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	<title>सनातन संस्कृति &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>टीएमयू कुलाधिपति अयोध्या में धर्म ध्वजारोहण के ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने: जीवीसी मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने भी समारोह में दर्ज कराई विशिष्ट उपस्थिति </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 14:44:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण के ऐतिहासिक क्षण में टीएमयू कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन तथा एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन साक्षी बने। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित रहीं। श्रीफल साथी &#8230;&#8230;..   जब धर्म और ध्वज एक साथ शिखर पर पहुँचते हैं, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण के ऐतिहासिक क्षण में टीएमयू कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन तथा एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन साक्षी बने। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित रहीं। <span style="color: #ff0000">श्रीफल साथी &#8230;&#8230;.. </span></strong></p>
<hr />
<p style="text-align: center"><strong><span style="color: #ff0000"> जब धर्म और ध्वज एक साथ शिखर पर पहुँचते हैं, तब इतिहास बनता है।</span></strong></p>
<p>इंदौर । अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण का भव्य और दिव्य क्षण तेज रोशनी की तरह चमक उठा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र–ट्रस्ट के विशेष आमंत्रण पर तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने इस पावन अनुष्ठान में शामिल होकर धर्म ध्वजा फहराने का सौभाग्य पाया। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी टीएमयू के जीवीसी श्री मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन भी रहे, जिन्होंने अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराई।</p>
<p><strong>भगवा ध्वज फहरते ही गूंजे जयकारे</strong></p>
<p>अभिजीत मुहूर्त में जैसे ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवा धर्म ध्वजा फहराने की प्रक्रिया शुरू की, पूरा परिसर “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा। धर्म ध्वजा का भगवा रंग, सूर्य चिन्ह और कोविदार वृक्ष — रामराज्य की गौरवमयी कीर्ति का प्रतीक बताया गया।</p>
<p><strong>देश की नामी हस्तियाँ बनीं साक्षी</strong></p>
<p>समारोह में साधु-संतों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ सहित कई गणमान्य हस्तियाँ उपस्थित थीं। धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव एक ही मंच पर पूर्ण गौरव के साथ दिखाई दिए।</p>
<p><strong> टीएमयू प्रतिनिधि मंडल हुआ भावविभोर</strong></p>
<p>ध्वजारोहण के बाद समारोह में मौजूद अतिथियों, साधु-संतों और आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों ने श्रीरामलला के दर्शन किए और भव्य मंदिर परिसर में अभिभूत होते हुए स्मरणीय क्षणों को सेल्फी और फोटोग्राफी में कैद किया। कुलाधिपति श्री सुरेश जैन ने भावुक होकर कहा — “धर्म ध्वज केवल वस्त्र नहीं, यह सनातन संस्कृति की आत्मा है।” जीवीसी श्री मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने कहा — “यह क्षण हम सभी के लिए गौरवपूर्ण, अद्वितीय और अवर्णनीय है।”</p>
<p><strong> इतिहास में दर्ज पहले भी विशेष योगदान</strong></p>
<p>ध्यान देने योग्य है कि कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और जीवीसी श्री मनीष जैन 22 जनवरी 2024 को आयोजित श्रीराम प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हो चुके हैं। अयोध्या और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी श्रद्धा और सहभागिता पहले से ही ऐतिहासिक है।</p>
<p style="text-align: center"><span style="color: #ff0000"><strong>ध्वज ऊँचा रहे धर्म का — यही सनातन की शक्ति और भारत की पहचान है।</strong></span></p>
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		<title>साइंस ऑफ लिविंग में प्रवचन : दिगम्बरत्व भारतीय सनातन संस्कृति की पहचान है &#8211; मुनि श्री निरंजन सागर जी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 May 2023 13:21:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि इस सत्र में हम सनातन संस्कृति की प्रस्तोता दिगम्बरत्व पर चर्चा करने का प्रयास करेंगे। भारतीय सनातन संस्कृति में जितने भी वेद, पुराण हैं, उन सभी में दिगम्बरत्व को यथास्थान बहुमान दिया है। पढ़िए राजेश रागी की विशेष रिपोर्ट&#8230; कुम्हारी(दमोह)। साइंस [&#8230;]]]></description>
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<p>साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि इस सत्र में हम सनातन संस्कृति की प्रस्तोता दिगम्बरत्व पर चर्चा करने का प्रयास करेंगे। भारतीय सनातन संस्कृति में जितने भी वेद, पुराण हैं, उन सभी में दिगम्बरत्व को यथास्थान बहुमान दिया है। पढ़िए राजेश रागी की विशेष रिपोर्ट&#8230;</p>
<hr />
<p><strong>कुम्हारी(दमोह)।</strong> साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनि श्री निरंजन सागर महाराज ने कहा कि इस सत्र में हम सनातन संस्कृति की प्रस्तोता दिगम्बरत्व पर चर्चा करने का प्रयास करेंगे। भारतीय सनातन संस्कृति में जितने भी वेद, पुराण हैं, उन सभी में दिगम्बरत्व को यथास्थान बहुमान दिया है। यह निर्विकार दिगम्बर मुद्रा ही प्रमुख कारण है, जिससे यह भारतीय सनातन संस्कृति विश्व गुरु के रूप में अपनी पहचान अनादि काल से बनाए हुए हैं। सम्पूर्ण विश्व आज भी आश्चर्य के साथ इस विषय पर चिन्तन करता है कि निर्विकार अवस्था के साथ यह कैसा जीवन है? वासना विजय का यह स्वरूप आज भी वैसा ही है, जैसा कि भगवान महावीर स्वामी का था। इस मुद्रा के माध्यम से किसी भी प्राणी मे राग की, विकार की, वासना की उत्पत्ति नहीं होती है, बल्कि वैराग्य की उत्पत्ति में यह मुद्रा सशक्त माध्यम है।</p>
<p><strong>सद्दर्शन से ही सद्गति की प्राप्ति</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि, &#8221; कारण सदर्शम् कार्यम् &#8221; अर्थात कारण के अनुरूप ही कार्य होता है। सद्दर्शन से ही सद्गति की प्राप्ति होती है। ऐसी वीतरागी दिगम्बर मुद्रा का दर्शन पाप का नाश करने वाला है। साथ ही साथ स्वर्ग व मोक्ष का साधनभूत है। जिस प्रकार छिद्र सहित हाथों में जल ज्यादा देर तक नहींं ठहरता है अर्थात् नष्ट हो जाता है, उसकी प्रकार इस वीतराग नग्न मुद्रा के दर्शन से वन्दना आदि करने से पाप कर्म का तीव्र उदय भी अधिक समय तक नहीं ठहरता। ऐसी प्रशान्त दिगम्बर मुद्रा का दर्शन पुण्य संचय करने वाला होता है और देवता भी इसके लिए तरसते हैं। विश्व विजेता सिकन्दर भी जब भारत आया था, तब वह भी इस वीतराग मुद्रा को देख मन्त्र मुग्ध हो गया था। आप ही लोग कहते हो &#8221; हे गुरुवर! शाश्वत सुख दर्शक यह नग्न स्वरूप तुम्हारा है जग की नश्वरता का सच्चा दिग्दर्श कराने वाला है।&#8221;</p>
<p><strong>जहां राग है, वहीं सुख नहीं</strong></p>
<p>सम्पूर्ण विश्व आज सुख चाहता है, शान्ति चाहता है और इस संसार में अगर शान्ति है, तो वह है वीतरागी सन्तों के पास, चलते-फिरते भगवन्तो के पास। जहां राग है, वहां सुख नहीं। वीतरागी संत तुम्बी के समान है। जिस प्रकार सुखी तुम्बी पानी में नहीं डूबती और उसका सहारा लेने बाला भी नहीं डूबता, ठीक उसी प्रकार, वीतरागी देव, गुरु हुआ करते हैं। जो इनका सहारा ले लेता है, वह भवसागर में कभी डूबता नहीं पार उतर जाता है। यह दिगम्बर मुद्रा देह से देहातीत होने की यात्रा का द्योतक है। वेदों में, पुराणों में इस दिगम्बर अवस्था को मंगलकारी माना है। इस मुद्रा का दर्शन मात्र कार्य की सफलता का द्योतक है। आचार्यों ने इसे यथाजात रूप कहा है अर्थात् जैसा जन्म के समय बालक होता है, वैसा ही यह स्वरूप है। दिशाएं हैं जिनकी अम्बर, वही सही दिगम्बर है। जिनके पास ना अम्बर (वस्त्र) है और ना आडम्बर (परिग्रह) है, वही सही में दिगम्बर है।</p>
<p><strong> नग्न मुद्रा पूजनीय</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्ध में नारायण श्री कृष्ण ने युद्ध के समय अर्जुन से कहा &#8220;देखो पार्थ, उस ओर से दिगम्बर मुनि आ रहे हैं। यह महान मंगलकारी दर्शन होने से हमारी विजय निश्चित है। भारतीय सनातन संस्कृति मे वेदों, ग्रन्थों पुराणों को प्रमाण माना जाता है और सभी में यह निर्विकार नग्न मुद्रा सम्मानीय दृष्टि से पूज्यनीय स्वीकार की गई है। यह मुद्रा ही मुक्ति का साक्षात् कारण है।</p>
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