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	<title>संगठन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>संगठन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>श्री दिगंबर जैन सामाजिक संसद : एक समय का प्रभावशाली संगठन, अब खो रहा है पहचान </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 07:12:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन सामाजिक संसद कभी संस्था समाज के सामूहिक उत्थान का प्रतीक थी, परंतु आज यह व्यक्तिगत विचारों, स्वार्थों और राजनीति से प्रभावित होती दिख रही है। समाज की असली शक्ति मंदिर, साधु और परिवार की एकता में निहित है। नेतृत्व उसे मिलना चाहिए जो धर्म को राजनीति से ऊपर रखे, निःस्वार्थ भाव से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन सामाजिक संसद कभी संस्था समाज के सामूहिक उत्थान का प्रतीक थी, परंतु आज यह व्यक्तिगत विचारों, स्वार्थों और राजनीति से प्रभावित होती दिख रही है। समाज की असली शक्ति मंदिर, साधु और परिवार की एकता में निहित है। नेतृत्व उसे मिलना चाहिए जो धर्म को राजनीति से ऊपर रखे, निःस्वार्थ भाव से कार्य करे और साधु-संयम पर विश्वास रखे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> कभी समाज में अपनी विशिष्ट पहचान और प्रभाव के लिए प्रसिद्ध रही श्री दिगंबर जैन सामाजिक संसद, इंदौर का नाम आज धीरे-धीरे अपनी गरिमा और प्रभाव खोता जा रहा है। जिस संगठन की स्थापना समाज के सामूहिक उत्थान, एकता और धर्म के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी, वह आज व्यक्तिगत विचारों, आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं का केंद्र बनता दिखाई देता है।</p>
<p><strong>व्यक्तिगत प्रतिष्ठा ओर अधिक सक्रिय </strong></p>
<p>समाज के विकास की दिशा में अग्रसर होने के बजाय अब कई लोग व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और आत्म-विकास की ओर अधिक सक्रिय नजर आते हैं। विचार रखना और अभिव्यक्ति करना हर व्यक्ति का अधिकार है, किंतु जब बात समाज और धर्म के हित की हो, तो व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक दृष्टि अपनाना अनिवार्य हो जाता है। यदि हम अपना घर सही ढंग से नहीं चला पा रहे, तो समाज जैसे व्यापक तंत्र के संचालन की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं?</p>
<p><strong>साधुओं में रखें आस्था</strong></p>
<p>समाज मंदिर, साधु और परिवार — इन तीन स्तंभों की एकता से ही निर्मित होता है। आज दुर्भाग्यवश, यही तीनों स्तंभ हमारे मतभेदों, प्रतिस्पर्धाओं और व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण कमजोर पड़ते जा रहे हैं। धर्म के अनुसार, समाज का नेतृत्व उस व्यक्ति को मिलना चाहिए जो मंदिर की पीड़ा को समझ सके, साधुओं के गुणों में आस्था रखे, उनके आहार-विहार में सहभागी बने, और अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समय व सेवा दे सके। समाज का मुखिया या प्रतिनिधि वह होना चाहिए जो धर्म को अपने व्यापार या राजनीति से ऊपर रखे; जो समाज, मंदिर और साधुओं के लिए निःस्वार्थ भाव से कार्य कर सके। राजनीति में उसकी भूमिका प्रभावशाली हो सकती है, परंतु राजनीति कभी उस पर प्रभावी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p><strong>इतिहास को रखें ध्यान</strong></p>
<p>समाज, साधु और मंदिर की संस्कृति की सुरक्षा धन, पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि विचार, कार्य, त्याग और समर्पण से होती है। जब धन, प्रभाव और राजनीतिक संबंध हमारे तीर्थों की रक्षा नहीं कर पाए, तो सामाजिक चुनावों में राजनीति का हस्तक्षेप क्यों किया जाए? गोमटगिरी, गिरनार और सम्मेदशिखर जैसे पवित्र स्थलों के उदाहरण हमारे सामने हैं — जहां आर्थिक शक्ति या राजनीतिक संपर्क भी धर्म की मूल भावना की रक्षा नहीं कर सके। इंदौर के कई अन्य धार्मिक स्थलों की स्थिति भी इसी चिंता की ओर संकेत करती है। इतिहास साक्षी है कि राजनीतिक दल हमेशा उसी व्यक्ति को आगे बढ़ाते हैं जिसका समाज में प्रभाव और स्वीकार्यता हो। फिर भी जब हम स्वयं को समाज की एकता के बजाय विभाजन के आधार पर परिभाषित करते हैं, तो हमारी सामूहिक शक्ति स्वतः क्षीण होती चली जाती है।</p>
<p><strong>पहचानें संगठन की शक्ति</strong></p>
<p>आज सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है कि जो व्यक्ति समाज की पीड़ा को समझने की संवेदना नहीं रखता, जिसके पास समाज के लिए समय नहीं है, वह समाज की राजनीति से दूर रहे। क्योंकि जब संवेदना ही अनुपस्थित हो, तो समाज, मंदिर और साधुओं की रक्षा की भावना कहां से उत्पन्न होगी? अतः पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि उस पद की जिम्मेदारी को समझना और उसे निभाना ही सच्ची सेवा है। समाज की शक्ति उसके संगठन, समर्पण और संयम में निहित है — न कि पद, प्रभाव या राजनीति में। <strong>यह आलेख लिखने की पीछी यही भाव था कि कही दिनों से कुछ व्यक्ति पुछ रहे थे कैसा होना चाहिए अध्यक्ष और  मुझे ऐसा लगता है कि हम अपने धर्म की गरिमा खोते जा रहे और सामाजिक स्तर,राजनीतिक स्तर आदि पर कमजोर होते जा रहे ,इस बात का   दर्द भी है मन में । </strong></p>
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		<title>विमर्श समाचार के प्रधान संपादक सोनल जैन का अशोकनगर में सम्मान आईजा सम्मेलन में जैन मिलन और विमर्श जागृति मंच ने किया अभिनंदन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/sonal_jain_honored_in_ashoknagar_during_jain_journalist_association_conference/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:41:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भिंड के जिला प्रभारी एवं विमर्श समाचार के प्रधान संपादक सोनल जैन का अशोकनगर में ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के सम्मेलन के दौरान सम्मान हुआ। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अशोकनगर। ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के सम्मेलन के अवसर पर भिंड के जिला प्रभारी एवं विमर्श समाचार के प्रधान संपादक सोनल जैन का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भिंड के जिला प्रभारी एवं विमर्श समाचार के प्रधान संपादक सोनल जैन का अशोकनगर में ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के सम्मेलन के दौरान सम्मान हुआ। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के सम्मेलन के अवसर पर भिंड के जिला प्रभारी एवं विमर्श समाचार के प्रधान संपादक सोनल जैन का अशोकनगर में सम्मान किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष सुभाष जैन कैंची की उपस्थिति में विमर्श जागृति मंच एवं जैन मिलन सेंट्रल अशोकनगर की ओर से सोनल जैन और उनके साथियों का अभिनंदन किया गया। इस सम्मान समारोह में भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जैन, मार्गदर्शक मंडल सदस्य प्रमोद छाया, विमर्श जागृति मंच के राष्ट्रीय उप मंत्री विनोद जैन भारिल्ल, शाखा अध्यक्ष अनूप जैन बाबू, जैन मिलन सेंट्रल के अध्यक्ष सचिन जैन बारी, जितेंद्र जैन, रोहित जैन (भिंड), अजय जैन (अंबाह), पंकज जैन, महावीर जैन (पोरसा) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर वक्ताओं ने जैन पत्रकारों की भूमिका की सराहना करते हुए समाज में धर्म, संस्कृति और सत्य पत्रकारिता के प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।</p>
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		<title>जैन पत्रकार महासंघ (रजि) की राष्ट्रीय वेबिनार तीर्थ क्षेत्र की भ्रांतियों पर हुआ मंथन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संपादक]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 00:29:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थों को पिकनिक एवं पर्यटन स्पॉट न बनने दें सम्मेद शिखरजी पूर्णतः सुरक्षित, भ्रामक खबरों से बचें: शिखरचंद्र पहाड़िया जयपुर 24 जनवरी। जैन पत्रकार महासंघ के तत्वावधान में 23 जनवरी को जयपुर में जैन तीर्थ क्षेत्रों की सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित की गई। जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-us_600_600_crop wp-image-24588 aligncenter" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/01/IMG-20220125-WA0003-600x600.jpg" alt="" width="600" height="600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/01/IMG-20220125-WA0003-600x600.jpg 600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/01/IMG-20220125-WA0003-150x150.jpg 150w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /></p>
<p><strong>तीर्थों को पिकनिक एवं पर्यटन स्पॉट न बनने दें </strong><br />
<strong>सम्मेद शिखरजी पूर्णतः सुरक्षित, भ्रामक खबरों से बचें: शिखरचंद्र पहाड़िया</strong></p>
<p><strong>जयपुर 24 जनवरी</strong>। जैन पत्रकार महासंघ के तत्वावधान में 23 जनवरी को जयपुर में जैन तीर्थ क्षेत्रों की सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित की गई। जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया की अध्यक्षता एवं भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिखर चंद पहाड़िया, मुंबई के मुख्य आतिथ्य में संपन्न इस वेबीनार में जैन तीर्थ क्षेत्रों के संबंध में फैल रही भ्रांतियों एवं अन्य भ्रामक खबरों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।<br />
प्रज्ञा श्रमण मुनि श्री अमित सागर जी महाराज ने अपने आशीवर्चन में कहा कि जिससे संसार सागर से तिरा जा सकता है, वह तीर्थ है। तीर्थ चल व अचल हैं, तीर्थ हमारी आराधना के केंद्र बिंदु हैं। तीर्थों पर मर्यादा में आ रही कमी चिंताजनक है।<br />
भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिखर चंद पहाड़िया ने कहा कि सम्मेद शिखरजी पूर्णतः सुरक्षित है। सोशल मीडिया पर आ रही खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने बताया कि पहाड़ पर जाने वाली मोटरसाइकिलें बंद करा दी गई हैं। पैदल मार्ग पर सड़क निर्माण की परमिशन सरकार से प्राप्त हो गई है तथा पुलिसकर्मी तैनात हो गए हैं। शीघ्र ही पुलिस चौकी भी स्थापित हो जाएगी। पारसनाथ टोंक की चाबी दिगंबर संप्रदाय के पास भी उपलब्ध है। पहाड़ पर सफाई कार्य जारी है। उन्होंने अनेक भ्रान्तियों का निवारण करते हुए बताया कि प्रत्येक टोंक पर शीघ्र दरवाजा लगाया जाएगा, उन्होंने दान दातारों से तीर्थ क्षेत्र कमेटी के लिए फंड उपलब्ध कराए जाने पर भी प्रकाश डाला।<br />
चिरंजीलाल बगड़ा कोलकाता ने चार सूत्रीय कार्यक्रम का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि महत्त्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्रों को सरकार से जैन तीर्थ घोषित करवाना चाहिए। राष्ट्रीय सामाजिक संस्थाओं को अधिकृत मीडिया प्रभारी नियुक्त करना चाहिए। समाज के शीर्ष नेतृत्व के प्रति विश्वसनीयता स्थापित हो तथा तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता के लिए नियमावली तैयार हो।<br />
सुरेश जैन आईएएस ने कहा कि तीर्थों का आधुनिक तरीके से प्रबंधन हो। कुल राशि का एक अंश तीर्थ क्षेत्रों को दान अवश्य किया जाए। डॉ मणींद्र जैन दिल्ली ने कहा कि मूल समस्या समझ कर स्वयं तीर्थ क्षेत्रों के लिए पवित्रता की शुरुआत की जाए। डॉ. अनिल जैन जयपुर ने कहा कि पत्रकार अपना दायित्व निभाएं। कोई भी न्यूज़ सोशल मीडिया पर पूरी जांच के पश्चात ही जारी करें। पुराने तीर्थ क्षेत्रों का संरक्षण हो, गाइडलाइन तैयार हो। शरद जैन दिल्ली ने कहा कि सभी तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता के लिए राष्ट्रीय संस्थाओं को जागरूक होना चाहिए। पुरातत्व धरोहर के लिए एक म्यूजियम का निर्माण होना चाहिए एवं अनुसंधान के रूप में पुरातत्व की गणना हो।<br />
राजेंद्र जैन महावीर सनावद ने कहा कि जन सहभागिता से तीर्थ क्षेत्र कमेटी को भ्रांतियों के निवारण के लिए एक सोशल मीडिया प्रभारी बनाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि तीर्थ को तीर्थ मानें, पर्यटक स्थल नहीं, तीर्थों को पिकनिक स्पॉट न बनने दें। हंसमुख गांधी इंदौर ने कहा कि तीर्थों, मंदिरों, धर्मशालाओं का रिकॉर्ड सूचीबद्ध होना चाहिए। महेंद्र पाटनी जयपुर ने कहा कि दिगंबर श्वेतांबर समाज को जोड़कर जन सहभागिता से तीर्थ क्षेत्रों की सुरक्षा की अति आवश्यकता है। एडवोकेट हेमंत सोगानी जयपुर ने कहा कि तीर्थों का प्रबंधन प्रभावशाली होना चाहिए।<br />
डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने कहा कि हमारे मंदिर, तीर्थ क्षेत्र स्थापत्य कला, मूर्तिकला, स्वाध्याय, ज्ञान, संयम एवं साधना के साथ-साथ जीवन जीने की आदर्श शैली सिखाने के महान केंद्र हैं। वेबीनार में सुमेर काले मांगीतुंगी, स्वाति जैन हैदराबाद, संजय बड़जात्या कामां, राकेश चपलमन कोटा, रजत सेठी ईसरी, सुरजीत कोलापुर पुरवेल आदि ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में रमेश जैन तिजारिया ने कहा कि समाज जैन पत्रकारों को सहयोग दें। वेबिनार में देशभर की राष्ट्रीय संस्थाओं के पदाधिकारी शामिल हुए।<br />
अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर ने किया। संचालन महासंघ की राष्ट्रीय मंत्री डॉ. प्रगति जैन इंदौर ने किया। संयोजन महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री जर्नलिस्ट मनीष शास्त्री शाहगढ एवं तकनीकी संयोजन संघस्थ मोहित जैन मोही ने किया। वेबिनार का शुभारंभ निर्वाचन अधिकारी धरणेन्द्र जैन आईएएस भोपाल ने दीप प्रज्वलन कर किया। मंगलाचरण राष्ट्रीय कवि अजय अहिंसा वाकल जबलपुर ने किया।</p>
<p>समाचार सौजन्य- राजेन्द्र जैन ,सनावद<br />
&#8212;-</p>
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