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	<title>सिद्ध क्षेत्र बावनगजा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संघ का सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में प्रवेश : सिद्ध चक्र विधान मंत्रोच्चार पूर्वक किए </title>
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		<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 05:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। बड़वानी से पढ़िए, राजेश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> बड़वानी (बावनगजा)।</strong> आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। 4 किमी के बाद श्री पार्श्व गिरी के दर्शन कर शुक्रवार को शाम बावनगजा में प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ ने 84 फिट के श्री आदिनाथ भगवान के दर्शन कर पहाड़ चढ़कर चुलगिरी पर इंद्रजीत और कुंभकरण और 5-5 करोड़ मुनिराजो की सिद्ध निर्वाण भूमि के दर्शन किए। शनिवार को आहार के बाद एक दिवसीय सिद्ध चक्र विधान मंत्रोच्चार पूर्वक किए। देहली की शालू मनीष जैन विधान के पुण्यार्जक रहे। विधान में आचार्य श्री विप्रणत सागर जी, आर्यिका श्री सृष्टि भूषण, श्री विश्वयश मति और आर्यिका श्री विमल मति का सानिध्य रहा। 11 जनवरी को प्रातः पाटी (खेतिया) तीर्थंकर लेनी के दर्शन के लिए मंगल विहार होगा। इस अवसर पर धामनोद जैन समाज से दीपक प्रधान, अजय जैन, राकेश जैन, भोपाल से राजकुमार जैन ने विधान का पुण्य लाभ लिया।</p>
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		<title>आर्यिका संघ का सिद्ध क्षेत्र की ओर अनवरत विहार: भोपाल में वर्षायोग समापन कर किया जा रहा है नासिक के लिए विहार  </title>
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		<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 12:21:07 +0000</pubDate>
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<p><strong>रत्न मूंगे की नगरी मुंगावली मध्य प्रदेश की कोहिनूर 61 वर्षीय गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का पहली बार राजधानी भोपाल में प्रभावना पूर्ण वर्षायोग के बाद अब सिद्धों की राजधानी सिद्ध क्षेत्र की ओर विहार जारी है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> रत्न मूंगे की नगरी मुंगावली मध्य प्रदेश की कोहिनूर 61 वर्षीय गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का पहली बार राजधानी भोपाल में प्रभावना पूर्ण वर्षायोग के बाद अब सिद्धों की राजधानी सिद्ध क्षेत्र की ओर विहार जारी है। बुधवार को आष्टा से सिद्ध क्षेत्र नेमावर की ओर होकर दर्शन आराधना कर सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट दर्शन कर आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 19 साधुओं की जन्म भूमि सनावद की ओर चल रहा हैं। गणिनि आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयश मति जी दीक्षा गुरु की जन्म भूमि सनावद को लेकर आह्लादित हैं। आर्यिकाश्री संघ का सनावद से सिद्ध क्षेत्र पावागिरी होते हुए सिद्ध क्षेत्र बावनगजा के लिए प्रभावना पूर्वक विहार होगा। पूज्य माताजी का संयमी जीवन का 31 का वर्षायोग वर्ष 2025 भोपाल में चातुर्मास के बाद आपका मंगल विहार वृहद पंच कल्याणक संत समागम के लिए णमोकार धाम नासिक की ओर चल रहा है। उल्लेखनीय हैं कि श्री सम्मेद शिखर, श्री महावीर जी, सोनागिर, देहली सहित अनेक धार्मिक क्षेत्रों पर निःशुल्क भोजन शाला सृष्टि मंगलम संस्था द्वारा संचालित है।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जीः एक परिचय </strong></p>
<p>गुरु मां भक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि 23 मार्च 1964 को जन्मी सुलोचना दीदी ने सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी में आचार्य श्री सुमति सागर जी और आचार्य श्री सम्मति सागर जी से 26 मार्च 1994 को आर्यिका दीक्षा ली और आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जी नामकरण हुआ। 31 वर्ष के संयमी जीवन में 10 से अधिक राज्यों में भ्रमण कर धर्म की प्रभावना की। आपकी मंगल प्रेरणा से महाव्रती एवं अणु व्रती त्यागियों के लिए सृष्टि मंगलम संस्था के माध्यम से सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर जी, सोनागिर जी अतिशय क्षेत्र महावीर जी ,महानगर देहली में शुद्ध आहार की व्यवस्था चल रही हैं। आदि सृष्टि संस्था के माध्यम से कैंसर मरीजों तथा अन्य बीमारियों के इलाज कराए जाते हैं। 31 वर्ष के संयमी जीवन में 25 हजार से अधिक किमी का विहार किया है। 29 सितंबर 2019 को विश्व प्रसिद्ध संस्था ने मानव रत्न अलंकरण से देहली में विभूषित किया था।</p>
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		<title>मुनिश्री महिमा सागरजी ससंघ सिद्ध क्षेत्र बावनगजा की ओर करेंगे विहार: रविवार को सिद्धवरकूट में होगा मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Fri, 30 May 2025 12:16:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वरदत्त सागर जी के शिष्य मुनि श्री महिमा सागर जी ससंघ का मंगल विहार इंदौर छावनी से मांगीतुंगी सिद्ध क्षेत्र की ओर चल रहा है। एक जून रविवार को संघ सुबह सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र से मंगल प्रवेश करेंगे। रविवार और सोमवार दो आहार सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र में होगा। सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वरदत्त सागर जी के शिष्य मुनि श्री महिमा सागर जी ससंघ का मंगल विहार इंदौर छावनी से मांगीतुंगी सिद्ध क्षेत्र की ओर चल रहा है। एक जून रविवार को संघ सुबह सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र से मंगल प्रवेश करेंगे। रविवार और सोमवार दो आहार सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र में होगा। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> आचार्य श्री वरदत्त सागर जी के शिष्य मुनि श्री महिमा सागर जी ससंघ, मुनि श्री दिव्य सेन जी, मुनि श्री परम सागर जी, आर्यिका श्री सुग्रीव मती माताजी, आर्यिका श्री सुभद्रा मती माताजी, क्षुल्लिका श्री सम्मेद श्री माताजी का मंगल विहार इंदौर छावनी से मांगीतुंगी सिद्ध क्षेत्र की ओर चल रहा है। संघ ने शुक्रवार गुलकंद फेक्ट्री में विश्राम किया।</p>
<p>शनिवार का आहार बड़वाह जैन मंदिर में होगा। शाम का विश्राम मोरटक्का में होगा। एक जून रविवार को संघ सुबह सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र से मंगल प्रवेश करेंगे। रविवार और सोमवार दो आहार सिद्धवरकूट सिद्ध क्षेत्र में होगा। जुलाई 2 तारीख शाम को ऊन बावनगजा सिद्ध क्षेत्र की ओर विहार होगा।</p>
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		<title>औरंगाबाद बुलढाना से विहार कर आए मुनिसंघ का मंगल प्रवेशः बड़वानी विधायक ने अगवानी कर लिया आशीर्वाद </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Mar 2025 06:37:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी में मुनि श्री विवर्धन सागर जी, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी हैं। बैंडबाजों के साथ ससंघ की अगवानी कर विधायक राजन मंडलोई ने आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पाद प्रक्षालन भी हुआ। आरती उतारी गई। इस अवसर पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़वानी में मुनि श्री विवर्धन सागर जी, मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी हैं। बैंडबाजों के साथ ससंघ की अगवानी कर विधायक राजन मंडलोई ने आशीर्वाद लिया। जगह-जगह पाद प्रक्षालन भी हुआ। आरती उतारी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे। मुनिराजों ने धर्मसभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;       </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> सिलावद की ओर से शुक्रवार को सिद्ध नगर बड़वानी में आचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य मुनि श्री विवर्धन सागर जी एवं मुनि श्री विश्वनायक सागर जी सहित 17 मुनिराज और आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश हुआ। इसमें 10 मुनिराज, 2 क्षुल्लक, 5 आर्यिका माताजी पधारी हैं। मुनि संघ की अगवानी बड़वानी विधायक राजन मंडलोई और समाज जन ने की। महाराज के पाद प्रक्षालन और श्रीफल भेंटकर विधायक मंडलोई ने आशीर्वाद प्राप्त किया। समाज के महिला और पुरुषों ने अपने अपने घरों पर मुनि संघ के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। श्रीफल चढ़ाकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। बैंडबाजे के साथ अंजड़ नाके से कारंजा चौराहा, मोटी माता मंदिर, महात्मा गांधी मार्ग, रणजीत चौक होते हुए जैन मंदिर पर शोभा यात्रा समाप्त हुई। मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई।</p>
<p><strong>हमें अष्ट मूल गुण का पालन करना चाहिए</strong></p>
<p>दोपहर को जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विश्वनायक सागर जी ने अपनी देशना में कहा कि जैन धर्म अनादिकाल से चला आ रहा है। अपने तीर्थ क्षेत्र, धर्म क्षेत्र को ऋषि मुनियों ने अपने उपदेशों और शास्त्र और आगम के माध्यम से हमारे जीवन तथा इस धर्म को सींचा है। बड़वानी वाले तो बड़े सौभाग्यशाली हैं। जिनको आचार्य आदिसागर जी, महावीर कीर्ति जी, विमल सागर जी, सन्मति सागर जी का समागम मिला और उनसे संस्कार मिले। उन महान आचार्यों ने अच्छे संस्कार को रोपित किया। जैन संस्कारों में रात्रि भोजन, जमीकंद, शूद्र जल का त्याग होना चाहिए और अष्ट मूल गुण का पालन होना चाहिए। ये जैन धर्म सबसे दुर्लभ है। जिसको पाने के लिए देव भी तरसते हैं।</p>
<p><strong>अहंकार को छोड़कर बड़े बने होते तो योनियों में नहीं भटकते</strong></p>
<p>मुनिश्री विवर्धन सागर जी ने बताया कि गुरु आचार्यश्री विराग सागर जी ने संयम का पथ दिखलाया और जीवन को सफल बनाने के लिए मोक्ष मार्ग की राह दिखलाई। मुनि श्री ने बड़वानी को परिभाषित करते हुए कहा कि बड़वानी कह रहा है हमंे भी बड़ा बनना है और हमें घर, समाज और देश में बड़े नहीं बनना बल्कि हमें तो अपने गुणों से बड़ा बनना है। हम अपने अहंकार को छोड़कर बड़े बने होते तो इतनी योनियों में नहीं भटकते और सिद्धालय में विराजित होते, यहां नहीं बैठे होते। जो छल कपट कर रहे हैं तो वो कब तक बड़ा बनेगा। आपका छल कपट किसी से भी छिप जाए लेकिन, कर्म बांध रहे हो और कर्म बंध तो निश्चित ही है और ये आप सब घर, परिवार, समाज, देश से छिपा सकते हो लेकिन, यह पाप कर्म निश्चित नियम से उदय में आएगा। .लौकिकता में बड़े बनने से कोई फायदा नहीं है। अपने भावों से बड़े बनना है। अपने अहंकार और अंदर की गलत भावना को छोड़ना होगा।</p>
<p><strong>संघ संचालकों का सम्मान किया</strong></p>
<p>सभा के प्रारंभ में मंगलाचरण बबीता काला ने किया। आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन समाज के वरिष्ठ जन ने किया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन युवा साथियों ने किए और शास्त्र भेंट महिला मंडल ने किया। इस अवसर पर मुनि संघ का औरंगाबाद, बुलढाना से पद विहार करवाकर साथ आ रहे संघ संचालकों का पुष्पहार पहनाकर तिलक लगाकर और अंग वस्त्र भेंट कर समाज के वरिष्ठों ने सम्मान किया। संचालन मनीष जैन ने किया। कार्यक्रम में समाज के युवा, बच्चे, महिला, पुरुष उपस्थित रहे। धर्मसभा के पश्चात मुनि संघ का विहार सिद्ध क्षेत्र बावनगजा के लिए हुआ। रात्रि विश्राम पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर हुआ।</p>
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		<title>बावनगजा मेला अखंड जैनत्व एकता और वात्सल्य का प्रतीकः आचार्य श्री विप्रणत सागर जी के सानिध्य में हुए विधान चढ़ाया निर्वाण लाडु </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Jan 2025 13:56:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[84 फीट उत्तुंग भगवान आदिनाथ का मस्तकाभिषेक किया गया। आचार्य विप्रणत सागर जी महाराज के सानिध्य में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित किया। इस दौरान निमाड़ अंचल और मालवांचल से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुगण बावनगजा पहुंचे थे। पढ़िए बड़वानी बावनगजा से दीपक प्रधान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>84 फीट उत्तुंग भगवान आदिनाथ का मस्तकाभिषेक किया गया। आचार्य विप्रणत सागर जी महाराज के सानिध्य में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित किया। इस दौरान निमाड़ अंचल और मालवांचल से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुगण बावनगजा पहुंचे थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए बड़वानी बावनगजा से दीपक प्रधान की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिम ब्रह्मा आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का मोक्ष कल्याणक दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में मनाया गया। यहां पर दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया है। यहां विराजित आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बावनगजा का ये मेला कोई धार्मिक, साहित्यिक या संस्कृतिक मेला नहीं है। ये मेला तो अखंड जैनत्व की एकता और वात्सल्य का प्रतीक है। आचार्य श्री ने काव्य शैली में धर्मसभा में सभी श्रावकों को रोमांचित कर नव चेतना से भर दिया। आचार्य श्री ने कहा कि जो एक बार भगवान आदिनाथ का नाम दिल और श्रद्धा पूर्वक ले लेता है। उसे 64 पुण्य तीर्थ के दर्शन करने का पुण्य लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या का प्रवर्तन भी आदिनाथ भगवान के बाद हुआ। भगवान आदिनाथ के मोक्ष के बाद भरत चक्रवर्ती को भी आंसू आ गए थे। वो इसलिए कि अब में किस के दर्शन करूंगा। कैसे समवशरण में धर्म वाणी श्रवण करूंगा। कौन मेरी धार्मिक जिज्ञासा को पूर्ण करेगा। आज आदिनाथ भगवान हमारे बीच होते तो हमें भी उनके दर्शन करने और उनके समवशरण में बैठने का सौभाग्य प्राप्त होता और देशना सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता। समाज का अच्छा प्रतिनिधि राजनीति में होता था अब वो शून्य सा है।</p>
<p><strong>हम सभी एकता के सूत्र में बंधेंगे</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि भगवान ने अष्ट कर्म का नाश कर मोक्ष को प्राप्त कर लिए उनको तो खुशी प्राप्त हो गई पर हमें दुख है क्योंकि, अगर वो होते तो हमें धर्म सभा श्रवण करने को मिलती। बावनगजा को सिद्ध क्षेत्र का गौरव प्राप्त है ये अतिशय सिद्ध भूमि है। आज इस दिन सभी नियम ले लो। हम को खंड खंड हो रहे हैं। हम सभी एकता के सूत्र में बंधेंगे। मेला इसलिए होता है कि हम सभी एक सूत्र में बंधे रहे और एक जुट होकर राजनीति में भी अपना दखल रखकर भाग लें। पहले हमारे समाज का अच्छा प्रतिनिधि राजनीति में होता था अब वो शून्य सा है। आचार्यश्री ने कहा कि मोक्ष कल्याणक पर हमें अभिषेक करना है। जिन धर्म की रक्षा के लिए सच्चा जैन बनना है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73262" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250128-WA0065.jpg" alt="" width="897" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250128-WA0065.jpg 897w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250128-WA0065-168x300.jpg 168w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250128-WA0065-574x1024.jpg 574w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250128-WA0065-768x1370.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250128-WA0065-861x1536.jpg 861w" sizes="(max-width: 897px) 100vw, 897px" />धर्म की रक्षा के लिए सदा आगे रहो</strong></p>
<p>समाज के व्यक्ति के लिए हमारे दिल में ममत्व का भाव उमड़ना चाहिए। जय जिनेन्द्र करना सम्यक दर्शन का सातवां अंग है। वात्सल्य और तभी जिन धर्म की प्रभावना कर पाओगे। जैन धर्म की प्रभावना के लिए एकजुट हो जाओ। धर्म की रक्षा के लिए सदा आगे रहो। आचार्य श्री ने कहा कि समाज जन को नसीहत दी कि अपने नाम के आगे जैन ही लिखें। साथ ही मंदिर में धर्मनीति करिए राजनीति नहीं। धर्म में राजनीति आती है तो धर्म बिगड़ जाता है और राजनीति में धर्म आ जाता है तो राजनीति सुधर जाती है।</p>
<p><strong>सभी अपने नाम के आगे जैन ही लिखें</strong></p>
<p>इस अवसर पर नीति आयोग की सदस्य अर्चना जैन ने कहा कि आगामी महा मस्तकाभिषेक के लिए मैं मुनिपुंगव सुधा सागर जी से जीर्णाेद्धार की स्वीकृति का प्रयास कर क्षेत्र पर लाने का प्रयास करूंगी और उन्होंने समस्त उपस्थित जैन श्रावकों से अपील की है कि सभी अपने नाम के आगे जैन ही लिखें। जिससे हमारी सही जनसंख्या मालूम हो। इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण सचिव मप्र शासन हीरालाल जी पाटीदार ने भी आचार्य संघ को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने पौधरोपण करने और स्टॉप डेम की स्वीकृति प्रदान की। ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी ने साधारण सभा को संचालित कर कार्यों की समीक्षा की और आगामी योजनाओं को बताया। उसके पूर्व प्रातः आचार्य श्री के सानिध्य और पंडित मौसम जी शास्त्री के मंत्रोच्चार से ध्वजारोहण हुआ और आचार्य श्री की आहार चर्या हुई।</p>
<p><strong>चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन हुआ</strong></p>
<p>इसके बाद आचार्य संघ को सम्मान सहित मंच पर विराजित किया गया। जहां अर्चना जैन नीति आयोग सदस्य और ट्रस्ट सदस्यों द्वारा भगवान आदिनाथ की तस्वीर का चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया। गुरुकुल के बच्चों द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। संचालन विपुल गंगवाल ने किया और बोलियों का संचालन मौसम जी शास्त्री ने किया।</p>
<p><strong>पुण्यार्जक परिवार का सम्मान किया</strong></p>
<p>युवासंघ बड़वानी ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया। शास्त्र भेंट नीति आयोग की सदस्य अर्चना जैन ने किया और जितने भी पुण्यार्जक परिवार थे उनका सम्मान किया गया। पश्चात तलहटी से बड़े बाबा तक बैंडबाजे,ढोल ताशे और जिन धर्म ध्वजा के साथ घट और शोभा यात्रा निकाली गई। जहां भगवान के प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य निर्मल मोहनलाल राणापुर परिवार को प्राप्त हुआ तो द्वितीय कलश करने का सौभाग्य शैफाली सौरभ टोंग्या परिवार इंदौर को मिला। प्रथम शांति धारा शेखर जुगल किशोर पाटनी, अंजड़ और द्वितीय शांतिधारा दिलीप रश्मि बाकलीवाल बड़नगर इंदौर को प्राप्त हुए। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य शेखर जुगल पाटनी अंजड़ परिवार को प्राप्त हुआ और भगवान के शुद्ध जल के 1008 कलश से अभिषेक हुए।</p>
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