इसी प्रकार सारा जीवन बीत जाएगा, लेकिन उन्हें इस जीवन मरण के चक्र से छुटकारा पाना है। यही उनके जीवन का उद्देश्य भी है। और उसी पल उन्होंने अपने पुत्र नारायण का राज्याभिषेक किया और स्वयं दीक्षा लेकर दिगंबर मुनि बन गए। मुनि बनने के बाद लगातार सोलह वर्षों तक विभिन्न वनों में रहकर घोर तप किया और पौष शुक्ल दशमी को उन्हें केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे तीर्थंकर कहलाए। तदंतर उन्होंने लगातार विहार कर लोक कल्याण किया, उपदेश दिए। ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन सम्मेद शिखर जी पर भगवान शांतिनाथ को निर्वाण प्राप्त हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shantinath_jis_birth_penance_and_salvation_kalyanak_on_26_may/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रजयमयी विधिनायक जिनबिंब निर्माण उत्सव 09 मार्च रविवार कोः 20 से 25 अपै्रल को पंचकल्याणक महामहोत्सव आचार्यश्री वसुनंदीजी के सानिध्य में </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rajayamayi_vidhinayak_jinbimb_nirman_utsav_on_sunday_march_09th/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/rajayamayi_vidhinayak_jinbimb_nirman_utsav_on_sunday_march_09th/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 10:39:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[16th Tirthankara]]></category>
		<category><![CDATA[16वें तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[20 to 25 April]]></category>
		<category><![CDATA[20 से 25 अपै्रल]]></category>
		<category><![CDATA[56 Girls]]></category>
		<category><![CDATA[56 बालिकाएं]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Ji]]></category>
		<category><![CDATA[ajmer]]></category>
		<category><![CDATA[Ashtakumari]]></category>
		<category><![CDATA[Br. B. Naman Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[God from Stone]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain nagar]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kshullak Poornanand Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shri Shantinath Swami]]></category>
		<category><![CDATA[Marble Altar]]></category>
		<category><![CDATA[Naka Madar]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak Maha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Red Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shantidhara]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Jinshasan Tirth Kshetra]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Vrishbhanand Ji and Munishri Sadanand Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Uttang Khadgasan]]></category>
		<category><![CDATA[अजमेर]]></category>
		<category><![CDATA[अष्टकुमारी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वसुनंदीजी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[उतंग खडगासन]]></category>
		<category><![CDATA[क्षुल्लक पूर्णानंदजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन नगर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[नाका मदार]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक महामहोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[पाषाण से परमात्मा]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रा.ब. नमन जैन]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी]]></category>
		<category><![CDATA[लाल मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिधारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[श्री वृषभानंदजी व मुनिश्री सदानंदजी]]></category>
		<category><![CDATA[संगमरमर की वेदिका]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=76183</guid>

					<description><![CDATA[श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में आचार्यश्री वसुनंदीजी, श्री वृषभानंदजी व मुनिश्री सदानंदजी, क्षुल्लक पूर्णानंदजी एवं ब्रा.ब. नमन जैन के शुभाशीष से आगामी 20 से 25 अपै्रल को पंचकल्याणक महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यहॉ पर होने वाले ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु युगल नयनों की साक्षी में धातु से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में आचार्यश्री वसुनंदीजी, श्री वृषभानंदजी व मुनिश्री सदानंदजी, क्षुल्लक पूर्णानंदजी एवं ब्रा.ब. नमन जैन के शुभाशीष से आगामी 20 से 25 अपै्रल को पंचकल्याणक महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यहॉ पर होने वाले ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु युगल नयनों की साक्षी में धातु से भगवान बनने की प्रक्रिया का साक्षात्कार रजयमयी विधिनायक जिनबिंब निर्माण उत्सव का आयोजन रविवार को प्रातः किया जायेगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अजमेर से विनीत कुमार जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अजमेर।</strong> श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में आचार्य श्री वसुनंदीजी, श्री वृषभानंदजी व मुनिश्री सदानंदजी, क्षुल्लक पूर्णानंदजी एवं ब्रा.ब. नमन जैन के शुभाशीष से आगामी 20 से 25 अपै्रल को पंचकल्याणक महामहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p>अजमेर की पावन वसंुधरा पर होने वाले ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु युगल नयनों की साक्षी में धातु से भगवान बनने की प्रक्रिया का साक्षात्कार रजयमयी विधिनायक जिनबिंब निर्माण उत्सव का आयोजन दिनांक 09 मार्च रविवार को प्रातः 9ः00 बजे से श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार पर किया जायेगा।</p>
<p><strong>अष्टकुमारी एवं 56 बालिकाओं की प्रस्तुति </strong></p>
<p>दोपहर 3.00 से 5.00 तक महिला मंडलों के द्वारा जिसमें 1008 महिलाएं मंगल बधाई का मंगलगान होगा। इस अवसर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में भाग लेने वाली अष्टकुमारी एवं 56 कुमारी बालिकाओं के द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। राजस्थान के अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित अजमेर नगर का अनुपम, अलौकिक दिगम्बर जैन तीर्थ जिनषासन तीर्थक्षेत्र जैन नगर, नाका मदार, अजमेर में है।</p>
<p><strong>विश्व की अनुपम कृति </strong></p>
<p>तीर्थक्षेत्र पर विश्व की अनुपम कृति व विश्व कीर्तिमान अलौकिक, असाधारण 54 फीट उतंग खडगासन 16वें तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी की कमलासन पर विशाल जिनबिम्ब, जिसका निर्माण 11 जुलाई 2018 से एकल 60 फीट पाषाण को क्षेत्र पर लाकर खड़ा करने के बाद जिन प्रतिमा का निर्माण कर नयानाभिराम रूप प्रदान किया गया।</p>
<p><strong>संगमरमर की भव्य वेदिका </strong></p>
<p>साथ ही 54 फीट उतंग जिनप्रतिमा जिनालय के उपर नक्काशी व सुन्दर कलाकृति से सुसज्जित संगमरमर का भव्य शिखर वेदी का निर्माण अति मनमोहक है। संगमरमर की भव्य वेदिका में वर्तमान में 24 तीर्थंकर श्री आदिनाथ से महावीर तक सवा ग्यारह फीट कमलासन पर विराजमान पाषाण की पद्मासन मनोज्ञ प्रतिमा, 24 रजतमयी (चॉंदी), 24 ताम्र्र प्रतिमा व दिस्य समवशरण, 1008 प्रतिमा से सुषोभित सहस्कूट जिनालय पाषाण से परमात्मा की दिव्य यात्रा हेतु प्रतिक्षारत है।</p>
<p><strong>लाल मंदिर के नाम से विख्यात </strong></p>
<p>क्षेत्र में वर्तमान में लाल मंदिर के नाम से विख्यात भगवान श्री शांतिनाथ, श्री चंदप्रभु, श्री पार्श्वनाथ स्वामी की स्फटिक मणी से निर्मित मनभावक, मनाहारी व अतिषयकारी प्रतिमा विराजमान है जिनका प्रतिदिन सैकड़ो श्रावक श्रेष्ठी जिनाभिषेक एवं शांतिधारा जन्म-जन्मान्तर के पापों से निवृत्ति पाते है। भव्य लाल मंदिर का शिलान्यास 31 अक्टूबर 2014 में हुआ व भव्य वेदी प्रतिष्ठा 13 नवम्बर 2014 में निर्माण कार्य आचार्यश्री वसुनंदीजी की प्रेरणा व सानिध्य में हुआ।</p>
<p><strong>आचार्यश्री वसुनंदीजी के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव</strong></p>
<p>सम्पूर्ण भारतवर्ष में अपनी अलग पहचान रखने वाले जैसवाल जैन समाज के गौरव को जीवंतता प्रदान करने वाले श्री जिनशासन तीर्थक्षेत्र अजमेर का पंचकल्याणक महोत्सव पावन मंगलमय शुभ घड़ी दिनांक 20 अपै्रल 2025 से 25 अपै्रल 2025 जब आचार्यश्री वसुनन्दीजी महाराज चतुर्विघ संघ के पावन सानिध्य में पाषाण से परमात्मा की दिव्य यात्रा का सम्पूर्ण भारतवर्ष साक्षी बनेगा जो अजमेर नगर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला एक अध्याय होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/rajayamayi_vidhinayak_jinbimb_nirman_utsav_on_sunday_march_09th/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
