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	<title>सर्वधर्म समभाव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में णमोकार महामंत्र का पाठ: हाईलिंक सिटी स्थित भगवान मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में हुआ आयोजन  </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 11:21:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति की महान परंपरा में णमोकार महामंत्र अतिशयकारी माना जाता है। इंदौर से पढ़िए, गिरीश रारा की यह रिपोर्ट&#8230; इंदौर। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति की महान परंपरा में णमोकार महामंत्र अतिशयकारी माना जाता है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, गिरीश रारा की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर णमोकार महामंत्र का पाठ किया गया। दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति की महान परंपरा में णमोकार महामंत्र अतिशयकारी माना जाता है। एक अर्थ में यह केवल जैन समाज ही नहीं अपितु मानव मात्र के लिए कल्याणकारी माना जाता है। पंच परमेष्ठी का स्मरण और उनकी स्तुति के निमित्त यह महामंत्र सर्वधर्म समभाव की दृष्टि से भी लोक कल्याणकारी समझा जा सकता है। इसके अंतर्गत अरिहंत और सिद्ध से लेकर समस्त साधुजनों को विशुद्ध भाव से नमन किया जाता है। णमोकार महामंत्र के पाठ के चमत्कारिक स्वरूप का दर्शन विभिन्न धर्म शास्त्रों में भी उल्लेखित है। इसी तारतम्य में हाईलिंक सिटी स्थित भगवान मुनि सुव्रतनाथ जिनालय में सैकड़ांे की संख्या में जैन समाज के महिला एवं पुरुष वर्ग ने प्रातः 8.30 से 9 बजे तक णमोकार महामंत्र का पाठ किया। इस अवसर पर सकल समाजजन श्रद्धाभक्ति के भाव से भरे हुए थे। उल्लेखनीय है कि उक्त जिनालय में समय-समय पर भाव भक्ति का अद्भुत दृश्य उपस्थित होता रहा है।</p>
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		<title>दिगंबरत्व वासना का नहीं उपासना का प्रतीक: आचार्य निर्भय सागर जी ने स्पष्ट किया दिगंबरत्व का सार </title>
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		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 12:05:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व को सिलसिलेवार समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का धर्म है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व को सिलसिलेवार समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का धर्म है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व को सिलसिलेवार समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का धर्म है। दिगंबरत्व हमारी संस्कृति है और विश्वव्यापी धर्म है। दिगंबरत्व हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है क्योंकि, दिगम्बरत्व वासना का नहीं उपासना का प्रतीक है, दिगंबरत्व प्रदर्शन का नहीं आत्मदर्शन का प्रतीक है, दिगंबरत्व आत्म साधना के लिए है, साधनों के लिए नहीं।</p>
<p><strong>विषय वासना के कारण पर्दे में रहने का है फरमान </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा दिगंबरत्व से मुक्ति है। ब्रह्मा के अंश बनकर नंगे ही जन्मे हैं, लेकिन विषय वासना आने के कारण पर्दे में रहने का भी फरमान है। जैन मुनि का दिगंबर निश्चल, निष्कपट और विषय वासना से रहित होने का द्योतक है। परमात्मा की प्राप्ति उसे ही होती है जो निश्चल, निष्कपट और वासना से रहित होता है। संत वही है जिसने अपने संसार का अंत कर लिया है।</p>
<p><strong>सत्तोदय तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष ने श्रीफल भेंट किया </strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जो सच्चा ज्ञान सच्ची आस्था सच्चा आचरण से युक्त होता है। सच्चे साधु की सेवा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। धर्म सभा के प्रारंभ में सत्तोदय तीर्थ अतिशय क्षेत्र सीरोन अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, आनंद जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, संजय जैन मोदी, विजय जैन लागोंन, नगर पालिका पार्षद आलोक जैन मयूर ने आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित कर पाद् प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट किया। जिन्हें दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजुरिया,अमित जैन सराफ,आदि ने सम्मानित किया।</p>
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		<title>आर्यिका श्री पूर्णमति जी को राजकीय अतिथि का सम्मान: राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने लिखा था सीएम को पत्र </title>
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		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 10:39:35 +0000</pubDate>
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<p><strong>उत्तर प्रदेश सरकार ने आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री पूर्णमति जी माताजी को मथुरा चौरासी में प्रवेश पर राजकीय अतिथि सम्मान से अलंकृत किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं राज्यसभा सांसद नवीन जैन का सभी गुरु और गुरु मां भक्तों ने आभार जताया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मथुरा।</strong> उत्तर प्रदेश सरकार ने आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री पूर्णमति जी माताजी को मथुरा चौरासी में प्रवेश पर राजकीय अतिथि सम्मान से अलंकृत किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं राज्यसभा सांसद नवीन जैन का सभी गुरु और गुरु मां भक्तों ने आभार जताया है। उल्लेखनीय है कि राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने विगत दिनों उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मथुरा प्रवेश पर माताजी को राजकीय अतिथि के सम्मान से नवाजने की मांग की थी। उन्होंने पत्र में लिखा था कि दिगंबर जैन संप्रदाय के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी वर्तमान में कठिन साधना में लीन रहती हैं। माताजी का पहली बार उत्तर प्रदेश में आगमन हुआ है। उन्होंने मंगलवार को मथुरा में मंगल प्रवेश किया है। आर्यिका पूर्णमति माताजी संयम के 36 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में लगभग 76 हजार किमी से भी अधिक विहार कर चुकी हैं। वे एक समय आहार ग्र्र्रहण करती हैं। निरंतर जन-जन को चेतना प्रदान कर रही हैं। वे सर्वधर्म समभाव को दृढ़ करते हुए कमजोर वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयासरत हैं। सांसद जैन ने बताया कि राष्ट्रीय कारागारों में कैदियों को भी जीवन बोध कराया है।</p>
<p>उन्होंने मप्र, महाराष्ट्र, गुजरात में निवास करने वाले 5 लाख से भी अधिक अजैन परिवारों को शाकाहारी बना चुकी हैं। वे वेदों में लिखित सिद्धांतों का प्रचार-प्रचार करने में भरोसा रखती हैं और वैज्ञानिक तथा तकनीकी भाषा के माध्यम से धर्म प्रचार कर रही हैं। राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने कहा कि उन्हें राजकीय अतिथि का सम्मान मिले। ऐसी आशा की जाती है। इस पत्र के बाद मुख्यमंत्री ने आर्यिका पूर्णमति माताजी को राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है। उल्लेखनीय है कि माताजी मंगलवार को मथुरा चौरासी पहुंची। 4मई को वृंदावन, 5मई को छटीकरा, 6मई को कोसी तथा 8 मई को यूपी बार्डर पर विहार कर पहुंचेंगी।</p>
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		<title>सर्वधर्म सभा में दी आचार्य श्री को विनयांजलि :  जैन समाज के ही नहीं, जन-जन के संत थे आचार्य श्री विद्यासागर </title>
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		<pubDate>Tue, 27 Feb 2024 09:00:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विनयांजलि सभा में सर्वधर्म समभाव का स्वर्णिम दृश्य तब दिखा, जब जैन समाज, मुस्लिम समाज, सनातन समाज, सिख समाज, ईसाई समाज के लोगों के द्वारा युगदृष्टा, विश्व गुरु, जन जन के संत शिरोमणी महाकाव्य मूकमाटी के रचियता, मानवता, जीवदया के मसीहा समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महा मुनिराज के महानिर्वाण पर देशबन्धु सिनेमा के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विनयांजलि सभा में सर्वधर्म समभाव का स्वर्णिम दृश्य तब दिखा, जब जैन समाज, मुस्लिम समाज, सनातन समाज, सिख समाज, ईसाई समाज के लोगों के द्वारा युगदृष्टा, विश्व गुरु, जन जन के संत शिरोमणी महाकाव्य मूकमाटी के रचियता, मानवता, जीवदया के मसीहा समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महा मुनिराज के महानिर्वाण पर देशबन्धु सिनेमा के सामने सामूहिक भावभीनी विनयांजलि दी गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झरिया।</strong> विनयांजलि सभा में सर्वधर्म समभाव का स्वर्णिम दृश्य तब दिखा, जब जैन समाज, मुस्लिम समाज, सनातन समाज, सिख समाज, ईसाई समाज के लोगों के द्वारा युगदृष्टा, विश्व गुरु, जन जन के संत शिरोमणी महाकाव्य मूकमाटी के रचियता, मानवता, जीवदया के मसीहा समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महा मुनिराज के महानिर्वाण पर देशबन्धु सिनेमा के सामने सामूहिक भावभीनी विनयांजलि दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत में अनिल कुमार जैन ने कहा कि जैन धर्म में मृत्यु महोत्सव है। यह शोक का नहीं, देवलोक गमन गए पुण्यात्मा से कुछ सीखने का मौका है। उनके पद चिह्नों पर चलने का अवसर है। जैन धर्म में इसे विनयांजलि अर्पित करते हुए मनाया जाता है। मनीष जैन ने मंगलाष्टक पढ़ा। पाना देवी जैन ने 45 मिनट तक णमोकार मंत्र का जाप शुरू किया। राशि जैन ने सभी से विनय पूर्वक निवेदन कर दो मिनट का मौन रखवाया। रेखा जैन ने मेरी भावना का पाठ किया, जिसमें बताया गया कि किसी भी इंसान की दूसरे के प्रति क्या भावना होनी चाहिए।</p>
<p>https://youtu.be/mjhCtdWQm3U wo</p>
<p>के डी पांडे जी ने कहा कि श्री विद्यासागर जी सिर्फ जैन संत नहीं, जन- जन के संत थे। मनोज सिंह ने कहा कि गुरुदेव के साहित्यों पर 58 पीएचडी हुई हैं। अखलाक अहमद ने कहा कि वे महान तपस्वी थे, उनका जीवन त्याग पूर्ण था। सिख समाज के गुरुचरण, दलजीत सिंह ने कहा गुरुदेव की प्रेरणा से सैकड़ों विद्यालय, गुरुकुल, गौशाला, हस्तकरघा केंद्र खुले। देश भर में उसमें लाखों लोगों को रोजगार मिला है। गुरुदेव का देश की बौद्धिक, आध्यात्मिक तरक्की के साथ आर्थिक तरक्की में भी बहुत योगदान रहा है। ईसाई समाज से प्रिंस विलियम ने कहा कि मैंने उनकी प्रेरणा से बने गुरुकुल में अध्ययन किया है। उनकी सोच अद्भुत है। अनिल कुमार जैन ने गुरुदेव के साथ बिताए क्षणों को ताजा करते हुए बताया कि गुरुदेव कहते थे कि बहाना बनाने वाले कई मिलेंगे पर तुम उदाहरण बनो, लोग तुम्हारा अनुसरण करें। जो पत्थर छैनी -हथौड़ी की चोट से डरता है, वह पत्थर कभी मूर्ति नहीं बन सकता। शांति पाठ अजीत जैन और नीलम जैन द्वारा पढ़ा गया। आरती भारत जैन और रमेश संघवी ने की।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर पनादेवी जैन, विमला जैन, रिंकी जैन, राशि जैन, विशाखा जैन, अनिल कुमार जैन, केडी पांडे, मनोज सिंह, आलोक चटर्जी , बिट्टू चैटर्जी, राहुल, वीरू सिंह, मुकेश यादव, मनोज यादव, रवि केशरी, सुनील सिंह, चंदन सिंह, अशोक चौधरी, मनीष जैन, अखलाक अहमद, अंसार अली खान, अतुल बेदादे, गुरुचरण सिंह, दलजीत सिंह, बलबीर सिंह, प्रिंस विलियम, जॉन स्मिथ, रमेश संघवी भारत सेठ, हिमांशु दोषी, मिलन मेहता, विपुल जानी, मीनू संघवी, बीना मेहता, अर्चना मटालिया, प्रिया शाह,कुसुम बेन मेहता आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>सर्वधर्म सभा में दी आचार्य श्री को विनयांजलि : दर्शन मात्र से ही भक्त हो जाते थे तृप्त &#8211; आचार्य प्रसन्न सागर महाराज </title>
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		<pubDate>Tue, 27 Feb 2024 08:30:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के महामुनि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के ब्रह्मलीन होने पर सर्व धर्म विनयांजलि सभा आयोजित की गई। इस मौके पर आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज की आचार्य श्री विद्यासागर जी पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद थी। पढ़िए राजकुमार अजमेरा, नवीन जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के महामुनि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के ब्रह्मलीन होने पर सर्व धर्म विनयांजलि सभा आयोजित की गई। इस मौके पर आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज की आचार्य श्री विद्यासागर जी पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद थी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजकुमार अजमेरा, नवीन जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> जैन धर्म के महामुनि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के ब्रह्मलीन होने पर सर्व धर्म विनयांजलि सभा आयोजित की गई। इस मौके पर आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज की आचार्य श्री विद्यासागर जी पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई। इस डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने इस धरती के भगवान आचार्य विद्यासागर जी के जीवन के कठिन तप, त्याग, तपस्या के प्रति अपने उद्गार और विनयांजलि को व्यक्त किया। कार्यक्रम में अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर गुरुदेव ने कहा कि संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर एक ऐसे संत थे, जिन्हें किसी जाति- मजहब, अपना- पराया, देसी- विदेशी से परहेज नहीं था। सभी धर्मों के अनुयायी उन्हें नमस्कार कर रहे हैं। वे संत नहीं, साक्षात् इस धरती के भगवान थे।</p>
<p>इस धरती पर उनके जैसा पूजनीय संत आज तक पैदा नहीं हुआ है। वह एक ऐसे वीतरागी महा संत थे, जिन्होंने आज तक अपने हाथों से पैसा, मोबाइल और भौतिक सामानों को हाथ नहीं लगाया। आचार्य भगवन विद्यासागर जी के आत्मा में पूरा भारत देश बसता था। भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने हमेशा हस्तकरघा उद्योग, आयुर्वेद औषधालय की स्थापना, गायों की रक्षा के लिए सैकड़ों गौशालाएं की स्थापना की। बालिकाओं की शिक्षा संस्कार आत्मनिर्भरता के लिए स्कूल कॉलेज की स्थापना की और जेल में प्रवचन देकर कैदियों के जीवन में सुधार आदि अनगिनत राष्ट्र निर्माण के कार्य किए। संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर समुद्र के उसे खारे पानी के समान थे, जिनके नजदीक जाकर भक्तों की प्यास बुझती ही नहीं थी।</p>
<p>आचार्य विद्यासागर एक ऐसे संत थे जिन्होंने कभी भी घड़ी नहीं देखी। अपने जीवन को ही समय बना लिया। उनके दर्शन मात्र पास में बैठने से ही भक्तों के मन तृप्त हो जाते थे। सारे विटामिन उनके पास बैठने से ही मिल जाते थे। उनके संयम में अनुराग था। तप प्रतिक्रमण अंतरंग से करते थे। संत शिरोमणि विद्यासागर जी के लिए बोलने के लिए मेरे पास शब्द कम हैं। ऐसे महा संत इस भारतवर्ष में हर युग में पैदा हो प्रत्येक 10-20 वर्षों में पैदा हों, तभी यह भारत देश अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड मे जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ सम्मेद शिखरजी पर्वत के ऊपर रहकर मेरे द्वारा 557 दिन तक कठिन मौन तपस्या उपवास की साधना गुरुदेव विद्यासागर जी के आशीर्वाद से ही मैंने की है। गुरुदेव ने मुझसे कहा कि अपने ज्ञान तप के टॉर्च का प्रकाश अपनी आत्मा में लगाओ।</p>
<p><strong>भारत रत्न देने की मांग</strong></p>
<p>इस मौके पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आचार्य विद्यासागर जी के समाधि लीन होने पर कहा कि यह राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण और राष्ट्र कल्याण को दिया है। उनके बताए हुए आदर्श को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। समाजसेवी सुरेश झाझंरी के द्वारा आचार्य विद्यासागर जी को भारत रत्न की उपाधि देने की मांग पर अन्नपूर्णा देवी जी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री जी से इस विषय पर बात करूंगी एवं आप सभी की भावनाओं को प्रधानमंत्री के पास तक पहुंचाऊंगी। इस मौके पर विधायक डॉ. नीरा यादव ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी जन-जन के आराध्य थे।</p>
<p>जिला परिषद अध्यक्ष रामधन यादव पूर्व अध्यक्ष शालिनी गुप्ता, वार्ड पार्षद पिंकी जैन, सिख समाज, मारवाड़ी समाज, राजपूत समाज एवं कई समाज स्वयंसेवी संस्थाओं के अध्यक्ष मंत्री पदाधिकारी ने अपनी बातों को रखा और गुरुदेव के प्रति अपने श्रद्धांजलि व्यक्त की। इस कार्यक्रम के संयोजक मनीष सेठी थे। इस मौके पर सुनील छाबड़ा, मनीष सेठी, दिलीप जैन समाज के उप मंत्री नरेंद्र झांझरी, राज छाबड़ा, सुरेंद्र काला, पूर्व अध्यक्ष ललित सेठी, सुशील छाबड़ा , कमल सेठी, डिंपल छाबडा, सुबोध गंगवाल, नवीन पांडया , आशा गंगवाल, नीलम सेठी, सोना सेठी, त्रिशला गंगवाल, सीमा सेठी, तारामणि सेठी, जैन समाज के प्रभारी राजकुमार अजमेरा, नवीन जैन, मनीष सेठी ने भी आचार्य विद्यासागर जी के प्रति अपनी विनयांजलि अर्पित की।</p>
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