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	<title>सम्मेदशिखर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सम्मेदशिखर में होगा जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव : 18 अप्रैल को मुनिश्री प्रमाणसागरजी देंगे शिष्यों को दीक्षा  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:03:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय धरा एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्म जागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रही है। 18 अप्रैल शनिवार का वह पावन दिवस, जब मुनि प्रमाण सागर अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे। केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। इंदौर से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय धरा एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्म जागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रही है। 18 अप्रैल शनिवार का वह पावन दिवस, जब मुनि प्रमाण सागर अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे। केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर की पावन, वंदनीय धरा एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्मजागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रही है। 18 अप्रैल शनिवार का वह पावन दिवस, जब मुनि प्रमाण सागर अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे, केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। ऐसा प्रतीत होता है मानो 1968 का स्वर्णिम इतिहास पुनः जीवंत हो उठेगा, जब मुनिश्री ज्ञानसागरजी महाराज ने एक ऐसे संत को दीक्षा दी थी, जिन्होंने आगे चलकर पूरे भारत में संयम की अलख जगाई और सैकड़ों मुनि-आर्यिकाओं को दीक्षित कर धर्मध्वजा को ऊंचा किया। उसी महान परंपरा के संवाहक मुनिश्री प्रमाण सागरजी का जीवन स्वयं त्याग और तपस्या की प्रेरक गाथा है।</p>
<p><strong>मुनिश्री ने मध्यप्रदेश को कर्मस्थली बनाया</strong></p>
<p>राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं स्थानीय मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने नवीन कुमार के रूप में हजारीबाग की धरती पर सेठी परिवार में जन्म लिया। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बाल्यकाल बिताते हुए वे गुरुदेव आचार्य विद्यासागर के दिव्य व्यक्तित्व से अत्यंत प्रभावित होकर मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया। युवावस्था के सपनों का त्याग कर आत्म कल्याण की राह चुनना ही उनके जीवन की दिशा बन गया। सन् 1988 में सिद्धक्षेत्र सोनागिर की पवित्र भूमि पर उन्होंने भव्य जैनेश्वरी दीक्षा लेकर संसार से विरक्ति का सशक्त संदेश दिया। दीक्षा के बाद वर्षों तक मध्यप्रदेश को कर्मस्थली बनाकर उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा और करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>15 अप्रैल को सम्मेद शिखर में मंगल प्रवेश </strong></p>
<p>वर्ष 2005 में सम्मेदशिखर की तलहटी में गुणायतन और सेवायतन की स्थापना कर धर्म को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया। लाखों श्रद्धालुओं के जीवन में उन्होंने समाधान, प्रेरणा और आस्था का दीप प्रज्ज्वलित किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायक रहा। इंदौर और भोपाल के ऐतिहासिक चातुर्मासों के माध्यम से उन्होंने समाज के बच्चों को संस्कार, संयम और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया तथा विद्या प्रमाण गुरुकुलम की स्थापना कर भविष्य की पीढ़ी को दिशा प्रदान की। अब वही गुरुवर वर्ष 2026 में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं, जब वे 15 अप्रैल को अपने शिष्यों एवं संसघ सहित सम्मेदशिखर की पवित्र भूमि पर मंगल प्रवेश करेंगे और उन्हें संयम जीवन की ओर अग्रसर करेंगे। यह क्षण केवल दीक्षा का नहीं, आत्मजागरण का है। यह अवसर केवल देखने का नहीं, अनुभव करने का है। यह आयोजन केवल इतिहास नहीं, भावनाओं का महासंगम होगा। जहां त्याग की गंगा बहेगी, वैराग्य का दीप जलेगा और हजारों श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति के आंसू झिलमिलाएंगे। नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
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		<title>भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक 31 जुलाई को: तिथि के अनुसार श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता है मोक्ष कल्याणक  </title>
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		<pubDate>Wed, 30 Jul 2025 11:43:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के सभी तीर्थंकरों के पंच कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन समाज में विशेष धार्मिक आस्था और श्रद्धा रहती है। तीर्थंकर भगवानों के कल्याणकों पर मंदिरों में विशेष पूजन, विधान, धार्मिक कार्यक्रम और महायज्ञादि किए जाते हैं। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक इस बार 31 जुलाई को आ रहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के सभी तीर्थंकरों के पंच कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन समाज में विशेष धार्मिक आस्था और श्रद्धा रहती है। तीर्थंकर भगवानों के कल्याणकों पर मंदिरों में विशेष पूजन, विधान, धार्मिक कार्यक्रम और महायज्ञादि किए जाते हैं। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक इस बार 31 जुलाई को आ रहा है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के सभी तीर्थंकरों के पंच कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन समाज में विशेष धार्मिक आस्था और श्रद्धा रहती है। तीर्थंकर भगवानों के कल्याणकों पर मंदिरों में विशेष पूजन, विधान, धार्मिक कार्यक्रम और महायज्ञादि किए जाते हैं। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक इस बार 31 जुलाई को आ रहा है। तिथि के अनुसार यह श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान पारसनाथ ने सम्मेदशिखर पर जाकर निर्वाण को प्राप्त किया था। इस दिन जैन धर्मावलंबी भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और निर्वाण लाडू चढ़ाते हैं। मोक्ष कल्याणक के बारे में उल्लेखनीय है कि जैन धर्म और ग्रंथों में मोक्ष का अर्थ है जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति। इस असार संसार से सारे कर्मों को नष्ट कर मोक्ष पाना। भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक की यह तिथि श्रावण शुक्ल सप्तमी भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसे मोक्ष सप्तमी के रूप में भी ख्याति अर्जित है। तीर्थराज सम्मेद शिखरजी के बारे में मान्यता है कि भगवान पार्श्वनाथ ने यहीं से मोक्ष प्राप्त किया था। इस अवसर पर जैन मंदिरों में भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना के बाद निर्वाण लाडू चढ़ाने की प्रथा है। जैन धर्मावलंबी भगवान पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चना, शांतिधारा और अन्य धार्मिक क्रियाएं भी करते हैं। भगवान पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं और उनका जन्म उनका जन्म वाराणसी में राजा अश्वसेन और रानी वामा के घर हुआ था।</p>
<p><strong>सभी को चैतन्य प्रभु से रिश्ता जोड़ना चाहिए </strong></p>
<p>भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर सम्मेदशिखर जी क्षेत्र की पूजा और निर्वाण कांड का पाठ करने के बाद निर्वाण लाडू चढ़ाने का विधान है। संतों की वाणाी के अनुसार जिस प्रकार यह लाडू रस भरी बूंदी से निर्मित किए जाते हैं। उसी प्रकार अंतरंग से आत्मा की प्र्रीति रस से भरी हो जाए तो परमात्मा बनने में देरी नहीं लगती। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिनका मोक्ष हो जाता है। उनका मनुष्य भव में जन्म लेना सार्थक हो जाता है। जब तक संसार है तब तक चिंता रहती है, जहां मोक्ष का पूरी तरह क्षय हो जाता है वहीं मोक्ष हो जाता है। अतः हमें अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए मोह रूपी शत्रु का नाश करना पड़ता है। इसलिए सभी का सम्मान करना चाहिए। बड़ों के प्रति विनय भाव रखना चाहिए क्योंकि, विनय ही मोक्ष का द्वार है। मुनिराज और साधु-संतों की अमर वाणी है कि सभी को चैतन्य प्रभु से रिश्ता जोड़ना चाहिए क्योंकि, पुण्यात्मा जहां भी चरण रखते हैं। वहां से दुख, अंधकार, कषाय, क्लेश स्वमेव ही प्रकाश और सुखों में परिवर्तित हो जाते हैं। इस दिन खास तौर पर जैन समाज की बालिकाएं सामूहिक रूप् से निर्जला उपवास रखती हैं। दिनभर पूजन, स्वाध्याय, मनन, चिंतन, सामूहिक प्रतिक्रमण करते हुए संध्या के समय देव शास्त्र गुरु की सामूहिक भक्ति कर आत्म चिंतन करती हैं। शाम को उनको घोड़ी-बग्घी में बिठाकर घुमाया जाता है तथा अगले दिन उनका पारणा कराया जाता है। इस पर्व को मोक्ष सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। जिस तरह प्रभु का स्पर्श हो हमें स्वर्ण ही नहीं पारस बना देता है। उसी तरह हम भी भगवान पार्श्वनाथ की तरह आपने भवों को कम करके निर्वाण प्राप्ति की ओर बढ़ें और मोक्ष प्राप्त करें। यही सीख हमें लेना चाहिए।</p>
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		<title>तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का मोक्ष कल्याणकः तिथि के अनुसार मोक्ष कल्याणक इस बार 3 अप्रैल को मनाया जाएगा सारांश </title>
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		<pubDate>Thu, 03 Apr 2025 11:39:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के तीसरें तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का मोक्ष कल्याणक चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 3 अप्रैल को आ रही है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान और विधान किए जाएंगे। भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के साथ ही अष्ट द्रव्य समर्पित कर निर्वाण लाडू चढ़ाए जाते [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के तीसरें तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का मोक्ष कल्याणक चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 3 अप्रैल को आ रही है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान और विधान किए जाएंगे। भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के साथ ही अष्ट द्रव्य समर्पित कर निर्वाण लाडू चढ़ाए जाते हैं। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंखला में आज उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संयोजित प्रस्तुति पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का 3 अप्रैल को मोक्ष कल्याणक है। देश के कोने-कोने में दिगंबर जैन मंदिरों में इस दिन विशेष विधान आदि होंगे। भगवान संभवनाथ जी के मोक्ष कल्याण सहित अन्य जानकारी से रूबरू होते हैं। दिव्य जीवन रूप से संभवनाथ भगवान का जन्म भरत क्षेत्र में स्थित श्रावस्ती नगरी में राजा जितारी और रानी सेना देवी के घर हुआ था। जब भगवान संभवनाथ रानी सेना देवी के गर्भ में थे। पुराणों के अनुसार भगवान संभवनाथ जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। उनका चिन्ह अश्व (घोड़ा) था।</p>
<p>उन्होंने सम्मेत शिखर पर अपने सभी कर्मों का क्षय कर निर्वाण प्राप्त किया था। उन्होंने अपने पुत्र को राज्य सौंपकर जनता की गरीबी दूर करने का काम किया था। उन्होंने मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन श्रमण दीक्षा स्वीकार की थी। 14 वर्ष की साधना के बाद कैवल्य ज्ञान प्राप्त हुआ था। उनके पहले शिष्य का नाम चारूदत और पहली शिष्या का नाम श्यामा था। उनके पहले गणधर चारूजी थे। तीर्थंकर श्री संभवनाथ भगवान का अंतिम जन्म घातकी खंड द्वीप के ऐरावत क्षेत्र में स्थित क्षेमपुरी शहर में राजा विपुलवाहन के रूप में हुआ था। जन्म से ही भगवान संभवनाथ के पास तीन प्रकार का ज्ञान था, श्रुत, मति और अवधि।</p>
<p>राजकुमार संभवनाथ राजसी सुख-सुविधाओं के बीच पले-बढ़े, लेकिन उन्हें विलासितापूर्ण जीवनशैली में कोई रुचि नहीं थी। कर्मफल और माता-पिता की आज्ञा के अनुसार, राजकुमार संभवनाथ का विवाह हुआ और उचित आयु में राज्याभिषेक हुआ। बहुत लंबे और शांतिपूर्ण शासन के बाद, देवताओं के अनुरोध पर भगवान संभवनाथ ने दीक्षा ली। दीक्षा लेने के बाद, भगवान ने एक साल तक खूब दान किया (वर्षिदान) और उसके बाद उनका दीक्षा समारोह मनाया गया। तीर्थंकर भगवान के दीक्षा समारोह की पूरी व्यवस्था देवताओं ने की थी। राजा संभवनाथ के साथ 20 हजार अन्य राजाओं ने भी दीक्षा ली थी। 14 वर्ष की दीक्षा के पश्चात राजा संभवनाथ ने अपने संज्वलन कर्म समाप्त किए और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को सर्वज्ञता, केवलज्ञान प्राप्त किया।</p>
<p>भगवान संभवनाथ के मुख्य गणधर चारु थे। उन्होंने संभवनाथ भगवान से पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और फिर लोगों को उपदेश दिए; वे लोगों के जीवन में मोक्ष के बीज बो रहे थे। भगवान के दर्शन मात्र से ही कई लोग सर्वज्ञ हो गए और सभी कष्टों से मुक्त हो गए। भगवान संभवनाथ ने सम्मेद शिखर पर जाकर चैत्र शुक्ल षष्ठी के दिन मोक्ष प्राप्त किया। यह दिन जैन समाज के लिए बड़ी आस्था और श्रद्धा का दिन है।</p>
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		<title>आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का गर्भ कल्याणक 19 मार्च को: तिथि के अनुसार चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन आता है मोक्ष कल्याणक इस बार 6 मार्च को। </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_eighth_tirthankara_lord_chandraprabhus_garbha_kalyanak_is_on_march_19/</link>
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		<pubDate>Tue, 18 Mar 2025 06:21:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी का गर्भ कल्याणक इस बार 19 मार्च बुधवार को आ रहा है। भगवान चंद्रप्रभु ने चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन गर्भ में स्थान प्राप्त किया था। भगवान के गर्भ कल्याणक पर दिगंबर जैन समाज के विभिन्न मंदिरों, चैत्यालयों में श्रद्धा और भक्ति के साथ विधान होंगे। श्रीफल जैन न्यूज की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी का गर्भ कल्याणक इस बार 19 मार्च बुधवार को आ रहा है। भगवान चंद्रप्रभु ने चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन गर्भ में स्थान प्राप्त किया था। भगवान के गर्भ कल्याणक पर दिगंबर जैन समाज के विभिन्न मंदिरों, चैत्यालयों में श्रद्धा और भक्ति के साथ विधान होंगे। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में उप संपादक प्रीतम लखवाल की ओर से यह संकलित जानकारी पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैनधर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का गर्भ कल्याणक 19 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन देशभर के प्रसिद्ध जैन मंदिरों में विभिन्न विधान और शांतिधारा आदि के महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। भगवान श्री चंद्रप्रभु जी के गर्भ और जन्म कल्याणक के बारे में पुराणों में वर्णित है कि जब इनकी 6 महीने की आयु बाकी रह गई। तब जम्बूद्वीप के भरत क्षेत्र में चंद्रपुर नगर के महासेन राजा की लक्ष्मणा महादेवी के यहां रत्नों की वर्षा होने लगी। चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन गर्भ कल्याणक महोत्सव हुआ एवं पौष कृष्ण एकादशी के दिन भगवान चंद्रप्रभ का जन्म हुआ। तीन माह का छद्मस्थ काल व्यतीत कर भगवान ने दीक्षा वन में नाग वृक्ष के नीचे फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन केवल ज्ञान प्राप्त किया। चंद्रप्रभु भगवान सभी देशों में विहार कर धर्म की प्रवृत्ति करते हुए सम्मेदशिखर पर पहुंचे।</p>
<p>एक माह तक प्रतिमा योग से स्थित होकर फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र में शाम के समय शुक्ल ध्यान द्वारा सर्वकर्म को नष्ट कर सिद्धपद को प्राप्त हुए। भगवान चंद्रप्रभु के तप कल्याणक के बारे में वर्णित है कि किसी समय दर्पण में अपना मुख देख रहे थे कि भोगों से विरक्त होकर देवों द्वारा लाई गई ‘विमला’ नाम की पालकी पर बैठकर सर्वर्तुक वन में गए। वहां पौष कृष्ण एकादशी के दिन हजार राजाओं के साथ दीक्षा ली।</p>
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		<title>तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का गर्भ कल्याणक है 7 मार्च को: तिथि के अनुसार गर्भ कल्याणक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 13:35:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के तीसरें तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का गर्भ कल्याणक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान और विधान किए जाते हैं। भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के साथ ही अष्ट द्रव्य समर्पित किए जाते हैं। इस बार भगवान का गर्भ कल्याण 7 मार्च शुक्रवार को है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के तीसरें तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का गर्भ कल्याणक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान और विधान किए जाते हैं। भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के साथ ही अष्ट द्रव्य समर्पित किए जाते हैं। इस बार भगवान का गर्भ कल्याण 7 मार्च शुक्रवार को है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंखला में आज <span style="color: #ff0000">उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संयोजित प्रस्तुति पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>इंदौर। जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का 7 मार्च को गर्भ कल्याणक है। देश के कोने-कोने में दिगंबर जैन मंदिरों में इस दिन विशेष विधान आदि होंगे। भगवान संभवनाथ जी के गर्भ कल्याण सहित अन्य जानकारी से रूबरू होते हैं। दिव्य जीवन रूप से संभवनाथ भगवान का गर्भाधान हुआ और फिर उनका जन्म भरत क्षेत्र में स्थित श्रावस्ती नगरी में राजा जितारी और रानी सेना देवी के घर हुआ था। जब भगवान संभवनाथ रानी सेना देवी के गर्भ में थे। उस वर्ष राज्य में सांभा अर्थात मूंगफली की फसल खूब हुई थी। इसलिए इनका नाम संभवनाथ पड़ा। पुराणों के अनुसार भगवान संभवनाथ जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। उनका चिन्ह अश्व (घोड़ा) था।</p>
<p>उन्होंने सम्मेत शिखर पर अपने सभी कर्मों का क्षय कर निर्वाण प्राप्त किया था। उन्होंने अपने पुत्र को राज्य सौंपकर जनता की गरीबी दूर करने का काम किया था। उन्होंने मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन श्रमण दीक्षा स्वीकार की थी। 14 वर्ष की साधना के बाद कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था। उनके पहले शिष्य का नाम चारूदत और पहली शिष्या का नाम श्यामा था। उनके पहले गणधर चारूजी थे। तीर्थंकर श्री संभवनाथ भगवान का अंतिम जन्म घातकी खंड द्वीप के ऐरावत क्षेत्र में स्थित क्षेमपुरी शहर में राजा विपुलवाहन के रूप में हुआ था। राजा विपुलवाहन बहुत ही ईमानदार और प्रजा से प्रेम करने वाले व्यक्ति थे।</p>
<p>उन्होंने इस तरह से शासन किया कि उनके राज्य में रहने वाले लोगों को ज़रा भी तकलीफ़ न पहुंचे। वे राजनीति में बहुत निपुण थे। राजा विपुलवाहन धर्म में गहरी रुचि रखते थे। वे अपना अतिरिक्त समय ध्यान, धार्मिक अध्ययन और तीर्थंकरों की पूजा में बिताते थे। वे श्रावक धर्म के 12 व्रतों का पालन करते थे। उनके राज्य से कोई भी व्यक्ति भूखा या खाली हाथ नहीं लौटता था।</p>
<p><strong>संभवनाथ भगवान: बचपन, दीक्षा और केवल ज्ञान</strong></p>
<p>जन्म से ही भगवान संभवनाथ के पास तीन प्रकार का ज्ञान था, श्रुत, मति और अवधि। राजकुमार संभवनाथ राजसी सुख-सुविधाओं के बीच पले-बढ़े, लेकिन उन्हें विलासितापूर्ण जीवनशैली में कोई रुचि नहीं थी। कर्मफल और माता-पिता की आज्ञा के अनुसार, राजकुमार संभवनाथ का विवाह हुआ और उचित आयु में उनका राज्याभिषेक हुआ। बहुत लंबे और शांतिपूर्ण शासन के बाद, देवताओं के अनुरोध पर भगवान संभवनाथ ने दीक्षा ली। दीक्षा लेने के बाद, भगवान ने एक साल तक खूब दान किया (वर्षिदान) और उसके बाद उनका दीक्षा समारोह मनाया गया। तीर्थंकर भगवान के दीक्षा समारोह की पूरी व्यवस्था देवताओं ने की थी। राजा संभवनाथ के साथ 20 हजार अन्य राजाओं ने भी दीक्षा ली थी। 14 वर्ष की दीक्षा के पश्चात राजा संभवनाथ ने अपने संज्वलन कर्म समाप्त किए और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को सर्वज्ञता, केवलज्ञान प्राप्त किया। केवल ज्ञान प्राप्त करने के बाद ही तीर्थंकर देशना देते हैं, तब तक वे मौन रहते हैं। तीर्थंकर भगवान के ज्ञान प्राप्त करने के बाद देवगण समोवसरन, दिव्य सभा की रचना करते हैं।</p>
<p>तीर्थंकर भगवान के ज्ञान प्राप्त करने के बाद गणधर (तीर्थंकर के प्रमुख शिष्य) स्थापित हो जाते हैं और वे सभी भगवान के समशरण में विराजमान हो जाते हैं। भगवान संभवनाथ के मुख्य गणधर चारु थे। उन्होंने संभवनाथ भगवान से पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और फिर लोगों को उपदेश दिए; वे लोगों के जीवन में मोक्ष के बीज बो रहे थे। भगवान के दर्शन मात्र से ही कई लोग सर्वज्ञ हो गए और सभी कष्टों से मुक्त हो गए।</p>
<p><strong>देशनाः अनित्य भावना</strong></p>
<p>तीर्थंकर भगवान की वाणी का प्रभाव ऐसा होता है कि वह सभी आवरणों को भेदकर सामने वाले को सर्वज्ञता की प्राप्ति करा देती है। उनकी वाणी अज्ञान के सभी आवरणों से सर्वथा मुक्त होती है। भगवान के तीर्थंकर-नाम-गोत्र कर्म का बंधन इसलिए किया गया है कि लोग मोक्ष प्राप्त करें क्योंकि, तीर्थंकर स्वयं के साथ-साथ अनेकों को भी मोक्ष प्राप्त कराते हैं। इसलिए देवगण भी इस उद्देश्य से समवशरण की रचना करते हैं कि कैसे अधिक से अधिक लोग तीर्थंकर भगवान की वाणी का लाभ उठा सकें। देवगण प्रत्येक घर में संदेश भेजकर तीर्थंकर भगवान की देशना और समोवसरन में आने का निमंत्रण देते हैं। भगवान संभवनाथ ने अपनी देशना में अनित्य भावना के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला है। देशना में भगवान ने बताया कि इस संसार में कौन सी चीजें नित्य हैं और कौन सी चीजें अनित्य हैं। अनित्य का अर्थ है अस्थायी और नित्य का अर्थ है स्थायी। शास्त्रों का अध्ययन करते समय या सत्संग में, केवल कुछ क्षणों के लिए हमें ऐसा लगता है कि यह पूरी दुनिया अस्थायी है और केवल आत्मा ही स्थायी है। इसका कोई अर्थ नहीं है। इस बात को स्थायी रूप से समझने के लिए, यह समझना ज़रूरी है कि कौन सी चीज़ स्थायी है और कौन सी चीज़ अस्थायी है। हम इस दुनिया में अपनी पांच इंद्रियों से जो कुछ भी अनुभव कर रहे हैं। हमें यह जांचने की ज़रूरत है कि वह अस्थायी है या स्थायी।</p>
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		<title>आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का मोक्ष कल्याणक 6 मार्च को: तिथि के अनुसार फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन आता है मोक्ष कल्याणक इस बार 6 मार्च को। </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Mar 2025 13:01:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म क आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी का मोक्ष कल्याणक इस बार 6 मार्च गुरुवार को आ रहा है। भगवान चंद्रप्रभु ने फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन मोक्ष प्राप्त किया था। भगवान के मोक्ष कल्याणक पर दिगंबर जैन समाज के विभिन्न मंदिरों, चैत्यालयों में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मोक्ष कल्याणक पर विधान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म क आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी का मोक्ष कल्याणक इस बार 6 मार्च गुरुवार को आ रहा है। भगवान चंद्रप्रभु ने फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन मोक्ष प्राप्त किया था। भगवान के मोक्ष कल्याणक पर दिगंबर जैन समाज के विभिन्न मंदिरों, चैत्यालयों में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मोक्ष कल्याणक पर विधान होंगे। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष प्रस्तुति में उपसंपादक प्रीतम लखवाल की ओर से यह संकलित जानकारी पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैनधर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु तीन माह का छद्मस्थ काल व्यतीत कर भगवान दीक्षावन में नागवृक्ष के नीचे फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन केवल ज्ञान को प्राप्त हुए थे। ये चंद्रप्रभु भगवान समस्त आर्य देशों में विहार कर धर्म की प्रवृत्ति करते हुए सम्मेदशिखर पर पहुंचे। एक माह तक प्रतिमा योग से स्थित होकर फाल्गुन कृष्ण सप्तमी के दिन ज्येष्ठा नक्षत्र में सायंकाल के समय शुक्लध्यान द्वारा सर्वकर्म को नष्ट कर सिद्धपद को प्राप्त हुए थे। इनके गर्भ और जन्म कल्याणक के बारे में पुराणों में वर्णित है कि अनंतर जब इनकी छह माह की आयु बाकी रह गई, तब जम्बूद्वीप के भरत क्षेत्र में चंद्रपुर नगर के महासेन राजा की लक्ष्मणा महादेवी के यहां रत्नों की वर्षा होने लगी। चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन गर्भ कल्याणक महोत्सव हुआ एवं पौष कृष्ण एकादशी के दिन भगवान चंद्रप्रभ का जन्म हुआ।</p>
<p><strong>भगवान चंद्रप्रभु का तप कल्याणक </strong></p>
<p>किसी समय दर्पण में अपना मुख देख रहे थे कि भोगों से विरक्त होकर देवों द्वारा लाई गई ‘विमला’ नाम की पालकी पर बैठकर सर्वर्तुक वन में गए। वहां पौष कृष्ण एकादशी के दिन हजार राजाओं के साथ दीक्षा ले ली। पारणा के दिन नलिन नामक नगर में सोमदत्त के यहां आहार हुआ था।</p>
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		<title>श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव : 27 फरवरी से 3 मार्च तक होंगे आयोजन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/panchkalyanak_pratishtha_mahotsav_will_be_organized_from_27th_february_to_3rd_march/</link>
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		<pubDate>Tue, 27 Feb 2024 12:40:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मध्यप्रदेश की औद्योगिक नगरी इन्दौर, देवास के मध्य आचार्य श्री प्रसन्नऋषिजी महाराज की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से ऋषितीर्थ परिसर ने पूर्ण रूप ले लिया है। इस शुभ अवसर पर यहाँ श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव दिनांक 27 फरवरी से 3 मार्च 2024 तक सम्पन्न होने जा रहा है। आचार्य श्री प्रसन्नऋषिजी ससंघ, आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मध्यप्रदेश की औद्योगिक नगरी इन्दौर, देवास के मध्य आचार्य श्री प्रसन्नऋषिजी महाराज की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से ऋषितीर्थ परिसर ने पूर्ण रूप ले लिया है। इस शुभ अवसर पर यहाँ श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव दिनांक 27 फरवरी से 3 मार्च 2024 तक सम्पन्न होने जा रहा है। आचार्य श्री प्रसन्नऋषिजी ससंघ, आचार्य श्री विहर्षसागरजी ससंघ, आचार्यश्री दयाऋषिजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हो रहे महोत्सव में मंगलवार को गर्भ-कल्याण (पूर्वार्द्ध ) की क्रियाएं हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए एक रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong> । मध्यप्रदेश की औद्योगिक नगरी इन्दौर, देवास के मध्य आचार्य श्री प्रसन्नऋषिजी महाराज की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से ऋषितीर्थ परिसर ने पूर्ण रूप ले लिया है। आचार्य श्री कुशाग्रनन्दजी महाराज आचार्य श्री पुष्पदन्त सागरजी महाराज के आशीर्वाद से आचार्य श्री प्रसन्नऋषिजी ससंघ, आचार्य श्री विहर्षसागरजी ससंघ, आचार्यश्री दयाऋषिजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में नर से नारायण, भक्त से भगवान, पाषाण से परमात्मा बनने की क्रिया का दिग्दर्शन होगा।</p>
<p>श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव दिनांक 27 फरवरी से 3 मार्च 2024 तक सम्पन्न होने जा रहा है। महोत्सव में मंगलवार को गर्भ-कल्याण (पूर्वार्द्ध ) की क्रियाएं हुई। श्रीमज्जिनेन्द्र पार्श्वनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति और माँ जिनवाणी दिगम्बर जैन ट्रस्ट एवं ऋषितीर्थ परिवार ने सभी जैन बंधुओं से अनुरोध किया है की आत्मोसाधन के इस पावन कार्यक्रम में यथाशक्ति एवं त्रियोगपूर्वक श्रेष्ठीजन परिवार सहित पधारकर सातिशय पुण्य का अर्जन करें।</p>
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		<title>निःशुल्क नेत्र परिक्षण शिविर का हुआ आयोजन : लायन्स क्लब नागदा का 114 वां आयोजन  </title>
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		<pubDate>Sun, 25 Feb 2024 16:32:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लायन्स क्लब नागदा एवम् महावीर इन्टरनेशनल नागदा के संयुक्त तत्वाधान में निःशुल्क नेत्र परिक्षण, दंत परिक्षण व दर्द निवारक परिक्षण शिविर का आयोजन आदित्य विद्या मंदिर विद्यालय में किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने सेवाएँ लीं। पढ़िए जीवन जैन की रिपोर्ट । नागदा। लायन्स क्लब नागदा एवम् महावीर इन्टरनेशनल नागदा के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>लायन्स क्लब नागदा एवम् महावीर इन्टरनेशनल नागदा के संयुक्त तत्वाधान में निःशुल्क नेत्र परिक्षण, दंत परिक्षण व दर्द निवारक परिक्षण शिविर का आयोजन आदित्य विद्या मंदिर विद्यालय में किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने सेवाएँ लीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जीवन जैन की रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नागदा।</strong> लायन्स क्लब नागदा एवम् महावीर इन्टरनेशनल नागदा के संयुक्त तत्वाधान में निःशुल्क नेत्र परिक्षण, दंत परिक्षण व दर्द निवारक परिक्षण शिविर का आयोजन आदित्य विद्या मंदिर विद्यालय में किया गया। लायन्स क्लब नागदा के नेत्र कमेटी चेयरमैन लायन कमलेशजी जायसवाल व महावीर इन्टरनेशनल के चेयरमैन चिमनजी काठेंड ने बताया कि शिविर में 40 मरीजों का दर्द परिक्षण डॉ अविनाश बुंदीवाल उज्जैन द्वारा, 22 मरीजों का दंत परिक्षण लायन डॉ. परांकुशजी शर्मा, लायन डॉ. निखिलजी सोनी व लायन डॉ राहुल जी लोदवाल द्वारा किया गया। 77 मरीजों का नेत्र परिक्षण मुरलीधर कृपा हास्पिटल मक्सी द्वारा किया गया, जिसमें से 22 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चयनित कर मक्सी भेजा गया । साथ ही डाँ अग्निहोत्री पेथ लेब के सहयोग से जनरल परिक्षण किया गया ।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद </strong></p>
<p>अतिथि के रूप में नागदा खाचरौद विधान सभा के विधायक डाँ तेज बहादुर सिंहजी चौहान, पूर्व विधायक लालसिह जी राणावत, लायन गुलजारी लाल जी त्रिवेदी, इंदौर उज्जैन झोन के झोन चेयरमेन राजेश गेलडा,महावीर इंटरनेशनल चेन्नई के चेयरमेन योगेन्द्रजी कोठरी, झोन सचिव हर्षित नागदा झोन कोषाध्यक्ष मनीष ओरा मंचासिन थे । अध्यक्षता क्लब अध्यक्ष लायन प्रमोद जैन ने की । संचालन लायन डाँ प्रदीप जी रावल ने किया व आभार महावीर इन्टरनेशनल मनोज वागरेचा ने माना । अतिथियों का स्वागत लायन गोविन्द जी मोहता, लायन बदीलालजी पोरवाल, लायन रविजी शर्मा, लायन डॉ प्रदीप शर्मा, लायन आर के यादव, लायन पवन गुप्ता, जितेन्द्र पोखरना, मनोज ओरा, बाबुलाल डाबी ने किया । इस अवसर पर लायन डाँ एस आर चावला सा, लायन दीपक दुबे, लायन घनश्याम राठी, जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष मनीष चपलोद, अमित बम ,राजेन्द्र जैन नमन जायसवाल व स्कूल स्टॉफ उपस्थित थे ।</p>
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		<title>तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव :  धूमधाम से मनाया गया सभी सभी जिनालयों </title>
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		<pubDate>Fri, 23 Feb 2024 07:38:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिनालयों में जैन धर्म के पन्द्रहवें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया इस अवसर पर सामूहिक रूप से अर्घ्य चढ़ाकर विश्व शांति की कामना की गई। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट। फागी। परिक्षेत्र के चकवाडा, चौरू, नारेडा, मंडावरी, मेहंदवास, निमेडा, लसाडिया एवं लदाना सहित कस्बे के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिनालयों में जैन धर्म के पन्द्रहवें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया इस अवसर पर सामूहिक रूप से अर्घ्य चढ़ाकर विश्व शांति की कामना की गई। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट।</strong></p>
<hr />
<p><strong>फागी।</strong> परिक्षेत्र के चकवाडा, चौरू, नारेडा, मंडावरी, मेहंदवास, निमेडा, लसाडिया एवं लदाना सहित कस्बे के आदिनाथ मंदिर, बीचला मंदिर,मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ,पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सहित सभी जिनालयों में जैन धर्म के पन्द्रहवें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ,कार्यक्रम में जैन महासभा के प्रतिनिधि राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि मुनिसुव्रतनाथ जिनालय में आज प्रातः श्रावकों द्वारा श्रीजी का अभिषेक,शांतिधारा, अष्टद्वव्यों से पूजा-अर्चना कर सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए जैन- धर्म के पन्द्रहवें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का जयकारों के साथ सामूहिक रूप से अर्घ्य चढ़ाकर विश्व शांति की कामना की गई, मंदिर समिति के अध्यक्ष महावीर झंडा एवं कमलेश चौधरी ने बताया कि 28 फरवरी को छठे तीर्थंकर भगवान पदम प्रभु का मोक्ष कल्याण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद </strong><br />
कार्यक्रम में कपूरचंद जैन नला ,मोहनलाल झंडा, महावीर कठमाणा,केलास कासलीवाल हनुमान कलवाड़ा, हरकचंद झंडा, पंडित संतोष बजाज, महेंद्र गोधा,महेंद्र कासलीवाल, रमेश बजाज, महावीर बजाज,महावीर प्रसाद मोदी, पारस चोधरी, कमलेश झंडा,विनोद कमल झंडा, सुशील कासलीवाल, जीतू मोदी, तथा प्रेमदेवी पंसारी, विमला मोदी,कमला कासलीवाल, मंजू झंडा, शोभा झंडा सहित सभी श्रावक श्राविकाएं मौजूद थे।</p>
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		<title>पुरानी धरोहर के जीर्णोद्धार के कार्य का शुभारंभ :  संतभवन का भी होगा निर्माण </title>
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		<pubDate>Fri, 23 Feb 2024 07:17:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के एमडी जैन इंटर कॉलेज परिसर के बाल मंदिर की जगह नए विशाल भवन हॉल एवं तीन मंजिला संतभवन के निर्माण कार्य का एवं बाल मंदिर के निष्ठापण कार्य का भव्य शुभारंभ श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति के तत्वाधान में किया गया। पढ़िए शुभम जैन की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा के हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के एमडी जैन इंटर कॉलेज परिसर के बाल मंदिर की जगह नए विशाल भवन हॉल एवं तीन मंजिला संतभवन के निर्माण कार्य का एवं बाल मंदिर के निष्ठापण कार्य का भव्य शुभारंभ श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति के तत्वाधान में किया गया।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा ।</strong> 22 फरवरी को आगरा के हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के एमडी जैन इंटर कॉलेज परिसर के बाल मंदिर की जगह नए विशाल भवन हॉल एवं तीन मंजिला संतभवन के निर्माण कार्य का एवं बाल मंदिर के निष्ठापण कार्य का भव्य शुभारंभ श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति के तत्वाधान में किया गया। इस निर्माण कार्य का भव्य शुभारंभ शांतिनाथ भगवान के समक्ष श्रीफल भेंट कर एवं पूजा विधि विधान द्वारा प्रदीप जैन (पीएनएसी) बिमलेश जैन (मार्संस) श्री अशोक जैन (धागेवाले संतावास), डॉ जितेन्द्र जैन के विशेष सहयोग के साथ संपन्न हुआ. इस कड़ी में गुरुवार से बाल मंदिर के निष्ठापण के कार्य से शुरुआत की गई। इस शुभ अवसर पर सभी उपस्थित जन बहुत ही उत्साहित थे एवं समाज के हर घर से अपील की, कि इस सुंदर कार्य हेतु सभी समाज जन हिस्सा ले एवं अपना सहयोग देकर इस पुरानी धरोहर के जीर्णोद्धार में सहभागी बने।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-56082" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM.jpeg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-300x225.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-1024x768.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-768x576.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-74x55.jpeg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-111x83.jpeg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-215x161.jpeg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/02/WhatsApp-Image-2024-02-23-at-12.43.00-PM-990x743.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />ये रहे मौजूद </strong><br />
इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्रदीप जैन (PNC) उपाध्यक्ष बिमलेश जैन (मार्सन्स),अशोक जैन (धागे वाले, संतावास) कमल गोधा उपाध्यक्ष महामंत्री जितेंद्र जैन, कॉलेज प्रबंधक अखिल बरोलिया, अर्थमंत्री पुष्पेंद्र जैन पथिक, निर्मल जैन मोठ्या,आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीशप्रसाद जैन, दिलीप जैन उत्तम कोल्ड, पारस बाबु जैन उप मंत्री,राकेश जैन पार्षद,निर्माण मंत्री अमित जैन सेठी,रूपेश जैन (LIC),निर्मल कुमार जी, अक्षय जैन, गोपीचंद जैन,सुबोध जैन,रमेश जैन, अनंत जैन,मनीष जैन,प्रमेन्द्र जैन, सौरभ शास्त्री,सतीश जैन,राजेन्द्र जैन,पारस जैन,मनोज जैन कैनवास, सुशील जैन,यशपाल जैन,सुभाष जैन, अविनाश जैन,पवन जैन,संजीव जैन चोखो जीमण,शिवकुमार जैन, अलकेश जैन,धर्मेंद्र जैन,अंकेश जैन, शुभम जैन,आदि आगरा सकल जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।</p>
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