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	<title>श्रेयांसगिरि &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>श्रेयांसगिरि &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गणाचार्यश्री के शिष्य देश में जगह जगह कर रहे धर्म प्रभावना : श्रेयांसगिरि मे 6 दीक्षार्थियों को गणाचार्य श्री विरागसागर ने दिया दीक्षा का आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Sun, 06 Aug 2023 13:12:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रेयांसगिरि में चातुर्मासरत गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी व भैया को दीक्षा की स्वीकृति देकर आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी ब्र. भैया व बहिनों की गोद भराई संपन्न हुई। पढ़िए राजेश रागी / रत्नेश जैन की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रेयांसगिरि में चातुर्मासरत गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी व भैया को दीक्षा की स्वीकृति देकर आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी ब्र. भैया व बहिनों की गोद भराई संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश रागी / रत्नेश जैन की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पन्ना।</strong> जिले के सलेहा के समीपवर्ती अतिप्राचीन जैन तीर्थ श्रेयांसगिरि में चातुर्मासरत गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी व भैया को दीक्षा की स्वीकृति देकर आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी ब्र. भैया व बहिनों की गोद भराई संपन्न हुई। ये दीक्षार्थी देश के विभिन्न नगरों के निवासी हैं।</p>
<p>सभी दीक्षार्थी संसार से विरक्ति धारण कर जल्द ही आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के कर कमलों से दीक्षा धारण कर कठिन व्रतों का पालन कर कर्मों की निर्जरा करेंगे। पूज्य गणाचार्य श्री के दर्शन कर सभी दीक्षार्थी गद्गद् थे, सभी ने गुरु महिमा बतलाते हुए कहा कि हम धन्य हैं कि हमें पूज्य गणाचार्यश्री जैसे गुरु प्राप्त हुए हैं और गुरु चरणों में यही भावना भाते हैं कि हम भी आपके पद चिह्नों पर चलकर एक दिन मोक्ष को प्राप्त करें।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-50360" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015.jpg" alt="" width="1070" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015.jpg 1070w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-251x300.jpg 251w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-856x1024.jpg 856w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-768x919.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0015-990x1184.jpg 990w" sizes="(max-width: 1070px) 100vw, 1070px" /></p>
<p><strong>350 से अधिक शिष्य देश में कर रहे धर्म प्रभावना </strong></p>
<p>श्रेयांसगिरि मे चातुर्मास कर रहे बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य, उपसर्ग विजेता, राष्ट्रसंत, भारत गौरव गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के लगभग 350 सुयोग्य शिष्य देश के 11 प्रांतों के 80 स्थानों पर उप संघ धर्म प्रभावना कर रहे हैं। भरत सेठ ने बताया कि पूज्य गणाचार्यश्री द्वारा 9 आचार्य, 7 उपाध्याय, 1 स्थविर, 1 गणधर, 1 प्रवर्तक, 123 मुनि, 5 गणिनी आर्यिका, 90 आर्यिका, 21 क्षुल्लक, 44 क्षुल्लिका सहित लगभग 350 दीक्षित साधु-साध्वी संपूर्ण देश के 80 स्थानों मे मध्य प्रदेश में 36, उत्तर प्रदेश में 8, दिल्ली में 3, झारखंड में 7, महाराष्ट्र में 4, गुजरात में 2, राजस्थान में 10, हरियाणा में 2, बंगाल में 1, बिहार में 3, असम में एक स्थान पर चातुर्मास कर आत्म व जन कल्याण के साथ धर्म प्रभावना रहे हैं। पूज्य गणाचार्यश्री अभी तक 140 मुनि व आर्यिकाओं को समाधि करा चुके है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-50362" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016.jpg" alt="" width="1080" height="590" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-300x164.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-1024x559.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-768x420.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/08/IMG-20230806-WA0016-990x541.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p><strong>दीक्षा के लिए निवेदन</strong></p>
<p>छिंदवाड़ा से आए श्रमणाचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज के संघस्थ 6 ब्रह्मचारिणी दीदी एवं भैया जी ने पूज्य गणाचार्य श्री के चरण वंदना कर दीक्षा की स्वीकृति के लिए निवेदन किया गया। ज्ञातव्य है कि छह भैया-बहनों की दीक्षा की भावना देखते हुए गणाचार्य श्री ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान कर मंगल आशीर्वाद दिया। इसी पावन अवसर पर सभी दीक्षार्थी भैया, बहनों की गोद भराई संपन्न हुई, ये दीक्षार्थी देशभर के विभिन्न नगरों के निवासी थे। सभी दीक्षार्थी संसार से विरक्ति धारण कर जल्द ही आचार्य विवो सागर जी के कर कमलों से दीक्षा धारण कर कठिन व्रतों का पालन कर कर्मों की निर्जरा करेंगे।पूज्य गणाचार्य श्री के दर्शन कर सभी दीक्षार्थी गण गदगद थे, सभी ने गुरु महिमा बतलाते हुए कहा कि हम धन्य हैं कि हमें पूज्य गणाचार्य श्री जैसे गुरुणाम् गुरु प्राप्त हुये और गुरु चरणों में यही भावना भाते हैं कि हम भी आपके पद चिह्नों पर चलकर एक दिन मोक्ष को प्राप्त करें।</p>
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		<title>गणाचार्य श्री विराग सागर जी गुरुदेव से ली थी दीक्षा : श्रेयांसगिरि में आर्यिका विचारश्री माताजी का हुआ संल्लेखना समाधि महोत्सव </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Jul 2023 08:03:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बीते 21 जुलाई को देवेंद्रनगर निवासी ब्रह्मचारिणी कुसुम जी की आर्यिका दीक्षा सुबह 10:00 बजे संपन्न हुई एवं दोपहर 1:45 पर समाधि मरण हो गया। इसके बाद शाम 5:30 पर गाजे-बाजे के साथ धूमधाम भक्ति भाव जयकारों के साथ अंतिम दर्शन पश्चात समाधि महोत्सव हजारों जैन-जैनेत्तर धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। पढ़िए राजेश रागी/ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बीते 21 जुलाई को देवेंद्रनगर निवासी ब्रह्मचारिणी कुसुम जी की आर्यिका दीक्षा सुबह 10:00 बजे संपन्न हुई एवं दोपहर 1:45 पर समाधि मरण हो गया। इसके बाद शाम 5:30 पर गाजे-बाजे के साथ धूमधाम भक्ति भाव जयकारों के साथ अंतिम दर्शन पश्चात समाधि महोत्सव हजारों जैन-जैनेत्तर धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश रागी/ भरत सेठ की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पन्ना।</strong> जिले सलेहा के समीपवर्ती अतिप्राचीन दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र श्रेयांसगिरि पर चातुर्मासरत राष्ट्रसंत, भारत गौरव गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज विशाल संघ सहित विराजमान है। मीडिया समिति के भरत सेठ ने बताया कि पिछले सप्ताह सागर निवासी ब्रह्मचारिणी क्रांति जी की दीक्षा उपरांत समाधि महोत्सव संपन्न हुआ।</p>
<p>बीते 21 जुलाई को देवेंद्रनगर निवासी ब्रह्मचारिणी कुसुम जी की आर्यिका दीक्षा सुबह 10:00 बजे संपन्न हुई एवं दोपहर 1:45 पर समाधि मरण हो गया। इसके बाद शाम 5:30 पर गाजे-बाजे के साथ धूमधाम भक्ति भाव जयकारों के साथ अंतिम दर्शन पश्चात समाधि महोत्सव हजारों जैन-जैनेत्तर धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>जीवन भर शुद्ध आचार विचार का ध्यान</strong></p>
<p>यूं तो संसार में प्रतिक्षण अनेकों प्राणियों का जन्म मरण होता रहता है लेकिन उस मरण को समाधि मरण महोत्सव बनाने वाले विरले ही पुण्यवान होते हैं। अनेक संतों ने अपने साधनामय जीवन को समाधि मरण करके सफल किया है। जीवन भर किए गए अन्य कार्यों की सफलता तभी मानी जाती है, जब अंत समय व्रत संयम का पालन करते हुए गुरु चरणों में भगवान के नाम स्मरण के साथ समाधि मरण करने का अवसर प्राप्त हो। ऐसी ही थीं कुसुम बाई, जिनका जन्म पन्ना में हुआ तथा देवेंद्रनगर की निवासी थीं। आपकी उम्र 87 वर्ष की थी। आप अत्यंत धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। आपके पति स्वर्गीय श्री राजकुमार जी थे। आप के 2 पुत्र जिनेंद्र, सुशील एवं दो पुत्रियां उषा, रानी हैं। आपने बचपन से ही आलू प्याज आदि का स्पर्श भी नहीं किया।</p>
<p>इसके साथ ही बच्चों की शादी के बाद कभी किसी को रात्रि भोजन तक नहीं दिया। आपका सदैव प्रातः 11:00 बजे तक अन्य जल का त्याग रहता था। साधु-संतों के आहार उपरांत ही भोजन किया करती थीं तथा नगर में साधु-संतों के आ जाने पर बड़ी श्रद्धा भक्ति के साथ चौका लगाने व आहार देने में अत्यधिक रुचि रहती थी। लगभग 50 वर्षों से आप शुद्ध भोजन पानी तथा 2 वर्ष से एकासन के नियम में दृढ़ थीं। इसके साथ ही अष्टमी, चतुर्दशी एकासन अनंत चौदस आजीवन मौन पूर्वक उपवास तथा अपने जीवन काल में 1500 उपवास और 3000 एकासन की साधना में संलग्न थीं, लगभग 15 दिनों से आपने पूज्य गुरुदेव गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के चरणों में दीक्षा लेने की पवित्र भावना की थी।</p>
<p>आपको 18 जुलाई मंगलवार को पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी गुरुदेव द्वारा सप्तम प्रतिमा के व्रत दिए गए, 21 जुलाई प्रातः काल 9:45 पर क्षुल्लिका दीक्षा एवं 11:30 पर आर्यिका दीक्षा के व्रत प्रदान किए गए और आपका नाम रखा गया श्रमणी आयिका विचार श्री माताजी क्योंकि उन्होंने जीवन भर शुद्ध आचार विचार का ध्यान रखा है।</p>
<p>अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि तीर्थ पर परम पूज्य गणाचार्य गुरुदेव के कुशल नेतृत्व मे मंत्रोच्चारण के साथ सिद्ध परमात्मा का स्मरण करते हुए चतुर्विद संघ के समक्ष चारों प्रकार के आहार का त्याग पूर्वक यम संल्लेखना सहित 1:45 पर अंतिम स्वास छोड़ी और अपनी मृत्यु को समाधि महोत्सव बना लिया. बड़ी क्षमता के साथ माताजी ने नश्वर देह का विसर्जन कर स्वर्ग की ओर प्रयाण किया। समाधि की खबर लगते ही अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में जैन जैनेत्तर धर्मावलंबियों का तांता लगा रहा, वहीं मृत्यु महोत्सव में सम्मिलित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।</p>
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		<title>अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में हुई संल्लेखना :  आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की हुआ समाधिमरण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Jul 2023 11:16:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में परम पूज्य भारत गौरव, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ (30 साधु) के पावन सानिध्य में आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की संल्लेखना समाधि हुई। पढ़िये राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; श्रेयांसगिरि (पन्ना)। सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में परम पूज्य भारत गौरव, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ (30 साधु) के पावन सानिध्य में आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की संल्लेखना समाधि हुई। <span style="color: #ff0000;">पढ़िये राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रेयांसगिरि (पन्ना)।</strong> सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में परम पूज्य भारत गौरव, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ (30 साधु) के पावन सानिध्य में आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की संल्लेखना समाधि हुई। ज्ञातव्य है कि सागर निवासी ब्रह्मचारिणी क्रांति जैन का स्वास्थ्य विगत ढाई महिने से खराब चल रहा था।</p>
<p><strong>अर्पित किया था श्रीफल</strong></p>
<p>भरत सेठ ने बताया कि बीते 9 जुलाई को ब्र. क्रांति जैन ने अपने परिवार के साथ संल्लेखना समाधि हेतु पूज्य गणाचार्यश्री से निवेदन कर श्रीफल अर्पित किया था। पूज्य गणाचार्यश्री ने स्थिति गंभीर देखते हुए ब्र. क्रांति जी को 10 जुलाई को क्षुल्लिका दीक्षा देकर विमोहिताश्री माताजी का नामकरण किया था। 14 जुलाई को समस्त समाज के मध्य उनकी आर्यिका दीक्षा संपन्न हुई थी। पूज्य गणाचार्यश्री अपने संघ के साथ माताजी की सेवा संबोधन, वैयावृत्ति मे संलग्न थे। साथ ही श्रेयांसगिरि अंचल का जैन समाज माताजी को पाठ आदि सुनाने में तत्पर था।</p>
<p><strong>माताजी की अद्भुत त्याग तपस्या</strong></p>
<p>पारिवारिक जनों ने बताया कि माताजी ने अपना पूरा जीवन संयम साधना में बिताया। उन्होंने लगभग 4000 एकासन उपवास अपने किए तथा भगवान की भक्ति में सतत तत्पर रहकर लगभग 20 हजार श्रीफल द्वारा प्रभु की महाअर्चना कर चुकी हैं।</p>
<p><strong>गुरु के लिए समर्पित संपूर्ण जीवन</strong></p>
<p>माताजी ने गृहस्थ में रहकर 21 वर्ष पूर्व पूज्य गणाचार्यश्री से सागर में 2 प्रतिमा के व्रत ग्रहण किए तथा 2 माह पूर्व बड़ा मलहरा में सात प्रतिमा के व्रत ग्रहण कर पूज्य गुरुवर के चरणों में समाधि करने की भावना व्यक्त की, तदनुसार श्रेयांसगिरि मे आकर आपने गुरु चरणों में घर का त्याग कर आचार्य संघ में प्रवेश लिया। 10 जुलाई को दीक्षा लेकर माताजी ने केवल 3 दिन आहार ग्रहण किया, जिसमें मात्र जल, दूध ही आहार में लिया लेकिन ऐसी अवस्था में भी इतनी सहजता देख स्वयं पूज्य गणाचार्यश्री ने कहा था कि विमोहिता श्री माताजी समता की प्रतिमूर्ति हैं।</p>
<p><strong>अन्न जल का आजीवन किया त्याग</strong></p>
<p>14 जुलाई को माताजी ने स्वेच्छा से गुरुचरण सानिध्य में अन्न जल का त्याग किया, तब से वह प्रभु भक्ति एवं आत्म ध्यान में तल्लीन होकर समाधि साधना में रत थी। समाधि होने की सूचना मिलते ही दूर-दूर से बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों का आवागमन जारी है।</p>
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		<title>माताजी की सेवा संबोधन, वैयावृत्ति मे संलग्न है समाज : समता की प्रतिमूर्ति हैं संल्लेखनारत आर्यिका विमोहिताश्री माताजी </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Jul 2023 17:21:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में विगत 7 दिनों से परम पूज्य भारत गौरव, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ (30 साधु) के पावन सानिध्य में आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की संल्लेखना समाधि चल रही है। पढ़िये राजेश जैन रागी/रत्नेश जैन की रिपोर्ट&#8230;  श्रेयांसगिरि (पन्ना)। सलेहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में विगत 7 दिनों से परम पूज्य भारत गौरव, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ (30 साधु) के पावन सानिध्य में आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की संल्लेखना समाधि चल रही है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िये राजेश जैन रागी/रत्नेश जैन की रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्रेयांसगिरि (पन्ना)।</strong> सलेहा के समीपवर्ती बुंदेलखंड के सुविख्यात प्राचीन दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांसगिरि में विगत 7 दिनों से परम पूज्य भारत गौरव, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज ससंघ (30 साधु) के पावन सानिध्य में आर्यिका विमोहिताश्री माताजी की संल्लेखना समाधि चल रही है। ज्ञातव्य है कि सागर निवासी ब्रह्मचारिणी क्रांति जैन का स्वास्थ्य विगत ढाई महिने से खराब चल रहा है।</p>
<p><strong>अर्पित किया था श्रीफल</strong></p>
<p>भरत सेठ ने बताया कि बीते 9 जुलाई को ब्र. क्रांति जैन ने अपने परिवार के साथ संल्लेखना समाधि हेतु पूज्य गणाचार्यश्री से निवेदन कर श्रीफल अर्पित किया। पूज्य गणाचार्यश्री ने स्थिति गंभीर देखते हुए ब्र. क्रांति जी को 10 जुलाई को क्षुल्लिका दीक्षा देकर विमोहिताश्री माताजी का नामकरण किया। 14 जुलाई को समस्त समाज के मध्य उनकी आर्यिका दीक्षा संपन्न हुई। वर्तमान में पूज्य गणाचार्यश्री अपने संघ के साथ माताजी की सेवा संबोधन, वैयावृत्ति मे संलग्न हैं। साथ ही श्रेयांसगिरि अंचल का जैन समाज माताजी को पाठ आदि सुनाने में तत्पर है।</p>
<p><strong>माताजी की अद्भुत त्याग तपस्या</strong></p>
<p>पारिवारिक जनों ने बताया कि माताजी ने अपना पूरा जीवन संयम साधना मे बिताया। उन्होंने लगभग 4000 एकासन उपवास अपने किए तथा भगवान की भक्ति में सतत तत्पर रहकर लगभग 20 हजार श्रीफल द्वारा प्रभु की महाअर्चना कर चुकी हैं।</p>
<p><strong>गुरु के लिए समर्पित संपूर्ण जी</strong></p>
<p>माताजी ने गृहस्थ में रहकर 21 वर्ष पूर्व पूज्य गणाचार्यश्री से सागर में 2 प्रतिमा के व्रत ग्रहण किए तथा 2 माह पूर्व बड़ा मलहरा में सात प्रतिमा के व्रत ग्रहण कर पूज्य गुरुवर के चरणों में समाधि करने की भावना व्यक्त की, तदनुसार श्रेयांसगिरि मे आकर आपने गुरु चरणों में घर का त्याग कर आचार्य संघ में प्रवेश लिया। 10 जुलाई को दीक्षा लेकर माताजी ने केवल 3 दिन आहार ग्रहण किया, जिसमें मात्र जल, दूध ही आहार में लिया लेकिन ऐसी अवस्था में भी इतनी सहजता देख स्वयं पूज्य गणाचार्यश्री ने कहा कि विमोहिता श्री माताजी समता की प्रतिमूर्ति हैं।</p>
<p><strong>अन्न जल का आजीवन किया त्याग</strong></p>
<p>14 जुलाई को माताजी ने स्वेच्छा से गुरुचरण सानिध्य में अन्न जल का त्याग किया, अब वह प्रभु भक्ति एवं आत्म ध्यान में तल्लीन होकर समाधि साधना में रत हैं। समाधि लेने की सूचना मिलते ही दूर-दूर से बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों का आवागमन जारी है, सभी पूज्य गुरुवर एवं पूज्य माताजी के दर्शन कर पुण्यार्जन कर रहे हैं।</p>
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