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	<title>संरक्षण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सिद्धक्षेत्र पावागढ़ के संरक्षण का आचार्यश्री सुनीलसागर जी आह्वान : प्राचीन धरोहरों का संरक्षण ही नहीं, समयानुकूल जीर्णाेद्धार भी आवश्यक </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 07:37:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्वविख्यात जैन सिद्धक्षेत्र पावागढ़ की पावन वंदना के अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने पावागढ़ की सिद्ध भूमि से जैन समाज, शासन-प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग का ध्यान सिद्धक्षेत्र की उपेक्षित प्राचीन धरोहरों की ओर आकर्षित करते हुए उनके संरक्षण एवं जीर्णाेद्धार की आवश्यकता पर बल दिया। पावागढ़ से पढ़िए, उदयभान जैन की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्वविख्यात जैन सिद्धक्षेत्र पावागढ़ की पावन वंदना के अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने पावागढ़ की सिद्ध भूमि से जैन समाज, शासन-प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग का ध्यान सिद्धक्षेत्र की उपेक्षित प्राचीन धरोहरों की ओर आकर्षित करते हुए उनके संरक्षण एवं जीर्णाेद्धार की आवश्यकता पर बल दिया। <span style="color: #ff0000">पावागढ़ से पढ़िए, उदयभान जैन की स्पेशल रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पावागढ़ (गुजरात)।</strong> विश्वविख्यात जैन सिद्धक्षेत्र पावागढ़ की पावन वंदना के अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने पावागढ़ की सिद्ध भूमि से जैन समाज, शासन-प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग का ध्यान सिद्धक्षेत्र की उपेक्षित प्राचीन धरोहरों की ओर आकर्षित करते हुए उनके संरक्षण एवं जीर्णाेद्धार की आवश्यकता पर बल दिया। जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री संजय जैन बड़जात्या कामां के प्रश्नों का जवाब देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और प्राचीन धरोहरों से होती है। मंदिर, तीर्थ और ऐतिहासिक स्मारक केवल पत्थरों की संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे हमारे गौरवशाली अतीत, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत साक्ष्य हैं। यदि इनका समय रहते संरक्षण एवं जीर्णाेद्धार नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और मूल पहचान से वंचित हो जाएंगी।</p>
<p><strong>धार्मिक विरासत किसी समाज की नहीं बल्कि राष्ट्र की संपदा </strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि सिद्धक्षेत्र पावागढ़ कोई सामान्य भूमि नहीं, बल्कि असंख्य संतों-मुनियों की तपःस्थली और सिद्धभूमि है। यह क्षेत्र जैन धर्म के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। पर्वत पर स्थित अनेक प्राचीन जैन मंदिर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास की गाथा सुनाते हैं, किंतु इनमें से कई मंदिर उपेक्षा और समय के प्रभाव के कारण जीर्ण अवस्था में हैं। आचार्य श्री ने प्रश्न उठाया कि जब सरकार विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास और संरक्षण पर करोड़ों रुपये व्यय कर सकती है, तो जैन समाज की अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए भी समुचित प्रयास क्यों नहीं किए जा सकते? उन्होंने कहा कि धार्मिक विरासत किसी एक समाज की नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र की सांस्कृतिक संपदा होती है और उसका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है।</p>
<p><strong>संरक्षण एवं जीर्णाेद्धार की ठोस योजना बनाई जाए</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री ने भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई),गुजरात सरकार व सभी संबंधित विभागों से आग्रह किया कि पावागढ़ पर्वत पर स्थित सात उपेक्षित जैन मंदिरों की वास्तविक स्थिति का गंभीरता से अध्ययन कर उनके संरक्षण एवं जीर्णाेद्धार की ठोस योजना बनाई जाए। यदि विभाग स्वयं जीर्णाेद्धार कराने में सक्षम नहीं है, तो जैन समाज को आवश्यक स्वीकृति प्रदान की जाए ताकि समाज अपने संसाधनों और श्रद्धा के बल पर इन प्राचीन मंदिरों का संरक्षण कर सके। मन्दिरों की वर्तमान स्थिति को देखकर मन अति व्यथित हो रहा है।नूतनता के साथ प्राचीनता को सहेजना व उनका संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी क्योकि यही हमारी धरोहर और पहचान है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखें सुदृढ़ बनाएं </strong></p>
<p>पावागढ़ सिद्धक्षेत्र पर सात भव्य प्राचीन जिनालय हैं, जिनमें श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर, श्री सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री लवकुश मुनि के चरण चिन्ह और श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संरक्षण का अर्थ केवल पुराने भवनों को यथावत बनाए रखना नहीं है, बल्कि उनकी मूल प्राचीनता और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उन्हें भविष्य के लिए सुदृढ़ बनाना भी है। जीर्णाेद्धार ऐसा हो जिससे मंदिरों की प्राचीन पहचान अक्षुण्ण रहे और आने वाली पीढ़ियाँ हजारों वर्षों तक इस जीवंत इतिहास का दर्शन कर सकें।</p>
<p><strong>तीर्थों का संरक्षण सांस्कृतिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने जैन समाज के सभी संगठनों, तीर्थ समितियों, समाजसेवियों एवं धर्मप्रेमी बंधुओं से भी जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी धरोहरों के प्रति सजग रहेगा तो कोई भी ऐतिहासिक विरासत उपेक्षा का शिकार नहीं होगी। तीर्थों का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज, संत समाज, प्रशासन और पुरातत्व विभाग मिलकर ऐसी कार्ययोजना तैयार करें जिससे पावागढ़ सहित देशभर के प्राचीन जैन तीर्थों का संरक्षण, संवर्धन और जीर्णाेद्धार सुनिश्चित हो सके। इससे न केवल धार्मिक आस्था को बल मिलेगा, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी। आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज का यह संदेश केवल पावागढ़ तक सीमित नहीं, बल्कि देश के सभी प्राचीन जैन तीर्थों के संरक्षण एवं संवर्धन का व्यापक आह्वान है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी अमूल्य धरोहरों को सुरक्षित रखने की प्रेरणा देता है।</p>
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		<title>रामगंगा की निर्मलता और अविरलता की वापसी का लिया संकल्प : तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के गंगा चैंपियंस क्लब का अभियान  </title>
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		<pubDate>Fri, 22 May 2026 12:06:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के गंगा चैंपियंस क्लब का रामगंगा के तटों को प्रदूषण मुक्त बनाने और हरा-भरा करने के लिए एक बहुआयामी अभियान का शंखनाद किया गया। पीपल, नीम और जामुन के एक दर्जन पौधे रोपित किए, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथीन भी एकत्रित की गईं। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के गंगा चैंपियंस क्लब का रामगंगा के तटों को प्रदूषण मुक्त बनाने और हरा-भरा करने के लिए एक बहुआयामी अभियान का शंखनाद किया गया। पीपल, नीम और जामुन के एक दर्जन पौधे रोपित किए, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथीन भी एकत्रित की गईं। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के गंगा चैंपियंस क्लब ने रामगंगा की निर्मलता और अविरलता को वापस लौटाने का संकल्प लिया है। क्लब ने रामगंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने और इसके तटों को हरा-भरा करने के लिए एक बहुआयामी अभियान की शुरुआत की है। इसी के तहत क्लब की ओर से रामगंगा घाट पर गंगा स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए स्वच्छता अभियान चलाया गया । घाट पर हर हर गंगे&#8230;, नमामि गंगे सरीखे नारे गूंजे। स्टूडेंट्स ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे रामगंगा घाटों पर गंदगी न फैलाएं, लगाए गए पौधों की सुरक्षा में अपना योगदान दें।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107101" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260522-WA0012-218x300.jpg" alt="" width="218" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260522-WA0012-218x300.jpg 218w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260522-WA0012-745x1024.jpg 745w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260522-WA0012-768x1056.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260522-WA0012.jpg 822w" sizes="(max-width: 218px) 100vw, 218px" /></p>
<p>अभियान के तहत रामगंगा घाट की सफाई में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथीन आदि एकत्रित की गईं, जबकि घाट के किनारे पीपल, नीम और जामुन आदि के एक दर्जन पौधे भी रोपित किए गए। एग्रीकल्चर के स्टूडेंट्स ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जांच करने के लिए जल और मृदा के नमूने इकट्ठा किए। इससे पूर्व कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के डीन प्रो. प्रवीण जैन ने हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया। रामगंगा घाट पर गंगा चैंपियंस क्लब के नोडल ऑफिसर डॉ. गणेश दत्त भट्ट, डॉ महेशसिंह, क्लब की सलाहकार डॉ. सुषमा सिंह, डॉ. सोनालीसिंह के साथ क्लब के सदस्य आर्य, सार्थक, उज्जवल, विनम्र, सनी, लक्की, शिवानी, निहारिका नयन, अनन्या आदि शामिल रहे।</p>
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		<title>टीएमयू के अर्थ वीक में सीओई का पौधरोपण अभियान: विभिन्न प्रजातियों के 48 पौधे लगाकर संरक्षण का लिया जिम्मा  </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:09:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की ओर से विश्व पृथ्वी सप्ताह के तहत पौधरोपण हुआ। इस अवसर पर चांदनी, कुचिया, केली, बक्सर, हवेलिया, कुच आदि प्रजातियों के करीब चार दर्जन पौधों रोपित किए गए। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230; मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की ओर से विश्व पृथ्वी सप्ताह के तहत पौधरोपण हुआ। इस अवसर पर चांदनी, कुचिया, केली, बक्सर, हवेलिया, कुच आदि प्रजातियों के करीब चार दर्जन पौधों रोपित किए गए। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की ओर से विश्व पृथ्वी सप्ताह के तहत पौधरोपण हुआ। इस अवसर पर चांदनी, कुचिया, केली, बक्सर, हवेलिया, कुच आदि प्रजातियों के करीब चार दर्जन पौधों रोपित किए गए। ताकि परिसर और हरित और पर्यावरण अनुकूल बने। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने स्टूडेंट्स को अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>कार्यक्रम समन्वयक प्रो. आरके जैन ने कहा कि ऐसे सामूहिक प्रयास जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों, एनएसएस टीम के सदस्यों और स्टूडेंट्स ने पौधे रोपित करके पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।</p>
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		<title>प्राचीन मंदिरों का संरक्षण जीर्णाेद्धार अधिक महत्वपूर्ण : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तीर्थों और मंदिरों की सुरक्षा पर दिया बल  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 08:02:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सोमवार को श्री आदिनाथ जिनालय में प्रवचन में कहा कि मंदिर बनाना निश्चित ही पुण्य का कार्य है लेकिन, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है मंदिर का संरक्षण और उसका सही उपयोग करना। देश के राज्यों और नगरों में मंदिरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वास्तव में वहां बैठकर आत्म चिंतन करना चाहिए। सुरेश सबलावत के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि भगवान मंदिर में विराजमान हैं। उन्होंने तप, त्याग और साधना से अपने कर्मों का नाश कर अनंत गुण प्राप्त किए लेकिन, हम 5 मिनट भी शांति से बैठकर यह विचार नहीं कर पाते कि हमें अपने जीवन को कैसे सुधारना है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104664" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260412-WA0004-1.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>सिर्फ मंदिर बनाना ही धर्म नहीं है,मंदिर में समय देकर धार्मिक क्रियाओं, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, तप से आत्मा की ओर लौटना ही सच्चा धर्म है। इसके पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी ने उपदेश में सुख और दुःख की विवेचना की। मध्यप्रदेश धार जिले के अतिशय क्षेत्र कागदीपुरा में पंच कल्याणक के लिए विहार करने के लिए विनय छाबड़ा, इंजीनियर आशीष जैन, अजित छाबड़ा, श्रेणिक गंगवाल सहित अनेक श्रावकों ने दर्शन कर श्रीफल भेंट किया।</p>
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		<title>प्राचीन जिनालयों,संस्कृति,जिनवाणी का संरक्षण हो :  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने समाजजनों को सौंपी जिम्मेदारी दिलाए संकल्प </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 10:57:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रविवार को पाटोदी लश्कर मंदिर से भट्टारक जी की नसिया के लिए संघ सहित मंगल विहार हुआ। देश के सुप्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ ने विवेक काला के प्रतिष्ठान पर चरण प्रक्षालन किए। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;  जयपुर । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रविवार को पाटोदी लश्कर मंदिर से भट्टारक जी की नसिया के लिए संघ सहित मंगल विहार हुआ। देश के सुप्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ ने विवेक काला के प्रतिष्ठान पर चरण प्रक्षालन किए। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> जयपुर</strong> । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रविवार को पाटोदी लश्कर मंदिर से भट्टारक जी की नसिया के लिए संघ सहित मंगल विहार हुआ। देश के सुप्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ ने विवेक काला के प्रतिष्ठान पर चरण प्रक्षालन किए। अशोक पाटनी नंगे पैर जैन ध्वज लेकर आचार्य श्री के साथ चले। धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में कहा कि प्राचीन मंदिरों में संस्कृति होती है। प्राचीन ग्रंथ होते हैं।जयपुर राणा जी के नसिया से संघ का प्रवेश हुआ। चूलगिरी से भट्टारक जी की नसिया आते-आते अनेक प्राचीन जिनालयों प्राचीन दुर्लभ जिनवाणी के संघ ने दर्शन , किए ।नई-नई कॉलोनी में नए मंदिर बन जाते हैं किंतु सभी को प्राचीन मंदिरों के नियमित दर्शन करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि देश में नगरों की सभी धार्मिक ,सामाजिक संस्थाओं को जैन संस्कृति जिनवाणी के संरक्षण प्रचार प्रसार के लिए समर्पित होकर धर्म का ऋण चुकाने के लिए संगठित होने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>भगवान के उपदेशों को जीवन में ग्रहण करें</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने जयपुर में भी काफी धर्म का बीजारोपण किया है। उनकी प्रतिमा महावीर विद्यालय एवं भट्टारक जी की नसिया में लगाने की प्रेरणा दी ।जिनालयों जिनवाणी का संरक्षण संगठित होकर जयपुर नगर देश में आदर्श प्रस्तुत करें। खुद की प्रभावना के बजाय श्रद्धा,भक्ति, समर्पण से भगवान के उपदेशों को जीवन में ग्रहण अपना कर धर्म के प्रचार प्रसार से धर्म प्रभावना कर मनुष्य जीवन ,जैन कुल को सार्थक करें यह मंगल धर्म देशना 76 वर्षीय वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने वर्षों बाद भट्टारक जी की नसिया प्रवेश के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। इसके पूर्व महावीर विद्यालय में आशीर्वचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया किजैन विद्यालय में संस्कार रूपी बीज से जीवन का निर्माण होता है हमने भी सनावद में महावीर पाठशाला में अध्ययन से संस्कार प्राप्त कर आज इस संयम मार्ग पर है। महावीर स्वामी अंतिम तीर्थंकर होकर उन्होंने धर्म तीर्थ का प्रवर्तन किया। उनका अनुसरण कर अनेक पंच परमेष्ठी हुए हैं। जिसमें हम भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>गौरवशाली आध्यात्मिक संस्कारों का बीजारोपण</strong></p>
<p>विश्व को भगवान महावीर के सिद्धांतों की जरूरत है त्याग से जीवन उन्नत होता है प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने तीर्थंकरों के मार्ग का अनुसरण कर संन्यास धारण किया। उन्होंने जयपुर प्रवास में गौरवशाली आध्यात्मिक संस्कारों का बीजारोपण किया। वर्तमान श्रमण परंपरा उन्हीं की बदौलत है। श्री महावीर स्वामी के संदेशों, उपदेशों को प्रत्येक कक्षा में लगाने का भी सुझाव दिया। श्री महावीर जी कमेटी के सुधांशु कासलीवाल, सुरेश सबलावत, हेमंत सोगानी, रुपिन काला, चंद्र प्रकाश जैन, उमराव मल ने बताया कि शोभायात्रा में जगह-जगह आचार्य श्री की आरती की गई। मंच संचालन कमल बाबू एवं मनीष वेद ने किया।</p>
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		<title>नैनागिरि में 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला 25 दिसंबर से: प्राकृत भाषा के गंभीर अध्ययन, शोध एवं नई पीढ़ी को जोड़ने की दिशा में है महत्वपूर्ण प्रयास  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:13:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस वर्ष 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर, (मप्र) में होगी। बकस्वाहा से पढ़िए, राजेश रागी और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस वर्ष 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर, (मप्र) में होगी। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, राजेश रागी और रत्नेश जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस वर्ष 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर, (मप्र) में होगी। इस का संचालन पाली-प्राकृत विकास योजना के अंतर्गत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (प्राकृत अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, जयपुर परिसर) तथा प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन (रजि.) सागर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। यह कार्यशाला कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के मार्गदर्शन में होगी। निर्देशक रमाकांत पांडेय का मार्गदर्शन मिल रहा है। पाली प्राकृत योजना अधिकारी डॉ. चक्रधर मेहुर ने कार्यशाला के विधिवत संचालन के लिए मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला में डॉ. धर्मेंद्रकुमार जैन जयपुर प्राकृत भाषा विकास अधिकारी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर और डॉ. सतेंद्र कुमार जैन, प्रभातकुमार दास की मॉनिटरिंग में कार्य प्रारंभ हो गया है। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में प्राकृत भाषा के व्याकरण, साहित्य, पठनीय सामग्री और बोलचाल के विभिन्न स्तरों का गहन अध्ययन विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा कराया जाएगा।</p>
<p>कार्यशाला में 21 दिन की अनिवार्य उपस्थिति, निःशुल्क आवास-भोजन, तथा चयनित प्रतिभागियों को थर्ड एसी का आवागमन मार्गव्यय प्रदान किया जाएगा। किसी भी प्रकार का पंजीकरण शुल्क नहीं रखा गया है। प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि यह कार्यशाला प्राकृत भाषा के गंभीर अध्ययन, शोध एवं नई पीढ़ी को इसके साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।</p>
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		<title>मंदिरों के संरक्षण एवं विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध: विशेष योजना के तहत जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का होगा रक्षण  </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 13:42:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तरप्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों, मंदिरों के विकास, संरक्षण हेतु एक विशेष योजना चला रही है। राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने उत्तरप्रदेश के जैन समाज के प्रबुद्धजन एवं मंदिर कमेटी के अध्यक्षों एवं मंत्रियों से संरक्षण के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। आगरा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; आगरा। उत्तरप्रदेश सरकार धार्मिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>उत्तरप्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों, मंदिरों के विकास, संरक्षण हेतु एक विशेष योजना चला रही है। राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने उत्तरप्रदेश के जैन समाज के प्रबुद्धजन एवं मंदिर कमेटी के अध्यक्षों एवं मंत्रियों से संरक्षण के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> उत्तरप्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों, मंदिरों के विकास, संरक्षण हेतु एक विशेष योजना चला रही है। राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने उत्तरप्रदेश के जैन समाज के प्रबुद्धजन एवं मंदिर कमेटी के अध्यक्षों एवं मंत्रियों को बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से धार्मिक स्थलों, मंदिरों के विकास संरक्षण के लिए विशेष योजना चलाई जा रही है। इसके तहत प्रदेश में जैन धर्म के ऐसे मंदिर, जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं अथवा मंदिर को जाने वाले मार्ग, उनके विकास के लिए आपकी नजर में कोई ऐसे मंदिर हो, जिनका विकास किया जाना आवश्यक है, ऐसे मंदिरों के विकास के लिए मंदिर कमेटी द्वारा एक प्रस्ताव बनाकर 15 दिवस’ में मेरे पीए शिवम् जैन के व्हाट्एप्स करें एवं हार्ड कॉपी मेरे आवास डी-53, कमला नगर आगरा पर भिजवाने का कष्ट करें। जिससे प्राप्त हुए प्रस्तावों को उत्तरप्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को अवगत कराया जा सके।</p>
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		<title>नवागढ़ में पुरा संपदा के अन्वेषण एवं संरक्षण के कार्य :  हजारों साल पुराने इतिहास को खंगाला </title>
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		<pubDate>Thu, 19 Jun 2025 09:28:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व के एकमात्र अरनाथ अतिशय क्षेत्र में पुरा संपदा का भंडार है। क्षेत्र पर पुरा संपदा का अन्वेषण एवं संरक्षण बखूबी किया जा रहा है। अतिशय क्षेत्र में भगवान अरनाथ स्वामी के अतिशय के साथ संरक्षित हजारों वर्ष प्राचीन पुरा महत्व की संपदा का संरक्षण किया है। इस शोध भी हो रहा है। नवागढ़ से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व के एकमात्र अरनाथ अतिशय क्षेत्र में पुरा संपदा का भंडार है। क्षेत्र पर पुरा संपदा का अन्वेषण एवं संरक्षण बखूबी किया जा रहा है। अतिशय क्षेत्र में भगवान अरनाथ स्वामी के अतिशय के साथ संरक्षित हजारों वर्ष प्राचीन पुरा महत्व की संपदा का संरक्षण किया है। इस शोध भी हो रहा है।<span style="color: #ff0000"> नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> विश्व के एकमात्र अरनाथ अतिशय क्षेत्र में पुरा संपदा का भंडार है। क्षेत्र पर पुरा संपदा का अन्वेषण एवं संरक्षण बखूबी किया जा रहा है। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र में भगवान अरनाथ स्वामी के अतिशय के साथ संरक्षित हजारों वर्ष प्राचीन शैलाश्रय, 8 हजार वर्ष प्राचीन जैन रहस्य वाले शैलचित्र, 3 हजार वर्ष प्राचीन उत्कीर्ण कला तथा 7वीं सदी के स्थापत्य कलायुक्त भौंयरा एवं मूर्ति शिल्प जैन धर्म के प्राचीनतम एवं महत्वशाली साक्ष्य हैं। यहां संग्रहित पुरा संपदा में पाषाण कालीन औजार, मूर्ति शिल्प, चंदेल बावड़ी, काष्ठ बेदी, काष्ठ मान स्तंभ, काष्ठ मंदिर, काष्ठ परात मिट्टी के विशिष्ट शिल्प, धातु शिल्प आभूषण, रजत एवं ताम्र के सिक्के, पाषाण मिट्टी एवं रतन के मनके प्राचीन गाथा के सशक्त साक्ष्य हैं।</p>
<p><strong>इस तरह हो रहा संरक्षण</strong><br />
इस पुरा संपदा का रासायनिक संरक्षण एनआरएलसी लखनऊ के प्रशिणार्थी 25- 25 छात्रों द्वारा कई शिविरों में सतत संरक्षण का कार्य डॉ. वीबी खरबड़े के निर्देशन तथा पीके पांडे के सानिध्य में संपन्न हुआ है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-83325" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM.jpeg" alt="" width="1600" height="1284" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM.jpeg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-300x241.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-1024x822.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-768x616.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-1536x1233.jpeg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-990x794.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-1320x1059.jpeg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/WhatsApp-Image-2025-06-19-at-2.49.40-PM-260x210.jpeg 260w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />शोध ग्रंथ किया तैयार</strong><br />
डॉ. अर्पित रंजन पुरालेखविद् भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई दिल्ली ने यहां के अभिलेख एवं पुरातत्व पर डॉ. प्रकाश राय के निर्देशन में वीर कुंवरसिंह विश्वविद्यालय आरा से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया है। अर्चना जैन पम्मी बरायठा ने एकलव्य विश्वविद्यालय के निदेशक आरसी फौजदार एवं डॉ. अभिषेक जैन के निर्देशन में नवागढ़ साहित्य पर शोध कार्य आरंभ किया है। जो लगभग पूर्ण होने को है। संजय आठिया &#8216;नवागढ़ के संलग्न नगरों में पुरातात्विक धरोहर&#8217; विषय पर सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से शोध कार्य कर रहे हैं।</p>
<p><strong>संरक्षण एवं आकलन किया</strong><br />
नवागढ़ क्षेत्र की पुरा संपदा के शोध, काल निर्धारण, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विश्लेषण के लिए पनस एनजीओ दिल्ली की पांच सदस्यीय अन्वेषण टीम राजकुंवर विष्ट के निर्देशन में कार्यरत हैं। आपने यहां संग्रहित कला शिल्प का अवलोकन करते हुए नवागढ़ को सातवीं सदी का क्षेत्र घोषित किया है। यहां प्राकृतिक रूप से निर्मित भौंयरे में अरनाथ स्वामी विराजमान है।</p>
<p><strong>अन्वेषण के अन्वेषक ये रहे</strong><br />
क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया ने बताया नवागढ़ कि सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक एवं शैक्षिणिक विधाओं का अन्वेषण देश के ख्याति प्राप्त पुरातत्व विद् एवं इतिहास विद् डॉ. मारुतिनंदन प्रसाद तिवारी, डॉ. शांतिस्वरूप सिन्हा वाराणसी, डॉ.भागचंद्र भागेंदु दमोह, डॉ.कस्तूरचंद सुमन, महावीर, डॉ. बृजेश रावत लखनऊ, डॉ. गिरिराज कुमार आगरा, डॉ. सलाहुद्दीन सागर, डॉ. एसके दुबे झांसी, नरेश पाठक ग्वालियर, डॉ. काशी प्रसाद त्रिपाठी, हरि विष्णु अवस्थी टीकमगढ़ के निर्देशन में किया गया है।</p>
<p><strong>संगोष्ठियां आयोजित की</strong><br />
पंडित गुलाबचंद पुष्प प्रतिष्ठा पितामह के जन्म शताब्दी समारोह पर स्मरणांजलि ग्रंथ का लोकार्पण आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के मंगल सानिध्य में इंदौर में किया गया। नवागढ़ क्षेत्र के पुरातत्व इतिहास एवं पुष्प के अवदान पर आचार्य श्री उदासागर महाराज के संदेश में इंदौर एवं दिल्ली, टीकमगढ़, ललितपुर एवं नवागढ़ में पुरातत्व एवं शोधकर्ताओं द्वारा संगोष्ठी का आयोजन नवागढ़ समिति, नवागढ़ गुरुकुलम एवं पुष्प के परिवार के सहयोग से की गई। जिसमें 50 से अधिक शोधार्थियों ने भाग लिया</p>
<p><strong>गुरुकुल के छात्रों ने बढ़ाया मान</strong><br />
नवागढ़ में संचालित गुरुकुलम के छात्रों ने रेवाड़ी, खुरई एवं मडिया में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त कर गौरव बढ़ाया है। समिति के अध्यक्ष सनतकुमार एडवोकेट, महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा, कोषाध्यक्ष पंडित इंद्रकुमार शास्त्री, गुरुकुल अध्यक्ष राकेश लोटस, उपाध्यक्ष अभय जैन प्रीत विहार, कोषाध्यक्ष डॉ. प्रदीप छतरपुर, इंजीनियर शिखरचंद्र टीकमगढ़, प्रचार मंत्री डॉ.सुनील संचय, धीरेंद्र पत्रकार ने सभी से नवागढ़ क्षेत्र में विराजित मनोकामना पूर्ण अतिशयकारी अरनाथ स्वामी के अतिशय तथा यहां संग्रहित पुरा संपदा, गुफाएं, शैलचित्र आदि का अवलोकन करने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की गुल्लक योजना: समाजजनों का अच्छा मिल रहा प्रतिसाद  </title>
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		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 14:20:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने संपूर्ण भारत के तीर्थ क्षेत्र एवं मंदिरों में कुछ वर्ष पूर्व अर्थ संग्रह के लिए गुल्लक रखने का निर्णय लिया था एवं अनेकों मंदिरों में गुल्लक रखी गई। पदमपुर ,अयोध्या, अहि क्षेत्र, गाजियाबाद, शामली आदि अनेकों मंदिरों की गुल्लक खोली गई तो कई गुल्लकों में एक लाख [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने संपूर्ण भारत के तीर्थ क्षेत्र एवं मंदिरों में कुछ वर्ष पूर्व अर्थ संग्रह के लिए गुल्लक रखने का निर्णय लिया था एवं अनेकों मंदिरों में गुल्लक रखी गई। पदमपुर ,अयोध्या, अहि क्षेत्र, गाजियाबाद, शामली आदि अनेकों मंदिरों की गुल्लक खोली गई तो कई गुल्लकों में एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक की राशि प्राप्त हुई। इस योजना का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> तीर्थाे के सर्वांगीण विकास, संरक्षण एवं जीर्णाेधार आदि के लिए 123 वर्षों से संचालित संस्था भारत वर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी सदैव तत्पर रहती है। हमारे प्राचीन मंदिर हमारी संस्कृति की धरोहर और हमारी आस्था के केंद्र हैं। उनका संरक्षण विकास एवं जीर्णाेद्धार करना हम सब की सामूहिक जवाबदारी है। इसी उद्देश्य से तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने संपूर्ण भारत के तीर्थ क्षेत्र एवं मंदिरों में कुछ वर्ष पूर्व अर्थ संग्रह के लिए गुल्लक रखने का निर्णय लिया था एवं अनेकों मंदिरों में गुल्लक रखी गई। जिसे तीर्थ भक्त सुश्रावकों द्वारा अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। तीर्थ के विकास एवं जीर्णाेद्धार में हमारी चंचला लक्ष्मी का भी सदुपयोग हो।</p>
<p>इस उद्देश्य से समाजजनों द्वारा गुल्लकों में राशि डाली जा रही है। जिसके माध्यम से अच्छी राशि प्राप्त हो रही है। गुल्लक योजना समिति के चेयरमैन हंसमुख गांधी ने बताया कि हाल ही में पदमपुर ,अयोध्या, अहि क्षेत्र, गाजियाबाद, शामली आदि अनेकों मंदिरों की गुल्लक खोली गई तो कई गुल्लकों में एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक की राशि प्राप्त हुई।</p>
<p>जिसका उपयोग मंदिरों और तीर्थाें के विकास में किया जाएगा। जिन मंदिरों एवं तीर्थ क्षेत्रों में जहां तीर्थ क्षेत्र कमेटी की गुल्लक नहीं है। वहां गुल्लक रखने के लिए कमेटी के मुंबई कार्यालय के मोबाइल नंबर 98204 30 114 एवं 98336 71 770 अथवा कैंप कार्यालय गाजियाबाद में मोबाइल नंबर 72177 56871 पर संपर्क किया जा सकता है।</p>
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		<title>भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी उत्तर प्रदेश-उत्तरांचल की साधारण सभा व शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्नः अनमोल धरोहर, प्राचीन तीर्थों के संरक्षण के लिए हुआ मंथन  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Feb 2025 10:04:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड अंचल की प्रथम साधारण सभा की बैठक रविवार को आंवला में जवाहरलाल जैन, सिकंदराबाद की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर अंचल की नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया। बैठक का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान पार्श्वनाथ के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड अंचल की प्रथम साधारण सभा की बैठक रविवार को आंवला में जवाहरलाल जैन, सिकंदराबाद की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर अंचल की नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया। बैठक का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान पार्श्वनाथ के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि तीर्थों की रक्षा एवं अक्षुण्णता के लिए आगे बढ़कर सामूहिक प्रयास करें। <span style="color: #ff0000">पढ़िए ललितपुर से राजीव सिंघई मोनू की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> शताधिक वर्ष प्राचीन भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड अंचल की प्रथम साधारण सभा की बैठक रविवार को अहिच्छत्र पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, रामनगर किला, आंवला में जवाहरलाल जैन, सिकंदराबाद की अध्यक्षता, तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, गाजियाबाद के मुख्य आतिथ्य एवं तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कुलाधिपति सुरेशचंद्र जैन, मुरादाबाद के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुई। इस मौके पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड अंचल की नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया।</p>
<p><strong>भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की बैठक</strong></p>
<p>ललितपुर जनपद से भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड अंचल कमेटी में इंजीनियर अनिल ‘अंचल‘ ने उपाध्यक्ष, डॉ. सुनील संचय ने संयुक्त महामंत्री, डॉ. राकेश सिंघई ने मंत्री पद की शपथ ली। बैठक का शुभारंभ अतिथियों ने भगवान पार्श्वनाथ के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन ने कहा कि तीर्थों की रक्षा एवं अक्षुण्णता को बनाये रखने। आगे बढ़कर सामूहिक प्रयास करते हुए तीर्थ क्षेत्र कमेटी के हाथों को मजबूती प्रदान कर एकजुटता का परिचय देना होगा।</p>
<p><strong>प्राचीन जैन मंदिरों को तीर्थ क्षेत्र कमेटी से जोड़े </strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड कमेटी के अध्यक्ष जवाहरलाल जैन ने कहा कि तीर्थ क्षेत्रों एवं प्राचीन जैन मंदिरों को भी तीर्थ क्षेत्र कमेटी के साथ जोड़ा जाएगा। जिससे प्राचीन मंदिरों, इतिहास एवं संस्कृति व संस्कारों का संरक्षण होता रहे। कमेटी के संरक्षक एवं तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद के कुलाधिपति सुरेशचंद्र जैन ने कहा कि सबसे पहले हमें अपने परिवार को, अपने बच्चों को सभी तीर्थों के दर्शन कराने चाहिए, तीर्थों पर आकर उसकी महिमा एवं इतिहास का अध्ययन करते हुए आने वाली पीढ़ी को इसकी सही जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।</p>
<p><strong>तीर्थ संरक्षण गुल्लक योजना व तीर्थ संरक्षण कलश स्थापना का आह्वान </strong></p>
<p>उपाध्यक्ष अनिल जैन ‘अंचल‘ ने ललितपुर जनपद के देवगढ़, अभिनंदनोदय आदि तीर्थों का परिचय दिया तथा तीर्थ क्षेत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। संयुक्त महामंत्री डॉ. सुनील संचय ने कहा कि तीर्थ, मंदिर, मूर्तियां हमारी आस्था की केंद्र बिंदु हैं। इनके संरक्षण-संवर्धन के लिए आगे आएं। तीर्थों के संरक्षण के लिए तीर्थ संरक्षण गुल्लक योजना और तीर्थ संरक्षण कलश स्थापना चालू करने करने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>विभिन्न तीर्थों की डॉक्यूमेंट्री फिल्म बन रहीं</strong></p>
<p>मंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई ने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी तीर्थों के संरक्षण की दिशा में बहुत अच्छा कार्य कर रही है। कमेटी की प्रचारमंत्री मीनू जैन, गाजियाबाद ने तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा बनाई जा रही विभिन्न तीर्थों की डॉक्यूमेंट्री फिल्म की जानकारी देते हुए बताया कि ललितपुर जनपद में अभी अतिशय क्षेत्र बानपुर की डॉक्यूमेंट्री बनकर तैयार हो गयी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जनपद से प्रांतीय समिति में इंजीनियर अनिल जैन अंचल को उपाध्यक्ष, डॉ. सुनील संचय को मानद महामंत्री, डॉ. राकेश जैन सिंघई को मंत्री बनाए जाने पर दिगम्बर जैन पंचायत समिति ललितपुर के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया, देवोदय अतिशय क्षेत्र देवगढ़ ,प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़, अतिशय क्षेत्र दूधई, अतिशय क्षेत्र गिरार, अतिशय क्षेत्र सीरोंन (मड़ावरा), अतिशय क्षेत्र बानपुर, अतिशय क्षेत्र चांदपुर-जहाजपुर, उत्कर्ष समूह,करुणा इंटरनेशनल के संयोजक पुष्पेंद्र जैन, श्री महावीर दिगम्बर जैन संस्कृत विद्यालय समिति साढूमल, अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद, विद्वत् परिषद, प्रभावना जनकल्याण परिषद, स्याद्वाद वर्द्धमान सेवा संघ आदि ने हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। संचालन महामंत्री संदेश जैन ने किया।</p>
<p><strong>पदाधिकारीगण उपस्थित रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड अंचल के तीर्थों के अनेक स्थानों से पदाधिकारीगण उपस्थित रहे। ललितपुर जनपद से अतिशय क्षेत्र देवगढ़, प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़, अतिशय क्षेत्र सीरोंन (मड़ावरा), अतिशय क्षेत्र दूधई के प्रतिनिधि, पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।</p>
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