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	<title>सहारनपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>सहारनपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जिनागमपंथी श्रावक संघ का 20वां सामूहिक जिनाभिषेक : श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में आचार्य श्री नयनसागरजी के सानिध्य में हुआ कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 11:48:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के मंगल निर्देशन में रविवार को जिनागमपंथी श्रावक संघ सहारनपुर का 20 वां साप्ताहिक सामूहिक जिनाभिषेक श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर वीर नगर जैन बाग में आचार्य श्री नयनसागरजी महाराज के मंगल सान्निध्य में हुआ। सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; सहारनपुर। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के मंगल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के मंगल निर्देशन में रविवार को जिनागमपंथी श्रावक संघ सहारनपुर का 20 वां साप्ताहिक सामूहिक जिनाभिषेक श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर वीर नगर जैन बाग में आचार्य श्री नयनसागरजी महाराज के मंगल सान्निध्य में हुआ। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के मंगल निर्देशन में रविवार को जिनागमपंथी श्रावक संघ सहारनपुर का 20 वां साप्ताहिक सामूहिक जिनाभिषेक श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर वीर नगर जैन बाग में आचार्य श्री नयनसागरजी महाराज के मंगल सान्निध्य में हुआ। प्रथम क्रम में रविवार को पधारे सभी श्रावक भाइयों का आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया गया। इन बंधुओं ने आचार्य श्री के सान्निध्य में अभिषेक एवं शांतिधारा कर धर्म लाभ प्राप्त किया। आचार्य श्री के मंगल सान्निध्य एवं आशीर्वाद स्वरूप सभी उपस्थित श्रावकों ने आनंदमय रूप से अभिषेक एवं शांतिधारा की। आचार्य श्री के सम्मुख गुरु वंदना प्रस्तुतकी। अग्रिम क्रम में सभी जिनागम पंथी श्रावक संघ सहारनपुर परिवार की ओर से अजय जैन, दीपक जैन, नीरज जैन, अतुल जैन, नितिन जैन, पंकज जैन, सुशील जैन एवं सभी मंदिर समिति का आभार व्यक्त किया गया। इन्होंने सभी व्यवस्था का ध्यान रखते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण कराने में योगदान दिया।</p>
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		<title>भक्ति वह ताकत है जो भगवान को भी अपनी ओर खींच लेती है: शामली जैन समाज ने की भावना, विमर्श उत्सव हमारी नगरी में मनाया जाए  </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 14:11:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिनागम पंथ जयवंत हो और आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो गया, जब धर्मनगरी शामली से पधारे दो शतक (200) जिनागमपंथी गुरु भक्तों ने सहारनपुर के जैन बाग प्रांगण में पदार्पण किया। सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की खबर&#8230; सहारनपुर। जिनागम पंथ जयवंत हो और आचार्य श्री विमर्शसागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिनागम पंथ जयवंत हो और आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो गया, जब धर्मनगरी शामली से पधारे दो शतक (200) जिनागमपंथी गुरु भक्तों ने सहारनपुर के जैन बाग प्रांगण में पदार्पण किया। <span style="color: #ff0000">सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर</strong>। जिनागम पंथ जयवंत हो और आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो गया, जब धर्मनगरी शामली से पधारे दो शतक (200) जिनागमपंथी गुरु भक्तों ने सहारनपुर के जैन बाग प्रांगण में पदार्पण किया। प्रत्येक सिर पर थी जिनागम पंथ की टोपी और हर हाथ में था जिनधर्म का ध्वज अथवा आचा गुरुवर का चित्र। परिपूर्ण हर्ष-उत्साह-उमंग के साथ अपने नगर शामली में आने का भावभीना निवेदन किया। जी हाँ, शामली में चल रहे आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के दो शिष्य मुनि श्री विव्रत सागर जी, विश्वार्थसागर जी मुनिराज के मंगल मय चातुर्मास ने शामली जैन समाज की धर्म पिपासा को और भी वृद्धिगत कर दिया है। श्रद्धाल भक्तगण आशान्वित हैं कि जब आचार्य संघ के दो मुनि रत्नों ने नगर में धर्म की बहार ला दी है तो जब स्वयं आचार्य भगवंत अपने चतुर्विध संघ सहित शामली पधारेंगे तब तो मानो साक्षात भगवान का समवशरण ही हमारे नगर में लग जाएगा। 5 अक्टूबर, रविवार की प्रातः बेला में आचार्य श्री विमर्शसागर महामुनिराज की धर्मसभा में शामली जैन समाज के अध्यक्ष आलोक जैन के साथ सभी कार्यकारिणी ने श्रीफल समर्पित करते हुए आग्रह किया कि हे गुरुवर ! चातुर्मास उपरांत आप संघ सहित विहार करते हुए शामली नगर पधारें। हम सभी राष्ट्रीय स्तर पर आपका अवतरण दिवस मनाना चाहते हैं।</p>
<p>आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि आज जब शामली वालों ने दीप प्रज्वलन किया तब मुझे तो हर भक्त प्रज्वलित दीप की तरह दिखाई दे रहा था। वास्तव में जहां इतने सारे प्रज्वलित दीप हों। वहां बुझा हुआ दीप भी प्रज्वलित हो जाया करता है। हम निग्रन्य मुनिराजों को यदि अपनी ओर कोई खींच सकता तो वह है एकमात्र भक्ति। भक्ति से तो तीर्थंकर भगवान भी समवशरण सहित खिंचे चले आते हैं। आपने बड़ागांव में अपनी भक्ति दिखाई थी उसका आपको फल दो मुनिराजों के चातुर्मास के रूप में मिला। आप अपना कर्तव्य भक्ति करते रहिए, समय आने पर आपको और भी लाभ प्राप्त होता रहेगा।</p>
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		<title>सहारनपुर में 30 पीछीधारी संतों का दुर्लभ सानिध्य : आपका अभिमान बताता है, आप गुणवान नहीं हैं – आचार्य विमर्शसागर जी </title>
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		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 12:28:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सहारनपुर में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य यदि अपने छोटे-से गुणों पर अभिमान करता है तो वह वास्तविक गुणवान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा गुणवान वही है, जो जिनेन्द्र भगवान की भक्ति और शरण में है। पढ़िए सोनल जैन की ख़ास रिपोर्ट… उत्तरप्रदेश के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सहारनपुर में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य यदि अपने छोटे-से गुणों पर अभिमान करता है तो वह वास्तविक गुणवान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा गुणवान वही है, जो जिनेन्द्र भगवान की भक्ति और शरण में है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सोनल जैन की ख़ास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में इस वर्ष का विशेष संयोग बना है, जब संध शिरोमणि भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज अपने 30 पीछीधारी संतों के साथ 30वें चातुर्मास हेतु धर्मप्रभावना कर रहे हैं। सुबह 8 बजे आयोजित “श्री भक्तामर शिक्षण शिविर” में आचार्यश्री ने भगवान की भक्ति के महत्व का सरल और गहन बोध कराया। वीरोदय तीर्थ मंडपम् में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि जब मनुष्य पूर्व पुण्योदय से कुछ उपलब्धियाँ प्राप्त करता है और समाज में थोड़ी-सी प्रतिष्ठा मिलती है, तब वह स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझने लगता है। यही अहंकार उसे पतन की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा – “अपने थोड़े से गुणों का अभिमान करने वाला कभी वास्तविक गुणवान नहीं हो सकता।”</p>
<p><strong>जिनेन्द्र भगवान अनंत गुणों के धारी हैं</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जिनेन्द्र भगवान अनंत गुणों के धारी हैं, जिनकी भक्ति करने वाले स्वयं प्रभु स्वरूप हो जाते हैं। “जीवन है पानी की बूंद” महाकाव्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने नवीन छंद सुनाया – “प्रभु गुणखान कहाते हैं, प्रभु गुणवान कहाते हैं। जो प्रभु भक्ति करते हैं, स्वयं प्रभु बन जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसार में प्रत्येक वस्तु की उपमा दी जा सकती है, किन्तु जिनेन्द्र भगवान उपमातीत और अनुपमेय हैं। वे केवल अपने समान ही हैं, उनसे अधिक गुणवान कोई नहीं है। इस अवसर पर नगरवासियों ने संत संघ के इस दुर्लभ सानिध्य को अपना सौभाग्य माना और धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भक्ति का मूल्य नहीं आंका जा सकता भक्ति अमूल्य है : आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने भक्तामर स्तोत्र का सार बताया  </title>
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		<pubDate>Sun, 17 Aug 2025 16:57:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने कहा कि भीड़ भरे बाजार में एक हीरा रखा हो और आपको उसकी सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया हो, वहाँ आप पूरा ध्यान हीरे पर ही केन्द्रित रखते हो। सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; सहारनपुर। आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने कहा कि भीड़ भरे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने कहा कि भीड़ भरे बाजार में एक हीरा रखा हो और आपको उसकी सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया हो, वहाँ आप पूरा ध्यान हीरे पर ही केन्द्रित रखते हो। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर</strong>। आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने कहा कि भीड़ भरे बाजार में एक हीरा रखा हो और आपको उसकी सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया हो, वहाँ आप पूरा ध्यान हीरे पर ही केन्द्रित रखते हो। चूंकि हीरा बहुमूल्य है किन्तु जो मूल्यों से भी परे अमूल्य है वह एकमात्र जिनेन्द्र भगवान और उनकी भक्ति। जिनेन्द्र भगवान और उनकी भक्ति को तीन लोक की संपदा देकर भी नहीं खरीदा जा सकता। उन्हें एक मात्र अपनी अंतरंग श्रद्धा से ही प्राप्त किया जा सकता है। एक श्रद्धावान भक्त भगवान के चरणों उसी अनर्घ पद अर्थात् अमूल्य पद को प्राप्त करने की भावना से आता है। आचार्य भगवन् मानतुंग स्वामी भगवान के दर्शन किस प्रकार से करना चाहिए। इसकी विधि श्री भक्तामर स्तोत्र में बताते हैं कि हे भगवन् ! आप अपलक देखने योग्य हो।</p>
<p><strong>दर्शन करने जाओ तो मात्र भगवान को ही देखना</strong></p>
<p>जब भी मंदिर में भगवान के दर्शन करने जाओ तो मात्र भगवान को ही देखना, भगवान को ही देखते रहना, भगवान के सिवाय अन्यत्र अपनी दृष्टि मत डालना। आचार्य भगवन् स्तुति करते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार क्षीर समुद्र के मीठे जल को पीने के बाद ऐसा कौन बुद्धिमान मनुष्य होगा, जो लवण समुद्र के खारे जल को पीने की चाह करेगा। अर्थात् कोई भी नहीं। ठीक उसी प्रकार अपलक देखने योग्य आपके वीतरागमय रूप को देखकर ऐसा कौन बुद्धिमान मनुष्य होगा जो अन्य रूप को देखने की इच्छा करेगा, अर्थात् कोई नहीं।</p>
<p><strong>अंदर बैठे भगवान को निहार लेना</strong></p>
<p>बंधुओ! मंदिर में आकर कभी सीसीटीवी कैमरे की भाँति मात्र दूसरों को ही मत देखते रहना । सीसीटीवी कैमरा मात्र दूसरों की ही रील बनाता है, अपनी ओर नहीं देखता। मंदिर में आकर अपनी दृष्टि से भगवान को निहार लेना, पुनः भगवान को निहारने के बाद उसी दृष्टि से अपने अंदर बैठे भगवान को निहार लेना, आपका मंदिर आना सार्थक हो जाएगा</p>
<p><strong>वह</strong> उत्पाद- व्यय-ध्रौव्य स्वरूप है</p>
<p>ज्ञानी जीव हर स्थान पर परमात्मा ही नजर आते हैं। जिनेन्द्र भगवान ने संपूर्ण लोक में 6 द्रव्य बतलाए हैं। द्रव्य का लक्षण सत् है। जो सत् अर्थात् मौजूदगी है। वह उत्पाद- व्यय-ध्रौव्य स्वरूप है। जब ज्ञानी जीवों को जगत् के प्रत्येक पदार्थ में यह उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य मय स्वरूप दिखाई देता है, तब ज्ञानी जीव विचार करते हैं कि &#8220;अहो ! यही स्वरूप तो द्रव्य का जिनेन्द्र भगवान ने बतलाया है। सर्वत्र जिनेन्द्र भगवान की ही आज्ञा अर्थात् उनके द्वारा बताया हुआ स्वरूप दिखाई दे रहा है यानि जहाँ-जहाँ जिनेन्द्र भगवान की आज्ञा है वहीं-वहीं जिनेन्द्र भगवान मुझे दिखाई देते हैं।</p>
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		<title>विनय का सुगंधित गुलदस्ता है श्री भक्तामर स्तोत्र : आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने समझाई भक्तामर की महिमा  </title>
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		<pubDate>Sat, 26 Jul 2025 15:27:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विमर्शसागर जी का चातुर्मास सहारनपुर उप्र में चल रहा है। यहां पर नित भक्ति के साथ पूजन-अर्चन और धर्म आराधना का दौर जारी है। नित प्रवचन में आचार्यश्री की मंगल देशना से धर्म की प्रभावना बढ़ रही है। धर्मानुरागी बंधु इसका पुण्यार्जन कर रहे हैं। सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विमर्शसागर जी का चातुर्मास सहारनपुर उप्र में चल रहा है। यहां पर नित भक्ति के साथ पूजन-अर्चन और धर्म आराधना का दौर जारी है। नित प्रवचन में आचार्यश्री की मंगल देशना से धर्म की प्रभावना बढ़ रही है। धर्मानुरागी बंधु इसका पुण्यार्जन कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर (उत्तरप्रदेश)।</strong> आचार्य श्री विमर्शसागर जी का चातुर्मास सहारनपुर उप्र में चल रहा है। यहां पर नित भक्ति के साथ पूजन-अर्चन और धर्म आराधना का दौर जारी है। नित प्रवचन में आचार्यश्री की मंगल देशना से धर्म की प्रभावना बढ़ रही है। धर्मानुरागी बंधु इसका पुण्यार्जन कर रहे हैं। यहां धर्मसभा में आचार्यश्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि मानव मिथ्या अहंकार और अपनी हठधर्मिता के साथ जीवन के सुख को नष्ट कर देता है। अपने अहंकार के जाल में फंसकर सोचता है कि वह ऊंचाइयों को छूकर महान बन रहा है किन्तु, स्मरण रहे अहंकारी पूर्व पुण्योदय से उच्च पद प्राप्त कर भी ले पर, वह कभी महान नहीं हो सकता। उसका जीवन पतन की ओर ही जाता है। इस अहंकार रूपी दुर्गुण को नष्ट करने का एकमात्र उपाय है। विनय जितनी आपके भीतर होगी उतने ही गुणों से आप समृद्ध होंगे। विनय के आते ही जीवन अनेक गुणों से परिपूर्ण हो जाता है। यह जानने के लिए कि आपके जीवन में विनय है या नहीं, देखें कि क्या आपके हृदय में जिनेंद्र भगवान की भक्ति है। भक्ति वही कर सकता है, जो विनयवान हो।</p>
<p><strong>श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से लौकिक और पारमार्थिक फल मिलते हैं</strong></p>
<p>श्री भक्तामर स्तोत्र की महिमा सर्व विदित है यह परम भक्ति का स्तोत्र है। सत्य कहें तो यह भक्तामर स्तोत्र विनय गुण का सुगंधित पुष्पगुच्छ है। आज विश्व भर में इसके अतिशयों से जन मानस लाभान्वित हो रहा है। इस स्तोत्र का प्रत्येक अक्षर चमत्कारी है। हम इस भक्तामर रूपी वृक्ष के फलों का लाभ तो ले रहे हैं पर, हमें यह भी जानना चाहिए कि इसकी रचना कब, कैसे, किसने और क्यों की? सातवीं शताब्दी में राजा भोज के शासन काल में उज्जैनी नगरी में आचार्य श्री मानतुंग स्वामी को 48 तालों में बंद किया गया था। क्रुद्ध राजा ने निर्दाेष आचार्य को कारागार में डाल दिया परंत, आचार्य ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस, समता और जिनेंद्र भगवान की भक्ति नहीं छोड़ी। जेल में ही उन्होंने प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की महा स्तुति की और तत्काल ही 48 ताले स्वयं टूट गए। यह चमत्कार देख राजा आचार्य के चरणों में नतमस्तक हो गया और उसने व प्रजा ने जैन धर्म स्वीकार किया। आचार्य द्वारा रचित यह 48 छंदों की महा स्तुति तब से आज तक श्रद्धा का केंद्र है। इस भक्तामर स्तोत्र का श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से लौकिक और पारमार्थिक फल प्राप्त होते हैं।</p>
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		<title>गुलदस्ता है यह जगत आप क्या चुनते हैं फूल या कांटे: आचार्य श्री विमर्शसागर जी की धर्मसभा में भक्तामर की महिमा पर हो रहा व्याख्यान  </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Jul 2025 15:00:08 +0000</pubDate>
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<p><strong>जीवन में अच्छाइयां बड़ी कठनाई से प्राप्त होती है और बुराइयां मानव के जीवन में हरपल दरवाजा खटखटाती रहती है। बड़ी गजब की बात है कि मानव अपने जीवन में गुण चाहता है, अच्छाइयां चाहता है लेकिन जब भी बुराइयां आपका दरवाजा खटखटाती हैं। यह उद्बोधन आचार्यश्री विमर्शसागर जी महाराज ने सहारनपुर में दिए। <span style="color: #ff0000">सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> नगर में गूंज रही है भक्तामर महिमा। जीवन में अच्छाइयां बड़ी कठनाई से प्राप्त होती है और बुराइयां मानव के जीवन में हरपल दरवाजा खटखटाती रहती है। बड़ी गजब की बात है कि मानव अपने जीवन में गुण चाहता है, अच्छाइयां चाहता है लेकिन जब भी बुराइयां आपका दरवाजा खटखटाती हैं। आप तत्काल अपना दरवाजा खोलकर उन बुराइयों का स्वागत, सत्कार, आवभगत करने लग जाते हो। आपसे आदर-सत्कार पाकर वे बुराइयां आपके जीवन में घर बना लेती हैं। यह मांगलिक उद्‌बोधन सहारनपुर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने जैनबाग में वीरोदय तीर्थ मंडपम के मध्य उपस्थित धर्मसभा में दिया।</p>
<p>आचार्य गुरुवर ने अपने प्रवचन में बतलाया कि यह जगत अच्छाइयों का गुलदस्ता है। आवश्यकता इस बात की है कि आप उन्हें पहचानकर उनका स्वागत करें तो वे अच्छाइयां अवश्य ही आपके जीवन में प्रवेश पाएंगी और यदि आप उन्हें महत्व नहीं देते हैं तो यह जगत् रूपी गुलदस्ता कांटों से भी भरा है। निर्णय आपका है कि आप फूल चुनते हैं या कांटे। आप इस जगत् को जैसा देखना चाहते हैं, आपको यह जगत् का गुलदस्ता वैसा ही दिखाई देगा। आपकी दृष्टि यदि गुणी है अर्थात् गुणों को ही ग्रहण करती है तब आपको जगत् में सब गुणवान ही नजर आएंगे और यदि आपकी दृष्टि छिद्रान्वेषी-दोषग्राही है तब आपको सभी गुणहीन- दोषी नजर आएंगे। निर्णय आपका कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या देखना चाहते हैं?</p>
<p><strong>इसीलिए हमेशा आपका सिक्का भी असली हो </strong></p>
<p>आज मनुष्य खोटा सिक्का चलाकर असली वस्तु प्राप्त करना चाहता है अर्थात् स्वयं तो अशुभ भावों से भरा है और चाहता है कि मेरे जीवन में भी धर्म के फल दिखाई दें, मेरे जीवन कभी-कभी आपका सिक्का में भी सुख-शांति हो, जो संभव नहीं है। तो सच्चा है किन्तु आप किसी फर्जी दुकान पर पहुंच गए जहां असली वस्तु प्राप्त नहीं होती तब भी आपको असली वस्तु की प्राप्ति नहीं हो सकती अर्थात् कभी आपकी श्रद्धा- आपके भाव उत्तम श्रेष्ठ है किन्तु आप वहां पहुंच गए, जहां आपकी श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किया जाता है तब भी आपके जीवन में धर्म के फल दिखाई नहीं दे सकते हैं। इसीलिए हमेशा आपका सिक्का भी असली हो और वस्तु भी असली प्राप्त हो। बन्धुओ ! हमेशा आप अपने भाव उत्तम बनाकर रखें और उत्तम पंच परमेष्ठी की शरण को प्राप्त करें तब अवश्य ही आपका कल्याण होगा।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए उपदेश : सुख-शांति चाहते हो तो दुकान और भक्ति के बीच संतुलन जरूरी है-आचार्य श्री विमर्श सागर  </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 05:49:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आपकी आत्मा अमर है, अनंत गुणों से परिपूर्ण है, परंतु यह पहचान तभी होगी जब आप अपने ही गुणों से परिचय प्राप्त करें।&#8221; — यह सुमंगल वचन गुरुवार को जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने सहारनपुर जैन बाग स्थित श्री 1008 महावीर जिनालय में सिद्धचक्र महामण्डल विधान के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आपकी आत्मा अमर है, अनंत गुणों से परिपूर्ण है, परंतु यह पहचान तभी होगी जब आप अपने ही गुणों से परिचय प्राप्त करें।&#8221; — यह सुमंगल वचन गुरुवार को जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने सहारनपुर जैन बाग स्थित श्री 1008 महावीर जिनालय में सिद्धचक्र महामण्डल विधान के बीच कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> &#8220;आपकी आत्मा अमर है, अनंत गुणों से परिपूर्ण है, परंतु यह पहचान तभी होगी जब आप अपने ही गुणों से परिचय प्राप्त करें।&#8221; — यह सुमंगल वचन गुरुवार को जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने सहारनपुर जैन बाग स्थित श्री 1008 महावीर जिनालय में सिद्धचक्र महामण्डल विधान के बीच कहीं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि &#8220;यदि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना है तो &#8216;पंच परमेष्ठी की दुकान&#8217; और &#8216;अपनी दुकान&#8217; के बीच संतुलन साधना सीखो। सिर्फ भौतिक समृद्धि चाहोगे और प्रभु-गुरु की भक्ति छोड़ दोगे, तो ये समृद्धि भी स्थायी नहीं रहेगी।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>गुरुभक्ति का अनुपम उदाहरण: स्वयं बोलकर कराई आचार्य विरागसागर जी की पूजन</strong></p>
<p>संत विमर्शसागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन की शुरुआत अद्वितीय गुरुभक्ति के उदाहरण से की। उन्होंने स्वयं मंच से बोलकर अपने गुरुदेव आचार्यश्री विरागसागर जी का पूजन कराया और कहा —</p>
<p>&#8220;गुरुभक्ति आत्मा के उत्थान का प्रथम सोपान है। हम अपने अनंत गुणों के परिचय के लिए यदि किसी को सबसे पहले स्मरण करें, तो वह हैं हमारे गुरुवर।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&#8216;सिद्धालय नहीं, मध्यलोक है महापुरुषों की जन्मभूमि&#8217;</p>
<p>मुनिश्री ने मध्यलोक की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए कहा —</p>
<p>&#8220;जिनेंद्र भगवान, अरिहंत, आचार्य, उपाध्याय और साधु — ये सभी केवल मध्यलोक में ही होते हैं। सिद्धालय तो उनका संग्रहालय है, जन्म और तपस्या तो यहीं होती है। जब तक हम इस मध्यलोक की महिमा नहीं समझेंगे, तब तक भक्ति और मोक्ष का द्वार नहीं खुल सकता।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने उदाहरण के रूप में रसगुल्ला और चावल के माध्यम से आत्मज्ञान की क्षमता समझाई —</p>
<p>&#8220;जैसे एक चावल को देख पकने का अनुमान होता है, वैसे ही आत्मा में निहित ज्ञानगुण से समस्त पदार्थों का बोध संभव है। यही आत्मा की अनंत ज्ञानशक्ति का प्रतीक है।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सहारनपुर बनेगा &#8216;छोटा भारत&#8217; — 10 जुलाई को हजारों गुरुभक्तों की आमद</p>
<p>आचार्य श्री ने जानकारी दी कि 10 जुलाई को सहारनपुर में देशभर से हजारों गुरुभक्त सिद्धचक्र महामण्डल विधान में भाग लेने आएंगे। यह आयोजन सहारनपुर को &#8216;छोटा भारत&#8217; के रूप में धर्मभूमि का दर्जा देने वाला होगा।</p>
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		<title>सहारनपुर में होगा आचार्यश्री विमर्श सागर जी महाराज का चातुर्मास: उपसंघ पहुंचेगा शामली चातुर्मास में </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 May 2025 14:54:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रुत पंचमी महापर्व पर अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में विभिन्न नगर-शहरों से धर्मप्राण समाजों ने आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ के चरणों में अपने नगर में चातुर्मास के लिए निवेदन किया। इसमें सहारनपुर, शामली, दिल्ली, नोएडा 5-27, बड़ागांव आदि स्थानों जनता शामिल रही। आचार्यश्री ने सभी भक्तों की अंतस भावना को देखते हुए आगंतुक सभी श्रद्धालुओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रुत पंचमी महापर्व पर अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में विभिन्न नगर-शहरों से धर्मप्राण समाजों ने आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ के चरणों में अपने नगर में चातुर्मास के लिए निवेदन किया। इसमें सहारनपुर, शामली, दिल्ली, नोएडा 5-27, बड़ागांव आदि स्थानों जनता शामिल रही। आचार्यश्री ने सभी भक्तों की अंतस भावना को देखते हुए आगंतुक सभी श्रद्धालुओं को मंगलमय शुभाशीष प्रदान किया। साथ ही सहारनपुर जैन समाज को 99 प्रतिशत आशीर्वाद प्रदान किया। <span style="color: #ff0000">बड़ा गांव से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ागांव।</strong> चातुर्मास काल ज्यों-ज्यों निकट आता जाता है। त्यों-त्यों गुरु भक्तों की उत्कंठा बढ़ती जाती है। प्रत्येक धर्मात्मा श्रावक की यह अंतस भावना रहती है कि निर्ग्रन्य मुनिराजों के चरणों से हमारा नगर, हमारा घर पावन पवित्र हो। इसी श्रृंखला में 31 मई को श्रुत पंचमी महापर्व पर अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में विभिन्न नगर-शहरों से धर्मप्राण समाजों ने आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ के चरणों में अपने नगर में चातुर्मास के लिए निवेदन किया। इसमें सहारनपुर, शामली, दिल्ली, नोएडा 5-27, बड़ागांव आदि स्थानों जनता शामिल रही। आचार्यश्री ने सभी भक्तों की अंतस भावना को देखते हुए आगंतुक सभी श्रद्धालुओं को मंगलमय शुभाशीष प्रदान किया।</p>
<p>साथ ही सहारनपुर जैन समाज को 99 प्रतिशत आशीर्वाद प्रदान किया। आशीर्वाद पाते ही संपूर्ण अतिशय क्षेत्र गुरुवर के जयकारों से गुंजायमान हो गया। तत्काल उपस्थित जनसमुदाय के मध्य सहारनपुर समाज बन्धुओं ने समस्त गुरु भक्तों को आमंत्रित भी कर लिया। वर्ष 2025 का बल भावलिंगी संत बाणु का यह 30 वां चातुर्मास है, जो धर्मनगरी सहारनपुर में होगा। सहारनपुर के साथ शामली समाज को भी उपसंघ का चातुर्मास मिला। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने अपने ससंघ चातुर्मास घोषणा के साथ ही धर्मनगरी शामली जैन समाज को भी अपने मंगल शुभाशीष के रूप में अपने संघ से ही मुनिश्री विव्रतसागर जी का उपसंघ प्रदान किया। संभावित 3 जून को आचार्य श्री ससंघ अतिशय क्षेत्र बड़ागांव से चातुर्मास स्थल की ओर पदविहार प्रारंभ करेंगे। जिसमें विभिन्न नगर, शहर ग्रामों को आचार्य श्री पावन चरण रज प्राप्त होगी।</p>
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		<title>सहारनपुर में श्री नेमि गिरनार धर्म पदयात्रा के पोस्टर का विमोचन:  समस्त समाज से पदयात्रा में शामिल होने का आह्वान </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Feb 2025 10:54:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सहारनपुर में रविवार को धर्म पदयात्रा के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सभी समाजजनों से पदयात्रा में शामिल होने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन और विश्व जैन संगठन के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। पढ़िए सराहनपुर से यह खबर&#8230; सहारनपुर। छठे जैन तीर्थंकर पदमप्रभु भगवान के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सहारनपुर में रविवार को धर्म पदयात्रा के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सभी समाजजनों से पदयात्रा में शामिल होने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन और विश्व जैन संगठन के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सराहनपुर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> छठे जैन तीर्थंकर पदमप्रभु भगवान के मोक्ष कल्याणक के पावन दिवस पर 16 फरवरी को यहां जैन मानस्तंभ जेवी जैन कॉलेज रोड पर आयोजित कार्यक्रम में दिल्ली से 23 मार्च को प्रारंभ होकर गिरनार जी 2 जुलाई को पहुंचने वाली 101 दिवसीय, 1500 किमी लंबी श्री नेमि गिरनार धर्म पद यात्रा के पोस्टर का विमोचन श्रीजी के सानिध्य में किया गया। संपूर्ण समाज से धर्म पदयात्रा में शामिल होने और सहयोग करने के लिए निवेदन किया गया।</p>
<p><strong>विमोचन में यह रहे मौजूद</strong><br />
पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में विश्व जैन संगठन सहारनपुर अध्यक्ष अरिहंत जैन, जैन डिग्री कॉलेज के सचिव मोहित जैन, उमेश जैन, संजीव जैन, पंड़ित जितेंद्र शास्त्री, नरेश जैन, विनीत जैन, रजत सम्यक, ईशान, अभिषेक, गरिमा जैन आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>गिरनार जी सिद्ध क्षेत्र की संसद में गूंज: आस्था स्थलों की रक्षा के लिए जैन तीर्थस्थल संरक्षण बोर्ड बनाया जाए  </title>
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		<pubDate>Tue, 03 Dec 2024 08:28:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के तीर्थों पर हो रहे अवैध कब्जे रोकने, धर्म स्थलों पर सुरक्षा के इंतजाम करने और कब्जेधारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई के लिए सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने संसद में आवाज बुलंद की है। पढ़िए संसद में उठाए मुद्दे की संपूर्ण जानकारी टी के वेद वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजेश जैन दद्दू [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के तीर्थों पर हो रहे अवैध कब्जे रोकने, धर्म स्थलों पर सुरक्षा के इंतजाम करने और कब्जेधारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई के लिए सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने संसद में आवाज बुलंद की है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए संसद में उठाए मुद्दे की संपूर्ण जानकारी टी के वेद वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजेश जैन दद्दू की इस खबर में&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने संसद पटल पर जैन समाज की सबसे अमूल्य धरोहर तीर्थ क्षेत्र गिरनार जी की सुरक्षा के इंतजाम करने की बात कही।</p>
<p>टी के वेद वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सांसद इमरान मसूद ने कहा कि आज मैं सदन का ध्यान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। यह न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि अल्पसंख्यक जैन समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर और अधिकारों की सुरक्षा का भी प्रश्न है।</p>
<p><strong>जैन धर्मावलंबियों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र</strong></p>
<p>सांसद मसूद ने बताया कि गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित पवित्र गिरनार पर्वत भारत के प्राचीनतम धर्म, जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की मोक्षस्थली है। भगवान नेमिनाथ की निर्वाण भूमि है। जिसे सदियों से जैन धर्मावलंबी श्रद्धा और आस्था से पूजते आए हैं। वहां जबरन कब्जा किया जा रहा है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70648" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241203-WA0011.jpg" alt="" width="1080" height="1500" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241203-WA0011.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241203-WA0011-216x300.jpg 216w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241203-WA0011-737x1024.jpg 737w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241203-WA0011-768x1067.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241203-WA0011-990x1375.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />इतिहास प्रमाणित करता है कि&#8230;</strong></p>
<p>अकबरनामा जैसे प्रतिष्ठित ऐतिहासिक ग्रंथ, ब्रिटिश कालीन रिपोर्ट्स, एएसआई रिपोर्ट्स और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज यह साबित करते हैं कि गिरनार पर्वत जैन धर्म का बेहद प्राचीन तीर्थस्थल है। इस विषय में गुजरात हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि जैन धर्मावलंबी वहां शांति से पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इसके बावजूद अपने आराध्य देव की निर्वाण स्थली पर दर्शन करने के लिए जाने वाले जैन मुनियों और जैन श्रद्धालुओं के साथ वहां पांचवी टोंक पर अवैध कब्जा किए लोग बदतमीजी और मारपीट तक करते हैं।</p>
<p><strong>मुनियों पर भी हुए जानलेवा हमले</strong></p>
<p>अतीत में जैन मुनियों पर चाकू से जानलेवा हमले और अपमानित किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। 1991 में पारित उपासना स्थल कानून कहता है कि 15 अगस्त 1947 के बाद किसी भी धार्मिक स्थल की स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता लेकिन, कानून का उल्लंघन करते हुए कोराना काल में एक रात में चुपचाप वहां पर अन्य धर्म की मूर्ति स्थापित करा दी गई। गिरनार में जैन तीर्थस्थल को बिना वजह विवादों में घसीटा जा रहा है।</p>
<p><strong>धर्म निरपेक्षता पर है सवाल</strong></p>
<p>सांसद मसूद ने बताया कि जैन समुदाय, जो देश का एक शांतिप्रिय और अल्पसंख्यक वर्ग है। उनके साथ इस प्रकार का अन्याय हमारी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय जूनागढ़ प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता के कारण ही ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद हैं।</p>
<p><strong>तीर्थ स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो</strong></p>
<p>सदन के माध्यम से मांग की गई कि अल्पसंख्यक जैन समाज के पवित्र तीर्थ स्थलों गिरनार जी, शिखरजी, पालिताना जी और अन्य जैन तीर्थस्थलों की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए &#8216;जैन तीर्थस्थल संरक्षण बोर्ड&#8217; बनाया जाए। 1991 के उपासना स्थल कानून का सख्ती से पालन किया जाए।</p>
<p><strong>कब्जाधारियों पर हो सख्त कार्रवाई</strong></p>
<p>धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों पर कब्जा करने वाले असामाजिक तत्वों और इसमें शामिल प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। भारत विविधताओं में एकता का देश है। यहां हर समुदाय और हर धर्म का सम्मान होना चाहिए। जैन समाज जो अहिंसा और शांति का प्रतीक है को न्याय दिलाना और उनकी आस्थाओं की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।</p>
<p><strong>जैन समाज ने सांसद का आभार जताया</strong></p>
<p>भारत वर्षीय जैन समाज ने सांसद के प्रति आभार प्रकट किया है। इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, तीर्थ रक्षणी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष टीके वेद, विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन, मयंक जैन, हंसमुख गांधी, आजाद जैन, प्रदीप बडजात्या, अशोक मेहता, कांतिलाल बम, राजीव जैन, सुशील पांड्या, पुष्पा कासलीवाल, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन, कल्पना परवार, सीमा रावत आदि ने सांसद का आभार जताया है।</p>
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