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	<title>हुकुमचंद जैन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>हुकुमचंद जैन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गुरुओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन : अमृत एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी गुरु पूर्णिमा  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 08:39:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आषाढ़ मास में पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार गुरु पूर्णिमा अमृत योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में रविवार के पड़ रही है । धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से गुरु पूर्णिमा एक है। यह दिन भगवान वेद व्यास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आषाढ़ मास में पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार गुरु पूर्णिमा अमृत योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में रविवार के पड़ रही है । धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से गुरु पूर्णिमा एक है। यह दिन भगवान वेद व्यास और सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आषाढ़ मास में पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार गुरु पूर्णिमा अमृत योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में रविवार के पड़ रही है । धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से गुरु पूर्णिमा एक है। यह दिन भगवान वेद व्यास और सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।</p>
<p>गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान वेद व्यास का जन्म हुआ था। वेद व्यास को महाभारत, पुराण और वेदों का रचयिता माना जाता है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान करने का अवसर है। गुरु पूर्णिमा ज्ञान और शिक्षा के महत्व का प्रतीक है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करने का अवसर है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।गुरु का अर्थ है अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाला। महर्षि वेद व्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इस दिन को चुना गया है वेद व्यास ने महाभारत, पुराणों और वेदों का संकलन किया था, जिसके कारण वे &#8216;व्यास पूर्णिमा&#8217; के नाम से भी यह दिन जाने जाते हैं।</p>
<p>गुरु पूर्णिमा का दिन साधना, ध्यान और गुरु उपदेश को ग्रहण करने का महत्वपूर्ण समय होता है।आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी ये पूर्णिमा महत्वपूर्ण मानी जाती है ।</p>
<p><em>जैन ने कहा </em></p>
<p>गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त</p>
<p>सुबह का मुहूर्त: सुबह 05:16 से 07:14 बजे तक (गंगा स्नान)</p>
<p>दोपहर का मुहूर्त: 11:15 बजे से 1:23 बजे तक</p>
<p>शाम का मुहूर्त: शाम 6:16 बजे से 7:55 बजे तक गुरु पूजन किया जा सकता है।</p>
<p><strong>गुरु पूर्णिमा पर पूजा विधि</strong></p>
<p>सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें। भगवान वेद व्यास और अपने गुरु की प्रतिमा स्थापित करें। दीप प्रज्ज्वलित करें और धूप-बत्ती लगाएं।फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। गुरु मंत्रों का जाप करें । गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।</p>
<p>गुरु पूर्णिमा के दिन दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। आप गरीबों, ब्राह्मणों, या किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को दान दे सकते हैं।यह पर्व शिक्षा और ज्ञान के महत्व को दर्शाता है और शिक्षकों का सम्मान बढ़ाता है। गुरु पूर्णिमा समाज में आध्यात्मिक मार्गदर्शन का प्रतीक है, जिससे लोग सही दिशा में चलने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। गुरू पूर्णिमा का पर्व गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को उजागर करता है और हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।इस दिन को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना चाहिए, जिससे हमें ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो सके।</p>
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		<title>वतन की आजादी की खातिर दी अपने प्राणों की आहूति : आजादी के प्रथम नायक थे लाला हुकुमचंद जैन        </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Dec 2023 12:18:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[करीब-करीब 166 वर्ष पहले 19 जनवरी, 1858 के दिन निष्ठुर अंग्रेजों ने देशभक्त लाला हुकुमचन्द जैन, मुनीर बेग और हुकुमचन्द जैन के भतीजे फकीरचन्द जैन को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। जिनका गुनाह देश की आजादी की मांग था। जिन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। पढ़िए आजादी के परवाने हुकुमचन्द [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>करीब-करीब 166 वर्ष पहले 19 जनवरी, 1858 के दिन निष्ठुर अंग्रेजों ने देशभक्त लाला हुकुमचन्द जैन, मुनीर बेग और हुकुमचन्द जैन के भतीजे फकीरचन्द जैन को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। जिनका गुनाह देश की आजादी की मांग था। जिन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए आजादी के परवाने हुकुमचन्द जैन पर राजीव सिंघाई का  यह विशेष आलेख</span></strong><span style="color: #ff0000;">&#8230;</span></p>
<hr />
<p>सन् 1857 की क्रान्ति भारतीय आजादी के संघर्ष में मील का पत्थर रही है। सन् 57 की क्रान्ति से हिन्दुस्तान का बच्चा-बच्चा वाकिफ है। हर भारतवासी के जहन में आजादी की प्रथम लड़ाई आज भी गूंज रही है। सन् 1857 की क्रान्ति में भारतीय सैनिकों एवं हजारों देशभक्त युवाओं ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज बुलन्द की। जिसमें सैंकड़ों देशभक्तों को अपना बलिदान देना पड़ा। जिसमें पहला नाम अमर शहीद मंगल पांडे का आता है। वहीं इसी क्रान्ति में शहीद होने वाले देशभक्तों में दूसरा नाम अमर शहीद लाला हुकुमचन्द जैन का आता है, जिन्होंनें अंग्रेजी शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और देशभक्त युवाओं को संगठित कर संघर्ष किया।</p>
<p><strong>आजादी की मांग फांसी की सजा</strong></p>
<p>करीब-करीब 166 वर्ष पहले 19 जनवरी, 1858 के दिन निष्ठुर अंग्रेजों ने देशभक्त लाला हुकुमचन्द जैन, मुनीर बेग और हुकुमचन्द जैन के भतीजे फकीरचन्द जैन को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। जिनका गुनाह देश की आजादी की मांग था। जिन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। ऐसे अमर शहीदों को आज पूरा देश कोटि-कोटि नमन और अभिनन्दन करता है।</p>
<p><strong>थे बहादुर शाह जफर के दरबार में</strong></p>
<p>लाला हुकुमचंद जैन का जन्म सन 1816 में हांसी (हिसार) में दुनीचंद जैन के घर हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा हांसी में हुई। अपनी शिक्षा व प्रतिभा के बल पर इन्होंने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र के दरबार में पद प्राप्त कर लिया। सन 1841 में मुगल बादशाह ने इनको हांसी और करनाल जिले के इलाकों का कानूनगो व प्रबंधकर्ता नियुक्त किया। सात साल तक मुगल बादशाह के दरबार में रहे। इसके बाद हांसी लौट आए। अमर शहीद लाला हुकुमचंद जैन का परिवार वर्तमान में हरियाणा के हांसी (हिसार) में ही रहता है। जहां डडल पार्क के सामने उनकी हवेली है। 19 जनवरी को लाला हुकुमचंद जैन का बलिदान दिवस हांसी की डडल पार्क में मनाया जाता है।</p>
<p><strong>देशभक्ति की भावना का किया संचार</strong></p>
<p>सन् 1857 की क्रांति में लाला हुकुमचंद जैन ने बेहद कम संसाधनों के बावजूद अंग्रेजी सरकार के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजाया और अंग्रेजों के खिलाफ आमजन में देशभक्ति की भावना का संचार किया। उन्होंने फारसी भाषा में एक पत्र लिखकर बादशाह बहादुरशाह जफर से सहायता मांगी। यह गुप्त पत्र अंग्रेजों के हाथ लग गया। इसी बीच दिल्ली पर अंग्रेजों ने कब्जा कर मुगल सम्राट को गिरफ्तार कर लिया। 15 नवंबर 1857 को अंग्रेजों के हाथ लाला हुकुमचंद और मिर्जा मुनीर बेग के हस्ताक्षरों वाला वह पत्र लग गया। दिल्ली के कमिश्नर सीएस सांडर्स ने हिसार के कमिश्नर नव कार्टलैंड को वह पत्र भेजते हुए कठोर कार्रवाई के लिए लिखा। इसके आधार पर अंग्रेजी सरकार ने लाला हुकुमचंद जैन और उनके साथी मुनीर बेग को उनके घर के सामने ही 19 जनवरी 1858 को फांसी पर लटका दिया। लाला हुकुमचंद के भतीजे फकीरचंद को अदालत से बरी होने के बाद भी फांसी दे दी गई। लाला हुकुमचंद जैन के शव को धर्म विरूद्ध जलाने की जगह दफनाया गया जबकि मुनीर बेग के शव को दफनाने की बजाय जलाया गया । वहीं लाला हुक्मचन्द जैन की सम्पति का नीलाम कर दिया गया ।</p>
<p><strong>अविस्मरणीय बलिदान</strong></p>
<p>सन् 1857 की क्रान्ति के ऐसे बेजोड़ नायकों ने अपने वतन की आजादी की खातिर अपने प्राणों की आहूति दे दी। ऐसे देशभक्त वीरों को देश हमेशा याद करता रहेगा। अमर शहीद लाला हुकुमचन्द जैन का देश की आजादी के लिए दिया गया बलिदान सदियों-सदियों के लिए अविस्मरणीय रहेगा। ऐसे में देशभक्तों की शहादत व उपस्थिति से ही भारत आज स्वतंत्रता की पताका फहरा रहा है। उनकी स्मृति में अलग-अलग सथानों पर स्मारक आदि बने हुए हैं। लाला हुकुमचन्द जैन जैसे अमर शहीदों की शहादत को भारत के हर गांव-गांव, शहर-शहर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए ताकि वर्तमान पीढ़ी को हमारे स्वर्णिम इतिहास व अमर वीरों के बारे में जानकारी मिल सके तथा वे उनकी देशभक्ति से प्रेरणा ले सके।</p>
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