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	<title>साधु &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>साधु &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>विनय, जिनवाणी स्वाध्याय मोक्ष का द्वार: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बोले-परमेष्ठी के चरण के साथ आचरण भी अपनाएं  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 06:34:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में मंगलवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के मूलगुणों की व्याख्या की। इसमें जिनवाणी के 11 अंग और 14 पूर्व अंग कुल 25 गुणों की चर्चा की गई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि धर्म जीवन में उतारें। जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में मंगलवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के मूलगुणों की व्याख्या की। इसमें जिनवाणी के 11 अंग और 14 पूर्व अंग कुल 25 गुणों की चर्चा की गई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि धर्म जीवन में उतारें। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में मंगलवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के मूलगुणों की व्याख्या की। इसमें जिनवाणी के 11 अंग और 14 पूर्व अंग कुल 25 गुणों की चर्चा की गई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि धर्म जीवन में उतारें। धर्म केवल सुनने की चीज़ नहीं, बल्कि व्यवहार में लाने के लिए है। उन्होंने कहा कि मन, वचन और शरीर पर संयम रखें। अच्छा सोचें, मधुर बोलें, अनावश्यक गतिविधियों से बचें। त्याग नियमों की छोटी शुरुआत भी महत्वपूर्ण है। एकदम सब नहीं हो पाए तो भी थोड़ा-थोड़ा अभ्यास शुरू करें। सुरेश सबलावत,भागचंद चुड़ीवाल ने बताया कि आचार्य श्री ने धर्मसभा में कहा कि शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहे, इसलिए नियमित हल्का योग और आसन करें। उपवास, त्याग और नियम अभ्यास से आसान होते जाते हैं। प्रतिदिन कोई छोटा त्याग करें जैसे रात्रि भोजन त्याग, संयमित भोजन कुछ समय मौन रात्रि भोजन नहीं करना। यह धर्म और स्वास्थ्य दोनों के लिए अच्छा बताया गया। मुनिश्री ने बताया कि बच्चों को छोटी उम्र से ही संयम और अनुशासन सिखाना चाहिए। समता बनाए रखें छोटी-छोटी बातों पर क्रोध और झगड़ा न करें। अपने दोषों पर ध्यान दें और दूसरों की कमी देखने से पहले स्वयं को सुधारने का प्रयास करें। जिनालय में पूजा शांति और भाव से करें।</p>
<p>पूजा करते समय बातचीत कम करें। ध्यान भगवान में रखें और दिखावे से बचें। मंदिर में मोबाइल साइलेंट रखे और शांत रहें तथा मन को स्थिर रखें क्योंकि, मंदिर भक्ति, ध्यान और आत्मशांति का स्थान है। अच्छे लोगों और संतों का संग करें। जीवन और विचार दोनों बदल देता है। धर्म में पद नहीं, गुण महत्वपूर्ण हैं। ज्ञान, विनय और अच्छा आचरण ही वास्तविक पहचान है। स्वाध्याय करते रहें धर्मग्रंथ पढ़ना और समझना आत्मविकास का मार्ग है।</p>
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		<title>अविवाहित बच्चों के बायोडेटा एकत्रित करना प्रमुख लक्ष्य : ज्ञानतीर्थ में राष्ट्रीय चिंतन सभा की बैठक में हुआ चिंतन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 11:34:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देशभर में निवासरत समाज बंधुओं को अपने बच्चों के संबंध तय करने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए जैसवाल जैन समाज की संस्था अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह ने सजातीय बच्चों के बायोडेटा एकत्रित कर समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>देशभर में निवासरत समाज बंधुओं को अपने बच्चों के संबंध तय करने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए जैसवाल जैन समाज की संस्था अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह ने सजातीय बच्चों के बायोडेटा एकत्रित कर समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> वर्तमान समय में समाज की पंच परम्परा के अभाव के कारण समाज में बच्चों के सगाई संबंध बनाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देशभर में निवासरत समाज बंधुओं को अपने बच्चों के संबंध तय करने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए जैसवाल जैन समाज की संस्था अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह ने सजातीय बच्चों के बायोडेटा एकत्रित कर समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। संपूर्ण भारतवर्ष में निवासरत दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के अविवाहित बच्चों की जानकारी के साथ परिचय एकत्रित कर समाज के समक्ष प्रस्तुत करना एवं रिश्ते तय करने की प्रक्रिया को सहज सरल बनाना ही संस्था का मुख्य उद्देश्य है। यह विचार ज्ञानतीर्थ मुरैना में एपीपीएस की राष्ट्रीय चिंतन सभा में संस्था के राष्ट्रीय संयोजक अजय जैन शिवपुरी, रवींद्र जैन जमूसर भोपाल एवं रूपेश जैन दिल्ली ने व्यक्त किए।</p>
<p><strong>समाजोत्थान के लिए चिंतन-मनन</strong></p>
<p>श्री दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज की सेवाभावी संस्था अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह की राष्ट्रीय सभा जैन उपासना स्थल ज्ञानतीर्थ पर संपन्न हुई। इस बैठक में देशभर के 100 से अधिक संरक्षकों एवं क्षेत्रीय संयोजकों ने समाजोत्थान के लिए चिंतन, मनन और विचार विमर्श किया। मुख्य वक्ता के रूप में मंचासीन संस्था के संरक्षक उद्यमी पवन जैन मुरैना, मनोज जैन जैसवाल कोटा, अतुल जैन आगरा, संजय जैन शालीमार, अजय जैन मुरैना, प्रवीण जैन कोटा ने विभिन्न शैलियों से आए हुए 100 से अधिक क्षेत्रीय संयोजकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाजसेवा करते समय आने वाली परेशानियों और आलोचनाओं से डरना नहीं चाहिए, बल्कि आने वाली समस्याओं का डटकर मुकाबला करना चाहिए।</p>
<p><strong>APPS के संरक्षकों द्वारा सम्मान किया</strong></p>
<p>समाज सेवा में अपना योगदान देने के लिए नये क्षेत्रीय संयोजक पंकज जैन मेडीकल मुरेना, सतेन्द्र जैन शिक्षक खनेता मुरेना, शीतल जैन प्राचार्य मनिया, अनिल जैन विजली वाले आगरा, जयचन्द्र जैन नन्दपुरा मुरेना को शपथ दिलाई एवं APPS के संरक्षकों द्वारा सम्मान किया गया। परिणय पत्रिका-26 एवं जैसवाल जैन परिणय एप के लिए अविवाहित बच्चों के फार्म का संकलन एव जानकारी एकत्रित करने का कार्य देश भर सभी नगरों कस्वों में प्रारंभ हो गया है । बायोडाटा एकत्रित करने का कार्य 31 मई 2026 तक चलेगा और जुलाई तक अविवाहित बच्चों की बहुरंगीन परिचय पत्रिका का प्रकाशन होने की पूर्ण संभावना है। संस्था के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मनोज नायक मुरैना ने बताया कि सभा के शुभारंभ में संरक्षक मंडल द्वारा भगवान आदिनाथ स्वामी, आचार्यश्री सुमतिसागरजी एवं आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के चित्रों का अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया। कार्यक्रम संयोजक अनूप भंडारी मुरैना ने स्वागत भाषण, अजय जैन शिवपुरी ने प्रगति रिपोर्ट एवं आय व्यय पत्रक प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong> परिणय एप के न्यू वर्जन की जानकारी दी</strong></p>
<p>जैसवाल जैन परिणय एप के एडमिन रूपेश जैन दिल्ली ने उपस्थित सभी लोगों को जैसवाल जैन परिणय एप के न्यू वर्जन संबंधी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सभा का संचालन रविन्द्र जैन जमूसर भोपाल द्वारा किया गया। सभा के प्रारंभ में मुरैना के क्षेत्रीय संयोजक बृजेश जैन दादा, प्रवीण जैन बड़े, अतुल जैन स्क्रैप, रमाशंकर नायक, मुकेश जैन पप्पू, मयंक जैन मंकू, सतेंद्र जैन, पंकज जैन ने पधारे हुए समस्त अतिथियों का मणिमाला, चुनरी, तिलक आदि से स्वागत सम्मान किया।</p>
<p><strong>इन स्थानों से आए प्रतिनिधि</strong></p>
<p>अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह की राष्ट्रीय चिंतन सभा में दिल्ली, आगरा, अजमेर, कोटा, शमसावाद, मनियाँ, राजाखेड़ा, धौलपुर, अम्बाह, गोहद, लश्कर, ग्वालियर, मुरार, डवरा, भोपाल, इन्दोर, गुना, शिवपुरी, फिरोजाबाद, कस्बाथाना, मुरैना एवं अन्य शैलियों से 105 प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के समापन पर उद्यमी पवन जैन मुरैना एवं रूपेश जैन दिल्ली ने सभी का आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>श्रद्धा-भक्ति से हुआ माता मरुदेवी जी का गोद भराई कार्यक्रम : अवधपुरी के पद्मप्रभु जिनालय में हुआ मंगल कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 09:22:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत नवनिर्मित श्री पद्मप्रभु जिनालय, अवधपुरी में माता मरुदेवी जी की गोद भराई का मंगलमय कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ रविवार को हुआ। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; आगरा।श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत नवनिर्मित श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत नवनिर्मित श्री पद्मप्रभु जिनालय, अवधपुरी में माता मरुदेवी जी की गोद भराई का मंगलमय कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ रविवार को हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong>श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की पावन श्रृंखला के अंतर्गत नवनिर्मित श्री पद्मप्रभु जिनालय, अवधपुरी में माता मरुदेवी जी की गोद भराई का मंगलमय कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ रविवार को हुआ। पूरे आयोजन में धर्म,संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों की सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का शुभारंभ बालिकाओं द्वारा मधुर मंगलाचरण से हुआ। जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। दोपहर 1 बजे से प्रारंभ हुए इस आयोजन में तीर्थंकर बालक आदिकुमार के पिता पारसमल जैन नाभिराय एवं माता स्नेहलता जैन मरुदेवी की गोद भराई की रस्म विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति- रिवाजों के साथ संपन्न कराई गई। गोद भराई के दौरान माता की गोद मेवा, किशमिश एवं विविध फलों से भरकर समृद्धि,सुख और शुभता की कामना की गई। वहीं आयोजन समिति की ओर से पिताजी का विधिवत स्वागत एवं सम्मान किया गया। जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। वहीं जयघोषों और भक्ति संगीत से पद्मप्रभु जिनालय गूंज उठा। कार्यक्रम पद्मप्रभु जिनालय परिवार, अवधपुरी के तत्वावधान में किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>भक्ति गीतों पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किए</strong></p>
<p>आयोजन के माध्यम से माता-पिता के सम्मान, संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों का संदेश भी दिया गया।सायं 4 बजे श्री पद्मप्रभु महिला मंडल द्वारा भगवान महावीर स्वामी का पालना झूला कार्यक्रम किया गया। इस दौरान महिलाओं ने भक्ति गीतों पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुंदर छटा बिखेरी तथा भगवान को झूला झुलाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। संचालन इंद्रप्रकाश जैन ने किया। जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाए रखा। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सभी ने तन, मन और धन से सहयोग कर आयोजन को भव्य एवं सफल बनाया। आयोजन समिति ने सभी उपस्थित जनों का स्वागत-सम्मान करते हुए आगामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया तथा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>इन समाज जनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही</strong></p>
<p>इस अवसर पर इंद्रप्रकाश जैन, प्रवीणकुमार जैन, विवेक जैन,नरेंद्र कुमार जैन, राकेश जैन, रवि जैन, ओम प्रकाश जैन, अजय मास्टर, जितेंद्र जैन, सोमप्रकाश जैन, संजय जैन, पियूष जैन, मधु जैन कंसल, करुणा जैन, कविता जैन, हेमलता जैन,वंदना जैन,रंजना जैन, गीता जैन,रश्मि जैन,पुष्पा जैन,रिंकी जैन,अंजू जैन,रागिनी जैन सहित श्री पद्मप्रभु जिनालय परिवार अवधपुरी एवं समस्त जैन समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>महरौनी की बेटी सुस्मिता सिंघई बनीं समीक्षा अधिकारी : महरौनी दिगम्बर जैन समाज मे हर्ष व्याप्त, बधाइयों का लगा तांता </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/mahronis_daughter_susmita_singhai_becomes_review_officer/</link>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 07:42:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जनपद की महरौनी नगर के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि अरविंद सिंघई की सुपुत्री एवं एडवोकेट अस्मिता सिंघई की बहन सुस्मिता सिंघई का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित परीक्षा में समीक्षा अधिकारी पद पर हुआ है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। जनपद की महरौनी नगर के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जनपद की महरौनी नगर के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि अरविंद सिंघई की सुपुत्री एवं एडवोकेट अस्मिता सिंघई की बहन सुस्मिता सिंघई का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित परीक्षा में समीक्षा अधिकारी पद पर हुआ है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> जनपद की महरौनी नगर के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि अरविंद सिंघई की सुपुत्री एवं एडवोकेट अस्मिता सिंघई की बहन सुस्मिता सिंघई का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित परीक्षा में समीक्षा अधिकारी पद पर हुआ है। उन्होंने इस कठिन परीक्षा में 72वीं रैंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा, लगन और अथक परिश्रम का उत्कृष्ट परिचय दिया है। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि सुस्मिता सिंघई का चयन इससे पूर्व सहायक अध्यापक (जूनियर) तथा समाज कल्याण विभाग में ग्राम विकास अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी हो चुका है, जो उनकी निरंतर सफलता और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।</p>
<p><strong>ललितपुर जिले के लिए प्रेरणा स्रोत</strong></p>
<p>वर्तमान में सुस्मिता सिंघई मड़ावरा तहसील में लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों और व्यस्त कार्यशैली के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहते हुए निरंतर प्रयास किया और अंततः यह बड़ी सफलता अर्जित की। उनकी यह उपलब्धि आज महरौनी नगर सहित पूरे ललितपुर जिले के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है। सुस्मिता की इस सफलता में उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। परिवार के स्नेह, सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें हर चुनौती में आगे बढ़ने का संबल दिया। उनकी बहन एडवोकेट अस्मिता सिंघई ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे परिवार के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।</p>
<p><strong>सुष्मिता को बधाई</strong></p>
<p>महरौनी क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, मित्रों एवं शुभचिंतकों द्वारा सुस्मिता सिंघई को इस शानदार सफलता पर बधाइयाँ देकर उज्ज्वल भविष्य की कामनाएं की जा रही है।सुस्मिता सिंघई की यह सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत सच्ची हो और हौसले बुलंद हों, तो हर मंजिल प्राप्त की जा सकती है।</p>
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		<title>27 अप्रैल को होने वाला है जैन धरोहर दिवस : महाकौशल में विभिन्न स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 07:40:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षणी महासभा जबलपुर संभाग द्वारा रविवार को पुरातत्व संयोजकों की बैठक की गई। जिसमें आगम में 27 अप्रैल को होने वाले जैन धरोहर दिवस को पूरे महाकौशल में विभिन्न स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। जबलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; जबलपुर। श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षणी महासभा जबलपुर संभाग द्वारा रविवार को पुरातत्व संयोजकों की बैठक की गई। जिसमें आगम में 27 अप्रैल को होने वाले जैन धरोहर दिवस को पूरे महाकौशल में विभिन्न स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। <span style="color: #ff0000">जबलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जबलपुर।</strong> श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षणी महासभा जबलपुर संभाग द्वारा रविवार को पुरातत्व संयोजकों की बैठक की गई। जिसमें आगम में 27 अप्रैल को होने वाले जैन धरोहर दिवस को पूरे महाकौशल में विभिन्न स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। प्रारंभिक तौर पर विभिन्न स्थान पर कार्यक्रम तय किए गए। कार्यक्रम का प्रारंभ संभागीय महिला प्रमुख नीलांजना जैन, स्मृति जैन, संगीता जैन ने मंगलाचरण किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष चिंतामणि जैन ने कार्यक्रम के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.यतीश जैन ने विभिन्न स्थानों पर किस तरह से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है एवं उसके महत्व के संबंध में प्रकाश डाला। जैन पुरातत्व एवं धरोहरों के प्रति जन जागरण करना इसका मुख्य उद्देश्य है। इस अवसर पर प्रोफेसर दीपिका जैन ने बताया अभी भी अनेक स्थान पर खंडित जैन मूर्तियां उमरिया पान कटनी जिले के पास बिखरी हुई है। इसके संरक्षण के संबंध में कार्य किया जा सकता है। उपाध्यक्ष अमिताभ भारती द्वारा ऐसे स्थान पर हेरिटेज वॉक का कार्यक्रम आगामी दिनों में किया जाएगा। एडवोकेट सत्येंद्र जैन ने भी अनेक कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। संभागीय उपाध्यक्ष निशित जैन ने विभिन्न मंदिरों में जैन धरोहर दिवस के कार्यक्रमों के आयोजन का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी ने स्वीकार किया गया।</p>
<p>अनिल जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए गए और धरोहर दिवस पर संगोष्ठी आयोजन के संबंध में कार्यक्रम बनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम करने के लिए बैनर पोस्टर अभी से प्रदर्शित करने का निर्णय भी लिया गया। इस अवसर पर प्रो.ज्योति जैन ने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन के साथ-साथ जैन धरोहरों को डॉक्यूमेंटेशन करने की बात कही। धन्यवाद ज्ञापन निशित जैन ने किया। संचालन नीलांजना जैन ने किया।</p>
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		<title>जैन तीर्थ धर्म स्थल सोनागिर से साढ़े 10 किलो चांदी की प्रतिमा चुराई : दान पेटी से हजारों की नकदी उड़ा ले गए चोर </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 06:24:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्ध क्षेत्र सोनागिर स्थित भगवान चंद्रप्रभु के मुख्य 57 नंबर मंदिर से अज्ञात चोरों ने करीब साढ़े 10 किलो वजनी चांदी की प्रतिमा चोरी कर ली। चोरों ने मंदिर की दान पेटी भी तोड़कर उसमें रखी नकदी पार कर दी। दतिया से मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; दतिया। सिद्ध क्षेत्र सोनागिर स्थित भगवान चंद्रप्रभु [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सिद्ध क्षेत्र सोनागिर स्थित भगवान चंद्रप्रभु के मुख्य 57 नंबर मंदिर से अज्ञात चोरों ने करीब साढ़े 10 किलो वजनी चांदी की प्रतिमा चोरी कर ली। चोरों ने मंदिर की दान पेटी भी तोड़कर उसमें रखी नकदी पार कर दी। <span style="color: #ff0000">दतिया से मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दतिया।</strong> सिद्ध क्षेत्र सोनागिर स्थित भगवान चंद्रप्रभु के मुख्य 57 नंबर मंदिर से अज्ञात चोरों ने करीब साढ़े 10 किलो वजनी चांदी की प्रतिमा चोरी कर ली। चोरों ने मंदिर की दान पेटी भी तोड़कर उसमें रखी नकदी पार कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मंदिर पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है और इसके ठीक सामने पुलिस चौकी मौजूद थी। चोरी के समय चौकी पर तैनात चार में से तीन गार्ड छुट्टी पर थे जबकि, चौथा गार्ड सो रहा था। इसके बावजूद चोरों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी चालू नहीं थे, जिससे पुलिस को प्रारंभिक साक्ष्य जुटाने में कठिनाई हो रही है। पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि इस चोरी में मंदिर या तीर्थ क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों की संलिप्तता हो सकती है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी वर्ष 2023 में भी चोरों ने इसी मंदिर की दान पेटी को निशाना बनाया था। लगातार हो रही घटनाओं से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। तीर्थ क्षेत्र के मंत्री बालचंद्र जैन ने घटना पर नाराजगी जताते हुए चौकी पर तैनात कर्मियों की लापरवाही का आरोप लगाया। एसडीओपी विनायक शुक्ला ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों का पता लगाकर खुलासा किया जाएगा। यह मंदिर पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है और इसके ठीक सामने पुलिस चौकी मौजूद थी। चोरी के समय चौकी पर तैनात चार में से तीन गार्ड छुट्टी पर थे जबकि, चौथा गार्ड सो रहा था। इसके बावजूद चोरों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी चालू नहीं थे।</p>
<p>जिससे पुलिस को प्रारंभिक साक्ष्य जुटाने में कठिनाई हो रही है। पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि इस चोरी में मंदिर या तीर्थ क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों की संलिप्तता हो सकती है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2023 में भी चोरों ने इसी मंदिर की दान पेटी को निशाना बनाया था। लगातार हो रही घटनाओं से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। तीर्थ क्षेत्र के मंत्री बालचंद्र जैन ने घटना पर नाराजगी जताते हुए चौकी पर तैनात कर्मियों की लापरवाही का आरोप लगाया। एसडीओपी विनायक शुक्ला ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों का पता लगाकर खुलासा किया जाएगा। एक अन्य जानकारी के अनुसार 3 किलो का सिंहासन भी चोरी कर ले गए। घटना स्थल पर चौकीदारी की जिम्मेदारी वाले चार में से तीन गार्ड छुट्टी पर थे और केवल एक गार्ड मौजूद था। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंच गई और आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।</p>
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		<title>जैन धर्म समन्वय है, परंतु विलय नहीं : अल्पसंख्यक दर्ज़े पर उठते प्रश्न और जैन समाज की स्वतंत्र पहचान </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 06:21:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत की सांस्कृतिक परंपरा का सबसे बड़ा गुण उसकी विविधता और सहअस्तित्व की भावना है। यहाँ अनेक धार्मिक धाराएँ, संप्रदाय और दार्शनिक परंपराएँ हजारों वर्षों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। इसी बहुलतावादी परंपरा ने भारतीय समाज को एक अनोखी पहचान दी है। आज पढ़िए, राष्ट्र गौरव राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जैन प्रतिनिधि डॉ. इन्दु जैन का यह आलेख&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारत की सांस्कृतिक परंपरा का सबसे बड़ा गुण उसकी विविधता और सहअस्तित्व की भावना है। यहाँ अनेक धार्मिक धाराएँ, संप्रदाय और दार्शनिक परंपराएँ हजारों वर्षों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। इसी बहुलतावादी परंपरा ने भारतीय समाज को एक अनोखी पहचान दी है। <span style="color: #ff0000">आज पढ़िए, राष्ट्र गौरव राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जैन प्रतिनिधि डॉ. इन्दु जैन का यह आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>भारत की सांस्कृतिक परंपरा का सबसे बड़ा गुण उसकी विविधता और सहअस्तित्व की भावना है। यहाँ अनेक धार्मिक धाराएँ, संप्रदाय और दार्शनिक परंपराएँ हजारों वर्षों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। इसी बहुलतावादी परंपरा ने भारतीय समाज को एक अनोखी पहचान दी है। जैन धर्म भी इसी प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक धारा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट परंपरा है। किंतु समय-समय पर यह प्रश्न उठाया जाता रहा है कि जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान क्या वास्तव में अलग है या वह केवल हिंदू धर्म की एक शाखा भर है। हाल के वर्षों में यह बहस फिर से सामने आई है, विशेषकर तब , जब कुछ राजनीतिक व्यक्तित्व जैन समाज के अल्पसंख्यक दर्ज़े पर पुनर्विचार की बात कर रहे हैं और व्यर्थ की बयानबाजी कर रहे हैं ।</p>
<p>यह स्मरण रखना आवश्यक है कि जैन समाज को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्ज़ा वर्ष 2014 में प्रदान किया गया था। यह निर्णय किसी आकस्मिक राजनीतिक घोषणा का परिणाम नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक और वैचारिक बहसों का निष्कर्ष था। जैन समुदाय की जनसंख्या भारत की कुल आबादी का लगभग 0.4 प्रतिशत है, जो कि देश के अनेक अन्य समुदायों की तुलना में अत्यंत कम है। इस दृष्टि से जैन समाज वस्तुतः एक अल्पसंख्यक समुदाय है। अतः यह निर्णय किसी विशेष सुविधा देने का नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक विसंगति को सुधारने का प्रयास था।</p>
<p>जब यह निर्णय घोषित हुआ, तब समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। जैन समाज में प्रसन्नता का वातावरण था, क्योंकि लंबे समय से चली आ रही एक मांग पूरी हुई थी। दूसरी ओर कुछ लोगों ने आशंका व्यक्त की, कि इससे समाज में विभाजन की भावना उत्पन्न होगी। कुछ लोगों ने यह भी प्रश्न उठाया कि जैन तो हिंदू समाज का ही हिस्सा हैं, फिर उन्हें अलग अल्पसंख्यक दर्ज़ा देने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?</p>
<p>दरअसल इन प्रश्नों के पीछे एक मूलभूत भ्रम छिपा हुआ है—अल्पसंख्यक शब्द का अर्थ क्या है ? भारत में “अल्पसंख्यक” का अर्थ किसी धर्म से अलगाव या राष्ट्र से दूरी नहीं है। बौद्ध, सिख, ईसाई और पारसी समुदाय भी भारत में अल्पसंख्यक हैं, लेकिन इससे उनकी भारतीयता या सांस्कृतिक पहचान पर कोई आंच नहीं आती। उसी प्रकार जैन समाज का अल्पसंख्यक दर्ज़ा भी केवल यह स्वीकार करता है कि उसकी अपनी स्वतंत्र धार्मिक परंपरा और पहचान है।</p>
<p>जैन धर्म की विशेषता उसके गहरे और विशिष्ट दर्शन में निहित है। अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और आत्मशुद्धि की साधना उसके मूल स्तंभ हैं। चौबीस तीर्थंकरों की परंपरा, जैन आगम साहित्य, साधु-संघ की कठोर अनुशासन व्यवस्था और मोक्षमार्ग की विशिष्ट अवधारणा जैन धर्म को भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में एक अलग स्थान प्रदान करती है। यह केवल एक सांस्कृतिक धारा नहीं बल्कि एक पूर्ण विकसित धार्मिक और दार्शनिक परंपरा है।</p>
<p>निस्संदेह जैन धर्म और हिंदू समाज के बीच सांस्कृतिक निकटता रही है। अनेक सामाजिक परंपराएँ, त्योहार और जीवन-मूल्य दोनों समुदायों में समान दिखाई देते हैं। किंतु सांस्कृतिक समानता का अर्थ धार्मिक विलय नहीं होता। भारत की सभ्यता का स्वभाव ही ऐसा रहा है कि यहाँ विभिन्न धार्मिक धाराएँ एक-दूसरे के साथ संवाद करती रही हैं और एक-दूसरे से प्रेरणा भी लेती रही हैं।</p>
<p>वास्तव में “हिंदू” शब्द कई बार एक व्यापक सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक होता है, जिसमें भारत में उत्पन्न अनेक धार्मिक परंपराएँ सम्मिलित हैं। इस दृष्टि से जैन, बौद्ध और सिख परंपराएँ भी भारतीय संस्कृति की धारा से जुड़ी हुई हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उनकी स्वतंत्र धार्मिक पहचान समाप्त हो जाती है या उन्हें किसी एक धर्म की शाखा मान लिया जाए।</p>
<p>आज जो लोग यह कहते हैं कि जैन धर्म को अलग अल्पसंख्यक दर्ज़ा देने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें यह भी समझना चाहिए कि अल्पसंख्यक दर्ज़ा केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं है। भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका मुख्य उद्देश्य उनकी भाषा, संस्कृति और शिक्षण संस्थाओं का संरक्षण करना है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि छोटे समुदाय भी अपनी परंपराओं और धरोहरों को सुरक्षित रख सकें।</p>
<p>कभी-कभी यह तर्क भी दिया जाता है कि जैन समाज आर्थिक रूप से समृद्ध है, इसलिए उसे किसी संरक्षण की आवश्यकता नहीं है। यह भी एक सामान्यीकृत धारणा है। समाज का एक छोटा हिस्सा भले ही आर्थिक रूप से संपन्न हो, किंतु पूरे समुदाय को उसी कसौटी पर नहीं आँका जा सकता। इसके अतिरिक्त किसी समुदाय की आर्थिक स्थिति उसके धार्मिक अधिकारों का आधार नहीं होती।</p>
<p>जैन समाज की पहचान उसके नैतिक मूल्यों से बनती है। अहिंसा, संयम, सादगी और शिक्षा के प्रति गहरा आग्रह जैन जीवन का मूल आधार है। यही कारण है कि जैन समाज ने व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। लेकिन इन उपलब्धियों के साथ एक जिम्मेदारी भी जुड़ी है—अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति सजग रहना।</p>
<p>यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझने की आवश्यकता है—समन्वय और विलय में मूलभूत अंतर होता है। जैन धर्म ने सदैव समन्वय की भावना को अपनाया है। अनेकांतवाद का सिद्धांत ही यह सिखाता है कि सत्य को अनेक दृष्टियों से समझा जा सकता है। इसलिए जैन समाज ने कभी किसी अन्य धर्म या संस्कृति से संघर्ष का मार्ग नहीं अपनाया।</p>
<p>परंतु समन्वय का अर्थ अपनी स्वतंत्र पहचान को समाप्त कर देना नहीं है। यदि किसी समुदाय की विशिष्ट धार्मिक पहचान ही धीरे-धीरे विलुप्त होने लगे, तो उसकी परंपराएँ और दार्शनिक विरासत भी कमजोर पड़ सकती हैं।</p>
<p>भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित है। यहाँ अनेक धार्मिक परंपराएँ मिलकर एक विशाल सांस्कृतिक वृक्ष का निर्माण करती हैं। इस वृक्ष की प्रत्येक शाखा का अपना महत्व है। यदि किसी शाखा को यह कहकर समाप्त कर दिया जाए कि वह उसी वृक्ष का हिस्सा है, तो इससे उस वृक्ष की समृद्धि ही घटेगी।</p>
<p>अतः आवश्यकता इस बात की है कि भारतीय समाज विविधता के इस मूल सिद्धांत को समझे। जैन धर्म भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग अवश्य है, किंतु वह अपनी स्वतंत्र धार्मिक पहचान और दर्शन के साथ अस्तित्व में है। इस स्वतंत्रता का सम्मान करना ही भारतीय लोकतंत्र और सांस्कृतिक परंपरा की सच्ची भावना है।</p>
<p>समन्वय भारतीयता की शक्ति है, लेकिन विलय उसकी कमजोरी बन सकता है। इसलिए जैन समाज के लिए भी और व्यापक भारतीय समाज के लिए भी यही उचित होगा कि सहयोग, सम्मान और संवाद की भावना के साथ प्रत्येक धार्मिक परंपरा की स्वतंत्र पहचान को सुरक्षित रखा जाए। यही भारत की बहुलतावादी आत्मा का वास्तविक सम्मान होगा।</p>
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		<title>डॉ.संजीव सराफ को जिनवाणी गौरव अवार्ड से हुए अलंकृत : राष्ट्रीय जैन सम्मेलन एवं अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के 50वें स्वर्ण जयंती समारोह हुआ </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 06:19:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय जैन सम्मेलन एवं अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के 50वें स्वर्ण जयंती समारोह एवं अवार्ड समर्पण के अवसर पर सागर यूनिवर्सिटी के पू्र्व छात्र, पूर्व डिप्टी लाइब्रेरियन और वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पदस्थ डॉ. संजीव सराफ को जिनवाणी की सेवा में समर्पित योगदान के कारण जिनवाणी गौरव अवार्ड से सम्मानित किया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्रीय जैन सम्मेलन एवं अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के 50वें स्वर्ण जयंती समारोह एवं अवार्ड समर्पण के अवसर पर सागर यूनिवर्सिटी के पू्र्व छात्र, पूर्व डिप्टी लाइब्रेरियन और वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पदस्थ डॉ. संजीव सराफ को जिनवाणी की सेवा में समर्पित योगदान के कारण जिनवाणी गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या (सागर)।</strong> 500 से ज्यादा ग्रंथों की रचिता, जैन धर्म की 92 वर्ष की गणिनि प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के मंगल सानिध्य में तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत महासंघ द्वारा बड़ी मूर्ति जैन मंदिर अयोध्या में आयोजित राष्ट्रीय जैन सम्मेलन एवं अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के 50वें स्वर्ण जयंती समारोह एवं अवार्ड समर्पण के अवसर पर सागर यूनिवर्सिटी के पू्र्व छात्र, पूर्व डिप्टी लाइब्रेरियन और वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पदस्थ डॉ. संजीव सराफ को जिनवाणी की सेवा में समर्पित योगदान के कारण जिनवाणी गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। अवार्ड में इक्कीस हजार की नगद राशि, शाल, श्रीफल, ग्रन्थ, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।</p>
<p>इस समारोह में शास्वत तीर्थ अयोध्या की श्री दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के पीठाधीश स्वस्ति श्री रविंद्रकीर्ति स्वामी जी, न्यायमूर्ति श्रीमती विमला जी जैन भोपाल , सुरेश जैन आईएएस भोपाल, आईआईटी रुड़की के प्रो. अशोक जैन, राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान पटना के डायरेक्टर प्रो. पी. के. जैन, इंदौर यूनिवर्सिटी के डॉ. अनुपम जैन, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. आशाराम त्रिपाठी एवं प्रो. आनंद वर्धन शर्मा, उत्तर प्रदेश की संस्कृति मंत्रालय के जैन विद्या शोध संस्थान के उप अध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन, इंदौर यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रो. रेणु जैन, राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. राजीव जैन, महासंघ महामंत्री विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, हसमुख गांधी जैन, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉ. संजय जैन सहित अनेक गणमान्य महानुभावों की उपस्थिति रही। डॉ. संजीव सराफ को इस महत्वपूर्ण अवार्ड से सम्मानित होने पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के प्रचार प्रमुख एवं जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के मंत्री व द्रोणगिरि सिद्धक्षेत्र के उपाध्यक्ष राजेश जैन रागी, द्रोणगिरि सिद्धक्षेत्र के ट्रस्ट मंत्री सुनील घुवारा, प्रबंध मंत्री सनत कुमार कुटोरा, प्राचार्य सुमतिप्रकाश सहित अनेक गणमान्य महानुभावों ने बधाई शुभकामनाएं प्रेषित की है।</p>
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		<title>सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में सिद्धों की आराधना : रविवार को128 अर्घ्य चढ़ाए गए, श्रद्धालु भक्तों ने किया बड़ी संख्या में अभिषेक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 06:16:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से बड़े बाबा के आंगन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन चल रहा है। कुंडलपुर दमोह से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से बड़े बाबा के आंगन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन चल रहा है। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर दमोह से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से बड़े बाबा के आंगन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन चल रहा है। विधानाचार्य संजय भैया मुरैना, अरुण भैया कटंगी के निर्देशन में ब्र. सचिन भैया ब्र. सौरभ भैया पूर्णायु जबलपुर के सानिध्य में संगीतकार सुनील जैन कोटा के संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच विधान के चौथे दिन 128 अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी चंद्रकुमार विजयकुमार संचित जैन मुक्ता ड्रेसेस परिवार चिरमिरी छत्तीसगढ़, सौधर्मेंद्र चंद्रकुमार सविता जैन, ध्वजारोहण कर्ता विजय जैन तिथि वेदिका सहित विधान में सम्मिलित सभी श्रद्धालु भक्त अत्यंत भक्ति पूर्वक नृत्य करते हुए प्रत्येक अर्घ्य समर्पित कर रहे हैं। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि इस अवसर पर पूज्य बड़े बाबा का प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश आदि करने का सौभाग्य मेवा देवी, चंद्रप्रकाश, महेंद्र जयकुमार जैन परिवार कोटा, सम्यक जैन कोमलचंद संदीप जैन सागर, कमलेश राहुल रश्मि चौधरी मेडिकल परिवार ललितपुर, संजय अक्षय मानिक जैन शाहदरा दिल्ली, आशीष सौरभ संजय जैन एटा, अमित मनुज श्रीपाल जैन गन्नौर गुप्तिधाम ,ऋषभ नाथूलाल जैन जबलपुर, एकांत जैन ममता डॉ.स्वाति निखिल कक्का जी परिवार अशोकनगर, अमित कुमार जैन सागर, डालचंद आशीष अक्षय समय जैन शाहपुरा, राजकुमार चक्रेश जैन मोदी गुरसराय, अंश विक्की क्रांति नेहा मुलायमचंद जैन परिवार भोपाल, चक्रेश अभिषेक अंकित जैन पिपरई, शुभम अमित आकाश जैन शामली सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया। सायंकाल पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती एवं भक्तामर दीप अर्चना में भक्त भक्ति में झूम उठे।</p>
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		<title>मुनि धर्म की कठिन साधना श्रावक धर्म की सरल राह है मोक्ष मार्ग : मुनि श्री प्रमाणसागरजी ने झारखंड में दी मंगल देशना </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_rigorous_spiritual_discipline_of_the_ascetic_is_the_simple_path_of_the_householder_the_very_path_to_liberation/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Cash Launch]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
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					<description><![CDATA[झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;  रांची। झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। <span style="color: #ff0000">रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong> रांची।</strong> झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। पांचवें दिवस केवल ज्ञान कल्याणक के अवसर पर समवसरण में गणधर पीठ से प्रवचन देते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि आत्मकल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को मुनि धर्म का पालन करने का प्रयास करना चाहिए, जो व्यक्ति मुनि धर्म का पालन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए जैन धर्म में श्रावक धर्म की सुव्यवस्थित परंपरा का विधान किया गया है। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में बताया कि जैन मुनि 28 मूलगुणों का पालन करते हुए तेरह प्रकार के चारित्र को अंगीकार करते हैं। ये अट्ठाईस मूलगुण ही मुनिव्रत की आधारशिला हैं, जिनके बल पर मुनि कठोर साधना में स्थिर रहकर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं तथा अपने चारित्र की दृढ़ता बनाए रखते हैं,उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए मुनि व्रत धारण करना संभव नहीं है, इसलिए गृहस्थों के लिए श्रावक धर्म का मार्ग बताया गया है। श्रावक धर्म को तीन प्रमुख श्रेणियों—पाक्षिक, नैष्ठिक और साधक—में विभाजित किया गया है। पाक्षिक श्रावक वे होते हैं जो जिनमत में श्रद्धा रखते हुए कुलाचार का पालन करते हैं, देव-गुरु-धर्म की उपासना करते हैं तथा रात्रि भोजन का त्याग करते हैं। इसके बाद नैष्ठिक श्रावक अधिक निष्ठा के साथ धर्म का पालन करते हैं, जिनके जीवन में ग्यारह प्रतिमाओं का क्रमिक विकास होता है, जो आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ियाँ मानी जाती हैं। मुनि श्री ने कहा कि साधक श्रावक उच्च आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचकर संसार, शरीर और भोगों से विरक्त हो जाते हैं तथा पंच गुरु की शरण स्वीकार करते हैं। वे क्रमशः व्रतों और गुणों में वृद्धि करते हुए अंततः संलेखना (समाधि मरण) के माध्यम से शांतिपूर्वक देह का त्याग करते हैं,मुनि श्री ने कहा कि श्रावक अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार पाक्षिक से नैष्ठिक और आगे साधक अवस्था की ओर अग्रसर हो सकता है,जीवन भर कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए अंत में संलेखना द्वारा देह का परित्याग करना ही जीवन का वास्तविक सार है।</p>
<p>जैन धर्म की यह महान परंपरा स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर धर्म का पालन करते हुए आत्मशुद्धि के मार्ग पर अग्रसर होकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने किया उत्कृष्ट कैशलोंच</strong></p>
<p>आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी के शिष्य एवं मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के प्रभावक संघस्थ तपस्वी मुनि श्री संधान सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के चतुर्थ दिवस तप कल्याणक के अवसर पर बिरसा मुंडा फन पार्क के प्राकृतिक वातावरण में अद्वितीय तप का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सिर, दाढ़ी और मूंछों के केशों को स्वयं अपने हाथों से राख के सहारे उखाड़कर उत्कृष्ट कैशलोच किया। मुनिसंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रत्येक दो माह में इस प्रकार का कठोर कैशलोच करते हैं। इस अद्भुत तपस्या को देखने के लिए पंचकल्याणक स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्यस्त कार्यक्रम और भीड़भाड़ के बावजूद मुनि श्री प्रतिदिन अपर बाजार स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं रातू रोड स्थित बासुपूज्य जिनालय के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जो उनकी अटूट साधना और अनुशासन का प्रतीक है।</p>
<p><strong>कैवल्यज्ञान कल्याणक पर गूंजा शंखनाद </strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिवस कैवल्य ज्ञान कल्याणक की भव्य पूजा हुई। प्रातःकाल मुनि वृषभ सागर महाराज की आहार चर्या के पश्चात दिन में भगवान के कैवल्यज्ञान से संबंधित समस्त क्रियाएं मुनिसंघ द्वारा शंखध्वनि के साथ संपन्न कराई गईं। समवसरण सभा में गणधर परमेष्ठी के रूप में मुनि श्री प्रमाणसागर जी, मुनि श्री संधान सागर जी महाराज एवं भावी मुनि श्री समादर सागर जी महाराज सहित ब्रह्मचर्य धारण करने वाले साधकों एवं प्रतिष्ठाचार्यों ने मुनि श्री से धार्मिक शंकाओं को रखा जिसे मुनि श्री ने तत्क्षण गूढ़ प्रश्नों के उत्तर देकर सभी को संतुष्ट किया।</p>
<p><strong>6 अप्रैल को मोक्ष कल्याणक, फिर सम्मेदशिखर जी की ओर मंगलविहार</strong></p>
<p>महामहोत्सव के अंतिम दिवस 6 अप्रैल को प्रातः बेला में भगवान के मोक्ष कल्याणक की पूजा संपन्न होगी। इसके उपरांत मुनिसंघ का मंगलविहार पावन तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी की ओर प्रारंभ होगा। इस मंगलविहार में शामिल होने हेतु रांची ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।</p>
<p><strong>सम्मेदशिखर में ऐतिहासिक जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव</strong></p>
<p>मुनिसंघ 15 अप्रैल को श्री सम्मेदशिखर जी में मंगल प्रवेश करेगा।16 एवं 17 अप्रैल को विभिन्न धार्मिक विधान एवं मांगलिक कार्यक्रम होंगे जबकि, 18 अप्रैल को गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज द्वारा पहली बार सम्मेदशिखर तीर्थराज पर जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य अवसर पर झारखण्ड़,मध्यप्रदेश, पश्चिमबंगाल,महाराष्ट्र, गुजरात एवं राजस्थान सहित पूरे देश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था</strong></p>
<p>गुणायतन परिवार द्वारा 17, 18 और 19 अप्रैल को तीन दिवसीय विशेष व्यवस्था की गई है। जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं शुद्ध भोजन की उत्तम व्यवस्था रहेगी।गुणायतन परिवार के पदाधिकारियों ने देशभर के श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दीक्षा महोत्सव के साक्षी बनने हेतु अवश्य पधारें एवं पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
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