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	<title>सुधासागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>सुधासागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>वह घड़ी आ गई… थोवनजी में होने जा रहा भव्य जनेश्वरी दीक्षा महोत्सव: आचार्य विद्यासागर महाराज के 53वें आचार्य पदारोहण दिवस पर जगमगाएगा पूरा तीर्थ—सुधासागर जी देंगे भव्य दीक्षाएँ </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 14:45:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[थोवनजी अतिशय क्षेत्र में आचार्य विद्यासागर जी के 53वें आचार्य पदारोहण दिवस पर भक्त-समुदाय भव्य जनेश्वरी दीक्षा समारोह का साक्षी बनेगा। सुधासागर जी महाराज अपने करकमलों से शिष्यों को दीक्षा देंगे। कार्यक्रम को लेकर भारी उत्साह। — श्रीफल साथी : इंदौर ब्यूरो थोवनजी। जैन समाज जिस पल को बरसों से सँजोकर बैठा था, वह शुभ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>थोवनजी अतिशय क्षेत्र में आचार्य विद्यासागर जी के 53वें आचार्य पदारोहण दिवस पर भक्त-समुदाय भव्य जनेश्वरी दीक्षा समारोह का साक्षी बनेगा। सुधासागर जी महाराज अपने करकमलों से शिष्यों को दीक्षा देंगे। कार्यक्रम को लेकर भारी उत्साह। — <span style="color: #ff0000">श्रीफल साथी : इंदौर ब्यूरो</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थोवनजी।</strong> जैन समाज जिस पल को बरसों से सँजोकर बैठा था, वह शुभ घड़ी आखिरकार सामने आ ही गई। युग शिरोमणि राष्ट्रीय संत आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर जी महाराज के 53वें आचार्य पदारोहण दिवस को इस बार कुछ खास, कुछ ऐतिहासिक बनाने की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।</p>
<p>अतिशय क्षेत्र थूवोनजी में विराजित बडे बाबा 1008 श्री आदिनाथ भगवान के चरणों में, और तीर्थ उद्धारक, तीर्थ चक्रवर्ती, राष्ट्रसंत मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महामुनिराज की पावन उपस्थिति में इस वर्ष भव्य जनेश्वरी दीक्षाएँ होने जा रही हैं।</p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू बताते हैं कि समाज में इस समारोह को लेकर असीम उत्साह है। उन्होंने कहा—</p>
<p>“तीनों लोकों के देवता थोवनजी की पावन धरती पर उतरने को तैयार हैं। यह अवसर अत्यंत दुर्लभ है। पूज्य गुरुदेव अपने शिष्यों को अपने पवित्र हस्तकमलों से भव्य जनेश्वरी दीक्षाएँ प्रदान करेंगे—यह दृश्य हर किसी के मन को भाव-विभोर कर देगा।”</p>
<p>देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने हेतु थोवनजी पहुँचने की तैयारियों में लगे हुए हैं।</p>
<p>दिनांक: 23 नवंबर, रविवार 2025 स्थान: अतिशय क्षेत्र थोवनजी</p>
<p>भक्तों में इस कार्यक्रम को लेकर भारी उत्सुकता है। लोग कह रहे हैं कि यह वह क्षण है, जो जीवन में एक बार मिलता है—और जिसे कोई भी चूकना नहीं चाहता।</p>
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		<title>एक हजार आठ कलशों से हुआ दर्शनोदय तीर्थ पर महामस्तकाभिषेक : अमरोद में तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा का भव्य स्वागत, राष्ट्रसंत सुधासागरजी महाराज ने दिए प्रेरक संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 16:43:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अमरोद में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा और 1008 कलशों से हुए महामस्तकाभिषेक ने श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना दिया। धर्मसभा में राष्ट्रसंत ने भारतीय संस्कृति, सुदामा-कृष्ण प्रसंग और नशा मुक्ति पर प्रेरक विचार रखे। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट… अशोकनगर जिले के अमरोद गांव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अमरोद में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा और 1008 कलशों से हुए महामस्तकाभिषेक ने श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना दिया। धर्मसभा में राष्ट्रसंत ने भारतीय संस्कृति, सुदामा-कृष्ण प्रसंग और नशा मुक्ति पर प्रेरक विचार रखे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>अशोकनगर जिले के अमरोद गांव में दर्शनोदय तीर्थ परिसर में रविवार को भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ, क्षुल्लक श्री गम्भीर सागरजी, क्षुल्लक श्री विदेह सागरजी महाराज, ब्रह्मचारी प्रदीप भाईया व मुकेश भाईया के मार्गदर्शन में तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा का शुभारंभ सहोदरी से हुआ जो अमरोद पहुंची।</p>
<p><strong>स्वागत में उमड़ा जनसैलाब</strong></p>
<p>अमरोद पहुंचने पर मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्र सिंह यादव और जिला पंचायत अध्यक्ष अजय यादव के नेतृत्व में अंचल के हजारों लोगों ने रथयात्रा का भव्य स्वागत किया। इस शोभायात्रा में रजत विमान सहित चक्रवर्ती रथ, पुष्प सज्जा और भक्ति गीतों के साथ वातावरण धर्ममय बन गया।</p>
<p><strong>महामस्तकाभिषेक में 1008 कलशों का प्रयोग</strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ पर भगवान की प्रतिमाओं का एक हजार आठ कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। विभिन्न गांवों से आए श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ जल, दूध, चंदन, केसर और पुष्पों से भगवान का अभिषेक किया। पूरा परिसर “जय जिनेन्द्र” के उद्घोषों से गूंज उठा।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93658" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036.jpg" alt="" width="1280" height="716" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-1024x573.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-768x430.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251103-WA0036-990x554.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />धर्मसभा में राष्ट्रसंत का प्रवचन</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा – “जहां से सारी दुनिया का सोच समाप्त होता है, वहीं से भारतीय सोच प्रारंभ होती है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मात्र मनुष्यों द्वारा नहीं, बल्कि भगवानों द्वारा पुष्पित और पल्लवित की गई है। साधु संघ नगर-नगर विहार कर जन-जन को प्रभु संदेश पहुंचा रहा है।</p>
<p><strong>सुदामा-कृष्ण प्रसंग से दी जीवन प्रेरणा</strong></p>
<p>संतप्रवर ने सुदामा-कृष्ण संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोकर सेवा की, वैसे ही दिगंबर साधु भी अपने संयम और त्याग से समाज को धन्य करते हैं। साधु सदा भक्तों के कल्याण की भावना रखते हैं।</p>
<p><strong>नशा मुक्ति और परिश्रम पर संदेश</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि “जिस दिन भारत नशामुक्त होगा, उसी दिन भारत समृद्ध बनेगा।” उन्होंने पसीने की कमाई को पवित्र बताया और युवाओं से मेहनत और शिक्षा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>समाज के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेन्द्र अमन, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कनार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा वातावरण</strong></p>
<p>पूरे अमरोद क्षेत्र में धार्मिक उल्लास, भक्ति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रथयात्रा और महामस्तकाभिषेक में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।</p>
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		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : जिसमें दुर्गुण है उसमें नियम से कोई न कोई गुण जरूर है- मुनि श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Dec 2024 04:38:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागर। हम धर्म को अच्छा समझते हैं और उसकी प्रशंसा भी करते हैं, लेकिन वह धर्म हमें अच्छे का आनंद नहीं दे पाता। पूज्य समन्तभद्र स्वामी ने यह खोज की कि संसार बुरा नहीं है, संसारी बुरा है। धन बुरा नहीं है, धनी बुरा है। .ह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में कही। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सागर। हम धर्म को अच्छा समझते हैं और उसकी प्रशंसा भी करते हैं, लेकिन वह धर्म हमें अच्छे का आनंद नहीं दे पाता। पूज्य समन्तभद्र स्वामी ने यह खोज की कि संसार बुरा नहीं है, संसारी बुरा है। धन बुरा नहीं है, धनी बुरा है। .ह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> हम धर्म को अच्छा समझते हैं और उसकी प्रशंसा भी करते हैं, लेकिन वह धर्म हमें अच्छे का आनंद नहीं दे पाता। पूज्य समन्तभद्र स्वामी ने यह खोज की कि संसार बुरा नहीं है, संसारी बुरा है। धन बुरा नहीं है, धनी बुरा है। .ह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि पूज्य कुन्दकुन्द स्वामी ने 6 द्रव्यों को अच्छा-बुरा नहीं कहा, उन्होंने तत्वों की चर्चा की और कहा कि तत्वों पर श्रद्धा रखो। प्रत्येक द्रव्य स्वतंत्र है, न यह किसी को बाधा देता है और न किसी से बाधित होता है। विनाश की लीला सुनते ही हमें भय उत्पन्न होता है, इसलिए द्रव्यदृष्टि करने के लिए कहा जाता है कि हम भय से दूर हो जाएं। द्रव्यदृष्टि के लिए संसार और मोक्ष, हेय और उपादेय के मायने नहीं होते। मात्र एक ज्ञायक स्वरूप जाग्रत होता है जब द्रव्यदृष्टि जागती है, तब कुछ करने का मन नहीं होता।</p>
<p><strong>कैसे हम सप्त भयों से मुक्त हो सकते हैं?</strong></p>
<p>उन्होंने द्रव्यदृष्टि बनाने का सूत्र दिया—ज्ञान को आँखों के समान बनाओ, कानों, रसना, और नासिका के समान नहीं। आँखों की सबसे ज्यादा निंदा की गई, क्योंकि यही सबसे ज्यादा कबाड़ा करती है, लेकिन यह निश्चित रूप से समझो कि जहाँ कोई सबसे बड़ा दुर्गुण हो, वहां कोई न कोई गुण भी छिपा होता है। गुणी में तो गुण हमने बहुत बार देखे हैं, अब कुछ नया करो—किसी दुर्गुणी में गुण देखने का प्रयास करो। यदि दुर्गुणी में तुमने गुण देख लिया, तो तुम कोयले की खान से डायमंड पा सकोगे।</p>
<p><strong>दार्शनिक व्यक्ति को कुछ बुरा दिखता ही नहीं, सब अच्छा ही दिखता है</strong></p>
<p>जब तुम्हें चारों ओर सब अच्छा ही अच्छा दिखने लगे, तो समझो तुम एक बड़े दार्शनिक हो। संसार का कोई भी व्यक्ति तुम्हें दुखी नहीं कर सकता, तुम दरिद्र नहीं हो सकते, तुम मरते हुए भी नहीं मर सकते, क्योंकि तुम्हारी दृष्टि में जहाँ देखो, कोई न कोई गुण नजर आ जाएगा। समस्त शास्त्रों में शरीर की निंदा की गई है, लेकिन समन्तभद्र स्वामी ने कहा कि मैं इसी शरीर की पूजा कराता हूँ, और मेरे पास एक कला है—इस शरीर को जो छुएगा, वह अपवित्र से भी पावन हो जाएगा। जल गिरेगा और गंधोदक हो जाएगा, बस रत्नत्रय प्रकट करना है।</p>
<p><strong>प्रकृति की हर चीज अनुशासन में है, इसलिए प्रकृति को माँ भी कहते हैं, क्योंकि वह अपनी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करती</strong></p>
<p>जो पेड़ जिस नाम से बना है, उस पर वही फल लगेगा, जो पेड़ जिस ऋतु में फैलता है, उसी में फलेगा, अन्य में नहीं। कभी-कभी प्रकृति उल्लंघन कर देती है, तबाही मच जाती है। सबसे ज्यादा उल्लंघन करने वाला जीव है—संसारी जीव, हम और आप। यह संसार गंदा नहीं था, हमने अपने राग-द्वेष और कषायों से इसे गंदा कर दिया। संसार स्वच्छंद नहीं है, स्वतंत्र है।</p>
<p><strong>व्यक्ति मरकर तीन लोक में कहीं भी, किसी भी योनि में जन्म ले सकता है</strong></p>
<p>बस इतना सा ज्ञान करो—तुम मनुष्य में कैसे जन्मे? तुम कीड़े-मकोड़े, नारकी भी बन सकते थे। कुछ न कुछ तो है, नियम से कर्म ने मुझे मनुष्य बनाया, और मैं वह जीवन जीकर ही मरूँगा। क्योंकि तुम पूर्वभव में मान-कषाय से रहित थे, कम परिग्रह में संतुष्ट थे, इसलिए तुम मनुष्य बने हो, ताकि तुम्हें सम्मान मिले। जो सम्मान नहीं करते, उन्हें सम्मान नहीं मिलता।</p>
<p><strong>तुम मनुष्य बने तो भारत में ही जन्म क्यों हुआ?</strong></p>
<p>उसमें भी बुंदेलखंड में, उसमें भी सागर में, उसमें भी जैन जाति में क्यों हुआ? और जैन जाति में इस कुल में क्यों हुआ? जहाँ गुरु महाराज सामने बैठे हैं। नियम से कोई न कोई कारण है, क्योंकि पापियों को अच्छी संगति का भाव नहीं होता। कर्म कहता है कि यह प्रवचन सुनने के लिए नहीं चला जाए, क्योंकि गुरुओं के प्रवचन पापियों के लिए नहीं, पुण्यात्माओं के लिए होते हैं।</p>
<p><strong>किसी भी वस्तु को देखने के बाद तीन परिणाम होते हैं</strong></p>
<p>पहला—यह वस्तु मेरे काम की है। दूसरा—यह वस्तु मेरे काम की नहीं है। यह है स्वार्थ दृष्टि, निकृष्ट दृष्टि। ऐसा व्यक्ति कर्म को बांधता है, और जितना कर्म का बंधन करेगा, कल के दिन वह वस्तु को देखने लायक भी नहीं रहेगा, क्योंकि देखते ही यह समझ में आ जाएगा कि यह वस्तु मेरे लायक है।</p>
<p><strong>चारों संज्ञाएं—पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े को भी होती हैं, क्योंकि वे संसार में यही देखते रहते हैं कि मेरे काम की चीज क्या है?  </strong></p>
<p>यह वस्तु मेरे काम की है या नहीं, बस यही है राग-द्वेष। हम तो भगवान को भी नहीं छोड़ते, यह भगवान मेरे काम के हैं, तो उसी मंदिर जाते हैं। कहीं न कहीं उसका स्वार्थ होना चाहिए। यह मंदिर हमारे पूर्वजों ने बनवाए हैं। संसारी गंदा होता है और बदनाम होता है, लेकिन संसार को भोगना पड़ता है। संसार में छलकपट नहीं है, लेकिन संसारी में छलकपट है। लक्षण बनाओ कि जिसमें दुर्गुण है, उसमें नियम से कोई न कोई गुण जरूर है। नीम में जो गुण है, वह अन्य पदार्थों में नहीं है।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन :  सम्मोहन में व्यक्ति आकर्षित करता है और श्रद्धा में व्यक्ति आकर्षित हो जाता है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 07:13:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हम सब कुछ पाकर धन्य हो जाते हैं यह पूर्ण महानता नहीं है, हमें पाकर के दुनिया धन्य हो जाए यह पूर्ण महानता है। तीन प्रकार की दृष्टि होती है ज्ञेय दृष्टि, उपकारी दृष्टि, उपादेय दृष्टि। ज्ञेय दृष्टि जब होती है तो हमें ज्ञेय का ज्ञान होता है, ये ज्ञेय है और ज्ञेय के सम्बन्ध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हम सब कुछ पाकर धन्य हो जाते हैं यह पूर्ण महानता नहीं है, हमें पाकर के दुनिया धन्य हो जाए यह पूर्ण महानता है। तीन प्रकार की दृष्टि होती है ज्ञेय दृष्टि, उपकारी दृष्टि, उपादेय दृष्टि। ज्ञेय दृष्टि जब होती है तो हमें ज्ञेय का ज्ञान होता है, ये ज्ञेय है और ज्ञेय के सम्बन्ध में हम पूरा जानने का प्रयास करते है। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> हम सब कुछ पाकर धन्य हो जाते हैं यह पूर्ण महानता नहीं है, हमें पाकर के दुनिया धन्य हो जाए यह पूर्ण महानता है। तीन प्रकार की दृष्टि होती है ज्ञेय दृष्टि, उपकारी दृष्टि, उपादेय दृष्टि। ज्ञेय दृष्टि जब होती है तो हमें ज्ञेय का ज्ञान होता है, ये ज्ञेय है और ज्ञेय के सम्बन्ध में हम पूरा जानने का प्रयास करते है। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में कही। उन्होंने कहा कि आत्मा को, भगवान को भी जानना ज्ञेय दृष्टि है। मात्र जानों कौन क्या है, नरक को, स्वर्ग को, पंच परमेष्ठी को जानों ज्ञेय दृष्टि है, ज्ञेय दृष्टि विहंगम होती है। अच्छा बुरा नही, मात्र ज्ञेय दृष्टि। उन्होंने कहा कि सबसे पहले ज्ञेय दृष्टि का हमें अभ्यास करना चाहिए, मैं सब कुछ जानना चाहता हूँ पाप भी। पाप करना नहीं चाहता, पाप को जानना चाहता हूँ। बुरी वस्तुओं को भी जानों, शराब पीना नहीं है, शराब को जानों। ज्ञेय दृष्टि इतनी बड़ी हो जाये कि संसार की हर वस्तु हमारे ज्ञान के अंदर आ जाये, सारा जगत हमारे ज्ञान की मुट्ठी में आ जाये। तुम ज्ञान को कण-कण में बिखेर दो। यदि ज्ञेय ने तुम्हारे ज्ञान को अपने आकार में ले लिया तो तुम बंधी बन जाओगे, ज्ञेय के।</p>
<p><strong>ज्ञेय हमें आकर्षित कर रहा</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि हम दुनिया के सामने झुक रहे हैं, दुनिया को हम नहीं झुका पा रहे हैं क्योंकि ज्ञेय हमें आकर्षित कर रहा है। मार्किट हमें बुला रहा है बल्कि हमें वो सेठ बनना है कि मार्किट हमारे दरवाजे आ जाये। बाजार मत छोड़ो, बाजार से गुजरों, पर खरीददार मत बनना।बाजार एक बहुत बड़ा ज्ञान का भंडार है- सम्पूर्ण सृष्टि का नाम शास्त्र है। जो शास्त्र में लिखा है वह बाजार में है, यहां थियोरी है, वहां प्रैक्टिकल। हमें दुनिया में रहना है लेकिन दुनिया के तलबगार मत बनना, कहीं दुनिया तुम्हारे लिए व्यसनी न बना दे। जिसके अभाव में हम जी न सके, उसी का नाम है व्यसन। व्यसनी बन जाता है हमारा मन, हमारी आँखे। ये देखना है मुझे, व्यसन हो गया, यह खाना है मुझे, व्यसन हो गया। व्यसनी नही, ज्ञाता बनो और व्यसनी जब व्यक्ति बन जाता है तो बर्बाद हो जाता है। जब जब तुम जिस वस्तु को चाहोगे, वो तुम्हे नचायेगी, वो तुम्हें गुलाम बनाएंगी, तुम्हे सम्मोहित करेगी और तुम्हारा सब कुछ नाश कर देगी। हमें सबसे पहले वस्तु देखना है कि दुनिया में मुझे कोई आकर्षित तो नहीं कर रहा है, मैं किसी के प्रभाव में तो नहीं आ रहा हूँ, श्रद्धा व सम्मोहन में यही अंतर है। वो कोई भी हो सकता है, मां-बाप मुझे सम्मोहित कर रहे है क्योंकि उन्होंने मेरे ऊपर इतने उपकार किए हैं, उनके उपकारों से हम दब गए और सम्मोहित व्यक्ति कभी मुक्ति नहीं पा सकता क्योंकि सम्मोहित व्यक्ति तो गुलाम है, दास है। हमें सम्मोहित कर लिया भगवान ने क्योंकि जब जब हमने उनकी भक्ति की हमारे पाप कट गए, हमारा पुण्य बढ़ा, हमारी मुक्ति नही होगी। हम गुरु से सम्मोहित है क्योंकि गुरु ने हमें बहुत कुछ दिया है।</p>
<p><strong>मूर्ति देखकर कटते हैं पाप</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि कोई एक मंदिर में मूर्ति बैठालता है, कितने लोगों का मंदिर में उस मूर्ति से उपकार हुआ, कितने लोगों ने पाप काटे, कितने लोगों को शांति मिली, तुमने एक मंदिर की मूर्ति नही बैठाली है, तुमने साधु संतों को भी पाप काटने का मौका दिया है। तपस्या से जो पाप नहीं कटते हैं, वो तुम्हारी मूर्ति देखकर पाप कट जाते हैं। जैसे पाषाण की मूर्ति स्थापना निक्षेप से भगवान बन जाती है, ऐसे ही मिट्टी की ईंट जब पन्नी लपेटकर के उसको दी जाती है तो वह मिट्टी की ईंट भी सोने की बन जाती है। बनी रहने दो ढाई रुपए की ईंट, तुम्हारे खाते में तो स्वर्ण ईंट का दान लिखा रहेगा। सम्मोहन में सामने वाला सम्मोहित करता है और श्रद्धा में व्यक्ति स्वयं सम्मोहित होता है। जब किसी से हम आकर्षक होते हैं तो वह श्रद्धा कहलाती है और जब कोई मुझे आकर्षित करता है तो सम्मोहन कहलाता है। भगवान से हम आकर्षित हुए है क्योंकि भगवान अच्छे थे, इसका नाम श्रद्धा है, श्रद्धा में हमने ऋण नही लिया। भगवान ने हमारे ऊपर उपकार नहीं किया, हम उपकृत हुए है। वो अच्छे है इसलिए अच्छे है, वो उपकारी है इसलिए अच्छे नही हैं, ये तो स्वार्थ है। उपकार करने के बाद भूल जाओ, मैंने उपकार किया ही नहीं है। उपकार करने वाला कर्तव्य कर रहा है और जिस पर उपकार हो रहा है वह उपकृत हो रहा है, इसमे कोई ब्याज नही लगेगा, कोई कर्जदार नही होगा, ये दान कहलाता है। उपकार दृष्टि-किसी ने मेरे ऊपर उपकार किया है तो कभी भूलना मत। उपकार दृष्टि, उपकार करने वाले की तरफ से नही, उपकृत होने वाले की तरफ से आना चाहिए। तुमने किसी पर उपकार किया है यह ऋण दृष्टि है, ये पाप दृष्टि है, स्व परघातक है।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : जिस बाप की संपत्ति पर भाइयों में लड़ाई हो जाए, समझ लेना उस बाप की कभी सद्गति नहीं हो सकती: निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Sep 2024 08:17:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[व्यक्ति को अपने जीवन को चलाने के लिए एक ही कारण नहीं होना चाहिए क्योंकि जीवन अनेक पहलुओं से चलता है। एक ही प्रकार का अधर्म नहीं है, तो एक ही प्रकार का धर्म भी नहीं है। अधर्म धर्म को मूल्यवान बनाता है। अंधकार से प्रकाश की, प्यास से पानी की, भूख से रोटी की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>व्यक्ति को अपने जीवन को चलाने के लिए एक ही कारण नहीं होना चाहिए क्योंकि जीवन अनेक पहलुओं से चलता है। एक ही प्रकार का अधर्म नहीं है, तो एक ही प्रकार का धर्म भी नहीं है। अधर्म धर्म को मूल्यवान बनाता है। अंधकार से प्रकाश की, प्यास से पानी की, भूख से रोटी की कीमत बढ़ जाती है। अभाव सद्भाव को अनमोल बना देता है। इसलिए संसार एक समस्या है, तो मोक्ष उसका समाधान है। मिथ्यात्व समस्या है, तो सम्यकदर्शन उसका समाधान है। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> व्यक्ति को अपने जीवन को चलाने के लिए एक ही कारण नहीं होना चाहिए क्योंकि जीवन अनेक पहलुओं से चलता है। एक ही प्रकार का अधर्म नहीं है, तो एक ही प्रकार का धर्म भी नहीं है। अधर्म धर्म को मूल्यवान बनाता है। अंधकार से प्रकाश की, प्यास से पानी की, भूख से रोटी की कीमत बढ़ जाती है। अभाव सद्भाव को अनमोल बना देता है। इसलिए संसार एक समस्या है, तो मोक्ष उसका समाधान है। मिथ्यात्व समस्या है, तो सम्यकदर्शन उसका समाधान है। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विरोधी तत्व ने अच्छी वस्तुओं को अनमोल कर दिया।</p>
<p>कितने प्रकार हैं अधर्म के; हिंसा से बच जाता है व्यक्ति, तो झूठ में फंस जाता है। झूठ से बच जाता है, तो मायाचारी में फंस जाता है। माया से बचता है, तो लोभ में फंस जाता है। जिन 108 द्वारों से पाप हो रहा है, उन्हीं 108 द्वारों से पुण्य होने लग जाए, तो मामला बराबर का बैठ जाएगा। जिन कषायों से पाप का बंध होता है, उन्हीं कषायों से पुण्य का बंध होता है। क्योंकि स्थिति और अनुभाग तो कषाय ही डालते हैं, इसलिए कषाय का त्याग नहीं करना चाहिए; संसार में जीने के लिए कषाय चाहिए, मोक्ष के लिए नहीं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>क्रोध से बचें</strong></p>
<p>उन्होने कहा कि अभी क्रोध आया है तुम्हें अधर्म के लिए, पाप के लिए। अब क्रोध आना है तुम्हें धर्म कार्य के लिए; इतना क्रोध जितना व्यक्ति मर्डर करने के लिए करता है। जब व्यक्ति पाप नहीं कर पाता है, तो सुसाइड कर लेता है। बस वही गुस्सा चाहिए। तुम धर्म नहीं कर पा रहे हो, तो तुम्हें सुसाइड का भाव आना चाहिए। धर्म के लिए जब व्यक्ति सुसाइड का भाव करता है, तो उसका नाम सुसाइड नहीं, समाधि है; संल्लेखना है। सुसाइड वो करता है जिसको कोई उम्मीद नहीं है।</p>
<p>अब कोई बचाने वाला नहीं है। यदि उसको लगे कि कहीं से इस घाटे की पूर्ति होने की संभावना है, तो फिर वह मरने का भाव नहीं करता। इसी तरह, मैं जो धर्म करना चाहता था, अब मैं वो धर्म नहीं कर सकता। यदि थोड़ी भी बचने की गुंजाइश हो, तो वह समाधि नहीं लेता। मरने की अपेक्षा मुनिपद छूटे, तो छूट जाए; लेकिन दो प्रतिमा लेकर जिंदा रहने की गुंजाइश है, तो वह जिंदा रहेगा।</p>
<p><strong>कर्मों का ध्यान रखें</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मैं गरीबों से कहता हूं, जिस दिन बोली लगे, उस दिन जरूर आया करो। इसलिए नहीं कि तुम्हें बोली लेना है, इसलिए कि तुम्हें जलाना है, रुलाना है। मैं भी जैन हूम, महाराज का भक्त हूँ। बोली दूसरे के नाम टूट गई, मैं पापी नहीं ले पाया। रोज सुबह उठने के बाद और सोने के पहले तुम्हें कर्म ठोककर रोना है। ये आर्त रौद्रध्यान नहीं है, धर्मध्यान है; क्योंकि तुम्हें रोना इसलिए आ गया कि मेरा धर्म छूट गया। बोली लेने में पुण्य नहीं है। ओहो भगवन! मैं इतना पुण्यशाली, मैंने बोली ले ली। जरूर मैंने जन्म-जन्म में कोई पुण्य किया होगा, तभी मेरे मन में ये भाव आया। लोग तुमसे पूछें, तुम्हारा सबसे बड़ा अशुभ दिन कौन सा है? कोई मर गया, कोई एक्सीडेंट हो गया; ये अशुभ दिन है। तो कहना नहीं। जिस दिन मैं जिनेन्द्र देव का दर्शन, अभिषेक नहीं कर पाऊं, णमोकार मंत्र की माला नहीं फेर पाऊं, जिस दिन मैं प्रतिक्रमण, सामायिक नहीं कर पाऊँ, वो मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा अशुभ दिन है।</p>
<p><strong>भविष्य को समझें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जिस बाप की संपत्ति पर भाइयों में लड़ाई हो जाए, समझ लेना उस बाप की कभी सद्गति नहीं हो सकती। तुम्हारी संपत्ति में दो बेटे हैं पूर्व भव के। पिता सोचता है, इनको कैसे निपटाऊँ। मैं बाप के नाते इनको दुःख दे नहीं सकता, तो मैं ऐसी धन-दौलत जोड़ूंगा कि ये दोनों एक दूसरे के दुश्मन बन जाएंगे। दो भाई अपनी-अपनी कमाई पर लड़ रहे हैं, वो इतना बड़ा पाप नहीं है; लेकिन यदि दो भाई बाप की संपत्ति पर लड़ रहे हैं, तो ये बाप तुम्हारे पूर्व भव का बैरी था, जो स्वयं तो लड़ा नहीं, लेकिन तुम्हें लड़वा गया।</p>
<p>यदि सही पिता होगा, तो अपने जीते जी सब कुछ बंटवारा कर देगा। अलग करो या न करो, मेरे मरने के बाद मेरी संपत्ति पर मेरे जन्म-जन्म के प्यारे बेटे लड़ेंगे नहीं। हम उसका ऐसा बंटवारा करेंगे। इसलिए राजा लोग अपने सामने राजगद्दी अपने बेटों को सौंपते थे; उसका मूल कारण यही था, क्योंकि वे जानते थे कि भविष्य क्या है।</p>
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		<title>श्री यशोदय अतिशय तीर्थ मे वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह संपन्न : जिन अभिषेक पूजन के साथ हुआ महामस्तकाभिषेक  </title>
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		<pubDate>Tue, 06 Feb 2024 08:44:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री यशोदय तीर्थ क्षेत्र प्रणेता मुनिपुगंव सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से तीर्थ क्षेत्र का 11वां मंदिर दिवस, महामस्तकाभिषेक एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। प्रातःकाल बेला में जिन अभिषेक पूजन किया गया। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230; महरौनी (ललितपुर)। श्री यशोदय तीर्थ क्षेत्र प्रणेता मुनिपुगंव सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से तीर्थ क्षेत्र का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री यशोदय तीर्थ क्षेत्र प्रणेता मुनिपुगंव सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से तीर्थ क्षेत्र का 11वां मंदिर दिवस, महामस्तकाभिषेक एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। प्रातःकाल बेला में जिन अभिषेक पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी (ललितपुर)।</strong> श्री यशोदय तीर्थ क्षेत्र प्रणेता मुनिपुगंव सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से तीर्थ क्षेत्र का 11वां मंदिर दिवस, महामस्तकाभिषेक एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। प्रातःकाल बेला में जिन अभिषेक पूजन किया गया। इसके बाद मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य चक्रेश चौधरी एवं आनंद सर्राफ को प्राप्त हुआ। मुनिश्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में बीते साल आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान के महापात्रों, चौबीसी मंदिर निर्माण पुण्यार्जक, सिंहद्वार पुण्यार्जक, संत निवास पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-55367" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010.jpg" alt="" width="1204" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010.jpg 1204w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010-226x300.jpg 226w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010-771x1024.jpg 771w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010-768x1021.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010-1156x1536.jpg 1156w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240206-WA0010-990x1316.jpg 990w" sizes="(max-width: 1204px) 100vw, 1204px" />इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में शीलचंद्र जैन अनोरा (दाऊ), राजेंद्र थनवारा, स्वतंत्र मोदी, विजय जैन, डॉ. अरविन्द जैन ऑप्टीकल, पंकज जैन, संजीव सीए, धन्य कुमार जैन, बंटी बजाज, अशोक जैन आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री अभिनन्दनोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी, श्री देवोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी, श्री सतोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी, श्री शान्तोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी सहित क्षेत्रीय कमेटी के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में यशोदय अन्तर्राष्ट्रीय तीर्थ कमेटी के प्रशांत सिंघई बंटी, राजा चौधरी, राजेश मलैया, मुकेश सर्राफ, दिगम्बर जैन पंचायत अध्यक्ष कोमल सिंघई, प्रमोद सिंघई, वीरेंद्र डोगरया, निशांत जैन, अनिल मिठया, भागेश खजुरिया, जिनेश मलैया, रोबिन जैन, यशोदय महिला मंडल अध्यक्ष रश्मि मलैया आदि सहित सकल समाज का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन कवि संजय पांडेय भारत ने किया।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन :  शुद्ध लोग अपनी दृष्टि नहीं, दुनिया बदलना चाहते हैं &#8211; सुधासागर महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 10 Dec 2023 09:23:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज के दिव्य समवशरण ताजगंज स्थित ताजमहल के निकट ताजखेमा पर आयोजित हुए। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज के दिव्य समवशरण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज के दिव्य समवशरण ताजगंज स्थित ताजमहल के निकट ताजखेमा पर आयोजित हुए।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज के दिव्य समवशरण ताजगंज स्थित ताजमहल के निकट ताजखेमा पर आयोजित हुए। मुनिपुंगवश्री के दिव्य समवशरण का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया। सौभाग्यशाली गुरुभक्तों ने संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p>साथ ही विभिन्न स्थानों से आए गुरुभक्तों ने मुनिपुंगवश्री का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए। इस दौरान आगरा में बन रहे सबसे बडे़ लोकोदय तीर्थ में भूदान राशि देने वाले गुरुभक्तों का ताजगंज मंदिर कमेटी एवं श्री दिगम्बर जैन धर्मप्रभावना समिति के पदाधिकारियों द्वारा दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52764" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1.jpeg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/WhatsApp-Image-2023-12-10-at-2.48.08-PM-1-1320x879.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /><br />
<strong>अहिंसा में होती है ताकत</strong></p>
<p>दिव्य समवशरण में विराजमान मुनिपुंगवश्री ने मंगल प्रवचन में कहा कि जैनाचार्यों ने एक चश्मा बनाया है। चश्मे से पूरी दुनिया दिखती है। शुद्ध लोग अपनी दृष्टि नहीं, दुनिया बदलना चाहते हैं। बस जैनी ही खिला सकता है शेर को रोटी, अहिंसा की ताकत है। दिव्य समवशरण का संचालन संजय जैन एवं मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया। इसके बाद निर्यापक श्री मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार ताजगंज जैन मन्दिर से श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर ओल्ड ईदगाह कॉलोनी के लिए हुआ।</p>
<p>दिव्य समवशरण की व्यवस्था ताजगंज बालिका मंडल, ताजगंज महिला मंडल, ताजगंज युवा मंडल द्वारा संभाली गई। इस अवसर संजय जैन, संजय बाबू जैन, विजय जैन, योगेश जैन, पारस जैन, विनय जैन, धीरज जैन, उत्सव जैन, निशांत जैन, वैभव जैन, तनिष जैन,अर्हंत जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, मीरा जैन, रितु जैन, अनुराधा जैन, गीता जैन, सपना जैन, आशु जैन, नैंसी जैन, जोली जैन,सहित ताजगंज एवं आगरा सकल दिगम्बर जैन समाज के अलावा बाहर से पधारे गुरुभक्त भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>स्वर्ण कलशों से किया गया महामस्तकाभिषेक : बच्चे यदि पैसा हमेशा अच्छे कार्य में खर्च करें, तभी उन्हें दो-सुधा सागर महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Dec 2023 12:59:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर, डी ब्लॉक, कमला नगर आगरा में मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में सूर्यमंत्रित जिनालय में प्रतिष्ठित जिन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से महावीर भगवान, श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक कर महाशांतिधारा महामहोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा। महावीर दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर, डी ब्लॉक, कमला नगर आगरा में मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में सूर्यमंत्रित जिनालय में प्रतिष्ठित जिन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से महावीर भगवान, श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक कर महाशांतिधारा महामहोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री के प्रवचन भी हुए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर, डी ब्लॉक, कमला नगर आगरा में मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में सूर्यमंत्रित जिनालय में प्रतिष्ठित जिन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से महावीर भगवान, श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक कर महाशांतिधारा महामहोत्सव मनाया गया। धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। जिसमें परिवार ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर मुनिश्री को शास्त्र समर्पित किए। मंच का संचालन मनोज जैन ने किया।</p>
<p><strong>हर किसी का प्यारा होता है जैनी</strong></p>
<p>कार्यक्रम में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज जी ने कहा कि मानव के अंदर ये विशेषता होती है कि जो कहता है कि नहीं, मेरी जिदंगी में जो कुछ भी है मां-बाप तय करेंगे, मां-बाप मेरा खाना तय करेंगे, मेरा रहना तय करेंगे, मैं तय नहीं करूंगा। जब सब तरफ से प्रत्येक द्रव्य का बंटवारा हुआ है और बंटवारे में भी मेरे नाम सारी संपत्ति है तो फिर खर्च करने का अधिकार हमारा स्वतंत्र होना चाहिए, ऐसी सब लोगों की सहमति होगी। बस यही जिंदगी का सबसे बड़ा मूल्यवान बिंदु है, इस पर टिकी है सारी सृष्टि। अनादिकाल से हम सबका कल्याण इसलिए नहीं हुआ। जब तक हमारा प्रस्ताव यह है कि कमाई हमारी धन हमारा और खर्च भी हमारा तो समझ लेना अपनी जिदंगी में कभी हम ऊंचाइयां प्राप्त नहीं करेंगे, हमारा डाउनफाल होगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52462" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134.jpg" alt="" width="1080" height="713" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134-300x198.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134-1024x676.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134-768x507.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231202-WA0134-990x654.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p>जो पिता अपने बेटे को ये छूट दे देता है कि बेटा मैंने तुझे सौ रुपये दे दिये, तू जा जिस पर खर्च करने है, कर लेना, समझ लेना वो पिता अपनी जिंदगी में बहुत बड़ी भूल कर रहा है, उसे पिता होने का अधिकार ही नहीं है, वो पिता के वेष में पशु है, पिता के रूप में बेटे का दुश्मन है। महानुभाव बहुत करुणा दया करके कह रहा हूं कि बेटे से इतना लाड़ प्यार मत करना कि बेटे की जिंदगी बर्बाद हो जाए, वो कुल को कलंकित कर दे, कल के दिन बेटा तुम्हारे काबू में न रहे। नीति बनाई गई कि बेटे को सौ नहीं, पांच सौ नहीं, सारी वसीयत दे दो लेकिन उसके साथ तुम्हें कहना पड़ेगा, बेटा ये बताओ किसके लिए चाहिए। यदि बेटा जवाब नहीं देता है किसके लिए तो थप्पड़ मारकर ले लेना, मुट्ठी न छोड़े तो अंगुली में फ्रेक्चर हो तो हो जाने देना, सौ रुपये वापिस ले लेना।</p>
<p>स्वच्छंद बेटे को कोई प्यार नहीं, कोई राशि नहीं, कंजूस नहीं बना रहा हूं, पहले बताओ किस चीज के लिए। यदि वो नहीं बता रहा है तो यही हो गया है कि वो किसी गलत कार्य के लिए जा रहा है। अच्छे कार्य के लिए होता तो स्पष्ट कह देता। हर बेटे से मेरा कहना है कि पिता से पैसा कितना भी मिले, साथ मे ये लिस्ट भी लेना- पिताजी मैं किसमे खर्च करूं ये निर्णय आप दो, ये है श्रेष्ठ बेटा। जो बेटा खर्च की लिस्ट पिता से लेता है, उस बेटे की जिंदगी में कभी भी खतरा नहीं आ सकता, उस बेटे की जिंदगी संस्कार विहीन नहीं हो सकती, वो बेटा कभी कुल को कलंकित नही कर सकता क्योंकि पिता कभी अहितकारी कार्य के लिए नहीं देगा।</p>
<p>पिताओं से मेरा कहना है कि बेटे को कुछ भी दो, उसके साथ खर्च की लिस्ट देना। इनमें से कोई चीज चाहिए हो तो पैसा पकड़, नहीं तो मैं पैसा नहीं दूंगा, मैं भी किसी गुरु का चेला हूं। बेटे से कंजूसी नहीं करना, शर्त है इतने खर्च के लिए दे रहा हूं, चाहे मुझे कर्जा करके लाना पड़े। यदि बेटे पर तुमने इतना अधिकार जमा लिया जाओ वो बेटा तुम्हारे नाम को दिन दूना, रात चौगुना सारी दुनिया में फैलाएगा। हमारे प्रभु ने जैन जाति ऐसी बनाई है जिसके दुःख में कोई न कोई रोने वाला जरूर मिलेगा, जैनी के घर में कोई नहीं होगा तो पड़ोसी रोएगा,</p>
<p>जैनी का स्वभाव ही ऐसा होता है। जैनी के आचार-विचार ऐसे होते हैं कि वो किसी न किसी के लिए प्यारा होता है। मैंने हर जाति वालों से पूछा, तुम मकान किसके पड़ोस में चाहोगे, उसने कहा आपकी कृपा हो तो जैन के पड़ोस में रहूं क्योंकि हर व्यक्ति जानता है जैनी का स्वभाव क्या होता है।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनसी, चक्रेश जैन पीएनसी, योगेश जैन पीएनसी, जगदीश जैन, अध्यक्ष आगरा दिगंबर जैन परिषद पारस बाबू जैन, दिलीप जैन, रुपेश जैन, के के जैन, नीरज जैन, शिखर जैन सिघई, पवन जैन चांदी, अनिल जैन रईस, अनिल जैन एफसीआई, नरेश जैन लुहाड़िया, राकेश जैन बजाज, समकित जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज मौजूद था। कल सुबह 7 बजे से महामस्तकाभिषेक एवं मुनि श्री मंगल प्रवचन होंगे।</p>
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		<title>सुधादेशना समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन :           घर में लगे हुए चित्रों से पता चलता है इस घर के रहने वालों का चरित्र क्या है &#8211; मुनि श्री सुधासागर </title>
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		<pubDate>Fri, 10 Nov 2023 07:10:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य़श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में चल रहे श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन 9 नवंबर को हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;. &#160; आगरा। संत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>संत शिरोमणि आचार्य़श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में चल रहे श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन 9 नवंबर को हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन हुए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></p>
<hr />
<p>&nbsp;</p>
<p>आगरा। संत शिरोमणि आचार्य़श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में चल रहे श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन 9 नवंबर को हुआ। शिविर के अंतिम दिन का शुभारंभ बालिकाओं के मंगलाचरण की प्रस्तुति के साथ किया। इसके बाद शिविरार्थियों ने विशेष अर्घ्यों से गुरु पूजन किया। इस दौरान सभी को गुरु भक्ति करने का अवसर मिला। शिविर के समापन पर सभी शिविरार्थियों ने हमेशा के लिए धर्म प्रभावना में अग्रसर होने का संकल्प लिया। भोजन व्यवस्था के लिए चातुर्मास समिति की प्रशंसा करते हुए उनका स्वागत सम्मान किया गया।</p>
<p><strong>किया गया सम्मानित</strong></p>
<p>इस दौरान मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज ने हजारों शिविरार्थियों को श्रमण संस्कृति संस्थान की नीति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। शिविर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले बालक -बालिकाओं को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। गुरु देव के सानिध्य में सम्मान पाकर यह पल किसी गौरव से कम नहीं था।</p>
<p><strong>जिंदगी को जीना सीखो</strong></p>
<p>शिविर के अंतिम दिन मुनिश्री ने भक्तों से कहा कि हमें सृष्टि और जीवन को बहुत गहराई से समझना है क्योंकि हमारी जिंदगी निकल रही है और हमें जिंदगी जीना है। जिंदगी जीने का आनंद हर क्षण ऐसा हो जो हमें लगे कि मैं धन्य हो रहा हूं। हर कार्य ऐसा हो कि हमें लगे कि मैं गौरवान्वित हो रहा हूं, एक आनंद की अनुभूति हो। ऐसी जिदंगी प्रकृति नही देने वाली, प्रकृति रॉ मटेरियल देती है। उससे क्या बनाना है वह निर्णय आपका है और बनाने का नाम ही विज्ञान है। हर वस्तु प्रकृति में है, विज्ञान किसी वस्तु का निर्माता नहीं है, वस्तु अविनाशी होती है। उस वस्तु का विशेष गुण जो प्रकट किया जाता है, वह प्रकृति के हाथ में नहीं है, हमारे तुम्हारे हाथ में है, कितनी वस्तुएं हैं जो संसार में भरी पड़ी हैं वनस्पति के रूप में लेकिन वैद्य उसे हाथ में जाते ही औषधि बना देता है। पृथ्वी में पड़े हुए हैं सारे रत्न, पृथ्वी तो कहती है ये सब हमारे लिए पृथ्वीकाय हैं, कोई अंतर नहीं है एक सेंडस्टोन और रत्नों के पत्थर में।</p>
<p>बड़ों का सम्मान करो</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी भी हो बड़ों को सम्मान दे सको तो बहुत अच्छी बात है नहीं दे सको तो जिंदगी में एक कार्य जरूर करना, कार्य तुम करना और सम्मान तुम्हारे गार्जियन का हो। कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारे कार्य से उन्होंने जो इज्जत कमाई है वो धूल में मिल जाए। बेटा जब भी गलती करता है, दुनिया उसके बाप पर जाती है, शिष्य कभी कोई गलती करता है, सीधा गुरु पर लांछन जाता है, रास्ते में कोई लूटता है सीधा वह रास्ता बदनाम होता है। धर्मी गलती करता है बदनाम धर्म होता है। जैनी गलती करता है बदनामी जैनधर्म, जैनजाति की होती है। अपनी जिंदगी में देखो तुम्हारे ऊपर किन-किन के उपकार हैं- जन्मदाता का, कुल का, जाति का, उसके बाद संस्थान का धर्म का, पढ़ने वालों का, हम साधुओं का इन सब की लिस्ट बना लो और प्रतिज्ञा कर लो इन सबको सम्मान दिला पाऊं या ना दिला पाऊं, मेरे कारण से कभी इनका अपमान नहीं होने दूंगा। तुम्हारे 24 घंटे की हर हरकत में कोई भी हरकत बदनामी कर सकती है तुम्हारे कपड़ों से भी बदनामी हो सकती है, तुम यह मत समझना कि बदनामी का अर्थ है व्यसन करना, दुर्गुणी होना। तुम्हारी पहनने की पोशाक भी इन सबको बदनाम कर सकती है। पोशाक ही नहीं, पोशाक के साथ-साथ आपका खान-पान आपकी थाली इन सबको बदनाम कर सकती है। विचार ऐसे बनाओ जिससे स्वयं को भी गर्व हो और तुम्हारे विचार जो सुने उसको भी गर्व हो जाए कि तुम्हारे इतने अच्छे विचार। संस्थान को भी, मां-बाप को भी, हमें भी गर्व हो कि मेरे बच्चों के ये विचार हैं।</p>
<p>गुरु का ऋण नहीं चुका सकते</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि तुम्हें कितने ही क्रोध आ जाए, शास्त्री का क्रोध अलग होना चाहिए। थोड़ा गाली पुराण पढ़ो, शास्त्री के मुख से निकली हुई गाली में थोड़ी सभ्यता होगी। अधिक से अधिक अज्ञानी कहीं का मूढ़। जैन दर्शन में किसी भी क्रिया में न पाप है न पुण्य है, सवाल यह है कि कौन कर रहा है। वह कर रहा है जो जगत में उच्चासन पा चुका है। मोबाइल पर भी तुम्हारे संस्थान की पहचान हो। फोन भी संस्थान की ध्वजा लेकर चले। गुरु का ऋण चुकाया नहीं जाता है, कुछ ऐसा करो कि गुरु ऋण माफ कर देता है। वह घर में कैलेंडर नहीं टंगा है, तुम्हारे चरित्र का प्रमाण पत्र टंगा है। वह कार्य करो जिंदगी में, जिससे स्वयं को भी गर्व हो, स्वयं भी मस्तक उठाने का भाव करें,स्वयं की नजरों में उठना सीखो। दुनिया की नजरों से गिरो या ना गिरो सबसे ज्यादा निकृष्ट व्यक्ति वह है स्वयं की नजरों में गिर गया। आप कभी अपनी खुद की नजरों में मत गिरना। कहीं ऐसा ना हो तुम्हारे खुद के कृत्य से तुम बाजार में निकलने मे शर्म कर रहे हो, मन्दिर जाने में शर्म लग रही हो।</p>
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		<title>सुधादेशना समयसार प्रशिक्षण शिविर :  यदि किसी कार्य को करने के बाद यदि उदासीनता आए तो समझना गलत रास्ते पर हो &#8211; मुनि श्री सुधासागर </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Nov 2023 15:22:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में चल रहे श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर के ग्यारहवें दिन 8 नवम्बर को कार्यक्रम की शुरुआत शांतिनाथ महिला मंडल ने संत शिरमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><span style="color: #000000;">संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में चल रहे श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर के ग्यारहवें दिन 8 नवम्बर को कार्यक्रम की शुरुआत शांतिनाथ महिला मंडल ने संत शिरमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं मुनिपुंगव श्री को नमन करते हुए मंगलाचरण के साथ की। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि अदृश्य मुझे दिखता नहीं है और जो दिखता है, वह मुझे देखना नहीं, उसको देखने से हमारा कोई उद्देश्य हल नहीं होता। दृश्यमान को देखकर के हमारे परिणाम आकुल -व्याकुल होते हैं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..</span></span></p>
<hr />
<p>आगरा। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक मुनिपुंगवश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में चल रहे श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर के ग्यारहवें दिन 8 नवम्बर को कार्यक्रम की शुरुआत शांतिनाथ महिला मंडल ने संत शिरमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं मुनिपुंगव श्री को नमन करते हुए मंगलाचरण के साथ की। मंगलाचरण के बाद महाराष्ट्र के रहने वाले श्रमण संस्कृति के विद्वान ने अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि गुरु नहीं मिलते तो हम मोक्ष मार्ग पर नहीं चल पाते। ये हमारा सौभाग्य है कि हमें गुरु का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर के अन्तर्गत गुरु दर्शन को आए गुरुभक्तों ने मुनिश्री को शास्त्र भेंट कर गुरु का आशीर्वाद लिया। इसी बीच गुरुभक्तों ने चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p>गलत नहीं होना और सत्य होने में बहुत अंतर</p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि अदृश्य मुझे दिखता नहीं है और जो दिखता है, वह मुझे देखना नहीं, उसको देखने से हमारा कोई उद्देश्य हल नहीं होता। दृश्यमान को देखकर के हमारे परिणाम आकुल -व्याकुल होते हैं। सामने वाला भी हमारे लिए अच्छा नहीं मानता। धर्म का अनुभव यही अटक रहा है। सब कुछ सही मानते हुए भी जब अनुभव से तौलता हूं तो धर्म बिल्कुल विपरीत नजर आता है। अभव्य भी कह रहा है कि शास्त्र में लिखा हुआ गलत नहीं है लेकिन यह कहा स्वीकार कर पा रहा है कि यही सत्य है। गलत नहीं होना और सत्य होने में बहुत अंतर है। नास्ति और अस्ति में बहुत अंतर है, यह गलत नहीं है। इसलिए सही है ये मत मान लेना, यह सही है इसलिए गलत नही है ये भी मत मान लेना। कई बार गलत चीज सत्य होती है और कई बार सत्य चीज गलत होती है क्योंकि यह स्थितियां बहुत बार गुजरती हैं। इसलिए तत्वार्थ सूत्रकार को लिखना पड़ता सत्य है लेकिन स्वीकार करने लायक नहीं है।</p>
<p>आत्मा का पर्याय है सत्य</p>
<p>उन्होंने कहा कि कितने कार्य हैं जो मुझे करने नहीं चाहिए लेकिन कर रहा हूं, बुद्धि पूर्वक कर रहा हूं क्योंकि उसे कार्य को किए बिना हमारे इष्ट की सिद्ध नहीं हो रही। कभी-कभी इष्ट की सिद्धि के लिए गलत कार्य भी करना पड़ता है, गलत का समर्थन करना पड़ता है। ये संसार की ऐसी विचित्रता है और इसी के परिणाम स्वरूप मन कह देता है गलत तो नहीं कहूंगा लेकिन मैं सत्य स्वीकार नहीं करूंगा। सत्य वो अनुभूत वस्तु है जो आत्मा की पर्याय बन सकती है। ये गलत नहीं, इतने कहने मात्र से जरूरी नहीं है इसने स्वीकार कर लिया। क्या जिनेंद्र भगवान गलत हैं, सदोष हैं, बिल्कुल नहीं निर्दोष हैं इतने कहने मात्र से मत समझ लेना उसने भगवान को स्वीकार कर लिया, इतने मात्र से जरूरी नहीं है कि हमे भगवान मिल गया। हीरा तुम्हारे हाथ में आ सकता है लेकिन तुम्हें मलकियत का अनुभव हो ऐसा कोई नियम नहीं है। बैंक में मैनेजर धन को हाथ से गिनता है लेकिन उसे धनीपने का आनंद नहीं आता। धन है और धनी नहीं है, गुरु है लेकिन शिष्य नहीं है, धर्म है लेकिन वो धर्मी नहीं है, ऐसा कोई नियम नहीं है। भगवान हैं लेकिन भक्त नहीं है क्योंकि वो यह नहीं कह पा रहा है, यही सत्स्वरूप है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-51527" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-1024x682.jpeg" alt="" width="1024" height="682" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-768x512.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-1536x1023.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-990x660.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820-1320x879.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/11/9adf9033-3f78-46d7-87e2-4d6a8d761820.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" />धर्म असीम है</p>
<p>सम्यकदर्शन से पहले की भूमिका जैसे ही तुम्हें कोई अच्छी वस्तु दिखे और तुम्हें देखने का भाव आये, समझ लेना संदेह है, आकर्षण है, शायद मिथ्यादृष्टि हो। तुम और तुम्हें कोई भी चीज देखने का भाव आए मुझे नहीं देखना पूरी जिंदगी देखते ही तो रहा हूं क्या मिला, सब सुन लिया अब कुछ नहीं सुनना। आंख, नाक, कान जिस- जिस इन्द्रिय का हमने सेवन किया, उसी पर हमारी शक्ति क्षीण होती गई। पहले थर्मामीटर है बोरियत, दूसरा थर्मामीटर है अरुचि, कर तो रहे हो लेकिन रुचि नहीं है, तीसरा थर्मामीटर है तुम्हें थकान तो महसूस नहीं हो रही है, विराम का भाव तो नहीं आ रहा है। आप उसे देखिए जिसमें आपकी आंख थके नहीं, वो साधना करो। कोई आज तक दावा कर सके तो बताओ कि मैंने ऐसी चीज देखी है जिसमें मेरी आंख थकती नहीं है बल्कि आंखों की ज्योति और बढ़ती है। कभी हुआ है ऐसा? नही, इसलिए अपन सब कुछ देखते हुए भी सही नहीं देख पा रहे हैं, सही वह है जिसमें आंख थकती नहीं है। एक पाप ऐसा बताओ, जिसको करने के बाद कोई भी व्यक्ति थकता नहीं हो, थकता है, पाप असीम नहीं हो सकता और धर्म वो चीज है जिसमें गैप की जरूरत न पड़े, धर्म असीम है और हमने धर्म को सीमित कर दिया, पाप को असीमित कर दिया। मन्दिर जाने की सीमा है और घर जाने की कोई सीमा नहीं। इस दौरान सभी विद्वान पूरे जगत में धर्म का परचम लहरा रहे हैं। 29 अक्टूबर से शुरू हुए श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर का समापन 9 नवम्बर को होगा। इसके साथ ही श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति आगामी आयोजनों की तैयारियों में जूट गई है।</p>
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