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	<title>सेवा पेथी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार: छीतरमल ने पीड़ित मानवता की सेवा को बनाया एकमेव ध्येय  </title>
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		<pubDate>Fri, 30 May 2025 11:11:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सेवा को ही जीवन बना लेने वाले व्यक्तित्व बहुत कम हुए हैं। उनमें छीतरमल बीजाका सबसे अलग हैं। सेवा पेथी के माध्यम से इलाज करने वाले ऐसे व्यक्ति ने लगभग एक साल में ही कई शिविर लगाकर लोगों को रोग मुक्त कर संयमित जीवन की शिक्षा भी दी है। आइए, उन्हीं के भगीरथी प्रयास के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सेवा को ही जीवन बना लेने वाले व्यक्तित्व बहुत कम हुए हैं। उनमें छीतरमल बीजाका सबसे अलग हैं। सेवा पेथी के माध्यम से इलाज करने वाले ऐसे व्यक्ति ने लगभग एक साल में ही कई शिविर लगाकर लोगों को रोग मुक्त कर संयमित जीवन की शिक्षा भी दी है। <span style="color: #ff0000">आइए, उन्हीं के भगीरथी प्रयास के बारे पढ़िए, बता रहे हैं कोटा के पारस जैन ‘पार्श्वमणि&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> मैंने एक गीत सुना था ‘किसी की मुस्कुराहट पर हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है’ जी हां। मैं आपका ऐसे व्यक्ति से परिचय करवा रहा हूं। जिसने पीड़ित मानवता सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया। भारत में व्यक्ति की नहीं व्यक्तित्व की पूजा होती है। प्रकृति की हर वस्तु दूसरों को सदैव देती ही देती। पीड़ित मानवता की सेवा में पूर्ण निष्ठा से समर्पित व्यक्तित्व का नाम है छीतरमल बीजाका। इनका जन्म कालूराम बीजाका बगुली देवी के घर आंगन खंडेला में हुआ। सीए की पढ़ाई पूर्ण कर सरकारी नौकरी प्राप्त की। मगर रिश्वत नहीं लेने और झूठ नहीं बोलने के संकल्प के चलते नौकरी छोड़ दी और आप निकल पड़े एक ऐसी खोज में, जिससे लोगों का इलाज भी हो जाए और पैसा भी नहीं लगे।</p>
<p>इस तलाश में देश के 35 से अधिक शहरों में जाकर प्राकृतिक चिकित्सा शिविरों में भाग लिया और इसके बारीकी से विधान सीखे। कई बड़े-बड़े संतों के पास गए, उनसे ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने जयपुर सिटी में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र को जाकर देखा और उसको आत्मसात किया। आपको वहां की समस्त विधियां बहुत पसंद आईं। अभी तक आयुर्वेदिक, एलोपैथी, होम्योपैथिक, प्राकृतिक चिकित्सा इलाज होता आया है। बीजाका ने रोगियों का इलाज करने की शुरुआत सेवापेथी के माध्यम से की। उनकेे इस सद्कार्य में पुत्र डॉ. मोहित बीजाका, पुत्र वधू वर्षा बीजाका और चिकित्सा प्रभारी चेतराम कुमावत, रमेश शर्मा का भी सबसे योगदान बना रहता है।</p>
<p><strong>पंच तत्व फाउंडेशन ट्रस्ट का 2024 में किया गठन </strong></p>
<p>छीतरमल बीजाका ने विगत 45 वर्षों की अथक साधना के सद प्रयास से पंच तत्व फाउंडेशन ट्रस्ट का 1 जनवरी 2024 को गठन किया। इस ट्रस्ट से नर सेवा नारायण सेवा के अंतर्गत पहला निःशुल्क सेवापेथी शिविर 4 फरवरी 2024 को लगाया गया। आप अभी तक इस ट्रस्ट के माध्यम से 39 निःशुल्क सेवापेथी शिविर लगा चुके हैं। जिसके माध्यम से सैकड़ों लोगों को कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिल चुका है। गले में कैंसर जैसी बीमारी भी दूर ही चुकी है। यहां पर प्राकृतिक तरीके से सिरदर्द, जुकाम, खांसी, कफ, अस्थमा, एलर्जी, एसीडिटी, अल्सर (पेट के रोग ), कब्ज, गैस, पाईल्स, त्वचा रोग (खुजली) नेत्र रोग, तनाव डिप्रेशन जैसे सभी रोगों से लोगों को मुक्ति मिल जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि जो भी लोग यहां अपना इलाज करवाने पंच तत्व ट्रस्ट आते हैं। बीजाका जो सेवा करते हैं, वो देखते ही बनती है। जो व्यक्ति एक बार शिविर में आता ह,ै वो दुबारा यहां आकर निःशुल्क सेवा भी देने आता है।</p>
<p><strong>इस तरह की रहती है शिविर की दिनचर्या</strong></p>
<p>सुबह 5 बजे उठाना होता है। फिर योगा की क्लास लगती है। उसके बाद एनिमा, वमन, नेत्र शोधन फिर जलनेती किया जाता है। फिर मिट्टी से लेपकर पेट पर पट्टिका की जाती है। मिट्टी चिकित्सा की जाती है। फिर कटी स्नान, रीढ़ स्नान, सौम्य गर्म पाद स्नान, सर्वांग लपेट, शिरोधारा, जानू बस्ति, कटि बस्ति, ग्रीवा बस्ति सूर्य किरण चिकित्सा की जाती है। फिर उसके बाद जूस उसके बाद तेल मालिश फिर स्नान किया जाता है। उसके बाद दो चटनी, कटा हुआ सलाद और फल दिया जाता है। दिन में डॉक्टर क्लास लगाते हैं। छीतरमल बीजाका ने बताया कि आप क्या सोचते हैं? आप क्या खाते हैं? इसका जीवन में बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अग्नि से पका भोजन नहीं खाएं। अंकुरित आहार लेने से रोग रहित जीवन हो जाता है।</p>
<p><strong>डॉ. मोहित का शतकाधिक संस्थाओं ने किया सम्मान </strong></p>
<p>आज फास्ट फूड के जमाने में बच्चों को छोटी सी उम्र में बीमारियां हो जाती हैं। डॉ. मोहित बीजाका का अभी तक 100 से अधिक संस्थाओं ने सम्मान किया है। अभिनंदन पत्र प्रदान किए हैं। वर्तमान समय में जब सामूहिक परिवार एकल होते जा रहे हैं। वहां पंचतत्व आश्रम फेडरेशन ट्रस्ट 40 से 50 लोगों को एक साथ नित्य कर्म, खिलाना पिलाना, बैठाना, सुलाना सब एक साथ होता है। जब जीवन में दवा का असर खत्म हो जाता है। तब दुआओं का असर शुरू होता है और जब दुआओं का असर शुरू होता है तो फिर वो खाली नहीं जाती।</p>
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