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	<title>संकल्प &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गौरैया पक्षी संरक्षण का जैन पाठशाला के छात्रों ने लिया संकल्प : तीन दिवसीय पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम जारी </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:38:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर इंटरनेशनल शाखा नौगामा द्वारा मंगलवार को जैन पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। नसिया जी के तीर्थ दर्शनार्थियों सानिध्य में यह कार्यक्रम हुआ। नौगामा से पढ़िए, यह खबर&#8230; नौगामा। महावीर इंटरनेशनल शाखा नौगामा द्वारा मंगलवार को जैन पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। नसिया जी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महावीर इंटरनेशनल शाखा नौगामा द्वारा मंगलवार को जैन पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। नसिया जी के तीर्थ दर्शनार्थियों सानिध्य में यह कार्यक्रम हुआ। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> महावीर इंटरनेशनल शाखा नौगामा द्वारा मंगलवार को जैन पाठशाला के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। नसिया जी के तीर्थ दर्शनार्थियों सानिध्य में यह कार्यक्रम हुआ। महावीर इंटरनेशनल शाखा अध्यक्ष सुरेशचंद्र गांधी, सचिव कैलाश पंचोली जैन पाठशाला के अध्यापिका मनीषा नानावटी, कुसुम लता नानावटी जयेश पंचोली शाखा के वीर सदस्य जगजी कटारा द्वारा गौरैया पक्षी आजकल प्राकृतिक आपदाओं के कारण लुप्त हो जा रहा है। इससे बचाने के लिए एवं उन्हें पर्याप्त भोजन हेतु अनाज पानी की व्यवस्थाओं का आह्वान किया। महावीर इंटरनेशनल अपेक्स कार्यालय द्वारा तीन दिवसीय पर्यावरण संरक्षण विश्व गौरैया संरक्षण आदि की जानकारी गौरैया पक्षी के विभिन्न फोटो के माध्यम से बच्चों को दी जानकारी दी एवं साथ ही इस भीषण गर्मी को देखते हुए पक्षियों के लिए अपने घरों के बाहर छतो पानी की परिंडे रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर शाखा के वीर सदस्य नरेश जैन, हंसमुख गांधी, गणेश्वरी देवी, वीर विमल पंचोली, जयंतीलाल गांधी, रमलाल जैन ने अपना सहयोग प्रदान किया।</p>
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		<title>अष्टमी पर लिए जाएंगे वर्षीतप के संकल्प : इस वर्ष 14 महीने से अधिक चलेगी तप साधना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 10:00:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी (बुधवार, 11 मार्च ) को लिए जाएंगे। यह पावन दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी (बुधवार, 11 मार्च ) को लिए जाएंगे। यह पावन दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म की तप परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले वर्षीतप के संकल्प इस वर्ष चैत्र कृष्ण अष्टमी (बुधवार, 11 मार्च ) को लिए जाएंगे। यह पावन दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के रूप में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर जैन समाज के साधु-साध्वियाँ तथा श्रावक-श्राविकाएँ वर्षीतप का संकल्प लेकर कठिन तप साधना का आरंभ करेंगे। संकल्प लेने के बाद साधक अगले वर्ष अक्षय तृतीया तक उपवास और संयम का कठोर नियम निभाते हैं। जैन समाज में वर्षीतप को सबसे कठिन और पुण्यदायी तपों में गिना जाता है। श्रद्धालु इसे केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम, त्याग और आत्मशुद्धि की महान साधना मानते हैं। इस दौरान साधक संयमित जीवन, ध्यान, स्वाध्याय और धार्मिक साधना में समय व्यतीत करते हैं।</p>
<p><strong>दो वर्षों तक चलता है तप का कठिन क्रम </strong></p>
<p>इस तप का नियम अत्यंत कठोर होता है। इसमें साधक पूरे तेरह महीने एक विशेष क्रम का पालन करते हैं—</p>
<p>एक दिन पूर्ण उपवास, दूसरे दिन आहार। यह क्रम लगातार लंबे समय तक चलता रहता है। उपवास और आहार का यह क्रम लगभग एक वर्ष से अधिक अवधि तक चलता है, जिसके कारण इसे अत्यंत कठिन तप साधना माना जाता है। साधक इस दौरान अपने दैनिक जीवन को पूरी तरह अनुशासन में ढाल लेते हैं। भोजन, व्यवहार, वाणी, विचार और आचरण—सभी में संयम का पालन किया जाता है। तप का उद्देश्य केवल शारीरिक कष्ट सहना नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, मन की स्थिरता और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करना है।</p>
<p><strong>23 प्रकार के आहारों का त्याग करेंगे साधक </strong></p>
<p>वर्षीतप का संकल्प लेने वाले साधक कई प्रकार के आहारों का त्याग करते हैं। जैन धर्म की परंपरा के अनुसार इस तप में लगभग 23 प्रकार के खाद्य पदार्थों का त्याग किया जाता है।</p>
<p><strong>इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—</strong></p>
<p>बासी भोजन, जमीकंद, बहुबीज वाले पदार्थ, अधिक मसालेदार भोजन, तामसिक आहार। इसके साथ ही साधक अनेक अन्य धार्मिक नियमों का भी पालन करते हैं-</p>
<p>रात्रि में जल ग्रहण नहीं करना, प्रतिदिन सुबह और शाम प्रतिक्रमण करना, दोनों समय गुरुवंदन करना, स्वाध्याय और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन, ध्यान और आत्मचिंतन, इस प्रकार वर्षीतप केवल उपवास की साधना नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संयम और आध्यात्मिक अनुशासन का अभ्यास है।</p>
<p><strong>दीर्घकालीन तप के प्रेरणास्रोत </strong></p>
<p>जैन समाज में कई संत और साधक वर्षीतप जैसी कठिन साधनाओं के माध्यम से समाज को प्रेरणा देते रहे हैं।</p>
<p>स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के चतुर्थ आचार्य डॉ. शिव मुनि इस वर्ष 20 अप्रैल को अपना 41वां वर्षीतप पूर्ण कर 42वें वर्षीतप में प्रवेश करेंगे। इतने लंबे समय तक निरंतर तप साधना करने वाले आचार्य श्री शिव मुनि जैन समाज के एकमात्र आचार्य हैं, जो यह तपस्या कर रहे हैं, इसके अलावा हज़ारों की संख्या में साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाएं यह तप साधना कर रहे है। उनकी तपस्या, त्याग और अनुशासन जैन समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और अनेक श्रद्धालु उनसे प्रेरित होकर तप और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।</p>
<p><strong>तेरह महीने तक नहीं मिला पारणा</strong></p>
<p>जैन परंपरा के अनुसार जब भगवान आदिनाथ ने दीक्षा ग्रहण की, तब उन्होंने संकल्प लिया कि वे गन्ने के रस से ही अपना पारणा करेंगे। उस समय किसी को इस विधि की जानकारी नहीं थी, इसलिए कोई भी उन्हें गन्ने का रस अर्पित नहीं कर सका। परिणामस्वरूप उन्हें लगभग तेरह महीने तक पारणा नहीं मिला और वे निरंतर तपस्या करते रहे। अंततः उनका पहला पारणा हस्तिनापुर में हुआ। जैन परंपरा के अनुसार राजा श्रेयांस कुमार ने उन्हें गन्ने का रस अर्पित कर उनका पारणा कराया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आज भी जैन समाज अक्षय तृतीया के दिन वर्षीतप का पारणा “इक्षुरस” से अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ करते हैं।</p>
<p><strong>अधिकमास के कारण इस वर्ष बढ़ेगी तप की अवधि</strong></p>
<p>धार्मिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अधिकमास पड़ने के कारण इस बार वर्षीतप की अवधि सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक रहेगी। इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। एक सामान्य ज्येष्ठ और एक अधिक ज्येष्ठ।</p>
<p>अधिकमास 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा। इसके कारण वर्षीतप साधकों को लगभग 14 महीनों से अधिक समय तक तप साधना करनी होगी।</p>
<p><strong>आत्मशुद्धि और संयम का महापर्व </strong></p>
<p>श्रमण डॉ पुष्पेंद्र ने बताया कि वर्षीतप जैन धर्म में केवल तपस्या नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का महापर्व माना जाता है। यह तप मनुष्य को त्याग, धैर्य, अनुशासन और आत्मसंयम का पाठ पढ़ाता है। आज के भौतिकवादी और भागदौड़ भरे जीवन में भी अनेक श्रद्धालु इस कठिन तप साधना को अपनाकर यह संदेश देते हैं कि आध्यात्मिक शक्ति, आत्मसंयम और आस्था के बल पर मनुष्य किसी भी कठिन साधना को पूर्ण कर सकता है।</p>
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		<title>बरबस नयनों में नीर भर देती याद कराती बचपन के वो हसीन पल : रक्षाबंधन पर भावपूर्ण कविता में समर्पण और प्रेम का सुंदर संदेश  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 08:48:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रक्षाबंधन भाई-बहन के असीम प्रेम और समर्पण के साथ संकल्प का त्योहार है। भाई-बहन अलग-अलग कैसे हो सकते हैं क्योंकि दो शरीर और आत्मा एक सी है। जीवन पर्यन्त यह रिश्ता बना रहता है। लाख संकट भी रिश्ते न तोड़ सकता है। इन्हीं भावानओं के साथ पढ़िए, डडूका से अजीत कोठिया की यह भावपूर्ण कविता&#8230;. [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रक्षाबंधन भाई-बहन के असीम प्रेम और समर्पण के साथ संकल्प का त्योहार है। भाई-बहन अलग-अलग कैसे हो सकते हैं क्योंकि दो शरीर और आत्मा एक सी है। जीवन पर्यन्त यह रिश्ता बना रहता है। लाख संकट भी रिश्ते न तोड़ सकता है। <span style="color: #ff0000">इन्हीं भावानओं के साथ पढ़िए, डडूका से अजीत कोठिया की यह भावपूर्ण कविता&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p>‘कविता : बंधन कच्चे धागों का&#8217;</p>
<p>एक घर, एक परिवार में जन्मे</p>
<p>एक भाई, एक बहन</p>
<p>एक साथ खेले कूदे पढ़े लिखे।</p>
<p>यौवन की दहलीज तक आते</p>
<p>राहे हो गई जुदा-जुदा।</p>
<p>बस मिल जाते हैं राखी पर</p>
<p>बरसों में एक बार,</p>
<p>पर मन के किसी कोने में</p>
<p>उठती कसक,</p>
<p>बरबस नयनों में नीर भर देती</p>
<p>याद कराती बचपन के</p>
<p>वो हसीन पल</p>
<p>जो हमने वास्तव में जिए।</p>
<p>जीवन की आपाधापी में,</p>
<p>राखी के कच्चे धागों में ही छुपा है</p>
<p>प्रेम का शाश्वत अहसास।</p>
<p>याद आती विदेश में बसी बहन,</p>
<p>परदेस में खपा भाई।</p>
<p>ये राखी ही है जो मिलाती है</p>
<p>हमें वर्चुअली ही सही,</p>
<p>कराती है अपनों और अपनेपन का अहसास!</p>
<p>राखी भर देती दूरस्थ भाई-बहनों</p>
<p>के मन में मिठास।</p>
<p>आओ आज श्रावणी पूर्णिमा पर</p>
<p>राखी की रेशमी डोरी में</p>
<p>बांध लें रिश्तों की मजबूत गांठ</p>
<p>हम कही भी रहे,</p>
<p>राखी पर तो करे भाई-बहनों</p>
<p>को याद।</p>
<p>यही भर देगी रिश्तों में नई मिठास!</p>
<p>आओ दूर रहकर भी पाए</p>
<p>राखी की डोरी में,</p>
<p>सच्चे भाई बहन प्रेम का अहसास।</p>
<p>&#8212;&#8212;&#8212;-</p>
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		<title>सार्थक ग्रुप भिंड ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया: 10 हजार पौधे लगाने का संकल्प </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Jun 2025 14:04:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गर में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत करने के लिए दिगंबर जैन सोशल गुरु सार्थक फाउंडेशन के आह्वान पर ग्रुप एवं दिवस रीजन द्वारा 10 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; भिंड। नगर में 5 जून [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गर में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत करने के लिए दिगंबर जैन सोशल गुरु सार्थक फाउंडेशन के आह्वान पर ग्रुप एवं दिवस रीजन द्वारा 10 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> नगर में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत करने के लिए दिगंबर जैन सोशल गुरु सार्थक फाउंडेशन के आह्वान पर ग्रुप एवं दिवस रीजन द्वारा 10 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया। स्नेह लता जैन ने बताया सुबह 8.30 बजे राजेंद्र पार्क में पौधरोपण कार्यक्रम किया। 5 जून से 5 जुलाई तक अनेक गतिविधियां संरक्षण जागरूकता में की जाएंगी। चित्रकला, भाषण, प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, प्रश्न-उत्तर आदि पूरे एक माह तक यह कार्यक्रम चलेगा।</p>
<p>इसी कार्यक्रम के मध्य से सार्थक ग्रुप की सदस्य द्वारा जगह-जगह पौधे लगाने का निर्णय लिया गया। 5 जून होने के कारण पांच पौधे लगाकर शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष मोती रानी जैन, मंत्री रूबी जैन, कोषाध्यक्ष रिंकी जैन, मंजू जैन, विमल जैन, ममता जैन, मीना जैन, राधा जैन सहित सभी ग्रुप के सदस्य उपस्थित रहीं।</p>
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		<title>कोठिया संयुक्त परिवार ने लिया एकजुट रहने का संकल्प: विश्व परिवार दिवस पर अनूठा और अनुकरणीय निर्णय  </title>
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		<pubDate>Thu, 15 May 2025 13:26:23 +0000</pubDate>
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<p><strong>वागड़ क्षेत्र के संयुक्त परिवारों में एक कोठिया संयुक्त परिवार ने विश्व परिवार दिवस पर विगत 65वर्षों से जारी अपने संयुक्त परिवार प्रकल्प को एक जुटता के साथ जारी रखने का संकल्प लिया। परिवार के मुखिया बदामीलाल कोठिया एवं कमला देवी कोठिया के नेतृत्व में 21 सदस्यीय यह संयुक्त परिवार विगत 7 दशकों से चार-चार पीढ़ियों के साथ अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> वागड़ क्षेत्र के संयुक्त परिवारों में एक कोठिया संयुक्त परिवार ने विश्व परिवार दिवस पर विगत 65 वर्षों से जारी अपने संयुक्त परिवार प्रकल्प को एक जुटता के साथ जारी रखने का संकल्प लिया। परिवार के मुखिया बदामीलाल कोठिया एवं कमला देवी कोठिया के नेतृत्व में 21 सदस्यीय यह संयुक्त परिवार विगत 7 दशकों से चार-चार पीढ़ियों के साथ अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। परिवार में चार पुत्र, चार बहुएं, पांच पौत्र, पांच बेटियां, दो पौत्र बहुएं, एक पोती सहित 21 व्यक्ति जब एक किचन में एक साथ भोजन करते हैं तो बाहर से आने वाले लोग समझते है कि घर पर कोई मेहमान आए हैं।</p>
<p>परिवार के मुखिया बदामीलाल कोठिया सहित परिवार में अजीत कोठिया एवं अशोक कोठिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत हैं तो राजेंद्र कोठिया शिक्षा विभाग से सेवानिवृत हुए हैं। अनिल कोठिया डाइट गढ़ी में सेवारत हैं। पौत्र अविन कैडिला फार्मा में बिजनेस मैनेजर है, तो आयुष यूनियन बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी, नमन डॉक्टर तो दिशांत कोठिया एवं बहु शुभी अमेरिका में सेवारत है। प्रतिदिन प्रातः माता पिता के चरण स्पर्श से अपनी दिनचर्या प्रारंभ करने वाले ये परिजन रोजाना पार्श्वनाथ जिनालय में भगवान का अभिषेक एवं पूजा करने जाते हैं। रात्रि में रोजाना सामूहिक रूप से भक्तामर पाठ कर परिवार एवं विश्व की सुख समृद्धि की कामना की जाती है।</p>
<p>चारों बहुएं कुसुम कोठिया, सरिता कोठिया, निशा कोठिया एवं रजनी कोठिया तथा पौत्र वधुएं हीना, शुभी तथा निशि एक दूसरे का सम्मान करते हुए मिलजुल कर सारे कार्य करती हैं, जो इस युग के एक मिसाल है पारस्परिक सदभाव, प्रेम, सम्मान एवं समर्पण की। वर्ष में दो बार सभी परिजन सम्मेद शिखरजी, कुंडलपुर, अष्टापद, पावागढ़, तारंगाजी ओर अंदेशवर पार्श्वनाथ जैसे तीर्थ क्षेत्रों की यात्राएं भी करते हैं। परिवार की पड़पोती 7 वर्षीय अहाना अविन कोठिया ऐसे बड़े परिवार से जो संस्कार पा रही है वो किसी भी मायने में किसी गुरुकुल में मिलने वाले संस्कारों से कम नहीं है।</p>
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		<title>वात्सल्य सेवा समिति ने वितरित किए परिंडे: पक्षियों को दाना-पानी रखने का दिलाया संकल्प  </title>
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		<pubDate>Wed, 14 May 2025 06:51:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वात्सल्य सेवा समिति अवधपुरी की ओर परिडे़ बांटे गए। शाहगंज स्थित मारुति एनक्लेव के लक्ष्मीनगर फेस 2 में कार्यक्रम रखा गया। पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प दिलाया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। आगरा से शुभम जैन पढ़िए, यह खबर&#8230; आगरा। वात्सल्य सेवा समिति अवधपुरी की ओर से सेवा कार्य के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वात्सल्य सेवा समिति अवधपुरी की ओर परिडे़ बांटे गए। शाहगंज स्थित मारुति एनक्लेव के लक्ष्मीनगर फेस 2 में कार्यक्रम रखा गया। पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प दिलाया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। <span style="color: #ff0000">आगरा से शुभम जैन पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> वात्सल्य सेवा समिति अवधपुरी की ओर से सेवा कार्य के तहत भीषण गर्मी से पक्षियों को राहत देने के लिए शाहगंज स्थित मारुति एनक्लेव के लक्ष्मीनगर फेस 2 में परिंडे वितरण कार्यक्रम मंगलवार को रखा गया। जिसमें वात्सल्य सेवा समिति की महिलाओं ने जरूरतमंद लोगों को परिंडे वितरित किए और सभी को दाना-पानी रखने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर वात्सल्य सेवा समिति की अध्यक्ष रश्मि जैन, रिंकी जैन, पुष्पा जैन, कविता जैन, करूणा जैन, अंजू जैन, रतिभा जैन, रागिनी जैन मानवी जैन, नांदनी जैन, समस्त वात्सल्य सेवा समिति की सदस्य उपस्थिति रहीं।</p>
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		<title>मूक जीवों के कंठों को तर करने का संकल्प: महिला क्लब की बैठक में आह्वान  </title>
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		<pubDate>Thu, 01 May 2025 08:36:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[माथुर वैश्य ग्लोबल अंबरीश महिला क्लब की बैठक में पक्षियों और पशुओं के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प लिया गया। यह सामाजिक जागरूकता और जीवदया की प्रेरणा देने वाली पहल है। बैठक में प्रस्ताव रखकर सेवा कार्य का संकल्प लिया। अंबाह से अजय जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230; अंबाह। माथुर वैश्य ग्लोबल अंबरीश महिला क्लब [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>माथुर वैश्य ग्लोबल अंबरीश महिला क्लब की बैठक में पक्षियों और पशुओं के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प लिया गया। यह सामाजिक जागरूकता और जीवदया की प्रेरणा देने वाली पहल है। बैठक में प्रस्ताव रखकर सेवा कार्य का संकल्प लिया। <span style="color: #ff0000">अंबाह से अजय जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> माथुर वैश्य ग्लोबल अंबरीश महिला क्लब की बैठक में पक्षियों और पशुओं के लिए दाना-पानी रखने का संकल्प लिया गया। यह सामाजिक जागरूकता और जीवदया की प्रेरणा देने वाली पहल है। यह निर्णय महिला क्लब की महिलाओं ने लिया है। क्लब की अध्यक्ष ममता गुप्ता के निवास स्थान पर हुई बैठक में पूजा गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा कि इस बार भीषण गर्मी में सभी सदस्याएं अपने-अपने घरों के बाहर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें। बैठक में यह भी तय किया गया कि जहां संभव हो, वहां दरवाजे के पास या छांव वाले स्थानों पर पशुओं के लिए पानी के पात्र भी रखे जाएं ताकि पशु-पक्षी इस गर्मी में राहत पा सकें।</p>
<p>बैठक में उपस्थित महिलाओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि गर्मी में जब जीव-जंतु पानी की एक बूंद को तरसते हैं, तब मानव का छोटा-सा प्रयास उनके जीवन के लिए अमूल्य बन सकता है। संवेदनशीलता, करुणा और सेवा भावना क्लब की कार्यशैली का आधार है। इस अवसर पर ममता गुप्ता चौधरी, गीता गुप्ता, अनीता गुप्ता, ज्योति गुप्ता, मधु गुप्ता, मंजू गुप्ता, मुन्नी गुप्ता, ममता अभिषेक गुप्ता, रजनी गुप्ता, सुनीता गुप्ता और सीमा गुप्ता सहित क्लब की अनेक सदस्याएं मौजूद रहीं। बैठक में क्लब ने आगे भी इसी तरह पर्यावरण और समाजसेवा से जुड़े कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। यह पहल निश्चित ही समाज को संवेदनशीलता और जीवमित्रता का संदेश देगी।</p>
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		<title>आज संकल्प करें,वन्य जीवों का संरक्षण करें : बच्चे बोले संरक्षण से ही बचेंगे जीव-जंतु  </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Mar 2025 17:13:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व वन्य जीव दिवस के अवसर पर करुणा इंटरनेशनल के तत्वावधान में करुणा क्लबों के माध्यम से बच्चों को वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए जागरूक किया गया। बच्चों ने संकल्प लिया कि वह वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आगे रहेंगे। इस अवसर पर बच्चों और पदाधिकारियों ने अपने विचार भी रखे। ललितपुर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व वन्य जीव दिवस के अवसर पर करुणा इंटरनेशनल के तत्वावधान में करुणा क्लबों के माध्यम से बच्चों को वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए जागरूक किया गया। बच्चों ने संकल्प लिया कि वह वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आगे रहेंगे। इस अवसर पर बच्चों और पदाधिकारियों ने अपने विचार भी रखे। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च को मनाया जाता है। इसका मकसद वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से साल 2013 में इसकी शुरुआत की गई थी। तब से हर साल मनाया जा रहा है। वन्यजीव सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं हैं,बल्कि हमारे जीवन के लिए भी अनमोल हैं। विश्व वन्य जीव दिवस के अवसर पर करुणा इंटरनेशनल के तत्वावधान में करुणा क्लबों के माध्यम से बच्चों को वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए जागरूक किया गया।बच्चों ने संकल्प लिया कि वह वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आगे रहेंगे।</p>
<p><strong>वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता जरूरी</strong></p>
<p>करुणा केंद्र के अध्यक्ष अक्षय अलया और संयोजक पुष्पेंद्र जैन ने बताया कि विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को पृथ्वी पर मौजूद वन्य जीवों और वनस्पतियों की सुंदरता और विविधता के महत्व की जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है। विश्व वन्यजीव दिवस का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में जागरूकता, सहयोग और समन्वय स्थापित करना है। साथ ही यह दिन वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण से पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को मिलने वाले लाभ के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी मनाया जाता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75787" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034.jpg" alt="" width="1517" height="1599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034.jpg 1517w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034-285x300.jpg 285w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034-971x1024.jpg 971w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034-768x810.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034-1457x1536.jpg 1457w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034-990x1044.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250303-WA0034-1320x1391.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1517px) 100vw, 1517px" /> वन्य जीवों के संरक्षण का दिन: राधाचरण</strong></p>
<p>करुणा क्लब के सदस्य राधाचरण झा का कहना है कि विश्व वन्य जीव दिवस वन्यजीवों के खिलाफ होने वाले अपराध और मानव द्वारा उत्पन्न विभिन्न व्यापक आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों के कारण प्रजातियों की घटती कमी के खिलाफ लड़ने की जरुरत की याद दिलाता है। यह दिन जीव-जंतुओं को याद करने का दिन है। वन्यजीवों को याद करके उनके संरक्षण के लिए हमें आगे आना होगा। तभी जीव जंतुओं का संरक्षण होगा।</p>
<p><strong>वर्तमान में वन्य जीवों का संरक्षण जरूरी: रौनक</strong></p>
<p>छात्रा रौनक का कहना कि प्रकृति मानव जीवन का आधार है। मनुष्य सभ्यता के विकास से ही प्रकृति पर निर्भर है और प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करता है।मानव ने प्राकृतिक संसाधनों और जीव-जंतुओं का शिकार इस हद तक किया गया कि वह विलुप्त होने की कगार पर है और कुछ तो विलुप्त भी हो गए। जीव-जंतुओं की सुरक्षा करेंगे। तभी उनका संरक्षण होगा।</p>
<p><strong> जागरूकता से ही बचेंगे जीव-जंतु: नित्या</strong></p>
<p>नित्या चौरसिया का कहना है कि प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे प्रकृति में नकारात्मक बदलाव हो रहा है और ग्लोबल वार्मिंग जैसे भयावह परिणाम देखने को मिल रहे हैं। वन्य प्राणियों की सैकड़ों प्रजातियाँ आज लुप्त होने की कगार में हैं। ऐसी परिस्थिति में प्रकृति और वन्य जीव जंतुओं की रक्षा के लिए विश्व वन्यजीव दिवस मनाना बहुत जरूरी हो जाता है। जिससे पूरी दुनियां को प्रकृति और वन्य जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके।</p>
<p><strong> मूक प्राणियों का करें संरक्षण: देवांश </strong></p>
<p>देवांश जैन का कहना है कि पर्यावरण के बदलते हुए परिणामों के कारण वातावरण पर भी प्रभाव पड रहा है। गर्मी के मौसम में मनुष्य को स्वयं की सुरक्षा के साथ-साथ पशु-पक्षियों की सुरक्षा करनी चाहिए। हमें मूक प्राणियों को सहारा देकर उनका संरक्षण करना चाहिए।</p>
<p><strong>वन्य जीवों का करें संरक्षण: महिमा</strong></p>
<p>करुणा क्लब की सदस्य छात्रा महिमा का कहना है कि इंसानों की आबादी बढ़ने के साथ ही जंगल कम हुए हैं। पर्यावरण भी बदल रहा है। बदलते पर्यावरण के कारण वन्यजीव विलुप्त होने की कगार पर हैं। अगर इन्हें अभी नहीं बचाया गया तो वे इस धरती से खत्म हो जाएंगे। इसके चलते आम लोगों के बीच जंगल और इसमें रहने वाले जानवरों को लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है। विश्व वन्यजीव दिवस के दिन यह काम पूरी दुनिया में किया जाता है।</p>
<p><strong> संस्था बच्चों को दे रही संरक्षण का संदेश: पुष्पेंद्र </strong></p>
<p>करुणा इंटरनेशनल ललितपुर के संयोजक पुष्पेंद्र जैन बताते हैं कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड चेन्नई से मान्य संस्था करुणा इंटरनेशनल पिछले 30 वर्षों से विद्यालयी बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जीव-जंतुओं के संरक्षण का भी संदेश दे रही है। करुणा इंटरनेशनल के प्रशिक्षण संबंधी पाठ्यक्रम में जीव-जंतुओं के संरक्षण को भी शामिल किया गया है।</p>
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		<title>महावीर महिला संघ द्वारा ‘रिश्तों का बंधन‘ थीम कार्यक्रम सम्पन्नः मनीषा गुगलिया के नेतृत्व मे सफल आयोजन हुआ  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 09:42:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर महिला संघ की अध्यक्ष के तत्वावधान में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रिश्तों की महत्ता को समझना और समाज में प्रेम, एकता और सौहार्द को बढ़ावा देना था। रील्स और परफॉर्मेंस हर जोड़ी ने अपने रिश्ते की खासियत को खूबसूरत रील्स और प्रस्तुतियों के जरिए साझा किया। पढ़िए इंदौर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महावीर महिला संघ की अध्यक्ष के तत्वावधान में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रिश्तों की महत्ता को समझना और समाज में प्रेम, एकता और सौहार्द को बढ़ावा देना था। रील्स और परफॉर्मेंस हर जोड़ी ने अपने रिश्ते की खासियत को खूबसूरत रील्स और प्रस्तुतियों के जरिए साझा किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से प्रदीप जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> महावीर महिला संघ की अध्यक्ष मनीषा गुगलिया के तत्वावधान में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रिश्तों की महत्ता को समझना और समाज में प्रेम, एकता और सौहार्द को बढ़ावा देना था। संघ की सभी महिलाओं ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>
<p><strong>विभिन्न रिश्तों की विशेषताओं की प्रस्तुति</strong></p>
<p>इस आयोजन में सभी सदस्याओं ने जोड़ी बनाकर विभिन्न रिश्तों की विशेषता को प्रस्तुत किया। जैसे सास-बहू, देवरानी-जेठानी, दोस्त, माँ-बेटी! कार्यक्रम की विशेष ड्रेस कोड थीम सभी बोर्ड मेंबर्स और सदस्याएँ पारंपरिक अंदाज में शामिल हुईं। रील्स और परफॉर्मेंस हर जोड़ी ने अपने रिश्ते की खासियत को खूबसूरत रील्स और प्रस्तुतियों के जरिए साझा किया।</p>
<p><strong>ऑडियंस जजमेंट से कार्यक्रम में मदद मिली </strong></p>
<p>ऑडियंस जजमेंट कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों को अपने पसंदीदा प्रस्तुतियों को लाइक करने का अवसर दिया गया, जिससे सबसे प्रभावशाली जोड़ियों को पहचानने में मदद मिली। जजमेंट इस पूरे आयोजन में सुधा लुणावत और रचना बागरेचा ने निष्पक्ष और बेहतरीन तरीके से सभी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।</p>
<p><strong>संयोजकों की मेहनत को सराहना मिली</strong></p>
<p>इस सफल आयोजन के लिए सभी संयोजकों मनीषा गुगलिया, सुदिता मूणत, टीना ललवानी, रिन्नी बडेरा और स्वीटी चेलावत की कड़ी मेहनत को खूब सराहा गया। उन्होंने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और शानदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष तौर पर रेणु भंडारी, कोमल, शिल्पा, हेमा, प्रीति कोठारी, रीता संघवी, रीता मूथा, प्रीति श्रीमाल और श्वेता सबका पूर्ण सहयोग रहा।</p>
<p><strong>विजेताओं की घोषणा </strong></p>
<p>विजेताओं के नाम इस प्रकार हैं-प्रथम श्वेता बाफ़ना, द्वितीय विजेता सोनू धाड़ीवाल, रानी भंसाली, रिल्स में विजेता- प्रथम पुखराज व अंशु पोरवाल, द्वितीय निकिता एंड डिंपल और सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार दिये गए।</p>
<p><strong>सदस्यों ने यह संकल्प लिया </strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने रिश्तों को प्रेम, सम्मान और विश्वास के साथ निभाएंगे और समाज में एकता व सौहार्द का संदेश फैलाएंगे। महावीर महिला संघ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अध्यक्ष मनीषा गुगलिया के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और सभी के दिलों में एक विशेष स्थान बना गया।</p>
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		<title>श्री विद्या सागरजी के प्रथम समाधि दिवस के उपलक्ष्य में संकल्पः क्राउन परिवार का श्री जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प  </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Feb 2025 15:17:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रसंत विद्या सागरजी महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर 1008 श्री नेमीनाथ भगवान जिनालय द्वारा जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प का गठन किया गया हैं। जिसके अंतर्गत पूज्यनीय माताश्री जिनवाणी एवं धर्मग्रंथों का संरक्षण किया जाएगा। इसी भावना के साथ क्राउन परिवार ने ‘श्री जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प‘ का शुभ संकल्प लिया है। पढ़िए इंदौर से प्रवीण सोनल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राष्ट्रसंत विद्या सागरजी महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर 1008 श्री नेमीनाथ भगवान जिनालय द्वारा जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प का गठन किया गया हैं। जिसके अंतर्गत पूज्यनीय माताश्री जिनवाणी एवं धर्मग्रंथों का संरक्षण किया जाएगा। इसी भावना के साथ क्राउन परिवार ने ‘श्री जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प‘ का शुभ संकल्प लिया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से प्रवीण सोनल जैन पहाड़िया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> 1008 श्री नेमीनाथ भगवान जिनालय, नेमीनगर (जैन कॉलोनी), इंदौर के द्वारा जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प का गठन किया गया हैं। जिसके अंतर्गत पूज्यनीय माताश्री जिनवाणी एवं धर्मग्रंथों का संरक्षण करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए साथ क्राउन परिवार ने ‘श्री जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प‘ का संकल्प लिया है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74055" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250207-WA0048-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />जिनवाणी व धार्मिक ग्रंथों का यथोचित संरक्षण करें</strong></p>
<p>जब भी हम जिनालय में प्रभु दर्शन करने जाते हैं, कई बार यह देखकर मन व्यथित हो जाता है कि प्रभु की दिव्य वाणी हमारी पूज्यनीय माताश्री जिनवाणी एवं हमारे धर्म ग्रंथों के पृष्ठ फटे हुए होते हैं। जिल्द खुल चुकी होती है और कभी-कभी तो ग्रंथों के बीच में चावल या धूल जमा हो जाती हैं। जिससे छोटे जीव उत्पन्न होने की संभावना रहती है। एक श्रद्धालु श्रावक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम माता जिनवाणी और हमारे धार्मिक ग्रंथों का यथोचित संरक्षण, देखभाल और सम्मानपूर्वक सेवा करें।</p>
<p><strong>महिला सदस्यों को दी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>इसी भावना के साथ क्राउन परिवार ने आचार्य भगवन् 108 श्री विद्या सागरजी महाराज के प्रथम समाधि दिवस के उपलक्ष्य में क्राउन परिवार ने ‘श्री जिनवाणी संरक्षण प्रकल्प‘ का शुभ संकल्प लिया है। इस प्रकल्प के अंतर्गत ग्रुप की महिला सदस्यों के द्वारा नियमित अंतराल से, किसी एक जिनालय में जाकर माता जिनवाणी की सेवा की जाएगी। इसमें जिनवाणी और धर्म ग्रंथों को सुरक्षित रखने हेतु अच्छे कवर, स्टीकर, प्लास्टिक शीट आदि लगाना। खुली जिल्द को व्यवस्थित करना और फटे पन्नों को ठीक करना। जिनवाणी माता की सफाई एवं साज-सज्जा कर पुनः श्रद्धापूर्वक विराजमान करना मंदिरजी में नवीन जिनवाणी, पलासने एवं एक नियम बॉक्स भी रखेंगे।</p>
<p><strong>श्री जिनवाणी संरक्षण कीट </strong></p>
<p>क्राउन परिवार ने विशेष रूप से ‘श्री जिनवाणी संरक्षण कीट‘ तैयार की है, जिसमें जिनवाणी और अन्य धार्मिक ग्रंथों को सहेजने के लिए आवश्यक कैंची, टेप, कवर, टेप डिस्पेंसर, स्टेपलर, फेविकोल, स्टीकर, स्टेपल पिन पैकेट आदि सामग्री शामिल हैं। यह कीट जिनालय में ही उचित स्थान पर रखी जाएगी, जिससे अन्य स्थानीय श्रद्धालु भी माता जिनवाणी के संरक्षण में अपना योगदान दे सकेंगे।</p>
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