<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सन्मतिसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Tue, 19 Mar 2024 11:41:47 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>सन्मतिसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>त्रिलोकतीर्थधाम में मनाया गया सन्मतिसागर समाधि स्मृति दिवस   धूमधाम से मनाई गई विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि   </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sanmatisagar_samadhi_memorial_day_celebrated_in_triloktirthdham/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/sanmatisagar_samadhi_memorial_day_celebrated_in_triloktirthdham/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Mar 2024 11:41:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Baragaon श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[death anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Dharmasabha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Sanmatisagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Triloktirthdham]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[त्रिलोकतीर्थधाम]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पुण्यतिथि]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ागांव]]></category>
		<category><![CDATA[सन्मतिसागर महाराज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=57366</guid>

					<description><![CDATA[त्रिलोकतीर्थ दिगम्बराचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज का समाधि स्मृति दिवस त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव (बागपत) में 17 मार्च को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;      बड़ागांव। त्रिलोकतीर्थ दिगम्बराचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज का समाधि स्मृति दिवस त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव (बागपत) में 17 मार्च को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>त्रिलोकतीर्थ दिगम्बराचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज का समाधि स्मृति दिवस त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव (बागपत) में 17 मार्च को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;     </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ागांव।</strong> त्रिलोकतीर्थ दिगम्बराचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज का समाधि स्मृति दिवस त्रिलोकतीर्थ धाम बड़ागांव (बागपत) में 17 मार्च को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। श्री त्रिलोकतीर्थ धाम कमेटी के कार्याध्यक्ष महेंद्र जैन मधुवन द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार आचार्य शांतिसागर महाराज छाणी परंपरा के पंचम पट्टाचार्य राष्ट्रऋषि, सिंहरथ प्रवर्तक, त्रिलोकतीर्थ प्रणेता आचार्य विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज का गुरुसमाधि स्मृति दिवस महोत्सव विश्व की प्रथम अलौकिक कृति त्रिलोकतीर्थ धाम में ऐलाचार्य श्री त्रिलोकभूषण महाराज, ऐलाचार्य श्री प्रभावना भूषण महाराज, आर्यिका चंद्रमती माताजी, मुक्तिभूषण माताजी, दृष्टिभूषण माताजी, अनुभूति भूषण माताजी सहित अनेकों साधु संत एवं ब्रह्मचारी भैयाजी एवं दीदियों के पावन सान्निध्य में मनाया गया।</p>
<p>अतिश्य क्षेत्र बड़ागांव के त्रिलोक तीर्थ धाम में रविवार को आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि धूमधाम से मनाई गई। अनुष्ठान में बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी शामिल हुए तथा गुरु समाधि पर पुष्प अर्पित किए। वहीं जैन संत और साध्वियों ने उन्हें आशीर्वाद दिया। अनुष्ठान सुबह पारस प्रभु की पूजा-अर्चना और अभिषेक के साथ शुरू हुआ। ब्रह्मचारी नवीन भईया ने मंडप और गुरु समाधि का मंत्रों सहित जल और पीली सरसों से शुद्धिकरण किया। नरेश जैन, मोहित जैन और रोहित जैन ने संयुक्त रूप में दीप प्रज्वलित किया। सुशील जैन, अमित जैन, हर्षित जैन, श्यामलाल जैन, आदेश जैन, सिद्धार्थ जैन, उमेश जैन, वरुण जैन ने पारस प्रभु और विद्या भूषण सन्मति सागर महाराज के चित्रों का अनावरण किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-57369" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240319-WA0027.jpg" alt="" width="978" height="809" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240319-WA0027.jpg 978w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240319-WA0027-300x248.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/03/IMG-20240319-WA0027-768x635.jpg 768w" sizes="(max-width: 978px) 100vw, 978px" /> इस दौरान गजराज गंगवाल ने विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला। विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज जैन समाज के प्रमुख संत थे। त्रिलोक तीर्थ धाम के वही प्रेरणास्त्रोत थे। उनके मार्गदर्शन में ही विश्व की यह अनोखी कृति बनी है। देश के साथ ही विदेश के श्रद्धालु भी यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सन् 2013 में उनकी समाधि हो गई थी। धर्मावलम्बियों ने महाराज की समाधिय पर श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प अर्पित कर उनकी पूजा की। ब्रह्मचारी नवीन भईया ने मंत्रोचार के जरिए पूजन कराया। मनमोहक संगीत की प्रस्तुति हुई। भावना म्यूजिक पार्टी ने भक्ति संगीत लहरी दी। पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रीता सिंह, राजेंद्र जैन, संजय जैन, पीयूष जैन, ऋतु जैन मुख्य अतिथि रहे महेंद्र जैन, त्रिलोक जैन आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/sanmatisagar_samadhi_memorial_day_celebrated_in_triloktirthdham/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>31 मार्च को मुनि दीक्षा दिवस विशेष: तप-त्याग-साधना के पथ पर परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/on_the_path_of_austerity_renunciation_meditation_param_pujya_acharya_shri_108_vidyabhushan_sanmati_sagar_maharaj/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/on_the_path_of_austerity_renunciation_meditation_param_pujya_acharya_shri_108_vidyabhushan_sanmati_sagar_maharaj/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Mar 2023 16:19:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[initiation day]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharm]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Mahavir Jayanti]]></category>
		<category><![CDATA[Sanmatisagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Sonagir]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[सन्मतिसागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[सोनागिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=40971</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज सन 1988 में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) तदनुसार 31 मार्च 1988 को सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी (म.प्र.) में मुनि दीक्षा अंगीकार कर आत्म-कल्याण के मार्ग पर आरुढ़ हुए। मुनि रूप में आपने दिगम्बर मुनि की चर्या, उनके मूलगुणों की साधना तथा उनके तपश्चर्या के विविध आयामों से जैन समाज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज सन 1988 में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) तदनुसार 31 मार्च 1988 को सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी (म.प्र.) में मुनि दीक्षा अंगीकार कर आत्म-कल्याण के मार्ग पर आरुढ़ हुए। मुनि रूप में आपने दिगम्बर मुनि की चर्या, उनके मूलगुणों की साधना तथा उनके तपश्चर्या के विविध आयामों से जैन समाज को परिचित करवाया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए समीर जैन का यह विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज का जन्म सन 1949 में अगहन बदी पंचमी तदनुसार 10 नवम्बर 1949 को ग्राम बरवाई, अम्बाह, जिला मुरैना (म.प्र.) में हुआ था| आपने सन 1972 में फाल्गुन शुक्ल तृतीया तदनुसार 17 फरवरी 1972 को आचार्य श्री 108 सुमति सागर जी महाराज के कर-कमलों द्वारा शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी में क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण कर क्षुल्लक श्री 105 सन्मति सागर जी महाराज नाम पाया। क्षुल्लक अवस्था में ही आपने अपने ज्ञान के बल पर समस्त श्रमण संघों में एक विशिष्ट स्थान बनाया था। तप-त्याग-साधना के मार्ग पर अविरल बढ़ते हुए आपको लंगोट व दुप्पट्टा भी भार स्वरुप लगने लगा। अतः आप सन 1988 में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) तदनुसार 31 मार्च 1988 को सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी (म.प्र.) में मुनि दीक्षा अंगीकार कर आत्म-कल्याण के मार्ग पर आरुढ़ हुए। मुनि रूप में आपने दिगम्बर मुनि की चर्या, उनके मूलगुणों की साधना तथा उनके तपश्चर्या के विविध आयामों से जैन समाज को परिचित करवाया।</p>
<p><strong>स्वर्ण अक्षरों में अंकित नाम</strong></p>
<p>छाणी परंपरा के प्रमुख संत व आचार्य श्री के प्रियाग्र शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर उनके चरणों में अपनी विनयांजलि अर्पित करते हुए बताया कि आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज का नाम श्रमण परंपरा के गौरवशाली इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। आपकी मुनिचर्या सदा आगमोक्त रही तथा तप व संयम की निरंतर साधना के फलस्वरूप आप राष्ट्र-ऋषि के रूप में प्रख्यात हुए। आपके उपदेशों से अनेक आर्षमार्गानुयायी ग्रंथों का प्रकाशन हुआ। आपने अपने जीवन काल में समस्त भारत में व विशेषतः उत्तर भारत में सतत विहार करते हुए अद्वितीय धर्मप्रभावना संपन्न की। सन 1994 में सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी, जिला दतिया (म.प्र.) में आपने जैन जगत का अद्वितीय कार्य कर दिखाया, जब लाखों की भीड़ के मध्य आपने सिंहरथ चलाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा के साथ ही आचार्य पद</strong></p>
<p>विश्व की प्रथम कृति त्रिलोक तीर्थ धाम (बड़ागांव) का निर्माण आपकी विलक्षण सोच व प्रतिभा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता हैष आपके संस्कारित प्रवचनों व संघ संचालन कुशलता को परखते हुए गुरुवर आचार्य श्री 108 सुमति सागर जी महाराज ने आपको मुनि दीक्षा के साथ ही आचार्यकल्प के पद पर आसीन किया तथा लगभग 1 वर्ष पश्चात ही 10 अप्रैल 1989 को चतुर्विध संघ की उपस्तिथि में नरवर (म.प्र.) में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के मध्य आचार्य पद से सुशोभित कर आपको प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्तिसागर जी महाराज (छाणी) की परंपरा में पंचम पट्टाधीश के रूप में प्रतिष्ठित किया। आपके धर्मप्रेरक उपदेशों से प्रभावित होकर समाज ने अनेक विद्यालय, धर्मपाठशालायें, वाचनालय, साधना आश्रम तथा साहित्य प्रकाशक संस्थाओं की स्थापना की। आप एक कुशल जौहरी थे जिन्होंने आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज जैसे अनमोल रत्न को परख कर उन्हें मोक्षमार्ग के दैदीप्यमान नक्षत्र के रूप में तराशा तथा स्वयं अपने वरद-हस्त से एलाचार्य पद प्रदान कर अपनी विशेष स्नेहरूपी कृपा बरसाई।</p>
<p><strong>दी जैनेश्वरी दीक्षाएं</strong></p>
<p>सन 2013 में फाल्गुन शुक्ल तृतीया तदनुसार 14 मार्च 2013 को शकरपुर (दिल्ली) में आपने समाधिपूर्वक मरण कर इस नश्वर देह का त्याग किया। पूज्य आचार्य श्री का जितना विशाल एवं अगाध व्यक्तित्व था, उनका कृतित्व उससे भी अधिक विशाल था। आचार्य श्री के कर-कमलों द्वारा अनेक भव्य जीवों ने जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार कर अपना जीवन धन्य किया जिनमें वर्तमान में आचार्य श्री अतिवीर जी, आचार्य श्री गुलाब भूषण जी, एलाचार्य श्री त्रिलोक भूषण जी, एलाचार्य श्री प्रभावना भूषण जी, मुनि श्री शिव भूषण जी, आर्यिका श्री मुक्ति भूषण जी, आर्यिका श्री लक्ष्मी भूषण जी, आर्यिका श्री सरस्वती भूषण जी, आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण जी, आर्यिका श्री दृष्टि भूषण जी, आर्यिका श्री अनुभूति भूषण जी, क्षुल्लक श्री योग भूषण जी, क्षुल्लिका श्री भक्ति भूषण जी, क्षुल्लिका श्री पूजा भूषण जी आदि त्यागीवृन्द साधनारत हैं। इस गौरवशाली महान परम्परा में वर्तमान में सहस्त्राधिक दिगम्बर साधु समस्त भारतवर्ष में धर्मप्रभावना कर रहे हैं तथा भगवान महावीर के संदेशों को जनमानस तक पहुंचा रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/on_the_path_of_austerity_renunciation_meditation_param_pujya_acharya_shri_108_vidyabhushan_sanmati_sagar_maharaj/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
