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	<title>हजारीबाग &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>श्री सम्मेद शिखरजी में ‘ले छलांग!’ पुस्तक का विमोचन : झिझक से क्रियान्वयन तक-निडर उद्यमिता के लिए आपका रोडमैप </title>
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		<pubDate>Tue, 20 May 2025 10:00:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी, मधुबन में ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन हुआ। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेदशिखर ट्रस्ट, मधुबन के तत्वावधान में डॉ. पंकज जैन की पुस्तक ’“ले छलांग! ‘फ्रॉम हेजिटेशन टू एक्ज्यूक्यूशन-योर रोडमेप टू फियरलेस इंटरपिनर्शिप’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों और शहरों से आए समाजजन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी, मधुबन में ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन हुआ। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेदशिखर ट्रस्ट, मधुबन के तत्वावधान में डॉ. पंकज जैन की पुस्तक ’“ले छलांग! ‘फ्रॉम हेजिटेशन टू एक्ज्यूक्यूशन-योर रोडमेप टू फियरलेस इंटरपिनर्शिप’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों और शहरों से आए समाजजन और विद्धान मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">मधुबन से पढ़िए, यह खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मधुबन (झारखंड) /कोडरमा।</strong> जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी, मधुबन में ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन हुआ। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेदशिखर ट्रस्ट, मधुबन के तत्वावधान में डॉ. पंकज जैन की पुस्तक ’“ले छलांग! ‘फ्रॉम हेजिटेशन टू एक्ज्यूक्यूशन- योर रोडमेप टू फियरलेस इंटरपिनर्शिप’ का विमोचन राजकुमार जैन अजमेरा, हजारीबाग ने किया। श्री सम्मेदशिखरजी जो एक सुदूरवर्ती गांवों से घिरा क्षेत्र है। यहां का पावन वातावरण इस विमोचन समारोह को और भी विशेष बनाता है। डॉ. जैन को इस पुस्तक के लिए जैन धर्म के कई गुरुओं, मुनि महाराज और आर्यिका माता जी का आशीर्वाद प्राप्त है। जो पुस्तक की आध्यात्मिक और सामाजिक महत्ता को और बढ़ाता है। आयोजकों का मानना है कि यह तीर्थस्थल न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। बल्कि प्रेरणा, ज्ञान और सामाजिक-आर्थिक विकास का स्रोत भी है। इस आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट और प्रेरक संदेश है कि डर को त्यागें, आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाएं और अपने सपनों को साकार करें।</p>
<p>जानकारी के अनुसार पुस्तक के लेखक डॉ. पंकज जैन, हजारीबाग, झारखंड निवासी और ब्लू ओशीन स्टील्स के सह-संस्थापक हैं, जो भारत की सबसे तेजी से उभरती विशेष स्टील सप्लाई चेन मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है। 33 वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने 18$ स्टील प्लांट्स को जोड़ने वाला एक अभिनव सप्लाई चेन मॉडल विकसित किया है। सस्टेनेबिलिटी में पीएचडी डॉ. जैन ने नेतृत्व को लाभ के बजाय उत्तरदायित्व से जोड़ने की अनूठी दृष्टि प्रस्तुत की है। उन्होंने 260 से अधिक वर्कशॉप्स आयोजित कीं। 10 हजार से अधिक प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित किया और आईआईटी, कॉर्पाेरेट्स और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 150 से अधिक प्रेरक भाषण दिए। “ले छलांग!” न केवल उद्यमिता की मार्गदर्शक है, बल्कि आत्मिक और वैचारिक जागरण का सशक्त माध्यम भी है।</p>
<p><strong>‘ले छलांग!’ डर और हिचकिचाहट को दूर करने का प्रभावी माध्यम</strong></p>
<p>विमोचन समारोह मुख्य अतिथि राजकुमार जैन अजमेरा रहे। राजकुमार जैन अजमेरा, जो श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर ट्रस्ट, मधुबन के महामंत्री हैं। श्री सम्मेदशिखरजी में अनेक जनकल्याणकारी कार्यों से जुड़े हैं। वे भारत वर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी, श्रीसेवातन, गुणायतन न्यास, सम्मदानचल विकास समिति जैसी संस्थाओं के साथ-साथ झारखंड की विभिन्न व्यापारिक और धार्मिक संस्थाओं में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। उनके प्रेरक उद्बोधन ने उपस्थित श्रोताओं में उद्यमिता और समाज सेवा के प्रति नया जोश और उत्साह जगाया। साथ ही राजकुमार जैन अजमेरा के ओजस्वी विचारों ने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ‘हमने कई अवसरों पर देखा और अनुभव किया है कि श्री सम्मेदशिखरजी के सुदूरवर्ती गांवों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।</p>
<p>ये युवा अपनी क्षमताओं से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं, किंतु कुछ में आत्मविश्वास की कमी के कारण वे अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते। ऐसे युवाओं के लिए ‘ले छलांग!’ पुस्तक क्रांतिकारी और प्रेरणादायी साधन है। इसी कारण आज यह आयोजन को इस क्षेत्र में करना मकसद रहा है।’ जैन ने कहा कि ‘मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह पुस्तक श्री सम्मेदशिखरजी ही नहीं देश और विश्व भर के उन युवाओं के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक सिद्ध होगी, जो उद्यमिता की राह पर कदम रखना चाहते हैं। ‘ले छलांग!’ डर और हिचकिचाहट को दूर करने का प्रभावी माध्यम है। यह पुस्तक व्यावहारिक रणनीतियों और स्पष्ट रोडमैप के माध्यम से उद्यमियों को आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती है।</p>
<p><strong>‘सरल और सुंदर शब्दों में लिखी गई कृति’</strong></p>
<p>विमोचन समारोह में उपस्थित श्रोताओं ने डॉ. जैन के अनुभवों और ‘ले छलांग!’ के संदेश से गहरी प्रेरणा ग्रहण करते हुए पुस्तक की शैली की सराहना की श्रोताओं ने एक सुर में कहा कि ‘सरल और सुंदर शब्दों में लिखी गई यह कृति न केवल पढ़ने में आसान है, बल्कि हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है।’ इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि तीर्थस्थल केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रेरणा के जीवंत केंद्र भी हैं। श्री दिगंबर जैन शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर ट्रस्ट, मधुबन सभी उद्यमियों, समाजसेवियों और प्रेरणा की तलाश में रहने वाले व्यक्तियों, विशेष रूप से सुदूर क्षेत्रों के युवाओं को ‘ले छलांग!’ पढ़ने और इसके संदेश को आत्मसात करने के लिए हार्दिक आमंत्रण देता है। वर्तमान में पुस्तक इंग्लिश भाषा में उपलब्ध है। जल्द ही हिन्दी भाषा में भी पुस्तक उपलब्ध की जाएगी। इस अवसर पर मधुबन की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित देश-विदेश से आए अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।</p>
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		<title>तिर्थक्षेत्र कमेटी के क्षेत्रीय निहारिका के महामंत्री का स्वागत ओैर सम्मानः जन्मदिन और शादी की सालगिरह तीर्थक्षेत्र में मनाएं  </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Mar 2025 06:54:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इतखोरी में हजारीवाग निवासी प्रसिद्ध उद्योगपति अनेक संस्थाओं के ट्रस्टी अजमेरा परिवार ने शादी की सालगिरह पर 70 श्रावक-श्राविकाओं के साथ श्री शीतलनाथ भगवान के जन्मस्थली पर बड़ी ही भक्ति-भाव आनंद के साथ शांति विधान कराने का सौभाग्य प्राप्त किया। पढ़िए राजकुमार अजमेरा से इतखोरी की यह पूरी खबर&#8230; इतखोरी। भगवान शीतल नाथ की जन्म [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इतखोरी में हजारीवाग निवासी प्रसिद्ध उद्योगपति अनेक संस्थाओं के ट्रस्टी अजमेरा परिवार ने शादी की सालगिरह पर 70 श्रावक-श्राविकाओं के साथ श्री शीतलनाथ भगवान के जन्मस्थली पर बड़ी ही भक्ति-भाव आनंद के साथ शांति विधान कराने का सौभाग्य प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजकुमार अजमेरा से इतखोरी की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इतखोरी।</strong> भगवान शीतल नाथ की जन्म भूमि, भद्दलपुर इटखोरी में हजारीवाग निवासी प्रसिद्ध उद्योगपति अनेक संस्थाओं के ट्रस्टी राज कुमार-मंजू अजमेरा ने शादी की सालगिरह पर ऋषि-स्वेता, कुणाल-रिंकी अजमेरा परिवार ने 70 श्रावक-श्राविकाओं के साथ 1008 श्री शीतलनाथ भगवान के जन्मस्थली पर बड़ी ही भक्ति-भाव आनंद के साथ शांति विधान कराने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p><strong>अभिषेक व शांतिधारा और असीमित पुण्य अर्जन किया</strong></p>
<p>वर्तमान में जहां लोग अपनी सालगिरह जन्मदिन आदि शुभ अवसर पर होटलों में पिकनिक मनाते है। अभक्ष्यों का सेवन करते हैं। वही हजारीबाग निवासी राज कुमार-मंजू अजमेरा ने अपनी 50वी सालगिरह भगवान के जन्म भूमि में भदलपुर की पावन भूमि पर मनाया गया। सुबह 1008 शीतलनाथजी में का प्रथम अभिषेक और शांतिधारा कर मनाई और असीमित पुण्य अर्जन किया।</p>
<p><strong>जन्मदिन और शादी की सालगिरह तीर्थक्षेत्र में मनाएं </strong></p>
<p>कार्यक्रम में श्री शीतलनाथ ट्रस्ट के महामंत्री सुरेश झांझरी ने जैन राज कुमार-मंजू अजमेरा को तिलक, माला मुकुट पहनाकर स्वागत किया और कहा कि सभी जैन श्रावक को अपना जन्मदिन और शादी की सालगिरह किसी तीर्थक्षेत्र में मनाना चाहिये। साथ ही सभी श्रावक इस क्षेत्र में जुड़े और अपनी चंचला लक्ष्मी का उपयोग भगवान की जन्म भूमि में निर्माण हो रहे जिन मंदिर और मूर्ति स्थापना में लगाकर पुण्य अर्जित करें।</p>
<p><strong>संगीतमय शान्ति विधान </strong></p>
<p>इसके बाद झुमरी तिलैया कोडरमा के प. अभिषेक जैन शास्त्री के निर्देशन में बहुत ही भक्ति भाव के साथ संगीतमय शान्ति विधान धूमधाम से कराया गया। इस विधान में 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के चरणों मे 120 अर्घ्य चढ़ाया गया। विधान के बाद जैन धर्म के तीर्थंकर 1008 अरहनाथ भगवान का पूजन के साथ गर्भ कल्याणक का अर्थ चढ़ाया गया।</p>
<p><strong>विधान में गणमान्यजन शामिल हुए</strong></p>
<p>आज फागुन शुक्ल तृतीया के दिन पूरे विश्व मे श्री अरहनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक के रूप में मनाया जाता है। इस विधान में विशेष रूप से शामिल होने वाले प्रताप अजमेरा, भागचंद लुहाड़िया, दिलीप-पुष्पा अजमेरा, प्रदीप अजमेरा, अरुण सेठी, सुरेश-आशा विनायका, अनिल जैन, प्रेमा टोंग्या, रश्मि अजमेरा, संगीता अजमेरा, हजारीबाग, हरखचंद जैन, प्रकाश जैन, सौरभ जैन रामगढ ,सुनील अजमेरा कोडरमा आदि शामिल हुवे।</p>
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		<title>पूज्य मुनि श्री सुयश सागर जी मुनिराज का रहा सानिध्य : श्री दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर प्रामाणिक पाठशाला का हजारीबाग में आयोजन </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Oct 2024 08:03:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन समाज झुमरी तिलैया के अंतर्गत चलने वाले श्री दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर प्रामाणिक पाठशाला की शिक्षिकाओं द्वारा पाठशाला के सभी बच्चों को जैन गुरु पूज्य मुनि श्री सुयश सागर जी मुनिराज का दर्शन करने मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज की जन्मस्थली हजारीबाग ले जाया गया। हजारीबाग पहुंचकर सभी शिक्षिकाओं और बच्चों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन समाज झुमरी तिलैया के अंतर्गत चलने वाले श्री दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर प्रामाणिक पाठशाला की शिक्षिकाओं द्वारा पाठशाला के सभी बच्चों को जैन गुरु पूज्य मुनि श्री सुयश सागर जी मुनिराज का दर्शन करने मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज की जन्मस्थली हजारीबाग ले जाया गया। हजारीबाग पहुंचकर सभी शिक्षिकाओं और बच्चों ने पूज्य गुरुदेव के चरणों में श्रीफल के साथ अष्ट द्रव्यों से पूजन कर अर्घ्य समर्पण किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरी तिलैया।</strong> श्री दिगंबर जैन समाज झुमरी तिलैया के अंतर्गत चलने वाले श्री दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर प्रामाणिक पाठशाला की शिक्षिकाओं द्वारा पाठशाला के सभी बच्चों को जैन गुरु पूज्य मुनि श्री सुयश सागर जी मुनिराज का दर्शन करने मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज की जन्मस्थली हजारीबाग ले जाया गया। हजारीबाग पहुंचकर सभी शिक्षिकाओं और बच्चों ने पूज्य गुरुदेव के चरणों में श्रीफल के साथ अष्ट द्रव्यों से पूजन कर अर्घ्य समर्पण किया। सभी ने गुरुवर का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर अपने जीवन को धन्य बनाया। गुरुदेव ने सभी बच्चों और पाठशाला के प्रति समर्पित सभी को दोनों हाथों से मंगल आशीर्वाद दिया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68113" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0013-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />बच्चों में देखने को मिले संस्कार</strong></p>
<p>संध्या में गुरुवर के द्वारा णमोकार चालीसा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वप्रथम विद्यासागर पाठशाला कोडरमा के बच्चों ने मंगलाचरण किया। इसके बाद हजारीबाग समाज के सभी पदाधिकारियों ने सभी भक्तों को तिलक, माला और दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। गुरुवर ने अपने मंगल आशीर्वाद में कहा, &#8220;भारत में अगर बच्चों में भक्ति देखनी है, तो कोडरमा के बच्चों में देखो। मेरे 2023 के चातुर्मास में कोडरमा में सभी बच्चों में संस्कार देखने को मिले।&#8221; उन्होंने कहा कि सभी बच्चों में पूजा-अभिषेक के प्रति अपार भक्ति है और कोडरमा की पाठशाला बच्चों को सुव्यवस्थित तरीके से संस्कारित कर रही है</p>
<p><strong>अर्पित किया श्रीफल</strong></p>
<p>इस अवसर पर हजारीबाग समाज के कपूर चंद, प्रेमा, राजेश लुहाड़िया परिवार द्वारा सभी बच्चों को प्रभावना के रूप में गिफ्ट देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, कोडरमा समाज के बच्चों ने अपने आराध्य गुरु श्री 108 सुयश सागर मुनिराज से पुनः कोडरमा आगमन के लिए श्रीफल भी समर्पित किया। पाठशाला की संयोजिकाओं में सुनीता सेठी, रानी छाबड़ा, जूली लुहाड़िया, मोना छाबड़ा, नीलम सेठी, रेखा झांझरी, संगीता छाबड़ा, क्षमा सेठी, रिंकू गंगवाल, कल्पना सेठी, प्रियंका छाबड़ा, सीमा जैन, और किरण ठोल्या शामिल रहीं। समाज के प्रचार-प्रसार मंत्री राज कुमार अजमेरा एवं ईशान कासलीवाल भी सभी बच्चों के साथ गए। इस अवसर पर समाज के पूर्व मंत्री ललित जी भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>यादों में आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी : आचार्य श्री ने कहा था कि तुम बहुत अच्छा कर रहे हो </title>
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		<pubDate>Wed, 21 Feb 2024 11:34:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अनिल कुमार जैन, अध्यक्ष पारस पद यात्रा संघ धनबाद, सचिव जैन समाज झरिया, अध्यक्ष पारसनाथ शिक्षायतन समिति ने अपने पिताजी और स्वयं के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के संस्मरण श्रीफल जैन न्यूज के साथ बांटे हैं&#8230; हजारीबाग। जनवरी 1983 में गुरुवर हजारीबाग आए थे। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा था: जो पत्थर छैनी हथोड़ी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अनिल कुमार जैन, अध्यक्ष पारस पद यात्रा संघ धनबाद, सचिव जैन समाज झरिया, अध्यक्ष पारसनाथ शिक्षायतन समिति ने अपने पिताजी और स्वयं के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के संस्मरण श्रीफल जैन न्यूज के साथ बांटे हैं&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>हजारीबाग।</strong> जनवरी 1983 में गुरुवर हजारीबाग आए थे। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा था: जो पत्थर छैनी हथोड़ी की चोट से डरेगा, वो पत्थर कभी मूर्ति नहीं बन सकता है। ये बात सुनकर मैं गुरुदेव के साथ पैदल हजारीबाग से दारू नामक जगह जो 12 किलोमीटर दूर है चला गया। ये बात मेरे पिताजी ने मुझे अपने कॉपी में लिखवाई। पिताजी नहीं रहे, गुरुवर विद्यासागर जी भी नहीं रहे। पर उनकी कही बात आज भी मुझे प्रेरणा देती है। 1983 मे कई बार आचार्य श्री विद्यासागर जी से पिताजी के सानिध्य में इसरी बाजार स्थित उदासीन आश्रम गया। उन्होंने बताया था कि भारत में कितने जैन धर्म वाले लोग हैं, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि कितने लोग जैन धर्म के सिद्धांत, आदर्श को मानते हैं। जियो और जीने दो, अहिंसा परमो धर्म: का पालन करते हैं। 1983 में मैं दस साल का था। तब इच्छा हुई कि आचार्य श्री विद्यासागर जी के साथ हो जाऊं। तब पिताजी ने समझाया कि साथ जाने की तुम्हारी उम्र और परिपक्वता अभी नहीं है। फिलहाल तुम इस क्षेत्र में उनके बताए ज्ञान, सिद्धांत को जन जन तक पहुंचाने में मदद करो आचार्य श्री विद्यासागर जी के पदचिह्नों पर और पारसनाथ धाम के आस पास लोगों को जागरूक करने, जैन धर्म की अच्छाई समझाने में।</p>
<p>मैं अपने शहर झरिया से स्वर्णभद्र कूट तक पदयात्रा निकालने लगा। यात्रा का मकसद था रास्ते में जो लोग, बच्चे, विद्यालय मिलते, उन्हें जैन धर्म के बारे में बताना। समाज कल्याण के लिए कार्य करना। स्वास्थ्य शिविर, दवा वितरण करना इत्यादि। तभी बिहार झारखण्ड का बटवारा हो गया। झारखण्ड में जो मुख्यमंत्री बने वो जैन आदीवासी समुदाय के बीच खाई बढ़ाना चाहते थे। उसे रोकने के लिए मैंने पारसनाथ के आस पास के क्षेत्र में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया, निशुल्क दवा वितरण किया। सभी विद्यालय मे बच्चों में प्रतियोगिता आयोजित की,, पुरस्कार दिए। नतीजा ये हुआ कि बच्चे हम लोगों के आने का इंतजार करते थे। जिस दिन हमारी टीम वहां जाती थी। सभी बच्चे एकदम साफ सुथरे, नहा धोकर आते थे। विद्यालय के शिक्षक भी हमारे इस प्रयास से बहुत खुश थे। हम लोग विद्यालय में जाकर बताते थे कि पारस नाथ तीर्थ स्थल पवित्र स्थल है। ये सिद्ध भूमि हैं। यहां सभी के भगवान का वास है। ये हम सब का है। एक उदाहरण से समझें। अगर आपके आस पास कोई खाली जमीन उपलब्ध है तो आप चाहेंगे कि उस पर मेरा कब्जा हो जाए। लेकिन अगर आपको पता है कि ये जमीन किसी और की है। तो आपका लालच खत्म हो जाएगा। उसी तरह हम लोगों ने बच्चों और शिक्षक को बताया कि पारसनाथ पर्वत जैनियों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां से 20 तीर्थंकर मोक्ष प्राप्त कीए हैं। उसमें आदीवासी समुदाय का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसका बहुत ही सकारात्मक असर पड़ा। मैंने अपनी इस मुहिम, कार्यक्रम की पूरी जानकारी आचार्य श्री विद्यासागर जी को दी। तो वो बहुत प्रसन्न हुए। आशीर्वाद दिया और कहा एकदम सही जा रहे हो। जैन समाज को तुम जैसे कर्मठ, सचेत, मिलनसार सदस्यों की जरूरत है। जो सबको जोड़ सके।</p>
<p>उनके देवलोक गमन पर उनकी बातें, शिक्षा, आशीर्वाद आंखों के सामने घूम रहा है।</p>
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