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	<title>संस्कार &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>एक दिवसीय आध्यात्मिक शिविर 29 मई को : देश-विदेश में ख्याति प्राप्त विद्वान एवं संतजनों का सान्निध्य प्राप्त होगा </title>
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		<pubDate>Mon, 25 May 2026 08:57:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाकल जिला कटनी स्थित श्री कहान वीतराग जैन ज्ञान चेतना मंडल द्वारा एक दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का आयोजन 29 मई को किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक शिविर में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त विद्वान एवं संतजनों का सान्निध्य प्राप्त होगा। बाकल से पढ़िए, यह खबर&#8230; बाकल। बाकल जिला कटनी स्थित श्री कहान वीतराग जैन ज्ञान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बाकल जिला कटनी स्थित श्री कहान वीतराग जैन ज्ञान चेतना मंडल द्वारा एक दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का आयोजन 29 मई को किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक शिविर में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त विद्वान एवं संतजनों का सान्निध्य प्राप्त होगा। <span style="color: #ff0000">बाकल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बाकल।</strong> बाकल जिला कटनी स्थित श्री कहान वीतराग जैन ज्ञान चेतना मंडल द्वारा एक दिवसीय आध्यात्मिक शिविर का आयोजन 29 मई को किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक शिविर में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त विद्वान एवं संतजनों का सान्निध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से देश-विदेश में प्रसिद्ध विद्वान बाल ब्र. सुमतप्रकाश जी (खनियाधाना) अपने प्रेरणादायी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही पं. राजेन्द्रकुमार जैन (जबलपुर), बाल ब्र. डॉ. मनोज (जबलपुर), बाल ब्र. श्रेणिक (जबलपुर), बाल ब्र. चर्चिल भैया (खनियाधाना), बाल ब्र. महेन्द्र भैया (इंदौर) की विशेष उपस्थिति रहेगी। इस आयोजन की जानकारी जिन धर्म प्रचारक नितिन जैन ने दी।</p>
<p>इस आध्यात्मिक आयोजन का उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कार, आत्मकल्याण एवं वीतरागता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। आयोजन समिति ने समस्त जैन समाज एवं धर्मप्रेमी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया है। सकल जैन समाज बाकल एवं श्री कहान वीतराग जैन ज्ञान चेतना मंडल, बाकल, जिला कटनी ने आग्रह किया है कि आप सभी इस शिविर का धर्मलाभ लें।</p>
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		<title>जीजीआईसी में छात्राओं को मोबाइल के दुष्प्रभाव की जानकारी दी: जागरूकता कार्यक्रम अखिल भारतीय महिला परिषद ने किया  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 May 2026 10:21:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कारों के महत्व, अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230; महरौनी। स्थानीय जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कारों के महत्व, अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> स्थानीय जीजीआईसी बालिका विद्यालय में अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कारों के महत्व, अनुशासन, आत्मनिर्भरता तथा मोबाइल के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक जहां जीवन को सरल बना रही है, वहीं इसका अनियंत्रित उपयोग छात्रों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। छात्राओं को मोबाइल के सीमित एवं सकारात्मक उपयोग की सलाह दी गई। अखिल भारतीय महिला परिषद की पदाधिकारियों ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए संस्कार, समय प्रबंधन और आत्मअनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाएं अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और सामाजिक मूल्यों को आत्मसात करें। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य शीलम गुप्ता ने परिषद की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। कार्यक्रम में अखिल भारतीय महिला परिषद की संभागीय अध्यक्ष रश्मि मलैया, चेयरपर्सन सपना सिंघई, शाखा अध्यक्ष ममता सराफ, सपना मलैया, लवली शास्त्री,प्रीति स्वामी सहित विद्यालय की अनेक शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।</p>
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		<title>मेरी मां ममता, संस्कार और मोक्षमार्ग की जीवंत प्रतिमा : मां के निर्मल स्वरूप पर काव्यात्मक अभिव्यक्ति  </title>
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		<pubDate>Fri, 08 May 2026 12:00:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस दुनिया में मां का दर्जा भगवान से भी ऊपर बताया गया है। मां गुरु भी है। मां पाठशाला भी और मां के अंतर्मन में समस्त शास्त्र समाए हुए हैं। इस भावना को काव्यात्मक अंदाज में पेश किया है डॉ. जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चंदेरी’ ने, आप भी पढ़िए&#8230; मेरी माँ केवल मुझे जन्म देने वाली [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इस दुनिया में मां का दर्जा भगवान से भी ऊपर बताया गया है। मां गुरु भी है। मां पाठशाला भी और मां के अंतर्मन में समस्त शास्त्र समाए हुए हैं। इस भावना को काव्यात्मक अंदाज में पेश किया है डॉ. जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चंदेरी’ ने, <span style="color: #ff0000">आप भी पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>मेरी माँ केवल मुझे जन्म देने वाली स्त्री नहीं हैं,</p>
<p>वे मेरे जीवन की पहली गुरु, पहली पाठशाला और पहली प्रार्थना हैं।</p>
<p>जैन दर्शन में कहा गया है कि इस संसार में तीन माताएं अत्यंत पूजनीय होती हैं-</p>
<p>एक जन्मदायिनी माँ,</p>
<p>दूसरी संस्कारदायिनी माँ,</p>
<p>और तीसरी मोक्षदायिनी माँ अर्थात् जिनवाणी माँ।</p>
<p>मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ कि ये तीनों स्वरूप मुझे अपनी माँ में ही दिखाई दिए।</p>
<p>उन्होंने मुझे जन्म दिया, अपनी ममता के आँचल में पाला, मेरे आँसू अपनी आँखों में छिपाए और मेरे दुख अपने हृदय में समेट लिए। पिता के अल्पायु में निधन के बाद जब जीवन संघर्षों के अंधकार से घिर गया, तब मेरी माँ ने स्वयं को टूटने नहीं दिया।</p>
<p>वे केवल माँ नहीं रहीं, पिता का साहस भी बन गईं।</p>
<p>उन्होंने अभावों में भी हमें आत्मसम्मान से जीना सिखाया।</p>
<p>उन्होंने सिखाया कि परिस्थितियां चाहे कितनी कठिन हों, लेकिन मनुष्य का चरित्र कभी छोटा नहीं होना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने अपने हाथों की मेहनत और आँखों की चिंता छिपाकर हमारे भविष्य को सँवारा।</p>
<p>मेरी माँ ने मुझे केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन का अर्थ समझाया।</p>
<p>उन्होंने सत्य, अहिंसा, विनम्रता और करुणा के संस्कार दिए।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति उसका सदाचार होता है।</p>
<p>लेकिन मेरी माँ की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने मुझे जिनेन्द्र भगवान की वाणी से जोड़ा।</p>
<p>उन्होंने नवकार मंत्र का महत्व समझाया।</p>
<p>उन्होंने आगम और सिद्धांतों की महिमा बताई।</p>
<p>उन्होंने यह भाव जगाया कि जीवन केवल भोग के लिए नहीं, आत्मा के योग और मोक्षमार्ग के लिए मिला है।</p>
<p>जब भी मैं जिनवाणी सुनता हूँ, धर्म का चिंतन करता हूँ या तीर्थंकरों के त्याग का स्मरण करता हूँ, तब मुझे अपनी माँ का चेहरा दिखाई देता है।</p>
<p>क्योंकि वही मेरी पहली धर्मगुरु हैं।</p>
<p>उन्होंने मुझे संसार में चलना भी सिखाया और संसार से ऊपर उठना भी।</p>
<p>उन्होंने मुझे संघर्ष करना भी सिखाया और संयम रखना भी।</p>
<p>उन्होंने मुझे मनुष्य बनना भी सिखाया और आत्मा का मूल्य समझना भी।</p>
<p>आज मैं जो कुछ भी हूँ, उसमें मेरी माँ की तपस्या, त्याग और संस्कारों का प्रकाश समाहित है।</p>
<p>मेरे जीवन की हर सफलता के पीछे उनकी अनगिनत जागी हुई रातें और मौन प्रार्थनाएं हैं।</p>
<p>मैं पूरे श्रद्धाभाव से कह सकता हूँ कि-</p>
<p>मेरी माँ केवल जन्मदायिनी नहीं, संस्कारदायिनी भी हैं।</p>
<p>वे केवल पालन करने वाली नहीं, धर्ममार्ग दिखाने वाली भी हैं।</p>
<p>और जिनवाणी का जो अमूल्य ज्ञान उन्होंने दिया, वही भविष्य की अनंत पर्यायों में मोक्ष का कारण बन सकता है।</p>
<p>ऐसी माँ वास्तव में धरती पर ईश्वर की करुणा का साकार रूप होती है।</p>
<p>उनके चरणों में झुकना केवल सम्मान नहीं, आत्मा का सौभाग्य है।</p>
<p>माँ&#8230;</p>
<p>तुम मेरे जीवन की सबसे पवित्र वंदना हो।</p>
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		<title>संस्कारों की पाठशाला में गूँज रही श्रमण संस्कृति की गूंज : जबरी बाग नसिया में खेल-खेल में गढ़े जा रहे कल के &#8216;आदर्श&#8217; नागरिक </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 05:58:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8216;जबरी बाग नसिया&#8217; में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। इंदौर से हरिहरसिंह चौहान की यह खबर पढ़िए&#8230; इंदौर। गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8216;जबरी बाग नसिया&#8217; में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से हरिहरसिंह चौहान की यह खबर पढ़िए&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> गर्मी की छुट्टियों में जहां अधिकांश बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में खोए हैं, वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर &#8216;जबरी बाग नसिया&#8217; में भक्ति, ज्ञान और संस्कारों की एक नई गंगा बह रही है। यहां आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर न केवल बच्चों के लिए, बल्कि युवाओं और बड़ों के लिए भी आत्मिक शांति और धर्म के वास्तविक बोध का केंद्र बन गया है। इस ग्रीष्मकालीन शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा स्वरूप है। यहां पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों को बोझिल उपदेशों के बजाय मनोरंजन और खेलकूद के माध्यम से धर्म, संस्कृति और संस्कारों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे हमारे पर्व, परंपराएं और जीवन मूल्य आधुनिक जीवन में भी प्रासंगिक हैं।</p>
<p><strong>सांगानेर के विद्वानों का मिला सानिध्य</strong></p>
<p>शिविर में सांगानेर से पधारे विद्वान संकेत शास्त्री और सक्षम शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी और सरल मार्गदर्शन से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। उनके सानिध्य में बच्चे न केवल धार्मिक क्रियाओं को सीख रहे हैं, बल्कि व्यक्तित्व विकास के गुर भी सीख रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य &#8216;भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन&#8217; है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी रहे।</p>
<p><strong>समाज में उत्साह की लहर</strong></p>
<p>दर्शनी जैन, सारिका जैन और सपना जैन ने बताया कि इस शिविर को लेकर समाज में भारी उत्साह है। बच्चों के साथ-साथ बड़े और युवा भी उतनी ही श्रद्धा के साथ भाग ले रहे हैं। सुबह के सत्रों में जहाँ अनुशासन और ध्यान की प्रधानता होती है, वहीं शाम तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के भीतर छुपी प्रतिभा को निखारा जा रहा है। यह शिविर मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि एक &#8216;संस्कार क्रांति&#8217; है, जो बच्चों को केवल सूचना नहीं बल्कि &#8216;दृष्टि&#8217; प्रदान कर रहा है। यहाँ से निकले बच्चे निश्चित ही समाज और राष्ट्र के लिए एक बेहतर उदाहरण पेश करेंगे।</p>
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		<title>समाज में रिश्तों की ठंडी पड़ती आंच : महानगरों की चाह, बढ़ती अपेक्षाएँ और जैन समाज में विलंबित विवाह  </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 11:17:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाज की मजबूती केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं मापी जाती, बल्कि उस समाज में बसे परिवारों की आत्मीयता और रिश्तों की मधुरता से मापी जाती है। जब रिश्तों की यह मधुरता कम होने लगती है, तब समाज के सामने कई नई समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। आज पढ़िए, जयेंद्र जैन ‘निप्पू’ चंदेरी का यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समाज की मजबूती केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं मापी जाती, बल्कि उस समाज में बसे परिवारों की आत्मीयता और रिश्तों की मधुरता से मापी जाती है। जब रिश्तों की यह मधुरता कम होने लगती है, तब समाज के सामने कई नई समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। <span style="color: #ff0000">आज पढ़िए, जयेंद्र जैन ‘निप्पू’ चंदेरी का यह आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चंदेरी।</strong> समाज की मजबूती केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं मापी जाती, बल्कि उस समाज में बसे परिवारों की आत्मीयता और रिश्तों की मधुरता से मापी जाती है। जब रिश्तों की यह मधुरता कम होने लगती है, तब समाज के सामने कई नई समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। आज जैन समाज में युवाओं के विवाह में बढ़ती देरी एक ऐसा ही विषय है, जिस पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक हो गया है। पहले के समय में विवाह जीवन का स्वाभाविक और समय पर होने वाला संस्कार माना जाता था। परिवारों में आपसी संपर्क अधिक था, अपेक्षाएँ सीमित थीं और जीवन में सादगी का स्थान प्रमुख था। युवक-युवती के गुण, संस्कार और परिवार की मर्यादा को देखकर रिश्ते तय होते थे। उस समय जीवन की गति भले ही धीमी थी, पर रिश्तों की गर्माहट कहीं अधिक थी। परंतु आज परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। आधुनिक शिक्षा, करियर की दौड़ और महानगरों की चमक-दमक ने युवाओं की सोच को एक नई दिशा दी है। यह परिवर्तन स्वाभाविक भी है, क्योंकि हर पीढ़ी अपने समय के अनुसार जीवन को ढालती है। लेकिन जब यह परिवर्तन जीवन के मूल सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने लगे, तब उस पर विचार करना आवश्यक हो जाता है।</p>
<p><strong>आज समाज में एक नई प्रवृत्ति भी दिखाई देती है</strong></p>
<p>आज के समय में युवा पीढ़ी शिक्षा और करियर को अत्यधिक महत्व देती है। उच्च शिक्षा प्राप्त करना, बड़े शहरों में रोजगार ढूँढना और अपने जीवन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना उनका प्राथमिक लक्ष्य बन गया है। परिणाम स्वरूप विवाह को कई बार जीवन की प्राथमिकताओं की सूची में पीछे कर दिया जाता है। जब तक करियर स्थिर होता है, तब तक युवाओं की आयु तीस वर्ष या उससे अधिक हो जाती है। परंतु विवाह में देरी का कारण केवल शिक्षा और करियर ही नहीं है। आज समाज में एक नई प्रवृत्ति भी दिखाई देती है-महानगरों में बसने की तीव्र इच्छा। बड़े शहरों की सुविधाएँ, आधुनिक जीवनशैली और आर्थिक अवसर युवाओं को आकर्षित करते हैं। इस कारण छोटे शहरों और कस्बों के रिश्तों को कई बार उतना महत्व नहीं दिया जाता।</p>
<p><strong> स्वभाव, संस्कार और पारिवारिक मूल्य पीछे रह जाते है</strong></p>
<p>जैन समाज की एक बड़ी विशेषता यह रही है कि उसके अनेक परिवार छोटे नगरों और ऐतिहासिक कस्बों में बसे हुए हैं। इन स्थानों में परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक जीवन की गहरी जड़ें हैं। किंतु जब विवाह के निर्णय में केवल शहर की चमक-दमक को प्राथमिकता दी जाने लगती है, तब कई अच्छे रिश्ते केवल इस कारण से पीछे छूट जाते हैं कि वे किसी छोटे नगर से जुड़े होते हैं। विवाह में देरी का एक और महत्वपूर्ण कारण आजकल रूप-रंग की अत्यधिक अपेक्षा भी बन गया है। आधुनिक समाज में बाहरी सुंदरता को कई बार इतना महत्व दिया जाने लगा है कि स्वभाव, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण गुण पीछे रह जाते हैं। युवक-युवती दोनों ही अपने जीवनसाथी में एक आदर्श रूप की कल्पना करते हैं, और जब वास्तविकता उस कल्पना से थोड़ी अलग होती है तो रिश्ता अस्वीकार कर दिया जाता है।</p>
<p><strong>स्वाभाविक रूप से रिश्तों का दायरा संकुचित हो जाता </strong></p>
<p>सुंदरता की चाह स्वाभाविक है, परंतु जब यह चाह एक कठोर शर्त बन जाती है, तब रिश्तों की संख्या स्वाभाविक रूप से कम होने लगती है। जीवन की लंबी यात्रा केवल सुंदर चेहरे से नहीं, बल्कि समझ, सहयोग और आपसी सम्मान से सुखद बनती है। आजकल एक और प्रवृत्ति देखने में आती है-अकेले पुत्र या पुत्री की चाहत। कई परिवार चाहते हैं कि उनका रिश्ता ऐसे घर में हो जहाँ केवल एक ही संतान हो। इसके पीछे संपत्ति, जिम्मेदारी और भविष्य की सुविधाओं से जुड़ी सोच काम करती है। परंतु जब हर परिवार यही अपेक्षा रखने लगता है, तब स्वाभाविक रूप से रिश्तों का दायरा संकुचित हो जाता है। इन सभी कारणों का संयुक्त प्रभाव यह होता है कि विवाह योग्य युवाओं की संख्या तो बढ़ती जाती है, परंतु उपयुक्त रिश्तों की संख्या सीमित होती जाती है। धीरे-धीरे यह स्थिति समाज के लिए चिंता का विषय बन जाती है।</p>
<p><strong>समाज स्तर पर संवाद और परिचय के अवसर बढ़ाएं</strong></p>
<p>यहाँ यह समझना आवश्यक है कि विवाह केवल सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का एक संतुलित और आवश्यक पक्ष भी है। यह वह बंधन है जो मनुष्य को मानसिक सहारा, पारिवारिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसलिए विवाह को केवल औपचारिकता या सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि जीवन के संतुलन के रूप में देखना चाहिए। समाधान की दिशा में सबसे पहले हमें अपनी अपेक्षाओं को थोड़ा सरल और व्यावहारिक बनाना होगा। यदि हम केवल आदर्श परिस्थितियों की प्रतीक्षा करते रहेंगे, तो अनेक अच्छे अवसर हमारे सामने से निकल जाएंगे। दूसरा महत्वपूर्ण कदम यह है कि समाज स्तर पर संवाद और परिचय के अवसर बढ़ाए जाएँ। सामूहिक परिचय सम्मेलन, सामाजिक कार्यक्रम और युवा संवाद के माध्यम से युवक-युवतियों को एक-दूसरे को समझने का अवसर मिल सकता है।</p>
<p><strong>जब युवा छोटे शहरों की सादगी को भी स्वीकार करेंगे</strong></p>
<p>तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण उपाय यह है कि विवाह के निर्णय में बाहरी आकर्षण की अपेक्षा स्वभाव, संस्कार और जीवन मूल्यों को अधिक महत्व दिया जाए। जीवन की वास्तविक खुशियाँ इन्हीं गुणों से बनती हैं। अंततः समाज को यह याद रखना होगा कि आधुनिकता को अपनाना आवश्यक है, परंतु अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों को भूल जाना उचित नहीं है। यदि हम शिक्षा, करियर और आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ रिश्तों की सादगी और आत्मीयता को भी बनाए रखें, तो यह समस्या धीरे-धीरे कम हो सकती है। जब समाज अपनी अपेक्षाओं की दीवारों को थोड़ा कम करेगा, जब युवा महानगरों की चमक के साथ छोटे शहरों की सादगी को भी स्वीकार करेंगे और जब विवाह के निर्णय में बाहरी सुंदरता से अधिक मन की सुंदरता को महत्व मिलेगा, तब रिश्तों की वह ठंडी पड़ती आंच फिर से प्रज्वलित हो उठेगी और तब समाज यह अनुभव करेगा कि सच्ची प्रगति केवल ऊँची इमारतों और बड़े पदों में नहीं, बल्कि उन घरों में बसती है जहाँ रिश्तों की गर्माहट, समझ और विश्वास की रोशनी सदैव जलती रहती है।</p>
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		<title>परिवार और समाज को जीवित रखना है तो सन्तान में संस्कार डालें – आचार्य विमर्शसागर जी : मेरठ में समवसरण महामंडल विधान के दौरान दिया गहरा संदेश, माता-पिता की भूमिका पर जोर </title>
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		<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:41:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेरठ में आयोजित समवसरण महामंडल विधान में आचार्य विमर्शसागर जी ने सन्तान में संस्कार डालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कार ही परिवार व समाज को जीवित रखते हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। सोनल जैन की रिपोर्ट मेरठ । मेरठ में चल रहे “श्री 1008 समवसरण महामंडल” विधान के दौरान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेरठ में आयोजित समवसरण महामंडल विधान में आचार्य विमर्शसागर जी ने सन्तान में संस्कार डालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कार ही परिवार व समाज को जीवित रखते हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। <span style="color: #ff0000">सोनल जैन की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मेरठ ।</strong> मेरठ में चल रहे “श्री 1008 समवसरण महामंडल” विधान के दौरान भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज ने परिवार और समाज को लेकर बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर परिवार और समाज को जिंदा रखना है तो सबसे पहले सन्तान में अच्छे संस्कार डालना जरूरी है।</p>
<p><strong> जिनमंदिर से शुरुआत का संदेश</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि जब भी सन्तान पहली बार किसी सीढ़ी पर चढ़े, तो वह जिनमंदिर की सीढ़ी होनी चाहिए। यह सन्तान की नहीं बल्कि माता-पिता की जिम्मेदारी है। यदि शुरुआत धर्म से होगी, तो पूरा जीवन भी सही दिशा में जाएगा।</p>
<p><strong>माता-पिता की बड़ी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि सन्तान के जन्म के 45 दिन बाद उसे जिनमंदिर ले जाना चाहिए, जैसे कोई बड़ा धार्मिक अनुष्ठान करने जा रहे हों। इससे सन्तान के जीवन में प्रारंभ से ही संस्कारों का बीजारोपण होता है।</p>
<p><strong> बिना संस्कार के जीवन अधूरा</strong></p>
<p>आचार्य विमर्शसागर जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज सन्तान जन्म तो ले रही है, लेकिन अगर उसमें संस्कार नहीं हैं तो वह जीवन पशु के समान हो जाता है। संस्कार ही मनुष्य को मनुष्य बनाते हैं और यही उसकी पहचान हैं।</p>
<p><strong> समाज और परिवार पर चेतावनी</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि वह परिवार और समाज मृत समान है, जहां धर्म और संस्कारों की चर्चा नहीं होती। ऐसे वातावरण में न तो धर्म बढ़ता है और न ही महान व्यक्तित्व जन्म लेते हैं।</p>
<p><strong> धर्म से ही जीवंत होगा समाज</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने सभी से आग्रह किया कि अपने घर-परिवार में धर्म को स्थान दें, बच्चों को संस्कार दें और समाज को जीवंत बनाएं। यही भविष्य को उज्जवल बनाने का एकमात्र रास्ता है।</p>
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		<title>जीवन में पाप दुखदाई इनको छोडे बगैर कल्याण नहीं :  समवशरण में हुई मुनि श्री सुधासागर जी की दिव्यदेशना, प्रतिमाओं में हुए सूर्यमंत्र के संस्कार </title>
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		<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 08:57:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। जब हम बुरे निमित्त से प्रभावित होंगे, बुरा होगा, संसार बुरा नहीं है। हर व्यक्ति तुम्हारे साथ बुरा कर रहा लेकिन घबराना नहीं अगर संसार के भय से डर रहे हो तो गलत है। मुनि श्री ने स्त्रियों की वेषभूषा पर व्यंग करते हुए कहा कि वह भेष धारण मत करो। जिससे दुनिया के परिणाम बिगड़ें। मुनि श्री ने आहार दान के प्रसंग में बताया कि आज ज्ञान कल्याणक का वह दिन है मुनिराज आदि सागर जी ने मुनि दीक्षा के छह माह वाद आहारग्रहण किया। उस समय श्रावक मुनिराज की आहार विधि भी नहीं जानते थे। उन्होंने श्रावकों को प्रेरित किया कि दुर्व्यसन गुटका आदि का त्याग कर जीवन को संयमी बनाए।</p>
<p><strong>लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार ने किया</strong></p>
<p>इसके पूर्व प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक शांतिधारा के उपरान्त ज्ञान कल्याणक की पूजन हुआ। इसके उपरांत प्रतिष्ठाचार्य बालब्रहमवारी प्रदीप भैया सुयश ने मुनिराज आदिसागर की आहारचर्या की विधि कराई। मध्यान्ह में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में अयोध्यापुरी में समवशरण की रचना हुई। जिसका लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार ने किया। समवशरण में विराजित देव शास्त्र गुरु की पूजन करने वैमानिक, कल्पवासी, व्यंतर, भवनवासी देवगण पहुंचे। जिन्होंने समवशरण में अपनी मनोकामना की पूर्ति की भावना से पूजन उपस्थित इन्द्र इन्द्राणियों के साथ की।</p>
<p>इस मौके पर समोवशरण से निर्यापक श्रवण मुनि सुधासागर महाराज ने संसार को नश्वर बताते हुए कहा सारी दुनिया को समझो जीवन अर्थ के अभाव में अनर्थ हो रहा है वह भूल जाता है कि उसका प्रयोजन करने से कितना अनर्थ हो जाता है। भक्त की भक्ति भगवान बनने की रहती है लेकिन इसका दुरूपयोग करके वह सर्वनाश कर लेता है। उन्होने कहा मोक्ष मार्ग के लिए कर्मों का क्षय कर मुनिव्रत पालन करना है लेकिन अर्थ किया के अभाव में भटक जाता है और प्रयोजन का स्वरूप भूल जाता है। महाराज श्री ने कहा जैन दर्शन जीवन में जोडने की शिक्षा देता है काटने की नहीं भगवान आदिनाथ ने असि कृषि और मसी की शिक्षा देकर श्रावक के छह आवश्यक बताए और कहा पाप दुखदाई है परिग्रह युक्त हैं इनको छोड़े वगैर पुण्य नही होगा। उन्होने पंचकल्याणक से सीख लेते हुए जीवन को संस्कारित बनाने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>इच्छुरस वितरित किया गया</strong></p>
<p>सायंकाल सायंकाल जिज्ञासा समाधान के दौरान मुनि श्री ने श्रावकों द्वारा की गई जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया। आचार्य भक्ति जिज्ञासा समाधान के उपरान्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी दिल्ली के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति की गई। मुनिराज आदिकुमार के आहार के उपलक्ष्य में सानत इन्द्र आनद जैन साइकिल परिवार द्वारा इच्छुरस वितरित किया गया। आयोजन की व्यवस्थाओं को सतोदय तीर्थ सेरोन अध्यक्ष सतीश जैन बंटी, महामंत्री सिंघई मनोज जैन, कोषाध्यक्ष विजय जैन लागौन, अरविन्द जैन बरोदा, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, मुकेश जैन नेता, राजेन्द्र मिठ्या, श्रयांस जैन गदयाना, अरूण जैन, अजय जैन, अभय जैन, अमित जैन, प्रदीप जैन, अवध किशोर जैन के अतिरिक्त जैन पंचायत के अध्यक्ष डा० अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया समेत पूरी टीम द्वारा संयोजित की जा रही हैं।</p>
<p><strong>भगवान का मोक्षकल्याणक एवं गजस्थ परिक्रमा</strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में 9 मार्च नैमेत्तिक अभिषेक पूजन के बाद प्रात: 7.29 बजे भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत से मोक्ष गमन तत्पश्चात अग्निकुमार देवों का आगमन, प्रभु के नख केश का विसर्जन मुनि श्री के मांगलिक प्रवचनों के उपरान्त मोक्षकल्यणक पूजन एवं विश्वशान्ति हवन होगा। उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि दोपहर 12-30 बजे गजरथ परिक्रमा मुनि श्री के प्रवचन तदुपरान्त सायंकाल 6 बजे आचार्य भक्ति जिज्ञासा समाधान होगा।</p>
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		<title>इस धरा का, इसी धरा पर, सब धरा रह जाएगा - मुनिश्री विलोकसागर का मुरैना में संदेश : सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन, कल महायज्ञ और भव्य रथयात्रा </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 14:48:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आज समापन हुआ। मुनिश्री विलोकसागरजी ने कहा कि पुण्यवान जीवों को ही अनुष्ठान करने का अवसर मिलता है और जीवन के अंत में केवल कर्म ही साथ जाते हैं। कल प्रातः महायज्ञ एवं भव्य रथयात्रा का आयोजन होगा। पढ़िए मनोज जैन नायक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुरैना में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आज समापन हुआ। मुनिश्री विलोकसागरजी ने कहा कि पुण्यवान जीवों को ही अनुष्ठान करने का अवसर मिलता है और जीवन के अंत में केवल कर्म ही साथ जाते हैं। कल प्रातः महायज्ञ एवं भव्य रथयात्रा का आयोजन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> आठ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के समापन अवसर पर बड़े जैन मंदिर मुरैना में निर्यापक श्रमण मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान और विधान करने का अवसर केवल पुण्यशाली जीवों को प्राप्त होता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94891" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251120-WA0028-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />धन होते हुए भी नहीं मिलता है अनुष्ठान का अवसर</strong></p>
<p>मुनिश्री ने बताया कि कई धनी लोग होते हुए भी धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर नहीं पा पाते, जबकि एक सामान्य व्यक्ति भी पुण्य प्रबल होने पर ऐसे पवित्र कार्य कर लेता है। इसलिए यदि धन पुण्य से प्राप्त हुआ है, तो उसका उपयोग धार्मिक और पवित्र कार्यों में करना चाहिए।</p>
<p><strong>दिल्ली से आए पुण्यार्जक परिवार ने कराया आठ दिवसीय विधान</strong></p>
<p>कैलाशचंद राकेशकुमार जैन परिवार (दिल्ली) ने मुरैना आकर आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने सहभागिता कर पुण्य अर्जित किया। मुनिश्री ने कहा कि इस विधान से प्राप्त शिक्षा और संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं, क्योंकि इस संसार में एकत्रित धन-संपत्ति धरा पर ही रह जाती है, केवल अच्छे-बुरे कर्म ही जीव के साथ जाते हैं।</p>
<p><strong>अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>विधान के अंतिम दिन मुनिश्री विलोकसागरजी और मुनिश्री विबोधसागरजी के सान्निध्य में विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी द्वारा अभिषेक, शांतिधारा और पूजा-अर्चना कराई गई। इसके बाद 1024 अर्घ्यों का समर्पण कराया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना में सहभागिता की।</p>
<p><strong>कल होगा महायज्ञ, निकलेगी भव्य रथयात्रा</strong></p>
<p>विधान के सफल समापन अवसर पर कल प्रातः 7:30 बजे विश्व शांति और कल्याण की भावना से महायज्ञ आयोजित होगा, जिसमें धूप, घी और जड़ी-बूटियों की आहुतियाँ दी जाएंगी।</p>
<p>प्रातः 8:30 बजे श्री जिनेन्द्र प्रभु की प्रतिमा को रथ पर विराजित कर नगर के प्रमुख बाजारों से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा बड़ा जैन मंदिर पहुंचकर पूर्ण होगी, जहां पाण्डुक शिला पर जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद प्रतिष्ठाचार्य और अतिथियों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में कैलाशचंद राकेशकुमार जैन पूणारावत परिवार, दिल्ली की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था की गई है।</p>
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		<title>एक संत के स्वप्न से समाज के संस्कार तक : दो दशक का तप, त्याग और धर्म–संस्कारों का उज्ज्वल पुनर्जागरण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Nov 2025 15:34:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीफल की 20 साल की यात्रा धर्म, समाज और संस्कारों के पुनर्जागरण का अभियान है, जो मुनि पूज्यसागर महाराज के विज़न और सेवाभाव से फलित हुआ। संपादक रेखा संजय जैन की कलम से&#8230;&#8230; 16 नवंबर 2005— एक युवा ब्रह्मचारी चक्रेश जैन ने एक सपना देखा था। एक ऐसा मंच, जहाँ धर्म केवल पढ़ाया न जाए, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रीफल की 20 साल की यात्रा धर्म, समाज और संस्कारों के पुनर्जागरण का अभियान है, जो मुनि पूज्यसागर महाराज के विज़न और सेवाभाव से फलित हुआ। <span style="color: #ff0000">संपादक रेखा संजय जैन की कलम से&#8230;&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>16 नवंबर 2005—</p>
<p>एक युवा ब्रह्मचारी चक्रेश जैन ने एक सपना देखा था।</p>
<p>एक ऐसा मंच, जहाँ धर्म केवल पढ़ाया न जाए, बल्कि जिया जाए।</p>
<p>जहाँ संस्कृति केवल कही न जाए, बल्कि पीढ़ियों तक संजोकर पहुँचाई जाए।</p>
<p>और इसी सोच से जन्म हुआ— ‘श्रीफल’ का</p>
<p><strong>आज, 16 नवंबर 2025—</strong></p>
<p>श्रीफल अपनी 20 वर्ष की तप, त्याग और निरंतर कर्मयात्रा का स्वर्ण अध्याय पूरा कर चुका है।</p>
<p>ये दो दशक केवल पत्रकारिता का सफर नहीं…</p>
<p>बल्कि धर्म, समाज और संस्कारों के पुनर्जागरण का आंदोलन बन चुके हैं।</p>
<p><strong>इस आंदोलन के केंद्र में हैं—</strong></p>
<p>अंतर्मुखी, तेजस्वी और दूरदर्शी मुनि श्री पूज्यसागर महाराज,</p>
<p>जो कभी ब्रह्मचारी चक्रेश जैन के रूप में श्रीफल के संस्थापक थे,</p>
<p>और आज धर्म व समाज को नई दिशा देने वाले प्रेरक संत हैं।</p>
<p>3 जुलाई 1980, पिपलगोन में जन्मे मुनिश्री का जीवन बचपन से करुणा और संवेदनाओं से भरपूर रहा।</p>
<p>आर्यिका वर्धितमती माताजी के सान्निध्य में वैराग्य का बीज अंकुरित हुआ,</p>
<p>और 2015 में दीक्षा लेकर वे मुनि पूज्यसागर जी बने।</p>
<p>श्रवणबेलगोला में भट्टारक स्वस्तिश्री चारुकीर्ति जी से तत्वज्ञान, वास्तु और ज्योतिष का गहन अध्ययन—</p>
<p>यही श्रीफल की बौद्धिक, आध्यात्मिक और वैचारिक नींव बना।</p>
<p><strong>श्रीफल का मिशन</strong></p>
<p>समाज को जोड़ना…</p>
<p>धर्म को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करना…</p>
<p>और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना।</p>
<p><strong>इसी सोच से जन्म लिए—</strong></p>
<p>अक्षर कलश, संस्कार यात्रा, ज्ञानामृतम्, श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार, श्रीफल परिवार जैसी पहलें,</p>
<p>जो आज हजारों जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का कारण बनी हैं।</p>
<p><strong>गुरुदेव का विज़न</strong></p>
<p>मीडिया हाउस</p>
<p>समाधान केंद्र</p>
<p>संस्कार पाठशालाएँ</p>
<p>चौका-वृक्ष अभियान</p>
<p>आदर्श ग्राम</p>
<p>स्वरोजगार प्रेरणा</p>
<p>—इन दस सूत्रों पर आधारित यह दिशा देशभर में श्रीफल के माध्यम से प्रभाव विस्तार कर रही है।</p>
<p>मेरे लिए भी श्रीफल केवल एक संस्था नहीं,</p>
<p>बल्कि आत्म-विकास का मार्गदर्शक रहा है।</p>
<p>गुरुदेव की कृपा से जो आत्मविश्वास मिला—</p>
<p>वह शब्दों में बयां करना कठिन है।</p>
<p>जीवन पहले परिवार और ऑफिस तक सीमित था…</p>
<p>श्रीफल और गुरुदेव ने सोच बदली, दृष्टि बदली और जीवन का उद्देश्य भी।</p>
<p>आज जब श्रीफल 20 वर्ष पूरे कर रहा है,</p>
<p>तो यह सिर्फ एक संस्था का उत्सव नहीं,</p>
<p>बल्कि एक संत के महान विचार की विजय है।</p>
<p>एक आंदोलन की निरंतरता है।</p>
<p>और प्रमाण है कि—</p>
<p>जब सेवा, साधना और समर्पण एक दिशा में चलें,</p>
<p>तो समाज भी बदलता है और पीढ़ियाँ भी।</p>
<p><strong>श्रीफल</strong>—</p>
<p>एक संत का स्वप्न,</p>
<p>एक समाज का संकल्प,</p>
<p>और आने वाली पीढ़ियों के संस्कारों का आधार।</p>
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		<title>आचार्यश्री निर्भय सागर जी ने कहा दिगंबर साधुओं की साधना और तप उत्कृष्ठ: मुनि शिवदत्त सागरजी को आचार्य श्री ने किया संस्कारित </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:22:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर के मउठाना स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आचार्य पदारोहण समारोह प्रभावना पूर्वक मनाया गया। इस दौरान आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;  ललितपुर। नगर के मउठाना [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ललितपुर के मउठाना स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आचार्य पदारोहण समारोह प्रभावना पूर्वक मनाया गया। इस दौरान आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> ललितपुर।</strong> नगर के मउठाना स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का आचार्य पदारोहण समारोह प्रभावना पूर्वक मनाया गया। इस दौरान आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए और आर्शीवाद प्रदान किया। शुक्रवार को प्रातःकाल पार्श्वनाथ नया मंदिर में आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज के सान्निध्य में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के सम्मुख शांतिधारा का पुण्यार्जन श्रावकों ने किया। इसके उपरांत धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख पंचायत के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। शांतिसागर जूनियर हाईस्कूल की बालिकाओं ने भक्ति नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुति दी।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93896" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017.jpg" alt="" width="1280" height="827" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-300x194.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-1024x662.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-768x496.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0017-990x640.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />मुनिश्री संघ ने आशीर्वाद लिया </strong></p>
<p>इस मौके पर आचार्य श्री ने दिगंबर साधुओं की चर्चा को उत्कृष्ठ बताते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्या सागरजी तप और त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने सर्वाधिक श्रावकों को धर्म से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया और उत्कृष्ठ चर्या धारण कर समाधिस्थ हुए। आचार्य श्री निर्भय सागरजी ने संघ के संचालन एवं स्वाध्याय साधना को सुनिश्चित करने के उददेश्य से अपने संघस्थ ज्येष्ठ श्रमण मुनि श्री शिवदत्त सागर महाराज को निर्यापक श्रमण मुनि के संस्कार किए। संघस्थ मुनिश्री शिवदत्त सागर जी, मुनिश्री सुदत्त सागरजी, मुनिश्री मूदत्त सागरजी, मुनिश्री पदमदत्त सागरजी, मुनिश्री गुरुदत्त सागरजी, मुनिश्री मेघदत्त सागरजी, मुनिश्री वृषभ दत्त सागरजी, क्षुल्लक श्री चंददत्त सागरजी एवं श्रीदत्तसागर जी ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर आर्शीवाद लिया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री का संगीतमय पूजन किया </strong></p>
<p>इसके पूर्व आचार्य श्री का संगीतमय पूजन का पुण्यार्जन पूर्णमति महिला मंडल, चंद्रप्रभु महिला मंडल, सुधा सिंधू संभाग, नंदा सुनंदा महिला मंडल, साधु वैयावृत्ति महिला मंडल, विद्या आदर्श श्राविका मंडल, जिनवाणी सुरक्षा महिला मंडल ने किया। सतोदय तीर्थ अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, महामंत्री मनोज जैन बबीना ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर सेरोन जी में प्रवास के लिए निवेदन किया। संचालन प्रफुल्ल जैन दैलवारा ने किया।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, सनत खजुरिया, सौरभ सीए, संजीव जैन लकी मंदिर प्रबंधक अजय जैन गंगचारी, जिनेंद्र जैन रजपुरा, मनीष जैन, आनंद जैन भावनगर, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, अखिलेश गदयाना, सतीश नजा, मनोज जैन जडी-बूटी, विमल जैन पारौल, चंचल पहलवान, अमित सराफ के अतिरिक्त अनिता मोदी, कल्पना जैन, अमृता जैन प्रधानाचार्या आदि मौजूद रहे।</p>
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