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	<title>सुरक्षित &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>विश्व योग दिवस पर विशेष: योग हमें खुद से मिलाता है</title>
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		<pubDate>Mon, 20 Jun 2022 18:27:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आलेख:- डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर। योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में योगियों द्वारा भारत में हुई थी। योग का अर्थ है जुड़ना, मन को वश में करना और वृत्तियों से मुक्त होना। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द से हुई है, जिसके दो अर्थ हैं :– पहला- जोड़ना और दूसरा– अनुशासन। योग का अभ्यास [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800000;">आलेख:- डॉ. सुनील जैन संचय</span></p>
<p><strong>ललितपुर।</strong> योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में योगियों द्वारा भारत में हुई थी। योग का अर्थ है जुड़ना, मन को वश में करना और वृत्तियों से मुक्त होना। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द से हुई है, जिसके दो अर्थ हैं :– पहला- जोड़ना और दूसरा– अनुशासन। योग का अभ्यास हमें शरीर व मस्तिष्क के जुड़ाव और शरीर व मस्तिष्क के अनुशासन को सिखाता है। योग आपको स्वस्थ और सुंदर बनाता है।</p>
<p>योग भारतीय संस्कृति की हजारों-लाखों वर्ष पुरानी अमूल्य विरासत है, लेकिन जब कोरोना वायरस का कोहराम मचा तो यह सेहत का ऐसा मंत्र हो गया, जिसे सभी चिकित्सा पद्धतियों के महारथियों ने दोहराया। सभी ने माना कि घर पर रहकर भी प्राणायाम, आसन और ध्यान करके सुरक्षा कवच हासिल कर सकते हैं। योग शरीर,  मन, आत्मा, मन-वचन-कर्म और परमात्मा का जुड़ना ही है।</p>
<p><strong>योग के गुण क्या है जानिए:-</strong></p>
<p>योग प्रकृति के आत्मा के ईश्वर के गुणों को उत्पन्न करता है, मनुष्य को मानसिक तनाव से दूर रखता है,  चिन्ता व भय से मुक्ति में मददगार रहता है, मनुष्य को ईर्ष्या, द्वेष, घृणा से बचाता है। योग की खूबसूरती यह है कि यह हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक की देख-रेख करते हुए बराबर उनकी मरम्मत करता है। शरीर लयबद्ध योगासन द्वारा प्रशिक्षित व स्वस्थ किये जाते हैं, तो मन या मानस को ध्यान एवं प्राणायाम के जरिए इन सबसे ऊपर है।</p>
<p>हमारी आध्यात्मिक आवश्यकताएं जिसकी देखभाल और पूर्ति दिव्यता पर एकाग्रता के जरिए योग ही करता है। जब कभी मन में दुविधा हो, मन भ्रमित हो या व्याकुल हो तो योगाभ्यास करते ही हम पाते हैं मन में एकदम निश्चलता आ जाती है। योगासन का यही बड़ा प्रभाव है कि मन की सब दुविधाएं और द्वन्द शान्त हो जाते हैं।</p>
<p>योगश्चित्तवृत्तिनिरोध: (पातंजलि योग सूत्र १-२) योगाभ्यास करने से हमारे जीवन में भौतिक,  मानसिक,  भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तरों पर आते सभी दुख दूर होते हैं। योग के अनुशासन में बंधे रहने से सभी प्रकार के ज्ञात-अज्ञात, शारीरिक और मानसिक दु:ख दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।</p>
<p><strong>शरीर, मन और आत्मा के मध्य संतुलन:-</strong></p>
<p>पिछले पचास सालों में योग ना सिर्फ अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बन चुका है, दुनिया के हजारों लाखों लोगों के लिए एक जाना पहचाना नाम बन चुका है। योग में जो शक्ति है वह दुनिया के और किसी भी व्यायाम में नहीं है। योग की सबसे खासियत यही है कि योग के लिए आपको किसी भी प्रकार के यंत्र की आवश्यकता नहीं है। योग एक ऐसी शारीरिक क्रिया है जिससे बिना किसी औषधि के सभी रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।</p>
<ul>
<li>योग के लिए प्रतिदिन सुबह बस 20-30 मिनट दें और दिन भर की थकावट से दूर रहे।</li>
<li>बच्चों के लिए भी योग एक बेहतर व्यायाम है, जिससे वे स्वस्थ रहते हैं</li>
<li>योग से बच्चों का दिमाग शांत और मजबूत बनता है।</li>
</ul>
<p>यह एक ऐसी पद्धति है जिसके माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के मध्य संतुलन स्थापित किया जा सकता है। यह हमें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने का एक स्वभाविक तरीका है। योग को अपनी दिनचर्या का अंग बना लेने से हम स्&#x200d;वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि स्वयं के अंदर एक नई ऊर्जा का संचार किया जा सकता है। शरीर को सही आकार में लाने के लिए यह बहुत सुरक्षित, आसान और कारगर तरीका है।</p>
<p><strong>आत्म-अनुशासन और आत्म-जागरूकता का विकास:-</strong></p>
<p>योग एक व्यावहारिक दर्शन की तरह है जो नियमित अभ्यास के माध्यम से हमारे भीतर आत्म-अनुशासन और आत्म-जागरूकता विकसित करता है। योग किसी भी उम्र में किसी के भी द्वारा अभ्यास किया जा सकता है क्योंकि यह उम्र, धर्म या स्वास्थ्य परिस्थितियों के परे है। योग के लिए बस अनुशासन और दृढ़ संकल्प ही  आवश्यक शर्तें हैं। साथ ही यह जीवन में परिवर्तन, शारीरिक और मानसिक समस्याओं के बिना स्वस्थ जीवन प्रदान करता है।</p>
<p><strong>योग के प्रवर्तक भगवान ऋषभदेव :-</strong></p>
<p>यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है, जो शरीर और मस्तिष्क के संतुलन के साथ ही प्रकृति के करीब आने के लिए ध्यान के माध्यम से किया जाता है। यह पहले समय में हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों द्वारा किया जाता था। वास्तव में योग भारतीय परंपरा की एक समृद्ध देन है। भारत में प्राचीन काल से ही जैन परंपरा ने योग एवं ध्यान विषयक महत्वपूर्ण अवदान दिया है।</p>
<p>जैन धर्म में योग अत्यन्त प्राचीन है। जैन धर्म के अनुसार योग के प्रवर्तक भगवान ऋषभदेव जी है, वे संसार के प्रथम योगी थे। जैन धर्म में तीर्थंकर महाप्रभु पद्मासन और खड्गासन कि मुद्राओं में नजर आते हैं। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता में मिली जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां कार्योत्सर्ग योग कि मुद्रा में थी। सभी जैन मुनि योग अभ्यास करते हैं।</p>
<p><strong>मिलता है दीर्घ जीवन:-</strong></p>
<p>यह शरीर और मन को नियंत्रित करके जीवन को बेहतर बनाता है। योग हमेशा स्वस्थ जीवन जीने का एक विज्ञान है। यह एक दवा की तरह है, जो हमारे शरीर के अंगों के कार्यों करने के ढंग को नियमित करके विभिन्न बीमारियों को धीरे-धीरे ठीक करता है। योग और ध्यान को अध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अनिवार्य माना गया है। योग सिर्फ शरीर को तोड़ने-मरोड़ने का नाम नहीं हैं। अपितु सनातन योग के अद्भुत फायदों का लोहा सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व के लोगों ने माना है क्योंकि योग के माध्यम से मस्तिष्क और शरीर का संगम होता है।</p>
<p>दैनिक जीवन में योग का अभ्यास शरीर को आन्तरिक और बाहरी ताकत प्रदान करता है। यह शरीर के प्रतिरोधी प्रणाली को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है, इस प्रकार यह विभिन्न और अलग-अलग बीमारियों से बचाव करता है। यदि योग को नियमित रुप से किया जाए तो यह दवाईयों का दूसरा विकल्प हो सकता है। यह प्रतिदिन खाई जाने वाली भारी दवाईयों के दुष्प्रभावों को भी कम करता है। प्राणायाम और कपाल-भाति जैसे योगों को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का समय है, क्योंकि यह शरीर और मन पर नियंत्रण करने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करता है।</p>
<p><strong>बेहतर जीवन जीने में सहायक:-</strong></p>
<p>हम योग से होने वाले लाभों की गणना नहीं कर सकते हैं, हम इसे केवल एक चमत्कार की तरह समझ सकते हैं, जिसे मानव प्रजाति को भगवान ने उपहार के रुप में प्रदान किया है। यह शारीरिक तंदरुस्ती को बनाए रखता है, तनाव को कम करता है, भावनाओं को नियंत्रित करता है, नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करता है और भलाई की भावना,  मानसिक शुद्धता,  आत्म समझ को विकसित करता है साथ ही प्रकृति से जोड़ता है। नियमित योग करने वाले व्यक्तियों के लिए योग बहुत अच्छा अभ्यास है। यह स्वस्थ जीवन शैली और हमेशा के लिए बेहतर जीवन जीने में सहायता करता है।</p>
<p><strong>तनाव और चिंता का प्रबंधन :-</strong></p>
<p>योग के अभ्यास की कला व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। भौतिक और मानसिक संतुलन कर शरीर और मन को शांति प्रदान करता हैं। तनाव और चिंता का प्रबंधन करके आपको राहत देता हैं। यह शरीर में लचीलापन,  मांसपेशियों को मजबूत करने और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी मदद करता हैं। यह श्वसन, ऊर्जा और जीवन शक्ति में सुधार लाता हैं। योग का अभ्यास करने से ऐसा लगता हैं कि जैसे यह मात्र शरीर को खींचने या तानने तक ही सीमित हैं,  लेकिन आप जैसा देखते हैं, महसूस और गतिविधि करते हैं, उससे कहीं अधिक यह आपके शरीर को करने में सक्षम करता हैं। योग आसन शक्ति, लचीलापन और आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं। योग का नियमित अभ्यास करने से वज़न में कमी, तनाव से राहत, प्रतिरक्षा में सुधार और एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने में मदद प्राप्त हो सकती हैं।</p>
<p><strong>आधुनिक जटिल जिंदगी में सहायक :-</strong></p>
<p>वर्तमान समय में मनुष्य के लिए योग-ध्यान बहुत ही जरूरी हो गया है।  आज की आधुनिक दुनिया और जटिल जिंदगी में यदि आप मानसिक तनाव मुक्त जीवन के साथ ही शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो योग-ध्यान को अपनाने की बहुत आवश्यकता है। आधुनिक युग में प्रायः हर आदमी जिंदगी की व्यस्तताओं, जटिलताओं, पर्यावरण प्रदूषण, शोरगुल तथा विभिन्न आधुनिक मशीनों से निकलने वाले सूक्ष्म तरंगों के प्रभाव से शारीरिक, मानसिक तनाव तथा थकान अनुभव करता है। योग-ध्यान से इसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।</p>
<p>निरंतर योग-ध्यान करते रहने से शरीर-मस्तिष्क में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता में सहयोगी है। योग और ध्यान करने से शरीर की प्रत्येक कोशिका के भीतर प्राण शक्ति, जीवन्तता का संचार होता है। जिससे शरीर स्वस्थ, सबल महसूस होता है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। हमें योग को जीवनशैली का अटूट हिस्सा बनाना होगा। आसन, प्राणायाम, ध्यान सकारात्मक जीवन में बहुत मददगार है। योग का अहम योगदान यह है कि इससे व्यक्ति आध्यात्मिक बनता है।</p>
<p>प्राचीन समय से ही योग हमारी जीवन शैली का अहम हिस्सा रहा है। यह हमारे अंतःकरण को निर्मल और मजबूत बनाने में सहायक रहा है। इस कारण हमारा आध्यात्मिक विकास तो हुआ ही, भावनात्मक स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहा जिसका लाभ हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ बने रहने में भी मिला। इस योग दिवस (21 जून) के अवसर पर हम भी योग में अपनी सार्थक भूमिका का निर्वाह करें। योग करें कराएं और निरोग रहें।</p>
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