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	<title>सिद्ध क्षेत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र पावागिरी जी ऊन तीन दिवसीय वार्षिक मेला 6 मार्च से: निमाड़ और मालवा क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे पावागिरी  </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:27:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समीपवर्ती सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन में रंगपंचमी के अवसर पर वार्षिक मेला लगाया जाएगा। इसमें निमाड़ मालवा के प्रथम नए सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएंगी। इस महोत्सव में आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ससंघ का सानिध्य मिलेगा। यहां इस वर्ष भी पावागिरी जी सिद्ध क्षेत्र का 20 वां वार्षिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समीपवर्ती सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन में रंगपंचमी के अवसर पर वार्षिक मेला लगाया जाएगा। इसमें निमाड़ मालवा के प्रथम नए सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएंगी। इस महोत्सव में आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ससंघ का सानिध्य मिलेगा। यहां इस वर्ष भी पावागिरी जी सिद्ध क्षेत्र का 20 वां वार्षिक मेला लगेगा और आध्यात्मिक रंगों की होली 6, 7 और 8 मार्च को रंगपंचमी के अवसर होगी। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> समीपवर्ती सिद्ध क्षेत्र पावागिरी ऊन में रंगपंचमी के अवसर पर वार्षिक मेला लगाया जाएगा। इसमें निमाड़ मालवा के प्रथम नए सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएंगी। इस महोत्सव में आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ससंघ का सानिध्य मिलेगा। यहां इस वर्ष भी पावागिरी जी सिद्ध क्षेत्र का 20 वां वार्षिक मेला लगेगा और आध्यात्मिक रंगों की होली 6, 7 और 8 मार्च को रंगपंचमी के अवसर होगी। यह वार्षिक मेला निमाड़ मालवा वासियों का महत्वपूर्ण उत्सव है। इस वर्ष तीन दिवसीय मेला होगा। गत वर्ष माह अप्रैल 2025 में आचार्य श्री विराग सागर जी के पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के वरद हस्त और विशाल संघ के सानिध्य में प्रतिष्ठित और सूर्य मंत्र से मंत्रित भगवान को भव्य जिनालय में विराजित किया जाएगा। सहस्रकूट जिनालय तैयार है। आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ने स्वीकृति प्रदान की है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100831" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014-199x300.jpg" alt="" width="199" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014-199x300.jpg 199w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014-680x1024.jpg 680w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014-768x1157.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014-1020x1536.jpg 1020w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014-990x1492.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0014.jpg 1062w" sizes="(max-width: 199px) 100vw, 199px" /></p>
<p><strong>इस तरह रहेंगे यहां पर धार्मिक कार्यक्रम </strong></p>
<p>6 मार्च को प्रातः ध्वजारोहण के साथ मंडल विधान किया जाएगा और शुभ मुहूर्त में रत्नमय प्रतिमा नवीन जिनालय में विराजित होंगी। देशभर से जिन श्रावक-श्राविकाओं ने प्रतिमा विराजित करने की स्वीकृति प्रदान की है। वे सपरिवार पधारकर भगवान विराजमान करेंगे। सायंकाल भगवान की आरती और मुनि संघ की आरती होगी और धार्मिक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 7 मार्च को प्रातः महावीर मंदिर में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन होगा। भगवान विराजित करने के बाद विधान आदि धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। भजन मंडली द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही आचार्य श्री की धर्मदेशना होगी। 8 मार्च को प्रातः तलहटी में भगवान महावीर स्वर्ण जिनालय में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा ,नित्य नियम का पूजन, मंडल का विसर्जन और विश्व शांति के लिए हवन होगा। साथ ही आचार्य संघ की आहारचर्या होगी।</p>
<p><strong>कमेटी ने सभी साधर्मियों श्रावकों से शामिल होने की अपील की </strong></p>
<p>दोपहर को आचार्य श्री के प्रवचन, सम्मान समारोह और तलहटी से भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ पहाड़ी पर शोभायात्रा के रूप में ले जाकर अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी। ट्रस्ट अध्यक्ष हेमचंद झांझरी और महामंत्री अशोक झांझरी ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए मेला कमेटी, प्रबंधन कमेटी और ट्रस्ट कमेटी ने तैयारियां कर ली हैं। कार्यक्रम में बाल ब्रह्मचारी पंडित धर्मचंद्र शास्त्री, अष्टापद दिल्ली, अक्षय भैया और इंदौर नगर पुरोहित पंडित नितिन झांझरी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। कमेटी ने सभी साधर्मियों श्रावकों से इस कार्यक्रम में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। यह जानकारी प्रचार मंत्री आशीष जैन ने दी।</p>
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		<title>पावागिरी जी ऊन सिद्ध क्षेत्र में आध्यात्मिक रंगों की होगी होली: 20 वां वार्षिक मेला 6,7 और 8 मार्च को लगेगा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:51:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निमाड़ मालवा का प्रथम नवीन सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएंगी। आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ससंघ का सानिध्य मिलेगा। यहां हर वर्ष के मुताबिक इस वर्ष भी पावागिरी जी सिद्ध क्षेत्र का 20 वां वार्षिक मेला और आध्यात्मिक रंगों की होली 6, 7 और 8 मार्च को रंगपंचमी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निमाड़ मालवा का प्रथम नवीन सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएंगी। आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ससंघ का सानिध्य मिलेगा। यहां हर वर्ष के मुताबिक इस वर्ष भी पावागिरी जी सिद्ध क्षेत्र का 20 वां वार्षिक मेला और आध्यात्मिक रंगों की होली 6, 7 और 8 मार्च को रंगपंचमी के अवसर पर लगाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">ऊन से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ऊन।</strong> निमाड़ मालवा का प्रथम नवीन सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय भगवान की प्रतिमा विराजित की जाएंगी। आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ससंघ का सानिध्य मिलेगा। यहां हर वर्ष के मुताबिक इस वर्ष भी पावागिरी जी सिद्ध क्षेत्र का 20 वां वार्षिक मेला और आध्यात्मिक रंगों की होली 6, 7 और 8 मार्च को रंगपंचमी के अवसर पर लगाया जाएगा। इस वार्षिक मेले को 20 वर्ष हो गए, जो सभी निमाड़ मालवा के निवासियों का महत्व पूर्ण उत्सव है। इस वर्ष वार्षिक मेले की विशेषता यह रहेगी कि इस वर्ष तीन दिवसीय मेला होगा। साथ ही पूरे निमाड़ मालवा के किसी तीर्थ पर प्रथम सहस्रकूट जिनालय में 1008 रत्नमय प्रतिमा विराजित होंगी। गत वर्ष माह अप्रैल 2025 में आचार्य श्री विराग सागर जी के पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के वरद हस्त और विशाल संघ के सानिध्य में प्रतिष्ठित और सूर्य मंत्र से मंत्रित भगवान को भव्य जिनालय में विराजित किया जाएगा। सहस्रकूट जिनालय बनकर तैयार है। इस अवसर पर आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महाराज का ससंघ सानिध्य प्राप्त होगा। आचार्य श्री ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।</p>
<p><strong>इस तरह रहेंगे यहां पर धार्मिक कार्यक्रम </strong></p>
<p>6 मार्च को प्रातः ध्वजारोहण के साथ मंडल विधान किया जाएगा और शुभ मुहूर्त में रत्नमय प्रतिमा नवीन जिनालय में विराजित होंगी। पूरे देश भर से जिन श्रावक-श्राविकाओं ने प्रतिमा विराजित करने की स्वीकृति प्रदान की है। वे सपरिवार पधार कर भगवान विराजमान करेंगे। सायंकाल भगवान की आरती और मुनि संघ की आरती होगी और धार्मिक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 7 मार्च को प्रातः महावीर मंदिर में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन होगा। भगवान विराजित किए जाकर विधान आदि धार्मिक अनुष्ठान मंत्रोच्चार के साथ किए जाएंगे। भजन मंडली द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही आचार्य श्री की धर्म देशना भी होगी। 8 मार्च को प्रातः तलहटी में भगवान महावीर स्वर्ण जिनालय में भगवान के अभिषेक, शांतिधारा ,नित्य नियम का पूजन, मंडल का विसर्जन और विश्व शांति के लिए हवन होगा। साथ ही आचार्य संघ की आहार चर्या संपन्न होगी।</p>
<p><strong>कमेटी ने सभी साधर्मियों श्रावकों से शामिल होने की अपील की </strong></p>
<p>दोपहर को आचार्य श्री के प्रवचन, सम्मान समारोह और तलहटी से भगवान शांति नाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ पहाड़ी पर शोभायात्रा के रूप में ले जाकर अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी। ट्रस्ट अध्यक्ष हेमचंद झांझरी और महामंत्री अशोक झंझरी ने बताया कि उपरोक्त कार्यक्रम के लिए मेला कमेटी, प्रबंधन कमेटी और ट्रस्ट कमेटी ने संपूर्ण तैयारियां कर ली है। आने वाले साधर्मी की चाय, नाश्ते, भोजन की व्यवस्था कमेटी ने दानदाताओं के सहयोग से की गई है। कार्यक्रम में बाल ब्रह्मचारी पंडित धर्मचंद्र शास्त्री, अष्टापद दिल्ली, अक्षय भैया और इंदौर नगर पुरोहित पंडित नितिन झांझरी का मार्गदर्शन और निर्देशन प्राप्त होगा। कमेटी ने सभी साधर्मियों श्रावकों से इस अभूतपूर्व कार्यक्रम में शामिल होकर इस कार्यक्रम में धर्म लाभ लेने की अपील की है। यह जानकारी ट्रस्टी मनीष जैन (डोसी),और मीडिया प्रभारी आशीष जैन ने दी।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश : मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ से हुआ मंगल मिलन  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 12:28:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। बड़वानी नगर में शुक्रवार को सुबह जैन धर्म की बड़ी आर्यिकाओं में से एक आचार्यश्री सन्मति सागर जी की शिष्य आर्यिका श्री सृष्टिभूषणमति जी माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी का राजधानी भोपाल में मंगल चातुर्मास के बाद नेमावर, सिद्धवरकूट, पावागिरी जी ऊन, सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पहली बार इस क्षेत्र में आगमन हुआ है। माताजी के संघ में कुल तीन आर्यिका माताजी हैं। माताजी सिद्ध क्षेत्र बावनगजा की वंदना करते हुए तीर्थंकर लेणि, सिद्ध क्षेत्र मांगीतुंगी, गजपंथा होते हुए णमोकर तीर्थ पर आगामी माह में होने वाले भव्य पंच कल्याणक में शामिल होंगी। माताजी के मंगल प्रवेश पर समाज के श्रावकों ने आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। माताजी की अगवानी के लिए यहां पूर्व से विराजित मुनि श्री प्रणुत सागर जी के संघस्थ क्षुल्लक विनियोग सागर जी ने भी अगवानी की। जिन मंदिर में आर्यिका संघ ने भगवान के वेदियों के दर्शन कर मुनि श्री प्रणुत सागर जी का भी आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा के पूर्व आर्यिका श्री, मुनि श्री और क्षुल्लक जी महाराज को समाज जन ने शास्त्र भेंट किया। कल्पना काला द्वारा मंगलाचरण किया गया। धर्म सभा में विश्वयश मति जी माता जी ने बहुत ही संक्षिप्त और मधुर आवाज में कविता की पंक्तियां प्रस्तुत की। साथ ही कहा कि आप जो कुछ अच्छा होता है उसका श्रेय खुद लेना चाहते हो और यदि कुछ बुरा होता है तो भगवान को दोष देते हो।</p>
<p><strong>आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है</strong></p>
<p>आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी द्वारा छोटे-छोटे मुक्तक और काव्य शैली में धर्मसभा को रोचक बना दिया। माताजी ने बताया कि जिसका प्रभु से वास्ता वही सच्चा नाश्ता है। माताजी ने कहा कि पहले बाप बेटे को सिखाता था पर आज इस पश्चिमी सभ्यता में बेटा बाप को सिखा रहा है। पश्चिम की दौड़ ने सभ्यता तो सिखा दी है लेकिन, संस्कृति और संस्कार बिगाड़ दिए है। आज परिणाम की विकृति का नाम पाप है। आप आज धर्म के नाम पर लड़ रहे हो यदि धर्म के लिए लड़ते तो भगवान बन गए होते। परमेष्ठि बन गए होते, आप के कही भी किए गए पाप मंदिर ने प्रक्षालित होते है ,लेकिन मंदिर में किए गए पाप कही भी प्रक्षालित नहीं होते हैं।</p>
<p><strong>गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी </strong></p>
<p>माताजी ने काव्यात्मक अंदाज में बहुत अच्छी ज्ञान वर्धक और जीवन को सुधारने वाली बातें बताईं। माताजी ने कहा कि आज हर मां राम जैसा बेटा चाहती है और टीवी पर चरित्रहीन के चरित्र देख रही है तो राम जैसे पुत्र कैसे होंगे। पाश्चात्य की हवा ने हमंे हिला दिया है। माताजी के द्वारा महावीर जी तीर्थ पर और शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर पर साधु संतों और त्यागी वृत्तियों के आहार की व्यवस्था करवा रखी है। साथ ही गौशाला के लिए भी चारे आदि की व्यवस्था में सहयोगी है।</p>
<p><strong>क्षुल्ल्क श्री विनियोग सागर जी के मंगल अवतरण दिवस पर शास्त्र भेंट </strong></p>
<p>मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि आज से मंदिर का कार्य प्रारंभ हो रहा है और माताजी का उसके ठीक पहले आगमन हुआ। ये शुभ मंगल का प्रतीक है। भरा हुआ कलश, गाय का बछड़े को दूध पिलाने का ये मंगल शुभ संकेत होते हैं और ऐसे में मां का आगमन बहुत ही शुभ संकेत हैं। महाराज ने बताया कि आप जिस भी व्यक्ति को जिस प्रकार से देखोगे, उसी प्रकार से दिखेगा। क्षुल्ल्क श्री विनियोग सागर जी के मंगल अवतरण दिवस पर आर्यिका संघ और प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगल आशीर्वाद प्रदान कर शास्त्र भेंट किया। मुनिश्री प्रणुत सागर जी महाराज ने कहा कि जब पुण्य का जलवा चलता है तब पाप का दिल जलता है।</p>
<p><strong>माताजी का मंगल विहार </strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा बच्चे उपस्थित थे। प्रवचन पश्चात मुनि संघ आर्यिका संघ की आहारचर्या हुई और दोपहर को माताजी का मंगल विहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के लिए हुआ। शाम को क्षुल्लक श्री विनियोग सागर जी के पाद प्रक्षालन और प्रवचन हुए।</p>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र अहार जी में आयोजन : सिद्धचक्र विधान में 128 अर्घ्य समर्पित कर सिद्धों की आराधना </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 10:14:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री 1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन मुनिश्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनिश्री सुश्रुतेश सागर महाराज के पावन सानिध्य में किया जा रहा है। यह आयोजन विधानाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया, पंडित दीपक जी हजारीबाग तथा पंडित कमल कुमार शास्त्री लार के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री 1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन मुनिश्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनिश्री सुश्रुतेश सागर महाराज के पावन सानिध्य में किया जा रहा है। यह आयोजन विधानाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया, पंडित दीपक जी हजारीबाग तथा पंडित कमल कुमार शास्त्री लार के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुकेश जैन लार</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> श्री 1008 सिद्ध क्षेत्र अहार जी में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन मुनिश्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनिश्री सुश्रुतेश सागर महाराज के पावन सानिध्य में किया जा रहा है। यह आयोजन विधानाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया, पंडित दीपक जी हजारीबाग तथा पंडित कमल कुमार शास्त्री लार के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है।</p>
<p><strong>128 अर्घ्य समर्पण के साथ आराधना</strong></p>
<p>रविवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत 128 अर्घ्य समर्पित कर सिद्ध भगवान की विशेष आराधना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ अनुष्ठान में सहभागिता की।</p>
<p><strong>अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा</strong></p>
<p>रविवार के अनुष्ठान में श्रीजी का अभिषेक किया गया तथा रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ जगत कल्याण हेतु वृहद शांतिधारा संपन्न हुई। बीजाक्षरों का उच्चारण स्वयं पूज्य मुनिश्री द्वारा कराया गया। इसके पश्चात नित्य पूजन एवं सम्मुचय की पूजन के बाद विधिवत विधान संपन्न किया गया।</p>
<p><strong>मुनिश्री का प्रेरक प्रवचन</strong></p>
<p>इस अवसर पर पूज्य मुनिश्री ने प्रवचन में महासती मैना सुंदरी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि उन्होंने सिद्धचक्र महामंडल की आराधना कर अपने कोढ़ी पति को कुष्ठ रोग से मुक्त कराया था। इसका कारण यही था कि उन्होंने मुनिश्री के वचनों पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए अंतरंग भक्ति भाव से सिद्धचक्र महामंडल की आराधना की थी। मुनिश्री ने कहा कि यदि हम भी सिद्धों की अंतरंग भक्ति से आराधना करेंगे तो परम पद की ओर अग्रसर हो सकते हैं।</p>
<p><strong>108 प्रकार के पापों से मुक्ति का संदेश</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद देते हुए मुनिश्री ने कहा कि जीव अपने दैनिक जीवन में मन, वचन और काया से कार्य करना, कराना तथा करने वालों की अनुमोदना करना, क्रोध, मान, माया और लोभ के कारण विचार करना, साधन जुटाना एवं कार्य प्रारंभ करना—इस प्रकार कुल 108 प्रकार के पापों का आश्रव करता रहता है। सिद्ध परमेष्ठी इन 108 प्रकार के पापों से रहित होते हैं। हम भी इन पापों का क्षय कर 20 विशेष गुणों को प्राप्त कर सकें, इसी भाव के साथ इस सिद्धचक्र महामंडल विधान में 128 अर्घ्यों के माध्यम से सिद्ध भगवान की आराधना की गई।</p>
<p><strong>महाआरती एवं सांस्कृतिक आयोजन</strong></p>
<p>महाआरती का सौभाग्य आकाश सिंघई को प्राप्त हुआ। रात्रि में महावीर जी आई पलक जैन एवं स्थानीय संगीतकार प्रवीण जैन द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों की स्वर लहरियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इसके पश्चात तंबोला प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में पुण्यार्जक परिवार की ओर से अशोक जैन, शिक्षक द्वारा सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।</p>
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		<title>सिद्ध और अतिशय क्षेत्र की वंदना कर मुनिराजों का लिया आशीष : मप्र, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक प्रांतों में की धर्म प्रभावना </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Sep 2025 15:12:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रुत तीर्थ श्रुतधाम बीना के संस्थापक संदीप सरल भैया एवं संयम जैन सिलवानी ने 19 से 23 सितंबर तक अनेक सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र की वंदना करते हुए अनेक धर्म सभाओं को संबोधित किया एवं विविध आचार्यों, मुनिसंघों के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। बांसवाड़ा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230; बांसवाड़ा। श्रुततीर्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रुत तीर्थ श्रुतधाम बीना के संस्थापक संदीप सरल भैया एवं संयम जैन सिलवानी ने 19 से 23 सितंबर तक अनेक सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र की वंदना करते हुए अनेक धर्म सभाओं को संबोधित किया एवं विविध आचार्यों, मुनिसंघों के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">बांसवाड़ा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना के संस्थापक संदीप सरल भैया एवं संयम जैन सिलवानी ने 19 से 23 सितंबर तक अनेक सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र की वंदना करते हुए अनेक धर्म सभाओं को संबोधित किया एवं विविध आचार्यों, मुनिसंघों के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। 18 सितंबर को भोपाल में विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर जी महाराज के दर्शन कर श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना में निर्माणाधीन मुक्ताकाश समवशरण जिनालय के कार्य की प्रगति की जानकारी दी एवं साहित्य भेंट किया। इसी दिन रात्रि में 8 से 9.30 तक श्री दिगंबर जैन मंदिर इंदिरा नगर में प्रवचन किए। धर्म सभा के दौरान भोपाल निवासी निश्चल जैन, रश्मि जैन एवं कमल बाबू जैन ने श्रुततीर्थ श्रुतधाम बीना के विषय में उपस्थित जन समूह को जानकारी दी। 20 सितंबर को प्रातः 8 बजे सामूहिक रूप से अभिषेक शांतिधारा करवाई। यहां से हवाई मार्ग द्वारा बैंगलुरू को रवाना हुए।</p>
<p>वहां से रात्रि 9 बजे श्री श्रवणबेलगोला क्षेत्र पर पहुंचे। 21 सितंबर को प्रातः आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ 28 पिच्छी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया एवं श्रुत तीर्थ श्रुतधाम की गतिविधियों एवं निर्माण कार्य की जानकारी दी। क्षपकराज मुनि श्री सुप्रभ सागर जी के दर्शन कर वार्ता की एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। यहीं पर गोमटेश भगवान बाहुबली का अभिषेक और शांतिधारा भी की। दिन में मुनिसंघ के साथ श्रुतवार्ता हुई। 22 सितंबर को संपूर्ण संघ के साथ क्षेत्र की वंदना की। प्राकृत भवन में विराजमान आचार्य श्री सुविधि सागर जी महाराज के दर्शन कर साहित्य भेंट किया।</p>
<p>मुनि श्री सुधेय सागर जी महाराज के दर्शन कर कम्मदहल्ली (कर्नाटक) क्षेत्र की वंदना की। मंदार गिरी क्षेत्र पर गुरु मंदिर एवं समवशरण मंदिर के दर्शन किए। 23 सितंबर को प्रातः 8 बजे श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर साकीनाका मुंबई में उदबोधन दिया। सांय काल 6 बजे चंदन नगर भोपाल में मुनि श्री निर्वेग सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन वार्ता करके रात्रि 10.30 पर श्रुतधाम बीना वापस पहुंचे।</p>
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		<title>दिगंबर जैन पाठशाला में बच्चों ने किया भगवान का अभिषेक: बच्चों को दी पंच कल्याणकों की समग्र जानकारी  </title>
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		<pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:47:11 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन पाठशाला में रविवारीय पूजा क्रम में इस रविवार प्रातः बच्चों ने भगवान पारसनाथ के जलाभिषेक के बाद रविव्रत पूजा एवं भगवान महावीर जिन पूजन में हिस्सा लिया। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> दिगंबर जैन पाठशाला में रविवारीय पूजा क्रम में इस रविवार प्रातः बच्चों ने भगवान पारसनाथ के जलाभिषेक के बाद रविव्रत पूजा एवं भगवान महावीर जिन पूजन में हिस्सा लिया। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया ने बच्चों को पूजा के दौरान अष्ट द्रव्य, स्थापना, विधान, रविव्रत कथा, जयमाला, शांति पाठ, वृंदावन दास की जीवनी, शांति पाठ, महाअर्घ्य, तीर्थ क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, पंच तीर्थ, विसर्जन पाठ एवं भगवान के पंच कल्याणकों पर विस्तृत जानकारियों को साझा किया। पूजन में रियल जैन, सांची जैन, मानवी जैन, कल्प जैन, कथनी जैन, हर्षल जैन, भाग्य जैन , मिष्ठी जैन, माही जैन, सिद्धम जैन, भाग्य भराड़ा, संचित जैन तथा दीक्षिता जैन ने हिस्सा लिया।</p>
<p>इससे पूर्व पाठशाला की पूर्व छात्राओं गुणाक्षी जैन और जीनी जैन ने बच्चों को अपनी सफलता की कहानियां सुनाई और बच्चों खेलकूद और अध्ययन में बराबर रुचि रखने का आह्वान किया। सांगानेर परीक्षा बोर्ड संबंधी समस्त सूचनाएं बच्चों और अभिभावकों के लिए शेयर की गई। संचालन अजीत कोठिया ने किया। आभार मानवी जैन ने व्यक्त किया। आयोजन मंे 24 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।</p>
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		<title>कुण्डलपुर में भक्ति पूर्वक चढ़ाया गया निर्वाण लाडू : पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर हुआ महामस्तकाभिषेक </title>
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		<pubDate>Thu, 31 Jul 2025 14:34:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुण्डलपुर के सिद्ध क्षेत्र में भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर भक्तामर महामंडल विधान, महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू जैसे कार्यक्रमों का भव्य आयोजन हुआ। आचार्य समयसागर महाराज के आशीर्वाद से हुए इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट… कुण्डलपुर। दमोह स्थित सिद्धक्षेत्र पर 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुण्डलपुर के सिद्ध क्षेत्र में भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर भक्तामर महामंडल विधान, महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू जैसे कार्यक्रमों का भव्य आयोजन हुआ। आचार्य समयसागर महाराज के आशीर्वाद से हुए इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर।</strong> दमोह स्थित सिद्धक्षेत्र पर 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर बड़े भक्तिभाव से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। पूज्य बड़े बाबा की तपस्थली और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के सान्निध्य में कुण्डलपुर सिद्धक्षेत्र पर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भक्तामर महामंडल विधान के साथ पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन तथा पार्श्वनाथ भगवान जी का महामस्तकाभिषेक किया गया। भगवान के श्रीचरणों में निर्वाण लाडू समर्पित कर अनेक श्रद्धालुओं ने पुण्यार्जन किया। विभिन्न स्थानों से पधारे श्रद्धालु परिवारों को शांतिधारा, अभिषेक, लाडू समर्पण एवं आरती करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>दीप अर्चना एवं संगीतमय आरती का आयोजन</strong></p>
<p>सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं संगीतमय आरती का आयोजन हुआ जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लिया। इस अवसर पर इंजीनियर आर.के. जैन, आयोजन मंत्री अजय जैन निरमा, कस्तूरचंद जैन, परसोत्तम जैन सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने जैन श्रद्धालुओं को धर्मभाव, एकता और मोक्ष की प्रेरणा प्रदान की।</p>
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		<title>धर्म के पतन को रोकना हम सभी के हाथों में है : श्री सिद्ध क्षेत्र गिरनार जी मेरी दृष्टि में  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Aug 2024 13:13:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्ध क्षेत्र गिरनार जी एवं पावागढ़ के दर्शन व भ्रमण करने का अवसर विगत दिवस मिला जो अनुभव व विचार मन में आए उन्हें टी के वेद सभी के साथ शेयर करना चाहते हैं। इसी भाव से उनकी यह लेख लिखने की भावना जागृत हुई। पढ़िए टी के वेद का यह विशेष आलेख&#8230;. गुजरात। प्रारंभ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सिद्ध क्षेत्र गिरनार जी एवं पावागढ़ के दर्शन व भ्रमण करने का अवसर विगत दिवस मिला जो अनुभव व विचार मन में आए उन्हें टी के वेद सभी के साथ शेयर करना चाहते हैं। इसी भाव से उनकी यह लेख लिखने की भावना जागृत हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए टी के वेद का यह विशेष आलेख&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गुजरात।</strong> प्रारंभ से ही जैन संस्कृति का केंद्र रहा है। यहां से 22वें तीर्थंकर 1008 नेमिनाथ भगवान का मोक्ष हुआ, इसके अतिरिक्त प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के गणधर पुण्डरीक ने भी यही से मोक्ष प्राप्त किया, चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा गिरनार पर्वत पर चंद्र गुफा का निर्माण, गुफा में पूज्य आचार्य धरसेन की योग साधना, आचार्य धरसेन द्वारा आचार्य पुष्पदंत व आचार्य भुतबली को श्रुतज्ञान, राजा जयसिंह सिद्धराज द्वारा गिरनार पर्वत पर भगवान नेमिनाथ का मंदिर निर्माण आदि ऐतिहासिक तथ्य उपलब्ध है। तीर्थंकर नेमिनाथ के तीन कल्याणक, दीक्षा, केवल ज्ञान, और निर्वाण उर्जयन्त गिरी (गिरनार) से हुए। यह मात्र तीर्थंकर नेमिनाथ की निर्वाण स्थली ही नहीं है, वरन् 72 करोड़ 700 मुनि भी इसी क्षेत्र से निर्वाण गए हैं। इस संबंध में अनके प्रमाणिक अभिलेख विभिन्न ग्रंथों एवं न्याय दृष्टांतों में उपलब्ध है। इन सब ऐतिहासिक साक्ष्यो को यहां पुर्नउद्धरित करना मेरा आशय नहीं है। मैं मात्र वर्तमान स्थिति व समाज की दिशा व चिंतन पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।</p>
<p>मेरी गिरनार यात्रा के दौरान मैंने अनुभव किया कि तलहटी पर स्थित 3 मंदिर हमारे आधिपत्य व नियंत्रण में है। समोशरण मंदिर 2.कमल मंदिर 3. वर्तमान चैबीसी मंदिर</p>
<p>इसके अतिरिक्त प्रथम टोक पर दिगंबर व श्वेतांबर मंदिर स्थित है इसके अतिरिक्त शेष सभी स्थानों टोंको पर सभी समाजों का अधिकार है।</p>
<p>प्रथम सीढ़ी से लेकर अंतिम सीढ़ी पांचवी टोक तक लगभग 500 से अधिक अन्य धर्मावलंबियों के पूज्य स्थान/मूर्तियां/मंदिर/स्थित है एक तरफ 500 पूज्य स्थान अन्य मतावलंबियों के हैं दूसरी और हमारे मात्र पांच स्थान, हम कहां टिक सकते हैं।</p>
<p>गिरनार जी आने वाले यात्रियों का यदि हम वर्गीकरण करें तो मेरे मोटे तौर पर वर्ष में आने वाले यात्रियों की संख्या इस प्रकार है।</p>
<p>1. जैन यात्री 30,000 दिगंबर</p>
<p>2. जैन यात्री 2,00,000 श्वेतांबर</p>
<p>3. अन्य यात्री 80,00,000 (अन्य मतावलंबियों)</p>
<p>कहां 80 लाख यात्री और कहां हम 2 से 2.5 लाख यात्री।</p>
<p>किस आधार पर हम लड़ाई लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>राजनीतिक प्रभाव</strong></p>
<p>हम उसे स्वीकार करें या ना करें परंतु यह सत्य है कि 2014 के पूर्व जो शासन व्यवस्था थी उसमें अल्पसंख्यकों के हित चाहे पूर्ण सुरक्षित ना हो परंतु फिर भी वे आंशिक रूप से संरक्षित थे। न्याय निर्णयों में भी शासन की भूमिका चाहे स्वीकारे या ना स्वीकारे महत्वपूर्ण होती है एवं 2014 के पूर्व के निर्णयों में हमारी बात सुनी गई है अब जो राजनीतिक दल सत्ता में है वे सैद्धांतिक रूप से जैन धर्म (श्रमण संस्कृति) का अस्तित्व ही स्वीकार नहीं करते हैं उनके मत में जैन धर्म हिंदू धर्म (वैदिक संस्कृति) का ही एक भाग है, एवं उनकं सभी निर्णय इसी के आधार पर होते हैं।</p>
<p><strong>सामाजिक संस्थाएं</strong></p>
<p>पूरे भारतवर्ष में जितनी जैन सामाजिक संस्थाएं अस्तित्व में है या कार्यरत है उनमें कोई स्पष्ट कार्य विभाजन नहीं है सभी संस्थाएं सभी क्षेत्र में एक दूसरे की प्रतिस्पधी है। अपवाद स्वरूप कुछ सामाजिक संगठन सही दिशा मंे अग्रसर हेतु उनको पर्याप्त सहयोग नही मिलता है। ये संस्थाएं कम धर्म के नाम पर दुकाने कहना अधिक उपयुक्त होगा। समाज को मार्गदर्शन नेतृत्व प्रदान करना सही रास्ता दिखाना विस्तृत व लंबी गहरी सोच के साथ निर्णय लेना इन संस्थाओं का उद्देश्य होना चाहिए जिसका अभाव है। सभी संस्थाओं के दो-दो हिस्से पदों के बंटवारों में हो चुके हैं शेष संस्थाएं नाम मात्र की है जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व धरातल पर नहीं है।</p>
<p><strong>व्हाट्सएपवीर, क्रांतिकारी नेता</strong></p>
<p>समाज में एक नया वर्ग और पैदा हो चुका है जिन्हें मैं व्हाट्सएप वीर कहता हूं। जो मात्र व्हाट्सएप तक ही सीमित है एवं समाज व धर्म का सर्वाधिक नुकसान इन्हीं कुकुरमुत्तो के वंशजों ने किया है हर कार्य का विरोध बिना आगे पीछे का विचार किये करना सही चाणक्य नीति नहीं है। अब वह जमाना भी नहीं हैं जब हमारे यहाँ ऐसे श्रमण हुए है जिन्होंने अपने आभा मण्डल/ प्रभा प्रमण्डल से निर्णयो को अपने पक्ष में प्रभावित किया है चाहे वह केन्द्र शासन हो या राज्य शासन, चाहे वह वरिष्ठतम न्यायालय हो या स्थानीय न्याय तंत्र शासन के हर कार्य का हर निर्णय का विरोध कर हम क्या पा लेगें?</p>
<p>गिरनार जी में जब रोप वे (उड़न खटोला) के निर्माण की कल्पना हुई 2007 मे तब पहली टोक पर एक स्टेशन प्रस्तावित था। दुसरी टोक पर दुसरा स्टेशन, हमने इसका पूर जोर विरोध किया। परिणायतः 2020 मे 13 साल मे यह कार्य, पूर्ण हुआ। अंततः केवल दुसरी टोक पर उड़न खटोला का स्टेशन बना। मैने स्वयं प्रथम टोक से दूसरी टोक जाने के लिये 1200 सीढी चढ़ने का 4000/- भुगतान किया सभी तीर्थो पर डोली वालो का आधिपत्य हो गया है। वे सभी मांसाहरी, जैन विरोधी है हम उनकी आय का साधन बन गये।</p>
<p>आज भी गिरनार की सभी टोकों पर डोली वाले 15000 से 20,000 प्रति व्यक्ति वसूल रहे हैं। हम मात्र डोली वाले को भुगतान कर अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण मानते हैं।</p>
<p>यही त्रुटि हम सम्मेदशिखरजी में दोहरा रहे हैं। किसी क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनने से आप नही रोक सकते हैं। यह समय की मांग है हम विकास को विलम्बित कर सकते हैं, रोक नहीं सकते हैं। विकास को अपने अनुसार करवाया जा सकता है।</p>
<p>एक गैर मताबलंबी व जैन मतावलंबी में क्या फर्क है, हममें से 95 प्रतिशत रात्रि भोजन करते हैं, अभक्ष्य का त्याग नहीं है कोई नियम धर्म नहीं है। यात्रा मात्र मनोरंजन व सुखसुविधाओं के लिये करते हैं, जिन्हें धर्म का लेश मात्र भी ज्ञान नहीं है &#8211; शुद्ध णमोकार को उच्चारण भी नहीं कर सकते है। तीर्थों पर महंगी होटलों जैसी सुविधा चाहते हैं, वे तीर्थयात्री रहे ही कहां हैं? हम मात्र नाम के जैन हैं &#8211; हमारे कार्य व व्यवहार समाज के शेष वर्गो से किसी मान में उच्च नहीं है। यदि हम सर्वे करे तो पायेंगे कि समाज के 90 प्रतिशत घरों में एक जिनवाणी की पुस्तक भी नहीं मिलेगी। (जो निःशुल्क उपलब्ध है) तो स्वाध्याय तो बहुत दूर है। मंदिरों में समाज की संख्या का दो से तीन प्रतिशत पूजन अभिषेक करते हैं।</p>
<p><strong>श्रमणो को भूमिका</strong></p>
<p>धन्य हो आचार्य शान्तिसागरजी, विमल सागर जी, आचार्य विद्यानन्दजी जो अपने एक संदेश से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व बडे़ से बड़े से निर्णायकों को प्रभावित कर सकते थे अबतो अधिकांश श्रमणों के अपने मठ हैं, अपने प्रोजेक्ट हैं धर्म से ज्यादा रूचि उनकी इन प्रोजेक्टों में हैं। सामाजिक संस्थाओं का बंटाढार भी श्रमणों के प्रभाव में हुआ है। जब तक सामाजिक संस्थाओं का अपना नेत्तृत्व चुनने का अधिकार था। सामाजिक संस्थाओं का कार्य व्यवस्थित था अब तों पदों की बंदरबाट श्रमणों के निर्देशों पर होती है, श्रावकों से अधिक मान कषाय श्रमणों में है। तमिलनाडु में अर्हत गिरि पर आचार्य कुन्द-कुन्द के चरण विराजित हैं। किसी श्रमण की प्रेरणा से वहां जीर्णोद्वार हुआ उनका नाम का पटिया तीन जगह लगाया गया। क्या पिछले 2500 वर्षो मे कोई आचार्य नहीं हुए। जिन्होंने वहां जीर्णोद्वार कराया ? श्रमणों की यह मानसिकता श्रावकों को क्या संदेश देती है।</p>
<p><strong>श्रावकों की भूमिका व सुझाव</strong></p>
<p>1 हमें सामाजिक संस्थाओं में मात्र &#8211; उन्हीं पदाधिकारियों का चयन/मनोनयन करना है जो धर्म के सामान्य सिद्धान्तों रात्रि भोजन त्याग, अभक्ष्य त्याग, देवशास्त्र गुरु की उपासना करते हो &#8211; 95 प्रतिशत दुकान के रूप मे संस्था चलाने वाले छंट जाएंगे</p>
<p>2) कोई भी निर्णय हम लम्बी अवधि के पक्ष/विपक्ष को विचार कर ले तथा निर्णयों का प्रचार प्रसार काम होने के बाद हो।</p>
<p>3) श्रमणो का दायित्व &#8211; अपने धर्म उपदेश तक सीमित हों</p>
<p>4) देश काल परिस्थिति के अनुसार श्रावकों व श्रमणों की चर्या में परिवर्तन हो</p>
<p>5) समाज के पिछड़े व वह वर्ग जिसे समाज के सहयोग की आवश्यकता है, के लिये आवश्यक प्रावधान हो।</p>
<p>6) पंचकल्याणकों विधानों-पुस्तक प्रकाशनों का कार्य आवश्यकता पर व सीमित हो।</p>
<p>7) चार्तुमास की भव्यता धार्मिक संस्कारों में हो एवं चार्तुमास की व्यवस्था मंदिरों के माध्यम से हो जो अपने आय-व्यय का हिसाब प्रस्तुत कर सके व रख सके।</p>
<p>इन संबंधों में विचार अवश्य होना चाहिए। यह समय की आवश्यकता है अन्यथा धर्म के पतन को कोई रोक नही सकेगा व इसके लिये हमारी वर्तमान पीढ़ी जवाबदार होगी।</p>
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		<title>नवीन शाखाएं एवं पुनर्गठन 8 शाखाएं हुई सक्रिय : जैन मिलन क्षेत्र क्र. 10 का बृहद भ्रमण, शाखा विस्तार एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Jul 2024 14:33:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 के द्वारा वृहद भ्रमण कार्यक्रम भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय मंत्री एड. अतिवीर कमलेन्द्र जैन के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिर में भगवान श्री पारसनाथ जी की पूजन अर्चना के साथ प्रारंभ किया, वहां से बहोरी, घुवारा, भगवां, बड़ा मलहरा, दलपतपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। पढ़िए मनीष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 के द्वारा वृहद भ्रमण कार्यक्रम भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय मंत्री एड. अतिवीर कमलेन्द्र जैन के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिर में भगवान श्री पारसनाथ जी की पूजन अर्चना के साथ प्रारंभ किया, वहां से बहोरी, घुवारा, भगवां, बड़ा मलहरा, दलपतपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष सागर विद्यार्थी की रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 के द्वारा वृहद भ्रमण कार्यक्रम भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय मंत्री एड. अतिवीर कमलेन्द्र जैन के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिर में भगवान श्री पारसनाथ जी की पूजन अर्चना के साथ प्रारंभ किया, वहां से बहोरी, घुवारा, भगवां, बड़ा मलहरा, दलपतपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में क्षेत्रिय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया ने जैन मिलन द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे विविध कार्यक्रमों की जानकारी दी एवं बताया कि जैन मिलन की स्थापना 1966 में देहरादून में हुई थी। इसकी देश में 1500 से ज्यादा शाखाएं सक्रिय हैं, क्षेत्र क्र.10 में 80 शाखाएं सक्रिय हैं। भ्रमण कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय मंत्री एड.अतिवीर कमलेंद्र जैन ने बताया कि यह वर्ष भगवान महावीर स्वामी का 2550 में निर्माण वर्ष के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है, जिसमें भारत सरकार द्वारा भी अनेक कार्यक्रम और अनेक योजनाओं के साथ सहयोग दिया जा रहा है। और इसके अंतर्गत पूरे देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें सभी को भाग लेकर जैन धर्म की प्रभावना में सहभागिता देना है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62882" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059.jpg" alt="" width="1600" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059-1536x691.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240703-WA0059-1320x594.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />इनका रहा विशेष सहयोग</strong></p>
<p>क्षेत्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष संजय जैन शक्कर भ्रमण यात्रा में सहयोग कर रहे सभी स्थानीय संयोजकों का आभार व्यक्त किया। क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष प्रमोद जैन भायजी ने कार्यक्रमों के आयोजन में अर्थ का संग्रह कैसे करें, इस विषय पर सभी को अपना उद्बोधन दिया। भ्रमण यात्रा का संयोजन कर रहे क्षेत्रीय प्रचार मंत्री मनीष शास्त्री विद्यार्थी ने नाम सभी स्थानों के आयोजित कार्यों कार्यक्रमों का सफल संयोजन, संचालन कर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी मुख्य भूमिका दी। भ्रमण कार्यक्रम के दौरान बम्होरी छतरपुर में नवीन शाखा का गठन किया गया, जिसमें पं. अशोक जैन अध्यक्ष, चंद्र कुमार जैन मंत्री एवं महिला जैन मिलन के गठन के लिए श्रीमती महिमा जैन श्रीमती किरण लोहिया को संयोजक बनाया गया। घुवारा छतरपुर में अंकित जैन चंदला अध्यक्ष, जिनेंद्र जैन मंत्री, अक्षय जैन कोषाध्यक्ष, रवि जैन पत्रकार को प्रचार मंत्री एवं महिला जैन मिलन के लिए श्रीमती वंदना जैन एवं श्रीमती सुनीता मस्ताई को संयोजक बनाया गया। बड़ा मलहरा छतरपुर में संजीव जैन अध्यक्ष,संदीव फौजदार मंत्री, अमित जैन कोषाध्यक्ष, प्रशांत जैन, नीलेश जैन प्रचार मंत्री बनाया गया। भगवां छतरपुर में संदीप जैन शास्त्री, राजकुमार जैन शास्त्री को शाखा गठन के लिए संयोजक बनाया। दलपतपुर में एक बार पुनः जैन मिलन के सुबोध जैन अध्यक्ष और बालिका मिलन का ब्र. अंकिता दीदी को अध्यक्ष बनाया गया। सभी स्थानों पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अरुण चंदेरिया द्वारा जैन मिलन द्वारा दिए गये कार्यक्रमों को करवाकर जैन प्रभावना शपथ की दिलाई। शाखा विस्तार, शपथ ग्रहण समारोह कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रमोद जैन गट्टू क्षेत्रीय संयोजक बड़ा मलहरा, श्री कमल जैन, राजेंद्र जैन मंडी, संजय जैन जबलपुरी, रवि जैन पत्रकार, श्रीमती सुधा संधेलिया, पं. अभय जैन दलपतपुर, पं. अशोक कुमार जैन बम्होरी का विशेष सहयोग रहा।</p>
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		<title>जिनालय बनाने में सहयोग का आह्वान :  सिद्ध क्षेत्र ऊन पावागिरी में दो मंदिरों का हुआ भव्य शिलान्यास </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Jun 2024 07:33:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावागिरी ऊन में नए जिनालय का भूमि पूजन हुआ। प्रथम आदिनाथ मंदिर में भगवान आदिनाथ के 101 पुत्रों की स्फटिक मणि की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; पावागिरी। पावागिरी ऊन में नए जिनालय का भूमि पूजन हुआ। प्रथम आदिनाथ मंदिर में भगवान आदिनाथ के 101 पुत्रों की स्फटिक मणि की प्रतिमाएं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावागिरी ऊन में नए जिनालय का भूमि पूजन हुआ। प्रथम आदिनाथ मंदिर में भगवान आदिनाथ के 101 पुत्रों की स्फटिक मणि की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>पावागिरी।</strong> पावागिरी ऊन में नए जिनालय का भूमि पूजन हुआ। प्रथम आदिनाथ मंदिर में भगवान आदिनाथ के 101 पुत्रों की स्फटिक मणि की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। आशीर्वाद प्रदाता शताब्दी देशना चार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी, श्रुत संवेगी पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर जी मुनिराज होंगे।</p>
<p>द्वितीय सहस्त्रकूट जिनालय में 1008 रत्नों की प्रतिमाएं विराजमान होंगी। यह जानकारी कमेटी के प्रमुख हंसमुख जैन गांधी, हेमचंद झांझरी, अरुण धनोते, अतुल कासलीवाल दी। उन्होंने कमेटी के सदस्यों से संपर्क कर अपने पैसे का सदुपयोग कर जिनालय निर्माण में सहयोगी बनकर पुण्य कमाने का आह्वान किया है।</p>
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