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	<title>1008 Shri Parshvanath Bhagwan &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आदर्श नगर में हुआ भक्तिमय मंडल विधान का पूजन: साधुओं की संयम साधना जारी </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 13:26:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। राजेश पंचोलिया, गजराज लोकेश, संजय संघी ने बताया कि सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। चढ़ाए जाने वाले अर्घ्य का मंत्रोच्चार आचार्य श्री एवं मुनि हितेंद्र सागर जी ने कर भगवान के गुणों का वर्णन किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए समाधिस्थ आचार्य श्री विद्या सागर जी के शिष्य क्षुल्लक श्री ध्यान सागर जी पधारे। श्री जी के दर्शन कर आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री शीतलमति जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम नियम संल्लेखना चल रही हैं।</p>
<p>आर्यिका श्री शीतल मति जी एकांतर आहार ले रही हैं। वहीं आर्यिका श्री वत्सल मति जी दो उपवास के बाद एक आहार की कठोर तप साधना कर रही हैं। आप मात्र जल, दूध और मनुक्का पानी बहुत ही अल्प मात्रा में ले रही हैं। सभी प्रकार के अन्न और 5 रसों का त्याग कर दिया हैं। ब्रह्मचारिणी विमला दीदी सलूंबर धरियावद आचार्य श्री धर्म सागर जी के समय से संघस्थ होकर आपने वर्ष 1997 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से भिंडर पंच कल्याणक में सीधे आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री वत्सल मति जी बनीं। 27 वर्षों में हजारों उपवास किए है। प्रातःकाल आचार्य श्री के सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया। आचार्य श्री भक्ति भाव नृत्य द्वारा भव्य पूजन किया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट का सौभाग्य का प्राप्त हुआ। श्री जी और आचार्य श्री की मंगल आरती का सौभाग्य केवल चंद, लोकेश (गजराज भैया), आशीष कुमार रक्षांश कुमार, अवि कुमार कलई वालों को प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>आचार्य वर्धमान सागरजी ने कहा-भगवान और गुरु के दर्शन विनय पूर्वक करें : 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ  </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 13:14:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। केवलचंद कल्ली वाले, ज्ञान भरनी वाले, पारसमल बगड़ी वाले ने बताया कि शनिवार को जिनालय में जल, शर्करा, नारियल पानी, विभिन्न फलों के रस, धी, दूध, दही, केशर सर्वऔषधि, लाल सफेद चंदन, हल्दी पुष्प मंगल आरती, सुगंधित जल एवं शांतिधारा विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघस्थ शिष्या 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम समाधि साधना निरंतर एकांतर एक आहार एक उपवास से साथ चल रही है। आहार में भी सीमित मात्र मनुक्का जल, दूध और पानी ही ले रही हैं। दूध के अतिरिक्त अन्य 5 रसों ,सभी अनाज सहित काफी खाद्य सामग्री का त्याग कर दिया हैं।</p>
<p><strong>जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया और गजराज लोकेश ने बताया कि संत भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रावकों से कहा कि हमें दुनिया में जो कुछ भी प्राप्त होता है। वह हमारे पुण्य कर्मों से होता है। मनुष्य जीवन भी हमें अपने पुण्य कर्मों से ही मिला है। दुनिया में हम जैसा कर्म करेंगे। वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा। कहते भी हैं जैसी करनी वैसी भरनी। जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है और बच्चा रोता है। हमें दुनिया में आने के बाद ऐसे कर्म करने हैं कि जब हम हमारी आयु पूर्ण कर दुनिया से जाएं तो हमारे जाने के दुख में सारी दुनिया रोए। इसके लिए जरूरी है कि हमारे कर्म अच्छे होने चाहिए। हमारे जैसे गुरु होंगे हमें शिक्षा भी वैसी ही मिलेगी। अच्छे गुरु की संगत हमें अच्छे कर्म करवाएगी।</p>
<p><strong>प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं </strong></p>
<p>हमारे अच्छे कर्म और पुण्यों के कारण से ही हम लोगों के दिलों में जगह बना सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि जब भी आप गुरु या भगवान के पास जाएं तो उनके सामने विनम्रता पूर्वक दर्शन करे। हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति होती है। बस जरूरत है साधना और तपोबल की। प्रभु के सामने जो भी प्रार्थना करता है। प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं लेकिन, जरूरी नहीं जो आप मांग रहे हैं। वह सब आपको प्रभु प्रदान कर दे। जो भी आपको मिलना है वह आपके पुण्य कर्म के आधार पर ही मिलना है। अगर हमें अपने जीवन की दशा सुधारनी है तो हमें दिशा बदलनी पड़ेगी। राग, द्वेष, मोह ,माया और जीवन के कषायों को छोड़कर अपनी दिशा बदलोगे तो आपके जीवन के दशा अपने आप बदल जाएगी। प्रभु के पास जब भी आप जाएं उन से विनती करें प्रार्थना करें कि हे प्रभु जैसे आप हैं मुझे भी वैसा ही बनना है। ऐसा बनने के लिए मुझे पुरुषार्थ करने की शक्ति प्रदान करें।</p>
<p><strong>आचार्यश्री की आहारचर्या हुई </strong></p>
<p>आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की आहार चर्या केवलचंद, लोकेश गजराज कलई परिवार टोंक ओर समर, सनत राजेश पंचोलिया इंदौर के चौके में हुई। पारसमल फूलेता परिवार पुण्यार्जक के निवास से जुलूस आकर शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री आरती हुई। शाम को छहढाला की कक्षा में सभी उम्र के समाज जन शामिल होते हैं।</p>
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