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	<title>सुभाष गंज मैदान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>सुभाष गंज मैदान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अहंकार में व्यक्ति विनाश को प्राप्त हो जाता है : विश्व शांति महायज्ञ के लिए निलांजन का किया जाएगा चयन </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 14:19:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आएंगे और मुझे इस दुष्ट के बंधन से मुक्त कराएंगे। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> अहंकार और विश्वास में बहुत अंतर है। अहंकार में व्यक्ति ग़ाफ़िल होकर विनाश को प्राप्त हो जाता है। इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन, जब सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आए तो रावण का भी अहंकार टिक ना सका। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आएंगे और मुझे इस दुष्ट के बंधन से मुक्त कराएंगे। सती सीता के इसी विश्वास ने काम किया और श्री राम ने समुद्र को भी विश्वास के बल पर पुल बांध कर लंका विजय की।तो विश्वास बहुत बड़ी चीज है। इसे बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी पर हम भार है या सौभाग्य है। अपने आप की क्या कीमत है क्या? तुमनें महसूस किया कि मैं बहुत काम का हूं मेरे दिमाग ने ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बचाई क्या ऐसा कोई काम किया कि जगत आपकी कीमत कर रहा है। परिवार में तुम्हारी क्या अहमियत है।</p>
<p>आपने ऐसा कोई काम किया कि परिवार के, आपके कुटुम्ब का मान सम्मान बढ़ता चला गया। तुम कहते हो तुम धर्मात्मा हो।तुम्हारे बिना धर्म विकलांग हो जाए क्योंकि, धर्म धर्मात्मा बिना चल नहीं सकता क्या? तुम धर्म के काम किया क्या? तुमने ऐसा धर्म किया कि धर्म आपके कारण धर्म आगे बढ़ ऐसा अंदर से भाव आना चाहिए। यदि आप ने अपनी अच्छाइयां पहचान लिया।</p>
<p><strong>’थोड़ी तुम्हारे प्रतिकूलता हुई कि तुम गुरु बदल लेते हो</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि आप ने गुरु महाराज को हजार नमोस्तु किया और आशीर्वाद नहीं मिला तो आप तपस्वी हो, गुरु ने आपको तपस्या रूप प्रायश्चित दे दिया। हमें मान लेना चाहिए फिर देखना एक दिन ऐसा भी आएगा कि तुम्हारे लिए सदा टाइम मिलता रहेगा। क्या समझ रखा है गुरु को, गुरु तुम्हारी प्रशंसा करेंगे। गुरु ने हमारे काम को सराहा। धर्म बहुत आगे कि बात है। थोड़ी तुम्हारे प्रति कूलता हुई कि तुम गुरु बदल लेते हो। लोग तुम्हारे से बोलने को तरसते है और गुरु बोले नहीं। यदि आप केमन में ये भाव आ गया कि गुरु कभी मेरा अहित नहीं कर सकते। गुरु तो मेरे परम उपकारी हैं तुरंत तुम्हारे मन में भाव आना चाहिए। गुरु तुम्हारे मन में भाव आए कि गुरु मेरे परम हितैषी है वे तुम्हारा बुरा विचार ही कर सकते। रानी लक्ष्मीबाई अपने बेटे को पीठ पर बांधे थी। जब लक्ष्मीबाई ने बेटे से पूछा कि बेटा तुझे ऐसा बेटा बनने के लिए दामोदर बनना पड़ेगा। ऐसा बनने के लिए श्री राम बनना पड़ेगा।</p>
<p><strong>एक साथ चार चार जिनालयों की होगी प्रतिष्ठा</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि वर्षों बाद नगर में हो रहे श्री मद्जिनेन्द्र पंच कल्याणक महामहोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में शहर के सबसे प्राचीन गांव मंदिर के साथ ही गंज मंदिर पार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री शांतिनाथ त्रिकाल चौबीस जिनालयों की प्रतिष्ठा मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में होने जा रही है। इस महा महोत्सव निलांजन का चयन किया जाना है। इसके लिए आप अपने नाम हम तक पहुंचा दें। अंतिम निर्णय बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया जी का होगा। इस दौरान जैन अध्यक्ष राकेश कांसल उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींग ूमिल महामंत्री मनोज भैसरवास विपिन सिंघई अन्य प्रमुख जनों ने घटयात्रा कलशों का प्रदर्शन किया।</p>
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		<title>सफल व्यक्ति अपना लोहा मनवा लेता है: मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने सुभाष गंज मैदान में दिया दिव्य संबोधन  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 13:31:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर को अयोध्या नगरी बनाने लिए अपने हृदय को पवित्र करना होगा। हमारे यहां प्रभु आएंगे। कार्यक्रम में पंच कल्याणक महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। समन्वय ग्रुप घर-घर जाकर पंच कल्याणक के वस्त्र आभूषण दे रहा है। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोक नगर। हमारे लिए अपनी खुद की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर को अयोध्या नगरी बनाने लिए अपने हृदय को पवित्र करना होगा। हमारे यहां प्रभु आएंगे। कार्यक्रम में पंच कल्याणक महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। समन्वय ग्रुप घर-घर जाकर पंच कल्याणक के वस्त्र आभूषण दे रहा है। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> हमारे लिए अपनी खुद की अहमियत पहचान चाहिए। तुम अपनी दृष्टि में क्या हो जब तक व्यक्ति अपना स्वयं का मूल्यांकन नहीं करता। उसे अपनी अहमियत का एहसास ही नहीं होता। आपकी कोई कद्र नहीं होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा में मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दुनिया मेरी प्रतिभा का मूल्यांकन करें। दुनिया मेरी लायकी को समझे। दुनिया लायक को नालायक बनाने में लगी है किसी को नहीं पड़ी कि वह आपके लायकी का ढोल पीटे यहां तो लोग ना लगाने में लगे हैं लायक को भी नालायक बताते हुए नहीं चूकते तुम्हारे लिए अपनी लायकी दुनिया को बतानी होगी सफल भी वही होता है, जो अपना मूल्यांकन स्वयं कर लेता है और दुनिया से अपना लोहा मनवा लेता है। इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि हमें अपने नगर को अयोध्या नगरी बनाना है। हमें अपने आप को पवित्र पावन बनना है। तीन लोक के नाम हमेशा से ही परम पावन अयोध्या नगरी में जन्मते हैं। यहां की प्रजा का हृदय अत्यंत पावन होता है हमें भी इस धरती पर परम पिता परमेश्वर को बुलाना है। प्रभु आए तो उसके पहले हमारा नगर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भूमि अयोध्या जी बन जाए। इसके लिए हमें अभी से प्रयास करना होगा। हम अपने आप को जितना पवित्र और पावन बनाएं। उतना ही चमत्कार देखने को मिलेगा।</p>
<p><strong>मुख्य पत्रिका का विमोचन किया </strong></p>
<p>इस दौरान श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव की मुख्य पत्रिका का विमोचन जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई समन्वय ग्रुप के साथियों ने किया। महोत्सव के वस्त्र आभूषण धोती दुपट्टा सहित अन्य आभूषण समन्वय ग्रुप के सभी सदस्यों घर-घर पहुंच कर देने का संकल्प लेकर मुनिश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>ऊंची दुकान और फीके पकवान जैसी स्थिति से बचें</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि दुनिया मेरी जिंदगी का मूल्यांकन करें मैं बहुत मूल्यवान वस्तु हूं। जब में मूल्यवान कहता है तो ऐसा ना हो कि तुम्हें मूल्यांकन समझाकर तुम्हारे यहां कोई आए ही ना इसलिए आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी ने कहा कि जहां उन्होंने कहा था कि तू भगवान चैतन्य घन स्वरूप आत्मा हूं। ऐसा सुनकर लोगांे ने आपकी दुकान पर आना ही बंद कर दिया। अपनी वस्तु की कीमत घोषित करने के पहले जरा बाजार के भाव को देख तुम अपने आप को भगवान घोषित कर रहे हो। जरा अपने आप को देखो पहले भगवान का स्वरूप देखो, भगवान के लक्षण देखो, ऊंची दुकान और फीके पकवान जैसी स्थिति नहीं बनाना, हमारे पास राग द्वेष बहुत है। यदि तुम्हारे पास राग द्वेष की एक भी कड़िका है तो तुम अपने आप को प्रभु के समकक्ष नहीं हो सकते। मार्ग तो यही है यही से चल कर आप भगवान बन सकते हैं लेकिन, इसके लिए आपको आप को झोंकना होगा।</p>
<p><strong>’संसार में तुम्हें कोई छोड़ना नहीं चाहता’</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि संसार में तुम्हें कोई छोड़ना नहीं चाहता। आप अपने बेटे को थोड़ी सी छूट दे दी और यदि उसने छूट का फायदा उठाकर जो तुम्हारे लिए जो नहीं करना था। वह कर दिया। पिता का कर्त्तव्य है कि वह अपने बेटे को पतन की ओर ना धकेले। सही मार्ग तो है कि पिता बेटे को सही राह दिखायें कुछ बेटे ऐसे भी होते हैं, जिनकी पहचान बेटों से होती है। आज ये मंच पर बैठे हैं। ऐलक जी महाराज आपको देखकर कैसा लग रहा है। हम ख़ुद घर से भागकर आए आप ही बताइए भैया आपको कैसा लग रहा है। यही तो वह बात है कि दुनिया यहां दीवानी हो कर आती है और खुशी-खुशी जाती है।</p>
<p><strong>बढ़े तुम्हारी प्रसंशा करेंगे आपको प्रशंसा से दूर रहना है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि बेटे तुम्हारी प्रसंशा करेंगे आपको प्रशंसा में नहीं पड़ना है। यदि आप अपनी प्रसंशा सुनकर छोटे आदमी थोड़ी प्रशंसा सुनकर भूलकर कूप्पा हो जाए तो समझ लेना। अब आपका विकास रुक गया। सारी दुनिया आपकी प्रशंसा करें तो फूल जाना। यदि बड़े आपकी प्रशंसा करें तो आप अपनी नजर नीची कर लेना एक विद्वान के चार बेटे थे सुंदर गुणवान सुशील थे लेकिन, तोतली बोली थी। उनके विवाह नहीं हो रहे थे। उनके पिता ने विवाह प्रस्ताव लेकर आने वालों के सामने मौन रहने को कहा लेकिन, प्रशंसा सुनकर वह बोल पड़े हम विफल क्यों होते है। उसमें सबसे बड़ी हम अपनी प्रशंसा सुनकर भूलकर मद मस्त नहीं होना है। अपने मन में प्रशंसा का भाव आता है यही से आपकी प्रगति रुक जाती है।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ठीक नहीं है: त्रि-दिवासीय अखिल भारतीय विद्वत संगोष्ठी में देशभर से आए जैन दर्शन के जाने-माने विद्वान  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_sudhasagar_ji_said_that_it_is_not_right_to_interfere_with_nature_too_much/</link>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:18:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सारा विश्व युद्ध की कगार पर है तब ये संत मानवता के विकास के लिए चिंतन कर रहे हैं। आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगल और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। राष्ट्रीय खुला अधिवेशन के लिए देशभर के विद्वानों का नगर में इंतजार है। विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण शिरोमणि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सारा विश्व युद्ध की कगार पर है तब ये संत मानवता के विकास के लिए चिंतन कर रहे हैं। आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगल और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। राष्ट्रीय खुला अधिवेशन के लिए देशभर के विद्वानों का नगर में इंतजार है। विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण शिरोमणि की उपाधि से मुनि श्री को विभूषित किया। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने के सान्निध्य में चल रही त्रि-दिवासीय अखिल भारतीय विद्वत संगोष्ठी में देशभर से आए जैन दर्शन के जाने-माने विद्वान के बीच आज छत्रपति शाहू जी यूनिवर्सिटी कानपुर के कुलपति प्रो. विनयकुमार पाठक के मुख्य आतिथ्य में सम्मान समारोह दिगंबर जैन पंचायत कमेटी द्वारा अखिल भारतीय विद्वत परिषद के संयोजन में सुभाष गंज मैदान में किया गया। इस दौरान विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज को श्रमण शिरोमणि पदवी से जन समूह की जय जयकार के बीच विभूषित किया गया।</p>
<p><strong>प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ करना ठीक नहीं है</strong></p>
<p>इस दौरान विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि आज तीर्थाे की पवित्रता नष्ट हो रही है। सब जगह भौतिकता की चकाचौंध का प्रभाव दिखाई दे रहा है। भौतिकता कोई बुरी चीज नहीं है लेकिन, जब उसका मानवीय पक्ष ही प्रभावित होने लगे तो विचार करना होगा। आज आधुनिकता की आड़ में जंगल और तीर्थ उजड़ रहे हैं। प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ठीक नहीं है क्योंकि, प्रकृति जव अपना रूप बदलती है तो उसे सहन करना सभी के लिए मुश्किल होता है। मां एक चाकलेट देकर काम करती थी। हमारे विद्वान पहले काम करते हैं। बाद में चाकलेट मिलती है। अभी कुलपति प्रोफंेसर पाठक कह रहे थे कि चाकलेट की बात यहां की चाकलेट विद्वानों को भले बाद में मिले लेकिन, उनका कार्य सभी को दिखता है। पाठक पुराने भक्तो में हैं। जब कोटा में चातुर्मास चल रहा था और वहां भगवान महावीर यूनिवर्सिटी में किसी कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि यहां महावीर स्वामी के नाम के अनुसार कुछ तो होना चाहिए, जिससे लगे कि हम महावीर यूनिवर्सिटी में आए हैं। वस्तुत ये ही तो प्रगतिवादी सोच है जो आपको औरों से अलग करता है। वे राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p><strong>सगा भाई भी साथ छोड़ सकता है ये इतिहास ने बताया </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि हम लोग आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के साथ तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी की वंदना करने गये थे। आचार्य श्री ने कहा कि संघ कमंडल यही रख दें। पर्वत राज पवित्र हैं। कोई ऊपर लघुशंका नहीं जायेगा। आज आधुनिकता के कारण क्षेत्र उजड़ रहे हैं। जंगलों के साथ तीर्थ क्षेत्रा को बचाओ। सरकार करोड़ों रुपए देना चाहती हैं। हमें पर्यटन क्षेत्र नहीं बनाना है। तीर्थ क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाने से रोकिये। सम्मेद शिखर जी आज बहुत ख़तरे में है। वह आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगलों और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है इस रोकना होगा।</p>
<p><strong>सबसे अधिक उपसर्ग भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी पर हुए</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि सबसे अधिक उपसर्ग भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी पर हुए। उनका सगा भाई दुश्मन बन गया। एकतरफा दस भव तक बैर चलता रहा। पार्श्वनाथ पर तपस्या करते हुए ज्योतिष देव ने उपसर्ग किया। कोई तीर्थंकर पर इतना उपसर्ग नहीं हुआ। जितना पार्श्वनाथ पर हुआ ज्योतिष देव बढ़ा होता है। धर्णेंद्र पद्मावती छोटे देव था। वह उन्हें रोक नहीं सकता था तब भी उसने क्या किया जैसे आप लोग जव कोई बड़ा आदमी किसी को मारता है तो आप क्या करते हैं बचा सकते हैं। वैसे ही छोटा देव अपनी विधि से बचा ले गया। उसी समय उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हो गई और फिर कमठ को भी संबोधन मिला और वह भी प्रभु की शरण में पहुंच गया तो ये कथाएं हमें बता रही है कि आप चिंता मत करो। कितना ही कष्ट आये सब कुछ समाप्त हो जाएगा।</p>
<p><strong>विद्या सुधा सागर विद्या पीठ की स्थापना की</strong></p>
<p>राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति विनयकुमार पाठक ने कहा कि जो हम लोगों ने आपके अशोकनगर पर लिखी गई कृति का विमोचन किया तो हम कहना चाहते हैं कि ये ऐसे संत हैं जिनकी कोई नगर समाज ही नहीं बल्कि संपूर्ण सृष्टि अगवानी करती है। मां जिस प्रकार से बच्चों का पालन करती है। वैसे ही गुरुदेव हमारे जीवन को संभालते हैं। गुरुदेव के चरणों की रज पाने हर मानव लालयित रहता है। जीवन में संतों का स्थान सबसे श्रेष्ठ होता है और जब संतश्री जैसी विभूति हमारे सामने बैठे हो तो मैं अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ पलों को जी रहा हूं। तुलसीदास जी लिखते है कि संतश्री हमारे मुख को देख ले तो जन्मों के पातक कट जाते हैं। जब मैं कोटा था और भगवान महावीर विश्व विद्यालय में गया। मेरी भावना थी कि महावीर स्वामी का प्रतीक चिन्ह होना चाहिए और मैंने निवेदन किया। उनकी कृपा हुई आपके आशीर्वाद से हमने जैन पीठ में विद्या सुधा सागर विद्या पीठ की स्थापना की।</p>
<p><strong>आपका पथ प्रदर्शन करना सबसे महत्वपूर्ण है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मुझे सबसे महत्वपूर्ण बात लग रही है आज सारा विश्व, युद्ध की कगार पर पहुंच गया है। भौतिक चकाचौंध से परेशान हैं ऐसे समय में आपका पथ प्रदर्शक बहुत जरूरी है। आज का युवा बहुत परेशान है। आज के युवा तकनीकी का बहुत प्रयोग कर रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे दौर में जैन वांग्यमय को जानने की आवश्यकता है। इन युवाओं को एआई जैसी तकनीकी के जाल से मुक्त कर हमारे संस्कारों को पुनः स्थापित करें। हम लोग डिजिटल फॉर्म पर करें। आपकी कृपा होगी तो हम कानपुर विश्व विद्यालय के माध्यम से मानव कल्याण के लिए कुछ कर पाये इस दिशा में बहुत तेजी से काम करना होगा। कबीर ने कहा कि गुरु को चाहिए कि शिष्य से कछु ना ले और शिष्य को चाहिए वह गुरु को सब कुछ दे।हम भी तो यही करने आज यहां आयें है ये ऐसे संत हैं। जिनके अंदर इंजीनियर भी है डॉक्टर भी है और कृपा बरसाने वाली सहजता सरलता तो भरी हुई है।</p>
<p><strong>विद्वानों का सम्मान समाज जनों के श्रेष्ठीजनों ने किया</strong></p>
<p>विद्वत संगोष्ठी के दौरान श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी एवं राजेंद्र जैन मैमोरियल ट्रस्ट सूरज दारा कुलपति विनयकुमार पाठक को इस वर्ष के संत सुधा सागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्हें एक लाख रुपए की सम्मान निधि प्रस्तुति पत्र साल श्रीफल ट्रस्ट के ज्ञानेंद्र गदिया, सूरज जैन, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, मंत्री विजय धुर्रा, संजीव भारल्लिय, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास ने सम्मान किया। इस दौरान राष्ट्रीय विद्वत परिषद के पूर्व महामंत्री कर्मयोगी सुरेन्द्र भारती को भी विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान जयकुमार मुजफ्फरनगर, प्राचार्य डॉ. अशोक लाडनूं सुजानगढ़ महामंत्री डॉ. विजय कुमार दिल्ली डॉ. किरण प्रकाश सहित अन्य प्रमुख विद्वानों सहित सभी को सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>’विद्वत सम्मेलन में जैन दर्शन के मनीषी पहुंचे, </strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य तीस सितंबर को अखिल भारतीय विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जैन दर्शन के प्रकांड विद्वानों की उपस्थिति से अशोक नगर जिला गौरवान्वित हुआ। जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन मंत्री, शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा संजीव भारल्लिय, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास उपस्थित रहे।</p>
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