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	<title>सिहोनियाजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>सिहोनियाजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री शान्तिनाथ विधान एवं महामस्तकाभिषेक भी होगा : सिहोनियांजी में मनाया जाएगा मोक्ष कल्याणक महोत्सव </title>
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		<pubDate>Fri, 05 May 2023 13:59:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 18 मई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230; मुरैना। जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 18 मई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव 18 मई को विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी कमेटी के परम संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी, गुरुवार 18 मई को श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी (मुरैना) मध्यप्रदेश में चक्रवर्ती तीर्थंकर भगवान शान्तिनाथ का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा। इस महोत्सव के सम्पूर्ण धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेन्द्र जैन शास्त्री मगरौनी एवं संजय जैन शास्त्री सिहोनियां सम्पन्न कराएंगे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-43466" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0013.jpg" alt="" width="821" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0013.jpg 821w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0013-231x300.jpg 231w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0013-790x1024.jpg 790w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230505-WA0013-768x995.jpg 768w" sizes="(max-width: 821px) 100vw, 821px" /></p>
<p><strong>होगी विशेष पूजा</strong></p>
<p>क्षेत्र कमेटी के संरक्षक आशीष जैन सोनू ने बताया कि इस पावन एवं पुनीत अवसर पर लोहामंडी ग्वालियर के श्रावक श्रेष्ठि राजेशकुमार, पदमचंद, ऋषभदास, मनोजकुमार जैन कुहेले परिवार बघपुरा वालों की ओर से श्री 1008 शान्तिनाथ विधान का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में जैन स्वर संगम सौरभ एंड पार्टी मुरैना विशेष रूप से मौजूद रहेगी। महोत्सव में मांगलिक कार्यक्रमों के तहत प्रातः 07 बजे से श्री शान्तिनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा करते हुए विशेष पूजन किया जाएगा। ततपश्चात श्री शान्तिनाथ विधान प्रारंभ होगा। प्रातः 10 बजे निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर 108 कलशों द्वारा भगवान शान्तिनाथ का महामस्तकाभिषेक भी होगा। जैन युवा क्लब एवं सोनू मित्र मंडल द्वारा सभी आगन्तुक सधर्मी बन्धुओं के लिए भोजनादि की समुचित व्यवस्था की गई है।सिहोनियांजी अतिशय क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष रविन्द्र जैन टिल्लू, उपाध्यक्ष नीलेश जैन, मंत्री विवेक जैन बंटी, कोषाध्यक्ष रवि जैन, सकल जैन समाज अम्बाह एवं मुरैना ने सभी सधर्मी बन्धुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की है।</p>
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		<title>क्षेत्र के अतिशय सम्बन्धी जानकारी से कराया अवगत : सिहोनियां आगमन के लिए आर्यिका संघ को श्रीफल भेंट </title>
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		<pubDate>Tue, 02 May 2023 15:06:46 +0000</pubDate>
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<p><strong>क्षेत्र कमेटी सिहोनियां जी द्वारा मुरार में विराजमान स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी को सामूहिक रूप से श्रीफल अर्पित कर अतिशय क्षेत्र सिहोनियां आगमन हेतु निवेदन किया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन साध्वी गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी को सिहोनियां आगमन हेतु श्रीफल भेंट किया गया। श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी कमेटी के परम संरक्षक एवं अम्बाह जैन समाज के अध्यक्ष जिनेश जैन (पूर्व अध्यक्ष न.पा.अम्बाह) ने बताया कि क्षेत्र कमेटी सिहोनियां जी द्वारा मुरार में विराजमान स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी को सामूहिक रूप से श्रीफल अर्पित कर अतिशय क्षेत्र सिहोनियां आगमन हेतु निवेदन किया गया। जैन ने पूज्य माताजी को क्षेत्र के अतिशय सम्बन्धी जानकारी से अवगत कराया।</p>
<p>उन्होंने क्षेत्र पर चल रहे निर्माणाधीन कार्यों की भी जानकारी दी। सभी उपस्थित बन्धुओं ने पूज्य आर्यिका संघ से निवेदन किया कि आप सिहोनियां जी पधारें ताकि क्षेत्र पर चल रहे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। निर्माणकार्य पूर्ण होते ही क्षेत्र पर श्री मज्जिनेन्द्र जिनविम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होना है। यदि आपका आशीर्वाद मिल जाये तो सभी कार्य सुगमता से हो जाएंगे। पूज्य गणिनी आर्यिका माताजी ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हर काम अपने तय समय पर ही होता है। यदि निमित्त हुआ तो हम भगवान शांतिनाथ के दर्शनार्थ सिहोनियां अवश्य पहुंचेंगे।</p>
<p>आप सभी अपनी भावनाओं के अनुरूप पुरुषार्थ अवश्य करते रहें। इस अवसर पर परम संरक्षक जिनेश जैन, संरक्षक आशीष जैन (सोनू), अध्यक्ष रविंद्र जैन (टिल्लू), महामंत्री विवेक जैन (बंटी), कोषाध्यक्ष रवि जैन, पिंटू जैन, प्रदीप जैन (डोबी), मनोज जैन नायक, मनोज जैन बरेह, अतुल जैन, अनिल जैन (संजू), गुड्डू जैन दिल्ली, भोली जैन आदि समाज सेवी उपस्थित थे।</p>
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		<title>विश्व विरासत दिवस विशेष : शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र सिहोनिया को संरक्षण की जरूरत  </title>
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		<pubDate>Tue, 18 Apr 2023 17:28:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। इनके भी संरक्षण की आवश्यकता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह।</strong> आज भी बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बहुत से ऐतिहासिक धरोहर और विरासत मौजूद हैं। जहां सरकार बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रही है। जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। सौरभ जैन वरेह वाले अंबाह वाले के मुताबिक मुरैना जिले के अंबाह तहसील के अंतर्गत सिहोनिया गांव में 11वीं शताब्दी की बनी भगवान शांतिनाथजी (16 फीट), भगवान अरहनाथ जी (10 फीट), भगवान कुंथुनाथजी (10 फीट) की खड्गासन पत्थर की मूर्तियां यहां स्थापित हैं। ये मूर्तियां ब्रह्मचारी गुमानी लाल के स्वप्न में आती थीं। तब उन्होंने यहां खुदाई कराई और अतिशय कारी प्रतिमा प्राप्त हुई। आज वर्तमान में भी गांवों में खुदाई के दौरान मूर्तियां प्राप्त होती रहती हैं। मंदिर में ऐसी मूर्तियों के लिए विशेष संग्रहालय है। हाल ही में पता चला कि चतुर्थ काल में 14 मंदिर थे। इसके अलावा खजुराहो पैटर्न पर बने शिव हनुमान दुर्गा के ककनमठ मंदिर भी हैं। 9 जुलाई 2006 को खुदाई के दौरान शिव मंदिर में जैन मूर्ति मिली थी। वार्षिक मेला क्वार वादी दोज और जेठ वादी 14 निर्वाण दिवस पर लगता है। समवशरण और चौबीसी का भव्य मंदिर है। जबकि मानस्तंभ का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नया कमल के आकार का मंदिर बन के तैयार हो चुका है, जो जल्द ही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होने के बाद दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिरों की संख्या: 05 है। बड़ी धर्मशाला, भोजनशाला है। जहां पर पूजा विधान करने और रुकने की उचित व्यवस्था है।</p>
<p><strong>इसलिए मनाया जाता है विश्व विरासत दिवस</strong></p>
<p>विश्व विरासत दिवस को मनाने का उद्देश्य ग्रह पर सांस्कृतिक विरासत और विविधता के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है। दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए हैं। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है। हर साल 18 अप्रैल को आयोजित होने वाला यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण है। दुनिया भर में इस दिन को स्मारकों और विरासत स्थलों की यात्रा करके, सम्मेलनों में शामिल होकर, राउंड टेबल और समाचार पत्रों के लेखों समेत कई अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। यह दिन पहली बार 1983 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा मनाया गया था। यूनेस्को के 22वें आम सम्मेलन के दौरान इसे विश्व आयोजन के रूप में मान्यता मिली थी। भारत में कुल 3691 ऐसे स्मारक और स्थल हैं, जिसमें से 40 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में नामित हैं। इसमें ताजमहल, अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।</p>
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