<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 21 May 2025 13:54:15 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>पुण्य वर्गणाओ के प्रभाव से रूर साधूओं की नगरी:  मुनिश्री सिद्ध सागर महाराज ने कहा समय परिवर्तनशील </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_siddha_sagar_maharaj_said_that_time_is_changing/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_siddha_sagar_maharaj_said_that_time_is_changing/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 May 2025 13:51:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jayant Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Siddh Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Saraswat Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Siddh Sagar Ji and Shrutsagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Vihar]]></category>
		<category><![CDATA[Vishuddhasagar Maharaj Ji]]></category>
		<category><![CDATA[जयंत सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री सिद्ध सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[विशुद्धसागर महाराज जी]]></category>
		<category><![CDATA[विहार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सारस्वत सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=81323</guid>

					<description><![CDATA[विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से नांद्रे की ओर विहार शुरु है। 500 किमी की दुरी शेष है। विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सिद्ध सागर महाराज ने कहा की समय परिवर्तनशील है, काल परिवर्तित होते है और धर्म सार्थी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से नांद्रे की ओर विहार शुरु है। 500 किमी की दुरी शेष है। विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सिद्ध सागर महाराज ने कहा की समय परिवर्तनशील है, काल परिवर्तित होते है और धर्म सार्थी के रूप में महान पुरुष धर्मस्थ को प्रवाहित करते रहते हैं।<span style="color: #ff0000"> धूळे से पढ़िए, यह अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धुळे।</strong> विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से नांद्रे की ओर विहार शुरु है। 500 किमी की दुरी शेष है। विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सिद्ध सागर महाराज ने कहा की समय परिणमनशील है, काल परिवर्तित होते है और धर्म सार्थी के रूप में महान पुरुष धर्मस्थ को प्रवाहित करते रहते हैं। इनकी पुण्य वर्गणाआंे से शिथिल हुआ धर्मरथ गति प्राप्त करता है और अनेकों जीव चल पड़ते हैं भगवत्ता प्राप्त करने के लिए। सम्प्रति मे ऐसे ही महापुरुष आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने आकाश सम धर्म को विस्तार प्रदान किया। गुरुदेव का जन्म मध्यप्रदेश के भिंड जिला के रूर ग्राम में हुआ। यह वही भिंड है, जिसे कभी डाकुआंे के शहर के नाम से जाना जाता था लेकिन जब से आचार्य का जन्म हुआ। उनकी पुण्य वर्गणाआंे के प्रभाव से अब यह शहर साधूओं की नगरी के नाम से संपुर्ण भारत में प्रसिद्ध है। इस नगर से अनेकों मुनि आर्यिका और व्रती बन चुके हैं। मेरा सौभाग्य रहा जिस ग्राम रूर में जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी का जन्म हुआ। उसी घर में मेरा भी जन्म हुआ।</p>
<p><strong>समयसार, प्रवचनसार पर भव्य जीवों के लिए देशना प्रदान की</strong><br />
बुंदेलखंड में कहते है पूत के लक्षण पालन में दिख जाते हैं। आचार्य श्री बचपन से ही धार्मिक प्रवृित्त के रहे, घर में रहते थे तब ही अल्प आयु में समयसार जैसे महान ग्रंथ का स्वाध्याय करते थे। आचार्य श्री कि माता को गुरुजी के जन्म के पहले क्षेत्र वंदना करने के भाव आते थे। स्वप्न में मुनीराज के दर्शन होते थे। यही महान आत्मा के आगमन के शुभ चिन्ह कहलाता है। 16 वर्ष कि अल्प आयु में ही गणाचार्य विरागसागर महाराज से दीक्षा धारण कर अध्यात्म के सरोवर में प्रवेश कर ऐसी डुबकी लगाई कि फिर कभी आचार्य श्री ने पीछे नहीं देखा। समयसार, प्रवचनसार जैसे महान ग्रंथों पर भव्य जीवों के लिए देशना प्रदान कर जिनशासन को अध्यात्म सरोवर में डुबकी लगवा दी। स्वयं अध्यात्म योगी विशेषण से सुशोभित हुए। वर्तमान काल में नमोस्तु शासन को जयवंत करते हुए आचार्य श्री ने हजारांे युवाओं को धर्म मार्ग पर लगाया। सैकडों को व्रती बनाया और 70 युवाआंे को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान कर जिनशासन को वर्धमान किया। गणाचार्य विराग सागर जी ने अपने 550 शिष्यों को आपकी योग्यता देखकर अपनी समाधी के पूर्व आपको अपना पट्टाचार्य पद नियुक्त किया। यही मंगल भावना आप स्वास्थ्य रहे, आपकी आयु दीर्घ हो, आप ऐसे ही नमोस्तु शासन को जयवंत करें। जिस प्रकार घर कि शोभा माँ से होती है। उसी प्रकार इस जिनशासन कि शोभा गुरुवर आपसे है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_siddha_sagar_maharaj_said_that_time_is_changing/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचायश्री विशुद्धसागर जी के शिष्यों के आगमन की तैयारियां: नांद्रे के जैन समाज में अपार उत्साह का संचार  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/preparations_for_the_arrival_of_acharyashri_vishudhsagar_jis_disciples/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/preparations_for_the_arrival_of_acharyashri_vishudhsagar_jis_disciples/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 May 2025 09:01:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore to Baramati]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jayant Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Mangal Pravesh]]></category>
		<category><![CDATA[Nandre]]></category>
		<category><![CDATA[Saraswat Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Siddh Sagar Ji and Shrutsagar Maharaj Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Vihar]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर से बारामती]]></category>
		<category><![CDATA[जयंत सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[नांद्रे]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[विहार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सारस्वत सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=80988</guid>

					<description><![CDATA[पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी के चरणरज से नांद्रे की भूमि पवित्र होगी। मंगल प्रवेश और विहार की तैयारियां की जा रही हैं। जैन समाज के श्रद्धालुओं में उत्साह है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230; नांद्रे। नांद्रे में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी के चरणरज से नांद्रे की भूमि पवित्र होगी। मंगल प्रवेश और विहार की तैयारियां की जा रही हैं। जैन समाज के श्रद्धालुओं में उत्साह है। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> नांद्रे में पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का नांद्रे में होनेवाला है। 2025 का चौमासा और मुनिराजों की चरणरज से नांद्रे की भूमि पवित्र होगी। श्री विशुद्धसागर जी के शिष्यों के आगमन को लेकर नांद्रे के जैन समाज एवं नगर के लोगों में काफी उत्साह है। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील, सेक्रेटरी सुधीर चौधरी, अनिल पाचोरे, निखिल पाटील, वीर सेवा दल नांद्रे, वीर महिला मंडळ, पार्श्व महिला परिषद, जैन युवा मंच के युवा पदाधिकारी, प्रभावणा समिति के कार्यकर्ता, श्रावक-श्राविकाओं के मुनिराजों का इंदौर से नांद्रे तक विहार और 2025 के चातुर्मास को सफल करने के लिए प्रयास शुरु हैं। विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य सारस्वत सागर जी, जयंत सागर जी, सिद्ध सागर जी और श्रुतसागर महाराज जी का इंदौर से बारामती-विटा-तासागांव से नांद्रे तक 800 किमी का पद विहार शुरु है।</p>
<p><strong>नांद्रे का यह प्राचीन श्री महावीर दिगंबर मंदिर 100 साल पुराना है</strong></p>
<p>श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नांद्रे का यह प्राचीन मंदिर 100 साल पुराना है और पत्थर का मानस्तंभ हैं। नांद्रे में जैन समाज के 1300 घर हैं। नांद्रे गांव के अभी तक 3 भट्टारक स्वामीजी जी हुए हैं। आदिनाथ भगवान जी की प्रतिमा भट्टारक महाराज जी ने बनवाई है। पट्टाचार्य भगवन श्री विशुद्धसागरजी सहित 32 मुनि महाराजों का नांद्रे में जनवरी में मंगल प्रवेश हुआ था। वर्धमान सागर महाराज जी के संघ के 2 महाराज जी ऐसे एक साथ 34 मुनिराजों का सानिध्य नांद्रे नगर को मिला था। इस अवसर पर उनकी अगवानी बैंड-बाजों के साथ बड़ी संख्या में जैन समाज एवं अन्य लोगों ने की थी। बाजे-गाजे के साथ श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागरजी पहुंचे थे। सकल दिगंबर जैन समाज के लोगों ने जगह-जगह पर पाद पूजन करके उन्हे श्रीफल भेंटकर आशीष लिया था। नांद्रे के श्रावक-श्राविका एवं युवक-युवती उपस्थित थीं। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के मंगल प्रवचन हुए थे। मुनिराजों की आहारचर्या नांद्रे नगर के विभिन्न जैन बंधुओं के घर में हुई थी। अपने प्रवचनों में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने कहा था कि नगर में एकमात्र श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर है। यह उल्लेखनीय बात है कि यहां जैन एकता देखने को मिली हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/preparations_for_the_arrival_of_acharyashri_vishudhsagar_jis_disciples/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
