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	<title>ससंघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>ससंघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महाश्रमण का ससंघ का आगमन छत्रपति नगर में 27 को : जीवन की दिशा और दशा बदलने वाले प्रेरणास्पद प्रवचन होंगे </title>
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		<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:13:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज, ससंघ का बुधवार से 29 मई शुक्रवार तक तीर्थ स्वरूप श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिसंघ में इंदौर मुनिश्री अप्रमित सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रेयस सागर जी*महराज संसघ सम्मिलित रहेंगे। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने कहा कि हम सबके पुण्योदय से मुनिसंघ ने तीर्थ स्वरूप जिनालय में तीन दिवसीय प्रवास की स्वीकृति प्रदान की है। ट्रस्ट महामंत्री विपुल बांझल ने बताया कि तीन दिवसीय विशेष आयोजन में प्रातः 7 बजे मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज के संसघ में नित्य नियम पूजन, श्रीजी की शांतिधारा होगी। प्रातः 8.30 बजे गुरुदेव के मुखारविंद से जीवन की दिशा और दशा बदलने वाले प्रेरणास्पद प्रवचन होगा। मध्याह्न 2 बजे धर्म-अध्यात्म की तत्त्व चर्चा की जाएगी।</p>
<p>सायं 7 बजे श्रद्धालुओं के प्रश्नों पर आधारित श्रुत समाधान कार्यक्रम होगा, जिसमें मुनिश्री द्वारा श्रावकों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। ट्रस्ट एवं सकल दिगम्बर जैन समाज छत्रपति नगर, गौरव नगर, महावीर बाग एवं अग्रसेन नगर ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से मुनिसंघ की आहार चर्या, वैयावृत्ति एवं सेवा कार्यों में सहभागिता कर पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है। मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ का 27 से 29 मई तक श्री दिगम्बर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में मंगल प्रवास होगा। मुनिसंघ में मुनिश्री अप्रमित सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री श्रेयस सागर जी सम्मिलित रहेंगे। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट ने बताया कि हम सबके पुण्योदय से मुनिसंघ ने तीर्थ स्वरूप जिनालय में प्रवास की स्वीकृति प्रदान की है।</p>
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		<title>आचार्यश्री निर्भयसागर जी का ससंघ आगरा में मंगल प्रवेश : ट्रांस यमुना कॉलोनी जैन समाज ने पाद प्रक्षालन कर की भव्य अगवानी, लिया आशीर्वाद  </title>
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		<pubDate>Wed, 20 May 2026 08:27:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कठोर तप और संयम की प्रतिमूर्ति आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने ससंघ प्रातः 5 बजे ब्रिज पब्लिक स्कूल, छलेसर से मंगल विहार प्रारंभ कर मंगलवार को ताज नगरी आगरा में दो वर्षों बाद पुनः मंगल प्रवेश किया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। भीषण गर्मी और तपती सड़कों के बीच जहां आमजन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कठोर तप और संयम की प्रतिमूर्ति आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने ससंघ प्रातः 5 बजे ब्रिज पब्लिक स्कूल, छलेसर से मंगल विहार प्रारंभ कर मंगलवार को ताज नगरी आगरा में दो वर्षों बाद पुनः मंगल प्रवेश किया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> भीषण गर्मी और तपती सड़कों के बीच जहां आमजन के पैरों में छाले और फफोले पड़ रहे हैं, वहीं कठोर तप और संयम की प्रतिमूर्ति आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने ससंघ प्रातः 5 बजे ब्रिज पब्लिक स्कूल, छलेसर से मंगल विहार प्रारंभ कर मंगलवार को ताजनगरी आगरा में दो वर्षों बाद पुनः मंगल प्रवेश किया। आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज एवं मुनिश्री शिवदत्तसागर जी महाराज ससंघ के आगमन से श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला। आचार्यसंघ पीएनसी कोल्ड स्टोरेज होते हुए श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, ट्रांस यमुना कॉलोनी पहुंचा, जहां ट्रांस यमुना कॉलोनी जैन समाज ने पाद प्रक्षालन कर भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर तृप्ति, पारुल, खुशबू एवं प्रीति ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। मुनिश्री शिवदत्तसागर जी एवं आचार्यश्री निर्भयसागर जी के मंगल प्रवचन हुए। जिनमें धर्म, संयम और तप की महिमा का संदेश दिया गया। इसके बाद सौभाग्यशाली भक्तों ने नवधा भक्ति पूर्वक आचार्यसंघ की आहार चर्या संपन्न कराई।</p>
<p>इस मौके पर में कुमार मंगलम जैन, पवन जैन, सुरेंद्र जैन, अर्पित जैन, पुष्पेंद्र जैन, सिद्धशरण जैन, राजेश जैन, कैलाश चांद जैन, मोहित जैन, संदीप जैन, अनुभव जैन, वैभव जैन, कंचन जैन, नीलम जैन, पूजा जैन, वीरेंद्र जैन, शुभम- जैन, चंद्रप्रकाश जैन सहित ट्रांसयमुना कॉलोनी समिति, बरहन जैन समाज, एनसीसी क्लब छीपीटोला, आगरा परिषद एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आचार्य श्री विभव सागर जी ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश: घर-घर रंगोली मांडकर किया पाद प्रक्षालन  </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 17:35:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तप, त्याग एवं संयम की नगरी सनावद में आचार्य श्री विभव सागर महामुनिराज ससंघ का खंडवा की ओर से भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि महाराष्ट्र के पुसेगांव एवं भुसावल में पंचकल्याणक संपन्न कर इंदौर की ओर विहार कर रहे आचार्य श्री विभव सागर जी (9 पिच्छी) का नगर आगमन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तप, त्याग एवं संयम की नगरी सनावद में आचार्य श्री विभव सागर महामुनिराज ससंघ का खंडवा की ओर से भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि महाराष्ट्र के पुसेगांव एवं भुसावल में पंचकल्याणक संपन्न कर इंदौर की ओर विहार कर रहे आचार्य श्री विभव सागर जी (9 पिच्छी) का नगर आगमन हुआ। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद</strong>। तप, त्याग एवं संयम की नगरी सनावद में आचार्य श्री विभव सागर महामुनिराज ससंघ का खंडवा की ओर से भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि महाराष्ट्र के पुसेगांव एवं भुसावल में पंचकल्याणक संपन्न कर इंदौर की ओर विहार कर रहे आचार्य श्री विभव सागर जी (9 पिच्छी) का नगर आगमन हुआ। समाजजनों ने ढकलगांव फाटा, खंडवा रोड पर पहुंचकर आचार्य संघ की आगवानी की।</p>
<p>आचार्य संघ ने नगर भ्रमण कर सभी जैन मंदिरों एवं गृह चैत्यालयों के दर्शन किए। इसके बाद श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचे। जहां आचार्य श्री के सानिध्य में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक और शांतिधारा हुई। प्रवचन हॉल में आचार्य श्री ने धर्म सभा में कहा कि जिस चीज का संयोग है, उसका नियम से वियोग है। चाहे पुण्य का संयोग हो या पाप का। मृत्यु के पूर्व आयु कर्म का बंध नियम से होता है। उन्होंने आगे कहा, कि यह सनावद नगरी धर्म तीर्थ के समान है। यहां से राष्ट्र गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागी निकले हैं। ऐसी नगरी में प्रतिवर्ष साधु संतों का चातुर्मास होना चाहिए, जिससे धर्म की वृद्धि हो। इस अवसर पर आहारदान का सौभाग्य मुकेश् कुमार जैन शुभम् पेप्सी एवं सावित्रीबाई, कैलाशचंद जटाले परिवार एवं संगस्त त्यागियों को प्राप्त हुआ। दोपहर में तत्वचर्चा व स्वाध्याय कक्षा तथा शाम को आचार्य भक्ति, सामायिक व आरती संपन्न हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी का ससंघ हुआ मंगल प्रवेश: सनावद नगरी में भक्तों में रहा अपार उत्साह  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 10:17:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विराग सागर जी के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर ससंघ सिद्धवरकूट की ओर से शहर में पधारे। समाजजन उनकी अगवानी के लिए रेलवे गेट पर पहुंचे। उपाध्याय श्री ने स्थानीय जिन मंदिरों के दर्शन किए। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। त्यागियों की धर्म नगरी में उपाध्याय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर जी के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर ससंघ सिद्धवरकूट की ओर से शहर में पधारे। समाजजन उनकी अगवानी के लिए रेलवे गेट पर पहुंचे। उपाध्याय श्री ने स्थानीय जिन मंदिरों के दर्शन किए। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> त्यागियों की धर्म नगरी में उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी का शुक्रवार को मंगल प्रवेश हुआ। सुबह की मंगल बेला में आचार्य श्री विराग सागर जी के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर ससंघ सिद्धवरकूट की ओर से शहर में पधारे। समाजजन उनकी अगवानी के लिए रेलवे गेट पर पहुंचे। उपाध्याय श्री ने स्थानीय जिन मंदिरों के दर्शन किए। महिला मंडल द्वारा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में रंगोली मांडकर उपाध्याय श्री के पाद प्रक्षालन करवाए। उपाध्याय विभंजन सागर जी ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शांतिधारा करवाई। शांतिधारा करने का शौभाग्य कमल केके, रितेश मुंशी, सुनील मास्टर साब, मनीष चौधरी, अनुभव सराफ को प्राप्त हुआ। अगली कड़ी में संत भवन में पूर्व से विराजमान मुनि श्री अक्षय सागर जी एवं उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी का मिलन हुआ। दोनों ने एक-दूसरे को नमोस्तु किया। इसी कड़ी में अचित्य जैन ने मंगला चरण प्रस्तुत सभा का शुभारंभ किया।</p>
<p><strong>एक प्रतिमा विराजमान करना पुण्य का काम </strong></p>
<p>इस अवसर पर उपाध्याय श्री ने अपनी देशना में कहा की आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की जन्म भूमि पर पहली बार आना हुआ। यहां से 18 साधुओं ने अपना गृह त्याग कर अपना मोक्ष का रास्ता प्रशस्त किया है, ऐसी नगरी में आना हमारे लिए बहुत ही शौभाग्य की बात है। यहां के मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा बहुत ही प्राचीन हैं, जो एक अतिशय के समान हैं। आप नगरवासी बहुत ही पुण्य शाली हैं। आप श्री सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट के इतने समीप हैं। उपाध्याय श्री ने बताया की मंदिर में एक प्रतिमा विराजमान करना पुण्य का काम है, जो तीव्र पुण्यात्मा जीव है वो ही अपने कुल से प्रतिमा विराजमान कर सकता है। आप मन से ये बात निकाल देना कि इतनी नई प्रतिमाएं विराजमान कर रहे हैं। ये कालांतर में आप को ही अतिशय क्षेत्र मानने में काम आएंगी।</p>
<p><strong>हर जीव का लक्ष्य निर्वाह होता है</strong></p>
<p>मुनि श्री अक्षय सागर जी ने कहा कि जो व्यक्ति जीवन के रहस्य को समझ लेता है वो नियम से उसका मूल्यांकन कर लेता है और इसीलिए जो व्यक्ति मूल्यांकन नहीं कर लेता जन्म लेने के बाद सिर्फ निर्वाह होता है, निर्वाण को जमी करता, क्योंकि हर जीव का लक्ष्य निर्वाह होता है। इस अवसर पर आज के आहारदान का सौभाग्य रजनी भूच परिवार, सावित्री कैलाशचंद जटाले परिवार एवं सुनील कुमार मास्टर साब परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सरल जटाले, सुधीर जैन, पीयूष जैन, विशाल सर्राफ, डॉ. यतीश जैन, कमलेश भूच,सत्येंद्र जैन, मंजुला भूच,मोहिनी जैन, हेमा मुंशी, संध्या जैन राजकुमारी जैन सहित सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य श्री चैत्यसागर जी के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना : भक्ति भाव से पूजन कर किए कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 09:22:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ यहां आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज ससंघ की चातुर्मास मंगल कलश स्थापना मोतीलाल नेहरू रोड के श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र पीर कल्याणी नसिया जी में हुई। आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। नगर में बुधवार से चातुर्मास मंगल कलश स्थापना शुरू हो गए है। अब [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> यहां आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज ससंघ की चातुर्मास मंगल कलश स्थापना मोतीलाल नेहरू रोड के श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र पीर कल्याणी नसिया जी में हुई। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नगर में बुधवार से चातुर्मास मंगल कलश स्थापना शुरू हो गए है। अब चातुर्मास मे जप-तप और धर्म की प्रभावना बहेगी। यहां आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज ससंघ की चातुर्मास मंगल कलश स्थापना मोतीलाल नेहरू रोड के श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र पीर कल्याणी नसिया जी में हुई। कार्यक्रम की शुरुआत वात्सल्य आरोग्यधाम के ट्रस्टी चिंतामणि जैन राजेश काला एवं विजय पाटनी ने ध्वजारोहण कर की। |भक्तों ने समाधिस्थ आचार्यश्री विमल सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया। बालिकाओं ने भक्ति गीत पर नृत्य कर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। आचार्यश्री के चरणों का प्रक्षालन भरतपुर के चांदवाड़ परिवार ने किया।आचार्य संघ को शास्त्र भेट हीरालाल बैनाड़ा परिवार एवं उषा मारसंस परिवार एवं वस्त्र गुणमाला पांडया परिवार द्वारा किए गए। वहीं बाहर से पधारे भक्तों ने अष्ट द्रव्यों की थाल सजाकर आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज का पूजन किया।</p>
<p><strong>चार माह तक एक ही स्थान पर साधना</strong></p>
<p>कार्यक्रम में आचार्यश्री चैत्यसागर जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि चार माह तक एक ही स्थान पर साधना करते हैं। संत चार महीने वर्षा व शरद ऋतु में जीव जंतुओं की उत्पत्ति भारी मात्रा में होनी शुरू हो जाती है। वर्षा ऋतु में काफी बारिश होने की वजह से संतों के आवागमन से जीवों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। यहां तक कि कच्ची सड़कों में नई-नई घास उग आती है। इसी धारणा को मन में लिए चार महीने का मंगल पावन वर्षायोग करते हैं। इस दौरान जलेसर, कोसमा आगरा की जैन समाज ने आचार्यश्री के समक्ष श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया इसके बाद मंदिर परिसर में मुख्य चातुर्मास मंगल कलश प्रदीप जैन पीएनसी परिवार, द्वितीय मंगल कलश निर्मल मोठया, हीरालाल बैनाड़ा,भोलानाथ सिंघई, विमल मारसंस परिवार तृतीय मंगल कलश राजेंद्र जैन एडवोकेट एवं विजय बैनाड़ा परिवार को स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके अलावा मुख्य अन्य मंगल कलश सौभाग्य शाली भक्तों द्वारा स्थापित किए गए।</p>
<p><strong>इन समाजबंधुओं की उपस्थिति रही</strong></p>
<p>संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। इस अवसर पर जगदीश प्रसाद जैन, सुनील जैन ठेकेदार, राकेश जैन पर्देवाले, अनंत जैन, राजेंद्र जैन, रामेश जैन, अशोक जैन, पंकज जैन, सुनील जैन काका, सुशील जैन नसिया जी, पवन जैन, राजेश जैन लालू, अक्षय जैन, विशाल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन समस्त आगरा सकल जैन समाज के लोग एवं विभिन्न नगरों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आचार्य वसुनंदीजी महामुनिराज ससंघ का बाडा पदमपुरा में हुआ भव्य मंगल प्रवेशः 28 से 30 मार्च को समवशरण विधान  </title>
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		<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 07:45:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य वसुनंदीजी महामुनिराज ससंघ 31 पिच्छिकाधारी दिगम्बर मुनिसंघ का बाडा पदमपुरा में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष की अगुवाई में सारे सकल जैन समाज ने बैंड-बाजों के द्वारा भव्य अगवानी की। पढ़िए फागी से राजाबाबू गोधा जैन की यह पूरी खबर&#8230; फागी (बाडा पदमपुरा) प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाडा पदमपुरा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य वसुनंदीजी महामुनिराज ससंघ 31 पिच्छिकाधारी दिगम्बर मुनिसंघ का बाडा पदमपुरा में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष की अगुवाई में सारे सकल जैन समाज ने बैंड-बाजों के द्वारा भव्य अगवानी की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए फागी से राजाबाबू गोधा जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>फागी (बाडा पदमपुरा</strong>) प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाडा पदमपुरा में आज आचार्य वसुनंदीजी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। उक्त संघ अनेक शहरों कस्बों में धर्म की प्रभावना बढ़ाता हुआ आज बाड़ा पदमपुरा की सीमा पर पहुंचा। जहां पर धर्म जागृति संस्थान राजस्थान प्रदेश के अध्यक्ष पदम बिलाला की अगुवाई में सारे सकल जैन समाज ने बैंड-बाजों के द्वारा भव्य अगवानी की तथा मुनि संघ का पाद प्रक्षालन कर आरती करने के बाद संत भवन में उन्हें ठहराया।</p>
<p><strong>28 से 30 मार्च को समवशरण विधान </strong></p>
<p>धर्म जागृति संस्थान के अध्यक्ष ने बताया कि उक्त संघ 28 से 30 मार्च 2025 तक होने वाले समवशरण विधान में अपना पावन सानिध्य प्रदान करेगा। इसी कडी में मुनि संघ के पावन सानिध्य में एक दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया। उक्त पंचकल्याणक में पदम-पुष्पा बिलाला ने श्रीजी के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। जागरूक-निकिता जैन मुंबई ने सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। ज्ञानचंद-सुशीला जैन बस्सी वाले ने यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
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		<title>युवाचार्य श्री श्रुतधरनंदी महाराज ससंघ का कूण में मंगल प्रवेश:  पाद प्रक्षालन,आरती अगवानी कर प्रभावना वितरण का लिया लाभ </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 05:35:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[युवाचार्य मुनि 108 श्री श्रुतधर नंदी जी ससंघ का मुनि 108 श्री उत्कर्ष कीर्ति जी के साथ संघस्थ क्षुल्लक 105 श्री सुप्रभात सागर जी महाराज की जन्मभूमि धर्म नगरी कूण में भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार को हुआ। समाज ने घोष वादन और जयकारों के साथ आचार्य संघ की भव्य अगवानी की। कूण से पढ़िए यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>युवाचार्य मुनि 108 श्री श्रुतधर नंदी जी ससंघ का मुनि 108 श्री उत्कर्ष कीर्ति जी के साथ संघस्थ क्षुल्लक 105 श्री सुप्रभात सागर जी महाराज की जन्मभूमि धर्म नगरी कूण में भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार को हुआ। समाज ने घोष वादन और जयकारों के साथ आचार्य संघ की भव्य अगवानी की। <span style="color: #ff0000">कूण से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कूण।</strong> भारत गौरव गणाधिपति गणधराचार्य 108 श्री कुंथुसागर जी महाराज के सुशिष्य बाल योगी युवाचार्य मुनि 108 श्री श्रुतधर नंदी जी ससंघ का मुनि 108 श्री उत्कर्ष कीर्ति जी के साथ संघस्थ क्षुल्लक 105 श्री सुप्रभात सागर जी महाराज की जन्मभूमि धर्म नगरी कूण में भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार को हुआ। समाज ने घोष वादन और जयकारों के साथ आचार्य संघ की भव्य अगवानी की। समाज के अध्यक्ष भरत कुमार रत्नावत ने बताया कि कूण में मंगल प्रवेश के बाद क्षुल्लक श्री सुप्रभात सागर जी महाराज के अनुज भ्राता अशोक कुमार जेतावत परिवार और भ्राता वधु निर्मला जैन ने आचार्य संघ का पाद प्रक्षालन, आरती, पुष्प वर्षा कर अगवानी कर प्रभावना वितरण का लाभ लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>आचार्य संघ का कूण में अल्प प्रवास रहेगा</strong><br />
कस्बे के श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः आशीर्वाद सभा, मध्यान्ह में प्रवचन सभा और सांयकाल आरती और आनंद यात्रा का आयोजन हुआ। शुक्रवार को आचार्य संघ की आहारचर्या का लाभ पदम कुमार-निर्मला देवी रत्नावत परिवार और सोहनलाल-कमला देवी गांगावत परिवार को मिला। आचार्य संघ का कूण में अल्प प्रवास रहेगा और संघ मंगल विहार धरियावद की ओर होगा, जहां पर वात्सल्य मूर्ति प्रज्ञा श्रमण मुनि 108 श्री पुण्य सागर जी महाराज के संघस्थ महा तपस्वी मुनि 108 श्री महोत्सव सागर जी महाराज और महा तपस्वी धरियावद नगर गौरव मुनि 108 श्री उदित सागर जी महाराज के पारणा महोत्सव में सानिध्य और आशीर्वाद प्रदान करना संभावित है।</p>
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		<title>आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश : सुप्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला जी कर्नाटक में हुआ  </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Nov 2024 14:18:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल विहार नांदणी से गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में 25 नवंबर 2024 की शाम को चर्या शिरोमणी आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला जी कर्नाटक में हुआ। पढ़िए राजेश जैन दद्दू एक रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल विहार नांदणी से गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में 25 नवंबर 2024 की शाम को चर्या शिरोमणी आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला जी कर्नाटक में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू एक रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज और उनके 19 शिष्यों सहित 24 नवम्बर 2024 को श्रवणबेलगोला की तरफ मंगल विहार में परम पूज्य श्री भानुकीर्ति जी भट्टारक जी (कंबदहल्ली), परम पूज्य श्री जिनसेन भट्टारक महास्वामी जी (नांदणी) और परम पूज्य स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक जी (श्रवणबेलगोला) विहार में साथ चलते हुए अद्भुत दृष्य देखने को मिला। चर्या शिरोमणि, आध्यात्मयोगी आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के दर्शन करने हेतु 18 अकटूबर 2024 को नांदणी में श्रवणबेलगोला के स्वस्तिश्री चारुकीर्ती भट्टारक स्वामीजी पधारे थे। तब उन्होंने चर्या शिरोमणी आध्यात्मयोगी आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज संसघ को श्रवणबेलगोला पधारणे हेतु स्वस्तिश्री चारुकीर्ती भट्टारक स्वामीजी, श्रवणबेलगोला ने निवेदन किया था। श्रवणबेलगोला में विश्व प्रसिद्ध भगवान बाहुबली की विशाल एवं भव्य मूर्ति हैं। चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल विहार नांदणी से गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में 25 नवंबर 2024 की शाम को चर्या शिरोमणी आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोला जी कर्नाटक में हुआ।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70325" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241125-WA0022.jpg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241125-WA0022.jpg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241125-WA0022-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241125-WA0022-768x1024.jpg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" />28 नबम्बर से 4 दिसम्बर तक होगा पंचकल्याणक महोत्सव</strong></p>
<p>उत्तर भारत की उज्जयनी नगरी में जब बारह वर्षीय अकाल पड़ा, उसी समय अंतिम श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी ने अपने ज्ञान से जान लिया कि आने वाले समय में यहां पर अकाल पडऩे वाला है। तभी अंतिम श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी जी चंद्रगुप्त सहित बारह हजार मुनियों के साथ दक्षिण भारत में चंद्रगिरि पर्वत पर आत्म साधना करने आए थे। उस समय दक्षिण भारत में जैन धर्म पहले से ही प्रचलित था। जिस प्रकार अंतिम श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी उत्तर से दक्षिण आकर जैनधर्म का प्रचार किया था, उसी प्रकार पंचकल्याणक पूजा महोत्सव हेतु प. पू जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी, नांदणी के नेतृत्व में वर्तमान के भद्रबाहू स्वामी जी को आचार्य विशुद्धसागर महाराज जी और उनके 25 शिष्यों के संघ को उत्तर से दक्षिण धर्म प्रभावना हेतू आये हैं। परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज को कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक प्रवास तक राज्यकीय अतिथि घोषित किया गया। चन्द्रगिरि पर्वत पर भद्रबाहु गुफा में आज भी हमें भद्रबाहु स्वामी के चरणों की वन्दना करने का अवसर प्राप्त होता है। चंद्रगुप्त मुनि के नाम से ही पर्वत का नाम बाद में चन्द्रगिरि पर्वत हुआ और साथ में ही चंद्रगिरि पर्वत पर एक मन्दिर (बसदी) का नाम भी चंद्रगुप्त बसदी है। इन दोनों गुरु-शिष्य का वर्णन प्राचीन शास्त्र में विस्तार से दिया गया है और श्रवणबेलगोला के शिलालेखों में भी मिलता है। आगामी भव्य पंचकल्याणक आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी संसघ के मंगलमय सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र जैनरगुत्ती, हासन (कर्नाटक) 28 नबम्बर 2024 से 4 दिसम्बर 2024 तक होने जा रहा है।</p>
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		<title>आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश : महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर की अगवानी </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Nov 2024 10:27:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। पढ़िए सन्मति काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। इंदौर में चातुर्मासरत आचार्य श्री श्री सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट से यात्रा कर नगर में पधारे, जहां नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के साथ सभी समाजजन रेल्वे गेट पर पहुंच कर आचार्य संघ की आगवानी की। इस अवसर पर सभी समाजजन जुलूस के रूप में श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में पहुंचे। महिलाओं ने सिर पर कलश रख कर आचार्य श्री की आगवानी की और पाद प्रक्षालन किया गया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70052" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022.jpg" alt="" width="971" height="912" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022.jpg 971w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022-300x282.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022-768x721.jpg 768w" sizes="(max-width: 971px) 100vw, 971px" />संतों के दर्शन होना भाग्य है, नगर में आना सौभाग्य है &#8211; आर्यिका माताजी</strong></p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका माताजी ने कहा कि संतों के दर्शन होना भाग्य है। नगर में साधु का आना सौभाग्य है और साधु के आने के बाद उनके वचन सुनना अहोभाग्य है। दिगंबर मुनिराज के दर्शन होना बहुत ही भाग्य की बात है कि आज मुनिराज नगर में पधारे हैं। पहले समय में मुनिराज के दर्शन बहुत ही दुर्लभ होते थे। मुनिराज के दर्शन करने से बहुत ही पुण्य का फल मिलता है। इसी क्रम में आचार्य श्री उदार सागर जी न कहा कि सनावद नगरी बहुत ही पावन नगरी है हमारा यहां आना बहुत भाग्य की बात है। यहां से 18 साधुओं ने अपना मार्ग मोक्ष की ओर प्रशस्त किया है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70050" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023.jpg" alt="" width="1280" height="752" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-300x176.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-1024x602.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-768x451.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-990x582.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आप बहुत ही भाग्यशाली हैं कि आपको आज दिगम्बर साधु के दर्शन आसानी से हो रहे हैं। पहले साधु के दर्शन करना बहुत ही मुश्किल था। लेकिन पहले युग में लोगों की भक्ति बहुत ही प्रकाट्य होती थी, लेकिन अब श्रावक की आस्था इतनी प्रकाट्य नहीं रही। अगली कड़ी में शाम को आचार्य श्री एवं माताजी के सानिध्य में गुरुभक्ति आरती एवं प्रश्नमंच आयोजित किए गए। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य पद्मनंदी महाराज और चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल मिलन हुआ ः 25 या 26 नवंबर को तीर्थ क्षेत्र गोम्मटेश बाहुबली श्रमणबेलगोला का होगा मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 07 Nov 2024 10:41:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य पद्मनंदी महाराज और चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल मिलन बुधवार को विहार के दौरान कुन्नूर में हुआ। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की एक रिपोर्ट जयदु जिणिंदो महावीरों।  कुन्नूर। आचार्य पद्मनंदी महाराज और चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल मिलन बुधवार को विहार के दौरान कुन्नूर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य पद्मनंदी महाराज और चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल मिलन बुधवार को विहार के दौरान कुन्नूर में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की एक रिपोर्ट जयदु जिणिंदो महावीरों। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुन्नूर।</strong> आचार्य पद्मनंदी महाराज और चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ मंगल मिलन बुधवार को विहार के दौरान कुन्नूर में हुआ। चर्या शिरोमणी आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज संसघ का मंगल विहार गोम्मटेश बाहुबली श्रवणबेलगोळ कर्नाटक के लिए चल रहा है। संभवतः 25 नवंबर की शाम को या 26 नवंबर की सुबह आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र गोम्मटेश बाहुबली श्रमणबेलगोला जी कर्नाटक में होगा।</p>
<p><strong>चर्याशिरोमणी आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के साथ 19 शिष्य भी रहेंगे </strong></p>
<p><strong>1.श्रमण मुनि श्री सुव्रतसागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; हिंदी टिकाकार</p>
<p>उपाधि- साहित्याचार्य</p>
<p><strong>2. श्रमण मुनि श्री साम्य सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता- संस्कृत अध्यय, अध्यापन में रुची</p>
<p>उपाधि- संस्कृत-प्रवीण</p>
<p><strong>3. श्रमण मुनि श्री संजयंत सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; योग विद्या प्रवीण</p>
<p>उपाधि- आत्म-बिहारी</p>
<p><strong> 4. श्रमण मुनि श्री यशोधर सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; वैयावृत्ती निपुण</p>
<p>उपाधि- गुरू चरणानुरागी</p>
<p><strong>5. श्रमण मुनि श्री यत्न सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; सुरु &#8211; साधक</p>
<p>उपाधी- यत्नशील</p>
<p><strong>6. श्रमण मुनि श्री निर्ग्रन्थ सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; सरल हृदय</p>
<p>उपाधि- आदर्श-शिष्य</p>
<p><strong>7. श्रमण मुनि श्री निर्मोह सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; प्रण &#8211; प्रिय साधक</p>
<p>उपाधि- श्रुत-निष्ठ</p>
<p><strong>8. श्रमण मुनि श्री निसंग सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; प्रज्ञावान,हसमुख</p>
<p>उपाधि- आत्मनुशासक</p>
<p><strong>9. श्रमण मुनि श्री निर्विकल्प सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; साधना-अनुरक्त</p>
<p>उपाधि- निर्लिप्त-साधक</p>
<p><strong>10. श्रमण मुनि श्री जितेंद्र सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; दृढ़ता, विनम्रता</p>
<p>उपाधि- आत्म-चिंतक</p>
<p><strong>11. श्रमण मुनि श्री सुभग सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; विधिविधान निपुण</p>
<p>उपाधि- प्रतिष्ठा-प्रज्ञ</p>
<p><strong>12. श्रमण मुनि श्री सिद्ध सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; अध्ययनशील</p>
<p>उपाधि- स्वाध्याय-प्रिय</p>
<p><strong>13. श्रमण मुनि श्री सिद्धार्थ सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; ब्राम्ही लिपी अनुवादक</p>
<p>उपाधि- गुरुभक्त</p>
<p><strong>14. श्रमण मुनि श्री सहर्ष सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; दयालु करुणावंत</p>
<p>उपाधि- प्रसन्नधिया</p>
<p><strong>15. श्रमण मुनि श्री सत्यार्थ सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; वैयवृत्ती में तत्पर</p>
<p>उपाधि- गुरू चरणानुगामी</p>
<p><strong>16. श्रमण मुनि श्री सार्थक सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; तप त्याग अनुरक्त</p>
<p>उपाधि- अंतेवासीन</p>
<p><strong>17. श्रमण मुनि श्री सार्थ सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; नितिज्ञ</p>
<p>उपाधी- सर्वांग सुंदर</p>
<p><strong>18. श्रमण मुनि श्री समकित सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; ज्ञान ध्यान प्रवीण</p>
<p>उपाधी- आत्म ध्यानी</p>
<p><strong>19. श्रमण मुनि श्री सम्यक सागर जी</strong></p>
<p>विशेषता &#8211; संघर्षशील</p>
<p>उपाधी- भक्त वत्सल</p>
<p><strong>28 नवंबर से शुरू होगा पंचकल्याणक</strong></p>
<p>आगामी भव्य पंचकल्याणक श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र जैनरगुत्ती हासन (कर्नाटक) 28 नवंबर से 4 दिसम्बर 2024 तक संपन्न होगा। नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
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