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	<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में अर्पित किए गए 1008 अर्घ्य : मुनि नीरज सागर एवं मुनि निर्मद सागर के सान्निध्य में भक्तिभाव से हुई सिद्ध भगवंतों की आराधना </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 10:45:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर जिले के मड़ावरा में अष्टानिका पर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने सिद्ध भगवंतों को 1008 अर्घ्य समर्पित किए। मुनि श्री नीरज सागर एवं मुनि श्री निर्मद सागर के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में धर्मसभा, महाआरती और भक्तिमय आराधना का आयोजन हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट। मड़ावरा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ललितपुर जिले के मड़ावरा में अष्टानिका पर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने सिद्ध भगवंतों को 1008 अर्घ्य समर्पित किए। मुनि श्री नीरज सागर एवं मुनि श्री निर्मद सागर के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में धर्मसभा, महाआरती और भक्तिमय आराधना का आयोजन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मड़ावरा (ललितपुर)।</strong> धर्मनगरी मड़ावरा में अष्टानिका पर्व के पावन अवसर पर प्रतिष्ठित सिंघई प्रकाशचंद्र–शांतिकुमार सेठी परिवार के सौजन्य, आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री नीरज सागर जी तथा मुनि श्री निर्मद सागर जी के मंगल सान्निध्य एवं सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से श्री महावीर विद्याविहार के विशाल प्रांगण में सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन हो रही सिद्ध भगवंतों की आराधना</strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य के मार्गदर्शन में श्रद्धालु प्रतिदिन प्रातःकाल पूजा, विधान एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं। विधान के दौरान विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना से सिद्ध भगवंतों की आराधना की जा रही है।</p>
<p><strong>1008 अर्घ्य हुए समर्पित</strong></p>
<p>मंगलवार को आयोजित विधान में इंद्र-इंद्राणी स्वरूप पात्रों ने भगवान जिनेन्द्र देव की विधिवत पूजा-अर्चना कर सिद्ध भगवंतों को 1008 अर्घ्य समर्पित किए। पूरा वातावरण भक्तिरस और मंगलभावनाओं से ओत-प्रोत रहा।</p>
<p><strong>मुनिसंघ ने बताया सिद्धचक्र विधान का महत्व</strong></p>
<p>धर्मसभा में विराजमान मुनि श्री नीरज सागर जी एवं मुनि श्री निर्मद सागर जी ने सिद्धचक्र विधान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भावों से की गई आराधना आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है तथा पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति का कारण बनती है।</p>
<p><strong>महाआरती एवं समाज का सहयोग</strong></p>
<p>सायंकाल आयोजित महाआरती का सौभाग्य डॉ. राकेश कुमार एवं सुधीर कुमार सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच प्रभु भक्ति, आरती एवं भक्ति नृत्य कर धर्मलाभ अर्जित किया। आयोजन को सफल बनाने में राजू सेठी, दीपक सेठी, हर्षवर्धन सेठी, राहुल सेठी, चातुर्मास आयोजन समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज का विशेष सहयोग रहा।</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में भगवान के 1024 सहस्त्रनाम अर्घ्य समर्पित : विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक हुई आराधना </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 10:40:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी के श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका पर्व के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के अष्टम दिवस भगवान के 1024 सहस्त्रनाम अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं महाआरती में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी के श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका पर्व के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के अष्टम दिवस भगवान के 1024 सहस्त्रनाम अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं महाआरती में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड, कुचामन सिटी में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना से आयोजित अष्टानिका पर्व के अंतर्गत नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अष्टम दिवस विविध धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का लाभ</strong></p>
<p>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य महेन्द्र कुमार, सरला, विशाल, एकता, पारस, नेहा, भव्य, जिन्दल पहाड़िया परिवार तथा कमला देवी, अमित, निधि, मनोज, आरती, तक्ष, लक्ष्य, जितासा एवं जिताक्षा पाटोदी परिवार (मीठड़ी वाले) को प्राप्त हुआ। सभी ने श्रद्धापूर्वक शांतिधारा कर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>1024 सहस्त्रनाम अर्घ्य हुए समर्पित</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया ने बताया कि अष्टानिका पर्व में सिद्धचक्र महामंडल विधान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। कलशाभिषेक के पश्चात भगवान के 1024 सहस्त्रनाम अर्घ्य विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना से समर्पित किए गए। पूजन का लाभ चिरंजीलाल, सुरेश कुमार, विशाल, हेमांग पाटोदी, भंवरलाल झांझरी, लालचंद, विकास, नीरज पहाड़िया, मनीष, राजेश, प्रदीप गंगवाल, संतोष, विकास काला, पवन, राजेश पांड्या, अशोक अजमेरा, मनोज गोधा, तेजकुमार बड़जात्या सहित अनेक श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।</p>
<p><strong>64 दीपकों से हुई भव्य महाआरती</strong></p>
<p>सायंकाल देव, शास्त्र, गुरु, सिद्धचक्र विधान एवं वर्धमान स्तोत्र की 64 दीपकों से भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। भक्तिमय वातावरण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>आज हवन के साथ होगा विधान का समापन</strong></p>
<p>समिति ने बताया कि नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन अंतिम दिवस हवन में आहुतियों के साथ किया जाएगा। सभी श्रद्धालुओं से समापन समारोह में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित रहने का आग्रह किया गया।</p>
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		<title>आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा 29 जुलाई से होगी चातुर्मास की शुरूआत: चातुर्मास में प्रमुख त्योहार और व्रत से होती है आध्यात्मिक आराधना </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 06:48:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज के चातुर्मास की शुरुआत 29 जुलाई आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा से होगी और इसका समापन कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को होता है। इस चार महीने की पावन अवधि (श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक) में आत्म-शुद्धि, तप और स्वाध्याय के कई प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। पढ़िए, इंदौर ब्यूरो की यह रिपोर्ट&#8230; इंदौर। दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज के चातुर्मास की शुरुआत 29 जुलाई आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा से होगी और इसका समापन कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को होता है। इस चार महीने की पावन अवधि (श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक) में आत्म-शुद्धि, तप और स्वाध्याय के कई प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, इंदौर ब्यूरो की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। दिगंबर जैन समाज के चातुर्मास की शुरुआत 29 जुलाई आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा से होगी और इसका समापन कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को होता है। इस चार महीने की पावन अवधि (श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक) में आत्म-शुद्धि, तप और स्वाध्याय के कई आध्यात्मिक प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। वर्ष 2026 के चातुर्मास कैलेंडर के अनुसार दश लक्षण पर्व (पर्यूषण महापर्व) यह दिगंबर जैन समाज का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र 10 दिवसीय पर्व है। इस दौरान उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव आदि दस धर्मों की आराधना की जाती है।</p>
<p>तिथि के अनुसार यह भाद्रपद शुक्ल पंचमी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी रहेगा। वर्ष 2026 में 12 सितंबर से 21सितंबर मनाया जाएगा। अनंत चतुर्दशी- दश लक्षण पर्व का अंतिम दिन, जो कि भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक दिवस भी है। इस दिन विशेष व्रत और पूजा की जाती है। तिथि-भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी। क्षमावाणी पर्व (आश्विन प्रतिपदा)- दशलक्षण पर्व के ठीक अगले दिन दिगंबर समाज में सभी जीवों से ‘उत्तम क्षमा’ कहकर भूल-चूक की माफी मांगी जाती है। इस बार यह 22 सितंबर को तिथि आएगी।</p>
<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व (वर्ष में तीन बार आने वाला 8 दिवसीय पर्व)</strong></p>
<p>चातुर्मास की अवधि के दौरान सिद्धचक्र महामंडल विधान और नंदीश्वर द्वीप की विशेष आराधना के लिए अष्टान्हिका पर्व दो बार आता है। आषाढ़ अष्टान्हिका-यह चातुर्मास शुरू होने के ठीक पहले आता है। (आषाढ़ शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा)</p>
<p>कार्तिक अष्टान्हिका- चातुर्मास के अंतिम दिनों में मनाया जाने वाला 8 दिनों का पर्व।</p>
<p>तिथि- कार्तिक शुक्ल अष्टमी से कार्तिक पूर्णिमा तक।</p>
<p>2026 में तिथि- 17 से 25 नवंबर।</p>
<p><strong>अन्य प्रमुख ऐतिहासिक एवं कल्याणक पर्व</strong></p>
<p>वीर शासन जयंती-भगवान महावीर के केवलज्ञान के बाद उनकी दिव्य ध्वनि (प्रथम उपदेश) खिरने का ऐतिहासिक दिन।</p>
<p>तिथि-श्रावण कृष्ण प्रतिपदा।</p>
<p>2026 में तिथि- 30 जुलाई।</p>
<p>पार्श्वनाथ निर्वाण दिवस-23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस, जिस दिन जैन मंदिरों में विशेष निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता है।</p>
<p>तिथि- श्रावण शुक्ल सप्तमी।</p>
<p>2026 में तिथि- 19 अगस्त</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>रोट तीज- इस दिन घरों में बिना नमक की मोटी रोटियां (रोट) बनाकर खीर के साथ भोग लगाया जाता है और त्याग-तपस्या की जाती है।</p>
<p>तिथि- भाद्रपद शुक्ल तृतीया।</p>
<p>2026 में तिथि- 15 सितंबर</p>
<p>महावीर निर्वाण कल्याणक (दीपावली)- चातुर्मास के उत्तरार्द्ध में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया जाता है। जैन समाज के गुरु भक्त और श्रावक-श्राविकाएं इस दिन सुबह मंदिरों में निर्वाण लाडू चढ़ाते हैं।</p>
<p>तिथि- कार्तिक अमावस्या।</p>
<p>2026 में तिथि- 9 नवंबर</p>
<p><strong>ज्ञान और शास्त्र आराधना के पर्व</strong></p>
<p>ज्ञान पंचमी/सौभाग्य पंचमी- दीपावली के बाद जैन शास्त्रों और श्रुत-ज्ञान की विशेष पूजा-अर्चना का दिन।</p>
<p>तिथि-कार्तिक शुक्ल पंचमी।</p>
<p>2026 में तिथि- 14 नवंबर</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में पंच परमेष्ठी के 851 अर्घ्य समर्पित : अष्टान्हिका पर्व के सप्तम दिवस श्रद्धा और भक्ति से सम्पन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 18:39:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी के श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के सप्तम दिवस पंच परमेष्ठी की आराधना करते हुए 851 अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक, शांतिधारा एवं महाआरती में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुचामन सिटी के श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के सप्तम दिवस पंच परमेष्ठी की आराधना करते हुए 851 अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक, शांतिधारा एवं महाआरती में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना के साथ आयोजित अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के सप्तम दिवस विविध धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा</strong></p>
<p>प्रातःकाल भगवान का कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ। कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य रामेश्वरलाल, सुशील कुमार, प्रवीण, नवीन गंगवाल परिवार (लाडड़िया वाले), लालचंद, कमल कुमार, मैना देवी, पंकज, अरविंद, अभिषेक, सिद्धार्थ पहाड़िया परिवार (कुचामन) तथा संजय कुमार, मनीष कुमार गंगवाल (लाडड़िया वाले) को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का वाचन सुरेश कुमार पांड्या ने किया।</p>
<p><strong>पंच परमेष्ठी की आराधना में 851 अर्घ्य</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व में आयोजित सिद्धचक्र विधान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। कलशाभिषेक के पश्चात पंच परमेष्ठी की आराधना स्वरूप विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना से 851 अर्घ्य समर्पित किए गए।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता</strong></p>
<p>अर्घ्य समर्पण में शांति देवी, पुष्पा अजमेरा, कमला देवी, हीरारमणी, कुसुम पाटोदी, मंजू, संतोष, चंदा, काला, मैना देवी, सुशीला, सुलोचना, सरला, रेखा, ममता पहाड़िया, कमला देवी झांझरी, ज्ञानमती, आभा, हीरा, विनीता, तारा देवी पांड्या, सुनीता गंगवाल, बेबी काशलीवाल, राजकुमारी, पाटनी तथा संतोष ठोल्या सहित अनेक श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>महाआरती के साथ हुआ समापन</strong></p>
<p>सायंकाल श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने आरती में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया तथा अष्टान्हिका पर्व की आध्यात्मिक आराधना में अपनी श्रद्धा अर्पित की।</p>
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		<title>सागवाड़ा में पंचकल्याणक महोत्सव एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान में उमड़ी श्रद्धा आचार्य कनकनंदी जी ने बताए मोक्ष मार्ग के सूत्र </title>
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		<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 17:32:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागवाड़ा की पुनर्वास कॉलोनी में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान में आचार्य श्री कनकनंदी जी के सान्निध्य में शांतिनाथ भगवान का दीक्षा कल्याणक एवं सिद्धों की आराधना श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुई। आचार्यश्री ने सम्यक्त्व, व्रत, तप और मोक्षमार्ग का महत्व बताया। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट। सागवाड़ा (राजस्थान) / अजीत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सागवाड़ा की पुनर्वास कॉलोनी में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान में आचार्य श्री कनकनंदी जी के सान्निध्य में शांतिनाथ भगवान का दीक्षा कल्याणक एवं सिद्धों की आराधना श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुई। आचार्यश्री ने सम्यक्त्व, व्रत, तप और मोक्षमार्ग का महत्व बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया डडूका की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा (राजस्थान) / अजीत कोठिया डडूका।</strong> पुनर्वास कॉलोनी, सागवाड़ा में विश्ववंदनीय आचार्य श्री कनकनंदी जी के पावन सान्निध्य में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव एवं श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और धर्म प्रभावना के वातावरण में जारी है। आयोजन के अंतर्गत प्रातःकाल सिद्धों की आराधना तथा दोपहर एवं सायंकाल भगवान शांतिनाथ का दीक्षा कल्याणक महोत्सव भक्तिभाव से मनाया गया।</p>
<p>दीक्षा महोत्सव में भगवान शांतिनाथ के रूप में निधिप ने भूमिका निभाई, जबकि माता-पिता के पात्रों का निर्वहन अंजना देवी–अशोक कुमार कोठारी परिवार सहित विभिन्न श्रद्धालुओं ने किया। अष्टकुमारिकाओं, लोकान्तिक देवों एवं अन्य धार्मिक पात्रों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।</p>
<p><strong>सम्यक्त्व और व्रत ही मोक्षमार्ग के आधार</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री कनकनंदी जी ने कहा कि शुद्ध निश्चय नय से आत्मा शुभ-अशुभ, पाप-पुण्य से रहित सच्चिदानंद स्वरूप है, किन्तु जब तक आत्मा उस शुद्ध अवस्था को प्राप्त नहीं करती, तब तक शुभ कर्मों के माध्यम से पुण्य का अर्जन करना आवश्यक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र ही मोक्षमार्ग के मूल आधार हैं। महाव्रत, सामायिक, तप और नियम इनकी प्राप्ति के साधन हैं। बिना साधन के साध्य की सिद्धि संभव नहीं है। इसलिए व्रत, संयम और तप का पालन प्रत्येक साधक के लिए आवश्यक है।</p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जब तक मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती, तब तक व्रत एवं तप के माध्यम से पुण्य अर्जित कर श्रेष्ठ गति प्राप्त करना ही श्रेयस्कर है। उन्होंने इसे एक यात्री के उदाहरण से समझाते हुए कहा कि जैसे धूप में खड़े रहने की अपेक्षा वृक्ष की छाया में प्रतीक्षा करना बुद्धिमानी है, उसी प्रकार धर्म, व्रत और तप जीवन को श्रेष्ठ दिशा प्रदान करते हैं।</p>
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		<title>अष्टान्हिका पर्व में सिद्धों की आराधना, पंच परमेष्ठी के 501 अर्घ्य समर्पित : कुचामन सिटी में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान का षष्ठम दिवस </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 10:50:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के षष्ठम दिवस पंच परमेष्ठी के 501 अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान के षष्ठम दिवस पंच परमेष्ठी के 501 अर्घ्य समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने कलशाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना से आयोजित अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का षष्ठम दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ शुभारम्भ</strong></p>
<p>प्रातःकाल भगवान का भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य लालचंद, कमल कुमार, पियूष, गुज्जन, रेखा एवं वीर पहाड़िया परिवार, विमलचंद, सुशीला, विनय, मनीषा, विकास, कल्पना पहाड़िया परिवार तथा लालचंद, पुष्पा, अनीष, सोनू एवं मनीष अजमेरा परिवार (टोडास) को प्राप्त हुआ। सभी ने श्रद्धापूर्वक शांतिधारा कर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने किया विधान पूजन</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व में श्री सिद्धचक्र विधान का विशेष महत्व है। पूजन का सौभाग्य सुरेश, अमित, मनोज, विशाल पाटोदी, भंवरलाल झाझरिया, लालचंद, महेंद्र, विकास, नीरज, विशाल पहाड़िया, मनीष, राजेश, प्रदीप गंगवाल, संतोष, विकास काला, राजेश, प्रतीक, नन्नू पांड्या, अशोक अजमेरा, मनोज गोधा, अशोक बज एवं तेजकुमार बड़जात्या सहित अनेक श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का वाचन सुरेश कुमार पांड्या ने किया।</p>
<p><strong>पंच परमेष्ठी के 501 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>कलशाभिषेक के उपरांत आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान में सिद्धों की आराधना स्वरूप पंच परमेष्ठी के 501 अर्घ्य विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना के साथ समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से विधान में सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।</p>
<p><strong>महाआरती में उमड़ी श्रद्धा</strong></p>
<p>सायंकाल श्री सिद्धचक्र विधान की भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने महाआरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आत्मकल्याण एवं विश्व मंगल की प्रार्थना की।</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित : विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की भावना से सम्पन्न हुआ पंचम दिवस </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:39:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ विविध धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की मंगलकामना की गई। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ विविध धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की मंगलकामना की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं अमन-चैन की मंगलकामना से आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंचम दिवस विविध धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य</strong></p>
<p>प्रातःकाल भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी सुरेश कुमार–संदीप कुमार पांड्या परिवार तथा माणकचंद–राकेश कुमार–भव्य कुमार काला परिवार (सबलपुरा) को प्राप्त हुआ। सभी ने श्रद्धापूर्वक शांतिधारा कर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने किया पूजन एवं पुण्यार्जन</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया एवं तेजकुमार बड़जात्या ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व वर्ष में तीन बार आता है और इन अवसरों पर नंदीश्वर द्वीप विधान तथा सिद्धचक्र विधान का विशेष महत्व माना जाता है। विधान पूजन में चिरजीलाल, अमित, मनोज, अशोक, भव्य पाटोदी, भवरलाल झाझरी, विमल कुमार पाटोदी, महेंद्र, विकास, नीरज पहाड़िया, मनीष गंगवाल, संतोष, विकास काला सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन कर पुण्यार्जन किया। शांतिधारा का वाचन श्रीमती ममता पांड्या ने किया।</p>
<p><strong>बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>सुरेश पांड्या एवं माणकचंद काला ने बताया कि कलशाभिषेक के पश्चात नवदेवता पूजन, पंचमेरु पूजन, मुनीश्वरनाथ भगवान पूजन, मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की पूजा एवं सिद्धचक्र पूजन सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत आयोजित विधान में बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना के साथ समर्पित किए गए।</p>
<p><strong>महाआरती में उमड़ा श्रद्धा का सागर</strong></p>
<p>सायंकाल सिद्धचक्र विधान की भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया तथा विश्व कल्याण, शांति और सद्भाव की मंगलकामना की।</p>
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		<title>29 जुलाई को होगा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का समापन : अष्टानिका महापर्व पर नेहानगर जैन मंदिर में चल रहे हैं भव्य धार्मिक अनुष्ठान </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:28:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागर के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 जुलाई को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा। चातुर्मास की धार्मिक महत्ता भी बताई गई। पढ़िए श्रीफल साथी मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट। सागर। अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सागर के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 जुलाई को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा। चातुर्मास की धार्मिक महत्ता भी बताई गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन देश के ख्यातिप्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पं. पवन दीवान के निर्देशन में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ जारी है। नौ दिवसीय यह धार्मिक आयोजन 21 जुलाई से प्रारंभ होकर 29 जुलाई 2026 को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा।</p>
<p><strong>सिद्धचक्र विधान की महिमा</strong></p>
<p>विधान की महिमा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का संबंध श्रीपाल एवं मैनासुंदरी की प्रेरणादायी कथा से जुड़ा है। अष्टानिका महापर्व के दौरान यह विधान आत्मशुद्धि, पुण्यार्जन एवं विश्व शांति की मंगलकामना के लिए विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>प्रमुख पात्रों ने संभाली धार्मिक जिम्मेदारियां</strong></p>
<p>महामंडल विधान में विभिन्न धार्मिक पात्रों की जिम्मेदारियां समाज के श्रद्धालुओं को प्रदान की गई हैं। इनमें सौधर्म इन्द्र, ध्वजारोहणकर्ता, श्रीपाल–मैनासुंदरी, कुबेर, महायज्ञ नायक, यज्ञ नायक, ईशान इन्द्र, सनत कुमार इन्द्र, माहेंद्र इन्द्र, भरत, बाहुबली एवं अनंतवीर्य सहित अनेक पात्र श्रद्धापूर्वक अपनी भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास का धार्मिक महत्व</strong></p>
<p>आयोजकों ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होता है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा एवं अहिंसा के पालन हेतु दिगंबर साधु-संत चार माह तक एक ही स्थान पर विराजमान रहकर धर्मप्रभावना, स्वाध्याय एवं साधना करते हैं।</p>
<p><strong>सागर में विभिन्न स्थानों पर होंगे चातुर्मास</strong></p>
<p>इस वर्ष सागर में गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज, भाग्योदय तीर्थ में निर्यापक मुनि श्री अभयसागर जी महाराज, वर्धमान कॉलोनी में मुनि श्री पदमसागर जी महाराज तथा सुभाष नगर जैन मंदिर में मुनि श्री शाश्वतसागर जी महाराज का चातुर्मास संपन्न होगा।</p>
<p><strong>26 जुलाई को होगी कलश स्थापना</strong></p>
<p>आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 26 जुलाई 2026, रविवार को गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में आयोजित की जाएगी। समाजजनों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।</p>
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		<title>जयपुर के समाजसेवी आलोक-प्रमिला शाह ने सम्मेद शिखरजी में आदिवासियों को कराया भोजन एवं वितरित किए वस्त्र : अष्टान्हिका महापर्व पर सेवा और धर्म का प्रेरक संगम </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:28:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर सम्मेद शिखरजी में जयपुर के समाजसेवी आलोक-प्रमिला शाह के नेतृत्व में आदिवासियों को भोजन एवं वस्त्र वितरित किए गए। इस दौरान सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने धर्म आराधना का लाभ भी प्राप्त किया। पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट। जयपुर/सम्मेद शिखरजी। जैन धर्म के सर्वोच्च शाश्वत तीर्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर सम्मेद शिखरजी में जयपुर के समाजसेवी आलोक-प्रमिला शाह के नेतृत्व में आदिवासियों को भोजन एवं वस्त्र वितरित किए गए। इस दौरान सिद्धचक्र महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने धर्म आराधना का लाभ भी प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर/सम्मेद शिखरजी।</strong> जैन धर्म के सर्वोच्च शाश्वत तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखरजी (मधुबन, झारखंड) में अष्टान्हिका महापर्व एवं भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर सेवा, धर्म और श्रद्धा का प्रेरक संगम देखने को मिला। बीसपंथी कोठी परिसर में जयपुर के समाजसेवी दंपति आलोक शाह एवं प्रमिला शाह के नेतृत्व में आदिवासियों को भोजन कराया गया तथा वस्त्र वितरित किए गए।</p>
<p><strong>धर्म आराधना के साथ सेवा का भाव</strong></p>
<p>आदिनाथ महिला मंडल की धर्म एवं प्रचार मंत्री अनिता बड़जात्या ने बताया कि जयपुर से आया धार्मिक यात्रा दल गुणायतन में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में सहभागिता कर रहा है। इसी अवसर पर संघपति आलोक-प्रमिला शाह के नेतृत्व में सेवा कार्य संपन्न किया गया।</p>
<p><strong>अनिल जैन गदिया का हुआ अभिनंदन</strong></p>
<p>यात्रा के दौरान कैलाश मानसरोवर की सातवीं यात्रा पूर्ण कर सम्मेद शिखरजी पहुंचे जयपुर के सम्माननीय समाजसेवी अनिल जैन गदिया (बयाना वाले) का अभिनंदन एवं स्वागत किया गया। उन्होंने परम पूज्य मुनि श्री आदर्श सागर जी महाराज से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की रही सहभागिता</strong></p>
<p>यात्रा दल में लता सोगानी, भावना झांझरी, नीलम ठोलिया, प्रीति छाबड़ा, प्रमिला शाह, अनिता बड़जात्या, उदयभान जैन, आलोक शाह एवं अनिल जैन गदिया सहित अनेक श्रद्धालु प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>29 जुलाई तक चलेगा महापर्व</strong></p>
<p>सम्मेद शिखरजी में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 29 जुलाई तक चलेगा। श्रद्धालु प्रतिदिन सिद्धों की आराधना कर रहे हैं। 24 जुलाई को विधान में 64 अर्घ्य समर्पित कर विशेष भक्ति का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p><strong>सेवा और साधना का संदेश</strong></p>
<p>अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर आयोजित यह सेवा कार्य धर्म आराधना के साथ मानव सेवा की प्रेरणा देता है। श्रद्धा, करुणा और परोपकार का यह संगम जैन संस्कृति के सेवा भाव को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है।</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में 32 गुणों सहित 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित : विश्व शांति एवं सुख-समृद्धि की मंगलकामना के साथ हुई आराधना </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:11:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और अमन-चैन की मंगलकामना की। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और अमन-चैन की मंगलकामना की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, डीडवाना रोड, कुचामन सिटी में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं अमन-चैन की मंगलभावना से आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत बुधवार को प्रातः भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य</strong></p>
<p>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी भंवरलाल, कमला देवी, जूली, आशीष, जीती एवं यश झाझरी परिवार तथा राजेश, मंजूला, मनोज, ममता, अंकित, नीता एवं रम्यक पांडया परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>अष्टान्हिका पर्व का महत्व</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व वर्ष में तीन बार—कार्तिक, फाल्गुन एवं आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इन पावन अवसरों पर नंदीश्वर द्वीप विधान एवं सिद्धचक्र विधान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर 21 श्रावकों ने भगवान का जलाभिषेक कर पुण्यार्जन अर्जित किया।</p>
<p><strong>32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>सुरेश पांडया ने बताया कि कलशाभिषेक के पश्चात देव-शास्त्र पूजन, पंचमेरु पूजन, नंदीश्वर द्वीप पूजन एवं मूलनायक भगवान महावीर की पूजा सम्पन्न हुई। इसके बाद आयोजित सिद्धचक्र विधान में श्रद्धालुओं ने 32 गुणों सहित 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना की।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता</strong></p>
<p>विधान में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता करते हुए भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चन किया तथा धर्मलाभ अर्जित किया। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण बना रहा।</p>
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