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	<title>सुप्रीम कोर्ट &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भारतीय संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट भी जैन धर्म को स्वतंत्र अस्तित्व मानता है : सुप्रीम कोर्ट के भोजशाला संबंधी निर्णय के संबंध में दृष्टिकोण  </title>
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		<pubDate>Mon, 18 May 2026 13:53:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय सभ्यता विश्व की उन प्राचीनतम सभ्यताओं में है जहाँ विविध धार्मिक परंपराएँ समानांतर रूप से विकसित हुईं। जैन धर्म उन्हीं महान आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसकी उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन काल में हुई और जिसने भारतीय चिंतन, दर्शन, नैतिकता, कला, साहित्य तथा सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया। पढ़िए, डॉ.यतीश जैन का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतीय सभ्यता विश्व की उन प्राचीनतम सभ्यताओं में है जहाँ विविध धार्मिक परंपराएँ समानांतर रूप से विकसित हुईं। जैन धर्म उन्हीं महान आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसकी उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन काल में हुई और जिसने भारतीय चिंतन, दर्शन, नैतिकता, कला, साहित्य तथा सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, डॉ.यतीश जैन का आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>भारतीय सभ्यता विश्व की उन प्राचीनतम सभ्यताओं में है जहाँ विविध धार्मिक परंपराएँ समानांतर रूप से विकसित हुईं। जैन धर्म उन्हीं महान आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसकी उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन काल में हुई और जिसने भारतीय चिंतन, दर्शन, नैतिकता, कला, साहित्य तथा सामाजिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया। जैन धर्म का मूल आधार अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह, आत्मशुद्धि और मोक्ष की साधना है। यह धर्म वेदों की सर्वाेच्चता को स्वीकार नहीं करता, न ही सृष्टि के रचनाकार ईश्वर की अवधारणा को मानता है। इसकी अपनी स्वतंत्र तीर्थंकर परंपरा, आगम साहित्य, दार्शनिक पद्धति और साधना व्यवस्था है। इसी कारण भारतीय न्यायपालिका ने समय-समय पर जैन धर्म को एक स्वतंत्र और पृथक धर्म के रूप में स्वीकार किया है। सर्वाेच्च न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के अनेक निर्णय इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि जैन धर्म केवल हिंदू धर्म का एक संप्रदाय नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट पहचान वाला स्वतंत्र धर्म है।</p>
<p>जैन परंपरा के अनुसार वर्तमान अवसर्पिणी काल में चौबीस तीर्थंकर हुए, जिनमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी हैं। भगवान महावीर ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में जैन धर्म को पुनः संगठित रूप प्रदान किया। विश्व का सबसे प्राचीन संवत 2552 वा वीर निर्वाण संवत चल रहा है।</p>
<p>यह वह काल था जब भारत में वैदिक कर्मकांड, पशुबलि और जातिगत कठोरता के विरुद्ध अनेक वैचारिक आंदोलनों का उदय हुआ। जैन धर्म ने आत्मसंयम, अहिंसा और तप को जीवन का सर्वाेच्च आदर्श माना। जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीव स्वतंत्र आत्मा है और कर्मबंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है। यह सिद्धांत वेदवादी ब्राह्मण परंपरा से मूलतः भिन्न है। जैन धर्म न तो वेदों को अपौरुषेय मानता है और न ही वेदाधारित यज्ञीय परंपरा को स्वीकार करता है। यही कारण है कि न्यायालयों ने जैन धर्म की स्वतंत्र दार्शनिक पहचान को विशेष महत्व दिया।</p>
<p>भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने “Bal Patil v. Union of India” (Civil Appeal No. 4730 of 1999, निर्णय दिनांक 8 अगस्त 2005) में जैन धर्म की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। इस प्रकरण में जैन समुदाय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किए जाने की मांग की थी। न्यायालय ने कहा</p>
<p>“Jainism is undoubtedly a religion distinct from Hinduism.”</p>
<p>अर्थात “जैन धर्म निस्संदेह हिंदू धर्म से भिन्न एक स्वतंत्र धर्म है।” इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया कि जैन धर्म की अपनी धार्मिक परंपरा, दर्शन और साधना प्रणाली है। न्यायालय ने यह भी माना कि संविधान सभा की चर्चाओं में जैन समुदाय को पृथक धार्मिक समुदाय के रूप में देखा गया था। यद्यपि इस निर्णय में भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की दृष्टि से हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख परंपराओं के बीच ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया गया, तथापि इससे जैन धर्म की स्वतंत्र धार्मिक पहचान समाप्त नहीं होती। निर्णय का केंद्रीय तत्व यही था कि जैन धर्म एक विशिष्ट और पृथक धर्म है।</p>
<p>इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने “Committee of Management Kanya Junior High School v. State of U.P.” (Civil Appeal No. 9595 of 2003, निर्णय दिनांक 21 अगस्त 2006) में और अधिक स्पष्ट शब्दों में कहा</p>
<p>“Jain religion is indisputably not a part of Hindu religion.”</p>
<p>अर्थात “जैन धर्म निर्विवाद रूप से हिंदू धर्म का भाग नहीं है।” यह कथन भारतीय न्यायिक इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। न्यायालय ने कहा कि जैन धर्म वेदों की सर्वोच्चता को स्वीकार नहीं करता, इसकी अपनी स्वतंत्र धार्मिक परंपराएँ हैं और इसकी साधना प्रणाली पूर्णतः पृथक है। न्यायालय ने यह भी माना कि जैन धर्म किसी सुधारवादी आंदोलन के रूप में उत्पन्न नहीं हुआ, बल्कि यह एक स्वतंत्र धार्मिक दर्शन है जिसकी अपनी मौलिकता है। यह निर्णय जैन धर्म की संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय का “Commissioner, Hindu Religious Endowments, Madras v. Sri Lakshmindra Thirtha Swamiar” (AIR 1954 SC 282), जिसे शिरूर मठ प्रकरण के नाम से जाना जाता है, भारतीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है। इस मामले में न्यायालय ने अनुच्छेद 25 और 26 की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत में अनेक स्वतंत्र धार्मिक परंपराएँ विद्यमान हैं जिनमें जैन और बौद्ध धर्म भी शामिल हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि उसकी अपनी धार्मिक प्रथाएँ, सिद्धांत और संस्थागत संरचना भी होती है। इस निर्णय में जैन धर्म को स्वतंत्र धार्मिक व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया गया।</p>
<p>उच्च न्यायालयों ने भी अनेक मामलों में जैन धर्म की पृथक पहचान को मान्यता दी है।</p>
<p>“Gateppa v. Eramma” (AIR 1927 Madras 228) में मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा—</p>
<p>“Jainism as a distinct religion was flourishing several centuries before Christ.”</p>
<p>अर्थात जैन धर्म ईसा से कई शताब्दियों पूर्व से स्वतंत्र धर्म के रूप में विकसित था। यह निर्णय इस तथ्य को स्थापित करता है कि जैन धर्म किसी अन्य धर्म से निकला हुआ संप्रदाय नहीं, बल्कि अत्यंत प्राचीन स्वतंत्र धार्मिक परंपरा है।</p>
<p>इसी प्रकार “Hirachand Gangji v. Rowji Sojpal” (AIR 1939 Bombay 377) में बंबई उच्च न्यायालय ने कहा</p>
<p>“It is wrong to think that the Jains were originally Hindus.”</p>
<p>न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जैन धर्म की अपनी स्वतंत्र दार्शनिक और धार्मिक संरचना है तथा जैनों को मूलतः हिंदू मानना ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से गलत है। यह निर्णय जैन धर्म की स्वतंत्रता को स्वीकार करने वाले प्रमुख न्यायिक निर्णयों में गिना जाता है।</p>
<p><strong>बंबई उच्च न्यायालय के</strong></p>
<p>“Bombay Harijan Temple Entry Act Case”</p>
<p>में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम.सी. छागला ने कहा</p>
<p>“Jains have an independent religious entity.”</p>
<p>यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न्यायालय ने जैन समुदाय को स्वतंत्र धार्मिक इकाई माना।</p>
<p>इसी प्रकार “Ratilal Panachand Gandhi v. State of Bombay” (AIR 1954 Bom 388) में न्यायालय ने माना कि जैन धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक कार्यों के संचालन का पूर्ण अधिकार है और उनकी धार्मिक संपत्तियों की प्रकृति स्वतंत्र रूप से निर्धारित होगी।</p>
<p>भारतीय संविधान भी जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है। संविधान के अनुच्छेद 25 की Explanation II में “हिंदू” शब्द के अंतर्गत जैन, बौद्ध और सिख का उल्लेख किया गया है, परंतु यह उल्लेख केवल सामाजिक सुधार और सार्वजनिक धार्मिक संस्थाओं में प्रवेश संबंधी विधायी सुविधा के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य इन धर्मों का हिंदू धर्म में विलय करना नहीं था। संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने स्पष्ट किया था कि यह केवल कानूनी सुविधा हेतु है। यदि जैन धर्म हिंदू धर्म का ही अंग माना गया होता, तो अलग से “जैन” शब्द का उल्लेख करने की आवश्यकता ही नहीं होती।</p>
<p>संविधान सभा की बहसों में भी जैन समुदाय को पृथक धार्मिक समुदाय के रूप में देखा गया। अल्पसंख्यक अधिकारों से संबंधित चर्चाओं में जैन प्रतिनिधियों की सहभागिता यह दर्शाती है कि संविधान निर्माताओं की दृष्टि में जैन धर्म स्वतंत्र धार्मिक पहचान रखता था। यही कारण है कि बाद के वर्षों में विभिन्न राज्यों ने जैन समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा प्रदान किया।</p>
<p>भारत सरकार ने 27 जनवरी 2014 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2(c) के अंतर्गत जैन समुदाय को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक घोषित किया। यह निर्णय केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि भारतीय राज्य द्वारा जैन धर्म की स्वतंत्र धार्मिक पहचान की संवैधानिक स्वीकृति थी। इस अधिसूचना के बाद जैन समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में अधिकार प्राप्त हुए।</p>
<p>जैन धर्म की स्वतंत्रता केवल न्यायालयों के कथनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दार्शनिक आधार भी इसे स्पष्ट करते हैं। जैन धर्म का “अनेकांतवाद” विश्वदृष्टि का अद्वितीय सिद्धांत है जो सत्य की बहुआयामी प्रकृति को स्वीकार करता है। “स्याद्वाद” तर्कशास्त्र की ऐसी पद्धति है जिसका अन्य भारतीय दर्शनों में समकक्ष नहीं मिलता। जैन धर्म आत्मा की स्वतंत्र सत्ता को मानता है तथा कर्म सिद्धांत को अत्यंत वैज्ञानिक और सूक्ष्म रूप में प्रस्तुत करता है। जैन आचार प्रणाली में पंचमहाव्रत, तप, संयम, अपरिग्रह और जीवदयालुता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह सम्पूर्ण जीवन-दर्शन जैन धर्म को एक विशिष्ट धार्मिक और दार्शनिक पहचान प्रदान करता है। भारतीय संस्कृति में जैन धर्म का योगदान भी इसकी स्वतंत्रता का सशक्त प्रमाण है। प्राकृत साहित्य, अपभ्रंश काव्य, मंदिर स्थापत्य, मूर्तिकला, गणित, ज्योतिष, तर्कशास्त्र, चिकित्सा और व्यापारिक नैतिकता में जैनाचार्यों का महान योगदान रहा है। आचार्य कुंदकुंद, उमास्वाति, समंतभद्र, हेमचंद्र, जिनसेन और हरिभद्र जैसे विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। यदि जैन धर्म केवल किसी अन्य धर्म का उपसंप्रदाय होता, तो इतनी विशाल स्वतंत्र दार्शनिक और साहित्यिक परंपरा विकसित नहीं होती।</p>
<p>इस प्रकार भारतीय न्यायपालिका, संविधान, इतिहास, दर्शन और सांस्कृतिक परंपरा में सभी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि जैन धर्म एक स्वतंत्र और प्राचीन धर्म है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह कथन कि “Jain religion is indisputably not a part of Hindu religion” केवल कानूनी टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक इतिहास की वास्तविकता की न्यायिक स्वीकृति है। जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान भारतीय लोकतंत्र की उस महान परंपरा का प्रतीक है जिसमें विविधता को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया गया है और प्रत्येक धार्मिक समुदाय को अपनी विशिष्टता के साथ विकसित होने का अधिकार प्राप्त है।</p>
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		<title>यूजीसी पर सुप्रीम रोक बड़ी जीत: आरके पाण्डेय एडवोकेट ने कहा- जातिवादी काले कानूनों के खात्मे तक जंग रहेगी जारी, मौन विधायकों, सांसदों, मंत्रियों का होगा बहिष्कार </title>
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		<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 13:45:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हाईकोर्ट इलाहाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आरके पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी बिल के नए प्रावधानों पर रोक को बड़ी जीत बताया है। लेकिन इसी के साथ उन्होंने जातिवादी काले कानूनों के खात्मे तक जंग जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए यूजीसी बिल पर मौन रहे सभी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों का सर्वकालिक सार्वजनिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हाईकोर्ट इलाहाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आरके पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी बिल के नए प्रावधानों पर रोक को बड़ी जीत बताया है। लेकिन इसी के साथ उन्होंने जातिवादी काले कानूनों के खात्मे तक जंग जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए यूजीसी बिल पर मौन रहे सभी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों का सर्वकालिक सार्वजनिक बहिष्कार करने का ऐलान किया है। <span style="color: #ff0000">प्रयागराज से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> प्रयागराज</strong>। हाईकोर्ट इलाहाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आरके पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी बिल के नए प्रावधानों पर रोक को बड़ी जीत बताया है। लेकिन इसी के साथ उन्होंने जातिवादी काले कानूनों के खात्मे तक जंग जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए यूजीसी बिल पर मौन रहे सभी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों का सर्वकालिक सार्वजनिक बहिष्कार करने का ऐलान किया है। मीडिया से वार्ता में आरके पांडेय एडवोकेट ने कहा कि जातिवादी काले कानून जोकि भारतीय संविधान की मूल भावना समानता के सिद्धांत के विरुद्ध हैं तथा समाज विरोधी और देश विरोधी हैं। उनके संपूर्ण खात्मे तक वास्तविक आजादी की जंग जारी रहेगी।</p>
<p><strong>अभियान पर ब्रेक लगाने से इंकार </strong></p>
<p>यूजीसी पर सुप्रीम ब्रेक पर खुशी जताने के साथ आर के पांडेय ने जातिवादी काले कानूनों के विरुद्ध अभियान पर ब्रेक लगाने से इंकार करते हुए भारतीय आम जनमानस का आह्वान किया कि वे किसी भी सत्तारूढ़ और विपक्षी दल के झांसे में आने के बजाय अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ें तथा ऐसे सभी जातिवादी काले कानूनों का विरोध करें जा ेकि समाज और राष्ट्र के लोगों में विभेद करते हैं तथा योग्यता का हनन करते हुए जाति विशेष और वर्ग विशेष के नाम पर आतंक फैलाते हैं।</p>
<p><strong>काले कानूनों और कार्य व्यवस्था के विरुद्ध जागरूक होने का आह्वान </strong></p>
<p>बता दें कि वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आरके पांडेय के नेतृत्व में नागरिक अधिकार मंच के लगभग 3.5 (साढ़े तीन) लाख स्वयंसेवकों ने भारत वर्ष के आम जनमानस से जन संपर्क करके उन्हें यूजीसी बिल, एससीए टी एक्ट सहित सभी जातिवादी, वर्गवादी, विभाजनकारी काले कानूनों और कार्य व्यवस्था के विरुद्ध जागरूक करने का आह्वान किया है।</p>
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		<title>सुप्रीम आदेश से एसआईटी करेगी वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू रिहैबिलिटेशन सेंटर वनतारा की जांच: सुप्रीम कोर्ट ने माधुरी हथिनी मामले में सोमवार को की थी सुनवाई एसआईटी का किया गठन  </title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 06:25:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच के लिए 4 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की है। एसआईटी यह जांच करेगी कि जानवरों को भारत और विदेश से लाने में वन्य जीव संरक्षण कानून और अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन हुआ है या नहीं। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच के लिए 4 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की है। एसआईटी यह जांच करेगी कि जानवरों को भारत और विदेश से लाने में वन्य जीव संरक्षण कानून और अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन हुआ है या नहीं। <span style="color: #ff0000">इंदौर कोल्हापुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;साभार सोर्स दैनिक भास्कर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर कोल्हापुर</strong>। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच के लिए 4 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की है। इस सेंटर को रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। अदालत ने कहा कि एसआईटी यह जांच करेगी कि जानवरों को भारत और विदेश से लाने में वन्य जीव संरक्षण कानून और अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन हुआ है या नहीं। जस्टिस पंकज मित्तल और पीबी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एसआईटी को 12 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपनी होगी। एसआईटी पशु कल्याण, आयात-निर्यात कानून, वाइल्ड लाइफ तस्करी, पानी और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की भी जांच करेगी। एसआईटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस जे. चेलमेश्वर करेंगे।</p>
<p>टीम में उत्तराखंड व तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राघवेंद्र चौहान पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता को शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह याचिका कोल्हापुर की मशहूर हथिनी (माधुरी) की वनतारा में शिफ्टिंग को लेकर लगाई गई है। इसमें याचिकाकर्ता का पक्ष एडवोकेट सीआर जया सुकीन रख रहे हैं।</p>
<p><strong>कौन हैं जस्टिस चेलमेश्वर</strong></p>
<p>जस्टिस चेलमेश्वर अक्टूबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जून 2018 में रिटायर हुए। उन्होंने निजता के हक को मौलिक अधिकार घोषित किया। कॉलेजियम प्रणाली पर सवाल उठाए। वे उन 4 जजों में शामिल थे, जिन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस कर तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की कार्यशैली पर आपत्ति जताई थी। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ था।</p>
<p><strong>कोर्ट ने याचिका में वनतारा को पक्षकार बनाने को कहा था</strong></p>
<p>याचिका पर पहली सुनवाई 14 अगस्त को हुई थी। इस दौरान जस्टिस पंकज मित्तल और पीबी वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सीआर जया सुकीन से कहा था कि वह वनतारा पर आरोप लगा रहे हैं जबकि, उसे याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल ही नहीं किया गया है। अदालत ने उन्हें वनतारा को पक्षकार बनाने और फिर मामले में लौटने को कहा था। साथ ही मामले की सुनवाई की तारीख 25 अगस्त तय की थी। इससे पहले सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ 11 अगस्त को हथिनी को वनतारा भेजने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को सहमत हुई थी। 12 सितंबर को रिपोर्ट आने के बाद सुप्रीम कोर्ट क्या आदेश देता है। इस पर अब सबकी निगाह रहेगी।</p>
<p>उधर, वनतारा भेजी गई हथिनी माधुरी उर्फ महादेवी को वापस नांदणी मठ लाने के लिए दिगंबर जैन समाज के लोग अब भी प्रदर्शन कर रहे हैं। समाजजनों की मांग है कि माधुरी जैन मठ की संस्कृति का हिस्सा है और वह वहां की पारिवारिक सदस्य के रूप साढ़े तीन दशक से रह रही है। वह मंदिर, मठ और वहां विराजने वाले साधु-संतों से भावनात्मक लगाव भी रखती है। समाजजनों को उम्मीद है कि जल्द ही सुप्रीम आदेश से माधुरी की मधुर घंटियां नांदणी मठ में गूंजेगी।</p>
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		<title>कोल्हापुर के नांदणी मठ ‘माधुरी’ जल्द लौटेगी: 36 साल से रह रही हथिनी माधुरी को वापस लाने की तैयारियां तेज  </title>
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		<pubDate>Thu, 07 Aug 2025 06:24:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कोल्हापुर के प्राचीन नांदणी जैन मठ से वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजी गई हथिनी माधुरी को वापस लाने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। महाराष्ट्र सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने जा रही है। याचिका में गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर भी सरकार का साथ देने के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कोल्हापुर के प्राचीन नांदणी जैन मठ से वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजी गई हथिनी माधुरी को वापस लाने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। महाराष्ट्र सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने जा रही है। याचिका में गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर भी सरकार का साथ देने के लिए कटिबद्ध है। <span style="color: #ff0000">छत्रपतिसंभाजी नगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;स्रोत दैनिक भास्कर। </span></strong></p>
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<p><strong>छत्रपतिसंभाजीनगर।</strong> कोल्हापुर के प्राचीन नांदणी मठ से वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजी गई हथिनी माधुरी को वापस लाने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। महाराष्ट्र सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने जा रही है। इस याचिका में गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर भी सरकार का साथ देने के लिए कटिबद्ध हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में वनतारा टीम के साथ बैठक की। इस बैठक में चर्चा के बाद सरकार ने इसकी जानकारी सार्वजनिक की और नांदणी जैन मठ के साथ मिलकर माधुरी के लिए नांदणी क्षेत्र में ही एक अत्याधुनिक सैटेलाइट रिहैबिलिटेशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस सेंटर को तय मानकों के अनुसार और सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त पावर्ड कमेटी के विशेषज्ञों की सलाह से ही बनाया जाएगा। यहां उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कोल्हापुर के नांदणी जैन मठ में पिछले 36 साल से रह रही हथिनी माधुरी को वनतारा एनिमल रिहैबिलिटेशन सेंटर में भेज दिया गया था।</p>
<p><iframe title="कोल्हापुर के नांदणी मठ की माधुरी जल्द लौटेगी – हथिनी की वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/AOauNTsSMeE?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p>जिसका देशभर में दिगंबर जैन समाज के लोगों ने विरोध जताया और अपने क्षेत्र के जिला मुख्यालयों और राज्य मुख्यालयों पर कलेक्टर, एसडीएम और राजनेताओं को आवेदन देकर माधुरी हथिनी को वापस जैन मठ नांदणी में लौटाने के लिए गुहार लगाई। वनतारा सेंटर के इस निर्णय से दिगंबर जैन समाज के लोगों में अपार आक्रोश भी देखा गया है। वे अभी भी जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।</p>
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		<title>सर्वधर्म प्रार्थना के सफल आयोजन में राकेश जैन ने निभाई संयोजक की महत्त्वपूर्ण भूमिका :  सर्वप्रथम &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; से गूंजा भारत के सर्वोच्च न्यायालय का परिसर </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Oct 2024 08:15:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत के सर्वोच्च न्यायालय के विस्तार भवन के भूमिपूजन समारोह में &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; का पवित्र उच्चारण किया गया, जिसने पूरे परिसर को गुंजा दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीशों और विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। भूमिपूजन समारोह में आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत के सर्वोच्च न्यायालय के विस्तार भवन के भूमिपूजन समारोह में &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; का पवित्र उच्चारण किया गया, जिसने पूरे परिसर को गुंजा दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीशों और विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। भूमिपूजन समारोह में आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारत के अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता, और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत के सर्वोच्च न्यायालय के विस्तार भवन के भूमिपूजन समारोह में &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; का पवित्र उच्चारण किया गया, जिसने पूरे परिसर को गुंजा दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीशों और विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। भूमिपूजन समारोह में आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारत के अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता, और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। इस समारोह में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जो जैन समाज के लिए गर्व का क्षण था।</p>
<p>डॉ. इन्दु जैन ने &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; का उच्चारण किया। डॉ. इन्दु राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैन धर्म का प्रतिनिधित्व करती हैं । डॉ. इन्दु जैन भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में विशेषज्ञ सलाहकार सदस्य भी हैं और आपने नवीन संसद भवन के भूमि पूजन एवं उद्घाटन समारोह में भी जैन धर्म का प्रतिनिधित्व भी किया था। इस सम्पूर्ण सर्वधर्म प्रार्थना सभा के संयोजन का कार्य सुप्रीम कोर्ट भूमि पूजन के आयोजकों ने राकेश जैन को सौंपा था। उन्होंने कुशलता पूर्वक इसके आयोजन में अपनी मुख्य भूमिका निभाई और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सर्वधर्म प्रार्थना सभा के आयोजन की सभी विशिष्ट अतिथियों ने प्रशंसा की ।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-68862" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-25-at-1.24.25-PM.jpeg" alt="" width="481" height="566" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-25-at-1.24.25-PM.jpeg 481w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-25-at-1.24.25-PM-255x300.jpeg 255w" sizes="(max-width: 481px) 100vw, 481px" />सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, एडवोकेट, विशिष्ट अतिथियों के साथ अतिथि के रूप में समाजसेवी हेमचंद जैन, सुखराज सेठिया (अध्यक्ष-तेरापंथ ), विद्वान प्रो. अनेकान्त जैन(सम्पादक -पागद भासा) डॉ. अमित जैन (सम्पादक -चाणक्य वार्ता) भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। समारोह में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रार्थनाएं प्रस्तुत की, जिसमें डॉ. बलदेव आनंद, जे.पी. मिश्रा (वैदिक), श्री गुरवचन सिंह (सिख), फादर मोनसे (क्रिश्चियन), कास्तु सेन (बौद्ध), मराज़बन (पारसी), और डॉ. अंसार अहमद (इस्लाम) शामिल थे। यह समारोह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता की परंपरा को दर्शाता है, जिसमें सभी धर्मों के अनुयायियों ने एक साथ मिलकर प्रार्थना की। इस प्रकार, यह घटना जैन धर्म की प्रतिष्ठा को और बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर बनी। सम्पूर्ण जैन समाज ने डॉ. इन्दु और राकेश जैन को इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए बधाइयां दीं।</p>
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		<title>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजन : सुप्रीम कोर्ट में कराया न्यायाधीशों और वकीलों को योग </title>
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		<pubDate>Fri, 23 Jun 2023 07:18:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अजय कुमार जैन ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में भी योगा सेशन आयोजित किया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल थे। मूल रूप से झुमरीतिलैया निवासी अजय कुमार जैन अधिवक्ता होने के साथ-साथ योगा वैलनेस इंस्ट्रक्टर एवं अरहम ध्यान योग ट्रेनर हैं। पढ़िए जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अजय कुमार जैन ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में भी योगा सेशन आयोजित किया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल थे। मूल रूप से झुमरीतिलैया निवासी अजय कुमार जैन अधिवक्ता होने के साथ-साथ योगा वैलनेस इंस्ट्रक्टर एवं अरहम ध्यान योग ट्रेनर हैं।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए जैन राज कुमार अजमेरा की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर अजय कुमार जैन ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में भी योगा सेशन आयोजित किया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल थे। मूल रूप से झुमरीतिलैया निवासी अजय कुमार जैन अधिवक्ता होने के साथ-साथ योगा वैलनेस इंस्ट्रक्टर एवं अरहम ध्यान योग ट्रेनर हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46738" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM.jpeg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-23-at-12.01.51-PM-1320x879.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
<p>वह जूम एप के माध्यम से करीब सवा 3 साल में 1200 से ज्यादा क्लासेस ले चुके हैं। यह क्लास 25 मार्च, 2020 को लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही गुरुदेव मुनि श्री प्रणम्य सागरजी महाराज के आशीर्वाद से नियमित निशुल्क और निरंतर चली आ रही है। इस वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अजय कुमार जैन ने विशेष ऑनलाइन क्लास ली, जिसमें देश -विदेश से अनेक लोगों ने भाग लिया।</p>
<p>योग दिवस के उपलक्ष्य में अजय कुमार जैन ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया के ऑफिसर्स के लिए भी योगा सेशन कराया। अजय कुमार जैन मिनिस्ट्री ऑफ आयुष से सर्टिफाइड योगा वैलनेस इंस्ट्रक्टर हैं और इनका नामका नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुआ है। इन्हें इंडियन अचीवर्स अवॉर्ड, ग्लोबल वैलनेस फोरम टॉप 10 बेस्ट परफारमेंस अवॉर्ड एवं ग्लोबल वैलनेस एंबेसडर अवॉर्ड, 2022 भी मिल चुका है।</p>
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		<title>श्री दिगम्बर जैन अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर : आंदोलन में शामिल होने के लिए सकल दिगम्बर जैन समाज को आह्वान </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Mar 2023 07:09:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शिरपुर के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ताले खोलने के आदेश, उसके बावजूद नहीं सुलझा मामला। श्वेतांबर जैन समाज ने यहां अपने ताले लगा दिए हैं, जिससे दिगंबर समाज में रोष है। इसी को लेकर यहां आंदोलन की शुरुआत की जा रही है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट&#8230; इंदौर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शिरपुर के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ताले खोलने के आदेश, उसके बावजूद नहीं सुलझा मामला। श्वेतांबर जैन समाज ने यहां अपने ताले लगा दिए हैं, जिससे दिगंबर समाज में रोष है। इसी को लेकर यहां आंदोलन की शुरुआत की जा रही है।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> शिरपुर के भगवान पार्श्वनाथ के मंदिर को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के बीते 22 फरवरी 2023 के अंतरिम आदेश के अनुसार को खोल दिया गया है और श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदाय के लोगों को दर्शन करने का अधिकार दिया गया है। अंतरिम आदेश में इसके लिए कोई समय सीमा नहीं दी गई है लेकिन पूजन अभिषेक के लिए 3-3 घंटे का स्लॉट दिया गया है। बीते 11 मार्च को पुलिस प्रशासन ने श्वेतांबर जैन समाज के प्रतिनिधि को मंदिर की चाबी सौंपी, लेकिन पुलिस ने दिगंबर जैन समाज से कोई अनुमति नहीं ली। श्वेतांबर समाज ने सरकारी ताले हटाकर खुद के ताले लगवा लिए हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की अवमानना करते हुए लेप के नाम पर 50 से 60 दिनों तक दिगम्बर समाज को मंदिर प्रवेश और दर्शन पूजा के कोर्ट द्वारा प्रदत्त दिगंबर जैन समाज के अधिकारों को श्वेताम्बर समाज द्वारा छीना जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी था निर्णय</strong></p>
<p>कोर्ट द्वारा यह भी निर्णय दिया जा चुका है कि अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में 16 अन्य वेदियां दिगंबर जैनियों की हैं। फिर भी उन वेदियों दर्शन पूजन से रोका जा रहा है, जिनकी पूजा और अभिषेक का पूरा अधिकार दिगंबरों को है।</p>
<p><strong>सौंपा ज्ञापन</strong></p>
<p>बीते 13 मार्च को जैन समाज के प्रतिनिधियों द्वारा शिरपुर पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपकर तदुपरांत मंदिर जी का ताला खोलने के लिए धरना आंदोलन किया गया। तदुपरांत एसपी और डीएसपी से मीटिंग करके दिगम्बर जैन समाज का पक्ष रखा गया। पुलिस के कहने पर श्वेतांबर समाज से समन्वय मीटिंग करने का प्रयास किया गया लेकिन श्वेताम्बर समाज ने सहकार्य नहीं किया और मीटिंग के लिए नहीं आए।</p>
<p><strong>आंदोलन की शुरुआत</strong></p>
<p>दिगम्बर समाज का अधिकार सुरक्षित रखने के लिए 14 मार्च सुबह प्रातः 10.00 बजे को दिगम्बर समाज अंतरिक्ष पार्श्वनाथ क्षेत्र पर धरना आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की इसी प्रकार आन्दोलन करके रक्षा की है। पूर्वजों द्वारा सुरक्षित रखी गई इस विरासत की सुरक्षा के लिए महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, लड़कियों और बच्चों सभी को इस आंदोलन में आना होगा। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि हम अपने तीर्थ रक्षा के लिए अपने अधिकार के लिए जैन एकता के साथ आंदोलन को सब की सहभागिता से सफल बनाना है। परम् पूज्य महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज जी के आशीर्वाद के साथ ही निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागरजी महाराज ससंघ शिरपुर की ओर विहार कर रहे हैं एवं उनके दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। यह आंदोलन ऐलक श्री 105 सिद्धांतसागरजी महाराज के मार्गदर्शन में हो रहा है।</p>
<p><strong>इसके चलते संस्थान पर ताला लगा रहा</strong><br />
शिरपुर जैन में विश्व प्रसिद्ध अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर है। इस मंदिर को लेकर दिगंबर जैन और श्वेतांबर जैन संप्रदायों के बीच विवाद था। नतीजतन, इस मंदिर को 22 अप्रैल, 1981 को बंद कर दिया गया था। भक्तों को एक छोटी सी खिड़की से दर्शन लेने पड़ते थे। अदालती लड़ाई चल रही थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। आखिरकार 22 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के कपाट खोलने और मूर्ति पर रंग लगाने का आदेश दिया।</p>
<p><strong>जानें अंतरिक्ष पार्श्वनाथ के बारे में</strong></p>
<p>यह क्षेत्र शिरपुर में है, मुम्बई-नागपुर रेलमार्ग पर अकोला से 70 कि.मी. दूर है। ग्राम के मध्य में अंतरिक्ष पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र है। यहीं पर राजा ऐल श्रीपाल का कुष्ठ रोग यहां के कुएंके जल में स्नान करने से ठीक हुआ था। इस कुएं में से ही उसने अन्तरिक्ष पार्श्वनाथकी मूर्ति निकाली थी और राजा ने यहीं पर मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि इस मंदिर के शिखर में ऐसी ईंटों का प्रयोग किया गया था, जो जल में तैरती हैं। यह मंदिर अष्टकोण आकार का है और अत्यन्त कलापूर्ण है। इस पाषाण मंदिर के नीचे ईंटों का चबूतरा बना। ये ईंटें भी आकार में बड़ी और अधिक प्राचीन हैं। लगता है, वर्तमान पाषाण मंदिर के निर्माण के पहले यहां ईंटों का कोई प्राचीन मंदिर था। यह मंदिर गांव के बाहर पश्चिम की ओर वृक्षों की पंक्ति के मध्य खड़ा हुआ है। इस मंदिर में पूर्व, उत्तर और दक्षिण की ओर पत्थर के द्वार बने हुए हैं। द्वार के सिरदल पर पद्मासन दिगम्बर मूर्तियां बनी हुई हैं। इसी प्रकार द्वारों के दोनों ओर खड्गासन दिगम्बर जैन मूर्तियाँ और आम्रपत्रों से वेष्टित कलशों का अंकन बड़ा भव्य प्रतीत होता है। दक्षिण द्वार पर तीर्थंकरों के जीवन से संबंधित अत्यन्त कलापूर्ण चित्रांकन है।</p>
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		<title>आदेश : खुलेंगे अंतरिक्ष पार्श्वनाथ शिरपुर मंदिर के ताले </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Feb 2023 04:45:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जैन समाज में खुशी की लहर है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिक्ष पार्श्वनाथ शिरपुर के मंदिर में लगे ताले खोलने का आदेश दे दिया है। दरअसल मंदिर में अंतरिक्ष पारसनाथ वेदी और साथ में 15 अन्य वेदियां भी पूजा-अभिषेक के बिना अनेक दशकों से बंद थीं। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर (राजेश जैन दद्दू)।</strong> सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जैन समाज में खुशी की लहर है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिक्ष पार्श्वनाथ शिरपुर के मंदिर में लगे ताले खोलने का आदेश दे दिया है। दरअसल मंदिर में अंतरिक्ष पारसनाथ वेदी और साथ में 15 अन्य वेदियां भी पूजा-अभिषेक के बिना अनेक दशकों से बंद थीं।</p>
<p>तब तक अदालत में इस बात का अनुरोध किया गया कि अंतिम आदेश न आने तक मंदिर खोलने का अंतरिम आदेश दिया जाए। इसी चलते अदालत ने यह फैसला सुनाया है।</p>
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